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Differential Equation Archive

Method of finding particular integral

1.विशिष्ट समाकल निकालने की विधि (Method of finding particular integral,General Method of finding particular integral)- विशिष्ट समाकल निकालने की विधि (Method of finding particular integral,General Method of finding particular integral),विशिष्ट समाकल से क्या अभिप्राय है? (What is meant by particular integral?)-किसी अवकल समीकरण का वह हल जो किसी अवकल समीकरण के व्यापक हल में प्रयुक्त

Equation Reducible to form of Clairaut

1.क्लैरो के रूप में परिवर्तन योग्य समीकरण (Equation Reducible to form of Clairaut)- क्लैरो के रूप में परिवर्तन योग्य समीकरण (Equation Reducible to form of Clairaut) से तात्पर्य है कि कुछ अवकल समीकरण उचित प्रतिस्थापन (Proper Substitutions) द्वारा क्लैरो के समीकरण में परिवर्तित हो जाते हैं।इसलिए इस आर्टिकल को पढ़ने से पूर्व आपको क्लैरो के

Complementary Function

1.पूरक फलन (Complementary Function,Rules for Finding complementary Function)- पूरक फलन (Complementary Function,Rules for Finding complementary Function) रैखिक अवकल समीकरण के व्यापक हल का एक भाग होता है।इस आर्टिकल में पूरक फलन के बारे में अध्ययन करेंगे। समीकरण या के व्यापक हल के पूरक फलन विचार करेंगे। (1.)पूरक फलन (Complementary Function,Method of Finding out Complementary Function)-

Bernoulli Differential equation Reducible to Linear form

1.बरनौली के अवकल समीकरण का रैखिक रूप में समानयन (Bernoulli Differential equation Reducible to Linear form)- बरनौली के अवकल समीकरण का रैखिक रूप में समानयन (Bernoulli Differential equation Reducible to Linear form) का अर्थ है कि कई बार अवकल समीकरण रैखिक अवकल समीकरण के रूप में नहीं होती है, लेकिन आश्रित चर को किसी अन्य

Differential Equations of First order

1.प्रथम कोटि के अवकल समीकरण जो प्रथम घात के न हों का परिचय (Introduction to Differential Equations of First order, Differential Equations of First order but not of First Degree)- प्रथम कोटि के अवकल समीकरण  जो प्रथम घात के न हों (Differential Equations of First order, Differential Equations of First order but not of First

Exact differential equations

1.यथातथ (यथार्थ)अवकल समीकरण (Exact differential equations)- यथातथ (यथार्थ)अवकल समीकरण (Exact differential equations) वे अवकल समीकरण होते हैं जिन्हें इनके पूर्वग से बिना किसी ओर परिवर्तन के अवकलन द्वारा व्युत्पन्न किया जा सके।उदाहरणतः एक यथातथ अवकल समीकरण है क्योंकि इसके पूर्वग xy=c का अवकलन करने से प्राप्त किया जा सकता है।प्रमेय(Theorem)-Mdx+Ndy=0जहां M तथा N ,x व

Method of change of variables

1.चर राशियों के परिवर्तन की विधि (Method of change of variables)- चर राशियों के परिवर्तन  की विधि (Method of change of variables) से किसी अवकल समीकरण का हल ज्ञात करेंगे। कभी-कभी विशेष प्रतिस्थापन करने से उसका समानयन इन वर्णित मानक रूपों में से किसी एक में किया जा सकता है।इस विधि को प्रतिस्थापन की विधि

Linear equation-Clairaut’s equations

1.रैखिक समीकरण-क्लैरो का समीकरण (Linear equation-Clairaut’s equations)- रैखिक समीकरण-क्लैरो का समीकरण (Linear equation-Clairaut’s equations) के अवकल समीकरण का रूप y=px+f(p) हो तो इसे क्लेरो का समीकरण कहते हैं। जहां f(p) ,p का कोई  फलन है।यह एक लैग्रांज समीकरण का एक विशेष रूप हैं।इसका हल ज्ञात करने के लिए इसका x के सापेक्ष अवकलन करते हैं-

Simultaneous differential equations

1.युगपत् अवकल समीकरण का परिचय (Introduction to Simultaneous differential equations)- युगपत् अवकल समीकरण (Simultaneous differential equations) में उन समीकरणों का अध्ययन करेंगे जिनमें दो से अधिक चर राशियां हैं।इस प्रकार के समीकरण या तो साधारण या आंशिक होंगे। साधारण समीकरणों में एक स्वतन्त्र चर राशि होती है जबकि आंशिक समीकरणों में एक से अधिक चर

Linear differential equations

1.रैखिक अवकल समीकरण का परिचय (Introduction to Linear differential equations)- रैखिक अवकल समीकरण (Linear differential equations) को समझने के लिए आश्रित चर,स्वतंत्र चर तथा रैखिक समीकरण को समझना आवश्यक है। (1.)रैखिक समीकरण (Linear equation)- वह समीकरण जिसमें प्रथम घात से अधिक घात का कोई चर न हो। जैसे ax+by+cz=0 यहांx,y,z तीनों प्रथम घात के ही