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Math Capable of Solving Unemployment?

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2 2.गणित बेरोजगारी सुलझाने में सक्षम? (Math Capable of Solving Unemployment?),गणित शिक्षा बेरोजगारी के समाधान में सक्षम है (Mathematics is Capable of Solving Unemployment) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

1.गणित बेरोजगारी सुलझाने में सक्षम? (Math Capable of Solving Unemployment?),गणित शिक्षा बेरोजगारी के समाधान में सक्षम है (Mathematics is Capable of Solving Unemployment):

  • गणित बेरोजगारी सुलझाने में सक्षम (Math Capable of Solving Unemployment) किस प्रकार से हो सकती है?बेरोजगारी का सामान्य अर्थ यह होता है कि जो व्यक्ति किसी उत्पादक कार्य में नहीं लगे हुए हैं उन्हें बेरोजगार माना जाता है।परन्तु वृद्ध, बालक तथा उत्पादक कार्य में अयोग्य व्यक्तियों को इसमें शामिल नहीं किया जाता है।बेरोजगारी में औद्योगिक बेरोजगारी (Industrial Unemployment),शिक्षित बेरोजगारी (Educated Unemployment) इत्यादि प्रकार की होती है।औद्योगिक बेरोजगारी में श्रमिक बेरोजगारी भी शामिल है।गणित शिक्षा से बेरोजगारी किस तरह दूर हो सकती है या गणित शिक्षा रोजगार देने में कैसे सक्षम है इस पर भी विचार किया जाएगा।गणित शिक्षा पाकर युवा उद्योग धन्धों,कम्पनियों,सरकारी तथा गैरसरकारी संस्थाओं में रोजगार प्राप्त कर सकता है।
  • शिक्षित बेरोजगारी इसलिए उत्पन्न होती है कि बड़ी संख्या में युवा शिक्षा पाकर तैयार होते हैं परन्तु उन्हें रोजगार नहीं मिलता है या रोजगार पाने में असमर्थ रहते हैं।यानि ये युवा मजदूरी या वेतन की प्रचलित दरों से कम मजदूरी या वेतन पर काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं लेकिन फिर भी उन्हें रोजगार नहीं मिलता है।भारत में शिक्षित बेरोजगारी के कई कारण हैं जिनमें दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली,युवाओं में आवश्यक कौशल का अभाव,जितने युवा शिक्षित होते हैं उतनी संख्या में रिक्तियों का सृजन न होना अर्थात् माँग व पूर्ति में असन्तुलन।इसके अन्य कारण हैं जनसंख्या में तीव्र वृद्धि,विकास की धीमी गति,उद्योगपतियों की सोच व कार्यप्रणाली।
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(1.)बेरोजगारी का मूल कारण दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली (The root cause of unemployment is the faulty education system):

  • वर्तमान शिक्षा प्रणाली से युवाओं को मात्र डिग्री मिलती है।डिग्री प्राप्त करने में माता-पिता इतना धन खर्च कर देते हैं कि उससे हासिल कुछ नहीं होता है।युवा केवल साक्षर हो पाता है।डिग्री प्राप्त करने के बाद युवावर्ग सरकारी व गैरसरकारी नौकरी प्राप्त करना चाहता है।
  • हर वर्ष काॅलेज और हाईस्कूल से कई लाखों युवा परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं।जाहिर है कि बहुत अधिक नौकरियों की आवश्यकता होती है।लेकिन यदि वर्षभर की रिक्तियों को जोड़े तो रिक्तियाँ दस-बीस हजार निकलती हैं।इससे समस्या का समाधान कैसे हो सकता है?सरकारें मंडल कमीशन,एससी,एसटी को आरक्षण देकर युवाओं में आपस में दरार का कार्य ही करती हैं।जबकि सरकारों को चाहिए कि रोजगार के अवसर बढ़ाए।शिक्षा प्रणाली में इस प्रकार का बदलाव करे जिससे युवाओं में कौशल (Skill) का निर्माण हो।
  • युवावर्ग पारम्परिक रोजगार न तो करना चाहता है तथा आधुनिक तकनीकी के कारण पारम्परिक रोजगार प्राप्ति के अवसर खत्म होते जा रहे हैं।जैसे-जैसे बेरोजगारी बढ़ती जा रही है विदेशों में नौकरियों की तलाश में युवाओं (प्रतिभा पलायन) की संख्या में वृद्धि होती जा रही है।
  • विदेशों में युवाओं के साथ क्या-क्या अत्याचार होता है उसे नारकीय जीवन न कहें तो मानवीय जीवन तो नहीं कहा जा सकता है।विदेशों में नौकरी का झांसा देने के लिए दलाल और स्मगलर पैदा हो गए हैं जिनकी पौ-बारह हो जाती है।
    गणित शिक्षा पाकर कोई युवा व्यापार (Business),उद्योग (Industry),नौकरी (Service) या किसी भी अन्य व्यवसाय (Profession) जैसे इंजीनियर,व्याख्याता, गणितज्ञ के लिए तैयारी करने के योग्य हो जाता है।
    राजस्व विभाग,रेलवे विभाग,वित्त विभाग इत्यादि में नौकरी के अवसर मिलते हैं।किसी भी व्यवसाय और विभाग (चाहे गैर-सरकारी,निजी या सरकारी हो) में कर्मचारियों का चयन प्रतियोगिता परीक्षाओं द्वारा किया जाता है।इन सभी परीक्षाओं में गणित,मानसिक योग्यता व तार्किक क्षमता का प्रश्न-पत्र होता है।मानसिक योग्यता व तार्किक क्षमता किसी न किसी रूप में गणित का ही स्वरूप है।
  • इसी प्रकार एनडीए,बैंक,बीमा,सिविल सेवाएं आईएएस,आईसीएस,आरएएस आदि सरकारी व गैर-सरकारी व निजी सभी संस्थाओं व विभागों में गणित,मानसिक योग्यता तथा तार्किक क्षमता की परीक्षा ली जाती है।शिक्षकों के लिए नेट (NET),स्लेट (SLET) की परीक्षाओं में भी मानसिक योग्यता की परीक्षा ली जाती है।अभियांत्रिकी (Engineering),सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology),प्रबंध (Management),प्रशासन (Administration) इत्यादि में गणित की परीक्षा किसी न किसी रूप में ली जाती है।इसलिए यदि युवा वर्ग शुरू से ही गणित का ठीक से अभ्यास करें,गणित शिक्षा को गंभीरता से लें तो उन्हें रोजगार प्राप्त कराने में मुख्य भूमिका अदा कर सकती है।
  • लेकिन इससे शिक्षित बेरोजगारी का पूर्णत: हल नहीं हो सकता है।क्योंकि नौकरियों की संख्या हजारों में होती है जबकि शिक्षित लाखों में होते हैं। इसलिए युवाओं को नौकरी के अलावा अन्य विकल्पों पर भी सोचना चाहिए,करना चाहिए।उन्हें कोई ऐसा हुनर अवश्य सीखते रहना चाहिए जिसमें उनकी रूचि हो तथा जिसके आधार पर छोटा-मोटा व्यवसाय,एंटरप्रेन्योरशिप (Entrepreneurship) शुरू कर सके।

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(2.)युवाओं में आवश्यक दक्षता,कौशल व योग्यता का अभाव (Lack of necessary efficiency, skills and qualifications among the youth):

  • बहुराष्ट्रीय कंपनियों,निजी उद्योग धंधों,सरकारी कंपनियों में आज स्किल वाले युवाओं की आवश्यकता है।लेकिन युवाओं के पास सैद्धांतिक डिग्री (बीई,बीटेक,एमएससी, बीएससी,पीएचडी इत्यादि) तो होती है परंतु स्किल का अभाव देखा जाता है।इसलिए युवा वर्ग यदि संबंधित डिग्री के साथ-साथ स्किल का विकास भी करें (चाहे किसी निजी संस्थान में पार्ट टाइम काम करके या स्वयं अपने स्तर पर सीखें) तो डिग्री प्राप्त करते ही उसे जॉब मिलने की संभावनाएं बढ़ जाती है।
  • लेकिन इस तकनीक से भी बेरोजगारी का समाधान पूर्णत: संभव नहीं है क्योंकि डिग्री के साथ स्किल को डवलप करने का अर्थ है कि शिक्षित वर्ग उच्च शिक्षा प्राप्त करने में लगे रहते हैं परंतु ऐसा करके कम शिक्षित युवाओं के लिए परेशानी खड़ी कर रहे होते हैं।कम शिक्षित लोगों को रोजगार प्राप्त करने में कठिनाई होती है।उच्च शिक्षा प्राप्त करने में धन अधिक खर्च करना पड़ता है तथा इसकी तुलना में उन्हें वेतन कम मिलता है।इस प्रकार यह भी एक तरह से बेरोजगार होना ही है।जब तक सरकारें,उद्योगपति,बहुराष्ट्रीय कंपनियां शिक्षित युवाओं को रोजगार देने के अवसर नहीं बढ़ाती है तब तक इस समस्या का समाधान मुश्किल है।इतना अवश्य है कि यदि युवाओं में स्किल का डवलपमेंट हो तो वे अपना खुद का व्यवसाय खड़ा कर सकते हैं।इससे बेरोजगारी दूर करने में कुछ सहायता तो मिलेगी।बूंद-बूंद से ही घड़ा भरता है,इस प्रकार सभी अपनी-अपनी तरफ से बेरोजगारी दूर करने के प्रयास किए जाएंगे तो समाधान निकलेगा ही।

(3.)उद्योगपतियों की सोच व कार्यप्रणाली (Thinking and Functioning of Industrialists):

  • विकसित देशों तथा विकासशील देशों में बेरोजगारी होने का समान कारण नहीं है।विकासशील देशों के उद्योगपति जब विकसित देशों की तकनीक व कार्यप्रणाली को अपनाते हैं तो इससे बेरोजगारी कम होने के बजाय बढ़ती है।भारत तथा विकासशील देशों में जनसंख्या घनत्व,जनसंख्या बहुत अधिक है।इन देशों के उद्योगपति जहां तक हो सकता है श्रम को पूंजी से बदलने का प्रयास करते हैं।विकसित देशों में जहां जनसंख्या कम है तथा पूँजी बड़ी मात्रा में उपलब्ध है वहाँ ऑटोमेटिक मशीनों का उपयोग करना ठीक है।वहाँ श्रमिकों को विकासशील देशों से 4-5 गुना अधिक मजदूरी का भुगतान करना पड़ता है।जबकि भारत में व विकासशील देशों में श्रमिक कम मजदूरी व वेतन पर उपलब्ध हो जाते हैं।अतः विकासशील देशों में श्रम के बजाय पूँजी से अर्थात् ऑटोमेटिक मशीनों का प्रयोग बेरोजगारी को बढ़ाता है।इसलिए उद्योगपतियों को तथा सरकार को तकनीकी का चुनाव करते समय अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।इस तरह का निवेश पूंजीपतियों के लिए लाभदायक हो सकता है परंतु लोगों को रोजगार देने के दृष्टिकोण से लाभकारी नहीं है।

(4.)तीव्र जनसंख्या वृद्धि (Rapid population growth rate):

  • स्वतंत्रता के बाद भारत में जनसंख्या में वृद्धि हुई है। इसका कारण है मृत्यु दर में आई कमी।साथ ही महिला साक्षरता दर में वृद्धि हुई है।शिक्षा में प्रसार और स्त्रियों में रोजगार पाने की बढ़ती हुई इच्छा से श्रम की पूर्ति तेजी से बढ़ी है।परंतु अर्थव्यवस्था का विकास जिस तरह से हुआ है उस तरह रोजगार की बढ़ती मांग को पूरा करना संभव नहीं हुआ है।
  • ऐसी अर्थव्यवस्था,सुस्त अर्थव्यवस्था के कारण गरीबी,बेरोजगारी तथा युवाओं में निराशा का माहौल व्याप्त होता जा रहा है।पंचवर्षीय योजनाओं में सरकारों ने शिक्षित बेरोजगारी को दूर करने की कोई ठोस दीर्घकालिक नीति नहीं बनाई है।न पंचवर्षीय योजनाओं में ऐसा कोई गणितीय माॅडल अपनाया गया जिसके आधार पर बेरोजगारी को दूर किया जा सकता हो।

(5.)महँगाई और बेरोजगारी का चोलीदामन का साथ (With the cholidaman of Inflation and Unemployment):

  • राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर बैरोजगारी बढ़ रही है इसमें महँगाई भी किसी न किसी प्रकार जिम्मेदार है।मुद्रास्फीति में वृद्धि से बेरोजगारी दुगुनी दर से बढ़ती है।संगठित तथा असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों में महँगाई बढ़ने से उनकी क्रयशक्ति पर फर्क पड़ता है।संगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की तो महँगाई बढ़ने के साथ उसी अनुपात में महँगाई भत्ता या वेतन बढ़ा दिया जाता है।लेकिन असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के साथ ऐसा नहीं होता है।मान लीजिए सरकारी या गैर सरकारी,अर्द्धसरकारी (संगठित क्षेत्र में) क्षेत्र में काम करने वाले किसी व्यक्ति का वेतन 20000
    रुपये है।अब यदि 5 प्रतिशत महँगाई बढ़ जाती है तो उसे महँगाई भत्ते के रूप में 1000 रुपए अतिरिक्त मिल जाएंगे।मगर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को महँगाई के साथ किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं होती है।इस प्रकार महँगाई तो बढ़ जाती है परन्तु ऐसे लोगों की आय नहीं बढ़ती है।
  • संगठित क्षेत्र में काम करनेवाले लगभग 10% लोग हैं जबकि असंगठित क्षेत्र में करीब 90% लोग कार्य करते हैं।असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की आय की कोई निश्चित गारन्टी नहीं होती है।इन लोगों की आय समाज के उपभोग पर निर्भर करती है।उदाहरण के लिए असंगठित क्षेत्र में जैसे परचून की दुकानों पर जो लोग कार्य करते हैं,महँगाई का असर सीधा इन पड़ेगा।क्योंकि महँगाई बढ़ने से बिक्री कम होगी।बिक्री कम होने से आय घटेगी और आय घटने से इन पर निर्भर लोगों की संख्या कम होगी अर्थात् बेरोजगारी बढ़ेगी।
  • महँगाई से खुशहाली और आकस्मिक रोजगार में कमी आती है।महँगाई के कारण दावतों,पिकनिक, बाहर जाकर खाने,घूमने,मनोरंजन आदि में कटौती होती है।इससे इन क्षेत्रों में काम पा रहे लोगों के काम में कमी आती है।
    महँगाई बढ़ने से बच्चों के जेब खर्च में कटौती होती है।बच्चों के जेब खर्च से देश के लोगों की आजीविका प्रभावित होती है।बच्चों के जेब में कटौती होने से चने,चुरमुरे,बेर,आइसक्रीम, टाॅफी, गुब्बारे बेचनेवाले वेंडरों की बिक्री कम होती है जिससे उनके रोजगार में कमी आती है।
  • महँगाई बढ़ने से गली-मोहल्लों में सामान बेचनेवालों का धन्धा मन्दा पड़ जाता है जिससे इनसे जुड़े लोग बेरोजगार हो जाते हैं।इस प्रकार बेरोजगारी बढ़ाने में महँगाई भी जिम्मेदार होती है।

(6.)निष्कर्ष (Conclusion of Math Capable of Solving Unemployment?):

  • युवा वर्ग को फैशनपरस्ती,फिजूलखर्ची करने के बजाय उसे शिक्षा पर खर्च करने के लिए माता-पिता से धन मिलता है उसमें से बचत करने की आदत डालनी चाहिए।युवाकाल कठोर श्रम,संयम तथा व्यावहारिक शिक्षा प्राप्त करने का होता है।इसलिए शिक्षा पूरी होते ही यदि उसके पास कुछ बचत हो तो छोटा-मोटा व्यवसाय चालू करके आत्मनिर्भर हो सकता है।
  • परंतु आधुनिक जीवन शैली को अपनाकर युवावर्ग शिक्षा,उच्च शिक्षा प्राप्त करने में बेतहाशा धन खर्च कर देता है।शिक्षा पूरी करने के बाद माता-पिता भी कंगाली के स्तर पर पहुंच चुके होते हैं तथा युवाओं के पास डिग्री का सर्टिफिकेट के अलावा कुछ भी नहीं होता है।अतःशिक्षा के साथ में कुछ हुनर भी सीखें।गणित शिक्षा एक प्रैक्टिकल शिक्षा है जिसे व्यावहारिक शिक्षा प्राप्त करने की प्रेरणा मिलती है।
  • सरकारें बेरोजगारों के प्रति संवेदनशील नहीं है। उनके द्वारा जो भी प्रयास किए जाते हैं ऊंट के मुंह में जीरा वाली कहावत को चरितार्थ करती है।
  • रोजगार सेंटर खोले गए हैं उनमें युवा वर्ग चक्कर काटते-काटते हताश व निराश हो जाते हैं।परन्तु न तो उनको साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है और न ही उनकी कोई सुध लेने वाला है।युवावर्ग नौकरी पाने के लिए हाथ-पांव मारते हैं परंतु उन्हें मिलता कुछ भी नहीं।
  • दरअसल सरकारें भावनात्मक मुद्दे उछालती हैं।परन्तु भावनात्मक मुद्दों के आधार पर सत्ता तो प्राप्त की जा सकती है।परंतु सत्ता में बने रहने के लिए,सत्ता बरकरार रखने के लिए लोगों का ठोस अर्थव्यवस्था के तहत रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान करना निहायत जरूरी है।जैसे गरीबी,बेरोजगारी,स्वास्थ्य,बिजली, पानी इत्यादि समस्याओं का समाधान।श्रेष्ठ प्रधानमंत्री और लौह पुरुष जैसे लेबल चस्पा करने से जनता मोहित हो सकती है।लेकिन ठोस धरातल पर श्रेष्ठ प्रधानमंत्री की योग्यता तथा लोहपुरुषत्व सिद्ध न होने पर जनता का मोहभंग होने में ज्यादा समय नहीं लगता है।
  • उदारीकरण,भूमंडलीकरण के बाद जिस तरह से सरकारी कंपनियों,मूल्यवान संपत्तियों को औने पौने दामों पर बेचा जाना उचित नहीं है।उन कंपनियों तथा उपक्रमों को तो बिल्कुल भी नहीं बेचा जाना चाहिए जो लाभ में चल रहे हैं।आखिर सरकार या प्रशासन चलाने का यह तरीका उचित नहीं कहा जा सकता।इससे बेरोजगारी का समाधान नहीं हो सकता है।भारत में अभी जनकल्याणकारी जवाबदेही का अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त है।
  • आरक्षण की नीति से भी रोजगार की समस्या हल नहीं हो सकती है।इससे जातीय तनाव में बढ़ोतरी होती है तथा समाज विभाजित ही होता है।परंतु देखा जाता है कि सरकारें वोट पाने की लालसा में जनता को आरक्षण का लॉलीपॉप थमा देती है।
    जब तक रोजगार के अवसर पैदा नहीं किए जाएंगे,युवाओं में स्किल को डवलप नहीं किया जाएगा,शिक्षा प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन नहीं किया जाएगा तथा देश के उद्योगपति देश के युवावर्ग के हित में सोचना प्रारम्भ नहीं करेंगे तब तक रोजगार की समस्या हल होने के बजाय ओर बढ़ेगी।कोरोना महामारी ने तो बेरोजगारी को कोढ़ में खाज वाली कहावत सिद्ध कर दी है।
  • उपर्युक्त विवरण में गणित बेरोजगारी सुलझाने में सक्षम? (Math Capable of Solving Unemployment?),गणित शिक्षा बेरोजगारी के समाधान में सक्षम है (Mathematics is Capable of Solving Unemployment) के बारे में बताया गया है।

2.गणित बेरोजगारी सुलझाने में सक्षम? (Math Capable of Solving Unemployment?),गणित शिक्षा बेरोजगारी के समाधान में सक्षम है (Mathematics is Capable of Solving Unemployment) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.बेरोजगारी दर की गणना का फार्मूला क्या है? (What is the formula for calculating the unemployment rate?):

उत्तर:सामान्य तौर पर,संयुक्त राज्य अमेरिका में बेरोजगारी की दर श्रम बल (नियोजित या बेरोजगार) में व्यक्तियों की संख्या और उस आंकड़े को 100 से गुणा करके बेरोजगार व्यक्तियों की संख्या को विभाजित करके प्राप्त की जाती है।

प्रश्न:2.बेरोजगारी को हल करने या हल करने के लिए आप क्या कर सकते हैं? (What can you do to solve or solve unemployment?):

उत्तर:बेरोजगारी की समस्या को हल करने के तरीके:
राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करना।
शैक्षिक मानकों को बढ़ाना।
देश में जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण।
नए सशक्तिकरण कार्यक्रमों का शुभारंभ (Launch of new empowerment programs)
स्वरोजगार/उद्यमिता को प्रोत्साहित करना (Encouraging self-employment/ entrepreneurship)।
बुनियादी शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करना।
रिटायरमेंट की उम्र कम करना।
आलस्य से बचें।

प्रश्न:3.बेरोजगारी का सबसे सटीक उपाय क्या है? (What is the most accurate measure of unemployment?):

उत्तर:U-3 अमेरिका में बेरोजगारी की सबसे अधिक रिपोर्ट दर है-U-6 दर में हर कोई शामिल है परन्तु U-3 दर में शामिल नहीं है:हतोत्साहित (discouraged),अल्पनियोजित (underemployed) और देश में बेरोजगार श्रमिकों (unemployed workers)।यह उन लोगों की संख्या को मापता है जो बेरोजगार हैं लेकिन सक्रिय रूप से रोजगार की मांग कर रहे हैं।

प्रश्न:4.क्या शिक्षा से बेरोजगारी की समस्या का समाधान हो सकता है? (Can education solve the unemployment problem?):

उत्तर:शिक्षित बेरोजगारी की समस्या का समाधान निम्नलिखित कदम उठाकर किया जा सकता है-(i) शुरू से ही व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) पर जोर दिया जाना चाहिए।(ii) केवल उन्हीं छात्रों को उन कॉलेजों और संस्थानों में प्रवेश लेने की अनुमति दी जानी चाहिए जिनके पास अपनी पढ़ाई पर मुकदमा (to prosecute) चलाने के लिए कुछ निश्चित उद्देश्य हैं ।

प्रश्न:5.बेरोजगारी के 5 कारण क्या हैं? (What are the 5 causes of unemployment?):

उत्तर:बेरोजगारी के 5 प्रमुख कारण
मिर्गी विद्युत आपूर्ति (Epileptic Electric Power Supply)।नियमित बिजली आपूर्ति की कमी बेरोजगारी का सबसे बड़ा कारण है ।
शिक्षा की खराब गुणवत्ता।
कृषि और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की लापरवाही।
भ्रष्टाचार।

प्रश्न:6.शिक्षित बेरोजगारी को कैसे रोका जा सकता है? (How can educated unemployment be prevented?):

उत्तर:(i) शिक्षा देने में सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) (आईटी) का अधिक उपयोग किया जाना चाहिए।(ii)शिक्षा को रोजगार बाजारों की जरूरतों को पूरा करना चाहिए।(iii) तृतीयक क्षेत्र (tertiary sector) में अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए जहां अधिक शिक्षित बेरोजगार लोग नौकरियां पा सकें।

प्रश्न:7.शिक्षित बेरोजगारी क्या है? (What is educated unemployment?):

उत्तर:शिक्षित बेरोजगारी- जब पढ़े-लिखे लोगों को नौकरी नहीं मिलती तो इसे शिक्षित बेरोजगारी कहा जाता है। … उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यवसाय में पूर्ण परिवर्तन होता है, तो कुछ कामगारों को उनकी नौकरियों से हटा दिया जाता है यह संरचनात्मक रोजगार (structural employment) है ।

प्रश्न:8.शिक्षित बेरोजगारी के कारण क्या हैं? (What are the causes of educated unemployment?):

उत्तर:भारत में शिक्षित बेरोजगारी के 5 प्रमुख कारण 2022
आबादी (Population)।
कम संस्थान/विश्वविद्यालय मानक (Low Institution/University Standards)।गोल्ड मेंबरशिप के साथ कंटेंट राइटिंग कोर्स (Content Writing Course with Gold Membership)।
सही कौशल की कमी (Lack of right skills)।
नौकरी का अवसर और योग्यता बेमेल (Job opportunity & qualification mismatch)।
सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा करना (Meeting Societal responsibilities)।
इन बिन्दुओं के आधार पर Math Capable of Solving Unemployment को जान सकते हैं।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित बेरोजगारी सुलझाने में सक्षम? (Math Capable of Solving Unemployment?),गणित शिक्षा बेरोजगारी के समाधान में सक्षम है (Mathematics is Capable of Solving Unemployment) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।Math Capable of Solving Unemployment

Math Capable of Solving Unemployment?

गणित बेरोजगारी सुलझाने में सक्षम?
(Math Capable of Solving Unemployment?)

Math Capable of Solving Unemployment?

गणित बेरोजगारी सुलझाने में सक्षम (Math Capable of Solving Unemployment) किस प्रकार से हो सकती है?
बेरोजगारी का सामान्य अर्थ यह होता है कि जो व्यक्ति किसी उत्पादक कार्य में नहीं लगे हुए हैं उन्हें बेरोजगार माना जाता है।
Math Capable of Solving Unemployment

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