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Mathematics Club

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1 गणित क्लब (Mathematics club) –
1.2 2.क्लब की गतिविधि-
1.2.3 गणित क्लब के द्वारा गणित के अध्ययन को बल और उद्दीपन प्रदान किए जाते हैं। इसकी सहायता स्वैच्छिक होती है इसलिए इसमें वही विद्यार्थी शामिल होते हैं जो कि वास्तव में गणित में रुचि रखते हैं तथा विषय का वह स्वरूप जानना चाहते हैं जो कि कक्षा कार्य से भिन्न होता है। गणित क्लब में होने वाले आयोजन किसी औपचारिक क्रमिक व्यवस्था का अनुसरण नहीं करते। इनमें उन आयोजनों को अवसर दिए जाते हैं जो कि उसके सदस्यों की चाह के अनुरूप हों। माध्यमिक स्तर के विद्यार्थी परस्पर मिल-जुलकर रहना चाहते हैं। वे मानसिक (Mental), सामाजिक (social), पारिवारिक सम्बन्धों (Family Relationship) की पृष्ठभूमि में एक-दूसरे पर आश्रित रहते हैं वे अपने विचार दूसरों को सुनना चाहते हैं तथा दूसरों के विचार भी सुनना चाहते हैं। वे दूसरों की आलोचना का आनंद लेते हैं तो अपनी आलोचना को भी सुनना चाहते हैं। एक-दूसरे से उनकी मत-भिन्नता अभिरुचि (Intrest) को उद्दीप्त (stimulate) और विचार-विमर्श (Discussion) को अभिप्रेरित करती है। गणित क्लब ऐसा आदर्श मंच प्रदान करता है जिसमें गणितीय विचारों का स्वतंत्र (Free) आदान-प्रदान हो सकता है। इसमें गणितीय विचारों की स्पष्ट समालोचना के लिए अवसर मिलते हैं। गणित क्लब ऐसा अनौपचारिक सामाजिक वातावरण उपलब्ध कराता है जैसा कि नियमित कक्षा में सम्भव नहीं हो सकता है। इसमें स्वतन्त्र सामाजिक अन्तर्क्रिया (Interaction) के लिए पर्याप्त अवसर मिलते हैं।

गणित क्लब (Mathematics club) –

1.भूमिका (Introduction) –

सामान्यतः गणित को एक कठिन विषय के रूप में जाना जाता है। यह स्थिति नई नहीं है। प्राथमिक स्तर से ही इस विषय के संबंध में विद्यार्थियों के ऐसे विचार बन जाते हैं। शायद ऐसे ही विचार शिक्षकों और माता-पिता तथा अभिभावकों के भी हों। दूसरी ओर यह भी स्थिति है कि गणित विषय की ओर विद्यार्थी बड़ी संख्या में आकर्षित होते हैं। इस विरोधाभास का प्रमुख कारण यह है कि गणित को कठिन मानते हुए भी विद्यार्थी इस विषय का चयन इसकी व्यावहारिक उपयोगिता (practical utility) के कारण करते हैं। जीवन में गणित के महत्त्व को सभी समझते हैं। फिर भी इसकी उपयोगिता इसको आकर्षक नहीं बना सकी। गणित प्रतीकों का शास्त्र है। इसमें सूक्ष्म (Abstract) तत्त्वों की प्रधानता है। विद्यार्थी स्कूल जगत के ज्ञान को आसानी से आत्मसात (Assimilate) कर लेते हैं। किन्तु उन्हें गणित के सूक्ष्म तत्त्वों को समझने में कठिनाई होती है। दूसरी बात यह है कि गणित में विद्यार्थियों को मनोरंजक सामग्री बहुत कम मिलती है। अतः गणित में विद्यार्थियों की अभिरूचि बढ़ाने के लिए इसमें मनोरंजन को सम्मिलित किया जाना आवश्यक है। इससे इसकी सूक्ष्मता से होने वाली कठिनाई को कम करना सम्भव है। कक्षा अनुदेशन (class-room instruction) में मनोरंजन को पर्याप्त रूप से शामिल करना मुश्किल है। मनोरंजन हेतु उपयुक्त और औपचारिक संगठन गणित क्लब है। विश्वभर के सभी क्षेत्रों में अवकाश के सदुपयोग और मनोरंजन के लिए क्लबों को बनाया जाता है। अतः गणित विषय को अधिक रुचिकर बनाने के लिए माध्यमिक स्तर पर गणित क्लब का गठन किया जाना चाहिए। क्लब स्वयं तो गणित में अभिरुचि की वृद्धि और उसका अनुरक्षण करता है। साथ ही उपर्युक्त क्रियाओं के आयोजन के लिए सार्थक मंच भी है क्योंकि इनका आयोजन आवश्यकता के अनुरूप कक्षा शिक्षण के अन्तर्गत नहीं किया जा सकता।

2.क्लब की गतिविधि-

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मनोरंजन (Recreation) के लिए खेल (Games), क्रीड़ा (plays), पहेलिका (puzzle),प्रश्नोत्तरी (Quiz) ,उपाख्यान (Phecdotes) जैसी क्रियाएं उपलब्ध है किन्तु अनुदेशन में इन क्रियाओं को नियमित रूप से पर्याप्त समय दे पाना सम्भव नहीं है। इनका आयोजन गणित क्लब के द्वारा ही किया जा सकता है। इनके आयोजनों से गणित शिक्षण की नीरसता कम करने में सहायता मिल सकती है।

सभी विद्यार्थी खेलों और क्रीड़ाओं को पसन्द करते हैं। विशेष रूप से उन खेलों को माध्यमिक स्तर तक के विद्यार्थी पसन्द करते हैं जिनमें रहस्य, कौतूहल और आश्चर्य के तत्त्व मौजूद हों। गणितीय पहेलियों, कूट प्रश्नों और प्रतिस्पर्धाओं में ये सब बातें होती हैं। यदि क्लब के द्वारा आयोजित इन क्रियाओं का सन्दर्भ कक्षा-शिक्षण में दिया जाय और इनकी सहायता समस्याओं के समाधान में की जाय तो गणित में विद्यार्थियों की अभिरुचि में आवश्यक वृद्धि की जा सकती है।

3.गणित क्लब की उपादेयता


गणित क्लब के द्वारा गणित के अध्ययन को बल और उद्दीपन प्रदान किए जाते हैं। इसकी सहायता स्वैच्छिक होती है इसलिए इसमें वही विद्यार्थी शामिल होते हैं जो कि वास्तव में गणित में रुचि रखते हैं तथा विषय का वह स्वरूप जानना चाहते हैं जो कि कक्षा कार्य से भिन्न होता है। गणित क्लब में होने वाले आयोजन किसी औपचारिक क्रमिक व्यवस्था का अनुसरण नहीं करते। इनमें उन आयोजनों को अवसर दिए जाते हैं जो कि उसके सदस्यों की चाह के अनुरूप हों। माध्यमिक स्तर के विद्यार्थी परस्पर मिल-जुलकर रहना चाहते हैं। वे मानसिक (Mental), सामाजिक (social), पारिवारिक सम्बन्धों (Family Relationship) की पृष्ठभूमि में एक-दूसरे पर आश्रित रहते हैं वे अपने विचार दूसरों को सुनना चाहते हैं तथा दूसरों के विचार भी सुनना चाहते हैं। वे दूसरों की आलोचना का आनंद लेते हैं तो अपनी आलोचना को भी सुनना चाहते हैं। एक-दूसरे से उनकी मत-भिन्नता अभिरुचि (Intrest) को उद्दीप्त (stimulate) और विचार-विमर्श (Discussion) को अभिप्रेरित करती है। गणित क्लब ऐसा आदर्श मंच प्रदान करता है जिसमें गणितीय विचारों का स्वतंत्र (Free) आदान-प्रदान हो सकता है। इसमें गणितीय विचारों की स्पष्ट समालोचना के लिए अवसर मिलते हैं। गणित क्लब ऐसा अनौपचारिक सामाजिक वातावरण उपलब्ध कराता है जैसा कि नियमित कक्षा में सम्भव नहीं हो सकता है। इसमें स्वतन्त्र सामाजिक अन्तर्क्रिया (Interaction) के लिए पर्याप्त अवसर मिलते हैं।

4.गणित क्लब का गठन (Organization) – 

गणित क्लब के सदस्यों का गठन विद्यार्थियों द्वारा होना चाहिए। शिक्षक की भूमिकाएं पथ-प्रदर्शक (Guide) परामर्शदाता (Advisor) तक ही सीमित हो। उनको क्लब का संचालन सही तरह से करने में विद्यार्थियों की सहायता करनी चाहिए।
विद्यालय प्रधान इसके संरक्षक बने। इसकी सहायता स्वैच्छिक हो किन्तु सदस्य संख्या सीमित रखी जानी चाहिए जिससे कि सभी सदस्यों की अपेक्षाओं (Expectations) को सन्तुष्ट किया जा सके। इसके उद्देश्य स्पष्ट हों। प्रत्येक सदस्य में सक्रिय भागीदारी अनिवार्य हो। प्रायोजक (sponsor) गणित का वरिष्ठ शिक्षक हो जो कि इस प्रकार के संगठनों का संचालन कुशलता से करने में प्रवीण हो। क्लब की बैठकें नियमित रूप से विधान के अनुसार आहूत की जायें। इसकी कार्यकारिणी में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, सह-सचिव, कोषाध्यक्ष जैसे पदाधिकारी हों। इनका चुनाव सदस्यों द्वारा किया जाय। कार्यकारिणी और साधारण सभा की बैठकें अध्यक्ष के ही सदस्यों द्वारा किया जाए। कार्यकारिणी और साधारण सभा की बैठकें अध्यक्ष के ही सभापतित्व में होनी चाहिए। सदस्यों का मानसिक स्तर लगभग समान हो तो उनकी रुचि क्लब के कार्यक्रमों में बनी रहेगी। इसके लिए सर्वप्रथम एक विधान बनाया जाए। इसकी वित्तीय व्यवस्था विद्यालय कोष तथा सदस्यता शुल्क से की जाए। स्वयंसेवी संगठनों, राज्य एवं केंद्र सरकार के सम्बन्धित विभागों और एन. सी. ई. आर. टी. से वित्तीय अनुदान प्राप्त किए जा सकते हैं।

One Response
  1. Kit May 8, 2020 / Reply

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