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Computer Science Now Counts As Math Credit

1.कंप्यूटर विज्ञान अब अधिकांश राज्यों में गणित क्रेडिट के रूप में गिना जाता है – क्या यह एक अच्छा विचार है? (Computer science now counts as math credit in most states – is this a good idea?

कंप्यूटर विज्ञान अब गणित क्रेडिट के रूप में गिना जाता है (Computer science counts as math credit) के बारे में बताएंगे।इस आर्टिकल में बताया गया है कि अधिकांश विद्यार्थियों से गणित तथा कम्प्यूटर विज्ञान  में से किसी एक विषय का चुनाव करने के लिए कहा गया तो अधिकांश विद्यार्थियों ने गणित के बजाए कम्प्यूटर विज्ञान विषय को चुना। गणित विषय के प्रति रुझान कम हो रहा है तथा कम्प्यूटर विज्ञान की तरफ रुझान अधिक बढ़ रहा है। 
हम गणित का महत्त्व तथा उसके चुनाव के बारे में आर्टिकल लिख चुके हैं इसलिए गणित के महत्त्व को जानने के लिए उन आर्टिकल को पढ़ना चाहिए। 
सामान्य विद्यार्थियों तथा मनुष्य जो अधिकांश संख्या में है, का ट्रेन्ड यही होता है कि वे कठिन व जटिल विषय व कार्य की अपेक्षा सरल विषय व कार्य का चुनाव करते हैं तथा प्राथमिकता देते हैं। इस प्रकार की मानसिकता से हमारी दिनचर्या व प्रवृत्ति ऐसी होती जाती है कि कभी भी हमारे सामने किसी कार्य में कठिनाई आती है तो हम कठिन लगने वाले विषय तथा कार्य को छोड़ देते हैं यह प्रवृत्ति हमारी प्रतिभा व योग्यता को निखारने या चमकाने के बजाए कुचलने लगती है और हमारी योग्यता तथा प्रतिभा पल्लवित व खिलने के बजाए मुरझाने लगती है। कम्प्यूटर विज्ञान का चुनाव करने का प्रथम कारण तो यही है कि अपेक्षाकृत गणित के बजाए कम्प्यूटर विज्ञान विषय सरल है। कम्प्यूटर विज्ञान को चुनने का दूसरा कारण है कि कम्प्यूटर व तकनीकी का प्रयोग हमारे दैनिक जीवन में बढ़ता जा रहा है अर्थात् हमारे व्यावहारिक जीवन का आवश्यक अंग बनता जा रहा है। दैनिक जीवन में इसकी उपयोगिता कितनी बढ़ती जा रही उसका उल्लेख नीचे आर्टिकल में बताया गया है। ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों के लिए इसका ज्ञान प्राप्त करना जरूरी होने से कम्प्यूटर विज्ञान का चुनाव करते हैं। तीसरा कारण है कि कम्प्यूटर व तकनीकी का हर व्यवसाय में उपयोग बढ़ता जा रहा है इसलिए इसका ज्ञान हर व्यवसाय के व्यक्ति को होना चाहिए अन्यथा प्रतिस्पर्द्धा के इस युग में पिछड़ जाता है। चौथा कारण है कि कम्प्यूटर व तकनीकी क्षेत्र में जाॅब पाने का क्षेत्र बढ़ता जा रहा हैं नित नए-नए अवसर पैदा होते जा रहे हैं। सोशल मीडिया, आनलाईन selling, वेबसाइट, ई-बुक, आनलाईन मार्केटिंग, ब्लाग में आर्टिकल लिखना, यू ट्यूब पर वीडियो डालना, आनलाईन कोचिंग, आनलाईन ट्यूशन,इंस्टाग्राम, फेसबुक  इत्यादि पर आप अपने व्यवसाय का प्रचार प्रसार कर सकते हैं अर्थात् हर व्यवसाय आनलाईन होता जा रहा है। 
कम्प्यूटर विज्ञान का इतन महत्त्व होते हुए भी गणित के विकल्प के रूप में कम्प्यूटर विज्ञान को प्रस्तुत नहीं करना चाहिए। गणित विषय की हर क्षेत्र में आवश्यकता होती है। यदि गणित में अच्छी प्रतिभाओं का अभाव होगा तो उसका प्रभाव सभी क्षेत्रों पर पड़ेगा। हमें गुणवत्तायुक्त तकनीकीशियन, इंजीनियर, प्रोफेसर इत्यादि नहीं मिल पाएंगे। गणित हर विषय व हर क्षेत्र की प्रगति में सहायक है, अवरोधक नहीं है। इसलिए गणित विषय को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। गणित के स्काॅप व गणित विषय को समाप्त न करके इसमें आनेवाली जटिलताओं को दूर करके, इसे रोचक प्रभावशाली व उपयोगी बनाने का ओर अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। 
इस आर्टिकल में कम्प्यूटर की महत्ता तथा उसका दैनिक जीवन में उपयोग बताने का यह अर्थ नहीं कि गणित विषय का कोई महत्त्व नहीं है बल्कि वास्तविक स्थिति को प्रस्तुत करना है। गणित विषय का महत्त्व के लिए हम पहले ही आर्टिकल प्रस्तुत कर चुके हैं इसलिए यहाँ उसको प्रस्तुत करने का अर्थ है कि आर्टिकल बहुत लम्बा हो जाता। कम्प्यूटर का महत्त्व के साथ एक सर्वेक्षण भी प्रस्तुत किया गया है जो यह दर्शाता है कि विद्यार्थियों को गणित व कम्प्यूटर विज्ञान में से कम्प्यूटर विज्ञान का चुनाव करने का रुझान प्रदर्शित करता है। यह स्थिति चिन्ताजनक तथा गणित के साथ-साथ हमारे लिए अशुभ संकेत है। गणित जैसे विषय को बढ़ावा तथा प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। इसे रुचिकर व इसमें जिज्ञासा बढ़ाने की विधाओं पर विचार करना चाहिए। साथ ही इसे आधुनिक युग के अनुकूल यथोचित बदलाव किए जाने चाहिए हालांकि कई संगठन इस ओर प्रयासरत हैं जिसे ओर बढ़ाने की जरूरत है। गणित विषय का अन्य कोई विकल्प नहीं है और न ही कोई विषय इसकी पूर्ति कर सकता है। यह अवश्य है कि गणित विषय का ज्ञान प्राप्त करने के साथ अन्य विषयों का सामान्य ज्ञान भी विद्यार्थियों को प्राप्त करना चाहिए। कम्प्यूटर व कम्प्यूटर विज्ञान कितना ही उपयोगी व हमारे जीवन से संबंधित हो जाए परन्तु ज्यों – ज्यों हम इसके आदी होते जाते हैं हमारी प्रतिभा को निखारने या खिलने का मौका नहीं मिलता है। कम्प्यूटर विज्ञान का सीधा संबंध तकनीकी व इंटरनेट से है, हम जितना तकनीकी व इंटरनेट का प्रयोग करेंगे हमारी बुद्धि व विवेक का कम इस्तेमाल होगा जिससे बुद्धि, विवेक, तर्क-शक्ति, चिन्तन-मनन करने की क्षमता का विकास नहीं हो पाएगा क्योंकि मस्तिष्क को  काम में लेने का मौका ही नहीं मिलेगा, सारा कार्य कम्प्यूटर ही कर देगा। जबकि गणित से हमारी बुद्धि, तर्क-शक्ति, चिन्तन-मनन करने की क्षमता का विकास होता है। इसलिए कम्प्यूटर विज्ञान, गणित के पूरक के रूप में तो प्रयोग किया जा सकता है परन्तु गणित के विकल्प के रूप में प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। विकल्प के रूप में प्रयोग करना हमारे लिए घातक व हानिकारक ही होगा। 
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2.कम्प्यूटर का परिचय (Introduction to Computer)-

बीसवीं सदी की महान् उपलब्धि है STEM, S-SCIENCE, T-TECHNOLOGY, E-ENGINEERING, M-MATHEMATICS ।यदि ये चारों न होते तो आज जिन सुविधाओं का हम उपभोग कर रहे हैं उनके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता कि मानव इतनी उन्नत अवस्था में पहुंच जाएगा।
तकनीकी के विकास में कम्प्यूटर की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। आज जीवन का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जिसमें कम्प्यूटर का उपयोग नहीं किया जा रहा हो। वैज्ञानिक अनुसंधान, व्यापार, उद्योग, पर्यावरण, मौसम विज्ञान, अन्तरिक्ष अभियान, संचार यातायात, चिकित्सा, शिक्षा, मनोरंजन आदि सभी क्षेत्रों में कम्प्यूटर का उपयोग जरूरी हो गया है। विश्वभर के कम्प्यूटरों के परस्पर जुड़ाव से बने संचार तंत्र इन्टरनेट का प्रभाव इतना जबरदस्त रहा है कि इसने एक नए युग “सूचना प्रौद्योगिकी युग” का सूत्रपात कर दिया है
आज के इस सूचना प्रौद्योगिकी के युग में कम्प्यूटर की कल्पना करना असम्भव है।
आज मानवता के विकास के सभी क्षेत्रों में कम्प्यूटर का उपयोग हो रहा है। कम्प्यूटर ने अनेक जटिल समस्याओं को सुलझाया है तथा बहुत से असम्भव कार्यो को सम्भव बनाया है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए तो कम्प्यूटर अत्यन्त आवश्यक है क्योंकि कम्प्यूटर देश की आर्थिक स्थिति को सुधारने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
परन्तु कम्प्यूटर के आविष्कार की कल्पना गणित के बिना नहीं की जा सकती थी क्योंकि गणित का अर्थ गणना से है और कम्प्यूटर शब्द की उत्पत्ति अंग्रेज़ी शब्द कम्प्यूट – COMPUTE) शब्द से हुई है जिसका अर्थ है – गणना करना या गिनती करना। वास्तव में कम्प्यूटर के आविष्कार का मूल उद्देश्य शीघ्र गणना करने वाली मशीन का निर्माण करना ही था। किन्तु आज कम्प्यूटर द्वारा किया जानेवाला 80 प्रतिशत से अधिक कार्य गणितीय प्रकृति का नहीं होता। अतः कम्प्यूटर को मात्र एक गणना करने वाली युक्ति (Device) के रूप में परिभाषित करना इसके 80 प्रतिशत कार्य की अवहेलना करना है। कम्प्यूटर में गणना करने की क्षमता के अतिरिक्त तार्किक शक्ति एवं मैमोरी का भण्डार होता है तथा यह पलक झपकते ही निर्देशों की पालना कर सकता है।
आज कम्प्यूटर की परिभाषा निम्न है-
कम्प्यूटर एक स्वचालित इलेक्ट्रॉनिक मशीन है, जिसमें हम अपरिष्कृत आंकड़े देकर प्रोग्राम के नियन्त्रण द्वारा उन्हें अर्थपूर्ण सूचनाओं में परिवर्तित कर सकते हैं।
अपरिष्कृत आंकड़े (Raw Data) सूचनाओं, आंकड़ों आदि के रूप में कम्प्यूटर को दिए जाने वाले आगम (Inputs) होते हैं उदाहरण के लिए यदि हम किसी कक्षा में रोल नंबर, नाम, कक्षा, विषय, प्राप्तांक आदि की आवश्यकता होगी। इन्हीं जानकारियों को अपरिष्कृत आंकड़े कहा जाता है।
कम्प्यूटर की किसी विशिष्ट भाषा में लिखे गए निर्देशों के समूह को प्रोग्राम (Program) कहते हैं। कम्प्यूटर इन प्रोग्रामों द्वारा नियंत्रित होते हैं। यहां भी हम अंकतालिका का उदाहरण लेते हैं। अंकतालिका निकालने के लिए भी एक प्रोग्राम बनाना पड़ता है। मान लीजिए इस प्रोग्राम में पहिले निर्देश के अन्तर्गत रोल नम्बर भरना है, फिर नाम, फिर कक्षा और फिर अगले निर्देशों के अन्तर्गत विषयवार प्राप्तांक भरने हैं। उसके बाद वह प्रोग्राम पलक झपकते ही बिना किसी मानवीय श्रम के सभी प्राप्तांकों का योग, प्रतिशत, श्रेणी, वरीयता क्रमांक आदि जानकारियां देगा।
अर्थपूर्ण सूचनाएं (Meaningful Informationen) कम्प्यूटर प्रोग्राम के माध्यम से प्राप्त होने वाले वे परिणाम है जिनसे कोई अर्थ निकलता हो। अर्थपूर्ण सूचनाएं अव्यवस्थित, एकांकी, मूल आंकड़ों का व्यवस्थित रूप है। उदाहरण के लिए अंकतालिका में जब परिणाम के रूप में प्राप्तांकों का योग, प्रतिशत श्रेणी, वरीयता क्रमांक आदि निकालते हैं तो इन्हें अर्थपूर्ण सूचनाएं कहा जाता है।

3.कम्प्यूटर के विविध उपयोग (Different Uses of Computer) –

कम्प्यूटर का उपयोग बड़ा व्यापक है। आज जीवन में कम्प्यूटर की उपयोगिता इतनी अधिक हो गई है कि आज का युग ही कम्प्यूटर युग कहलाता है।
कम्प्यूटर के आविष्कार से बहुत सी गणनाएँ जो कि मानव के वश की बात नहीं थी, अब आसान हो गई है। वस्तुतः कम्प्यूटर का आविष्कार ही गणना को स्वचालित एवं शुद्धता से करने के उद्देश्य से हुआ था। ऐसे क्षेत्र जिनमें समयबद्धता एवं शुद्धता की अत्यधिक आवश्यकता होती है कम्प्यूटर का उपयोग जरूरी है। मौसम सम्बन्धी पूर्वानुमान, अन्तरिक्ष अनुसंधान सम्बन्धी क्रियाएं, नाभिकीय संयंत्रों का संचालन आदि कुछ विशिष्ट क्षेत्र हैं जिनका कम्प्यूटर के बिना विकास ही सम्भव नहीं था। चन्द्रमा पर मानव का कदम कम्प्यूटर की शुद्ध एवं तीव्र गणना के कारण ही सम्भव हो पाया है।
कम्प्यूटर के उपयोग से संचार क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आए हैं। आज मात्र कुछ बटन दबाकर विश्व के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति से सम्पर्क किया जा सकता है और वह भी बहुत कम खर्च में। इंटरनेट तो सूचना प्रसारण एवं सूचना प्राप्ति का एक बहुत सशक्त माध्यम है। यह सूचनाओं एवं ज्ञान का अथाह भण्डार भी है जहाँ से कोई भी सूचना एवं जानकारी पलभर में प्राप्त की जा सकती है। परीक्षा परिणाम घोषित होते ही इन्टरनेट से परीक्षार्थियों को अपने परिणाम एवं प्राप्तांकों की जानकारी हो जाती है।
इन्टरनेट पर उपलब्ध टेलीफोन डायरेक्ट्री से किसी के भी टेलीफोन तथा इनके चलने की वास्तविक स्थिति ज्ञात की जा सकती है। भारतीय रेल की एक सामान्य पेसेन्जर ट्रेन की वर्तमान स्थिति की जानकारी इन्टरनेट पर उपलब्ध रहती है। इन्टरनेट पर विश्व के सभी प्रमुख समाचार पत्र उपलब्ध है। इन्टरनेट से आप विश्व के किसी भी कोने में बैठे राजस्थान के समाचार पत्र के किसी भी क्षेत्रीय परिशिष्ट को पढ़ सकते हैं। घर बैठे ट्रेन का रिजर्वेशन करवा सकते हैं, टेलीफोन बिल, बैंक बेलेन्स आदि की जानकारी ले सकते हैं। शायद ही कोई ऐसी सूचना या जानकारी हो, जो इन्टरनेट पर उपलब्ध नहीं है। अनुसन्धानकर्ताओं और लेखकों के लिए तो इन्टरनेट एक बहुत अच्छे सन्दर्भ स्रोत का कार्य करता है। इन्टरनेट पर उपलब्ध ई-मेल के द्वारा सन्देशों को एक कम्प्युटर से दूसरे कम्प्यूटर पर भेजा जा सकता है। ई-मेल से सन्देश भेजने में बहुत कम खर्च आता है तथा समय की भी बचत होती है। जिस क्षण सन्देश भेजा जाता है वह दूसरे ही क्षण विश्व के किसी भी कोने में स्थित कम्प्यूटर पर पहुंच जाता है। एक अन्य सुविधा जिसे चैटिंग (Chatting) कहा जाता है के द्वारा सन्देशों का आदान-प्रदान तत्काल किया जा सकता है। इन्टरनेट पर उपलब्ध एक अन्य सुविधा जिसे नेट टेलीफोनी ( Net Technology) कहते हैं, का उपयोग कर किसी फोन से भी सम्पर्क स्थापित किया जा सकता है। नेट टेलीफोनी में सामने वाले व्यक्ति के पास कम्प्यूटर होना जरूरी नहीं है। नेट टेलीफोनी से विदेशों में बातचीत करने का खर्च बहुत ही कम आता है। अब नेट टेलीफोनी भारत में भी वैध हो गई है। विडियो कान्फ्रेंसिंग में तो टेलीफोन पर बातचीत करते हुए एक दूसरे को देखा जा सकता है।
व्यापारिक जगत में भी कम्प्यूटर का उपयोग खूब बढ़ा है। साधारण हिसाब-किताब या लेखा के संधारण से लेकर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शेयर बाजार का प्रबन्धन आज कम्प्यूटरों द्वारा किया जा रहा है। कम्प्यूटर और इन्टरनेट के संयोग से एक नई व्यापार प्रणाली प्रचलन में आई है जिसे ई-कामर्स (E-Commerce) कहते हैं। वस्तुओं और सेवाओं को इन्टरनेट के जरिए खरीदना एवं बेचना ही ई-कॉमर्स कहलाता है। इससे उत्पादकों एवं विक्रेताओं को वस्तुओं एवं सेवाओं के विश्वव्यापी बाजार मिले हैं तथा व्यापारिक सूचनाओं के आदान-प्रदान के समय एवं लागत में भारी कमी हुई है। आज गृहणियाँ इन्टरनेट के द्वारा अपने घरेलू उपयोग की वस्तुएं घर बैठे खरीद रही है, घर बैठे सिनेमा के टिकट, होटलों की बुकिंग एवं यात्रा टिकटों के रिजर्वेशन कराए जा रहे हैं।
ई-कामर्स का ही एक भाग है, ई-बैंकिंग। इन्टरनेट के जरिए खाताधारक अपने बैंक खाते का बैलेंस देख सकते हैं, एक खाते से दूसरे खाते में राशि स्थानांतरित कर सकते हैं। टेलीफोन, बिजली, पानी का बिल भर सकते हैं अथवा कोई लेन-देन कर सकते हैं। ई-बैकिंग के ही अन्तर्गत बैंकों द्वारा एक ओर सुविधा अपने ग्राहकों को उपलब्ध कराई जा रही है – वह है – ए. टी. एम (A. T. M.).ए.टी.एम.का पूरा नाम है आॅटोमेटिक टेलर मशीन (Automatic Teller Machine) अर्थात् स्वचालित गणक मशीन। ए टी एम द्वारा जमाकर्ता किसी भी समय तथा किसी भी स्थान पर रकम निकलवा सकता है। इसलिए ए. टी. एम. को प्रचलित अर्थ में एनी टाइम मनी (Any Time Money) भी कहा जाता है।
कार्यालयों में टाइप राइटर का स्थान तो कम्प्यूटर ने ले लिया है, इसके अतिरिक्त कार्यालयों में होने वाले सभी कार्यो का लेखा-जोखा, संस्थापन विवरण, वेतन विवरण आदि संधारण का कार्य भी कम्प्यूटर ही करता है। कम्प्यूटर ने ‘पेपर लैस आॅफिस’ की अवधारणा को जन्म दिया है। प्रशासनिक नियन्त्रण के लिए ई-गवर्नेंस का सहारा लिया जा रहा है।
पुस्तकालय में पुस्तकों का सम्पूर्ण ब्यौरा, पुस्तकालय सदस्यों का पूरा रिकार्ड, पुस्तकों को देना, लौटाना आदि का अभिलेख कम्प्यूटर द्वारा आसानी से रखा जा सकता है।
प्रकाशन, मुद्रण कार्यों में भी अब कम्प्यूटर का उपयोग होता है। ये कार्य डेस्कटॉप पब्लिशिंग (Desk Top Publishing – DTP) के अन्तर्गत आते हैं। परम्परागत छपाई का कार्य बहुत ही दुष्कर एवं श्रमसाध्य हुआ करता था, किन्तु अब कम्प्यूटर के उपयोग से यह बहुत ही आसान हो गया है।
चिकित्सा के क्षेत्र में रोगों के निदान, उनके इलाज, शल्यक्रिया, रोगियों की गहन निगरानी आदि कार्यों में कम्प्यूटर का उपयोग खूब किया जा रहा है। अल्ट्रासाउंड (Ultrasound), सीटी स्कैन (CT Scan /कम्प्यूटराइज्ड टोमोग्राफी), एम. आर. आई. (M. R. I.) आदि कुछ परीक्षण ऐसे हैं जिनका उपयोग विभिन्न बीमारियों एवं विकृतियों का पता लगाने के लिए किया जाता है। इन परीक्षणों में कम्प्यूटर जनित चित्रों के माध्यम से रोगों का निदान बड़ी आसानी से हो जाता है।
अनियमित हृदय धड़कन वाले रोगियों में धड़कन नियन्त्रित करनेवाला उपकरण “पेसमेकर” एक छोटा सा कम्प्यूटर ही है। आनुवांशिक अभियांत्रिकी (Genetic Engineering) के क्षेत्र में जहाँ विभिन्न डी. एन. ए. की संरचनाओं का अध्ययन किया जाता है, कम्प्यूटर का उपयोग अपरिहार्य है। डी. एन. ए. फिंगर प्रिंटिंग के द्वारा अनेक उलझे हुए अपराधिक प्रकरणों को सुलझाया जाता है। जैव-चिकित्सा विज्ञान और कम्प्यूटर के संयोग से विज्ञान की एक नई शाखा ‘बायोइन्फारमेटिक्स’ (Bio-informatics) अस्तित्व में आई है।
शिक्षा के क्षेत्र में कम्प्यूटर का उपयोग बहुत ही प्रभावी रूप में हो रहा है। कक्षा (Class Room) में विज्ञान प्रायोजनाओं के निर्माण, रिपोर्ट तैयार करने, जानकारियाँ एकत्रित करने तथा अर्न्तक्रियात्मक अधिगम पूल (Interactive Learning Pool) के रूप में कम्प्यूटर का प्रचलन बढ़ा है। कम्प्यूटर का उपयोग शिक्षक के पूरक के रूप में किया जा रहा है। कम्प्यूटर आधारित शिक्षण (Computer Based Teaching–CBT) के अन्तर्गत ऐसे अनेक साॅफ्टवेयर उपलब्ध हैं जो विभिन्न विषयों की क्रमबद्ध जानकारी देते हैं। मल्टीमीडिया (ध्वनि, चित्र, एनिमेशन एवं वीडियो से युक्त) सी. बी. टी. साॅफ्टवेयर किसी भी विषय को प्रभावी ढंग से समझाने में बहुत उपयोगी है। आजकल इन्टरनेट के माध्यम से आनलाईन लर्निंग एवं ट्रेनिंग सम्भव है। इसके अन्तर्गत विद्यार्थी अपने घर में बैठे हुए अपने शिक्षक से बात कर सकता है तथा अपनी जिज्ञासाएं शान्त कर सकता है। आज आभासी कक्षा कक्ष ((Virtual Class Room) वास्तविकता बन गए हैं। 
अभियान्त्रिकी क्षेत्र में भी कम्प्यूटर ने अपना कमाल दिखाया है। किसी भवन, वस्तु, कलपुर्जे आदि के निर्माण में कौन से पदार्थ का उपयोग बेहतर होगा तथा क्या वे आवश्यक तनाव व ताप आदि सहन कर सकेंगे आदि का निर्धारण कम्प्यूटर एड्ड इन्जीनियरिंग (CAE) से बड़ी आसानी से किया जा सकता है। बड़े भवन, पुल, हवाई जहाज आदि के निर्माण में सी. ए. ई. का प्रयोग सुरक्षा दृष्टि से अति आवश्यक है। कम्प्यूटर एड्ड डिजाइनिंग 

 (CAD) के द्वारा किसी भी वस्तु का भीतरी-बाहरी, विस्तृत एवं त्रि आयामी स्वरूप तैयार कर स्क्रीन पर देखा जा सकता है .कागज पर  निर्मित  किसी घर के नक्शे को देखकर साधारणत: यह पता नहीं चलता कि उस घर का वास्तविक रुप क्या होगा तथा पूरा बनने पर कैसा दिखेगा। किन्तु CAD के माध्यम से यह सब बनने से पूर्व ही देखा जा सकता है। ऐसी परिस्थितियाँ जहाँ मानव के लिए कार्य करना संकटमय हो सकता है वहाँ रोबोट का उपयोग प्रारम्भ हो गया है। रोबोट कम्प्यूटर संचालित यान्त्रिक मानव होता है। 
कम्प्यूटर का मनोरंजन के क्षेत्र में भी बहुत उपयोग हो रहा है। आज अनेक ऐसे कम्प्यूटर गेम उपलब्ध है जो न केवल मनोरंजन ही करते हैं अपितु ज्ञानवर्धन भी करते हैं तथा बच्चों की बौद्धिक एवं तार्किक क्षमता का भी विकास करते हैं। कम्प्यूटर गेम इतने लोकप्रिय हैं कि छोटे बच्चों को ही नहीं, बड़ी उम्र के लोगों को भी आकर्षित करते हैं। फिल्मों में कम्प्यूटर की सहायता से विशेष प्रभाव (special effects) युक्त ऐसे दृश्य तैयार कर लिए जाते हैं कि जिनका वास्तव में कोई अस्तित्व नहीं होता है। आपने जुरासिक पार्क, गोडजिला, एनाकोंडा, लिटिल स्टुअर्ट आदि फिल्में देखी होगी। इन सभी फिल्मों में विशेष प्रभाव उत्पन्न करने के लिए कम्प्यूटर का ही प्रयोग किया गया है। कम्प्यूटर की ही मदद से पुरानी प्रसिद्ध भारतीय फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ व ‘नया दौर’ जो ब्लैक एण्ड व्हाइट थी, के रंगीन संस्करण तैयार कर लिए गए हैं। 
टी. वी. चैनलों के प्रसारण में भी कम्प्यूटर ने स्थान बना लिया है। कम्प्यूटर की सहायता से प्रसारण करने वाले चैनल डिजिटल चैनल कहलाते हैं। इनका प्रसारण सामान्य चैनल की तुलना में बेहतर होता है। 
संगीत की नई – नई धुनें बनाने में भी कम्प्यूटर का उपयोग होने लगा है। एक कम्प्यूटर अनेक वाद्य यन्त्रों की ध्वनि उत्पन्न कर सकता है। कम्प्यूटर द्वारा संगीत रचना करना म्यूजिकल इन्स्ट्रयूमेन्ट डिजिटल इन्टरफेस (MIDI) कहलाता है। 
कम्प्यूटर आज हमारे घरों में भी प्रवेश कर गया है। जहाँ यह शिक्षा मनोरंजन पत्र लेखन, ई-मेल, चैटिंग, इन्टरनेट से विभिन्न जानकारियां प्राप्त करने आदि विभिन्न कार्यों में प्रयुक्त होता है। 

4.कम्प्यूटर विज्ञान अब अधिकांश राज्यों में गणित क्रेडिट के रूप में गिना जाता है – क्या यह एक अच्छा विचार है?(Computer science now counts as math credit in most states – is this a good idea?)-

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सैंतालीस राज्यों ने हाई स्कूल स्नातक के लिए आवश्यक गणित या विज्ञान कक्षाओं के स्थान पर कंप्यूटर विज्ञान की गणना की। 2013 में, टेक जगत का एक व्यक्ति एक नया गैर-लाभकारी कोड Code.org लॉन्च करने के लिए एक साथ आया। संगठन का उद्देश्य स्कूलों में अधिक कंप्यूटर विज्ञान प्राप्त करना था।
मार्क जुकरबर्ग और बिल गेट्स जैसे अरबपतियों ने समूह को लाखों डॉलर का दान दिया। संगठन की अंतिम वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, Code.org ने 2013 और 2018 के बीच यूएस $ 91 मिलियन से अधिक खर्च किए। उस राशि के लिए, $ 6.9 मिलियन देश भर में राज्य विधान की वकालत करने के लिए गए।
K-12 शिक्षा में संगठन के मिशन को “कंप्यूटर साइंस काउंट बनाने के लिए” के रूप में, code.org 42 राज्यों में स्नातक नीतियों को प्रभावित करने का श्रेय लेता है। आज, 47 राज्य और कोलंबिया जिला कंप्यूटर विज्ञान की कक्षाओं को गणित की कक्षाओं जैसे बीजगणित 2. की गणना करने की अनुमति देते हैं। संगठन के काम से पहले, केवल कुछ राज्यों ने कंप्यूटर विज्ञान को गणित क्रेडिट के लिए गणना करने की अनुमति दी थी।
कंप्यूटर विज्ञान को नियमित गणित के स्थान पर गिनने की अनुमति देने वाले राज्यों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। 
इसके अलावा, 29 राज्यों ने कानून पारित किया जिससे कंप्यूटर विज्ञान को विज्ञान पाठ्यक्रम के स्थान पर गणना करने की अनुमति मिली। जब कंप्यूटर विज्ञान गणित या विज्ञान के रूप में गिनना शुरू करता है, तो यह पूछना मायने रखता है कि क्या ये परिवर्तन अमेरिका के छात्रों की मदद कर रहे हैं या उन्हें चोट पहुंचा रहे हैं।

5.यह एक अच्छा विचार है?(Is this a good idea?)-

एक कम्प्यूटेशनल भौतिक विज्ञानी और शिक्षा शोधकर्ता के रूप में, जो कॉलेज के फ्रेशमैन परिचयात्मक भौतिकी सिखाता है, मुझे चिंता है कि कंप्यूटर विज्ञान को आवश्यक गणित या विज्ञान पाठ्यक्रम के रूप में गिनने की अनुमति छात्रों को कॉलेज के लिए काफी कम तैयार कर सकती है। मैंने इस विषय पर अनुसंधान के लिए चारों ओर खोज की और कई सहयोगियों से पूछा लेकिन खाली हाथ आया। मुझे यह भी चिंता है कि हाई स्कूल में गणित और विज्ञान की तैयारी की कमी छात्रों के लिए विकल्पों की श्रेणी को कृत्रिम रूप से संकीर्ण कर सकती है जो अन्यथा एसटीईएम करियर का वादा कर सकते हैं।
निश्चित रूप से, हाई स्कूल में पढ़ाने के लिए कंप्यूटर विज्ञान महत्वपूर्ण है। मैं STEMcoding परियोजना नामक एक प्रयास का नेतृत्व करता हूं जहां मैंने गणित और विज्ञान में कोडिंग को एकीकृत करने के लिए कुछ दर्जन उच्च विद्यालय के गणित और विज्ञान शिक्षकों को प्रशिक्षित किया है, और मैंने कुछ उच्च विद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान शिक्षकों के साथ अधिक विज्ञान और गणित को उनके पाठ्यक्रम में एकीकृत करने के लिए काम किया है। ।
मैंने 2016 में STEMcoding प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर दिया था, जिसमें प्रोग्रामिंग के साथ कोई पूर्व अनुभव नहीं होने के बावजूद कितने अंडरगार्मेंट्स और यहां तक ​​कि स्नातक छात्र कम्प्यूटेशनल भौतिकी अनुसंधान परियोजनाओं पर सलाह देने के इच्छुक मेरे कार्यालय में आए थे।
जब मैं स्कूलों में कंप्यूटर विज्ञान पर विचार करता हूं, तो मैं जानना चाहता हूं: किस प्रकार का कंप्यूटर विज्ञान, सामग्री कितनी कठोर है, और इसके लिए जगह बनाने के लिए क्या समाप्त हो रहा है? हालांकि इसके अपवाद भी हैं, अधिकांश हाई स्कूल कंप्यूटर साइंस पाठ्यक्रम, जो मैंने देखा है, गणित और विज्ञान पर प्रकाश डालते हैं।
मुझे चिंता है कि छात्र कंप्यूटर विज्ञान को केवल अधिक कठिन गणित और विज्ञान पाठ्यक्रमों से बचने के लिए ले सकते हैं जिनकी उन्हें कॉलेज में आवश्यकता होती है। कंप्यूटर विज्ञान छात्रों के लिए स्नातक आवश्यकताओं को दरकिनार करने का एक तरीका हो सकता है जबकि वयस्क दूसरे तरीके से देखते हैं।
दूसरों का संबंध है, भी। इन रुझानों के जवाब में, नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर्स ऑफ मैथमेटिक्स ऑफ 2016 को 2016 में बुलाया गया और हाल ही में 2018 में गणित की कक्षाओं के लिए गणित को केवल तब गिने जाने के लिए जब उन्हें “गणित सिखाने के लिए स्पष्ट रूप से डिजाइन किया गया।

6.कैरियर की तैयारी(Career preparation)-

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कंप्यूटर विज्ञान एक व्यावहारिक वर्ग हो सकता है जो छात्रों को वास्तविक मध्यवर्गीय नौकरियों के लिए तैयार करने में मदद करता है। फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डीसांटिस ने इसी तरह के विचार व्यक्त किए जब उन्होंने इस साल के शुरू में कानून में एक कार्यबल शिक्षा बिल पर हस्ताक्षर किए थे जो कंप्यूटर विज्ञान को गणित या विज्ञान के रूप में गिनने की अनुमति देता है।
फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डेसेंटिस एक कार्यबल शिक्षा बिल पर हस्ताक्षर करते हैं जो कंप्यूटर विज्ञान को आवश्यक गणित पाठ्यक्रम के रूप में गिनने की अनुमति देता है। फ्लोरिडा के गवर्नर का प्रेस कार्यालय
राज्यपाल ने कहा, “मैं अपने बच्चों को गवर्नर की हवेली में सीढ़ियों से गिरने से रोकने की कोशिश करता हूं, मैं नहीं जानता कि मैं रोजाना भौतिकी से कितना व्यवहार करता हूं।” लेकिन उन्होंने कहा कि यह कंप्यूटर विज्ञान की बात है। उन्होंने कहा, “आप अपने दैनिक जीवन में तकनीक या कंप्यूटर से निपटने के बिना हमारे आधुनिक समाज में नहीं रह सकते,” उन्होंने कहा।
इस भावना के पीछे कुछ ठोस संख्याएँ हैं। कॉलेज में कंप्यूटर विज्ञान लेने वाले छात्रों की संख्या में वृद्धि के बावजूद, आपूर्ति की तुलना में अभी भी कंप्यूटर विज्ञान और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग श्रमिकों की अधिक मांग है।
शायद इस मांग के कारण कंप्यूटर विज्ञान नौकरियों के लिए वेतन अन्य क्षेत्रों में नौकरियों की तुलना में 40% अधिक होने का अनुमान है।
क्या महत्वपूर्ण गणित कौशल खो गए हैं?
इन तर्कों के बावजूद, कंप्यूटर विज्ञान प्रतिस्थापन नीतियों पर सवाल उठाने के लिए अभी भी अच्छे कारण हैं जैसे हस्ताक्षर किए गए डेसेंटिस। उदाहरण के लिए, आधुनिक इलेक्ट्रीशियन होने के नाते, बीजगणित और त्रिकोणमिति की कुछ समझ की आवश्यकता होती है।
यहां तक ​​कि जो लोग कंप्यूटर विज्ञान का अध्ययन करने की योजना बनाते हैं, उनके लिए बीजगणित 2 और इसके बाद के संस्करण लेने की अत्यधिक अनुशंसा की जाती है। इंजीनियरिंग के लिए बीजगणित 2 और अन्य उन्नत गणित पाठ्यक्रम भी महत्वपूर्ण हैं।
कुछ अध्ययनों का अनुमान है कि अमेरिका में कॉलेज के 40% नए छात्रों को उल्लेखनीय गणित पाठ्यक्रम की आवश्यकता होती है। यह भाग ऊपर जा सकता है यदि कम छात्र हाई स्कूल में पारंपरिक गणित अनुक्रम ले रहे हैं।
कॉलेज में बीजगणित 2 जैसे उपचारात्मक गणित के पाठ्यक्रम लेने से छात्रों को अधिक समय और पैसा खर्च करने की आवश्यकता होती है यदि वे सिर्फ हाई स्कूल में गणित के चार साल लेते और पास करते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, केवल उन सभी छात्रों में से लगभग आधे जो उपचारात्मक गणित लेते हैं, वे इसे पूरा करते हैं। इसलिए हाई स्कूल में बीजगणित 2 को छोड़ना कई छात्रों को कॉलेज से स्नातक होने से रोक सकता है।
अपनी पसंद की बात
शायद इन चिंताओं को तौलने में, 47 राज्यों में से जो कंप्यूटर विज्ञान को गणित के स्थान पर गिनने की अनुमति देते हैं, 13 यह तय करने के लिए अलग-अलग जिलों में जाते हैं कि छात्रों को उस विकल्प का उपयोग करने दें या नहीं। 13 की सूची में न्यूयॉर्क और कैलिफोर्निया जैसे तकनीक प्रेमी राज्य शामिल हैं।
अमेरिकी राज्यों के बहुमत में, छात्रों और परिवारों के पास अब एक गंभीर विकल्प है। छात्र एक परिवादात्मक मार्ग ले सकते हैं और कंप्यूटर विज्ञान के साथ बीजगणित 2 और भौतिकी जैसे पाठ्यक्रमों को प्रतिस्थापित कर सकते हैं, यह संभावना है कि यह बाद में उन्हें काटने के लिए वापस नहीं आएगा। या वे अपने पारंपरिक फायदे और नुकसान के साथ एक अधिक पारंपरिक पाठ्यक्रम के साथ रह सकते हैं।
जैसा कि कंप्यूटर विज्ञान प्रतिस्थापन नीतियां अधिक व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं, मैं शोध करने की योजना बनाता हूं कि ये सीएस प्रतिस्थापन नीतियां चोट से ज्यादा मदद करती हैं या नहीं।
हमें विशेष रूप से यह समझने की आवश्यकता है कि यह लचीलापन महिलाओं और छात्रों को कैसे प्रभावित समूहों से प्रभावित करता है। कंप्यूटर विज्ञान के पैरोकारों ने एक तरह का राष्ट्रीय प्रयोग किया है। अगले कुछ वर्षों में दिखाया जाएगा कि क्या यह एक अच्छा विचार था, लेकिन केवल अगर हम कंप्यूटर विज्ञान लेने वाले छात्रों की संख्या से अधिक देख रहे हैं।

7.कैसे हम कंप्यूटर विज्ञान में टॉप करें?(How do we top computer science?)-

(1.)कम्प्यूटर विज्ञान में टाॅप करने के लिए आप कम्प्यूटर साइंस से संबंधित अपनी कोर्स की पुस्तकों का अध्ययन करके उनके नोट्स बनाएं। नोट्स बनाने के लिए हमने अलग से आर्टिकल पोस्ट किया हुआ है उसको पढ़ व समझकर नोट्स बनाएं।
(2.)कम्प्यूटर साइंस की पुस्तकें पढ़ने के साथ-साथ इसका रोजाना प्रेक्टिकल अभ्यास करें।
(3.) रोजाना थोड़ा समय निकालकर जब इसका प्रेक्टिकल अभ्यास करेंगे तो इसकी शब्दावली (glossary) समझ में आएगी।
(4.)जो विषय जितना हमारे जीवन से सम्बन्धित होता जाता है,वह उतना ही समझ में आता जाता है तथा उस पर पकड़ मजबूत होती जाती है।
(5.)किसी भी टाॅपिक के नोट्स बनाने के बाद अपने मित्रों से उस टाॅपिक पर डिस्कस करें जो कम्प्यूटर साइंस में पढ़ता हो या जो कम्प्यूटर का कार्य करता हो।
(6.)डिस्कस करने से हमारा दिमाग खुलता है तथा कुछ नई जानकारी मिलती है और जो बाते समझ में नहीं आती है वे ठीक से समझ में आ जाती है।
(7.) कम्प्यूटर साइंस से सम्बन्धित वेबसाइट पर उपलब्ध सामग्री का अध्ययन करें तथा यूट्यूब चैनल पर कम्प्यूटर साइंस से सम्बन्धित किसी अच्छे चैनल की वीडियोज देखें और उन्हें समझने की कोशिश करें।
(8.) रोजाना लक्ष्य तय कर लें कि मुझे इतना टाॅपिक तैयार करना है,तो उसको तैयार करके ही उठे।
(9.) पुस्तकें पढ़ते समय जो बात समझ में नहीं आए उसको अन्डर लाईन कर लें या किसी नोटबुक में उतार लें।बाद में अपने मित्रों, शिक्षकों तथा आनलाईन साइट्स से समझने की कोशिश करें।
(10.)याद रखें जो बात समझ में नहीं आती है उसका हम बार-बार अभ्यास करते हैं तो धीरे-धीरे वह बात समझ में आने लगती है।
(11.)ज्यादा पढ़ना उतना महत्त्वपूर्ण नहीं है जितना महत्त्वपूर्ण यह है कि आप समझ-बूझकर पढ़ें।
(12.) सिलेबस को पूरा करने की कार्यनीति सत्रारंभ से ही तैयार कर लें और उसे पूरा करने के लिए ठीक तकनीक अपनाएं।
(13.) सिलेबस को पूरा करने की कार्ययोजना में सिलेबस को दोहराने को भी शामिल करें।
(14.)यदि आप कम्प्यूटर या लैपटॉप खरीदने की स्थिति में हैं तो अपनी सामर्थ्य के अनुसार एक पीसी या लैपटॉप खरीद कर रोजाना उस पर अभ्यास करें।जैसे आप कोई वेबसाइट डवलप कर सकते हैं या वेबसाइट डिजाइन कर सकते हैं।
(15.)कई साइट्स ऐसी है जिन पर आप फ्री में वेबसाइट डिजाइन कर सकते हैं जैसे ब्लागर जो गूगल की है तथा weblyb आदि।
(16.)कम्प्यूटर साइंस से सम्बन्धित सामग्री आप W3 Shools वेबसाइट पर देख सकते हैं और पढ़ सकते हैं।

इस आर्टिकल में कम्प्यूटर के बारे सम्पूर्ण विश्लेषण के साथ कंप्यूटर विज्ञान अब गणित क्रेडिट के रूप में गिना जाता है (Computer science counts as math credit) के बारे में बताया है।

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