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JEE MAINS Maths Archive

Addition Theorem of Probability

1.प्रायिकता का योग प्रमेय (Addition Theorem of Probability),पूर्ण प्रायिकता का प्रमेय (Theorem of Total Probability): प्रायिकता का योग प्रमेय या पूर्ण प्रायिकता का प्रमेय (Addition Theorem of Probability or Theorem of Total Probability):(1.)जब घटनाएं परस्पर अपवर्जी हों:प्रमेय (Theorem):1.दो परस्पर अपवर्जी घटनाओं में से किसी एक के घटित होने की प्रायिकता दोनों घटनाओं के घटित होने

Multiplication Theorem on Probability

1.प्रायिकता का गुणन नियम (Multiplication Theorem on Probability): प्रायिकता का गुणन नियम (Multiplication Theorem on Probability):माना एक प्रतिदर्श समष्टि S की दो घटनाएँ A तथा B हैं।तब समुच्चय घटनाओं A तथा B के युगपत घटित होने को प्रदर्शित करता है।घटना को AB से निरूपित किया जाता है।हम जानते हैं कि घटना A की सप्रतिबन्ध प्रायिकता

Probability Definition

1.प्रायिकता की परिभाषा (Probability Definition): प्रायिकता की परिभाषा (Probability Definition):प्रायिकता की चिरप्रतिष्ठित परिभाषा (Classical Definition of Probability):यदि किसी अभिप्रयोग के कुल n परिणाम समप्रायिक,परस्पर अपवर्जी एवम् नि:श्शेष हों और उनमें से m परिणाम किसी विशेष घटना A के अनूकूल हों तो A की प्रायिकता अनुपात द्वारा परिभाषित की जाती है जिसे संकेत P(A) से व्यक्त

Probability Class 10

1.प्रायिकता कक्षा 10 (Probability Class 10): प्रायिकता कक्षा 10 (Probability Class 10) परिभाषा:जब किसी घटना के घटित होने की संभावना संख्यात्मक रूप में व्यक्त की जाती है तो उसे प्रायिकता कहते हैं।प्रायोगिक या आनुभविक प्रायिकता (Experimental or Empirical Probability):जिस प्रायिकता का मापन वास्तविक प्रयोगों के परिणामों तथा घटनाओं के घटित होने की पर्याप्त रिकॉर्डिंग (Recording)

Conditional Probability

1.सप्रतिबन्ध प्रायिकता (Conditional Probability),सप्रतिबन्ध प्रायिकता सूत्र (Conditional Probability Formula): सप्रतिबन्ध प्रायिकता (Conditional Probability) का अध्ययन करने से पूर्व समसंभाव्य परिणामों की अवस्था में प्रायिकता के अभिगृहीत दृष्टिकोण तथा चिरसम्मत सिद्धान्त का अध्ययन करना आवश्यक है।इस आर्टिकल में किसी घटना की सप्रतिबन्ध प्रायिकता (जब एक घटना घटित हो चुकी हो तथा दूसरी घटित हो रही हो)

Probability

1.प्रायिकता (Probability),प्रायिकता का अर्थ (Probability Meaning): प्रायिकता (Probability) के सिद्धान्त की उत्पत्ति 17वीं शताब्दी में यूरोप में हुई।वहाँ के उद्योगपतियों एवं व्यापारियों ने उनसे सम्बन्धित व्यवसाय के परिणामों के पूर्वानुमान करने के प्रयास किए जिससे अधिक से अधिक लाभ हो सके।इन लोगों ने अपनी समस्याओं को तत्कालीन गणितज्ञों गैलीलियो,पास्कल,फर्मा कारडेनो आदि के सामने रखा।गणितज्ञों ने

Basic Properties of Definite Integrals

1.निश्चित समाकलों के मूल गुणधर्म का परिचय (Introduction to Basic Properties of Definite Integrals),निश्चित समाकलों के गुणधर्म (Properties of Definite Integrals): निश्चित समाकलों के मूल गुणधर्म (Basic Properties of Definite Integrals):समाकलन की प्रक्रिया को अवकलन की प्रतिलोम प्रक्रिया के रूप में समझा जाता है।वास्तव में समाकलन गणित की खोज तल क्षेत्रों के क्षेत्रफल ज्ञात करने

Trigonometrical Equations

1.त्रिकोणमितीय समीकरण (Trigonometrical Equations):- त्रिकोणमितीय समीकरण (Trigonometrical Equations):एक ऐसा समीकरण जो एक या एक से अधिक अज्ञात कोण या कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपातों से सम्बन्धित हो त्रिकोणमितीय समीकरण कहलाता है।जैसे: त्रिकोणमितीय समीकरण के हल से अभिप्राय एक ऐसा व्यापक व्यंजक प्राप्त करने से होता है जो समीकरण में अज्ञात कोण के प्रत्येक मान के लिए

Definite Integral

1.निश्चित समाकल (Definite Integral): निश्चित समाकल (Definite Integral):यदि f(x) अन्तराल [a,b] में परिभाषित एक वास्तविक मानों का संतत फलन हो तथा f(x) का प्रतिअवकलज (Antiderivative) F(x) हो तो F(b)-F(a) निश्चित समाकल (Definite Integral) कहलाता है।।जहाँ a व b निश्चित समाकल (Definite Integral) की क्रमशः निम्न व उच्च सीमाएं हैं तथा अन्तराल [a,b] को समाकल्य का

Integration of Product of Functions

1.फलनों के गुणनफल का समाकलन (Integration of Product of Functions),खण्डश: समाकलन (Integration by Parts): फलनों के गुणनफल का समाकलन (Integration of Product of Functions):कुछ फलनों का समाकल त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाओं,प्रतिस्थापन विधियों तथा बीजीय फलनों के समाकल ज्ञात करने की विधियों से ज्ञात करना या तो कठिन होता है या फिर संभव नहीं होता।ऐसे में हम दिए