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Probability

1.प्रायिकता (Probability),प्रायिकता का अर्थ (Probability Meaning):

प्रायिकता (Probability) के सिद्धान्त की उत्पत्ति 17वीं शताब्दी में यूरोप में हुई।वहाँ के उद्योगपतियों एवं व्यापारियों ने उनसे सम्बन्धित व्यवसाय के परिणामों के पूर्वानुमान करने के प्रयास किए जिससे अधिक से अधिक लाभ हो सके।इन लोगों ने अपनी समस्याओं को तत्कालीन गणितज्ञों गैलीलियो,पास्कल,फर्मा कारडेनो आदि के सामने रखा।गणितज्ञों ने इन समस्याओं के समाधान हेतु गणितीय विधियों का विकास किया जिससे गणित की शाखा की उत्पत्ति हुई।18 वीं एवं 19वीं शताब्दी में प्रमुख गणितज्ञ लाॅप्लास,गाॅस और बरनौली आदि ने इस सिद्धांत का ओर विकास किया।बीसवीं शताब्दी में प्रायिकता सिद्धांत पर आधारित प्रतिचयन सिद्धांत,निर्णय सिद्धांत आदि का प्रतिपादन हुआ जिनका श्रेय आर.एस.फिशर और कार्ल पियर्सन आदि को जाता है।प्रायिकता सिद्धांत को परिभाषित करने के लिए सम प्रायिकता या सम संभाव्य परिणामों का उपयोग किया।यह परिभाषा तार्किक दृष्टि से उचित प्रतीत नहीं होती है।इसलिए रूस के गणितज्ञ A.N.Kolomigrove ने एक अन्य प्रायिकता सिद्धांत का विकास किया जिससे अधिगृहीत आधारित प्रायिकता सिद्धांत कहते हैं।उन्होंने 1933 में प्रकाशित अपनी पुस्तक प्रायिकता का आधार (Foundation of Probability) में प्रायिकता की व्याख्या के लिए कुछ स्वत:प्रमाणित तथ्य (अभिगृहीत) निर्धारित किए।
आधुनिक युग में प्रायिकता के सिद्धांत का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में भविष्य के संबंध में निर्णय लेने हेतु किया जा रहा है जैसे किसी राज्य या देश का बजट बनाने में, बीमा कम्पनियों में, संयोग पर आधारित खेलों में, कृषि, अर्थशास्त्र, वैज्ञानिक अनुसंधान में, सैनिक विशेषज्ञ सुरक्षा सम्बन्धी नीति निर्धारण में, व्यापक रूप से व्यवसाय के क्षेत्र में, प्राकृतिक एवं भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में, समाज एवं राज्य व्यवस्था की महत्त्वपूर्ण नीति निर्धारण में किया जाता है।
हमारे सामने प्रतिदिन ऐसी घटनाएं घटित होती है जिनके एक से अधिक निश्चित और अपरिमित परिणाम हो सकते हैं।ऐसी घटनाओं के परिणामों का पूर्वानुमान करके व्यक्ति लाभ उठाने का प्रयास भी करता है।किसी भी घटना से संबंधित पूर्व सूचनाओं व परिस्थितियों के आधार पर परिणामों की संभावनाओं का पता करने के सिद्धांत को प्रायिकता कहते हैं।
वर्तमान में प्रायिकता ज्ञात करने हेतु भिन्न विधियां प्रयोग में लाई जाती है।जिसमें प्रथम चिरप्रतिष्ठित प्रायिकता सिद्धान्त (Classical Theory of Probability) कहते हैं।इसमें किसी घटना की प्रायिकता ज्ञात करने के लिए हम घटना के अनुकूल परिणामों की संख्या का कुल परिणामों के साथ अनुपात ज्ञात करते हैं।द्वितीय जिसे प्रायिकता की अभिगृहीती दृष्टिकोण (Axiiomatic Approach to Probability) कहते हैं इसमें प्रायिकता निर्धारित करने के लिए अभिगृहीतों या नियमों को वर्णित (depict) किया गया है।दोनों विधियों को समझने के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण शब्दों को इनके संदर्भ में जानना आवश्यक है।इन्हें आगे अनुच्छेद में चिरप्रतिष्ठित प्रायिकता सिद्धांत तथा अभिगृहीती दृष्टिकोण के अनुसार परिभाषित करने का प्रयास किया गया है।
प्रायिकता का अर्थ (Probability Meaning),परिभाषाएं (Definations):
(A)प्रायिकता का चिरप्रतिष्ठित दृष्टिकोण
(1.)यादृच्छिक प्रयोग (Random Experiment):एक प्रयोग जिसके बारे में सभी संभव परिणाम पहले से ही ज्ञात हों तथा प्रयोग के किसी विशेष परिणाम के आने का निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सके यादृच्छिक प्रयोग कहलाता है। जैसे एक सिक्के के उछाल में चित्त या पट दो परिणाम पहले से ज्ञात हैं लेकिन निश्चित परिणाम नहीं बताया जा सके।अतः सिक्के को उछालना यादृच्छिक प्रयोग है।
(2.)अभिप्रयोग एवं घटना (Trial and Event):
किसी भी संदर्भ का कोई प्रयोग जिसका कई संभावित परिणामों में से एक परिणाम अवश्य होता है एक अभिप्रयोग कहलाता है तथा इसके संभावित परिणाम घटनाएं कहलाती हैं।उदाहरणार्थः
(i)एक सिक्के को उछालना एक अभिप्रयोग है और चित्त (H) या पट (T) आना एक घटना है।
(ii)एक पासे को उछालना अभिप्रयोग है और 1,2,3,4,5,6 में से किसी एक अंक का आना घटना है।
(iii)ताश की गड्डी में से दो पत्ते खींचना अभिप्रयोग है और संभावित परिणाम में से दोनों पत्तों का राजा होना एक घटना है।
(3.)सरल घटना (Simple Event):किसी अभिप्रयोग में एक समय में केवल एक घटना घटित हो तो उसे सरल घटना कहते हैं।उदाहरणार्थ:एक थैले में से कुछ काली तथा कुछ सफेद गेंदे हैं।इसमें से एक गेंद निकालना सरल घटना है।
(4.)निश्शेष घटनाएं या कुल स्थितियां (Exhaustive Events or Total Number of Cases):किसी अभिप्रयोग के समस्त संभावित परिणाम उस अभिप्रयोग की निश्शेष घटनाएं या कुल स्थितियां कहलाती है।उदाहरणार्थः
(i)एक सिक्के को उछालना एक अभिप्रयोग है और चित्त (H) या पट (T) आ सकते हैं।अतः इस अभिप्रयोग में 2 निश्शेष घटनाएं हैं।
(ii)एक पासे को उछालने पर 1,2,3,4,5 या 6 सकता है।अतः इस अभिप्रयोग में 6 निश्शेष घटनाएँ हैं।
(5.)अनुकूल घटनाएं या स्थितियां (Favorable Events or Cases):किसी अभिप्रयोग में किसी विशिष्ट घटनाओं की अनुकूल स्थितियां उस प्रयोग के उन परिणामों की संख्या है जिसमें वह विशिष्ट घटना घटित होती है।उदाहरणार्थः
(i)एक पासे को उछालने पर सम अंक आने की अनूकुल घटनाएं 2,4,6 अर्थात् 3 है।
(ii)ताश की गड्डी में से एक पत्ता खींचने में राजा आने की अनूकूल स्थितियां अर्थात्4 हैं।
(iii)दो पासों को उछालने पर योग 5 आने के लिए 4अनुकूल स्थितियाँ हैं:(1,4),(2,3),(3,2),(4,1)
(6.)स्वतंत्र घटनाएं व आश्रित घटनाएं (Independent and dependent events):
स्वतंत्र घटनाएं दो या दो से अधिक घटनाएं स्वतंत्र घटनाएं कहलाती है यदि किसी एक के घटित होने या न होने का प्रभाव शेष घटनाओं के घटित होने या न होने पर नहीं पड़ता है।उदाहरणार्थः एक सिक्के तथा एक पासे के साथ-साथ उछालने पर सिक्के पर पट तथा पासे पर 4 आना स्वतंत्र घटनाएं हैं।
(ii)आश्रित घटनाएं:दो या दो से अधिक घटनाएं इस प्रकार हों कि एक के घटित होने का प्रभाव दूसरे पर पड़ता हो तो उन्हें आश्रित घटनाएं कहते हैं।
उदाहरणार्थ:ताश की साधारण गड्डी से खींचे गए एक पत्ते का पान का पत्ता होना तदुपरांत बिना इस पत्ते को गड्डी में मिलाएं पुनः खींचे गए पत्ते का हुकुम का पत्ता होना दोनों आश्रित घटनाएं हैं।
(7.)परस्पर अपवर्जी घटनाएं या असंयुक्त घटनाएं (Mutually Exclusive Disjoint Events):दो या दो से अधिक घटनाएं परस्पर अपवर्जी या असंयुक्त घटनाएं कहलाती है यदि इनमें से कोई दो घटनाएं एक साथ घटित नहीं हो सके अर्थात् यदि एक घटना घटित होती है तो शेष घटनाएं घटित नहीं हो सके।उदाहरणार्थ:
(i)ताश की गड्डी में से एक पत्ता की खींचने पर राजा होना या रानी होना परस्पर अपवर्जी घटनाएं हैं।
(8)समप्रायिक घटनाएं (Equally Likely Events):
यदि किसी प्रयोग में सभी घटनाओं के घटित होने की समान संभावना हो तो ऐसी घटनाओं को समप्रायिक घटनाएं कहते हैं।उदाहरणार्थ
(i)एक सिक्के को उछालने पर चित्त (H) या पट (T) समप्रायिक घटनाएं हैं।
(9.)मिश्र घटनाएं (Compound Events):
यदि दो या दो से अधिक घटनाएं एक साथ घटित हो तो वह मिश्र घटनाएं या संयुक्त घटनाएं कहलाती है।उदाहरणार्थः
दो थैलों में कुछ नीली व कुछ लाल गेंदे रखी हैं। किसी एक थैले का चुनाव कर उसमें से एक गेंद निकालना एक मिश्र घटना है क्योंकि दो थैलों में से एक का चयन कर और फिर चुने हुए थैले में से एक गेंद निकालना साथ-साथ घटित होने वाली घटना है।
(B)प्रायिकता का अभिगृहीत दृष्टिकोण में आवश्यक परिभाषाएं
(1.)प्रतिदर्श बिंदु तथा प्रतिदर्श समष्टि (Sample Point and Sample Space):किसी अभिप्रयोग का प्रत्येक परिणाम एक प्रतिदर्श बिंदु कहलाता है तथा इन सभी प्रतिदर्श बिंदुओं का समुच्चय उस अभिप्रयोग का प्रतिदर्श समष्टि कहा जाता है।इसे प्रायः S से व्यक्त किया जाता है।उदाहरणार्थः
(i)दो सिक्कों के उछाल में प्रतिदर्श बिंदु (H,H),(H,T),(T,H),(T,T) प्रतिदर्श समष्टि है।
(ii)3 बालक और दो बालिकाओं में से दो को चुना जाना जाता है।इस अभिप्रयोग की प्रतिदर्श समष्टि होगी (बालक B_{1}, B_{2}, B_{3} ,बालिका G_{1}, G_{2}):

S=\left\{B_{1} B_{2}, B_{2} B_{3}, B_{3}B_{1}, B_{1} G_{1}, B_{2} G_{1}, B_{3} G_{1}, B_{3} G_{2}, G_{1} G_{2}\right\}
(2.)प्रारंभिक घटना (Elementary Events):यादृच्छिक प्रयोग से संबंधित प्रतिदर्श समष्टि का एक अवयव वाला उपसमुच्चय प्रारंभिक घटना कहलाती है।
स्पष्टत: यादृच्छिक प्रयोग के प्रत्येक परिणाम के साथ एक प्रारंभिक घटना जुड़ी होती है तथा विलोमत:
उदाहरणार्थ: एक सिक्के को 2 बार उछालने पर प्रतिदर्श समष्टि S={HH,HT,TH,TT} है यहाँ इस प्रतिदर्श समष्टि की 4 घटनाएं E_{1}=\{HH\} ; E_{2}=\{H T\}, E_{3}=\{TH\},E_{4}=\{T T\} हैं।
(3.)मिश्र घटना (Compound Event):एक प्रयोग की प्रतिदर्श समष्टि S के वे उपसमुच्चय जो प्रतिदर्श समष्टि S के एक अवयव वाले उपसमुच्चयों के असंयुक्त सम्मिलन से बने समुच्चयों को मिश्र घटनाएं कहते हैं।उदाहरणार्थःएक पासे को उछालने पर विचार कीजिए।इस प्रयोग की प्रतिदर्श समष्टि S={1,2,3,4,5,6} है।प्रारंभिक घटनाएं
E_{1}=\{1\}, E_{2}=\{2\}, \cdots, E_{6}=\{6\} यहाँ A_{1}=\{2,4,6\}, A_{2}=\{1,3,5\} इत्यादि मिश्र घटनाएं कहलाएंगी।
(4.)असंभव व निश्चित घटनाएं (Impossible and Certain Events):माना एक यादृच्छिक प्रयोग से संबंधित प्रतिदर्श समष्टि S है तो \phi तथा S इसके उपसमुच्चय होने के कारण घटनाएं हैं।घटना को असंभव घटना तथा S को निश्चित घटना कहते हैं।उदाहरणार्थःएक पासे को उछालने की घटना से संबंधित प्रयोग पर विचार करें तथा इसमें A_{1}=1 से कम अंक आने की घटना, A_{2}=8 से कम अंक आने की घटना हो तो A_{1}=1 निश्चित रूप से असंभव घटना होगी तथा A_{2}=1 निश्चित घटना होगी।
(5.)घटना का घटित होना (Occurrence of an Event):प्रतिदर्श समष्टि S का उपसमुच्चय A  किसी घटना को निरूपित करता है।यदि \omega उस यादृच्छिक प्रयोग का एक परिणाम है तथा \omega \in A तो कहा जा सकता है कि घटना घटित हुई तथा यदि \omega \notin A तो कहा जा सकता है कि घटना घटित नहीं हुई।
उदाहरणार्थ:एक निष्पक्ष पासे को फेंकने या यादृच्छिक प्रयोग पर विचार करते हैं।माना सम संख्या आने की घटना A है तो A={2,4,6} यदि एक प्रयोग में परिणाम 6 प्राप्त होता है एवं 6 \in A तब हम कह सकते हैं कि इस प्रयोग में घटना घटित हुई।यदि परिणाम 5 प्राप्त होता है तो हम कहेंगे कि इस प्रयोग में घटना घटित नहीं हुई।
(6.)घटनाओं का बीजगणित (Algebra of Events):घटनाओं के बीजगणित को निम्न सारणी से आसानी से समझा जा सकता हैः

घटना का मौखिक विवरणसमुच्चय सिद्धांत संकेतों में समानार्थक
A नहीं\bar{A}
A या B (A या B में से कम से कम एक)A \cup B
A तथा BA \cap B
A परन्तु B नहींA \cap \bar{B}
न तो A एवं न ही B\bar{A} \cap \bar{B}=(\overline{A \cup B})
A तथा B में से यथार्थतः एक(A \cap \bar{B}) \cup(\bar{A} \cup B)
A,B तथा C में से यथार्थतः दो(A \cap B \cap \bar{C}) \cup(A \cap \bar{B} \cap C) \cup(\bar{A} \cap B \cap C)
A,B तथा C में से कम से कम एकA \cup B \cup C
A,B तथा C में से सभीA \cap B \cap C

(7.)परस्पर अपवर्जी या असंयुक्त (Mutually Exclusive or Disjoint Event):माना एक यादृच्छिक प्रयोग की प्रतिदर्श समष्टि S है तथा A_{1}A_{2} दो घटनाएं हैं तो तथा परस्पर अपवर्जी होंगी यदि A_{1} \cap A_{2}=\phi
स्पष्टत: एक यादृच्छिक प्रयोग से संबंधित प्रारंभिक घटनाएं परस्पर अपवर्जी होती हैं।घटनाएं जो परस्पर अपवर्जी नहीं है वह अनुकूल घटनाएं कहलाती है।
(8.)परस्पर निःशेष घटनाओं का निकाय (Mutually Exclusive and Exhaustive System of Events):
माना एक यादृच्छिक प्रयोग की प्रतिदर्श समष्टि S है तथा A _{1} ,A _{2},A _{3} \cdots A _{n} , S के S के उपसमुच्चय इस प्रकार हैं कि
\text { (i) } A_{i} \cap A_{j}= \quad i \neq j तथा \text { (ii) } A _{1} \cup A _{2} \cup A_{3} \cdots \cup A_{n}= S
तो यह परस्पर अपवर्जी निश्शेष घटनाओं का निकाय निर्मित करता है।
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2.प्रायिकता के उदाहरण (Probability Examples):

Example:1.बल्बों के एक कार्टून में से तीन बल्ब यादृच्छया निकाले जाते हैं।प्रत्येक बल्ब को जांचा जाता है और उसे खराब (D) या ठीक (N) में वर्गीकृत करते हैं।इसकी प्रतिदर्श समष्टि ज्ञात कीजिए।
Solution:खराब बल्ब होने की घटना=D
ठीक बल्ब होने की घटना=N
प्रतिदर्श समष्टि S={DDD,DDN,DND,NDD,DNN,NDN,NND,NNN}
Example:2. एक ताश की गड्डी से पत्ते निकाले जाते हैं तो n(E) क्या होगा जबकि E एक बादशाह,एक बेगम,एक गुलाम व एक इक्का निकालने की घटना है।
Solution:E एक बादशाह,एक बेगम,एक गुलाम व एक इक्का निकालने की घटनाओं की संख्या=n(E)=^{4}C_{1} \times ^{4}C_{1} \times ^{4}C_{1} \times ^{4}C_{1} \\ =\frac{4 !}{3 !} \times \frac{4 !}{3 !} \times \frac{4 !}{3 !} \times \frac{41}{3 !} \\ =4 \times 4 \times 4 \times 4=256
Example:3.एक पासा फेंका जाता है यदि पासे पर 4 दर्शाना E घटना है तथा सम संख्या आना F घटना है।क्या E तथा F अपवर्जी घटना है?

Solution:A_{1}=पासे पर 4 दर्शाना
A_{2}=पासे पर सम संख्या आना={2,4,6}

A_{1} \cap A_{2}=4
अतः E तथा F परस्पर अपवर्जी घटनाएं नहीं है।
Example:4.दो पासों को एक साथ उछाला जाता है तो (i) युग्मक होने का प्रतिदर्श समष्टि क्या है? (ii) अंको का योग 8 होने का प्रतिदर्श समष्टि क्या है?
Solution:दो पासों को उछालने पर प्रतिदर्श समष्टि

\begin{array}{lllllll} & \quad 1 & \quad 2 & \quad 3 & \quad 4 & \quad 5 & \quad 6 \\ \hline 1 & (1,1) & (1,2) & (1,3) & (1,4) & (1,5) & (1,6) \\ 2 & (2,1) & (2,2) & (2,3) & (2 , 4) & (2,5) & (2,6) \\ 3 & (3,1) & (3,2) & (3,3) & (3,4) & (3,5) & (3,6) \\ 4 & (4,1) & (4,2) & (4,3) & (4,4) & (4,5) & (4,6) \\ 5 & (5,1) & (5,2) & (5,3) & (5,4) & (5,5) & (5,6) \\ 6 & (6,1) & (6,2) & (6,3) & (6,4) & (6,5) & (6,6) \\ \end{array}
(i)माना युग्मक होने की घटना=A
अतःयुग्मक होने की प्रतिदर्श समष्टि={(1,1),(2,2),(3,3),(4,4),(5,5),(6,6)}
(ii)अंको का योग 8 होने की प्रतिदर्श समष्टि क्या है?
माना अंको का योग होने की घटना=B
अतः अंको का योग 8 होने की प्रतिदर्श समष्टि={(2,6),(3,5),(4,4),(5,3)(6,2)}

Example:5.एक पासे को फेंकने पर 4 से बड़ा अंक आने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
Solution:एक पासे पर 6 अंक अंकित होते हैं।अतः घटना की कुल निश्शेष स्थितियां={1,2,3,4,5,6}=6
घटना के लिए 4 से बड़ा अंक={5,6}
अतः घटना की अनुकूल स्थितियां (A)=2
P(A)=\frac{\text {A की अनुकूल स्थितियां }} {\text{ A की निश्शेष स्थितियाँ }} \\ =\frac{2}{6}=\frac{1}{3}
Example:6.एक सिक्के को 2 बार उछाला जाता है।दोनों बार चित्त आने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
Solution:एक सिक्के के दो बार उछालने पर निश्शेष स्थितियां=2^{2}=4
={HH,HT,TH,TT}
अतः घटना की निश्शेष स्थितियां=4
घटना के लिए दोनों बार चित्त आना={TT}
अतः अनुकूल स्थितियां=1
प्रायिकता=\frac{\text{ अनुकूल स्थितियां }}{\text{ प्रतिकूल स्थितियाँ }} \\ P(A)=\frac{1}{4}
Example:7.1 से 17 तक कि प्राकृत संख्याओं में से एक संख्या का यादृच्छिक चयन किया जाता है। प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि वह एक अभाज्य संख्या हो।
Solution:1 से 17 तक की प्राकृतिक संख्याओं में से एक संख्या का चयन 17 प्रकार से हो सकता है={1,2,3,4,5,6,7,8,9,10,11,12,13,14,15,16,17}
अतः घटना की निश्शेष स्थितियां=17
घटना के लिए अभाज्य संख्याएं={2,3,5,7,11,13,17}
अतः घटना के लिए अभाज्य संख्याओं की संख्या=7
घटना के लिए अनुकूल स्थितियां=7
प्रायिकता=\frac{\text{ अनुकूल स्थितियां }}{\text{ प्रतिकूल स्थितियाँ }} \\ P(A)=\frac{7}{17}
उपर्युक्त उदाहरणों के द्वारा प्रायिकता (Probability),प्रायिकता का अर्थ (Probability Meaning) को समझ सकते हैं।

3.प्रायिकता की समस्याएं (Probability Problems):

(1.)एक पासे के फेंकने पर सम अंक आने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
(2.)दो पासों के फेंकने पर अंको का योग 7 आने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
(3.)यदि एक लीप वर्ष का यादृच्छिक चयन किया गया हो तो इस वर्ष में 53 सोमवार होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
(4.)बारह टिकटों पर एक-एक संख्या 1 से 12 तक लिखी गई है।यदि उनमें से कोई एक टिकट का यादृच्छिक चयन किया जाए तो इस पर लिखी हुई संख्या के दो या तीन के होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
उत्तर (Answers):(1) \frac{1}{2} \\ (2) \frac{1}{6} \\ (3)\frac{2}{7} \\ (4 ) \frac{2}{3}
उपर्युक्त सवालों को हल करने पर प्रायिकता (Probability),प्रायिकता का अर्थ (Probability Meaning) को ठीक से समझ सकते हैं।

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4.प्रायिकता (Probability),प्रायिकता का अर्थ (Probability Meaning) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.प्रायिकता और उदाहरण क्या हैं? (What is probability and example?):

उत्तर:प्रायिकता किसी घटना के घटित होने की संभावना का माप है।
एक नमूना स्थान में सभी घटनाओं की संभावना 1 तक जुड़ जाती है। उदाहरण के लिए, जब हम एक सिक्का उछालते हैं, तो हमें हेड या टेल मिलता है, केवल दो संभावित परिणाम (possible outcomes) संभव हैं (H,T)।

प्रश्न:2.प्रायिकता के 5 नियम क्या हैं? (What are the 5 rules of probability?):

उत्तर:मूल प्रायिकता नियम (Basic Probability Rules)
प्रायिकता नियम एक (किसी भी घटना के लिए A, 0 ≤ P(A) ≤ 1))
प्रायिकता नियम दो (सभी संभावित परिणामों की प्रायिकताओं का योग 1 है)
प्रायिकता नियम तीन (पूरक नियम) (The Complement Rule)
कई घटनाओं को शामिल करने की संभावनाएं।
प्रायिकता नियम चार (असंबद्ध घटनाओं के लिए योग नियम)

प्रश्न:3.प्रायिकता सूत्र क्या है? (What is probability formula?):

उत्तर:प्रायिकता सूत्र संभावित परिणामों की कुल संख्या के अनुकूल परिणामों की संख्या का अनुपात प्रदान करता है।किसी घटना की प्रायिकता= (अनुकूल परिणामों की संख्या)/(संभावित परिणामों की कुल संख्या)[(Number of favorable outcomes) / (Total number of possible outcomes)] P(A)= n(E)/n(S)

प्रश्न:4.प्रायिकता क्या है समझाइए? (What is probability explain?):

उत्तर:प्रायिकता गणित की एक शाखा है जो किसी दिए गए घटना के घटित होने की संभावना की गणना से संबंधित है जिसे 1 और 0 के बीच की संख्या के रूप में व्यक्त किया जाता है।
प्रत्येक सिक्का टॉस एक स्वतंत्र घटना है;एक परीक्षण के परिणाम का बाद वाले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा प्रायिकता (Probability),प्रायिकता का अर्थ (Probability Meaning) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

 

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प्रायिकता (Probability)

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प्रायिकता (Probability) के सिद्धान्त की उत्पत्ति 17वीं शताब्दी में यूरोप में हुई।वहाँ के उद्योगपतियों एवं व्यापारियों
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