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9Vedic Math Trick  for Fast Calculation

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1.तेजी से गणना के लिए 9 वैदिक मेथ ट्रिक (9Vedic Math Trick  for Fast Calculation)|मेथ्स शार्ट्कटस हिन्दी में (Maths Shortcuts in Hindi):

  • तेजी से गणना के लिए 9 वैदिक मेथ ट्रिक (9Vedic Math Trick  for Fast Calculation) में जादुई ट्रिक जो आपकी कैलकुलेशन स्पीड को 10 गुना तक बढ़ा देगी।कॉम्पिटेटिव एक्जाम और स्टूडेंट के लिए परफेक्ट गाइड।

Also Read This Article:वैदिक गणित

2.वैदिक मैथ के पक्ष में तर्क और तथ्य (Arguments and facts in favor of Vedic mathematics):

  • (1.)वैदिक गणित का एक सूत्र अनेक प्रश्नों का उत्तर क्षण भर में दे सकता है।इन सूत्रों में आत्मचिंतन एवं अन्तःगणना की स्वाभाविक प्रक्रिया विद्यमान है,जो गणित के विद्यार्थियों को एक वैज्ञानिक प्रणाली की ओर उन्मुख करती है।वैदिक गणित की यह विधि अद्यतन है जो खेल-खेल में ही गणित को रुचिपूर्ण तरीके से आत्मसात करा देती है।वैदिक गणित की इस पद्धति को ‘एकीकृत’ ढांचे वाली ‘गणित’ कहा जाता है।
  • (2.)पश्चिम जगत के गणितज्ञ आज हतप्रभ और चकित हैं कि वैदिक गणितीय सूत्रों की सहजता संगणकों (कम्प्यूटर) के अनुकूल तो है ही,साथ में जहां पर गणना मानसिक रूप से की जाती है,वहीं प्रक्रिया लिखित रूप में भी संभव है।यही कारण है कि वर्तमान में भारत की तुलना में पश्चिमी देशों के विश्वविद्यालय गणित को अधिक सुव्यवस्थित ढंग से पढ़ा रहे हैं।लंदन स्थित सेंट जेम्स स्कूल और क्विंसगेट स्कूल में इस विषय को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया।1998 ई से इंग्लैंड के लंकाशायर में यह विषय ‘कॉस्मिक कॉन्सेप्ट’ नाम से पढ़ाया जा रहा है।सुप्रसिद्ध गणितज्ञ के. आर. विलियम्स ने ‘The Natural Calculator’ नामक अपने ग्रंथ में यह स्पष्ट कहा है कि वैदिक गणित के सिद्धांतों से हर विद्यार्थी सहज रूप से विद्युत गति के समकक्ष Calculator (कैलकुलेटर) बन सकता है,यदि वह इसके सूत्रों को यथारूप आत्मसात कर ले।
  • (3.)’विलोकनम्’ सूत्र से गणित शास्त्र का मौखिक उद्देश्य पूर्ण होता है।किसी भी प्रश्न के संपूर्ण निरीक्षण से ही,उसे हल कर देने की संपूर्ण विधि अनायास ही दृष्टि पटल पर आ जानी चाहिए।यह कला मानस पटल में सुव्यवस्थित होने के पश्चात गणित संबंधी किसी भी समस्या का सहज रूप से हल किया जा सकता है।वैदिक गणित का मूल लक्ष्य भी यही है।
  • (4.)आज की प्रतियोगी परीक्षाओं में कम से कम समय में अधिक से अधिक प्रश्न हल करने होते हैं।इस कार्य के लिए वैदिक गणित सर्वथा उपयोगी एवं उपयुक्त साधन के रूप में काम लिया जा रहा है।
  • (5.)भारतीय वैदिक साहित्य को शाश्वत ज्ञान के आदि स्रोत के रूप में विश्व के विद्वानों ने स्वीकार किया है।एक-एक वैदिक ऋचा की यदि विद्वत व्याख्या की जाए,तो इसमें गणित,ज्योतिष,खगोल विद्या,आयुर्वेद पद्धति आदि ज्ञान-विज्ञान की बहुविद् मानवोपयोगी पद्धतियों से साक्षात्कार संभव है।
  • (6.)आधुनिक गणित एवं गणितज्ञों के समक्ष उत्पन्न अनेक समस्याओं का समाधान अत्यंत दुष्कर है।ऐसी दुर्गम स्थिति में कतिपय विद्वानों का ध्यान सार्वभौम एवं अपौरुषेय ज्ञानकोष वैदिक गणित की ओर गया-वैदिक गणितीय पद्धति की सहज,स्वाभाविक,अंतःज्ञान क्षमता से चमत्कृत आज के गणितज्ञ वैदिक गणित की ओर वे आकृष्ट हुए।इनमें वे गणित के अनेक कठिन सूत्रों को सुगमतापूर्वक सीखने में समर्थ हुए।
  • (7.)वैदिक गणित का मूल तत्त्व संबद्धता (कोहरेहंस) है,जिसमें किसी छोटी अथवा बड़ी संख्या की गुणा करने की असीम क्षमता है।यह शोध तथ्य है कि मस्तिष्क का बाँया भाग जो कि विवेक,विश्लेषण,संश्लेषण एवं निर्णय अथवा वाद,प्रतिवाद एवं संवाद आदि क्रियाओं को संचालित करता है,वह तभी पूर्ण विकसित होता है जब इन क्रियाओं का पूर्ण आभास दिलाया जाए।आधुनिक गणितीय पद्धतियों में इस प्रकार के अवसर न्यूनतम हैं। अतः मस्तिष्क की क्रियाशीलता का पूर्ण उपयोग संभव नहीं हो पाता है।
  • (8.)विद्यार्थियों को बने बनाए सूत्र दिए जाने के स्थान पर स्वयं सूत्र निर्माण करने की कला सिखाई जानी चाहिए।विद्यार्थी की तार्किक शक्ति का विकास तभी पूरी तरह संभव हो सकेगा।यही वैदिक गणित की क्षमता है।वैदिक गणित के सूत्र वस्तुतः आधुनिक फाॅर्मूले नहीं हैं,बल्कि सूत्र निर्माण करने के साधन हैं।
  • (9.)सारांशत: वैदिक गणित एक जीवन दर्शन है,जिसमें जीवन की विभिन्न समस्याओं का समाधान करने के सूत्र हैं।समस्या विशेष का समुचित प्रकार से ‘विलोकनम्’ करना तथा उसके लिए समुचित सूत्र निर्माण कर उसे हल करना,यही गणितीय प्रक्रिया है जो मात्र वैदिक गणित में निहित है।यही नहीं पुनः विस्तार हेतु अनंत तक पहुंचने के लिए समुचित मार्गदर्शन ग्रहण करना भी वैदिक गणितीय पद्धति में सम्मिलित है।
  • (10.)वैदिक गणित ऐसी विधा है,जिससे गणित विषय के प्रति भय समाप्त होता है,बुद्धि कुशाग्र होती है और जटिल गणनाएँ सरल हो जाती हैं।अब तो इस विधा का उपयोग आधुनिक विज्ञान के वैज्ञानिक भी करने लगे हैं।
  • (11.)कंप्यूटर की चिप निर्माण करने में इस वैदिक गणित का उपयोग किया जा रहा है,जिसके परिणामस्वरूप गणनाओं का समय घटकर एक चौथाई रह जाएगा।सामान्य गणनाओं के सहारे तो इसका महत्त्व समझ में नहीं आएगा,पर जीन के अध्ययन में या अन्य जटिल गणनाओं में समय की बचत अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है,जहाँ दुनिया के लोग इस विषय के महत्त्व को स्वीकार कर न केवल इसका अध्ययन कर रहे हैं वरन इसके अनुप्रयोग की ओर भी ध्यान दे रहे हैं,वहीं अपने देश में इसका प्रयोग करने में हम अभी संकोच करते हैं।
  • (12.)शिक्षकगण विशेषकर गणित के शिक्षकों को इस विषय को हृदयंगम करना चाहिए,स्वयं इस विषय में श्रेष्ठता अर्जित करें और अपने साथ-साथ अपने विद्यार्थियों में अत्यंत प्रभावी एवं उपयोगी वैदिक गणित के प्रति आत्म गौरव जगाएँ।यह आत्म गौरव न केवल इस विषय के लिए ठीक रहेगा वरन इस भाव के जागरण के कारण ज्ञान-विज्ञान के दूसरे क्षेत्र में भी हम अपने पुरातन ज्ञान के महत्त्व को स्वीकार करेंगे जिसके सहारे हम अपने राष्ट्र व समाज को दुनिया में श्रेष्ठ सिद्ध करने में सफल हो सकेंगे।
  • (13.)इस दृष्टि से सोचना प्रारंभ करें और जहां अनेक महापुरुष यह भविष्यवाणी कर रहे हैं कि निकट भविष्य में भारत दुनिया का सिरमौर होगा,वह एक कोरी कल्पना नहीं रहेगी। वरन् वह सब सत्य सिद्ध होगा।
  • (14.)वैदिक गणितीय सूत्रों की संख्या सोलह तथा उपसूत्रों की संख्या तेरह है।वेदग्रन्थों में उल्लेखित गणित तथा ये उनतीस सूत्र-उपसूत्र ही वैदिक गणित के आधार हैं।ये सूत्र-उपसूत्र बड़े उपयोगी अनेक अर्थ वाले,सर्वव्यापी तथा अत्यंत प्रभावी हैं।इन सूत्रों द्वारा गणित विषय की अनेक शाखाओं की समस्याओं का हल बड़ी सरलता से ज्ञात किया जा सकता है।
  • (15.)वैदिक गणित की उपादेयता:इस वैदिक गणितीय सूत्रों के प्रयोग से गणनाएं छोटी एवं सरल हो जाती हैं।गणना में समय भी कम लगता है।छात्र के मानसिक विकास में सहयोगी भी है।वैदिक गणित द्वारा उत्तर जाँच से छात्र का आत्मविश्वास बढ़ता है।छात्र के द्वारा होने वाली त्रुटि की संभावना नगण्य रह जाती हैं।इन सूत्रों से छात्र में गणित के प्रति रुचि पैदा हो जाती है।परिणामस्वरूप छात्र गणित विषय में श्रेष्ठ उपलब्धियाँ प्राप्त करता है।सूत्रों पर आधारित विधियों के अल्प अभ्यास से छात्र लंबी एवं जटिल गणनाओं का हल मौखिक ज्ञात कर सकता है।इसी कारण जगत में वैदिक गणित को मानस गणित भी पुकारा जाता है।वैदिक गणित के अभ्यास से छात्रों की क्षमता एवं गणना गति पांच गुना बढ़ जाती है तथा उनकी बुद्धि एवं मेधा में अप्रत्याशित वृद्धि होती है।

3.वैदिक मैथ ट्रिक (Vedic Math Trick):

(1.)एकाधिकेण पूर्वेण (Ekadhikena Purvena (Squaring Number Ending in 5)):

  • ये ट्रिक उन संख्याओं के लिए है जो 5 पर खत्म होती है (जैसे 25,65,95,11.5)
    पहले डिजिट (5 के अलावा) को उसके अगली संख्या से गुणा करेंगे और अंत में 25 लिख देंगे।उदाहरण:65^2 =6×7 तथा 25=4225 इसी प्रकार 135^2 =13×14 तथा 25=18225

(2.)मौलिक गुणन विधि (Base Method Multiplication (Nikhilam Sutra):

  • उन संख्याओं के लिए जो 10,100,1000 के पास हैं।उदाहरण:98×97 दोनों 100 से कम हैं (-2 और -3),क्रॉस सब्सट्रैक्शन करें और अंतर को गुणा करें। उपयुक्त उदाहरण में 98-3/(-2)×(-3)=95/06=9506,इसी प्रकार 1007 और 997 पहली 7 अधिक है और दूसरी 3 कम है (+7 और -3),1007-3/7×(-3),1004/-21,1003/1000-21,1003/979=1003979

(3.)वर्टिकली और क्रासवाईज (Vertically and Crosswise (Urdha Tirgabhayam)):

  • ये यूनिवर्सल मेथड है जिसे किसी भी दो संख्याओं को गुणा किया जा सकता है।
    Example: 627×145

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    1×6/(4×6+1×2)/(5×6+1×7+4×2)/(5×2+4×7)/5×7
    =6/24+2/30+7+8/10+28/35
    =6/26/45/38/35
    =6/{}_2 6/ {}_4 5 / {}_3 8 /{}_3 5
    =90915
    Example:1.32×38
    Solution: =3×4/2×8=1216
    संकेत:(1.)2+8=10,अंक 3 दोनों में समान
    (2.)दाहिना पक्ष 2×8=16
    (3.)वाम पक्ष 3×(3 का एकाधिक)=12
    Example:2. 114×116
    Solution:=11×12/4×6
    =132/24
    =13234
    संकेत:(1.)4+6=10,शेष निखिलम 11 दोनों में समान
    (2.)दाहिना पक्ष 4×6=24
    (3.)वाम पक्ष 11×(11 का एकाधिक)=132
    सूत्र एकाधिकेन पूर्वेण के प्रयोग से उन दो संख्याओं का गुणा भी किया जा सकता है जिसके चरमं अंकों अथवा अंतिम अंकों का योग सौ तथा शेष निखिलम अंक परस्पर सामान होते हैं।
    Example:3.191×109
    Solution:1×2/91×09
    =2/0819
    =20819
    संकेतः(1.)अन्तिम अंकों का योग=91+09=100
    (2.)शेष निखिलम अंक समान
    (3.)दाहिना पक्ष=91×09=0819
    (4.)वाम पक्ष=1×(1 का एकाधिक)=2

(4.)मिश्र भिन्नों का गुणन (Multiplication of mixed fractions):

  • सूत्र आधारित विधि:
    जब दो भिन्नों के चरमं अंकों का योग=1=आधार तथा शेष निखिलम अंक परस्पर समान हों तो सामान्य संख्याओं के समान सूत्र एकाधिकेन पूर्वेण द्वारा इनका गुणनफल दो भागों में लिखा जा सकता है।
    वाम पक्ष=प्रथम भाग=शेष निखिलम अंक × उसका एकाधिक
    दक्षिण पक्ष=दूसरा भाग=चरमं अंकों का गुणन
    Example:4. 3 \frac{1}{2} \times 3 \frac{1}{2}
    Solution: 3 \frac{1}{2} \times 3 \frac{1}{2} \\ =3 \times 4 / \frac{1}{2} \times \frac{1}{2} \\ =12 \frac{1}{4}
    संकेत:(1.)चरम अंकों का योग=\frac{1}{2}+\frac{1}{2}=1=आधार
    (2.)शेष निखिलम अंक समान=3
    (3.)वाम पक्ष=3×3 का एकाधिक
    (4.)दक्षिण पक्ष= \frac{1}{2} \times \frac{1}{2}
    Example:5. 6 \frac{1}{4} \times 6 \frac{3}{4}
    Solution: 6 \frac{1}{4} \times 6 \frac{3}{4} \\ =6 \times 7 / \frac{1}{4} \times \frac{3}{4} \\ =42 \frac{3}{16}
    Example:6. 15 \frac{5}{7} \times 15 \frac{2}{7}
    Solution: 15 \frac{5}{7} \times 15 \frac{2}{7} \\ =15 \times 16 / \frac{5 \times 2}{7 \times 7} \\=240 \frac{10}{49}
    Example:7. 8 \frac{17}{100} \times 8 \frac{83}{100}
    Solution: 8 \frac{17}{100} \times 8 \frac{83}{100} \\ =8 \times 9 / \frac{17 \times 83}{100 \times 100} \\ =72 \frac{1411}{10000}

(5.)दशमलव भिन्नों का गुणन (Multiplication of Decimal Fractions):

  • दशमलव भागों का योग=1
    साधारण भिन्नों के समान ही वैदिक गणित में दशमलव भिन्न के पूर्ण भाग को शेष निखिलम अंक तथा दशमलव भाग को चरमं अंक माना जाता है।विधि सूत्र एकाधिकेन पूर्वेण आधारित है और क्रियापद पूर्व समान है।
    Example:8.4.5×4.5
    Solution:4×5/.5×.5
    =20.25
    संकेत:(1.)चरमं अंकों का योग=.5+.5=1
    (2.)शेष निखिलम अंक परस्पर समान=4
    (3.)शेष क्रियापद पूर्व समान
    Example:9.6.7×6.3
    Solution:6×7=/.7×.3
    =42.21
    Example:10.3.25×3.75
    Solution:3×4=.25×.25
    =12.1875
    Example:11.4.015×4.985
    Solution:=4×5/.015×.985
    =20.014775

(6.)गुणन संक्रिया (सूत्र एकन्यूनेन पूर्वेण) (Multiplication operation (sutra eknunen purven)):

  • (Multiplication of mixed fractions)
    दो ऐसी संख्याओं का गुणन सूत्र एकन्यूनेन पूर्वेण आधारित विधि द्वारा बड़ी सरलता से किया जा सकता है कि जिसमें एक संख्या (गुणक) का प्रत्येक अंक 9 हो।माना कि दूसरी संख्या गुण्य है।इस गुणन क्रिया में तीन स्थितियाँ बनती हैं:
    प्रथम स्थिति:गुण्य में अंकों की संख्या=गुणक में अंकों की संख्या
    Example:12.8×9
    Solution=8-1/9-7
    =72
    संकेत:(1.)वाम पक्ष=गुण्य-1=8-1=7
    (2.)दक्षिण पक्ष=गुणक-वाम पक्ष=9-7=2
    Example:13.16×99
    Solution:=16-1/99-15=1584
    Example:14.672×999
    Solution:=672-1/999-671
    =671328
    द्वितीय स्थिति:गुणा में अंकों की संख्या < गुणक में अंकों की संख्या
    ऐसे प्रश्नों में गुण्य संख्या के पहले शून्य लगाकर दोनों पक्षों की अंक संख्या समान कर ली जाती है।तत्पश्चात प्रयोग प्रथम के प्रश्नों की भाँति गुणनफल ज्ञात कर लिया जाता है।
    Example:15. 47×999
    Solution: 047×999
    =047-1/999-046
    =46953
    संकेत:(1.)वाम पक्ष=गुण्य-1=047-1=046
    (2.)दक्षिण पक्ष=गुणक-वाम पक्ष=999-046=953
    Example:16.342×99999
    Solution:00342×99999
    =00341/99999-00341
    =34199658
    Example:16.83×99999
    Solution:00083×99999
    =82/999/17

(7.)निखिलम सूत्र (Nikhilam Sutra):

Example:17. 12×14
Solution:

\begin{array}{c} 12 \times 14 \\ 12 \quad +2 \\ 14 \quad +4 \\ \hline = 16 / 8 \\ = 168 \end{array}
Example:18.98×97
Solution:

\begin{array}{c} 98 \times 97 \\ = 98 \quad -02 \\ = 97 \quad-03 \\ \hline =98-03 / 06 \\=9506\end{array}
Example:19.1007×1015
Solution:

\begin{array}{c} 1007 \times 1015 \\ 1007 \quad +007 \\ 1015 \quad +015 \\ \hline =1015+7 / 105 \\= 1022 / 105 \\ 1022105 \end{array}
Example:20.88×109
Solution:

\begin{array}{c} 88 \times 109 \\ =88 \quad -12 \\ =109 \quad +09 \\ \hline =88+9 /-108 \\ =97 /-108 \\ =95 / 200-108 \\ =9592 \end{array}

(8.)तीन संख्याओं का गुणन (सूत्र निखिलम) (Multiplication of three numbers (Sutra Nikhilam)):

Example:21.12×13×17
Solution:

\begin{array}{c} & 12 \times 13 \times 17 \\ & 12 \quad +2 \\ & 13 \quad +3 \\ & 17 \quad +7 \\ \hline &  12+3+7 / 6+21+14 / 2 \times 3 \times 7 \\ & =22 / 41 / 42 \\ & =22 / { }_4 1 / { }_4 2 \\ & =2652 \end{array}
संकेत:(1.)आधार=10,विचलन=+2,+3,+7
(2.)प्रथम खण्ड=12+3+7=22 अथवा 13+2+7=22 अथवा 17+2+3=22
(3.)मध्य खण्ड=2×3+3×7+7×2
(4.)तृतीय खण्ड=2×3×7=42
(5.)आधार में एक शून्य अतः मध्य व तृतीय खण्ड में एक-एक अंक
Example:22.992×995×1000,आधार=1000
Solution:

\begin{array}{c} & 992 \times 995 \times 1002 \\ & 992 \quad -008 \\ & 995 \quad -005 \\ & 1002 \quad +002 \\ \hline & =992-5+2 / 40-10-16 /(-8)(-5)(2) \\ & =989 / 014 / 080 \\ & =989014080 \end{array}

(8.)तीन संख्याओं का गुणन (उपाधार):

सूत्र निखिलम द्वारा ((Nikhilam Sutra):
ऐसी तीन संख्याओं का गुणन भी किया जा सकता है जिनका विचलन समान उपाधार के सापेक्ष प्राप्त हो।
\text{उपाधार}^2 (कोई संख्या+शेष दो संख्याओं के विचलन का योग)/उपाधार अंक (दो-दो विचलनों के गुणनफलों का योगफल)/तीनों विचलनों का गुणनफल
Example:23.22×23×27
Solution:

\begin{array}{c} &22 \times 23 \times 27 \\ & 22 \quad +2 \\ & 23 \quad+3 \\ & 27 \quad +7 \\ \hline = & 2^2 \times(22+3+7) / 2(6+21+14) / 2 \times 3 \times 7 \\ = & 4 \times 32 / 82 / 42 \\ = & 128 / { }_8 2 / { }_4 2=13662 \end{array}
संकेत: (1.)आधार=10,उपाधार=10×2=20,उपाधार अंक=2
(2.)विचलन=+2,+3,+7
(3.)मध्य व तृतीय खण्ड में एक-एक अंक
Example:24.498×495×496
Solution:

\begin{array}{c} & 498 \times 495 \times 496 \\ & 498 \quad -02 \\ & 495 \quad -05 \\ & 496 \quad -04 \\ \hline & =5^2(498-05-04) / 5(10+20+8) /-40 \\ & =25 \times 489 / 5 \times 38 /-40 \\ & =12225 / 190 /-40 \\ & =12226 / 89 / 100-40 \\ & =122268960 \end{array}
संकेत: आधार=100
उपाधार=100×5
उपाधार अंक=5

(9.)यावदूनम तावदूनी कृत्य वर्ग व योजयेत:

उपसूत्र का अर्थ है आधार के सापेक्ष किसी संख्या में जो कमी अथवा अधिकता (विचलन) हो,उसी कमी या अधिकता को उस संख्या में से और कम-अधिक कर,उसमें इसका (विचलन का) वर्ग जोड़ दीजिए।
Example:25. 12^2
Solution:

\begin{aligned} & 12^2 \\ & =12+2 / 2^2 \\ & =14 / 4 \\ & =144 \end{aligned}
संकेत:(1.)आधार=10 के सापेक्ष विचलन=2
(2.)वाम पक्ष=संख्या+विचलन=12+2=14
(3.)दक्षिण पक्ष=(\text{विचलन}^2)
Example:26. 51^2
Solution:

\begin{aligned} & 51^2 \\ & =5(51+1) / 1^2 \\ & =5 \times 52 / 1 \\ & =2601 \end{aligned}
Example:27. 225^2
Solution:

\begin{aligned} & 225^2 \\ & =2(225+25) / 25^2 \\ & =500 /{ }_6 25 \\ & =50625 \end{aligned}
संकेतः(1.)आधार=100,ऊपाधार=100×2=200
(2.)विचलन=25
(3.)दक्षिण पक्ष में दो अंक
घनफल सूत्र निखिलम-उपाधार सूत्र:
\text{(उपाधार अंक)}^2 (\text{संख्या}+2×\text{विचलन})/ \text{उपाधार} (3×\text{विचलन}^2)/ \text{विचलन}^3
Example:28. 63^3
Solution:

\begin{aligned} 63^3 & =6^2(63+2 \times 3) / 6 \times 3 \times 3^2 / 3^3 \\ & =36 \times 69 / 162 / 27 \\ & =2484 / {}_16 2 / 2 \\ & =250047 \end{aligned}
संकेत:(1.)आधार=10,उपाधार=10×6=60
(2.)उपाधार अंक=6
(3.)विचलन=+3
Example:29. 305^3
Solution:

\begin{aligned} 305^3 & =3^2(305+2 \times 05) / 3 \times 3 \times(05)^2 /(05)^3 \\ & =9 \times 315 / 225 / 125 \\ & =2835 / 225 / 225 \\ & =28372625 \end{aligned}
संकेत:(1.)आधार=100,उपाधार=100×3=300
(2.)उपाधार अंक=3
(3.)विचलन=+05
Example:30. 208^3
Solution:

\begin{aligned} 208^3 & =2^2(208+08 \times 2) / 2 \times 3 \times(08)^2 /(08)^3 \\ & =896 / 384 / 512 \\ & =8998912 \end{aligned}
संकेत:(1.)आधार=100,उपाधार=100×2=200
(2.)उपाधार अंक=2
(3.)विचलन=+08

4.प्रेक्टिस एक्सरसाइज (Practice Exercise):

  • हल करें (Solve):
    (1.)102×104×108,आधार=100
    (2.)99×98×95,आधार=100
    वर्ग करें
    (3.) 225^2 (4.) 69^2
    घनफल ज्ञात करें
    (5.) 24^3
    उत्तर (Answer): (1.) 1145664 (2.)921690 (3.) 50625
    (4.) 4761 (5.) 13824
    Comment Section में Answer दें।

5.Comparison Table (Normal Method Time VS Vedic Method Time):

\begin{array}{|l|c|c|} \hline \multicolumn{2}{|c|}{ \text{Normal Method Time} } & \text{ Vedic Method Time} \\ \hline (1.) 95^2 & 15 \text{ second } & 5 \text{ second} \\ \hline (2.) 50 \times 25 & 10 \text{ second } & 2 \text{ second } \\ \hline (3.) 98 \times 97 & 20 \text{ second } & 7 \text{ second } \\ \hline (4.) 116^3 & 60 \text{ second } & 20 \text{ second } \\ \hline (5.) 223^3 & 60 \text{ second } & 25 \text{ second } \\ \hline (6.) 27 \times 999 & 30 \text{ second } & 10 \text{ second } \\ \hline (7.) 7.3 \times 7.7 & 15 \text{ second } & 5 \text{ second } \\ \hline (8.) 15487 \div 17 & 10 \text{ second } & 10 \text{ second } \\ \hline (9.) 13 \frac{3}{4} \times 13 \frac{1}{4} & 40 \text{ second } & 10 \text{ second } \\ \hline (10.) 295 \times 205 & 20 \text{ second } & 5 \text{ second } \\ \hline \end{array}

  • उपर्युक्त आर्टिकल में तेजी से गणना के लिए 9 वैदिक मेथ ट्रिक (9Vedic Math Trick  for Fast Calculation) के बारे में बताया गया है।
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6.वैदिक गणित पढ़ने की तुलना (हास्य-व्यंग्य) (Comparison of Vedic Mathematics Reading):

  • माँ (पुत्र से):क्या कर रहे हो?
  • पुत्र:पिताजी वेद पढ़ते थे,मैं वैदिक गणित पढ़ूँगा।मुझे वैदिक गणित पढ़ने पर अपने आप पर गर्व है।

7.तेजी से गणना के लिए 9 वैदिक मेथ ट्रिक (9Vedic Math Trick  for Fast Calculation) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.वेदिक मैथ क्या है? (Vedic Math Kya hai?):

उत्तर:ये पुराने भारतीय सूत्रों पर आधारित केलकुलेशन का एक आसान तरीका है।

प्रश्न:2.क्या वैदिक मैथ काॅम्पीटेटिव एग्जाम में काम आता है? (Kya Vedic Maths Competitive Exams Mein Kam Aata Hai?):

उत्तर:बिल्कुल! काॅम्पीटेटिव एग्जाम में टाईम की कमी होती है और वैदिक मैथ शार्टकट्स आप टफ केलकुलेशन को सेकण्डों में कर सकते हो।

प्रश्न:3.क्या वैदिक मेथ को सीखना मुश्किल है? (Kya Vedic Maths ko Seekhna Mushkil hai?):

उत्तर:नहीं,पारम्परिक गणित से बहुत ज्यादा आसान और मनोरंजक है।इसमें सिर्फ 16 मुख्य सूत्र होते हैं।

प्रश्न:4.क्या वैदिक मैथ स्कूल एग्जाम में हेल्प करता है? (Kya Vedic Maths School Exams Mein Help Karta hai?):

उत्तर:हाँ, इसे काॅम्पीटेटिव और बोर्ड दोनों एग्जाम में समय बचता है।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा तेजी से गणना के लिए 9 वैदिक मेथ ट्रिक (9Vedic Math Trick  for Fast Calculation) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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