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6 Formulas of Study in Mathematics

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1.गणित में अध्ययन के 6 फाॅर्मूले (6 Formulas of Study in Mathematics),गणित में अध्ययन कैसे करें? (How to do Study in Mathematics?):

  • गणित में अध्ययन के 6 फाॅर्मूले (6 Formulas of Study in Mathematics) ऐसे हैं जिनकी मदद से छात्र-छात्राओं के जीवन की कायापलट हो सकती है।गणित के परम्परागत अध्ययन के तौर-तरीकों और आधुनिक युग के अध्ययन के तौर-तरीकों में बुनियादी फर्क है।सबसे मूलभूत अन्तर तो यही है कि पूर्व में विद्या,ज्ञान और अध्ययन के तौर-तरीकों का हस्तान्तरण पीढ़ी दर पीढ़ी होता था।इसलिए नई पौध तैयार होने तथा ज्ञान के विस्तार में रूकावट आ जाती थी।अध्यापक का लड़का अध्यापक,बढ़ई का लड़का बढ़ई, किसान का लड़का किसान होता था।
  • जबकि भारतीय परंपरा में यह माना जाता था कि ज्ञान और विचार ऐसी सौगात है जिन्हें बांटते रहने से बरकत हासिल होती है अर्थात् ज्ञान में वृद्धि होती है।परंतु यह केवल सैद्धांतिक बात थी।व्यावहारिक रूप में ज्ञान,विद्या और अध्ययन के तौर तरीके एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में अधिकांशतया हस्तांतरण होता था।यानी प्राचीन काल में प्रथम पीढ़ी के विद्वान् तैयार होने में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता था।आज स्थिति बदल गई है।आज आपको चारों ओर प्रथम पीढ़ी के विद्वान,प्रतिभाशाली व्यक्तियों की ही भरमार नजर आएगी।बल्कि यह कहें तो ज्यादा उचित होगा कि शीर्ष स्थिति पर प्रथम पीढ़ी के विद्वान ही मिलेंगे। परंपरागत ज्ञान के आधार पर आगे बढ़ने वाले कहीं नजर नहीं आएंगे।
  • उदाहरण के लिए आज गोयनका,गोदरेज,वाडिया,मोदी,बिड़ला,डालमिया आदि का नाम अब सुनते ही नहीं होंगे।जबकि नब्बे के दशक से पहले इनके अतिरिक्त किसी का नाम ही सुनने को नहीं मिलता था।आज अजीज एच प्रेमजी,एन आर नारायण मूर्ति,धीरूभाई अंबानी (मुकेश अंबानी),शिव नादर, मालविंदर सिंह एवं शिविंदर सिंह,सुभाष चंद्र (जी टीवी),के महिंद्रा,हिंदुजा इत्यादि का नाम सुनने को मिलता है। ये सभी प्रथम पीढ़ी के हैं।
  • दरअसल विद्या,ज्ञान और अध्ययन के परंपरागत तथा स्थापित मापदंड पहले थे,वे आज नहीं है। परंपरागत तौर तरीकों में रटने,याद करने,कंठस्थ करने पर जोर दिया जाता था।पहले विद्या और ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी जिस तरह,जिस ढंग से विरासत में मिल जाता था आज वैसा नहीं है।यह परिवर्तन नब्बे के दशक से प्रारंभ हुआ है।1990 से पूर्व भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भारत में कंप्यूटर को आवश्यक मानकर शुरुआत की थी।हालांकि उस समय बहुत से लोगों ने राजीव गांधी का मखौल उड़ाया था।कई लोगों ने उन्हें कंप्यूटर ब्वाय ही कहना शुरू कर दिया था।लेकिन जिन लोगों ने उनकी बात को गंभीरता से लिया,वे लोग आज शिखर पर हैं।आज शिक्षा में सूचना क्रांति तथा नवीन तकनीकी का जो प्रभाव पड़ा है उसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
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(1.)गणित का अध्ययन प्रोफेशनल तरीके से करें (Study Mathematics Professionally):

  • गणित को प्रोफेशनल यानी व्यावसायिक तरीके से पढ़ें।अर्थात् गणित का अध्ययन लक्ष्य केंद्रित करें। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आने वाली समस्याओं,बाधाओं को हल करते जाएं और आगे बढ़ते जाएं।यदि आनंद के लिए,गणित को गणित के लिए पढ़ते हैं तो यह सबसे अच्छा तरीका है।परंतु आधुनिक युग आर्थिक युग है तथा इसमें अर्थ (धन) तथा भौतिकता की प्रधानता है।इसलिए यदि आप इसे प्रोफेशनल तरीके से पढ़ते हैं और उससे किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं तो यह भी अच्छा ही है।
  • भारत में आध्यात्मिक ज्ञान,योग तथा शास्त्रीय संगीत की ऐसी विद्याएं थी तथा हैं परंतु लोगों का उस तरफ रुझान बहुत कम है।भारत को स्वतंत्र हुए लगभग 75 साल हो जाएंगे परंतु इन क्षेत्रों में न तो लोगों का रुझान बढ़ा है और न ही भविष्य में रुझान बढ़ने का संकेत मिला था।योग और अध्यात्म विद्याएं जिनमें भारत सिरमौर था यहाँ मुरझा गई थी।परंतु स्वामी बाबा रामदेव जी ने ज्योंही योग पर प्रोफेशनल तड़का लगाया तो आज योग पूरे विश्व में फैल गया है।घर-घर में लोग योग करने लगे हैं।यहां तक कि 21 जून को प्रतिवर्ष पूरे विश्व में योग दिवस मनाया जाता है।

(2.)अपने विशिष्ट विषय का ज्ञान प्राप्त करना (Gain Knowledge of your Specific Subject):

  • विद्यार्थी को अपने विशिष्ट विषय का ज्ञान प्राप्त करने पर ध्यान फोकस करना चाहिए।हर विषय की अपनी-अपनी खासियत होती है तथा प्रत्येक विषय में कोई न कोई शिखर पर पहुंचा हुआ होता है। इसलिए हमें वे सभी अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यदि हम सभी विषयों की ओर पैर फैला देंगे तो हमें इनकी मजबूत जानकारी प्राप्त नहीं हो सकेगी। सभी विषयों का विस्तृत और गहरा ज्ञान प्राप्त नहीं किया जा सकता है।इसलिए अपने लक्ष्य को प्राप्त करने से संबंधित विषय तथा व्यावहारिक जीवन को जीने के लिए काम आने वाली बातों से संबंधित अध्ययन करना चाहिए।
  • गणित को पढ़ने के लिए इसकी विषय सामग्री को पढ़कर समझना चाहिए।याद नहीं करना चाहिए।याद करने,स्मरण करने तथा कंठस्थ करने में परिश्रम अधिक करना पड़ता है जबकि समझने में इतना परिश्रम नहीं करना पड़ता है।समझकर संबंधित विषय को मन पर अंकित कर लेना चाहिए।उस टॉपिक से संबंधित अभ्यास करने पर उसकी स्मृति स्थाई हो जाती है।याद करने,कंठस्थ करने के बाद हम कुछ समय बाद उसको भूल जाते हैं।
  • अधिक विषयों के बजाय हमारे लक्ष्य में काम आने वाले विषय का ही अधिक से अधिक अध्ययन करना चाहिए।क्योंकि एक विषय को यदि आधार मानकर उसका ज्ञान प्राप्त करना चाहें तो संपूर्ण जीवन में भी उसका पूर्ण ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकते हैं।जैसे गति विज्ञान (Dynamics) का ज्ञान प्राप्त करना चाहें तो पूरा जीवन भी कम पड़ जाएगा।अतः सभी विषयों में पैर पसारने से विस्तृत और गहराई से ज्ञान प्राप्त करना मुश्किल है।जैसे महानायक अभिताभ बच्चन फिल्मों में काम करते हुए इलाहाबाद से सांसद (राजनीति) चुने गए थे परंतु उन्होंने समझ लिया कि फिल्मों के साथ-साथ राजनीति क्षेत्र के साथ न्याय नहीं सकते हैं।तब उन्होंने राजनीति पर विराम लगा दिया।इसी प्रकार अभिनेता गोविंदा ने भी राजनीति में आने का प्रयास किया था परंतु उल्टा उनका फिल्मी कैरियर चौपट हो गया।अतः यदि एक क्षेत्र को छोड़कर दूसरे क्षेत्र में जाना चाहते हैं तब तो कोई बात नहीं परंतु दो अलग-अलग क्षेत्रों में कामयाब होना मुश्किल है।हाँ यदि दोनों क्षेत्र एक ही विषय से संबंधित है तब तो फिर भी कामयाब हुआ जा सकता है।जैसे स्वामी रामदेव जी योग क्लास ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों तरह से चलाते हैं।

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(3.)उचित अवसर की पहचान तथा उसके बाद पूर्ण तैयारी (Identification of the Right Opportunity and Followed by Full Preparation after that):

  • आधुनिक युग में घटनाक्रम इतनी तेजी से बदल जाता है कि यदि हम सचेत न रहें तो पता भी नहीं चलता है कि क्या कुछ हो गया है।अपने अध्ययन विषय से चिपके रहने का अर्थ यह नहीं है कि उसकी डिमांड मार्केट में हमेशा उसी स्थिति में रहने वाली है।
  • जैसे अभी दो वर्ष पूर्व से कोरोना महामारी का प्रकोप पूरी दुनिया को झेलना पड़ रहा है।कोरोना काल में बहुत से कारोबार तो बंद हो गए और कुछ कारोबार बंद होने के कगार पर है।कुछ अपना वजूद जीवित रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।इस समय में ऑनलाइन मार्केटिंग,ऑनलाइन परचेसिंग,ऑनलाइन बिजनेस,ऑनलाइन एजुकेशन इत्यादि कार्यों की अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।बहुत से लोगों ने कोरोना महामारी शुरू होते इस स्थिति को भांप लिया था यानी अवसर को पहचान लिया था इसलिए ऐसे लोगों ने गंभीरता पूर्वक ऑनलाइन गणित तथा एजुकेशन उपलब्ध कराना चालू कर दिया।इस राह को अपनाकर बहुत से लोग आगे बढ़े तथा बढ़ते हुए आज उन्होंने अनुभव कर लिया कि ऑनलाइन एजुकेशन का रास्ता अपनाकर उन्होंने बहुत अच्छा किया।कोरोनावायरस की पहली लहर के बाद,दूसरी आई और अब कोरोनावायरस का नया वैरिएंट आ गया।इस प्रकार यह महामारी थमने का नाम नहीं ले रही है।जिन्होंने इस अवसर को पहचान लिया तथा पहचानने के बाद पूरी तैयारी के साथ ऑनलाइन गणित पढ़ाने के लिए संघर्ष किया तो वे लोग स्थापित हो गए।गणित का अध्ययन करने का अर्थ यह नहीं है कि आप मार्केट की डिमांड न समझे।आपको हमेशा अपडेट रहना है गणित की डिमांड पहले भी खत्म नहीं हुई और आज भी खत्म नहीं हुई है।
    जो गणित विषय लेकर पढ़ाई कर रहे थे तथा शिक्षा संस्थान बंद हो गए थे,ऐसी स्थिति में कुछ युवा हाथ पर हाथ धरकर बैठ गए।उन्होंने इसके समाधान के लिए कोई प्रयास नहीं किया।लेकिन जिनको गणित का अध्ययन करना था उन्होंने ऑनलाइन क्लासेज जॉइन (Join) की।इस प्रकार ऑनलाइन माध्यम से उन्होंने अध्ययन में विराम नहीं आने दिया।महत्त्वपूर्ण पहलू यह है कि तमाम समस्याओं और कठिनाइयों के बावजूद अब गणित का अध्ययन पूरा करने का सपना साकार किया जा सकता है। जिन लोगों ने ऑनलाइन गणित का अध्ययन किया और जिस ढंग से किया उसका अनुसरण करके हर छात्र-छात्रा अध्ययन कर सकता है।यह अपने आप में एक मिसाल है।आवश्यकता है तो अध्ययन में संलग्न होने की तथा अध्ययन के लिए अपने आप को पूरी तरह झोंक देने की।

(4.)सोच को बदल बदलने की जरूरत है (Thinking Needs to Change):

  • किसी समय भारत गणित और ज्योतिष ज्ञान में सिरमौर था।परंतु गुलामी की इतनी सदियाँ बीतने के बाद हमारे अंदर यह सोच विकसित हो गई कि हम गणित में फिसड्डी हैं।हम गणित को पढ़ने में सक्षम नहीं है।अब यह तो पता नहीं कि यह सोच विकसित कैसे हो गई?वरना 11वीं शताब्दी में भारत गुलाम ही था।उस समय में गणित में भास्कराचार्य द्वितीय ने लीलावती पुस्तक लिखी थी।उस पुस्तक तथा गणित के कार्य को देखकर आश्चर्य होता है।वास्तव में वे गणित के महान योद्धा थे।इसलिए कहा जा सकता है कि हमारे अंदर वह सब कुछ है जो गणित के अध्ययन के लिए आवश्यक है।
  • यही कारण है कि भारत में गणितज्ञों की नई पौध तैयार हो रही है उनमें बहुत से मध्यम वर्ग के भी है। उनकी जीवनशैली आम व्यक्तियों की तरह मिलेगी। उनके काम करने का तरीका मिलता-जुलता मिलेगा।आज अगर कोई धनाढ्य परिवार में भी गणितज्ञ है तो वह भी एक सामान्य जीवन गुजारना पसंद करता है।ऐसा इसलिए क्योंकि आम जीवन शैली से रात में अच्छी नींद आती है।अतः ऐशोआराम की जिंदगी से सामान्य जीवन शैली अपनाना बेहतर है।
  • सबसे जरूरी काम है अपनी प्रतिभा को पहचानना,अपनी प्रतिभा को विकसित करना।भारत को जो स्वतंत्रता मिली है उसका पूरा-पूरा उपयोग करना।अपने अध्ययन,अपने काम तथा अपनी तरफ से हर संभव कोशिश करना जिससे भारत का गौरव बढ़ सके,अपना खुद का भला हो सके।हालांकि शिक्षा का व्यवसायीकरण करने से प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और वह भी गला काट प्रतिस्पर्धा।परंतु यदि स्वस्थ,गुणात्मक प्रतिस्पर्धा हो तो इसमें कोई बुराई नहीं है।अतःअपनी सोच को इस तरह बदलें की हमारे अंदर वह सब है जो गणित विषय को पढ़ने के लिए जरूरत है।

(5.)सुखी होने का नुस्खा (Recipe for Happiness):

  • यदि छात्र-छात्रा,व्यक्ति,वृद्ध,प्रौढ़,युवा जीवन में सुखी होना चाहते हैं तो अध्ययन की योग्यता के बिना,विद्या के बिना,ज्ञान के बिना सुखी नहीं हो सकता है।विद्या ग्रहण करने में शुरू में कष्ट मालूम होता है परंतु बाद में सुख मिलता है।शुरू में कष्ट इसलिए महसूस होता है क्योंकि विद्या ग्रहण करने से छात्र-छात्रा के अंदर काम,क्रोध,लोभ,मोह,मद,मत्सर इत्यादि विकार होते हैं वे दूर होते हैं।चूँकि ये दुर्गुण हमारा स्वभाव बन चुके होते हैं,हमारी आदत में आ चुके होते हैं इसलिए इनको दूर होते समय दुख,कष्ट महसूस होता है।जैसे रोगी को दवा कड़वी लगती है परंतु वह उसके लिए हितकारी,लाभकारी होती है।
  • विद्यार्थी काल में अर्थात् जीवन के प्रारंभिक काल में विद्या ग्रहण करना,अध्ययन करना आसान होता है। क्योंकि प्रारंभिक काल में दुर्गुण मजबूत नहीं होते हैं बल्कि सुप्त अवस्था में होते हैं और आसानी से दूर हो जाते हैं।
  • किसी भी व्यक्ति की तरक्की,उन्नति और विकास के लिए अध्ययन करने की योग्यता अर्जित करनी ही होगी।
  • अध्ययन,मनन,चिंतन के अलावा ओर कोई रास्ता नहीं जिससे छात्र-छात्राएं अपने जीवन को सुखी,सफल,उन्नत कर सकें।इसलिए छात्र-छात्राओं को पूर्ण एकाग्रता,दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ अध्ययन करना चाहिए।

(6.)अध्ययन में बाधक तत्त्व (Obstacle Element in Study):

  • अध्ययन करने में अरूचि,मन का एकाग्र न होना, गणित विषय समझने में कठिनाई,पढ़ा हुआ याद न रहना बाधक तत्त्व हैं।इनमें सबसे मूल कारण है श्रद्धा (रूचि) का न होना,सद्बुद्धि धारण न करना।
  • गीता में कहा है कि:
    श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्पर: संयतेन्द्रियः।
    ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति।।
    अर्थात् इन्द्रियों को वश में रखने वाला,समर्पित भाववाला तथा श्रद्धा (आस्था) रखने वाला ज्ञान प्राप्त करता है।ज्ञान प्राप्त होते ही सब समस्याओं का समाधान हो जाता है।क्योंकि जीवन में सभी समस्याएं,कठिनाइयां अज्ञान के कारण ही तो होती हैं।इसी में
  • आगे का कहा है कि:
    अज्ञश्चाश्रद्दधानश्च संशयात्मा विनश्यति।
    नायं लोकोअस्ति न परो न सुखं संशयात्मन:।।
  • अर्थात् विवेकहीन (जो भले-बुरे को न पहचानता हो),श्रद्धा रहित,प्रत्येक बात में संशय रखने वाला विनाश को प्राप्त होता है।इसलिए श्रद्धापूर्वक (रुचि पूर्वक) व आत्मविश्वास तथा अध्ययन के प्रति समर्पित होकर अध्ययन करेंगे तो अध्ययन कार्य में पूर्णता,दक्षता प्राप्त कर सकेंगे जिससे जीवन में हमारा हर कार्य सफल होगा।समर्पित होकर अर्थात् छात्र-छात्राओं को अपना फोकस अध्ययन पर ही रखना,अध्ययन ही करना।इसके अतिरिक्त ज्ञान में नवीनता (नए ज्ञान का सृजन),प्रगतिशीलता व परिवर्तनशीलता न हो तो यह भी ज्ञान में बाधक हो जाता है।
  • उपर्युक्त विवरण में गणित में अध्ययन के 6 फाॅर्मूले (6 Formulas of Study in Mathematics),गणित में अध्ययन कैसे करें? (How to do Study in Mathematics?) के बारे में बताया गया है।

2.गणित में अध्ययन के 6 फाॅर्मूले (6 Formulas of Study in Mathematics),गणित में अध्ययन कैसे करें? (How to do Study in Mathematics?) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.मैं मैथ्स में कैसे प्रतिभाशाली हो सकता हूं? (How can I be brilliant in maths?):

उत्तर:गणित की सफलता के लिए 8 टिप्स
होमवर्क पूर्ण करें।कभी होमवर्क को पसंद के तौर पर न सोचें।
क्लास मिस करने के लिए नहीं लड़ें।
अपने अध्ययन साथी बनाने के लिए एक दोस्त का पता लगाएं ।
शिक्षक के साथ अच्छे संबंध स्थापित करें।
हर गलती का विश्लेषण करें और समझें।
तेजी से मदद प्राप्त करें।
अपने सवालों को मन में न रखें।
बुनियादी कौशल आवश्यक हैं।

प्रश्न:2.मैं कैसे याद कर सकता हूं जो मैं पढ़ता हूं? (How can I remember what I study?):

उत्तर:छात्रों के लिए इन याद सुझावों की कोशिश करें जो आपको अपने दिमाग का प्रयोग करने और याद में सुधार करने में मदद करेंगे।
अपने स्थान को व्यवस्थित करें।
जानकारी की कल्पना करें।
संक्षिप्त शब्दों और स्नेमोनिक्स का उपयोग करें।
छवि-नाम संघों का उपयोग करें।
चेनिंग तकनीक का इस्तेमाल करें।
करके सीखें।
अलग-अलग स्थानों पर अध्ययन करें।
सामग्री पर फिर से गौर करें।

प्रश्न:3.आप गणित में कैसे नहीं भूलते? (How do you not forget in math?),मैं गणित कैसे नहीं भूल सकता? (How do I not forget maths?):

उत्तर:गणित का अधिक से अधिक अध्ययन करें,यह आपको वही उपयोग करेगा जो आप पहले से जानते हैं और जब आप अधिक उन्नत गणित सीखते हैं जिसे आप संघर्ष करते थे बल्कि स्पष्ट हो जाते हैं।कुछ गंभीर समस्या को हल करें,एक बार जब आप किसी कठिन समस्या को हल करने के लिए कुछ उपयोग करते हैं तो आप इसे नहीं भूलेंगे।

प्रश्न:4.क्या गणितज्ञ सूत्रों को याद करते हैं? (Do mathematicians memorize formulas?):

उत्तर:एक चीजें है जो वे दिलचस्प लगता है और जो वे आंतरिक याद जाता है।मैथ में जिन सूत्रों और तथ्यों का इस्तेमाल किया जा रहा है,उन्हें याद करने की थकाऊता (tediousness of memorizing) से गुजरे बिना याद किया जाने लगता है।दूसरी ओर, कम रुचि वाली चीजों का अध्ययन करते समय, कई चीजों को अस्थायी रूप से स्मृति में डाल दिया जाता है।

प्रश्न:5.क्या गणितज्ञ भूल जाते हैं? (Do mathematicians forget?):

उत्तर:हां,ज्यादातर गणितज्ञ गणित के कुछ हिस्सों को भूल जाते हैं ।लेकिन वे अमूर्तता (abstraction) का उपयोग करके स्मार्ट तरीके से ऐसा कर सकते हैं और इसके फायदे भी हो सकते हैं,गणितज्ञों द्वारा उन्हें भुलक्कड़ फक्टर (forgetful functors) कहते हैं।

प्रश्न:6.गणित इतना कठिन क्यों है? (Why is math so hard?),मैं गणित में मास्टर कैसे बन सकता हूं? (How do I become a master in math?):

उत्तर:मास्टर गणित के लिए शीर्ष 6 ट्रिक्स जो आपको तथाकथित सबसे कठिन विषय की बेहतर समझ बनाने में मदद करेंगे:
अपनी मूल बातें और अवधारणाओं में महारत हासिल करें।
सेल्फ स्टडी ही अहम है।
कठिन अभ्यास करें।
पहाड़ो में अच्छा हो।
तेजी से और आसान गणना करने के लिए ट्रिक्स से परिचित रहें।
वास्तविक जीवन की समस्याओं के लिए गणित लागू करें।

6 Formulas of Study in Mathematics

गणित में अध्ययन के 6 फाॅर्मूले
(6 Formulas of Study in Mathematics)

6 Formulas of Study in Mathematics

गणित में अध्ययन के 6 फाॅर्मूले (6 Formulas of Study in Mathematics) ऐसे हैं जिनकी मदद
से छात्र-छात्राओं के जीवन की कायापलट हो सकती है।गणित के परम्परागत अध्ययन के तौर-तरीकों और आधुनिक युग के अध्ययन के तौर-तरीकों

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित में अध्ययन के 6 फाॅर्मूले (6 Formulas of Study in Mathematics),गणित में अध्ययन कैसे करें? (How to do Study in Mathematics?) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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