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JEE MAINS Maths Archive

Integration of Product of Functions

1.फलनों के गुणनफल का समाकलन (Integration of Product of Functions),खण्डश: समाकलन (Integration by Parts): फलनों के गुणनफल का समाकलन (Integration of Product of Functions):कुछ फलनों का समाकल त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाओं,प्रतिस्थापन विधियों तथा बीजीय फलनों के समाकल ज्ञात करने की विधियों से ज्ञात करना या तो कठिन होता है या फिर संभव नहीं होता।ऐसे में हम दिए

Permutations and Combinations

1.क्रमचय और संचय (Permutations and Combinations),संचय (Combinations): क्रमचय और संचय (Permutations and Combinations):संचय में जितनी वस्तुएं लेनी होती है,दी हुई वस्तुओं में से उतनी वस्तुओं को लेकर समूह बनाए जाते हैं जबकि क्रमचय में प्रत्येक समूह की वस्तुओं के संभव विन्यास भी बनाए जाते हैं।क्रमचय में क्रम का ध्यान रखना बहुत जरूरी है लेकिन संचय

Integration of Rational Functions

1.परिमेय फलनों का समाकलन (Integration of Rational Functions): परिमेय फलनों का समाकलन (Integration of Rational Functions) ज्ञात करने के लिए परिमेय फलन को पूर्ण वर्ग विधि से मानक सूत्र और प्रतिस्थापन विधि से समाकलन करने वालों फलनों में परिवर्तित कर लिया जाता है।फिर मानक सूत्र तथा प्रतिस्थापन विधि से समाकलन कर लिया जाता है।जब  

Permutation and Combination

1.क्रमचय और संचय (Permutation and Combination),क्रमचय (Permutations): क्रमचय और संचय (Permutation and Combination):क्रमचय (Permutation):दी हुई वस्तुओं में से कुछ अथवा सभी को एक साथ लेकर उन्हें जितने भिन्न-भिन्न क्रमों या विन्यासों (arrangements) में रखा जा सकता है,उनमें से प्रत्येक को क्रमचय कहते हैं।गुणन का आधारभूत सिद्धांत (Fundamental Principle of Multiplication): माना की कोई घटना A,m

Integration with Trig Identities

1.त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाओं के साथ समाकलन (Integration with Trig Identities),त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाओं द्वारा समाकलन (Integration by Trigonometric Identities): त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाओं के साथ समाकलन (Integration with Trig Identities ):कई बार समाकलन में ऐसे त्रिकोणमितीय फलन विद्यमान होते हैं जिन्हें त्रिकोणमिति सर्वसमिकाओं का उपयोग कर समाकलन योग्य बना लिया जाता है,फिर आवश्यकता अनुसार प्रतिस्थापन कर समाकलन किया जाता है।त्रिकोणमितीय

Complex Numbers

1.सम्मिश्र संख्याएं (Complex Numbers), सम्मिश्र संख्याओं का कोणांक (Complex Numbers Argument): सम्मिश्र संख्याएं (Complex Numbers):जैन गणितज्ञ महावीराचार्य ने 850 ई. में यह संकेत दिया कि ऋणात्मक संख्याओं के वर्गमूल नहीं होते।1637 ई. में रेने डिकार्टिज ने संख्याओं को वास्तविक व काल्पनिक नाम दिए।आयलर ने 1748 ई. में काल्पनिक संख्याओं के लिए i का प्रयोग किया।गाॅउस

Integration of Irrational Functions

1.अपरिमेय फलनों का समाकलन (Integration of Irrational Functions),अपरिमेय बीजीय फलनों का समाकलन (Integration of Irrational Algebraic Functions): अपरिमेय फलनों का समाकलन (Integration of Irrational Functions):यदि किसी फलन में चर की घात भिन्नात्मक हो तो उसे अपरिमेय फलन कहते हैं।अपरिमेय बीजीय फलन का समाकलन करने के लिए जिसमें केवल एक अपरिमेय व्यंजक होता हो तो हम

Equation of Straight Line

1.सरल रेखा का समीकरण (Equation of Straight Line),दो बिन्दुओं से गुजरने वाली रेखा का समीकरण (Equation of Straight Line Passing Through Two Points): सरल रेखा का समीकरण (Equation of Straight Line):एक सरल रेखा का झुकाव रूप समीकरण y = mx + c है, जहाँ m ढाल है और y = c वह मान है जहाँ

Derivative of Parametric Function

1.फलनों के प्राचलिक रूपों के अवकलज (Derivative of Parametric Function),प्राचलिक अवकलन कक्षा 12 (Parametric Differentiation Class 12): फलनों के प्राचलिक रूपों के अवकलज (Derivative of Parametric Function) तब ज्ञात किए जाते हैं जब दी गई प्राचलिक समीकरण से प्राचल का विलोपन कठिन हो।यदि चरों x तथा y दोनों किसी अन्य चरों (जैसे t के पदों

Quadratic Equation

1.द्विघात समीकरण (Quadratic Equation),द्विघात समीकरण करना (Quadratic Equations to Solve): द्विघात समीकरण (Quadratic Equation) का हल गुणनखण्ड विधि,पूर्णवर्ग विधि तथा श्रीधराचार्य द्वारा दी गई व्यापक विधि से हल ज्ञात किया जाता है।इस आर्टिकल में विविक्तिकर के अपरिमेय संख्याएं अर्थात् सम्मिश्र संख्या होने की स्थिति में हल ज्ञात करने के बारे में बताया गया है।यहां हम