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Who can teach mathematics?

1.गणित कौन पढ़ा सकता है? ( Who can teach mathematics?)-

Who can teach mathematics?
Who can teach mathematics?

गणित कौन पढ़ा सकता है (Who can teach mathematics?),आज इसके बारे में जानने की कोशिश करेंगे।गणित विषय कठिन विषय है तथा अधिकतर विद्यार्थी गणित से डरते हैं।परंतु गणित पढ़ाने (teach mathematics) वालों का भी अभाव है क्योंकि गणित विषय ऐच्छिक विषय बहुत कम विद्यार्थी लेते हैं इसलिए गणितज्ञों, गणित के अध्यापकों की कमी होती जा रही है। गणित पढ़ाना (teach mathematics) हर किसी के बस की बात नहीं है।गणित पढ़ाने (teach mathematics) के लिए जुनून, प्रतिभा और गणित के प्रति दीवानगी की जरूरत है।आधुनिक युग में गणित का डिफिकल्टी लेवल धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है।कुछ समय पूर्व जो गणित बीएससी प्रथम वर्ष में पढ़ाई जाती थी उसका कुछ अंश कक्षा-12 की पढ़ाई में शामिल कर दिया गया है।इसी प्रकार कक्षा 12 में पढ़ाई जाने वाली गणित कक्षा-11 में पढ़ाई जाने लगी है।इस प्रकार गणित का स्तर बढ़ता जा रहा है।
यदि विद्यालय तथा शिक्षा संस्थान में गणित का एक ही अध्यापक है तथा गणित का अध्यापक छुट्टी पर चले जाए तो गणित अध्यापक की अनुपस्थिति में गणित पढ़ना हर किसी के लिए मुश्किल कार्य हो जाता है।गणित अध्यापक की अनुपस्थिति में उनकी क्लास के लिए अन्य अध्यापक को केवल खानापूर्ति के लिए भेजा जाता है।

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2.गणित पढ़ाने का विरोधाभास (Paradox of to teach mathematics)-

कई शिक्षा संस्थानों तथा विद्यालयों में गणित अध्यापक की नियुक्ति ही नहीं है ऐसी स्थिति में गणित विषय अन्य विषय के अध्यापक पढ़ाते हैं।हालांकि अन्य विषय के अध्यापक के लिए ठीक से गणित पढ़ाना (teach mathematics) तो मुश्किल है परंतु ऐसा विरोधाभास भी देखने को मिलता है। दरअसल गणित शिक्षण (teach mathematics) के प्रति युवाओं द्वारा प्राथमिकता सबसे बाद में दी जाती है। डिग्रीधारी युवा सर्वप्रथम आईएएस,डॉक्टर ,इंजीनियर आरएएस जैसी सेवाओं में जाने के इच्छुक होते हैं।शिक्षण अथवा गणित शिक्षण (teach mathematics) को इन सेवाओं के बाद ही चयन करते हैं अर्थात् उपर्युक्त सेवाओं में चयन न होने पर ही शिक्षण अथवा गणित शिक्षण (to teach mathematics )का चुनाव करते हैं।
इस प्रकार युवाओं में जो क्रीमी लेयर है उनका चयन उच्च प्रतिष्ठित सेवाओं में हो जाता है।शिक्षण में मध्यम तथा निम्नस्तर की प्रतिभाओं का चयन होता है अर्थात् मध्यम तथा निम्न स्तर की प्रतिभाएं शिक्षण अथवा गणित शिक्षण (teach mathematics) के कार्य का चुनाव करती है।
गणित पढ़ाना (teach mathematics) शिक्षा संस्थानों में जरूरी है क्योंकि गणित विषय को विद्यार्थी स्वयं नहीं पढ़ सकता है।इसलिए अन्य विषय के शिक्षकों को गणित पढ़ाने (teach mathematics) के लिए तैयार किया जाता है। परंतु अन्य विषय के शिक्षक गणित विषय के प्रति न्याय नहीं कर सकते हैं। फलस्वरूप गणित में होनहार विद्यार्थी तैयार नहीं हो पाते हैं।विद्यार्थियों की गणितीय प्रतिभा सुप्त ही रह जाती है।इस प्रकार देश में अच्छे गणितज्ञ तैयार नहीं हो पाते हैं।

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3.गणित पढ़ाने के लिए दीवानगी की जरूरत (Need madness to teach mathematics)-

गणित पढ़ाने के लिए अध्यापक में जुनून की जरूरत होती है।जो अध्यापक गणित से प्रेम करता है ,वही अध्यापक गणित को ठीक से पढ़ा सकता है।गणित पढ़ाने (teach mathematics) के लिए आधुनिक युग के अनुसार अपडेट रहना होता है।विद्यार्थियों को आधुनिक युग में प्रतिस्पर्धा योग्य तैयार करने के लिए अध्यापक को कोई भी टॉपिक पढ़ाने के लिए ठीक तरह से पूर्व तैयारी की जरूरत होती है।जो अध्यापक कक्षा में टॉपिक की पूर्व तैयारी किए बिना ही कक्षा में पढ़ाने जाते हैं वे विद्यार्थियों को पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाते हैं।
कक्षा में विभिन्न प्रकार के विद्यार्थी होते हैं अतः गणित पढ़ाते समय कौन सा विद्यार्थी किस प्रकार का प्रश्न पूछ ले इसके लिए पूरी तरह से अध्यापक को पूर्ण तथा पूर्व तैयारी की जरूरत होती है।जो अध्यापक विद्यार्थियों को गणित की समस्याओं का समाधान नहीं बताता है या अगले दिन पर टाल देता है, ऐसा अध्यापक विद्यार्थियों पर अच्छा प्रभाव नहीं डाल सकता है।

4.गणित पढ़ाने के लिए आवश्यक गुण (Essential Qualities for Teaching Mathematics)-

इस प्रकार यदि गणित पढ़ाने ( teach mathematics) के लिए किन गुणों की आवश्यकता है इसको संक्षिप्त रूप में कहा जाए तो यह कहा जा सकता है कि गणित पढ़ाने (teach mathematics) के लिए समर्पण, ईमानदारी, कठिन परिश्रम, विवेक , धैर्य जैसे गुणों की आवश्यकता है हालांकि ये सभी गुण सभी में एक साथ प्रकट नहीं हो सकते हैं लेकिन धीरे-धीरे अभ्यास से इन सब गुणों का विकास हो जाता है।

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