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Mathematician CS Seshadri contribution

1.गणितज्ञ सीएस शेषाद्रि का योगदान का परिचय (Introduction to Mathematician CS Seshadri contribution)-

गणितज्ञ सीएस शेषाद्रि  का योगदान (Mathematician CS Seshadri contribution) के बारे में अध्ययन करेंगे।हाल ही में 17जुलाई,2020 को प्रख्यात गणितज्ञ सी एस शेषाद्रि का निधन हो गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा है कि प्रोफेसर सीएस शेषाद्रि के निधन से हमने एक बौद्धिक विद्वान खो दिया है जिन्होंने गणित के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है। उन्होंने उनके निधन पर गहरा दु:ख जताते हुए कहा कि बीजगणितीय ज्यामिति के क्षेत्र में उनके योगदान को पीढ़िया याद रखेंगी।
प्रख्यात गणितज्ञ कांजिवरम श्रीरंगाचारी शेषाद्रि यानि सीएस शेषाद्रि ने चेन्नई के मंडावली स्थित अपने घर में शुक्रवार को अंतिम सांस ली।वह 88 साल के थे।साल 2009 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था।
उन्होंने गणित के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। उन्होंने खासकर बीजगणितीय ज्यामिति के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया।उनका निधन गणित के लिए बहुत बड़ा नुकसान है।
सीएस शेषाद्रि ने अपने कैरियर की शुरुआत टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में स्नातक छात्रों के पहले बैच के रूप में की थी।1985 में वह चैन्नई के गणितीय विज्ञान संस्थान चले गए।1989 में उन्हें स्कूल आफ मैथमेटिक्स शुरू करने का मौका मिला,जो स्पिक(SPIC) साइंस फाउंडेशन का हिस्सा था। उन्हें 1988 में राॅयल सोसायटी का फैलो और 2010 में अमेरिका ने नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस का फाॅरेन एसोसिएट चुना गया।
कोंजीवरम श्रीरंगचारी शेषाद्रि का जन्म 29 फरवरी,1932 को कांचीपुरम में हुआ था।सीएस शेषाद्रि के पिता सी रंगचारी (चैन्नई के 60 किमी दक्षिण में एक शहर,चेंगलपुत में एक प्रसिद्ध वकील),माता श्रीमती चूड़ामणि के ग्यारह पुत्रों में सबसे बड़े थे।
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2.सीएस शेषाद्रि की शिक्षा और कैरियर (CS Seshadri’s education and career)-

शेषाद्रि ने स्कूली शिक्षा चेंगलपुट में प्राप्त की।स्कूली शिक्षा के पश्चात 1948 में चैन्नई के लोयोला कॉलेज में प्रवेश लिया। सन् 1953 में गणित में बीए (आनर्स) की डिग्री के साथ स्नातक किया।कालेज के समय में प्रोफेसर एस.नारायणन और एफआर सी रेसीन ने शेषाद्रि को गणित को पेशेवर लेने के लिए निर्णायक भूमिका निभाई। शेषाद्रि टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, मुम्बई में एक छात्र के रूप में 1953 में ज्वाइन किया। उन्होंने 1958 में बाॅम्बे विश्वविद्यालय से अपनी पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। पीएचडी में उनका विषय था “Generalised multiplicative meromorphic functions on a complex manifold”.उनके थीसिस सलाहकार प्रोफेसर के चन्द्रशेखरन थे जिन्होंने शेषाद्रि के गणितीय कैरियर को आकार प्रदान किया,जैसाकि उन्होंने अन्य लोगों के लिए किया।
शेषाद्रि ने 1957-1960 का समय पेरिस में बिताया। वहां वे कई गणितज्ञों के सम्पर्क में रहे। उनमें फ्रांसीसी स्कूल के गणितज्ञ थे जैसे-शेववली,कार्टन,श्वार्टज,ग्रोथेंटिक और सेरे।
वह 1960 में TFIR में लौटे और 1984 तक स्कूल आफ मैथमेटिक्स के संकाय के सदस्य रहे। यहां पर उन्होंने एक्टिव स्कूल आफ ऐलजेब्रिक ज्योमेट्री की स्थापना का उत्तरदायित्व निभाया।वे 1984 में इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमेटिकल साइंसेज,चैन्नई में चले गए।1989 में शेषाद्रि चैन्नई मैथेमेटिकल इंस्टीट्यूट के निदेशक बने।तब उसे SPIC Mathematical Institute कहा जाता था जिसकी स्थापना एसी मुथैया द्वारा की गई थी।

3.सीएस शेषाद्रि द्वारा प्राप्त पुरस्कार (Award received by CS Seshadri)-

गणितज्ञ सीएस शेषाद्रि का योगदान (Mathematician CS Seshadri contribution) के लिए उन्हें कई पुरस्कार प्राप्त हुए। उन्हें 1972 में भटनागर पुरस्कार मिला।1988 में लंदन की राॅयल सोसायटी का फेलो चुना गया। उन्होंने गणित के विभिन्न केन्द्रों में प्रतिष्ठित पदों पर कार्य किया है।2006 में शेषाद्रि को जैकब पालिस के साथ TWAS विज्ञान पुरस्कार से सम्मानित किया गया।2008 में शेषाद्रि को एच.के. फिरोदिया अवार्ड फाॅर एक्सीलेंस इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी,पुणे तथा रवीन्द्र शांतिनिकेतन विश्वभारती विश्वविद्यालय कोलकाता द्वारा सम्मानित किया गया।2009 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा पद्मभूषण पुरस्कार दिया गया।2010 में यूएस नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज के फोरेन एसोसिएट चुने गए।जब शेषाद्रि 29 फरवरी,2012 को अस्सी वर्ष के हो गए तो चैन्नई गणितीय संस्थान (Chennai Mathematical Sciences) और गणितीय विज्ञान संस्थान (Mathematical Sciences Institute) द्वारा संयुक्त रूप से उनके सम्मान में अन्तर्राष्ट्रीय मैथमेटिक्स कान्फ्रेन्स आयोजित किया गया।

4.गणितज्ञ सीएस शेषाद्रि का गणित में योगदान (Mathematician CS Seshadri contribution in mathematics)-

चैन्नई मैथमेटिक्स इंस्टीट्यूट को वर्तमान स्वरूप में 1998 में स्थापित किया गया था परन्तु इसकी जड़ें 1989 में जाती है जब शेषाद्रि ने नए इंस्टीट्यूट की थी तब स्कूल आफ मैथमेटिक्स,SPIC साइंस फाउंडेशन कहलाता था।चैन्नई गणितीय संस्थान ( CMI) भारत में एक अनूठी संस्था है जो स्नातक शिक्षा के अनुसंधान के साथ एकीकृत करने का प्रयास करती है।
शेषाद्रि की दृष्टि से यह एमएससी विषय उच्च शिक्षा के वातावरण में बढ़ा हुआ है।यह एक बहादुर उद्यम असाधारण विरोध और संदेहवाद यहां तक कि अपने बहुत करीबी दोस्तों और शुभचिंतकों के सामने।यह उनका सपना था कि शिक्षा का एक केन्द्र बनाया जाए जिसकी महान् केन्द्रो के साथ तुलना कर सकते हैं। जैसे पेरिस में इकोले नाॅर्मले, इंग्लैंड में आॅक्सफोर्ड और अमेरिका में कैम्ब्रिज व हार्वर्ड विश्वविद्यालय।
भारत में प्रतिभाशाली छात्रों को इस अद्वितीय में सीखने के लिए शैक्षणिक माहौल और संभावनाएं देता है,यह सक्रिय शोधकर्ताओं के भाग लेने के लिए अवसरों को खोलता है।प्रयोग जो मानते हैं कि भारत में गणित के विकास पर एक चिरस्थायी प्रभाव पड़ेगा।यह अतिशयोक्ति नहीं होगी कि गणित की पढ़ाई के लिए चैन्नई गणितीय संस्थान अब दुनिया के सर्वश्रेष्ठ स्कूलों में एक के रूप में दर्जा दिया गया है।यह वास्तव में अपनी प्रगति में पहला कदम है और अभी शेषाद्रि के सपने को पूरा करने के लिए बहुत कुछ किया जाना चाहिए।

5.गणितज्ञ सीएस शेषाद्रि की पत्नी और परिवार (Mathematician CS Seshadri wife and family)-

सीएस शेषाद्रि ने 1962 में सुन्दरी से शादी की।उनके दो पुत्र नरसिम्हन और गिरधर हैं।

6.शेषाद्रि का गणितीय कार्य (Seshadri’s mathematical work)-

गणितज्ञ सीएस शेषाद्रि का योगदान (Mathematician CS Seshadri contribution) इतना है कि उसको देखकर और सुनकर आश्चर्य होता है।
पिछले पचास वर्षों से गणित से जुड़े रहे हैं।उनका योगदान towering figure in the Mathematical horizon, development of moduli problems तथा geomatric invariant theory as well as reprensentation theory of algebraic groupsपर केन्द्रित रहा है।2012 में उनका कलेक्टेड पेपर्स दो संस्करणों में प्रकाशित किया गया था और लगभग 1700 पृष्ठों पर चला था।इन संस्करणों में विषयवस्तु उनके गणितीय योगदानों की विविधता का सच्चा प्रतिबिम्ब है,जे.पी. सेरे ने अपने प्रसिद्ध पत्र फिशक्यु एलजेब्रिक कोहरेन्स में निम्नलिखित प्रश्न प्रस्तुत करते हैं:
“Is a finitely generated projective module over the polynomial ring in several variables free or equivalently,is an algrabraic vector bundle over the n-dimensional affine space tribal?”
शेषाद्रि ने सेरे की सरल समस्या-projective modules in two variables was a catalyst for much of the later development in this area.
इस काम ने बहुत ध्यान आकर्षित किया जिसका समापन प्रसिद्ध क्विलन-सुसलिन प्रमेय में हुआ।1950 के उत्तरार्ध में पेरिस में शेवेल्ले और सेरे के प्रभाव में शेषाद्रि के रहने के दौरान कागज लिखा गया था। उनका शुरुआती काम पिकार्ड किस्मों और सम्बन्धित समस्याओं पर है जिसकी जड़ें चेवेल्ली सेमिनार में है जहां उन्होंने कई महत्त्वपूर्ण खुलासे किए।

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