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Indisciplined in Hindi

1.अनुशासनहीनता का परिचय (Indisciplined in Hindi),सत्यम कोचिंग सेंटर द्वारा छात्रों को कैसे अनुशासित किया जाए? (How to discipline students by Satyam coaching centre):

  • अनुशासनहीनता (Indisciplined in Hindi) को समझने से पूर्व अनुशासन को समझना आवश्यक है।अनुशासन किसी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए पालन किए जाने वाले नियमों को कहा जाता है।नियमों के पालन न करने से व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो जाती है।इस प्रकार शिक्षा संस्थानों को सुचारू रूप से चलाने के लिए जो नियम निर्धारित होते हैं उन नियमों का छात्रों द्वारा उल्लंघन करना अनुशासनहीनता है।अनुशासनहीनता के उदाहरण हैंःचोरी करना,यौन संबंधित दुर्व्यवहार करना,परीक्षा में नकल करना,बिना टिकट यात्रा करना,हड़ताल करना,बसे जलाना,अध्यापकों से दुर्व्यवहार करना,रैंगिग के नाम पर गुंडागर्दी करना।

via https://youtu.be/3OO1TYODlJE

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2.अनुशासनहीनता (Indisciplined in Hindi),सत्यम कोचिंग सेंटर द्वारा छात्रों को कैसे अनुशासित किया जाए? (How to discipline students by Satyam coaching centre):

  • उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों द्वारा अनुशासनहीनता का मूल कारण वर्तमान शिक्षा पद्धति में सिद्धान्त और व्यवहार में अंतर।
  • अनुशासनहीनता का दूसरा कारण है अध्यापक द्वारा छात्रों पर गुणों की जो छाप अपनी विद्वता,योग्यता और अनुभव के द्वारा रहती थी उसमें कमी होना।
  • तीसरा कारण है अध्यापक और छात्र शिक्षा के दो आधार स्तम्भ हैं।इनमें राजनीतिक नेतृत्त्व तथा शासन द्वारा अध्यापक के अधिकारों में कटौती करना अर्थात् अध्यापक को कमजोर कर दिया गया है।
  • चौथा कारण है कि प्राथमिक से माध्यमिक कक्षा में जो बच्चों की शिक्षा की नींव होती है उसमें चारित्रिक व नैतिक शिक्षा का अभाव होना।
  • पाँचवा कारण है कि छात्रों द्वारा फैशन,फिल्मी नायक-नायिकाओं की नकल करना,दुर्व्यसनों बीड़ी,सिगरेट,शराब पीना।होटलों तथा रेस्टोरेंट में बैठकर अय्याशी करना।
  • छठवाँ कारण है छात्रों में पुरुषार्थ (कर्म) तथा योग्यता अर्जित करने का भाव न होना।अकर्मण्यता का यह हाल है कि पीएचडी,एमए,एमएससी की डिग्री हासिल करने वाले छात्र अफसरी का ख्वाब देखते हैं तथा बार-बार प्रतियोगिता परीक्षाओं में असफल होने पर,अफसरी न मिलने पर बाबू,क्लर्क या चपरासी की नौकरी के लिए दौड़धूप करते हैं।
  • यदि युवा वर्ग द्वारा पुरुषार्थ तथा परिश्रम करने का पाठ पढ़ा होता तो कहीं भी,किसी भी क्षेत्र में उन्नति तथा प्रगति कर सकता है।फैशन के कपड़े पहनकर दोस्तों के साथ मटरगश्ती करना ओर बात है तथा पुरुषार्थ और परिश्रम करना ओर बात है।
  • सातवाँ कारण है विद्यार्थियों की अध्यापकों में श्रद्धा नहीं है।जिन छात्रों की अध्यापकों में श्रद्धा नहीं होगी वे विद्या प्राप्त नहीं कर सकते हैं।बिना श्रद्धा के विद्या प्राप्त करना तो बहुत दूर की बात है,कोई भी कार्य श्रद्धा के बिना सफल नहीं होता है।आज तो हालत यह है कि विद्यार्थी अध्यापकों के साथ यार-दोस्त की तरह बर्ताव करते हैं।माध्यमिक स्तर तक तो अनुशासनहीनता इसलिए नजर नहीं आती क्योंकि इस आयु में छात्रों की बुद्धि परिपक्व नहीं होती है।
  • आठवाँ कारण है शिक्षा का व्यवसायीकरण हो गया है।हालांकि व्यावसायिक भावना होना उस अर्थ में बुरा नहीं है जबकि अध्यापकों तथा शिक्षा संस्थान के संचालकों की नीयत छात्रों का हित करना हो,उनको पढ़ाने तथा योग्यता का विकास करने की हो।परंतु अध्यापकों का ध्येय रहता है कि किसी भी प्रकार पाठ्यक्रम पूरा करा दिया जाए तथा छात्र-छात्राएं किसी प्रकार उत्तीर्ण हो जाएं,उनका ध्येय छात्रों को योग्य बनाने की ओर नहीं होता है।
  • समाधान (Solution):भारतीय संस्कृति का मूल उद्देश्य है चारित्रिक व नैतिक मूल्यों का विकास करना जिनका किसी भी संप्रदाय से कोई विरोध नहीं है।अतः अनुशासन व नैतिकता को शिक्षा पाठ्यक्रम के समान ही आवश्यक समझकर दी जाए।छात्रों में पुरुषार्थ,योग्यता तथा परिश्रम करने की प्रवृत्ति का विकास करना।
    उपर्युक्त आर्टिकल में अनुशासनहीनता (Indisciplined in Hindi),सत्यम कोचिंग सेंटर द्वारा छात्रों को कैसे अनुशासित किया जाए? (How to discipline students by Satyam coaching centre) के बारे में बताया गया है।

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