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Friday, 22 November 2019

Students Studying Vedic Mathematics will Develop Indian Values

November 22, 2019

Students Studying Vedic Mathematics will Develop Indian Values

1.वैदिक गणित पढ़ा छात्रों में विकसित करेंगे भारतीय संस्कार का परिचय (Introduction to Students Studying Vedic Mathematics will Develop Indian Values)-

Students Studying Vedic Mathematics will Develop Indian Values
Students Studying Vedic Mathematics will Develop Indian Values
इस आर्टिकल में बताया गया है कि वैदिक गणित की पढ़ाई कराकर विद्यार्थियों में भारतीय संस्कार विकसित किए जाएं। इसमें बताया गया है कि इस वक्त जो शिक्षा दी जा रही है वह राष्ट्र केन्द्रित नहीं है। यह ठीक बात है कि वैदिक गणित के सूत्रों से कैलकुलेशन आसान हो जाता है। जैसे 45 x 45 का मान वैदिक गणित से तत्काल बताया जा सकता है कि इसका मान 2025 प्राप्त होगा। हमारा मानना है कि वर्तमान गणित के स्थान पर वैदिक पढ़ाया जाना इसलिए उचित नहीं है क्योंकि अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर माॅडर्न गणित ही पढ़ाई जाती है अतः माॅडर्न गणित को हटा दिया जाएगा  तो भारतीय बालक-बालिकाएं गणित में पिछड़ जाएंगे। इसलिए वैदिक गणित को माॅडर्न गणित के पूरक गणित के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए। हाँ, यह अवश्य है कि वर्तमान में युवाओं में संस्कारों का अभाव है, इसका कारण है कि भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक व आध्यात्मिक शिक्षा का अभाव। यदि बालक-बालिकाओं को नैतिक व आध्यात्मिक शिक्षा भी पढ़ाई जाए तो बालक-बालिकाएं संस्कारवान होंगे। नैतिक व आध्यात्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम इस प्रकार का होना चाहिए जो सार्वभौमिक हो।दूसरा कारण है कि वर्तमान शिक्षा पद्धति में सैद्धांतिक शिक्षा दी जाती है तथा व्यावहारिक शिक्षा का अभाव है। इसलिए सैद्धान्तिक शिक्षा के साथ व्यावहारिक व चारित्रिक शिक्षा भी दी जाए। भारतीय शिक्षा पद्धति तथा पाश्चात्य शिक्षा पद्धति में से वे बाते सम्मिलित की जानी चाहिए जो बालकों के हित में हो तथा आधुनिक युग के अनुकूल हो। पाश्चात्य गणित शिक्षा का यह अर्थ नहीं है कि वह विद्यार्थियों के अनुकूल नहीं है तथा भारतीय शिक्षा का यह अर्थ नहीं है कि वह पूरी तरह सही है। आधुनिक युग के अनुकूल तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर गणित शिक्षा में भारतीय बालक-बालिकाएं पिछड़ न जाएँ इसको ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम रखा जाना चाहिए। कुछ विद्वान भारतीय शिक्षा पद्धति के घोर आलोचक है और उसे घिसी-पिटी, पुरातन अर्थात् आउट आफ डेटेड, दकियानूसी समझते हैं तथा कुछ विद्वान पाश्चात्य शिक्षा को उन्मुक्त, स्वच्छन्द, सैद्धान्तिक मानते है अर्थात्‌ भारतीय परिवेश के अनुकूल नहीं मानते हैं। हमारे विचार से बालक-बालिकाओं के हित को ध्यान में रखते हुए तथा आधुनिक युग से कदम मिलाकर चल सके एवं आत्मनिर्भर हो सके, बालक-बालिकाओं में संस्कारों का निर्माण हो सके इस प्रकार के पाठ्यक्रम को सम्मिलित किया जाना चाहिए। प्राचीनकाल की आवश्यकताएं, परिस्थितियां तथा समय अलग तरह का था। वर्तमान समय की आवश्यकताएं, परिस्थितियाँ तथा समय अलग तरह का है अर्थात् बहुत कुछ बदल चुका है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए गणित का सिलेबस तय करना चाहिए।
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2.वैदिक गणित पढ़ा छात्रों में विकसित करेंगे भारतीय संस्कार(Students Studying Vedic Mathematics will Develop Indian Values)-

Wed, 31 Oct 2018
- यूपी बोर्ड ने जारी किया सिलेबस, अगले सेशन से होगा लागू
GORAKHPUR: यूपी बोर्ड से संबद्ध माध्यमिक इंटर कॉलेजेज में वैदिक गणित की पढ़ाई करा छात्रों में भारतीय संस्कार विकसित किए जाएंगे. इसके लिए बोर्ड की ओर से सिलेबस पर काम लगभग पूरा हो गया है और जल्द ही बाजार में इसकी किताबें भी आ जाएंगी. अगले सत्र से स्कूलों में इसे लागू कर दिया जाएगा. यह प्रस्ताव विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की ओर से बोर्ड को भेजा गया था जिस पर बोर्ड ने हरी झंडी दे दी है.
बता दें, यूपी बोर्ड अंतर्गत आने वाले माध्यमिक इंटर कॉलेजेज में वैदिक गणित पढ़ाए जाने के लिए विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की ओर से बोर्ड को प्रस्ताव भेजा गया था. जिसे स्वीकार कर लिया गया है. संस्थान का कहना है कि इस वक्त की शिक्षा राष्ट्र केंद्रित नहीं है, इसमें पश्चिमी सभ्यता की छाप है. इसको दूर करने और अपनी शिक्षा को देश केंद्रित बनाने के लिए बोर्ड को 32 बिंदुओं का प्रस्ताव भेजा गया था. इसमें वैदिक गणित को बोर्ड ने स्वीकृत कर लिया है. इसके अलावा इतिहास को सही तरीके से प्रस्तुत करने और कई योद्धाओं जिनकी गाथाएं नहीं हैं, उन्हें शामिल करने का भी प्रस्ताव है. अब अगले सत्र में जितने बदलाव हो जाएंगे उसके बाद संस्थान फिर से अन्य बदलावों को लागू करने के लिए प्रयास करेगा.
कोट्स
वैदिक गणित में संस्कृत के सूत्रों से गणित के सूत्रों को पढ़ाया जाता है. इससे कैलकुलेशन काफी आसान हो जाता है. बारह साल पहले भी इसे शुरू किया गया था, लेकिन एक दो साल में ही इसे बंद कर दिया गया. हालांकि, अब तक इसका कोई सिलेबस और किताबें नहीं आईं हैं.
- सुधीर पांडेय, गणित शिक्षक
मॉडर्न सिलेबस में निश्चित तौर पर पश्चिमी सभ्यता की छाप बढ़ती जा रही है. जिसे दूर किया जाना चाहिए. वैदिक गणित पहले पढ़ाई जाती थी, तब भारतीय सभ्यता की छाप भी नजर आती थी, लेकिन जब से वैदिक गणित बंद हुआ उसके बाद से पश्चिमी सभ्यता की छाप भी बढ़ती हुई नजर आ रही है. इसलिए बच्चों में भारतीय सभ्यता की भी जानकारी के लिए वैदिक गणित की बेहद जरूरत है.
- पंकज दुबे, गणित शिक्षक
वैदिक गणित की पढ़ाई के लिए कवायद शुरू हो चुकी है. अगले सत्र से बच्चों को पढ़ाए जाने का सिलसिला प्रारंभ होगा.
- ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह भदौरिया, डीआईओएस

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Thursday, 21 November 2019

What is Aryabhatta Mathematics Challenge Test

November 21, 2019

What is Aryabhatta Challenge Test 

1.आर्यभट्ट चैलेंज टेस्ट क्या है? का परिचय (Introduction to What is Aryabhatta Challenge Test?)- 

What is Aryabhatt  Mathematics Challenge Test ,Aryabhatta Mathematics Bhavan
Aryabhatta Mathematics Bhavan
इस आर्टिकल में बताया गया है कि गणित विषय को ज्यादातर बच्चे पसन्द नहीं करते हैं परन्तु कैरियर के लिहाज से गणित विषय अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। इस हकीकत को पहचानते हुए इस वर्ष CBSE बोर्ड ने बोर्ड गणित को बढ़ावा देने के लिए आर्यभट्ट गणित चैलेंज एक्जाम आयोजित करेगा।
पिछले दिनों CBSE बोर्ड ने एक महत्त्वपूर्ण निर्णय लिया था कि कि दसवीं बोर्ड में गणित के दो पेपर होंगे बेसिक मेथ और स्टैंडर्ड मेथ। जो विद्यार्थी आगे गणित विषय को ऐच्छिक विषय के रूप में नहीं चुनना चाहते हैं वे बेसिक मेथ का पेपर ले सकते हैं और जो विद्यार्थी आगे गणित विषय को ऐच्छिक विषय के रूप में चुनना चाहते हैं, उनको स्टैंडर्ड मेथ का पेपर चुनना होगा। बेसिक मेथ लेकर उत्तीर्ण करनेवाले विद्यार्थी ऐच्छिक विषय के रूप में गणित का चुनाव नहीं कर सकेंगे। यदि बेसिक मेथ लेकर विद्यार्थी दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करता है और बाद में गणित विषय लेना लेना चाहता है तो उसे कम्पार्टमेंट के साथ स्टैंडर्ड गणित का पेपर देना होगा। इस निर्णय के परिणामस्वरूप अधिकांश विद्यार्थियों ने बेसिक मेथ का पेपर लिया था।
अब CBSE बोर्ड ने गणित विषय का केरियर में महत्त्व जानते हुए एक ओर निर्णय लिया है। बोर्ड ने आर्यभट्ट चैलेंज एक्जाम के लिए 8 से 10 कक्षा के विद्यार्थियों हेतु रजिस्ट्रेशन का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस टेस्ट को लिए जाने का कारण यह है कि गणित विषय का कैरियर में अहम योगदान होता है इसलिए गणित में रुचि जाग्रत करने व प्रतिभाओं का चयन करके उनको आगे बढ़ाने का मकसद है।
हमारे विचार से इस प्रकार के प्रगतिशील तथा नवीन निर्णय लेकर गणित में रुचि बढ़ाने का कदम स्तुत्य है। दरअसल बेसिक मेथ और स्टैंडर्ड मेथ के दो पेपर करने के कारण अधिकांश विद्यार्थियों ने बेसिक मेथ चयन किया था क्योंकि बेसिक मेथ के पेपर का डिफीकल्टी लेवल स्टैंडर्ड मेथ से कम अर्थात् स्टैंडर्ड मेथ का पेपर कठिन होगा। गणित विषय को लेकर इस प्रकार निर्णय करने से अधिकांश विद्यार्थी गणित से किनारा करने लगेंगे, लेकिन गणित विषय से इस प्रकार पीछा छुड़ाने से गणित से पीछा नहीं छूट सकता है। आज हर जाॅब में गणित का टेस्ट लिया जाता है, ऐसी स्थिति से गणित के महत्त्व का पता चलता है। बेसिक मेथ का चयन करने तथा ऐच्छिक विषय के रूप में गणित को न लेने के कारण बाद में कई विद्यार्थी पश्चाताप करते हैं कि उन्होंने गणित विषय न लेकर कितनी बड़ी भूल कर दी है। यह टेस्ट गणित के प्रति रुचि जाग्रत करने में अहम भूमिका निभाएगा। दूसरा इस टेस्ट का फायदा यह होगा कि गणित की प्रतिभाओं का पता चल सकेगा और उन प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।
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2.आर्यभट्ट चैलेंज टेस्ट क्या है? (What is Aryabhatta Challenge Test?)- 

What is Aryabhatta  Mathematics Challenge Test
What is Aryabhatta  Mathematics Challenge Test 
ज्यादातर बच्चे व बड़े गणित विषय को पसंद नहीं करते हैं लेकिन कॅरियर के लिहाज से विषय की जरूरत को ध्यान में रखते हुए सेंट्रल बोर्ड सेकंडरी एजुकेशन (CBSE) ने हाल ही ‘आर्यभट्ट गणित चैलेंज’ का हिस्सा बनने के लिए नोटिफिकेशन जारी कर एंट्रीज मंगवाई हैं।
ज्यादातर बच्चे व बड़े गणित विषय को पसंद नहीं करते हैं लेकिन कॅरियर के लिहाज से विषय की जरूरत को ध्यान में रखते हुए सेंट्रल बोर्ड सेकंडरी एजुकेशन (CBSE) ने हाल ही ‘आर्यभट्ट गणित चैलेंज’ का हिस्सा बनने के लिए नोटिफिकेशन जारी कर एंट्रीज मंगवाई हैं। जानें इससे जुड़ी अन्य जानकारी -
योग्यता की बात करें तो सीबीएसई द्वारा संबद्ध स्कूलों के कक्षा ८वीं से लेकर १०वीं के छात्र-छात्राएं इस चैलेंज में पार्टिसिपेट कर सकते हैं।
टेस्ट के लिए कोई शुल्क नहीं लगेगा। इसके बाद 18-22 नवंबर के बीच रजिस्ट्रेशन कराने वाले स्कूलों को ऑनलाइन लिंक के द्वारा प्रश्न-पत्र भेजा जाएगा। इस टेस्ट में हर स्कूल से तीन स्टूडेंट्स चयन किया जाएगा।
फर्स्ट स्टेज में प्रत्येक रजिस्टर्ड स्कूल से चयनित तीन स्टूडेंट्स को दूसरे चरण में कम्प्यूटर बेस्ड एग्जाम में प्रस्तुत होना होगा। जो कि 29 नवंबर, 2019 को आयोजित होगा। सेकेंड स्टेज में सीबीएसई के हर रीजन से 100 स्टूडेंट्स का चयन किया जाएगा, जिन्हें मेरिट सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा।
इस चैलेंज में मैथेमैटिक्स विषय से कई तरह के प्रश्न पूछे जाएंगे। तीन सेक्शन से प्रत्येक में से 20 अंकों के सवाल पूछे जाएंगे। इसमें चेंज एंड रिलेशनशिप्स, क्वांटिटी, अनसर्टेनिटी एंड डाटा, पजल्स, हिस्ट्री ऑफ मैथेमैटिक्स, मैथैमैटिक्स करंट अफेयर्स, मैथेमैटिक्स ऑल अराउंड अस, न्यूमेरिकल एबिलिटी, रीजनिंग और स्पेशियल एबिलिटी विषय शामिल हैं। एक घंटे की समयावधि वाले इस कॉम्पिटीशन में बहुवैकल्पिक प्रश्न आएंगे जो कुल 60 अंकों के होंगे। इसमें नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान नहीं है।
अधिक जानकारी के लिए जा सकते हैं वेबसाइट पर : http://cbse.nic.in/newsite/attach/62_Circular_2019.pdf


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Wednesday, 20 November 2019

Mathematics in NDA and Aptitude Test in NTSE Troubled

November 20, 2019

Mathematics in NDA and Aptitude Test in NTSE Troubled

1.एनडीए में गणित तो एनटीएसई में एप्टीट्यूड टेस्ट ने किया परेशान का परिचय (Introduction to Mathematics in NDA and Aptitude Test in NTSE Troubled) - 

Mathematics in NDA and Aptitude Test in NTSE Troubled
Mathematics in NDA and Aptitude Test in NTSE Troubled
इस आर्टिकल में बताया गया है कि NDA में गणित के प्रश्न-पत्र का लेवल उच्च स्तर का था जिसे हल करने में अभ्यर्थियों को कठिनाई महसूस हुई। गणित के प्रश्न-पत्र को हल करने में कठिनाई महसूस होने के कुछ कारण हैं जिन्हें दूर कर दिया जाए तो हम गणित के प्रश्न-पत्र में कठिनाई महसूस नहीं करेंगे। प्रतियोगिता परीक्षाओं में गणित का जो सिलेबस दिया हुआ होता है उसकी यदि हम सिलेक्टेड तैयारी करते हैं तो गणित विषय के प्रश्न-पत्र को हल करने में कठिनाई होगी। प्रतियोगिता परीक्षाओं में प्रश्न-पत्र व्यापक व गहराई लिए हुए होते हैं। इन परीक्षाओं में सरल प्रश्नों को भी घुमा फिराकर पूछा जाता है जिससे अभ्यर्थी हल करने में कठिनाई महसूस करते हैं। गणित का जो सिलेबस है यदि हमारी तैयारी उससे उच्च स्तर की होगी तो कठिनाई महसूस नहीं होगी। जैसे हमें 50 किमी की दौड़ की प्रतियोगिता में हिस्सा लेना है तो हमारी तैयारी 75 से 100 किमी तक की होनी चाहिए तभी हम 50 किमी की दूरी को सफलतापूर्वक व आसानी से पार कर सकेंगे। जबकि अभ्यर्थी 50 किमी या इससे कम दूरी का अभ्यास करते हैं जिससे वे 50 किमी की दूरी की दौड़ में असफल हो जाते हैं। इसलिए जितना Syllabus दिया हुआ है उसके लेवल से दुगुनी तैयारी करके रखें। हर तरह से आनेवाले सवालों का बार-बार अभ्यास करें। आनलाईन माॅक टेस्ट से बार-बार अपना मूल्यांकन करते रहें। याद रखें कि प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलता का कोई Shortcut Method नहीं है। हम जो भी अभ्यास करते हैं उसे हमें दिशा मिलती है कि इस तरह के सवाल आ सकते हैं। परन्तु जो सवाल हम हल करते हैं जरूरी नहीं कि वे सवाल आएगें बल्कि वे सवाल नहीं आते हैं, हाँ उस तरह के सवाल आ सकते हैं। परन्तु जो सवाल हम हल करते हैं उससे हमारे अभ्यास करने की क्षमता बढ़ती है। अर्थात् उन सवालों को अभ्यास करने का अर्थ है कि हम हमारे अन्दर सवाल हल करने का कौशल विकसित कर रहे होते हैं। परीक्षा में आनेवाले सवाल हम अपने अनुभव के आधार पर हल करते हैं। हमारे अनुभव में विवेक, बुद्धि, कौशल, सूझबूझ इत्यादि गुणों का समावेश होता है। विवेक, बुद्धि, कौशल, सूझबूझ इत्यादिगुगुणों को जितना हम विकसित करते जाते हैं उतना ही प्रश्न-पत्र हमारे लिए सरल हो जाता है। अन्य विषयों की तुलना में हमें इन गुणों के अतिरिक्त चिंतन, तर्कशक्ति जैसे गुणों की गणित में अधिक आवश्यकता होती है। इसलिए बालकों की प्रारम्भ में ही प्रतिभा को पहचानकर उस प्रतिभा को विकसित करने का प्रयास करना चाहिए। ऐसा करने से हमें गणित विषय कठिन नहीं लगेगा और हम उसको आसानी से हल कर पाएंगे।
यदि आर्टिकल पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें जिससे वे भी लाभ उठाए ।आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट करके बताएं। इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें। 

2.एनडीए में गणित तो एनटीएसई में एप्टीट्यूड टेस्ट ने किया परेशान(Mathematics in NDA and Aptitude Test in NTSE Troubled)-

Publish Date:Mon, 18 Nov 2019
राजधानी रांची में रविवार को एनडीए व एनटीएसई की परीक्षा हुई।...
जागरण संवाददाता, रांची : राजधानी रांची में रविवार को एनडीए व एनटीएसई की परीक्षा हुई। दोनों परीक्षाओं में करीब 20 हजार विद्यार्थी जुटे थे। एनडीए की परीक्षा देकर निकले परीक्षार्थियों ने गणित को टफ बताया तो एनटीएसई में एप्टीट्यूड टेस्ट ने परेशान किया। गणित में कैलकुलस व स्टेटिक्स के सवालों को हल करने में अधिक समय लग रहे थे।
एनडीए की परीक्षा दो पालियों में हुई। प्रथम पाली में 300 अंकों की 120 प्रश्न गणित से तथा द्वितीय पाली में 200 अंकों की 100 प्रश्न अंग्रेजी तथा 400 अंकों के 200 प्रश्न सामान्य ज्ञान से प्रश्न थे। सभी में निगेटिव मार्किंग का प्रावधान था। अंग्रेजी में कंप्रीहेंसन, आइडमस एंड फ्रेज, एंटोनिम्स, स्पॉटिंग इरर, फिल इन द ब्लैंक्स से प्रश्न थे। वहीं एनटीएसई में प्रथम पाली में मेंटल एबिलिटी व द्वितीय पाली में स्कॉलेस्टिक एप्टीट्यूड टेस्ट की परीक्षा हुई। दो सही विकल्प से उलझे परीक्षार्थी
एनटीएसई के द्वितीय पत्र में प्रश्न संख्या-25 में परीक्षार्थी उलझ गए। इस प्रश्न के दो विकल्प 1 व 2 सही थे। परीक्षार्थियों ने कहा कि दोनों सही करते या एक यह समझ नहीं आ रहा था। प्रश्न था- एक तत्व का इलेक्ट्रोनिक विन्यास 2, 8,8,1 है। इस तत्व के बारे में कौन सा कथन सही नहीं है। इसके विकल्प थे-1. यह ग्रुप तीन में उपस्थित है। 2. इसकी संयोजकता एक ऋणात्मक है। 3. यह ग्रुप एक में उपस्थित है। 4. यह चौथा आवर्त में उपस्थित है। एनडीए में एक प्रश्न था-चंद्रयान-2 के लैंडर को कौन सा नाम दिया गया था।

3.खूंटी, दुमका व लोहरदगा में सभी उपस्थित-

एनटीएसई की परीक्षा में राज्य भर से 6906 में से 6420 परीक्षार्थी उपस्थित व 485 अनुपस्थित रहे। सबसे अधिक रांची में 1673 परीक्षार्थी थे जिसमें 1530 उपस्थित रहे तो वहीं सबसे कम दुमका में 13 में सभी उपस्थित रहे। इसी तरह लोहरदगा व खूंटी में भी उपस्थिति सौ फीसद रही। 

4.कड़ी जांच के बाद प्रवेश

एनडीए व एनटीएसई दोनों ही परीक्षाओं में परीक्षार्थियों को कड़ी जांच से गुजरना पड़ रहा था। प्रवेश द्वार पर मेटल डिटेक्टर से जांच हो रही थी। डीएवी कपिलदेव में एनडीए के परीक्षार्थियों को जूते-मौजे खुलवाए जा रहे थे। वहीं एनटीएसई में संत माग्र्रेट में भी कड़ी जांच हो रही थी।


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Tuesday, 19 November 2019

What are the Shortcomings and Suggestions in the Current Mathematics Exams

November 19, 2019

What are the Shortcomings and Suggestions in the Current Mathematics Exams

1.गणित की वर्तमान परीक्षाओं में कमियाँ और सुझाव का परिचय (Introduction to What are the shortcomings and suggestions in the current mathematics exams) -

What are the Shortcomings and Suggestions in the Current Mathematics Exams
What are the Shortcomings and Suggestions in the Current Mathematics Exams
(1.)गणित में केवल लिखित परीक्षाओं के द्वारा हम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व सम्बन्धी उपलब्धियों का मूल्यांकन नहीं कर सकते हैं।
(2.)वर्तमान प्रश्नपत्रों में प्रश्नों की संख्या सीमित होती है। इस कारण सम्पूर्ण पाठ्यक्रम के सभी टाॅपिक के विभिन्न पक्षों को प्रश्न-पत्र में सम्मिलित नहीं किया जा सकता है। अतः इन सीमाओं में गणित की अनेक उपलब्धियों का मूल्यांकन सम्भव नहीं है। इस प्रकार किया गया मूल्यांकन वैध तथा विश्वसनीय नहीं होता है। गणित के मुख्य-मुख्य टाॅपिक को ही प्रश्न-पत्र में सम्मिलित किया जा सकता है तथा बाकी टाॅपिक को प्रश्न-पत्रों में समुचित स्थान नहीं दिया जाता है।
(3.)वैकल्पिक प्रश्नों के कारण विद्यार्थियों को सम्पूर्ण पाठ्यक्रम को तैयार नहीं करने की छूट मिल जाती है। अधिकांशतः विद्यार्थी परीक्षा में आनेवाले प्रश्नों का अनुमान लगा लेते हैं और परीक्षा में सफल हो जाते हैं ।गणित के प्रश्न-पत्रों में प्रायः निश्चित टाॅपिक पर प्रश्न आते हैं तथा गत वर्षों के प्रश्न-पत्रों को देखकर आनेवाले प्रश्नों की सामान्य जानकारी विद्यार्थियों को मिल जाती है।
(4.)गणित के प्रश्न-पत्रों में बहुधा पाठ्यपुस्तकों की घिसी-पिटी तथा जानी-पहचानी समस्याएँ बार-बार आती हैं तथा विद्यार्थी इनके हल याद कर लेते हैं। इस प्रकार विद्यार्थियों की समस्या हल करने की क्षमता का सही मूल्यांकन नहीं हो पाता है। ज्यामिति के अनेक प्रमेय वैसे के वैसे परीक्षाओं में पूछे जाते हैं तथा विद्यार्थी इनको रट लेते हैं। ज्यामितीय सिद्धान्तों के बारे में स्पष्टता, चिंतन, मौलिकता एवं विश्लेषण की क्षमता का परीक्षण वर्तमान परीक्षा प्रणाली में सम्भव नहीं है। समस्याओं का निर्माण नई परिस्थितियों के तथ्यों को लेकर नहीं किया जाता।
(5.)गणित के प्रश्न-पत्रों में अधिकांशतः ऐसे प्रश्नों का प्रादुर्भाव होता है जिनमें विद्यार्थियों को गणनाएँ अधिक करनी पड़ती हैं। विद्यार्थी इन गणनाओं को यंत्रवत करते हैं तथा उनके मानसिक विकास एवं गणितीय चिंतन के स्तर का मूल्यांकन नहीं हो पाता है।
(6.)गणित मुख्यतः सिद्धान्तों, प्रत्ययों, सम्बन्धों, संकल्पनाओं आदि का विषय है। इस विषय को सीखने का उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी जीवन में अर्जित ज्ञान, दक्षताओं, रुचियों आदि का उपयोग कर समस्याओं को हल कर सकें। गणित के प्रश्न-पत्रों में सिद्धान्तों, प्रत्ययों,संकल्पनाओं, सम्बन्धों आदि के प्रश्नों की संख्या बहुत कम होती है तथा इनकी उपलब्धि की परीक्षा अच्छे प्रश्नों द्वारा ही सम्भव है।
(7.)गणित अध्यापन, परीक्षा को ध्यान में रखकर ही किया जाता है। इसलिए गणित अध्यापन के महत्त्वपूर्ण उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए वांछनीय प्रयास सम्भव नहीं हो पाते। गणित के अध्यापक से विद्यार्थियों में गणित के सिद्धान्तों की व्याख्या करना, परस्पर मिलती-जुलती प्रक्रियाओं में विभेद करना, निष्कर्षों का सही अनुमान लगाना, तथ्यों की उपयुक्तता के बारे में निर्णय करना, सामान्य-निष्कर्षों को निकालना आदि का विकास होना चाहिए तथा इनकी उपलब्धियों का परीक्षाओं में मापन होना चाहिए। किन्तु गणित की वर्तमान परीक्षाओं में इनका सम्पूर्ण मापन नहीं होता है।
(8.)गणित की उपलब्धियों का मूल्यांकन वर्ष में गिनी-चुनी परीक्षाओं से सम्भव नहीं है। मूल्यांकन एक निरन्तर प्रक्रिया है तथा विद्यार्थियों का मूल्यांकन निरन्तर किया जाना चाहिए। एक या दो परीक्षाओं के परिणाम वैध नहीं माने जा सकते हैं क्योंकि सम्पूर्ण पाठ्यक्रम का मूल्यांकन अर्द्धवार्षिक एवं वार्षिक परीक्षाओं से सम्भव नहीं है। गणित के विभिन्न टाॅपिकों के अध्यापन की समाप्ति के साथ ही परीक्षा द्वारा यह जाँच होनी चाहिए कि विद्यार्थी अमुक टाॅपिक से कितना सीख सके हैं तथा किन-किन पक्षों के बारे में उपचारात्मक अध्यापन की आवश्यकता है। गणित के अध्ययन से विद्यार्थियों में अनेक वैयक्तिक गुणों का विकास होना चाहिए जैसे-परिश्रम करने की आदत, नियमितता, परिशुद्धता, धैर्य, सत्य के प्रति निष्ठा, एकाग्रता आदि। वर्तमान परीक्षा प्रणाली में इन वैयक्तिक गुणों का मूल्यांकन नहीं किया जाता है।
(9.)प्रश्न-पत्र में बोध प्रश्नों की संख्या अधिक होनी चाहिए। निबन्धात्मक प्रश्नों की संख्या कम हो तथा नवीन प्रकार के प्रश्नों की संख्या अधिक हो। इस प्रकार सम्पूर्ण पाठ्यक्रम में से प्रश्नों को प्रश्न-पत्र में सम्मिलित किया जा सकता है।
(10.)understanding,concept,Application, Interpretation, Discrimination आदि से संबंधित प्रश्नों का गणित के प्रश्न-पत्रों में बाहुल्य होना चाहिए। विद्यार्थी गणितीय प्रत्ययों एवं सम्बन्धों के बारे में सही चिंतन कर सही निष्कर्ष निकाल सके-यह अपेक्षा मूल्यांकन का आधारभूत सिद्धान्त होना चाहिए।
(11.)गणित की परीक्षाओं के परिणामों का प्रभाव कक्षा में अध्ययन तथा अध्यापन के स्तरों पर पड़ना चाहिए। परीक्षा के परिणामों का ज्ञान विद्यार्थियों एवं अध्यापकों के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। अध्यापन विधियों को सुधारने की संभावना परीक्षाओं के परिणामों की जानकारी पर निर्भर करती है। यदि विद्यार्थियों को भी उनकी त्रुटियों का ज्ञान हो तो वे उनको दूर करने के लिए प्रेरित होंगे।
(12.)गणित की परीक्षाओं में औपचारिकता का पुट अधिक नहीं होना चाहिए। गणित का अध्यापक ही इन परीक्षाओं के लिए प्रश्न-पत्रों का निर्माण करे जिससे कि अध्यापन तथा परीक्षा में सहसम्बन्ध स्थापित किया जा सके। गणित का अध्यापक अपने विद्यार्थियों की प्रगति की सही जानकारी परीक्षाओं द्वारा ज्ञात कर सके-यह बात अधिक महत्त्वपूर्ण है।
यदि आर्टिकल पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें जिससे वे भी लाभ उठाए ।आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट करके बताएं। इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें। 

2.अच्छी परीक्षाओं की विशेषताएँ (-Features of good exams) -

(1.)परीक्षा वैध होनी चाहिए। एक प्रश्न वैध जब माना जाएगा जब उसके द्वारा उसी उद्देश्य का परीक्षण हो रहा है जिसको ध्यान में रखकर उसे बनाया गया है।
(2.)परीक्षा विश्वसनीय होनी चाहिए ।
(3.)परीक्षा के प्रश्न वस्तुनिष्ठ होने चाहिए।
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(4.)परीक्षा के प्रश्न विभेदकारी होने चाहिए।
(5.)प्रश्न-पत्र व्यापक होने चाहिए।
(6.)परीक्षा का प्रयोग तथा अंक देने की क्रिया वस्तुनिष्ठ, सुविधाजनक एवं सरल होनी चाहिए।

3.गणित की परीक्षाओं में सुधार:कतिपय सुझाव (Improvement in Mathematics Exams: Certain Tips)-

(1.)परीक्षा के प्रश्न सम्पूर्ण पाठ्यक्रम में होने चाहिए।
(2.)समस्याओं का निर्माण जीवन से संबंधित सही तथ्यों के आधार पर होना चाहिए तथा घिसी-पिटी समस्याओं को प्रश्न-पत्र में नहीं देना चाहिए।
(3.)प्रत्येक प्रश्न का उद्देश्य स्पष्ट हो तथा उस प्रश्न द्वारा उससे सम्बन्धित व्यवहारगत परिवर्तन का ही मूल्यांकन होता हो।
(4.)understanding,concept,Application, Interpretation, Discrimination आदि उद्देश्यों से सम्बन्धित प्रश्नों का बाहुल्य होना चाहिए ।परीक्षा द्वारा मौलिकता का परीक्षण होना चाहिए।
(5.)प्रश्नों की संख्या सीमित नहीं होनी चाहिए।
(6.)निबन्धात्मक प्रश्नों की संख्या कम तथा नवीन प्रकार के प्रश्नों की संख्या अधिक होनी चाहिए।
(7.)परीक्षाओं के परिणामों की जानकारी का प्रभाव अध्ययन तथा अध्यापन को सुधारने में सहायक हो।
(8.)गणित के प्रश्न-पत्र में वैकल्पिक प्रश्न न हों।
(9.)विद्यार्थियों में रटने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन नहीं मिलता हो।
(10.)प्रश्नों की भाषा सरल एवं बोधगम्य हो।प्रश्नों की कठिनाई का स्तर विद्यार्थियों की क्षमता के अनुसार हो। 

Monday, 18 November 2019

Talent Search Test in Mathematics Olympiad

November 18, 2019

 Talent Search Test in Mathematics Olympiad

1.टैंलेट सर्च टेस्ट इन मैथमेटिक्स ओलंपियाड का परिचय (Introduction to Talent Search Test in Mathematics Olympiad) - 

किसी मनुष्य के अच्छे कार्यों, सेवा, परोपकार का स्मरण अक्सर मृत्यु के बाद किया जाता है। हमें उसके जीवित रहने की अवस्था में उसके अच्छे कार्यों का अनुभव नहीं होता है।कोई मनुष्य जब अच्छा कार्य करता है तो बिना किसी हवाबाजी या प्रचार-प्रसार के करता रहता है जिससे लोगों का ध्यान उसकी तरफ नहीं जाता है। हमारा ध्यान तब जाता है जब वह नहीं रहता है तथा उसकी कमी हमें खटकती है।
यहाँ तक कि उसके अच्छे कार्यों का उसके जीवित रहने पर हम उसका विरोध भी करते हैं। लेकिन मरने के बाद जब उसका महत्त्व का पता चलता है तो हम उसके पुण्य स्मरण में शिक्षा संस्थान, चिकित्सालय, धर्मशालाएं इत्यादि का निर्माण करवाते हैं या उनके नाम पर अवार्ड की घोषणा करते हैं।
बहुत से लोग तो ऐसे नेक इन्सान को जानते नहीं है परन्तु मरने के बाद ही जानते हैं । नीति में कहा है कि -
बहुधा मरे हुए मनुष्य के गुण अधिक फैलते हैं और खिलते हैं जैसे अगर के जले हुए टुकड़े की सुगन्ध बहुत फैलती है।
बिहार मैथेमेटिक्स सोसाइटी ने श्री वशिष्ठ नारायण सिंह की स्मृति में जीनियस आॅफ जीनियस इन मैथेमेटिक्स अवार्ड बच्चों को देगा। श्री वशिष्ठ नारायण सिंह महान् गणितज्ञ थे तो स्वाभाविक है कि उनकी स्मृति में कोई अवार्ड बच्चों को दिया जाता । हो सकता है कि बिहार मैथेमेटिक्स सोसाइटी की तरह उनकी स्मृति में इसी प्रकार कोई ओर संस्था या सरकार अवार्ड की घोषणा कर दे ।
हमारा विचार यह है कि भारत में महान् प्रतिभाओं को जीवित अवस्था में उनकी ठीक से देखभाल तथा ईलाज की व्यवस्था नहीं की जाती है और मृत्योपरांत उनके स्मरण में कोई न कोई अवार्ड की घोषणा कर दी जाती है। हम मृत्योपरांत अवार्ड का विरोध नहीं कर रहे हैं। हम इस बात की ओर ध्यान दिलाना चाहते हैं कि इन अतिप्रतिभाशाली प्रतिभाओं को उचित चिकित्सा सुविधा समय पर उपलब्ध करायी जाए तो ये प्रतिभाएं भारत के हित में कितना महान् कार्य खड़ा कर सकती है इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। आज कोई भी नेता यदि बीमार हो जाता है तो उनकी तत्काल देश और विदेश में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाती है वहीं दूसरी ओर श्री वशिष्ठ नारायण सिंह 44 वर्ष तक बीमारी से जूझते रहे लेकिन केवल खानापूर्ति के लिए उनको चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी गई। यदि उनको उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाती तो वे न केवल ठीक हो जाते बल्कि देश के लिए उनकी सेवाओं से लाभ उठाया जा सकता था। इसी प्रकार श्री निवास रामानुज का अल्पायु अर्थात् 30-31 वर्ष की अवस्था में निधन हो गया था। भारत में प्रतिभाओं की कमी नहीं है परन्तु उनकी उचित देखभाल व समय पर उचित सुविधा मुहैया नहीं कराने के कारण हमें व देश को इसका नुकसान उठाना पड़ता है। यह कैसा विरोधाभास है कि ऐसी प्रतिभाएं सुविधाओं के अभाव में जीवन से संघर्ष कर रही होती है परन्तु मरने के बाद उनको सम्मानित किया जाता है, उनकी याद में अवार्ड घोषित किए जाते हैं। विश्व स्तर पर यदि भारत को अपनी पहचान बनानी है तो हमें प्रतिभाओं को उचित सुविधाएँ उपलब्ध करानी होगी और सम्मानित करना होगा। उनके कष्टों और कठिनाइयों में सक्षम लोगों व सरकार को उचित कदम उठाने होंगे और उनके कष्टों में साथ खड़ा होना होगा। ऐसा करके हम उन पर कोई एहसान नहीं कर रहे हैं बल्कि उन प्रतिभाओं का समाज और देश पर ऋण है, इसलिए केवल हम अपना कर्त्तव्य पूरा कर रहे हैं। वरना उनके ऋण को तो किसी भी कीमत पर चुकाया ही नहीं जा सकता है। आगे किसी भी प्रतिभा के साथ ऐसा नहीं हो इस प्रकार की व्यवस्था होनी चाहिए तभी सच्चे अर्थों में श्री वशिष्ठ नारायण सिंह जैसी प्रतिभाओं के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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2.भारत के महान् गणितज्ञ श्री वशिष्ठ नारायण सिंह (Great Mathematician Shri vashishtha Narayan Singh) - 

Talent Search Test in Mathematics Olympiad
Talent Search Test in Mathematics Olympiad
भारत के स्टीफन हॉकिन्स जाने वाले महान गणितज्ञ डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह अस्पताल परिसर के बाहर स्ट्रेचर पर आज ठीक वैसे ही पड़े थे जैसे बिहार के छपरा में डोरीगंज में वर्षो पहले वो कूड़ा के ढ़ेर पर पड़े मिले थे।
आज से छब्बीस साल पहले जब इनकी पहचान हुई थी तो पटना से दिल्ली तक के अखबारों में इनकी खबरें सुर्खियों में थीं। उन दिनों पटना नवभारत टाईम्स में गुंजन सिन्हा जी हमसे नियमित व्यंग्य लेख लिखवा रहे थे। एक कांठी बाबू कैरेक्टर बनाया था हमने जो हर साप्ताह किसी ना किसी से रू-बरू होते और उनकी बातें कहते। इन्हीं दिनों वशिष्ठ नारायण जी के मिलने की सूचना मिली और देश-दुनिया के अखबारों में इनकी खबरें चलने लगीं। कांठी बाबू  उस सप्ताह वशिष्ठ बाबू की चर्चा मोहल्ले के एक नेताजी से कर रहे थे। सवाल कांठी बाबू का था और जवाब नेताजी का वशिष्ठ नारायण जी के बारे में।
अब, आज सुबह जो हाल देखा-पीएमसीएच कैम्पस के बाहर स्ट्रेचर पर वशिष्ठ बाबू की डेड बॉडी पड़ी है उनके भाई इधर-उधर एम्बुलेंस के लिए भटक रहे  आग्रह कर रहे लेकिन अस्पताल प्रशासन एक एम्बुलेंस देने में सक्षम नहीं। कुछ लोगों को कॉल से सूचना दी, सोशल मीडिया पर चलने लगा। न्यूज चैनल भी चलने लगा फिर लगभग दो घंटे बाद एम्बुलेंस मिला और अभी बारह बजे इनके पार्थिव शरीर के पास अचानक इक्के-दुक्के नेता से लेकर जिला प्रशासन फोन कान में लगाए इधर से उधर अपनी रफ्तार में हैं। मीडिया है और मीडिया के कैमरे के सामने कुर्सी-फुल माला के लिए फोन पर बोलते यही लोग। अब मुख्यमंत्री भी आने वाले हैं, फुलों का गोल गुलदस्ता भी
अभी-अभी आ गया है दो दल के दो नेता में यहां आने का श्रेय पहले लेने में मारापीटी की नौबत भी सबके सामने आ चुकी है। सीएम आनेवाले हैं तीन तो आज बजिए जाएगा पत्रकार भी एक दुसरे के कान में फुसफुसा रहे। सत्ताधरीदल का एक पायजामा-कुरता नेता जैसे कैमरा गाड़ी के अंदर की तरफ होता है, वशिष्ठ बाबु अमर रहें चिल्लाना शुरू कर देता है।आज तीन घंटे का ये सारा ड्रामा देख कर मुझे वही छब्बीस साल पुराने अपने लेख वाले कांठी बाबू याद आए। हू-बहू वही व्यवस्था, वही हाल और सरकार का वही रवैया। उस वक्त के नेताजी का कांठी बाबू को जवाब और आज हमारे सुशासन सरकार की उपेक्षा वाली वही कहानी।कांठी बाबू की वो कहानी-नेताजी का वशिष्ठ यहां पोस्ट कर रहा हूं।
पहली बार वशिष्ठ जी से मिला था फरवरी दो हजार तेरह में। आरा से संजय साश्वत फोन किए थे उन्होंने कहा था कि वशिष्ठ बाबू याद कर रहे हैं । आज के अखबार में छपे कार्टून के बारे में वे पूछे रहे हैं- ई के बनावेला? दूसरे ही दिन यवनिका के उस कार्यक्रम में हम आरा पहुंचे जिस मंच पर उनके साथ हमें भी बैठने का अवसर मिला था और अपनी जो किताब कार्टून की दी वो उस दिन के पूरे कार्यक्रम में एक-एक पन्ना पलटते रहे और निहारते रहे। उनके लिए कांठी बाबू का वो लेख भी लेकर गया था। फिर दूसरी बार उनके गांव बसंतपुर गया उनकी बांसुरी सुनी उनकी मां से भी खूब बातें हुईं। फिर जब-तब
आना - जाना होता रहा। उनका जन्मदिन हो या और दिन। ये सुकुन मिलता रहा कि हर बार वो पहचान लेते और उनके भाई ये देखकर मुस्कुरा रहे होते। कई लोगों से सुना कि बहुत देर तक वो किसी को बर्दाश्त नहीं करते अपने पास। गुस्सा जाते हैं ये हमने भी दो-चार बार देखा है। लेकिन अपने लिए नहीं पाया कभी ऐसा। पिछले महीने जब अस्पताल गया तो वहीं पड़े अखबार में अपना कार्टून दिखाकर बोला-पहचाने सर? उनका जवाब एक टक उसे देख और फिर मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखते हुए बोले-ई तऽ तूहीं बनावे वाला बाड़ऽ...और अच्छी सूचना ले कर लौटा था कि स्वस्थ होकर वशिष्ठ बाबू लौटे
अपने घर। अब ना वो बांसुरी की आवाज मिलेगी ना कागज के टूकड़ों पर बुदबुदाते हुए हमेशा कुछ लिखते रहने वाले वशिष्ठ बाबू। नमन है आपको।
# 2 अप्रैल 1946 : जन्म.
# 1958 : नेतरहाट की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान.
# 1963 : हायर सेकेंड्री की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान.
# 1964 : इनके लिए पटना विश्वविद्यालय का कानून बदला। सीधे ऊपर के क्लास में दाखिला. बी.एस-सी.आनर्स में सर्वोच्च स्थान.
# 8 सितंबर 1965 : बर्कले विश्वविद्यालय में आमंत्रण दाखिला.
# 1966 : नासा में.
# 1967 : कोलंबिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमैटिक्स का निदेशक.
# 1969 : द पीस आफ स्पेस थ्योरी विषयक तहलका मचा देने वाला शोध पत्र (पी.एच-डी.) दाखिल.
# बर्कले यूनिवर्सिटी ने उन्हें "जीनियसों का जीनियस" कहा.
# 1971 : भारत वापस.
# 1972-73: आइआइटी कानपुर में प्राध्यापक, टाटा इंस्टीट्यूट आफ फंडामेंटल रिसर्च (ट्रांबे) तथा स्टैटिक्स इंस्टीट्यूट के महत्वपूर्ण पदों पर आसीन.
# 8 जुलाई 1973 : शादी.
# जनवरी 1974 : विक्षिप्त, रांची के मानसिक आरोग्यशाला में भर्ती.
# 1978: सरकारी इलाज शुरू.
# जून 1980 : सरकार द्वारा इलाज का पैसा बंद.
#1982 : डेविड अस्पताल में बंधक.
# नौ अगस्त 1989 : गढ़वारा (खंडवा) स्टेशन से लापता.
# 7 फरवरी 1993 : डोरीगंज (छपरा) में एक झोपड़ीनुमा होटल के बाहर फेंके गए जूठन में खाना तलाशते मिले.
# तब से रुक-रुक कर होती इलाज की सरकारी/प्राइवेट नौटंकी.
# अक्टूबर 2019 : पीएमसीएच के आईसीयू में.
(ठीक होकर घर लौटे).
# 14 नवंबर 2019 : निधन.
(आज अब और कुछ नहीं। सिर्फ विनम्र श्रद्धांजलि।).
साभार- पवन टून
#ॐ
अब पछताए होत क्या, जब चिड़ियाँ चुग गई खेत😢
सही समय से ईलाज व अंतिम समय में Ambulance🚑उपलब्ध न करा पाई सरकार।
समय निकल जाने पर पछताने से क्या लाभ।
ईश्वर ऐसे महान आत्मा को शांति प्रदान करें। ओम् शांति

3.टैलेंट सर्च टेस्ट इन मैथमेटिक्स ओलंपियाड में सनोज व सौरभ टॉपर(Sanoj and Saurabh Topper in Talent Search Test in Mathematics Olympiad) - 

Publish Date:Sat, 16 Nov 2019
पटना। बिहार मैथमेटिकल सोसाइटी ने शनिवार को 22 सितंबर को आयोजित टैलेंट सर्च टेस्ट इन मैथमेटिक्स ओलंपियाड की सूची जारी कर दी है।...
पटना। बिहार मैथमेटिकल सोसाइटी ने शनिवार को 22 सितंबर को आयोजित टैलेंट सर्च टेस्ट इन मैथमेटिक्स ओलंपियाड के सफल प्रतिभागियों की सूची जारी कर दी है। जूनियर व सीनियर वर्ग में 30-30 बच्चे शामिल हैं।
सीनियर वर्ग में प्रथम सनोज एस विजेंद्र, डीएवी पुनाईचक, द्वितीय मनोज कुमार, उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय अरवल, तृतीय उत्तम कुमार, उत्क्रमित राजकीय मध्य विद्यालय अरवल शामिल हैं। जूनियर वर्ग (कक्षा 6-7) में प्रथम स्थान पर सौरभ कुमार उत्क्रमित राजकीय मध्य विद्यालय अरवल, द्वितीय सृष्टि कुमारी उत्क्रमित मध्य विद्यालय, मुबारकपुर, अरवल, तृतीय इसानआलम, डीएवी खगौल शामिल हैं। कॉलेज ऑफ कॉमर्स, आ‌र्ट्स एंड साइंस में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव के ओएसडी विनोदानंद झा ने कहा, बिहार और तमिलनाडु के बच्चे शुरू से ही गणित में अव्वल रहते हैं। इस ओलंपियाड का नियमित आयोजन राज्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा। -वशिष्ठ नारायण सिंह के नाम पर मिलेगा अवार्ड
सोसाइटी के संयोजक डॉ. विजय कुमार ने बिहार मैथमेटिकल सोसाइटी वशिष्ठ नारायण सिंह की स्मृति में जीनियस ऑफ जीनियस इन मैथमेटिक्स अवार्ड बच्चों को देगा। इससे कॉलेज के विद्यार्थियों को भी जोड़ा जाएगा। टैलेंट सर्च टेस्ट इन मैथमेट्कि्स ओलम्पियाड 2020 में वर्ग छह से 12 के लिए दिसंबर से आवेदन लिए जाऐंगे। सरकारी स्कूलों के बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं
पटना साइंस कॉलेज के प्राचार्य प्रो. केसी सिन्हा ने कहा, बिहार के गावों में रहने वाले सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। सफल प्रतिभागियों का साक्षात्कार प्रो. केसी सिन्हा, प्रो. डीएन शर्मा, प्रो. पीके चक्रवर्ती, मुखदेव सिंह, प्रो. शैलेंद्र कुमार सिंह ने किया। अतिथियों का स्वागत प्राचार्य प्रो. तपन कुमार शांडिल्य ने किया। मौके पर प्रो. अनिल कुमार, प्रो. संतोष कुमार, प्रो. राजेश शुक्ला, मिशन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समिति के उपसंयोजक डॉ. अरुण दयाल, डॉ. मंजय कश्यप, सूर्यनारायण वर्मा, राजीव कुमार शर्मा, अजय पटेल आदि उपस्थित थे।