7 Top Tips on How to Stop Indiscipline
1.अनुशासनहीनता को कैसे रोकें की 7 टॉप टिप्स (7 Top Tips on How to Stop Indiscipline),अनुशासनहीनता को कैसे रोकें? (How to Prevent Indiscipline?):
- अनुशासनहीनता को कैसे रोकें की 7 टॉप टिप्स (7 Top Tips on How to Stop Indiscipline) में अनुशासनहीनता को समझने से पूर्व अनुशासन को समझना आवश्यक है।जिन नियमों और नैतिकता का पालन कोई व्यक्ति अपने उद्देश्य की पूर्ति हेतु करता है अनुशासन कहलाता है।
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2.अनुशासनहीनता के भागीदार (Partners in Indiscipline):
- अनुशासन की उपेक्षा करना ही अनुशासनहीनता है।अनुशासनहीनता भारत की समस्या नहीं है,अपितु इस बढ़ती हुई बीमारी से समूचा विश्व चिंतित है।फलस्वरूप प्रजातांत्रिक देशों में राजनीतिक अस्थिरता,सामाजिक व्यवस्था के प्रति चिंता,सांस्कृतिक मूल्यों का विघटन तथा नैतिक मूल्यों का ह्रास हुआ है।अनुशासन की उपेक्षा करने से आज हमारा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।इससे समाज में अशांति व अस्थिरता जन्म ले रही है।
- शासन के उच्च वर्ग से लेकर सड़क के भिखारी तक में इस रोग ने जन्म ले लिया है,जिसके कारण तो खोजें जा सकते हैं,लेकिन निदान असंभव हो रहा है।अनुशासन की उपेक्षा करना,आज हर आदमी के लिए सहज एवं प्रतिष्ठा का प्रतीक बन गया है।अपरिपक्व व अनुभव शून्य व्यक्ति जब अनुशासन की उपेक्षा करता है तो स्थिति अत्यधिक घातक हो जाती है।उस समय तोड़-फोड़ आगजनी व हिंसा का व्यापक प्रचार विनाश लीला आरंभ कर देता है।आज युवावर्ग अनुशासनहीनता का शिकार हो चला है।इससे सभी चिंतित है और वे इस प्रश्न का समाधान खोजने के लिए विकल है,क्योंकि यह स्थिति अराजकता तथा अंधकारमय भविष्य व निराशा को व्यक्त कर रही है।अनुशासन की उपेक्षा केवल एक विशेष वर्ग ही नहीं कर रहा है,अपितु हर वर्ग इसके पंजे में फंसा हुआ है।इसके विपरीत आचरण करने का अर्थ-उसकी उपेक्षा करना है।बंधी हुई स्वीकृत व्यवस्था के प्रति विद्रोह तथा निरर्थक प्रश्नों को लेकर दुराग्रहपूर्ण आचरण ही अनुशासन की उपेक्षा करना कहा जाता है।
- भारत के जनजीवन के हर दृष्टिकोण को हम गौर से देखें तो हमें विदित होगा कि हर जगह अनुशासन की उपेक्षा हो रही है,चाहे वे निजी कार्यालय हों,सरकारी दफ्तर हों,शिक्षा संस्थान या कोई परिवार हो।जिस अनुशासन से व्यक्ति अपनी बौद्धिक,मानसिक,आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर हो सकता है,उसी की अपेक्षा कर वह आज कठिनाइयों और समस्याओं की मकड़ी के जाले में बँध गया है।
- भारत के शासक वर्ग जिन्हें देश-सेवा करनी चाहिए,वह भी अनुशासन की उपेक्षा कर रहे हैं।हमारे सांसद अपने व्यवहार द्वारा संसदीय शालीनता की समस्त मर्यादाएं तोड़ते जाते हैं।मार्शल द्वारा बाहर निकाला जाना,व्यवस्थाकर्मियों द्वारा डंडा-डोली करके उनको प्रायः सभा-भवन के बाहर निकाला जाना आदि।वे स्वयं अनुशासित नहीं है तो प्रजा कैसी होगी? यथा राजा तथा प्रजा अथवा राजा कालस्य कारणम्।गांधीजी ने सत्ताधीशों के सामने ‘ सादा जीवन उच्च विचार’ का आदर्श रखा था,लेकिन इसका कोई पालन नहीं कर रहा है।गांधी जी ने मंत्रियों सत्ताधीशों को मोटर आदि के उपयोग में अनुशासन रखने को कहा था।पर आज मोटर क्या,विशेष विमानों का उपयोग समस्त नीति-नियमों को धता बताकर किया जाता है।इसका अनुसरण सरकारी दफ्तरों में किया जा रहा है।दफ्तर के कर्मचारी/अधिकारी घरेलू कार्यों में भी इन वाहनों का उपयोग बेधड़क कर रहे हैं।
- हमारे राजनीतिज्ञ आज बुद्धि शून्य हो गए हैं और अत्याचार से पूर्ण हरकतों पर उतर पड़े हैं।इनके कारण आज हमारे जीवन में अर्नगलता और अविवेकशील विषमता समा गई है,उसका कहीं अंत नहीं दिखाई देता है।नेतागण कुर्सी की पदलोलुपता के कारण अपना कर्त्तव्य भूल गए हैं,उनके ही द्वारा बनाए गए नियमों की वह अवहेलना कर रहे हैं।आज हमारी यह जनता या जनसमूह द्रौपदी बन गई है जो स्वयं तो जुए में शरीक नहीं है,लेकिन उसकी रक्षा करने वाले उसे दांव पर लगाने के लिए अपना अधिकार समझते हैं।
3.समाज और परिवार में अनुशासनहीनता (Indiscipline in society and family):
- आज कार्यालयों,सरकारी संस्थाओं और कंपनियों में अराजकता व्याप्त हो चली है।सामान्य सी बात पर उपद्रव और आक्रोश का स्वर,नियमों की अवहेलना,साधारण सी बात हो जाती है।कर्त्तव्यबोध का प्रश्न समाप्त हो गया है।वह भाषणों तक सीमित हो गया है और केवल अधिकार की रटन रह गई है।अपनी मांगे पूरी करने के लिए कार्योलयों,मिलों के कर्मचारी हड़ताल का सहारा लेते हैं,आंदोलन करते हैं।ये सभी अनुशासन की अपेक्षा के परिचायक हैं,जिसका परिणाम सभी को भुगतना पड़ता है।
विद्यार्थी वर्ग अपनी बातें मनवाने के लिए अनुशासन को भंग करते हैं,वे कॉलेज के नियमों का भी उल्लंघन करते हैं।अनावश्यक मांग-पत्र को लेकर आंदोलन करना,शिक्षकों के साथ मार-पीट,शिक्षण-संस्थानों में आग लगाना,बुरी आदतों को ग्रहण करना आदि सभी अनुशासनहीनता के स्वयं सिद्ध प्रमाण हैं।यहाँ तो हर जगह अनुशासन की उपेक्षा हो रही है।इसी उपेक्षा से छात्रों में विनय,श्रद्धा,रुचि का सर्वथा अभाव हो चला है।राजनीति से प्रेरित होकर आए दिन ये कोई ना कोई विध्वंसात्मक झमेला खड़ा कर देते हैं,जो उसके वैयक्तिक जीवन के लिए घातक है। - समाज का मूल आधार अनुशासन होता है या कह सकते हैं कि अनुशासन के कारण ही समाज एक सूत्र में बँध सकता है।इन्हीं उपेक्षित व्यवहारों के कारण आज समाज बिखर रहा है।अनुशासनहीनता के कारण,समाज द्वारा बनाए गए नियमों की उपेक्षा की जा रही है।पिछले समय में ऐसे कथन कहे गए हैं जिन्हें सुनकर दुःख होता है कि भारत के माननीय भूतपूर्व प्रधानमंत्री एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सदृश उच्चासीन महानुभाव यह बात कहें कि आवश्यकता पड़ने पर हम संविधान को बदल देंगे न्यायालय के निर्णय को हम जूते की ठोकर पर मारते हैं।
- आज हमारे परिवारों में भी अनुशासन नहीं रहा है।आर्यों के द्वारा स्थापित संयुक्त परिवार प्रथा का आज विघटन हो रहा है।परिवार में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के विचार अलग-अलग होते हैं।परिवार के मुखिया द्वारा स्थापित मूल्यों का ह्रास हो रहा है,कारण ‘अपनी-अपनी डफली,अपना-अपना राग।’परिवार में आपसी फूट,वैमनस्य और बुराइयों ने अपना स्थान बना लिया है,जिससे परिवार की एकता नष्ट हो गई है,साथ-साथ पारिवारिक अस्मिता भी।
- आज इसी अनुशासन की उपेक्षा के कारण हमारा देश विभिन्न समस्याओं से घिर गया है।नेतृत्व सही नहीं होने के कारण सभी तरफ दंगे फैल रहे हैं।हर जगह साम्प्रदायिक दंगे होते रहे हैं।पंजाब में अब भी मौके की तलाश में है तो दूसरी तरफ कश्मीर समस्या।एक तरफ गौरखालैंड समस्या है तो दूसरी ओर बोडो आंदोलन। आज इन्हीं समस्याओं के कारण चारों तरफ अराजकता फैल गई है।जिन भारतवासियों ने एकजुट होकर भारत को अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त कराया है,वे ही लोग आज पृथक-पृथक राज्य की मांग लेकर आंदोलन कर रहे हैं।वे लोग अपने ही द्वारा स्थापित किए गए सिद्धांतों की उपेक्षा कर रहे हैं।
4.अधिकांश व्यक्ति अनुशासनहीन क्यों? (Why are most people undisciplined?):
- आज फुटपाथ पर बैठने वाले व्यक्ति से लेकर शासक वर्ग तक सभी अनुशासन की उपेक्षा कर रहे हैं।फुटपाथ पर बेचने वाले व्यक्तियों के लिए सरकार ने कुछ नियम बना रखे हैं,लेकिन वे तो उसकी उपेक्षा ही करते हैं।भारत के जन-जीवन का आम व्यक्ति,चाहे वह सब्जी ही बेचने वाला हो,जूते ठीक करने वाला हो,फेरी लगाने वाले हों,ठेला चलाने वाले हो,मोटर गाड़ी चलाने वाले आदि सभी व्यक्ति अनुशासन की उपेक्षा कर रहे हैं,नियमों,सिद्धांतों की अवहेलना कर रहे हैं।
- अनुशासन का आदर्श अंग्रेजी कवि टेनीसन की कविता The charge of the Light Brigade की इन पंक्तियों में स्थापित है:
There’s not to make reply
There’s not to reason why
There’s but to do and die - बुद्धि द्वारा मन पर नियंत्रण करना अनुशासन कहा जाता है;यथा:
आत्मानं रथिनं विदि शरीरे दृष्टमेवतु
बुद्धि तु सारथि बिद्धि मनः प्रग्रहमेव च। - जहाँ पर भी देखे,वहां आपको पर उपदेश कुशल बहुतेरे तथा खुद मियां फजीहत,दीगरो नसीहत के उदाहरण मिल जाएंगे।
आज हमारे जन-समाज में जो अनुशासनहीनता बढ़ रही है,उसका जिम्मेदार राजनीतिक स्वार्थ और असामाजिक व्यक्तियों द्वारा फैलाई जा रही है अव्यवस्था एवं स्वार्थपरता है।हमारे जन-समाज में ऐसी शक्ति विद्यमान है जो चेतना के धर्म को नियंत्रित करती आई है।शासन को बदल दिया है और जिन्होंने सामाजिक मूल्यों का रुख बदल दिया है।यदि बढ़ती हुई इस अनुशासन की उपेक्षा को समय रहते न रोका गया तो सुनिश्चित इसके गंभीर परिणाम होंगे।
5.शिक्षा संस्थानों में अनुशासनहीनता के कारण (Causes of indiscipline in educational institutions):
- आज जो अनुशासनहीनता इतनी बढ़ गई है कि कोई भी सूची पूरी हो ही नहीं सकती।हड़ताल करना,अनशन करना,कक्षा-कक्ष और परीक्षा भवन से “वाकआउट” करना,बे-टिकट यात्रा करना,सार्वजनिक स्थानों पर अभद्र व्यवहार करना,नियमों का उल्लंघन करना और फिर पुलिस से झगड़ना,बसें जलाना,सिनेमा घर जलाना और अब तो यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार का दफ्तर भी महफूज नहीं रहा,अध्यापकों से दुर्व्यवहार करना,रैगिंग के नाम पर नए विद्यार्थियों के साथ गुंडागर्दी करना आदि सब अनुशासनहीनता के ही नमूने हैं।यह अनुशासनहीनता की अंतिम सूची नहीं,बानगी मात्र है।अनुशासनहीनता के कारणः
- (1.)वर्तमान शिक्षा सैद्धान्तिक है इसलिए सिद्धांत और व्यवहार में बहुत फर्क है।
- (2.)पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा का पूर्णतया अभाव है। नैतिकता के पुराने आदर्शों व मूल्यों पर से लोगों की आस्था उठ चुकी है,नए आदर्शों व मूल्यों का निर्माण प्रतिगामी शक्तियों के कारण संभव नहीं हो पाया है।इस संक्रमण-काल में आदर्शों व मूल्यों की दृष्टि से एक प्रकार की रिक्तता उत्पन्न हो गई है।ऐसी स्थिति में अनुशासनहीनता स्वभाविक ही है।
- (3.)यह प्रायः देखा गया है कि अध्यापक-वृत्ति को लोग विवशता के रूप में स्वीकार करते हैं।परिणाम यह होता है कि अध्यापक विद्वान नहीं होते,उनका अपने विषय पर अधिकार नहीं होता।विद्वता का अभाव एक सीमा तक दूर हो सकता है यदि उनमें ज्ञान की प्यास हो।पर दुःख इस बात का है कि अधिकांश अध्यापकों में यह प्यास भी नहीं।उस पर कोढ़ में खाज वाली बात यह है कि वे स्वयं अनुशासनहीन हैं।समय पर कक्षा में न जाना,कक्षा में जाकर अध्यापन के बजाय इधर-उधर की गपशप करना तो बहुत सामान्य बातें हो गई हैं।अपने छात्रों पर दबाव डालकर भेंट लेना और छात्राओं के साथ रासलीला रचना भी विशेष बात नहीं रह गई है।यही कारण है कि अध्यापकों की सामाजिक प्रतिष्ठा नहीं रह गई है।समाज में उनका कार्य व उत्तरदायित्व जितना महान् है सम्मान उतना ही कम।उन्हें सब तरफ से उपेक्षा मिलती है तो वे छात्रों को भी बदले में उपेक्षा देते हैं।उनका स्वयं समायोजन अच्छा नहीं होगा तो वे नेतृत्व क्या करेंगे? ऐसी स्थिति में छात्रों में अनुशासनहीनता आना स्वाभाविक ही है।
- (4.)अनिश्चित भविष्य निराशा उत्पन्न करता है और उसमें अनुत्तरदायित्व की भावना आती है।
- (5.)अनेक पाठ्य क्रियाएं यांत्रिक और असंतोषप्रद ढंग से निष्पन्न की जाती हैं।
- (6.)बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में सिखाने और सीखने की सुविधाएँ एकदम अपर्याप्त हैं।
- (7.)अध्यापक-विद्यार्थी के संबंधों में बहुत दूरी है,अनेक विद्यार्थी सारी स्नातक स्तर की शिक्षा समाप्त कर लेते हैं और अध्यापक से एक भी बार बात तक नहीं होती।
- (8.)अध्यापकों में विद्वता का अभाव है,वे अकुशल हैं,विद्यार्थियों की समस्याओं को समझने में वे रुचि नहीं लेते।
- (9.)संस्थाओं के अध्यक्षों में कल्पनाशीलता,युक्तिशीलता और दृढ़ता का अभाव है।
- (10.)कुछ महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में अध्यापक-राजनीति विद्यमान है।
- (11.)राजनीतिक दलों द्वारा उनके कार्यों में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया जाता है।
- (12.)देश के सार्वजनिक जीवन में अनुशासन का अभाव है,विद्यालयों पर उसका प्रभाव पड़ता है।
- (13.)बड़े लोगों के अनुशासन का स्तर गिरा हुआ है,उनकी नागरिक चेतना कमजोर हो गई है।
6.अनुशासनहीनता को कैसे रोकें? (How to prevent indiscipline?):
- (1.)हमारी शिक्षा पद्धति मुख्यतः पाठ्यक्रमीय परंपराओं पर आधारित है।अच्छी से अच्छी विषयवस्तु यदि पाठ्यक्रम में निर्धारित नहीं है तो वह छात्रों तक नहीं पहुंचाई जा सकती।अतः व्यवहार के संशोधन या विकास के लिए पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा को सम्मिलित किए जाने की आवश्यकता है।नैतिक शिक्षा द्वारा चरित्र निर्माण में सहायता मिलेगी।नैतिक शिक्षा के लिए अच्छी पुस्तकों का अध्ययन जरूरी है।
- (2.)इसके अतिरिक्त शैक्षिक सुविधाओं के आयोजन की भी आवश्यकता है यथा खेलकूद,छात्रावासों में सामुदायिक जीवन,भोजनालय का छात्रों द्वारा प्रबंध,वाद-विवाद और गोष्ठियां,छात्र-संघ,स्काउटिंग,स्कूलों में छात्रों के विभिन्न सदन (यथा भगत सिंह सदन,बोस सदन आदि),क्लब और सभा-सोसायटी आदि अनुशासन स्थापन में सहायक है।
- (3.)शिक्षा संस्थानों में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे व्याख्यान,वाद-विवाद,निबंध प्रतियोगिताएं,सामूहिक चर्चा,प्रतियोगिताएं,अध्ययन-वृत्त,समाज-सेवा शिविर,एन.सी.सी के दौरे और सैर-सपाटे,खेल-कूद और खेल प्रतियोगिताएंँ,छात्र पत्रिकाओं का प्रकाशन,शैक्षिक फिल्मों का प्रदर्शन,छात्र पुस्तकालयों का संचालन,कैंटीन और सहकारी भंडार,छात्रों के लिए वित्तीय सहायता के कार्यक्रम आदि-आदि।इनका आयोजन सत्र-काल में ही नहीं,बल्कि छुट्टियों में भी होना चाहिए।कुछ कार्यक्रमों के लिए तो छुट्टियों का समय ही उपयुक्त है।
- (4.)शैक्षिक अनुशासन का आरंभ और अंत अध्यापक के सक्रिय सहयोग और नेतृत्व में निहित है और इस समस्या का समाधान उसकी उपयोगिता में संभव नहीं।इधर कई वर्षों में हमारे शिक्षा-जगत में अध्यापक के शीर्षस्थ स्थान और अधिकार का जो ह्रास हुआ है वह स्वयं अपने में अनुशासनहीनता का एक बड़ा भारी कारण है।समस्त शैक्षिक प्रक्रिया को अग्रगति देने वाले अध्यापक को ही अगर कमजोर कर दिया जाएगा तो उसकी शैक्षिक निष्ठा और कर्त्तव्यपरायणता में कमी आ जाना स्वाभाविक है।
- (5.)अध्यापक द्वारा दो प्रकार का अनुशासन हो सकता है।पहला जिसमें अध्यापक तानाशाह बनकर मारने-पीटने धमकाने और दंड देने के तरीके अपनाता है और छात्रों को आतंकित करके अनुशासित बनाए रखता है।दूसरे में अध्यापक अनायास ही अपने गुणों से छात्रों का नेतृत्व अपने हाथ में ले लेता है।उसका विश्वास प्राप्त कर वह स्वतः स्वाभाविक निर्देशन करने लगता है।अपनी विद्वता,योग्यता और अनुभव के आधार पर वह सहज ही छात्रों को स्वीकार्य होकर उनका अग्रणी बन सकता है।
- (6.)कार्य आरोपित अनुशासनःकार्य द्वारा भी अनुशासन स्थापित होता है।कंप्यूटर अथवा बड़ी-बड़ी मशीनों पर कार्य करने वाले व्यक्ति कितना एकाग्रचित्त होकर और नियमानुसार काम करता है कि देखकर आश्चर्य होता है।वैज्ञानिक अपनी प्रयोगशाला में भूख-प्यास और नींद भूलकर भी लगा रहता है,खेल में उसके नियमों से अनुशासित होकर टीम का प्रत्येक खिलाड़ी अपनी भूमिका निभाता है और शोधकर्ता अपने काम में लगन के साथ व्यस्त होकर सब कुछ भूल बैठता है।
- (7.)शैक्षिक अनुशासन व्यवस्था में माता-पिता,अभिभावक,समाज और राजनीतिक वर्ग के नेता तथा शासन सभी का सहयोग अपेक्षित है।एक-दूसरे के बीच की बढ़ी हुई दूरी को कम करके आपसी सहयोग द्वारा एक-जुट होकर राष्ट्रहित में लगना आज की तथा आगे आनेवाली पीढ़ियों के हित में होगा-यह विश्वास ही अनुशासनहीनता की समस्या का सामना करने के लिए प्रेरणा दे सकता है।
- उपर्युक्त आर्टिकल में अनुशासनहीनता को कैसे रोकें की 7 टॉप टिप्स (7 Top Tips on How to Stop Indiscipline),अनुशासनहीनता को कैसे रोकें? (How to Prevent Indiscipline?) के बारे में बताया गया है।
Also Read This Article:शिक्षा एवं अनुशासन की महत्ता
7.अनुशासनहीन छात्र (हास्य-व्यंग्य) (Undisciplined Students) (Humour-Satire):
- पापाःतुम्हारे रिजल्ट का क्या हुआ?
- चिंकू:13% अंक आए हैं।
- पापा:पर 13% प्रतिशत से उत्तीर्ण कैसे होंगे?
- चिंकू:20% सत्रांक के आ जाएंगे।
- पापा:सत्रांक में तुम्हारा क्या योगदान है?
- चिंकू:यह 13% भी परीक्षक को धमकाकर,नकल करने पर प्राप्त हुए हैं।ये सब तो आजकल चलता है।टेक इट इजी,पापा।
8.अनुशासनहीनता को कैसे रोकें की 7 टॉप टिप्स (Frequently Asked Questions Related to 7 Top Tips on How to Stop Indiscipline),अनुशासनहीनता को कैसे रोकें? (How to Prevent Indiscipline?) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.आत्मानुशासन क्या होता है? (What is self-discipline?):
उत्तर:जब किसी बाह्य प्रभाव से अनुशासित ना होकर स्वयं अपनी अंतरात्मा द्वारा अनुशासित होता है।
प्रश्न:2.अनुशासन को छात्र कब स्वीकार कर सकता है?(When can the student accept the discipline?):
उत्तर:अनुशासन एक प्रकार की गत्यात्मक प्रक्रिया है। अनुशासन के सारे प्रयास तब तक असफल रहेंगे जब तक छात्र को यह भान नहीं होगा कि अनुशासन उनके अपने हित में है।
प्रश्न:3.अनुशासन और किस बात पर निर्भर है? (What else does discipline depend on?):
उत्तर:शैक्षिक प्रक्रिया में किस प्रकार के कार्यक्रम है और तीसरे यह कि इस प्रक्रिया को कार्यान्वित करने वाले व्यक्ति (अध्यापक,शैक्षिक,प्रशासक आदि) किस प्रकार के हैं।क्योंकि पाठ्यक्रम में शामिल करने के बावजूद उसका क्रियान्वयन इन्हीं पर निर्भर है।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा अनुशासनहीनता को कैसे रोकें की 7 टॉप टिप्स (7 Top Tips on How to Stop Indiscipline),अनुशासनहीनता को कैसे रोकें? (How to Prevent Indiscipline?) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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Satyam
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