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The Top 5 Career Myths

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1.शीर्ष 5 कैरियर मिथक (The Top 5 Career Myths),नौकरी के शिकार के बारे में 5 मिथक और गलत धारणाएँ (5 Myths and Misconceptions about Job Hunting):

  • शीर्ष 5 कैरियर मिथक (The Top 5 Career Myths) जानकर आप करियर प्राप्त करने के लिए नए उत्साह के साथ प्रयास करेंगे।किसी विषय अथवा जॉब की पॉपुलरेटी व उपयोगिता के साथ-साथ उसके मिथक भी जुड़ जाते हैं।मिथक का अर्थ होता है कल्पित कथा,पुराण कथा।किसी भी विषय या जॉब में आगे बढ़ने की शर्त है कि उसकी समीक्षा तार्किक व तथ्यों के आधार पर की जाए और जो कमियां हैं उन्हें दूर किया जाए। इसलिए मनगढ़न्त कल्पित घटनाओं की सहायता उसमें नहीं ली जाती है।लेकिन कई बार किसी विषय या जॉब को निम्न स्तर,घटिया या असंगत बताने के लिए रोचक तरीके से कल्पित घटनाओं का सहारा लिया जाता है।जॉब से संबंधित भी कई मिथक जुड़े हुए हैं जिनके कारण युवा कैंडिडेट्स हतोत्साहित होते है तथा मन ही मन वह जॉब प्राप्त करने के लिए अपने आपको अक्षम समझते हैं।
  • यह आवश्यक नहीं है कि पढ़ा लिखा व्यक्ति अर्थात् डिग्री प्राप्त करनेवाला (Qualified) ही जॉब प्राप्त कर सकता है।कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें पढ़ाई-लिखाई के बजाए हुनर की आवश्यकता होती है जैसे फिटनेस ट्रेनर,योग शिक्षक,क्रिकेट,हॉकी,फिल्मी कलाकार,थिएटर कलाकार,फिजिकल शिक्षक इत्यादि में खेलना,हाथ के हुनर,कलात्मकता की अधिक आवश्यकता होती है।
  • हालांकि आजकल हर क्षेत्र में औपचारिक योग्यता अर्थात् डिग्री की आवश्यकता होती है।इसलिए प्रतियोगिता परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है।इन प्रतियोगिता परीक्षाओं के कारण हर क्षेत्र प्रोफेशनल बनता जा रहा है।बाजार में उसी की डिमांड व पूर्ति होती है जो दौड़ में सबसे आगे है।इसके लिए अच्छी शिक्षा की जरूरत और उच्च गुणवत्ता से इनकार नहीं किया जा सकता है।लेकिन ऊपर जिन क्षेत्रों का उल्लेख किया है तथा इस जैसे ओर भी ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें बहुत अधिक पढ़ा-लिखा होना आवश्यक नहीं है बल्कि इनमें हुनर को वरीयता दी जाती है।
  • अब करियर से सम्बन्धित मिथकों का उल्लेख कर रहे हैं जिससे आपको जॉब प्राप्त करने में प्रेरणा और ऊर्जा महसूस होगी।हालांकि करियर से जुड़े अनेक मिथक हैं परन्तु मुख्य-मुख्य मिथक तथा कुछ मिथक का ही उल्लेख कर रहे हैं।
  • आपको यह जानकारी रोचक व ज्ञानवर्धक लगे तो अपने मित्रों के साथ इस गणित के आर्टिकल को शेयर करें।यदि आप इस वेबसाइट पर पहली बार आए हैं तो वेबसाइट को फॉलो करें और ईमेल सब्सक्रिप्शन को भी फॉलो करें।जिससे नए आर्टिकल का नोटिफिकेशन आपको मिल सके । यदि आर्टिकल पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें जिससे वे भी लाभ उठाए । आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट करके बताएं।इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

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2.मिथक 1 (Myth 1):जॉब किसी को भी मिल सकता है (Job Can be Found Anyone):

  • यह सही है कि उदारीकरण अर्थात् 1990 के बाद जॉब की वैरायटी और स्वरूप में बहुत बदलाव आ गया है।आज जॉब मार्केट में अलग-अलग तरह के सैकड़ों तरह के जॉब है।एक क्षेत्र में अलग-अलग पदों के लिए जॉब के अलग-अलग नाम व कार्य मिल जाएंगे।जैसे खेल का क्षेत्र ही लें तो इसमें ढ़ेरों अलग-अलग जॉब्स हैं यथा फिजिकल टीचर,फिटनेस टीचर,खेल कोच,फिजिकल ट्रेनर,फिजिकल इंस्ट्रक्टर,फिजीकल थैरेपिस्ट इत्यादि।इनकी प्रोफेशनल डिमाण्ड बढ़ती जा रही है।मुख्यतः इनकी डिमाण्ड जिम,बड़े होटल,स्वास्थ्य क्लब,फिटनेस केन्द्र,स्पा,टूरिस्ट रिसोर्ट इत्यादि में बढ़ रही है।
  • मार्केट में डिमांड बढ़ने का अर्थ यह कतई नहीं है कि जॉब कोई भी प्राप्त कर सकता है।बल्कि जिन कैंडिडेट्स में योग्यता व स्किल है उन्हें भी बिना प्रयास किए जॉब नहीं मिल सकता है।यदि आपमें सकारात्मक सोच,योग्यता,स्किल तथा बुद्धिचातुर्य है तो भी आपको जॉब सर्च करने की टेक्निक पता होनी चाहिए।आप जब तक अपने बारे में बताएंगे नहीं तब तक घर बैठे किसी को कैसे पता चलेगा कि आपमें कैसा व कितना हुनर है।
  • इसलिए इस मिथक व भ्रम में न रहे कि जॉब मार्केट में ढेरों जॉब्स है तो आज किसी को भी जॉब मिल जाएगा।

3.मिथक 2 (Myth 2):नियोक्ता प्रतिभाशाली कैंडिडेट्स का चयन करते हैं (Employers Select Talented Candidates):

  • आधुनिक युग में प्रतियोगिता का माहौल होने के कारण हर क्षेत्र में प्रोफेशनल वृत्ति का प्रवेश हो गया है।परंतु केवल प्रतिभाशाली व अनुभवी कैंडिडेट्स का ही चयन किया जाएगा तब तो फ्रैशर्स को कोई भी रखने के लिए तैयार नहीं होगा तो विकास व उन्नति के सारे रास्ते बंद हो जाएंगे।
  • यह ठीक बात है कि नियोक्ता प्रतिभाशाली व अनुभवी कैंडिडेट्स का चयन करते हैं।लेकिन योग्यता का अर्थ केवल प्रोफेशनल डिग्री या शैक्षणिक डिग्री ही नहीं होता है।बल्कि योग्यता में
  • सदाचार,विनम्रता,ईमानदारी,आत्मविश्वास,सरलता,मिलनसारिता,हंसमुख स्वभाव,सहयोग,समन्वय जैसे सद्गुण भी शामिल होते हैं।और इन सद्गुणों की न तो कोई डिग्री ली जाती है और न ही किसी प्रोफेशनल संस्थान में इनका प्रशिक्षण दिया जाता है।ये सद्गुण माता-पिता,परिवार,मित्रों,संबंधियों,समाज तथा अन्य श्रेष्ठ पुरुषों की सत्संग से ही पनपते हैं और निखरते हैं।इन सद्गुणों की नींव बचपन में ही लग जाती है जो कैंडिडेट के जॉब प्राप्त करते समय परिपक्व हो जाते हैं।
    इसलिए नियोक्ता आपकी डिग्री व शैक्षणिक योग्यता से संतुष्ट न भी हो तो भी हताश व निराश होने की आवश्यकता नहीं है।बल्कि आपको उपर्युक्त गुणों तथा सकारात्मक पक्षों को इंटरव्यू अथवा काउंसलिंग में मौका मिलते ही प्रकट करना चाहिए।
  • इसके अलावा काॅलेज कैम्पस में प्लेसमेंट तथा जाॅब फेयर में फ्रैशर्स व अनुभवहीन कैंडिडेट्स का चयन करने के लिए भी कम्पनियों के प्रतिनिधि आते हैं।आखिर फ्रैशर्स को जाॅब नहीं दिया जाएगा तो अनुभवी कैसे व कहाँ से तैयार होंगे?वैसे भी हर जगह अनुभवी तथा प्रतिभाशाली कैंडिडेट्स (डिग्रीधारी) को ही नियुक्त नहीं किया जाता है।

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4.मिथक 3 (Myth 3): अनुभवहीन तथा फ्रैशर्स कैंडिडेट्स को जॉब नहीं मिलता है (Inexperienced and Fresher’s Candidates do not Get the Job):

  • यह मिथक गलत धारणाओं पर कैंडिडेट्स में फैलाया जाता है।जैसा कि ऊपर उल्लेख किया जा चुका है कि फ्रैशर्स व अनुभवहीन कैंडिडेट्स को काॅलेज कैम्पस व जाॅब फेयर में चयन किया जाता है।उदाहरणार्थ अभी कुछ समय पूर्व ही एचसीएल टेक्नोलॉजीज ने घोषणा की थी कि 20000 फ्रैशर्स को नियुक्त करेगी।एचसीएल टेक्नोलॉजीज नेक्स्ट जनरेशन की ग्लोबल आईटी कम्पनी है।
  • वस्तुत: अनुभवी कैंडिडेट्स के चयन के लिए कंपनियों तथा सरकारों को अत्यधिक वेतन,भत्ते तथा अन्य सुविधाएं देनी पड़ती है।इसके कारण कंपनियों तथा सरकारों पर अत्यधिक आर्थिक भार पड़ता है।भारत जैसे देश में कंपनियां तथा सरकारें अधिक धन कर्मचारियों पर निवेश नहीं करना चाहती है।
  • यों भी हर कंपनी या सरकार चाहे कितनी ही सक्षम हो यदि अनुभवी तथा अधिक प्रतिभाशाली (डिग्रीधारी) कैंडिडेट्स का ही चयन करेगी तो उत्पादन लागत बढ़ेगी।जबकि उदारीकरण के इस युग में इतनी अधिक प्रतिस्पर्धा है कि हर कंपनी अपने उत्पाद की लागत कम रखना चाहती है।
  • इसलिए कंपनियां तथा सरकारें अनुभवहीन तथा फ्रैशर्स का भी चयन करती है।इसके अलावा आप अपने अन्य गुणों जैसे ईमानदारी,कर्त्तव्यनिष्ठा,अनुशासन,सौम्यता, सहयोग,विनम्रता,सदाचार जैसे गुणों के द्वारा अनुभवहीनता की कमी को पूरा कर सकते हैं।ये गुण अनुभव व स्किल पर भारी पड़ते हैं।उदाहरणार्थ कोई कम्पनी यह नहीं चाहती है की कर्मचारी भ्रष्टाचार करे चाहे वह कितना ही अनुभवी हो।इसलिए यदि आप ईमानदार हैं तो आपके चयन की अधिक संभावना है।

5.मिथक 4 (Myth 4):जाॅब सीकर्स को जाॅब हेतु संपर्कों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए (Job Seekers Should not Use Contacts for Job):

  • जाॅब सीकर्स अर्थात् जाॅब चाहने वालों को संपर्कों अथवा निजी संपर्कों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।यह मिथक भी मनगढ़ंत है जिसका कोई तार्किक औचित्य नहीं है।वस्तुतः नियोक्ता को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आप सम्पर्कों अथवा निजी सम्पर्कों का प्रयोग कर रहे हैं।आखिर अखबारों में विज्ञापन,जाॅब वेबसाइट्स,सोशल साइट्स पर विज्ञापन में भी कंपनियां कैंडिडेट्स को आमंत्रित करती है तो यह भी कैंडिडेट्स से सम्पर्क करने का माध्यम ही हुआ।
  • आधुनिक युग में नियोक्ता कम्पनी की साख तथा कम्पनी हित को सर्वोपरि प्राथमिकता देता है।उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ता है कि कैंडिडेट्स किस संपर्क से आया है या किस सम्पर्क का प्रयोग किया है।
  • इसके अलावा कैंडिडेट में यदि योग्यता व स्किल है तो संपर्क अथवा निजी संपर्क से उसके जाॅब पाने की संभावना बढ़ जाती है।
  • उदाहरणार्थ उद्योगपति धीरूभाई अम्बानी ने अपनी कंपनी का उत्तरदायित्व मुकेश अम्बानी व अनिल अम्बानी को सुपुर्द केवल इसलिए नहीं किया है।बल्कि उनमें कम्पनी के नेतृत्व की,संचालन करने की प्रतिभा थी इसलिए उत्तरदायित्व सौंपा है।प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा ने ऐसा नहीं किया। आधुनिक युग में कंपनी में चयन व संचालन के तौर तरीकों में बहुत बदलाव आ गया है।निजी संपर्क अपनी जगह है परंतु बिना योग्यता के कैंडिडेट्स को चयन करने का मतलब है कि कंपनी की लुटिया डुबोना।कोई भी कंपनी का संचालक किसी कंपनी को इसलिए खड़ा नहीं करता है,इसलिए त्याग व तपस्या से उसकी नींव मजबूत व साख कायम नहीं करता है कि उसके उत्तराधिकारी,निजी संबंधी ऐशोआराम करें।

6.मिथक 5 (Myth 5):जाॅब की सभी आवश्यकताएं पूरी तरह से मेल खानी चाहिए (All the Requirements of Job Should be Fully Matched to Apply):

  • यह ठीक बात है कि जाॅब से संबंधित औपचारिक डिग्री आपके पास होनी चाहिए।परंतु किसी भी जॉब के लिए केवल शैक्षणिक अथवा प्रोफेशनल डिग्री ही नहीं चाही जाती है बल्कि अन्य आवश्यकताएँ भी चाही जाती है।परंतु इस तरह परफेक्ट कैंडिडेट्स का चयन करने की नीयत से कंपनियों व सरकारों को परफेक्ट कैंडिडेट्स का मिलना मुश्किल है।
  • उदाहरणार्थ किसी कम्पनी के प्रबन्धक के लिए मैनेजमेंट की डिग्री व 5 साल का अनुभव व अन्य आवश्यकताएँ चाही गई हैं।अब यदि किसी कैंडिडेट में अन्य सभी योग्यताएं हैं परंतु अनुभव चार साल का है तो कम्पनी ऐसे कैंडिडेट का चयन कर लेती है।तात्पर्य यह है कि चयन करने में हार्ड एण्ड फास्ट नियम नहीं होता है बल्कि नियम फ्लेक्सिबल होते हैं।तभी कैंडिडेट्स का चयन संभव है।
  • कई कैंडिडेट्स इस मिथक के कारण कंपनियों में एप्लाई ही नहीं करते हैं।अनुभव की पूर्ति कम्पनी में उत्तरदायित्व देकर पूरी की जा सकती है।परंतु कैंडिडेट्स के अन्य गुणों जैसे ईमानदारी,विनम्रता,सौम्यता,सरलता,सादगी,शिष्टाचार,सदाचार जैसे गुणों की अनदेखी नहीं की जा सकती है।क्योंकि इन गुणों के अभाव में कंपनी की साख को बट्टा लगता है।
  • उदाहरणार्थ किसी कर्मचारी को शराब पीने की आदत है।अब कर्मचारी शराब अपने पैसों की पीता है।परंतु यदि कर्मचारी शराब पीकर कही नाली में पड़ा हुआ है अथवा सड़क के किनारे पड़ा हुआ है अथवा गलत लोगों की संगत में है तो कंपनी की साख भी ऐसे कर्मचारी की वजह से गिरती है। इसलिए कुछ रिक्वायरमेंट में ढील दी जा सकती है तो कुछ की अनदेखी नहीं की जा सकती हैअतः पूर्व में ही ऐसी धारणा बनाकर अप्लाई न करना अपने साथ अन्याय करना है।
    उपर्युक्त आर्टिकल में शीर्ष 5 कैरियर मिथक (The Top 5 Career Myths),नौकरी के शिकार के बारे में 5 मिथक और गलत धारणाएँ (5 Myths and Misconceptions about Job Hunting) के बारे में बताया गया है।

7.छात्रों द्वारा डींग हाँकना (हास्य-व्यंग्य) (Bragging by Students) (Humor-Sattire):

  • एक बार गणित क्लब में एक छात्र ने भाषण के दौरान कहा कि मैं एक बार महान् गणितज्ञ मैथेमेटिक्स गुरु आर के श्रीवास्तव से मिला।उनसे लम्बी बातचीत हुई।उन्होंने बताया कि मौखिक गणित करने से नोटबुक की बचत होती है।
  • श्रोता छात्रों में से एक छात्र बोला:यह तो मामूली बात है।कल ही मैं काॅलेज से घर जा रहा था तो महान् गणितज्ञ आर्किमिडीज उस बस में चढ़े और मेरी बगल में बैठ गए।हमने दुआ सलाम की और खूब बातें की।उन्होंने अपने मशहूर आविष्कार “सोने में अशुद्धि खोजने का किस्सा सुनाया जिसमें वे नंगे ही सड़क पर दौड़ पड़ते हैं”।यह सुनते ही क्लब में चारों ओर खामोशी छा गई।
    ज्योंही गणित क्लब में समारोह का समापन हुआ तब वक्ता छात्र बोला:
  • वक्ता छात्र:तुम्हारे में थोड़ी बहुत भी समझ है कि नहीं?जो मन में आया वही बक रहे थे।
  • श्रोता छात्र:ऐसा मैंने क्या कह दिया?
  • वक्ता छात्र:महान् गणितज्ञ आर्किमिडीज का जन्म 287 ईस्वी पूर्व और मृत्यु 212 ईस्वी पूर्व में हुई थी।यानी उन्हें मरे हुए लगभग ढ़ाई हजार साल हो गए।

8.शीर्ष 5 कैरियर मिथक (The Top 5 Career Myths),नौकरी के शिकार के बारे में 5 मिथक और गलत धारणाएँ (5 Myths and Misconceptions about Job Hunting) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.शीर्ष 10 कैरियर मिथक क्या हैं? (What are the top 10 career myths?):

उत्तर:शीर्ष 10 कैरियर मिथकों
वहाँ एक सही व्यवसाय मेरे लिए इंतज़ार कर रहा है.
अध्ययन का मेरा कार्यक्रम (My program of study) मेरे कैरियर की योजना में निर्धारण कारक है।
मेरे पास अपने जीवनकाल में केवल एक कैरियर होगा।
एक स्नातक की डिग्री से मुझे एक अच्छी नौकरी (Decent Job) नहीं मिलेगी।
अधिकांश छात्र विश्वविद्यालय में प्रवेश करते समय अध्ययन और कैरियर के लक्ष्यों के अपने क्षेत्र को जानते हैं।

प्रश्न:2.5 कैरियर मिथक क्या हैं? (What are 5 career myths?):

उत्तर:5 कैरियर मिथक जो आपको वापस पकड़ रहे हैं
मिथक 1:आपको आवेदन करने के लिए सभी नौकरी आवश्यकताओं से पूरी तरह से मेल खाना चाहिए।
मिथक 2:अपने जुनून का पालन करें और केवल अपने जुनून।
मिथक 3:नेतृत्व कौशल समय के साथ स्वाभाविक रूप से विकसित होते हैं।
मिथक 4:आप दो साल के निशान से पहले नौकरी नहीं छोड़ सकते हैं।

प्रश्न:3.कैरियर योजना मिथक क्या है? (What is Career Planning Myths?):

उत्तर:कैरियर योजना मिथक
तथ्य: कैरियर निर्णय लेना एक प्रक्रिया है और एक घटना नहीं है।गलत या अपर्याप्त जानकारी के आधार पर समय से पहले निर्णय लेना हमेशा एक गलती होती है।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा शीर्ष 5 कैरियर मिथक (The Top 5 Career Myths),नौकरी के शिकार के बारे में 5 मिथक और गलत धारणाएँ (5 Myths and Misconceptions about Job Hunting) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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साथ प्रयास करेंगे।किसी विषय अथवा जॉब की पॉपुलरेटी व उपयोगिता के साथ-साथ उसके मिथक भी जुड़ जाते हैं।

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