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How to Become Tactful in Dealings in Job?

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1.जाॅब में व्यवहारकुशल कैसे बनें? (How to Become Tactful in Dealings in Job?),अभ्यर्थी जाॅब में व्यवहारकुशल कैसे बनें? (How to Become Candidate Practical in Job?):

  • जाॅब में व्यवहारकुशल कैसे बनें? (How to Become Tactful in Dealings in Job?) क्योंकि जाॅब में सफलता इसी से नहीं मिलती है कि अभ्यर्थी ने अपनी रुचि के अनुसार पेशा चुन लिया है।जाॅब में प्रवीणता प्राप्त कर लेना भी सफलता के लिए पर्याप्त नहीं है।प्रत्येक जॉब या पेशे के कुछ खास नियम और उसके करने का खास ढंग होता है।यदि उनका पालन न किया जाए तो जॉब में रुचि और प्रवीणता आदि गुण कुछ खास सहायता नहीं कर सकेंगे।बहुत संभव है कि इन गुणों के बावजूद असफलता का मुंह देखना पड़े और सारा जीवन दयनीय अवस्था में बीते।
  • संसार के लोग केवल यही नहीं देखते कि कोई व्यक्ति अपने जॉब में कितना निपुणता प्राप्त किए हुए हैं,वह यह भी देखता है कि वह अपने पेशे के व्यावहारिक नियमों से परिचित है अथवा नहीं।
  • कोई भी जाॅब या पेशा हो,उसे व्यवसाय से भिन्न नहीं समझा जा सकता।एक टोकरी उठानेवाला मजदूर भी वास्तव में व्यवसायी है।वह अपना शारीरिक श्रम बेचकर जीवनयापन करता है।दफ्तर में काम करने वाला क्लर्क भी एक व्यवसायी है।वह अपने मानसिक परिश्रम का पारिश्रमिक लेता है और दुकानदार भी व्यवसायी है ही,वह अपना माल देता और दाम लेता है।इसी प्रकार इंजीनियर,वकील,डॉक्टर सभी व्यवसायी है।प्रत्येक व्यक्ति संसार की मंडी में अपना माल बेचकर अपना पेट पाल रहा है।अतः यह कहना गलत नहीं कि व्यवसाय के नियम प्रत्येक पेशे के आधारभूत नियम होने चाहिए।किसी पेशे को इन नियमों से मुक्त नहीं कहा जा सकता।
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2.ईमानदारी बरतें (Be Honest):

  • जाॅब के लिए व्यावहारिक नियमों में सर्वप्रथम स्थान ईमानदारी है।इसलिए नहीं कि यह एक धार्मिक आज्ञा है और सभी धर्मों ने इसको बहुत महत्त्व दिया है वरन इसलिए की ईमानदारी सर्वोत्तम नीति है।इससे ठोस और दृढ़ परिणाम निकलते हैं।इसमें उन्नति का रहस्य छिपा है।ईमानदारी से अच्छा कोई विज्ञापन नहीं।इससे अच्छी कोई साख नहीं।यह मनुष्य के मानसिक और भौतिक विकास का अमूल्य नियम है।
  • संसार में ईमानदार कर्मचारियों और अधिकारियों की सदा मांग रहती है।वह फर्म,वह क्लर्क और वह मजदूर बड़ा भाग्यवान है जिसके साथ रहनेवाले लोग उसे ईमानदार समझते हैं।असफलता अधिकतर उन्हीं लोगों के हिस्से में आती है,जो लेन-देन के खरे नहीं होते,जो अपने आसामियों,ग्राहकों और मालिकों को धोखा देते हैं,जो समय,धन और माल में बेईमानी को अपना स्वभाव बना लेते हैं।
  • कारोबार में लोगों को बुद्धू बनाकर अपना उल्लू सीधा करना नहीं होता।यह ठीक है कि कुछ लोग चालाकी और धोखे से भी सफल हो जाते हैं परंतु उनकी सफलता वास्तव में सफलता नहीं।एक पुरानी लोकोक्ति है कि ‘काठ की हंडिया बार-बार नहीं चढ़ती।’ बेईमानी और धोखे का भांडा एक-न-एक दिन अवश्य फूटता है।
  • ईमानदारी मित्र बनाने में सहायता करती है और मित्र सफलता का मुख्य नियम समझे गए हैं।एक बार एक विद्यार्थी पुस्तक-विक्रेता की दुकान पर गया,उससे कुछ पुस्तकें खरीदी।वापस आते समय वह विद्यार्थी उस दुकान पर अपना मोबाइल फोन दुकान के काउंटर पर भूल आया।उसे याद भी नहीं रहा कि मोबाइल फोन कहां रखकर भूल गया है।कई सप्ताह के पश्चात उस विद्यार्थी का फिर उस दुकान पर जाना हुआ।
  • दुकानदार ने विद्यार्थी को देखते ही मेज की दराज खोली और मोबाइल फोन निकालकर विद्यार्थी को दे दिया।विद्यार्थी के मन पर उसकी ईमानदारी का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा।इस घटना को कई वर्ष बीत गए,परंतु वह उसे आज तक नहीं भूला।और न कभी भूल सकेगा।विद्यार्थी जब भी उधर जाता,उससे अवश्य मिलता है।जो पुस्तक उसकी दुकान से मिल सके,अन्य दुकान से नहीं खरीदता।दुकानदार की ईमानदारी ने विद्यार्थी को सदा के लिए उसकी दुकान से बांध दिया।

3.मित्रता या निजी संबंध बनाएं (Build Friendships or Personal Relationships):

  • जाॅब या पेशे का दूसरा मुख्य नियम मित्रता या निजी संबंध है।बहुत से लोग अपने काम-से-काम रखते हैं।जिन लोगों से उनका संबंध चला आ रहा है,उनको कोई महत्त्व नहीं देते,उनमें कोई दिलचस्पी नहीं लेते।उनके साथ अच्छे संबंध स्थापित करने का कोई प्रयत्न नहीं करते।यदि कोई अच्छे-से-अच्छा और योग्य-से-योग्य व्यक्ति भी ऐसा व्यवहार करेगा तो वह अपने जाॅब या पेशे को पूरी ऊंचाई तक ले जाने में सफल नहीं होगा।
  • अपने ग्राहकों,साथियों,शिष्यों और कर्मचारियों के के साथ निजी संबंध स्थापित करना सफलता की गारंटी के समान है।
  • एक शिक्षक को बड़ा कठिन काम सौंपा गया।उसे ऐसे कोचिंग सेंटर का संचालक बनाया गया,जिसकी साख इतनी खराब थी कि उसका सुधार असंभव था।स्थिति बड़ी निराशापूर्ण थी।कोचिंग क्या था,सफेद हाथी था।कोई व्यक्ति उसका संचालक बनता तो उसमें कोई आना भी पसंद नहीं करता।छह बार उसका दिवाला निकल चुका था।
  • शिक्षक की उम्र कुछ अधिक नहीं थी।उसे कोचिंग के कामकाज का भी अनुभव नहीं था,परंतु उसे कठिनाइयों और विशेषकर असंभावनाओं से प्रेम था।उसने दृढ़ इरादे के साथ काम हाथ में ले लिया।
  • किसी को यह आशा नहीं थी कि वह सफल होगा।कोचिंग में आत्मा ही नहीं थी,कोई जीवन न था।वह असफल कोचिंग सेन्टर मध्यम श्रेणी के नगर में था।वहां का वातावरण कोचिंग के अनुकूल नहीं था।इसके अतिरिक्त उसके बारे में प्रसिद्ध था कि वह शिक्षा के योग्य नहीं है।
  • परंतु उस श्वेत हाथी को स्वावलंबी बनाने में उसे केवल दो वर्ष लगे।पाँच वर्ष के अंदर-अंदर तेजी से चारों ओर उसकी प्रसिद्धि फैल गई और अब वह देश के प्रमुख कोचिंग सेंटर में गिना जाता है।
  • छात्र-छात्राओं की समस्याओं का आत्मीयतापूर्ण समाधान,मित्रतापूर्ण व्यवहार करने तथा उनमें व्यक्तिगत रुचि लेने के कारण उसने बड़ी प्रसिद्धि पा ली।
  • वह प्रत्येक छात्र-छात्रा और उसके अभिभावक का आदर करता,उसे पूर्ण महत्त्व देता।इस आशय से वह निश्चित नियमों के अनुसार काम करता,वह छात्र-छात्राओं को नाम लेकर बुलाता।उनकी पसंद के शिक्षक और उनकी इच्छानुकूल कक्षा के कमरों की व्यवस्था की ओर विशेष ध्यान देता और जब वे कोचिंग सेंटर छोड़कर चले जाते तो वार्षिकोत्सव पर उन्हें आमंत्रित करता।ये नियम नए नहीं,नवीनता केवल इतनी ही है कि लोग जिन चीजों और कामों के विषय में बातें करते हैं,वह उनके अनुसार काम करता था।
  • आप भी अपने जॉब में उक्त संचालक की तरह दिलचस्पी लें।यदि आप अपने मिलनेवालों को उनका महत्त्व बतला दें और निजी संबंधों द्वारा उनके साथ लगाव रखें तो आप भी उक्त संचालक की भाँति न केवल व्यक्तिगत तौर पर सफल होंगे,अपितु जॉब में भी सफलता पा सकेंगे।
  • जो अपने पेशे या जॉब की असफलता का रोना रोते हैं,उनके लिए उक्त कोचिंग सेंटर को चलाने में अच्छे सुझाव दिए गए हैं।उन दुकानदारों को,जिनका ध्यान ग्राहक के मुख से अधिक तराजू की डंडी पर रहता है,उन कारखानेदारों को जो ग्राहक से अधिक अपने माल की प्रशंसा करते हैं और उन क्लर्कों को जो साथियों और मैनेजर से भी अधिक अपने कागजों को महत्त्व देते हैं,व्यक्तिगत संबंधों की ओर ध्यान देना चाहिए।निजता में चुंबक समान आकर्षण है,वह माल के सौंदर्य और गुणों में नहीं।

4.रहस्य को रहस्य ही रहने दें (Let the Mystery Remain a Secret):

  • रहस्य रखना किसी जॉब और पेशे तथा व्यवसाय का तीसरा महत्वपूर्ण नियम है बहुत कम लोग ऐसे दिखाई देते हैं जो इस महत्त्व को समझते हैं।इसलिए बहुत-से अभ्यर्थियों को यह जानने की आवश्यकता है।एक इंजीनियर अपने ग्राहकों का,एक अच्छा डॉक्टर अपने ग्राहकों के रोग के बारे में कभी नहीं बताएगा।रोग साधारण हो या जटिल वह,उसको छुपाना अपना कर्त्तव्य समझेगा।कोई बैंक अपने ग्राहकों का,कोई बीमा कंपनी अपनी पॉलिसी होल्डरों का और कोई वकील अपने मुवक्किल का रहस्य कभी नहीं खोलेगा।
  • एक व्यक्ति कंगाल हो गया था।उसके ऊपर ऋण का भार चढ़ गया था।उसने अपने मिलने-जुलने वालों से यह बात छुपा रखी थी।वह नहीं चाहता था कि लोग उसके कंगाल होने के विषय में प्रश्न करते रहे और वह उनके उत्तर देने का सिरदर्द मोल ले।वह लोगों की परिणामरहित रस्मी सहानुभूति को अनावश्यक समझता था।परंतु जिस बैंक में उसका खाता था,उसने अपने पेशे के नियम को भुलाकर लोगों को उसके कंगाल होने के बारे में बता दिया।नतीजा वही हुआ,जिसका डर था।
  • बैंक और डाकखाने भेद रखने का उत्तम उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।एक व्यक्ति सीआईडी ऑफिस के कार्यालय में जाना चाहता था।वह अनजान था,कार्यालय का पता नहीं जानता था,उसने कई लोगों से पूछा किसी ने नहीं बताया।निराश होकर वह बैंक गया।उसने बहुत मिन्नतें की,परंतु वहां के कर्मचारियों ने पता बताने से इनकार कर दिया।
  • उसे बताया गया कि लोगों के पते हमारे पास अमानत के तौर पर है।कई लोग अपने घरों में बैठकर केवल विज्ञापनों द्वारा अपना कारोबार चलाते हैं।उनका कोई कार्यालय नहीं होता,कोई सामान नहीं होता।वे नहीं चाहते कि लोग उनकी परिस्थितियों को जानें।हम उनके भेद की रक्षा करते हैं।यदि हम ऐसा न करें तो कार्यालय पर से लोगों का विश्वास उठ जाए।
  • प्रत्येक जाॅब और व्यवसाय करने वाले को अपने ग्राहकों और आसामियों के भेद इसी प्रकार सुरक्षित रखने चाहिए।यहां तक की बड़ी-से-बड़ी रिश्वत भी भेद खोलने का कारण न बन सके।दूसरों के भेद रखने के साथ-साथ अपने भेद छिपाकर रखना भी एक व्यवहारिक नियम है।जो व्यक्ति अपने भेद को नियंत्रित नहीं रख सकता है,उसे बहुत ठोकरे खानी पड़ती है।वह कई ऐसे अवसर खो बैठता है,जिनके लिए उसे जीवन-भर हाथ मलते रहना पड़ता है।

5.अध्ययन की प्रवृत्ति रखें (Keep the Tendency to Study):

  • पेशे या व्यवसाय का अगला नियम है अध्ययन करना।अध्ययन एक ऐसा शब्द है,जिसका अर्थ बड़ा विस्तृत है।इससे अभिप्राय उन पुस्तकों और पत्रिकाओं का अध्ययन मात्र नहीं,जो किसी पेशे की उन्नति और सफलता में सहायक हो,अपितु इसका अर्थ मानव-प्रकृति का अध्ययन भी है।एक अच्छा अभ्यर्थी लोगों के मानसिक झुकाव के अध्ययन को भी अपना कर्त्तव्य समझता है।
  • वह अपने काम,लोगों का स्वभाव और झुकाव,आसपास की आवश्यकताओं,बाजार की स्थिति और बदलते हुए फैशनों का निरंतर अध्ययन करता रहता है।इससे वह अपने व्यवसाय को समय के अनुकूल बना लेता है।
    एक योग्य और अनुभवी शिक्षक ने स्कूल खोली।
  • इस स्कूल को खोले हुए 10 वर्ष हो गए।इन 10 वर्षों में संसार कहीं-से-कहीं पहुंच गया परंतु उसके स्कूल में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।एक ही कमरे में दो-दो,तीन-तीन कक्षाओं के बैठने की व्यवस्था है।एक कक्षा का शिक्षक छात्र-छात्राओं को पढ़ाता है वह समझ में नहीं आता है क्योंकि दूसरी कक्षा के छात्र-छात्राएं भी वहीं बैठे होते हैं और शोरगुल करते रहते हैं।उनको तब तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है जब तक दूसरी कक्षा का अध्यापक नहीं आ जाता।एक फटी-पुरानी चटाई पर सभी छात्र-छात्राएं बैठते हैं।
  • परंतु अब से 10 वर्ष पूर्व एक अन्य शिक्षक ने भी स्कूल खोला था।प्रारंभ में उसके स्कूल में भी बुनियादी सुविधाएं नहीं थी परंतु अब उसकी शक्ल बदल चुकी है।प्रत्येक कक्षा के लिए अलग-अलग कमरे हैं।कमरे में छात्र-छात्राओं के लिए टेबल-स्टूल और पंखे की व्यवस्था है।ऐसी बात नहीं है कि इस स्कूल में भौतिक सुख-सुविधाएं ही हैं बल्कि शिक्षक भी छात्र-छात्राओं को पढ़ाने में भरपूर मेहनत करते हैं।छात्र-छात्राएं कितनी भी दूर से आए परंतु स्कूल में प्रवेश करते ही अपना आधा कष्ट भूल जाते हैं।
  • इन दोनों स्कूलों के संचालकों में पहली स्कूल का संचालक अधिक योग्य एवं अनुभवी भी है।उसके अनुभव और योग्यता को अच्छे-अच्छे शिक्षक भी मानते हैं।परंतु इन सारे गुणों के बावजूद वह अपना जीवनयापन बड़ी कठिनाई से कर पाता है।संभव है उसकी शेष आयु भी इसी अवस्था में व्यतीत हो जाएगी।
  • दूसरी स्कूल का संचालक इतना योग्य और अनुभवी नहीं है।लेकिन स्कूल में बुनियादी सुविधाएं तथा अच्छे शिक्षकों की टीम हैं।जब उसने देखा कि देश में स्कूलों की कायापलट हो रही है।छात्र-छात्राएं नीचे बैठने के बजाय स्टूल,टेबल तथा बैंच का प्रयोग करते हैं।वे स्वच्छता,सहूलियत और अच्छे शिक्षकों से पढ़ने के इच्छुक हैं तो उसने अपने स्कूल में कायापलट कर दी।दूसरी स्कूल का संचालक सफल है,धनवान है और लोकप्रिय भी।
  • एक अच्छे शिक्षक में पवित्र चरित्र,सहानुभूति और निरन्तर अध्ययन करते रहने की आवश्यकता है।शिक्षा बहुत व्यापक शब्द है।शिक्षण की पद्धतियां बदलती रहती है और नई-नई तकनीक सामने आती है।छात्र-छात्राओं से नोट्स बनवाना,स्वयं नोट्स उपलब्ध करवाना,ऑनलाइन शिक्षण की व्यवस्था करना,अभिभावकों से निरंतर संपर्क रखना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाना,पाठ्यक्रम के अलावा भी छात्र-छात्राओं में अन्य गुणों का विकास करना।एक सफल शिक्षक और स्कूल के संचालक को इन सभी बातों का ज्ञान होना चाहिए अतः अध्ययन अनिवार्य है।
  • अध्ययन केवल शिक्षक के लिए ही आवश्यक नहीं है,प्रत्येक धन्धे के लिए आवश्यक है।डॉक्टर,इंजीनियर,साहित्यकार,लेखक या संपादक इत्यादि कोई भी निरन्तर अध्ययन के बिना उन्नति नहीं कर सकता।कोई आर्किटेक्ट अपनी कला के लिए निरंतर अध्ययन के बिना इमारत के नए-नए नमूने नहीं सुझा सकता।कोई प्रोफेसर अध्ययन के बिना अच्छा प्रोफेसर सिद्ध नहीं हो सकता।कोई व्यवसायी अध्ययन के बिना सफल नहीं हो सकता।धंधे के अंदर और बाहर सर्वत्र अध्ययन अनिवार्य है।

6.वचन तथा समय का पालन (Follow the Word and Time):

  • व्यवसाय का अगला नियम है वचन और समय का पालन।वचन और समय को निभाने का विचार हमारे अंदर अभी पूरी तरह पैदा नहीं हुआ।वचन भंग करना साधारण सी बात समझा जाता है।बहुत कम लोग इस त्रुटि पर लज्जित होने की आवश्यकता अनुभव करते हैं।
  • बहुत कम ऐसे जॉब करने वाले अथवा व्यवसायी मिलेंगे जो वचन के पाबंद हों।कुछ ही दिनों में काम कर देने का वादा करके टालमटोल में कई-कई सप्ताह निकाल देते हैं।
  • एक विद्यार्थी ने फोटोस्टेट करने वाले की दुकान पर नोट्स की फोटोकॉपी करने के लिए दी थी परन्तु दो सप्ताह बीत गए,अभी तक नोट्स की फोटोकॉपी तैयार नहीं हो सकी।लगभग सभी काम करने वाले इस रोग से ग्रस्त हैं।
  • कुछ कंपनियों और फर्मों में वादे की पाबंदी को पेशे और कारोबार का अनिवार्य अंग समझा जाता है।
  • एक विद्यार्थी ने पुस्तक विक्रेता को पुस्तक देने के लिए कहा परंतु उसके पास नहीं थी।विद्यार्थी को एक निश्चित तिथि दी गई परंतु उस दिन वह दुकान बंद थी।केवल एक छोटा सा द्वार खुला था।द्वार के पास एक लड़का बैठा हुआ था।उसने सभी पुस्तकें विद्यार्थी को देते हुए कहा कि दुकान के मालिक के किसी प्रियजन का देहांत हो गया है।दुकान बंद है।आपकी पुस्तकें किसी अन्य दुकान वाले से मंगवाई गई है।यह द्वार आपकी प्रतीक्षा में खुला था ताकि वादे के अनुसार पुस्तकें आपको मिल सके।
  • वादे के अतिरिक्त समय का भी हम लोगों में बहुत कम ध्यान रखा जाता है।जो व्यक्ति जब चाहे दुकान खोल लेता है या प्रतिष्ठान खोल लेता है और जब चाहे बंद कर देता है।कर्मचारियों का भी ध्यान नहीं रखा जाए तो वे समय के अनुसार काम करना अपना कर्त्तव्य नहीं समझते।यह गलत है और इस गलती का उन्हें किसी-न-किसी रूप में फल अवश्य ही भुगतना पड़ता है।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में जाॅब में व्यवहारकुशल कैसे बनें? (How to Become Tactful in Dealings in Job?),अभ्यर्थी जाॅब में व्यवहारकुशल कैसे बनें? (How to Become Candidate Practical in Job?) के बारे में बताया गया है।

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7.गणित पढ़ाने की कला (हास्य-व्यंग्य) (The Art of Teaching Mathematics) (Humour-Satire):

  • विजय (गणित शिक्षक से):सर (sir),जल्दी करो।मैं जल्दी में हूं।क्या आप पढ़ाने के लिए तैयार हैं?
  • गणित शिक्षक:गणित के नोट्स तो पिछले एक साल से तैयार रखे हुए हैं।बस केवल पढ़ने में वक्त लगेगा।उनको पढ़ते ही तुम्हें पढ़ा दूंगा।

8.जाॅब में व्यवहारकुशल कैसे बनें? (Frequently Asked Questions Related to How to Become Tactful in Dealings in Job?),अभ्यर्थी जाॅब में व्यवहारकुशल कैसे बनें? (How to Become Candidate Practical in Job?) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.क्या जाॅब में स्वच्छता रखना आवश्यक है? (Is It Necessary to Keep Cleanliness in the Job?):

उत्तर:स्वच्छता यानी आप,आपका सामान स्वच्छ हो।दुकान,प्रतिष्ठान,कंपनी या शिक्षा संस्थान स्वच्छ हो।कार्य,शरीर और कपड़े स्वच्छ हों तो लोगों पर निश्चय ही अच्छा प्रभाव पड़ेगा।खाने-पीने की चीजें बेचनेवालों को स्वच्छता की जितनी आवश्यकता है,उतनी किसी को नहीं।आपने ऐसे होटल देखे होंगे दूध,दही,मिठाई और फलों की दुकानें देखी होगी जहां से कोई चीज खरीदना तो दूर रहा,कोई सभ्य व्यक्ति उसके पास खड़े होने में भी हिचकिचाता है।इस प्रकार की अस्सी प्रतिशत दुकानों की छतें और दीवारें धंसी हुई होंगी।मच्छर,मक्खियाँ,हड्डियाँ,सड़ी-गली चीजें,गन्दे मटके,गन्दे फर्श और घिनौने बर्तन।
स्वच्छता कारोबार का आवश्यक अंग है।इसके बिना कोई व्यक्ति बुरा-भला काम तो चला सकता है परंतु ख्याति नहीं पा सकता।विख्यात होने के लिए उसे स्वच्छता और पवित्रता का ध्यान रखना होगा।

प्रश्न:2.क्या व्यवसाय का विज्ञापन करना जरूरी है? (Is It Necessary to Advertise a Business?):

उत्तर:वर्तमान काल में विज्ञापन का रीढ़ की हड्डी के समान महत्त्व हो गया है।व्यावसायिक प्रतिद्वन्द्विता में टिके रहना विज्ञापन के बिना असम्भव ही है।यद्यपि उपर्युक्त गुण अपने आपमें अच्छे हैं,परन्तु पर्याप्त नहीं।समाचार-पत्रों,हैंड-बिलों,पोस्टरों के अतिरिक्त टेलीविजन तथा सोशल मीडिया पर अनेक संस्थान लाखों-करोड़ों रुपए व्यय करके विज्ञापन कला के कमाल दिखा रहे हैं।
विज्ञापन का मुख्य गुण यह होना चाहिए कि वह सच्चा हो।हमारे देश में कई लोग प्रायः विज्ञापन देनेवाले धोखे और मक्कारी से लोगों की जेब पर डाका डालते हैं।बहुत से विज्ञापनों ने अनेक लोगों के मन में अविश्वास पैदा कर दिया है।विज्ञापन सदा सच्चा होना चाहिए।झूठ,अत्युक्ति और बेईमानी द्वारा कोई व्यवसाय थोड़ी देर के लिए चमक सकता है परंतु हानि और तबाही के अतिरिक्त कुछ हाथ नहीं आता।

प्रश्न:3.क्या व्यवसाय में लेखा-जोखा रखना आवश्यक है? (Is It Necessary to Keep Accounts in Business?):

उत्तर:किसी व्यवसाय या कारोबार के लिए जितनी आवश्यकता अच्छे माल की है,उतनी ही आवश्यकता हिसाब-किताब की भी है।यदि कोई काम अच्छे माल के बिना नहीं चल सकता है तो हिसाब के बिना भी नहीं चल सकता।यदि अच्छे माल के बिना गुजारा नहीं तो हिसाब के बिना भी काम चलाना संभव नहीं।
जो लोग कारोबार में हिसाब-किताब नियमित रूप से नहीं रखते,वे अपने आर्थिक व्यवस्था के बारे में सदा भ्रम में रहते हैं।यह भ्रम उन्हें एक-न-एक दिन कारोबार सहित ले डूबता है।
हिसाब-किताब ही हमें इस बात का ठीक अनुमान करने में सहायता कर सकता है कि हमारी तिजोरी में पड़े हुए रुपए में हमारा कितना भाग हैं,कर्मचारियों का कितना,भागीदारों का कितना और बैंक का कितना।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा जाॅब में व्यवहारकुशल कैसे बनें? (How to Become Tactful in Dealings in Job?),अभ्यर्थी जाॅब में व्यवहारकुशल कैसे बनें? (How to Become Candidate Practical in Job?) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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