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How to make India a leading country in mathematics?

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1 How to make India a leading country in mathematics?

How to make India a leading country in mathematics?

1.भारत को गणित में अग्रणी देश कैसे बनाएं(How to make India a leading country in mathematics)-

S.S. Pillai,How to make India a leading country in mathematics?
S.S. Pillai,How to make India a leading country in mathematics?
भारत को गणित में अग्रणी बनाने के लिए हमें प्राथमिक कक्षाओं के बालकों पर ध्यान देना होगा ।जैसे एक माली छोटे से पौधे को लगाता है तो उसको खाद,पानी तो देता ही है परंतु आंधी तूफान से भी सुरक्षा करता है। पशुओं से सुरक्षा करने के लिए बाढ़ लगाता है। इसी प्रकार भारत की प्राथमिक कक्षाओं के बालकों की गणितीय प्रतिभा को पहचान कर उनकी प्रतिभा को विकसित करना होगा ।हमारे देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। लेकिन केवल रामानुजम की प्रतिभा का ढोल नगाड़ा बजाने से हमारा देश गणित में अग्रणी नहीं हो जाएगा ।इतिहास में भारत में महान गणितज्ञ हुए हैं उनकी जीवनी और चरित्र को बताने से बालकों को प्रेरणा मिलती है ।परंतु उनकी प्रतिभा को निखारने के लिए और उपाय करने होंगे ।

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2.प्राथमिक कक्षाओं में बालकों की प्रतिभा को पहचानने(Recognizing the talent of children in primary classes)-

प्राथमिक कक्षाओं में बालकों की प्रतिभा को पहचानकर उसे तराशने का कार्य करें। बालक गणित में कोई रुचि व  जिज्ञासा प्रकट करें तो उसे प्रोत्साहित करें और उनकी जिज्ञासा को बढ़ाएं ।वे जो प्रश्न पूछते हैं उनका उचित समाधान करके बालकों की रूचि बढ़ाई जा सकती है और जिज्ञासा जागृत की जा सकती है ।

3.प्राथमिक कक्षाओं में संख्या सिद्धान्त पढ़ाएं(Teach number theory in primary classes)-

प्राथमिक कक्षाओं में बालकों को गिनती,पहाड़े,गुणा,भाग, जोड़,बाकी सीखाएं उनको ठीक तरह से गणित की इन क्रियाओं में पारंगत करें। अक्सर शिक्षक परम्परागत तरीके से बालकों को पढ़ाते हैं और किसी को गिनती, पहाड़े, जोड़,बाकी,गुणा,भाग नहीं आ रहे हैं तो उन पर ध्यान नहीं देते हैं।जब हम यह मान लेते हैं कि बच्चा गणित में नहीं पढ़ सकता है तो बच्चा मायूस हो जाता है और बच्चे की रुचि व जिज्ञासा समाप्त होने लगती है।इसलिए प्राथमिक कक्षाओं में संख्या सिद्धांत पढ़ाना चाहिए ।प्राथमिक कक्षाओं के लिए संख्या सिद्धांत सरल तो है ही दैनिक जीवन में भी जोड़,गुणा,भाग,बाकी इत्यादि का प्रयोग करते हैं।
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4.बच्चों के सामने चुनौती प्रस्तुत करें(Submit challenge in front of children)-

बच्चों को कोई कठिनाई आए तो हम तत्काल उसे उसका हल बता देते हैं जबकि हमें कुछ क्षण बच्चों को सोचने के लिए प्रेरित करना चाहिए।उन्हेंं हम इस तरह से प्रेरित कर सकते हैं” इसे आप हल कर सकते हैं ”  “यह सवाल ज्यादा कठिन नहीं है “। इस तरह प्रेरणा सूचक शब्दों से बालकों में उत्साह का संचार होता है।

5.बालक किसी समस्या का समाधान करें तो प्रशंसा करें(If the child resolves a problem, then praise)-

बालक गणित के सवाल हल कर देता हो तो सबके सामने उसकी प्रशंसा करनी चाहिए। अन्य बालकों को भी प्रेरित करना चाहिए कि इस बालक की तरह आप भी इसे हल कर सकते हैं ,बस थोड़ा प्रयास करने व ध्यान देने की जरूरत है।शिक्षक की विद्यार्थियों पर पैनी नजर रहनी चाहिए। उसकी लापरवाही से बच्चे गणित में पिछड़ सकते हैं और शिक्षक सजग ,सतर्क व चौकस हों तो बच्चे बहुत आगे बढ़ सकते हैं।

6.बालक को मनोरंजन के तरीके से पढ़ाएं(Teach the child in a fun way)-

बालकों को पहेली,गानों के माध्यम से सिखाएं तो ओर बढ़िया है। पहेली से बालकों की मानसिक क्षमता बढ़ती है तथा गानों के जरिए पढ़ाने से बालकों को आनंद का अनुभव होता है ।बालक बोर नहीं होते हैं। गणित में जिज्ञासा जागृत होती है ।वे भी गणित में आगे बढ़ने की सोचते हैं ।मनोरंजन व संगीत में गणित में बालकों की स्वाभाविक वृत्ति होती है ।इसलिए मनोरंजन व गानों की सहायता से जल्दी सीखते हैं और लंबे समय तक गणित की पहेलियों व गानों द्वारा सीखी हुई बातें याद रहती है।

7.बालकों को खेल के माध्यम से सिखाएं(Teach children through sports)-

छोटे बालकों को खिलौनों व खेल के माध्यम से सिखाएं। प्राथमिक कक्षा के बालकों की खिलौनों से खेलने की स्वाभाविक वृत्ति होती है ।इसलिए खिलौनों के माध्यम से उनकी प्रतिभा को निखारें तथा तराशें। याद रखें गणित की प्रतिभा तथा शिक्षा में पारंगत करना साधना का कार्य है। इसलिए इस कार्य को जितनी गंभीरता तथा उत्सुकता से करेंगे बालक उतना ही आगे बढ़ेंगे।
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8.बालकों कोँ  कहानियों के जरिए सिखाएं(Teach through stories to children)-

बालकों को गणित को कहानियों के जरिए सिखाएं। छोटे-छोटे बालक कहानी,कथाओं में रुचि लेते हैं।इसलिए गणित की समस्याओं तथा जोड़,बाकी,गुणा,भाग को बालकों के सामने कहानियों के रूप में प्रस्तुत करें ।कहानियों को बालक रुचि पूर्वक सुनते हैं तथा जो बालक गंभीरता से ध्यान लगाकर किसी बात को सुनता है उसे जल्दी तो सीखता है ही साथ ही ऐसा सीखा हुआ स्थायी भी होता है ।

9.बालकों को गणितज्ञों की जीवनियां सुनाएं(Narrate biographies of mathematicians to children)-

भारत के महान गणितज्ञों को सरलतम रूप से प्रस्तुत करके सुनाएं।उनके वे पहलू अवश्य सुनाएं जिनके कारण उनका नाम दुनिया में रोशन हुआ व जिन कठिनाइयों और समस्याओं को उन्होंने हल किया।ऐसी विशिष्ट गणित की खोज को सुनाकर उन्हें प्रेरित करें ।महान गणितज्ञों की जीवनी से प्रेरणा मिलती है।

10.बालकों को जिड़कें नहीं बल्कि प्रेम करें(Do not seduce children but love)-

बालकों को बात-बात पर डांट-डपट से काम न लेकर प्रेम पूर्वक समझाएं । शैतानी भी करते हैं तो उन्हें प्रेम पूर्वक समझाएं ।शैतानी करने से होने वाली हानियों के बारे में बताएं ‌।कुछ बच्चे प्रेम पूर्वक नहीं मानते हैं ,शैतानी करते हैं, ऐसा वे अपने चंचल स्वभाव के कारण करते हैं। उनकी चंचलता को गणित की समस्याओं को हल करने की तरफ़ मोड़ें। फिर भी बहुत ज्यादा शैतानी करने वाला कोई-कोई बच्चा ही होता हैं ।ऐसे बच्चों को सबके सामने न डांटकर, अकेले में डांटे।सबके सामने डांटने से वे अपमानित महसूस करते हैं।

11.भारत गणित के क्षेत्र में दुनिया का अग्रणी देश(India’s leading country in the field of mathematics)

Publish Date:Sun, 15 Dec 2019

How to make India a leading country in mathematics?
How to make India a leading country in mathematics?

गणित के प्रति बच्चों में रुचि पैदा करने के लिए उन्हें पांचवी-छठी कक्षा से ही संख्या सिद्धांत पढ़ाने की जरूरत है।
भागलपुर। गणित के प्रति बच्चों में रुचि पैदा करने के लिए उन्हें पांचवी-छठी कक्षा से ही संख्या सिद्धांत पढ़ाने की जरूरत है।
आइआइटी दिल्ली के गणित विभाग के पूर्व प्राध्यापक बी चौधरी ने ये बातें शनिवार को तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के गणित विभाग में ‘शुद्ध और व्यावहारिक गणित में हाल के रूझानों’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि स्कूल स्तर पर देश के महान गणितज्ञ रामानुजम का जन्म दिवस 22 दिसंबर को मनाया जाए। इस दिन बच्चों को गणित की शिक्षा के लिए जागरूक करें। बच्चों को रामानुजम के बारे में भी बताएं। वे एकमात्र शख्स थे, जिन्होंने पूरी दुनिया में यह दिखा दिया कि भारत गणित के क्षेत्र में सबसे अग्रणी देश है। अमेरिका में रामानुजम दिवस मनाया जाता है। यदि बच्चे गणित में अच्छा करते हैं तो वह हर क्षेत्र में अच्छा कर सकते हैं। उन्होंने बिहार की शिक्षा-व्यवस्था में सुधार पर बल दिया। सभी विज्ञानों की रानी है गणित।
प्रतिकुलपति प्रो.रामयतन प्रसाद ने कहा कि महान गणितज्ञ गाउस ने कहा था कि गणित सभी विज्ञानों की रानी है। गणित, विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एक महत्वपूर्ण उपकरण (टूल) है। भौतिकी, रसायन विज्ञान, खगौल विज्ञान आदि गणित के बिना नहीं समझे जा सकते। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो वास्तव में गणित की अनेक शाखाओं का विकास ही इसलिए किया गया कि प्राकृतिक विज्ञान में इसकी आवश्यकता आ पड़ी थी। दैनिक जीवन में हम करते हैं गणित का इस्तेमाल
विभागाध्यक्ष प्रो. बिजेंद्र कुमार ने कहा की हम अपने दैनिक जीवन में गणित का इस्तेमाल करते हैं। उस वक्त जब समय जानने के लिए हम घड़ी देखते हैं, सामान खरीदने के बाद हिसाब जोड़ते हैं। या फिर फुटबॉल, टेनिस या क्रिकेट खेलते समय स्कोर का लेखा-जोखा रखते हैं। हर जगह गणित की जरूरत है। इससे पहले सेमिनार का उद्घाटन प्रो. बी चौधरी, प्रतिकुलपति प्रो. रामयतन प्रसाद, विधान पार्षद डॉ.एनके यादव, बिहार मैथमेटिक्स सोसाइटी के सदस्य प्रो. विजय कुमार, रायगढ़ विवि के प्रो.केसी तिवारी और डॉ कमला पारी ने संयुक्त रूप से किया। विभाग की छात्र- छात्राओं के द्वारा स्वागत गान व कुलगीत की प्रस्तुति दी गई। विभागाध्यक्ष ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। मंच संचालन डॉ बज्रभूषण तिवारी ने किया।
इस मौके पर मारवाड़ी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गुरुदेव पोद्दार, मुरारका कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमरकात मंडल, डॉ दयानंद राय, डॉ अर्जुन प्रसाद सहित अन्य उपस्थित थे।

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