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6 Tips to Retain Employees

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2 9.कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए 6 टिप्स (6 Tips to Retain Employees),अच्छे कर्मचारियों को प्रतिधारण के लिए टिप्स (6 Tips to Retain Good Employees) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

1.कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए 6 टिप्स (6 Tips to Retain Employees),अच्छे कर्मचारियों को प्रतिधारण के लिए टिप्स (6 Tips to Retain Good Employees):

  • पिछले कुछ वर्षों में केरियर की अपार संभावनाओं के कारण कंपनी में कर्मचारियों को बनाए रखना (6 Tips to Retain Employees) मुश्किल होता जा रहा है।उदारीकरण,वैश्वीकरण,तकनीकी प्रगति व केरियर के बढ़ते हुए विभिन्न विकल्पों के कारण अच्छे कर्मचारी कंपनी को छोड़कर अन्यत्र दूसरी कंपनी में चले जाते हैं।कंपनी फ्रेशर्स व डिग्रीधारी युवाओं को भर्ती करती है।जब वे युवा कंपनी में रहकर कार्य सीख जाते हैं तथा कुछ अनुभव हो जाता है तो ऐसे कर्मचारी जॉब छोड़कर अन्यत्र चले जाते हैं।इससे कंपनी युवाओं को तैयार करने में जो निवेश करती है उसका तो नुकसान उठाना ही पड़ता है साथ ही जॉब (संबंधित) को करने वाले कैंडिडेट की कमी से कंपनी की कार्य क्षमता पर भी प्रभाव पड़ता है।
    कर्मचारी कई कारणों से कंपनी छोड़कर जाते हैं। इसलिए उन कारणों को जानना जरूरी है तभी कर्मचारियों को प्रतिधारणा (रिटेंशन) के जरिए कंपनी अपने कर्मचारियों को संस्थान से बांधने में कामयाब हो सकती है अथवा बांधे रखने के उपाय किए जा सकते हैं।
  • मुख्यत: कंपनी के अधिकारी (बॉस) के व्यवहार,कम वेतन,कैरियर की बेहतर संभावनाओं,कर्मचारी के कार्य को प्रोत्साहन न मिलने,योग्यता के अनुसार कार्य न मिलने,समय पर पदोन्नति के अभाव,कर्मचारियों में आपसी विवाद के कारण कर्मचारी कंपनी छोड़ कर चले जाते हैं।
  • कर्मचारी के छोड़कर जाने से रोकने हेतु समय रहते संबंधित कारण को जानकर उसका समाधान करना जरूरी होता है।अब उपर्युक्त कारणों के समाधान हेतु सिलसिलेवार विवरण प्रस्तुत है।
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2.अधिकारी (बॉस) का मित्रतापूर्ण व्यवहार (Friendly Behaviour of the officer/Boss):

  • कंपनी की साख,कंपनी के कर्मचारी को बनाए रखना,कंपनी की कार्य प्रणाली तथा अन्य कई बातें अधिकारी (बॉस) के व्यवहार तथा कार्यशैली पर निर्भर करती है।कुछ व्यक्तियों में अधिक मात्रा में अहंकार होता है।वे अपने सामने किसी को कुछ नहीं समझते हैं।यदि अधीनस्थ कर्मचारी में अधिक प्रतिभा होती है तो वे उसे हतोत्साहित करते हैं।बात-बात पर झिड़कते हैं,प्रताड़ित करते हैं।
  • ऐसे व्यक्ति को कर्मचारी का बॉस बनाने के कारण कंपनी प्रगति नहीं कर सकती है।विशेषकर आजकल के वातावरण में तो बिल्कुल ही संभव नहीं है।तकनीकी विकास तथा प्रतियोगिता के माहौल में कंपनियों तथा कर्मचारियों में गला काट प्रतिस्पर्धा हो गई है।इसलिए सब आगे बढ़ना चाहते हैं।किसी भी क्षेत्र में आज मोनोपोली (एकाधिकार) नहीं रह गई है।अतः कंपनी के बॉस का व्यवहार कर्मचारियों के प्रति मित्रतापूर्ण व सौम्य होना चाहिए।अन्यथा रूखे व उज्जड़ व्यवहार के कारण कर्मचारी कंपनी छोड़ कर चले जाते हैं क्योंकि उनके पास कार्य करने के लिए अन्य विकल्प (अन्य कंपनियां) है।
    कोई भी कर्मचारी एकाएक कंपनी छोड़कर नहीं जाता है।बल्कि कर्मचारी के असंतोष का कारण भी पता चल जाता है।परंतु जो बॉस बहुत सतर्क,सचेत नहीं रहता है तो वह उस कर्मचारी को खो देता है। यदि कर्मचारी उसके व्यवहार के कारण छोड़कर जा रहा है तो तत्काल उससे बातचीत करने का प्रयास करना चाहिए तथा उसके असंतुष्टि के कारण को दूर करने का प्रयास करना चाहिए।यदि अन्य कोई वजह है जैसे वेतन विसंगति,पदोन्नति,उत्तरदायित्व इत्यादि तथा ये कंपनी के बॉस के हाथ में नहीं है तो कर्मचारी को सांत्वना देकर अपने उच्चाधिकारी को तत्काल सूचित करना चाहिए।

3.समय पर पदोन्नति (Timely Promotion):

  • अधिकतर नवयुवा तथा फ्रैशर्स करियर की बेहतर संभावनाओं के कारण कंपनी को छोड़ देते हैं। कंपनी के अधिकारियों तथा कंपनी को ऐसी नीति बनानी चाहिए कि यदि किसी में अधिक प्रतिभा है तो उसे आगे बढ़ने का मौका मिले।कर्मचारी के अंदर छिपी हुई प्रतिभा का पूर्णरूप से उपयोग हो सके।
  • कई कंपनियों में एक बार फ्रैशर्स को नियुक्त करने के बाद उनकी समय पर पदोन्नति पर ध्यान नहीं दिया जाता है।यदि कर्मचारी कह भी देता है तो उसे झूठा आश्वासन देकर टरका दिया जाता है।अथवा पदोन्नति हेतु स्पष्ट मना कर दिया जाता है।इस प्रकार कर्मचारी को अपनी प्रतिभा के अनुकूल काम व पदोन्नति नहीं मिलती है तो वह वहां घुटन महसूस करता है।धीरे-धीरे छुपे हुए रूप से वह कर्मचारी अन्यत्र जाने के रास्ते ढूंढता है।कंपनी में बोनस,भत्तों,वेतन वृद्धि,चयनित वेतनमान तथा पदोन्नति की स्पष्ट व प्रोत्साहित करने वाली नीति होनी चाहिए।साथ ही इन नीतियों को लागू करने की तत्परता भी बरतनी चाहिए।यदि किसी कर्मचारी में विशिष्ट अथवा असाधारण प्रतिभा है तो कंपनी को निर्धारित नियमों में छूट देकर उसे आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करने चाहिए।यानी ये नियम फ्लैक्सिबल होने चाहिए।इसका अर्थ ये भी नहीं है कि बॉस अपने चहेतों को कंपनी के लाभ रेवड़ी की तरह बांट दें।अथवा मनमाने तरीके से नीति नियमों को लागू करें।नियमों में छूट किसी उत्तरदायी व्यक्ति अथवा कंपनी के हित में सोचने वाले अधिकारी अथवा सर्वेसर्वा के हाथ में होना चाहिए।
  • दरअसल युवावर्ग तथा फ्रेशर्स में जोश और ऊर्जा होती है।अतः वे कार्य को द्रुतगति से करते हैं तो इसलिए कि वे कैरियर में अपने आपको स्थापित करना चाहते हैं।वे बेहतर प्रोत्साहन के साथ-साथ अधिक वेतन व पैसा प्राप्त करने की महत्वाकांक्षा भी रखते हैं।

4.समय-समय पर वेतन व भत्तों का पुनर्गठन (Timely Restructuring of Salaries Payment of Advance Pay and Allowances):

  • कंपनी में बहुत समय से वेतन व भत्ते की बहुत पुरानी दरें प्रचलित है तो उनमें समय-समय पर संशोधन करते रहना चाहिए।जैसे आज से 30 वर्ष पूर्व ₹20- 30 की वेतन वृद्धि की जाती थी परंतु आज के परिप्रेक्ष्य में वेतन वृद्धि तीन सौ से लेकर ₹1500 तक की दरें हैं।अतः वेतन वृद्धि,भत्तों व वेतन की दरें पुरानी हो गई हैं तो समयानुसार उनमें यथोचित संशोधित करते रहना चाहिए।
  • आधुनिक युग आर्थिक युग है तथा इस आर्थिक युग में हर व्यक्ति कोई भी कार्य करता है तो यह देखता है कि उसे क्या फायदा होने वाला है?अधिक से अधिक फायदा पाने की तरफ उसकी नजर रहती है।हालांकि इस युग में भी ऐसे लोग मिल जाएंगे जो अर्थ के बजाय काम को ज्यादा महत्त्व देते हैं परंतु ऐसे लोग संख्या में कम है।
  • इसका अर्थ यह नहीं है कि कर्मचारी जो मांग करें उसकी मांग की पूर्ति की जावे।महत्वाकांक्षाओं तथा लालसाओं की पूर्ति करने करने का कोई अंत नहीं है।परंतु मार्केट को देखते हुए तथा कंपनी को अपनी आर्थिक स्थिति को देखते हुए वेतन इत्यादि को समय-समय पर संशोधित करते रहना चाहिए।

5.कर्मचारी के कार्य की प्रशंसा (Praise of Good Work of Employee):

  • कई कर्मचारी कंपनी में जी-जान से कार्य करते हैं परंतु उनके कार्य को सराहा नहीं जाता है।न उनको नैतिक प्रोत्साहन मिलता है।जब ऐसा कर्मचारी अपने मित्रों से मिलता है अथवा किसी अन्य कंपनी में जाता है और अपने कार्य की तुलना करता है तो उसे निराश होना पड़ता है।ऐसे कर्मचारी खुलकर अपने बॉस अथवा वरिष्ठ अधिकारी को बताते नहीं है।यह तो वरिष्ठ जनों तथा बॉस को ही सोचना चाहिए कि कर्मचारियों को वेतन के बल पर नहीं रोका जा सकता है।हर व्यक्ति की धन प्राप्ति के साथ-साथ लोकेषणा भी होती है।यदि लोकेषणा की पूर्ति नहीं होती है तो केवल वेतन के बल पर ऐसे कर्मचारी को नहीं रोका जा सकता है।आखिर युवावर्ग व कर्मचारी यह सोचता है कि कंपनी के लिए वह अधिक कार्य क्यों करें?
  • किसी भी कंपनी में कोई कर्मचारी तभी काम करता है जब उसके काम को समझने वाले अधिकारी तथा बॉस होते हैं।उसके कार्य को सराहा जाता है तथा उसके काम की अहमियत समझी जाती है।यदि ऐसा नहीं होता है तो कर्मचारी कंपनी को छोड़ने के लिए विवश हो जाते हैं।

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6.योग्यता के अनुसार काम सौंपना (Assigning Work as Per Merit):

  • कई युवा तथा फ्रैशर्स की कंपनी में नियुक्ति हो जाती है तो काम तथा योग्यता में भेदभाव देखते हैं।जब कंपनी में उससे कम योग्यता वाले को अच्छा कार्य अथवा वरिष्ठ पद प्राप्त होता है तो कर्मचारी में असंतोष व्याप्त हो जाता है।यदि कंपनी तथा कर्मचारी की सहमति से ऐसी नियुक्ति हो भी गई है तो भी उचित योग्यता के अनुसार उचित कार्य व उत्तरदायित्व सौंपना चाहिए।जैसे किसी कर्मचारी की योग्यता बीए है तथा वह मैनेजर के पद पर कार्यरत है।अब बीई/बीटेक वाले को उसके अधीन कार्य करना पड़ेगा तो कर्मचारी में असंतोष व्याप्त हो जाता है।हालांकि योग्यता से तात्पर्य केवल डिग्री ही नहीं होता है।फिर भी यदि किसी कर्मचारी में असंतोष दिखाई दे तो उसका तत्काल समाधान करना चाहिए।
  • हालांकि इस प्रकार के विवाद होने को टाला नहीं जा सकता है लेकिन आपसी संवाद से इसका समाधान किया जा सकता है।संवाद की कमी होने से यह असंतुष्टि बढ़ती जाती है तथा कर्मचारी अन्य कंपनी में चले जाते हैं।
  • संवाद का अर्थ यह नहीं है कि बॉस बोलता रहे तथा कर्मचारी सुनता रहे।बॉस को कर्मचारी की बात भी सुननी चाहिए तथा उसके असंतोष की अनदेखी अथवा अनसुलझा नहीं छोड़ना चाहिए।कंपनी के बॉस तथा अधिकारियों को लगता है कि किसी कर्मचारी में काबिलियत वास्तव में अधिक है जो काम सौंपा गया है उससे।ऐसी स्थिति में कर्मचारी की योग्यता का आकलन करके उसके अनुसार पद व उत्तरदायित्व तथा काम सौंपना चाहिए।

7.आपसी विवाद को तत्काल सुलझाना (Resolving Mutual Disputes Immediately):

  • जहां दो व्यक्ति बैठते हैं वहाँ आपसी विवाद,असंतोष होना स्वाभाविक है।परिवार तथा घर में ही आपस में विवाद हो जाता है तो कंपनी में कर्मचारियों में आपस में विवाद कर्मचारी कनिष्ठ-वरिष्ठ में विवाद तथा कर्मचारी-बॉस में विवाद होना स्वाभाविक है।आपसी संवाद की कमी ऐसे विवाद लड़ाई-झगड़े में बदल जाते हैं।ज्यादा अच्छा है कि ऐसे विवादों को पत्र-व्यवहार के बजाय आमने-सामने बैठकर सुलझा दिया जाए।जहां पर एक से अधिक लोग बैठते हैं उनके विचार,स्वभाव,आदतें,संस्कार तथा व्यवहार में भिन्नता होना स्वाभाविक है।इस विविन्नता के कारण आपस में विवाद हो जाता है।परंतु समय रहते यदि विवाद को नहीं सुलझाया जाए तो विवाद में टकराव तथा सिर-फुटौव्वल की स्थिति पैदा हो जाती है। इसलिए मीटिंग में अथवा अलग से विवादों को स्पष्ट करके तत्काल सुलझाया जाना चाहिए।
  • इस प्रकार के विवादों को सुलझाने के कई तरीके हैं। वस्तुत: काम की कमी अथवा काम के अधिक बोझ के कारण आपस में लड़ाई-झगड़े करते हैं।एक अन्य कारण अहंकार भी होता है।कर्मचारी/अधिकारी एक-दूसरे से अपने आपको श्रेष्ठ समझने के कारण आपस में झगड़ते हैं।एक-दूसरे को सहन करना तथा एक-दूसरे के विचारों को सम्मान देने से झगड़ा नहीं होता है।
  • एक अन्य समाधान यह भी है कि आफिस में व कंपनी में सृजनात्मक व रचनात्मक माहौल होता है तो कर्मचारी/अधिकारी नई-नई बातें सीखने तथा नया ज्ञान का सृजन करने में अपने समय का सदुपयोग करते हैं।यदि विवाद हो भी जाता है तो एक दूसरे को माफ करना व सहना सीखना चाहिए तभी तरक्की के नए रास्ते खुलते हैं तथा कर्मचारी व कंपनी आगे बढ़ती है।
  • यदि विवाद दोनों पक्षों से नहीं सुलझाता है तो तीसरे सुलझे हुए व्यक्ति को विवाद का समाधान करने में सहयोग लेना अथवा देना चाहिए।विवाद को सुलझाने में बहुत ही समझदारी व सुलझे हुए दिमाग की व अच्छे दिल की आवश्यकता होती है।विवाद की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए वरना तिल का ताड़ बनने में देर नहीं लगती है।
  • उदाहरणार्थ इसरो के वैज्ञानिक आपस में टीम वर्क,सहयोग,समन्वय के साथ काम करते हैं इसलिए भारत विज्ञान में प्रगति,उपग्रह की तकनीक,उपग्रह प्रक्षेपण में बहुत आगे बढ़ गया है। इसरो को खड़ा करने में डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम जैसे त्यागी और तपस्वियों का योगदान है।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए 6 टिप्स (6 Tips to Retain Employees),अच्छे कर्मचारियों को प्रतिधारण के लिए टिप्स (6 Tips to Retain Good Employees) के बारे में बताया गया है।

8.अद्भुत देवदूत (हास्य-व्यंग्य) (Wonderful Angel) (Humour-Satire):

  • हास्य-व्यंग्य जहाँ हमारे तन-मन को प्रफुल्लित करता है वहीं उसमें शिक्षाप्रद,प्रेरणादायक, जीवनोपयोगी शिक्षा भी अन्तर्निहित रहती है।जो छात्र-छात्राएँ इस हास्य-व्यंग्य से प्रेरणा व शिक्षा ग्रहण करेगा उसका जीवन उन्नत,सफल और नई ऊँचाइयों तक पहुँच सकेगा।ऐसा ही हास्य-व्यंग्य प्रसंग ‘अद्भुत देवदूत’ के विषय में कहा जा सकता है।ऐसा कहा जाता है कि देवदूत से जो कोई भी वरदान या इच्छा व्यक्त की जाती है वह पूरी कर देता है।स्वर्गलोक कहाँ है तथा उसमें रहनेवाले देवदूत कैसे हैं यह तो पता नहीं क्योंकि किसी जीवित व्यक्ति ने स्वर्गलोक व देवदूत देखे नहीं है तो पक्के तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता है।बहरहाल इस देवदूत का प्रसंग प्रस्तुत है:
  • एक छात्र गणित के सवालों को हल न करने के कारण काफी परेशान हो गया और थक हारकर लेट गया और विश्राम करने लगा कि कब उसकी आँख लग लग गई पता ही नहीं लगा।उसका अवचेतन मन अन्दर ही अन्दर गणित के सवालों की गुत्थी सुलझाने में लगा हुआ था।अचानक उसे शास्त्रों में वर्णित देवदूत की याद आई जो चुटकियों में किसी भी समस्या को हल कर देता है।
  • उसने देवदूत का ध्यान किया तो थोड़ी ही देर में देवदूत प्रकट हुए।उसने देवदूत से विनती की कि आप कृपा करके मेरे सवालों को हल कर दें।उसने ऐसी विनती की ही थी कि तभी उसके सवाल हल हो गये।जो सवाल हल करना चाहता था वही सवाल हल हो गए।सवाल के हल को देखकर वह आश्चर्यचकित हुआ तथा उसकी आँखें फटी की फटी रह गई।सवाल के हल को देखकर उसे हैरानी हुई।ये सवाल ऐसे कैसे हल हो गया परन्तु सवाल को लेकर वह काफी परेशान था इसलिए वह सवाल को गौर से देख देखने लगा।उन सवालों को देखते-देखते उसे विचार आया कि ये सवाल इसी तरह से हल हो जाएं तो मेरे ऊपर से बहुत बड़ा संकट टल जाएगा।काश मेरे ओर सवाल भी हल हो जाएं।उसने ऐसा सोचा ही था कि तत्काल उसके दूसरे सवाल भी हल हो गए।
  • तब छात्र ने सोचा कि देवदूत इन सवालों को हल करने के बदले मुझसे कोई फीस तो नहीं लेंगे।इतना सोचना था कि तत्काल देवदूत ने कहा कि इन सवालों को हल करने की फीस कहाँ है?इतना सुनते ही छात्र घबराकर जोर से उछल पड़ा।वह पसीने से तर बतर हो रहा था।
  • इस हास्य-व्यंग्य का भावार्थ यह है कि व्यक्ति मन में जैसे सोच-विचार करता है वैसा ही हमारा व्यवहार हो जाता है।यदि हम सकारात्मक सोचें तो हमारे शरीर की पूरी ऊर्जा किसी भी समस्या को हल करने में लग जाती है।यदि नकारात्मक सोचें तो हमारा शरीर काँपने लगता है,पसीने छूटने लगते हैं।शरीर,मन व बुद्धि की दशा पतली हो जाती है।

9.कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए 6 टिप्स (6 Tips to Retain Employees),अच्छे कर्मचारियों को प्रतिधारण के लिए टिप्स (6 Tips to Retain Good Employees) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.कर्मचारी को बनाएं रखने के टिप्स क्या हैं? (What are Tips to Retain Employees?):
उत्तर:यहां अपने सर्वश्रेष्ठ कर्मचारियों को रखने के लिए शीर्ष 9 सुझाव दिए गए हैं:

उत्तर:सही लोगों को किराए पर लें (Hire the right people)।
उन्हें अवसर दिखाएं (Show them opportunities)।
उन्हें लाभ प्रदान करें (Offer them benefits)।
विश्वास के साथ प्रबंधित करें (Manage with trust)।
एक महान काम का माहौल बनाएँ (Create a great work environment)।
एक कार्य-जीवन में संतुलन को प्राथमिकता दें (Prioritize a work-life balance)।
दो-तरफ़ा प्रतिक्रिया स्थापित करें (Establish two-way feedback)।
कर्मचारियों को मूल्यवान महसूस कराएं (Make employees feel valued)।

प्रश्न:2.सर्वश्रेष्ठ कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए रणनीतियां क्या हैं? (What are the strategies to retain best employees?):

उत्तर:इस प्रकार,प्रतिभा के इस युद्ध में आपकी मदद करने के लिए,मैंने कर्मचारियों को बनाए रखने के तरीके पर कुछ रचनात्मक तरीकों को सूचीबद्ध किया है।
सांस्कृतिक फिट के लिए भर्ती (Hiring for Cultural Fit).
हाइब्रिड कार्यस्थलों (Hybrid Workplaces).
पुरस्कृत प्रयास और न केवल परिणाम (Rewarding Efforts and Not Just Results)।
कर्मचारी कल्याण (Employee Well-being)।
सीएसआर कार्यक्रमों में संलग्न (Engaging in CSR Programs)।
ESOPs (कर्मचारी स्टॉक स्वामित्व कार्यक्रम) (ESOPs (Employee Stock Ownership Program))
Sabbatical कार्यक्रम (Sabbatical Programs)

प्रश्न:3.कर्मचारी प्रतिधारण के 5 मुख्य ड्राइवर हैं? (What are the 5 main drivers of employee retention?):

उत्तर:कर्मचारी को बांधे रखने (Engagement) और प्रतिधारण (Retention) के 5 ड्राइवर
पूर्ति सक्षम करें (Enable fulfillment).हम सभी एक कारण के लिए हमारी नौकरी स्वीकार करते हैं।
बढ़ने के अवसर प्रदान करें (Provide opportunities to grow)।
जिम्मेदार कर्मचारियों को सशक्त बनाना (Empower responsible employees)।
सहयोग की सुविधा प्रदान करें (Facilitate collaboration)।
प्रक्रिया और वर्कफ़्लोज़ के माध्यम से सफलता का समर्थन करें (Support success through process and workflows):

प्रश्न:4.आप कर्मचारियों को कैसे प्रेरित करते हैं और बनाए रखते हैं? (How do you motivate and retain employees?):

उत्तर:यहां सबसे अच्छे लोगों को प्रेरित करने और बनाए रखने के 10 तरीके दिए गए हैं:
उन्हें साप्ताहिक चुनौती दें (Challenge them weekly)।
दृष्टिकोण के लिए इनाम न केवल कौशल (Reward for attitude,not just skills)।
करियर बनाने का मौका दें,सिर्फ पैसा कमाने का नहीं (Give an opportunity to build a career, not just make money)।
काम करने के लिए अग्रणी स्थानों में से एक बनें (Be one of the leading places to work)।
अच्छी तरह से भुगतान करें (Pay well)।
अपने निर्णय लेने की क्षमता दें (Give the ability to make their own decisions)।
मालिक बनें जो प्रभावी ढंग से संवाद करता है (Be the boss that communicates effectively)।

प्रश्न:5.आप कर्मचारी प्रतिधारण और प्रेरणा में सुधार कैसे करते हैं? (How do you improve employee retention and motivation?):

उत्तर:2022 के लिए कर्मचारी प्रतिधारण रणनीतियाँ (Employee Retention Strategies for 2022):
अधिक सकारात्मक प्रतिक्रिया प्रदान करें (Provide More Positive Feedback).
कर्मचारी रचनात्मकता को प्रोत्साहित करें (Encourage Employee Creativity)।
कार्यस्थल में सम्मान को बढ़ावा दें (Foster Respect In The Workplace)।
अपने कर्मचारियों को बढ़ने का अवसर दें (Give Your Employees An Opportunity To Grow)।
अपने कर्मचारियों का विश्वास अर्जित करें (Earn The Trust Of Your Employees)।
अपने कर्मचारियों को आपको प्रतिक्रिया देने के लिए प्रोत्साहित करें (Encourage Your Employees To Give You Feedback)।
अपने कर्मचारियों को शामिल करें (Include Your Employees)।
संतुलित तरीके से अपने कर्मचारियों को चुनौती दें (Challenge Your Employees In A Balanced Way)।

प्रश्न:6.आप 2021 में कर्मचारियों को कैसे बनाए रखते हैं? (How do you retain employees 2021?):

उत्तर:समाधान क्या है?
वफादारी को प्रोत्साहित करें (Incentivize loyalty)।आपको लोगों को मेज से पैसे के मुद्दे को लेने के लिए पर्याप्त भुगतान करना होगा।
बढ़ने के अवसर प्रदान करें (Provide opportunities to grow)।
अपने उद्देश्य को बढ़ाएं (Elevate your purpose)।
संस्कृति और कनेक्शन को प्राथमिकता दें (Prioritize culture and connection)।
अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों की देखभाल करने में निवेश करें (Invest in taking care of your employees and their families)।
लचीलेपन को गले लगाओ (Embrace flexibility)।

प्रश्न:7.मैं अपने कर्मचारियों को 2021 छोड़ने से कैसे रोकसकता हूं? (How do I keep my employees from leaving 2021?):

उत्तर:2022 में 8 सिद्ध कर्मचारी प्रतिधारण रणनीतियाँ (8 Proven Employee Retention Strategies in 2022):
पेशेवर विकास के अवसर पैदा करें (Create professional development opportunities)।
सुनिश्चित करें कि प्रबंधक महान कर्मचारियों को छोड़ने के लिए मजबूर नहीं कर रहे हैं (Make sure managers are not compelling great employees to leave)।
कैरियर उन्नति के अवसर पैदा करें (Create career advancement opportunities)।
ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया में सुधार करें (Improve the onboarding process)।
टर्नओवर जोखिमों की निगरानी करें (Monitor turnover risks)।
सुनिश्चित करें कि आपके कर्मचारियों की सराहना की जाती है और मान्यता प्राप्त है (Make sure your employees are appreciated and recognized)।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्धारा कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए 6 टिप्स (6 Tips to Retain Employees),अच्छे कर्मचारियों को प्रतिधारण के लिए टिप्स (6 Tips to Retain Good Employees) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

6 Tips to Retain Employees

कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए 6 टिप्स
(6 Tips to Retain Employees)

6 Tips to Retain Employees

पिछले कुछ वर्षों में केरियर की अपार संभावनाओं के कारण कंपनी में कर्मचारियों को बनाए रखना
(6 Tips to Retain Employees) मुश्किल होता जा रहा है।उदारीकरण,वैश्वीकरण,तकनीकी प्रगति व केरियर के बढ़ते हुए

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