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Qualities of Ideal Mathematics Student

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1 1.आदर्श गणित विद्यार्थी के गुण (Qualities of Ideal Mathematics Student),आदर्श गणित के छात्र के गुण (Ideal Mathematics Student’s Qualities):
2 2.आदर्श गणित विद्यार्थी के गुण (Qualities of Ideal Mathematics Student),आदर्श गणित के छात्र के गुण (Ideal Mathematics Student’s Qualities) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

1.आदर्श गणित विद्यार्थी के गुण (Qualities of Ideal Mathematics Student),आदर्श गणित के छात्र के गुण (Ideal Mathematics Student’s Qualities):

  • आदर्श गणित विद्यार्थी के गुण (Qualities of Ideal Mathematics Student) मुख्य रूप से शिक्षकों के प्रति श्रद्धा,एकाग्रता,इंद्रिय निग्रह,विद्या प्राप्ति में रुचि,केरियर बनाने की तीव्र उत्कंठा,दृढ़ संकल्प शक्ति,आत्मविश्वास,जिज्ञासु प्रवृत्ति,कठोर परिश्रम,संतोषी प्रवृत्ति,सदाचरण,विनम्रता,सयम का उचित उपयोग इत्यादि गुणों को धारण करना चाहिए तभी सही मायने में वह गणित शिक्षा प्राप्त करने में सफल हो सकेगा और अपना केरियर बना सकेगा।
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(1.)शिक्षकों के प्रति श्रद्धा (Devotion for Teachers):

  • शिक्षकों के प्रति श्रद्धा रखने,विश्वास रखने पर ज्ञान की प्राप्ति होती है।गणित एक ऐसा विषय है जिसमें अमूर्त चिंतन की आवश्यकता होती है।छात्र-छात्राओं को इस विषय का गहरा ज्ञान प्राप्त करने के लिए शिक्षकों के प्रति सही दृष्टिकोण एवं सकारात्मकता का बहुत प्रभाव पड़ता है।जो विद्यार्थी गणित विषय को आवश्यक,उपयोगी एवं जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण मानते हैं उन्हें शिक्षक के प्रति श्रद्धा रखनी चाहिए तभी उनसे ज्ञान ग्रहण किया जा सकता है।
  • अध्यापक के प्रति उचित दृष्टिकोण से अध्यापक छात्र-छात्राओं को रुचिपूर्वक तथा उचित प्रकार से समझाने का प्रयास करते हैं।श्रीमदभगवत गीता में भी ज्ञान प्राप्ति के लिए श्रद्धा का होना आवश्यक बताया है।गीता में कहा है कि:
  • “श्रद्धांवाँल्लभते ज्ञानं तत्पर:संयतेन्द्रियः।
    ज्ञानं लब्धवा परां शांतिमचिरेणाधिगच्छति।।
  • श्रद्धा से युक्त,गुरुजनों की सेवा उपासना में लगा हुआ जितेंद्रिय व्यक्ति ज्ञान को प्राप्त करता है,ज्ञान को प्राप्त करके वह शीघ्र परमशांति को प्राप्त होता है।
  • अध्ययन कार्य ही नहीं बल्कि जीवन में हर कार्य श्रद्धा से ही होता है।हम बाजार से पुस्तक खरीदने के लिए दुकानदार को पैसे देते हैं।इसके पीछे यह श्रद्धा ही है कि वह हमें बाकी पैसे लौटाकर पुस्तक दे देगा।बिना श्रद्धा के जीवन का एक छोटे से छोटा कार्य नहीं हो सकता है।
  • आज विद्यालय भवन अच्छी सुख-सुविधाओं से सुसज्जित है लेकिन फिर भी विद्यार्थियों को यह कहते हुए सुना जाता है कि गणित समझ में नहीं आई।गणित बहुत कठिन है।गुरुजी गणित ठीक से नहीं पढ़ाते हैं।गुरुजी ठीक से नहीं समझाते हैं।ये सब समस्याएँ श्रद्धा के न होने से ही है।उपर्युक्त श्लोक में ज्ञान प्राप्ति के लिए तीन शर्तें बताई गई हैं: जितेंद्रिय अर्थात् इन्द्रियों को वश में रखना,समर्पण तथा तीसरी श्रद्धा का होना।इन तीनों का पालन करने वाला ज्ञान को प्राप्त करता है।ज्ञान प्राप्त होते ही समस्त परेशानियों से मुक्त हो जाता है।यह बात आज से हजारों वर्ष पूर्व कही गई है और आज भी सत्य है अर्थात् उक्त श्लोक में कही गई बात कालातीत है।
  • शिक्षक कभी भी बुरा नहीं पढ़ाता है।वह कभी नहीं कहता कि दो और दो दस होते हैं।आज पुस्तकों की,विद्यालय की,साधन-सुविधाओं की कोई कमी नहीं है।फिर भी विद्यार्थी के गणित समझ में नहीं आती है।इसका कारण श्रद्धा का अभाव ही है।श्रद्धा का अर्थ अंधश्रद्धा नहीं होता।श्रद्धा वही होती है जिससे जीवन का रूपांतरण होता है,समस्याओं का समाधान होता है,परेशानियों से मुक्त होता है।

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(2.)जिज्ञासु प्रवृत्ति का होना (Having a curious tendency):

  • जिज्ञासु अर्थात् जानने की इच्छा रखनेवाला।
  • गणित में कोई सवाल नहीं आता है,कोई समस्या हल नहीं होती है इस पर जो छात्र-छात्राएं विचार करते हैं वे जिज्ञासु हैं।जो छात्र-छात्राएं इस पर भलीभांति विचार करता है अर्थात् यह सवाल क्यों हल नहीं हुआ,इसके लिए क्या करना चाहिए इत्यादि।जैसे रेत से तेल नहीं निकल सकता और बबूल के आम नहीं लग सकते हैं।इसी प्रकार बिना जिज्ञासा के गणित के
  • सवाल हल किए नहीं किए जा सकते हैं और न ही गणित की समस्याओं का समाधान हो सकता है।
    गणित को पढ़ते समय यदि आपको अधिक से अधिक जानने की उत्कंठा होगी तो सीखते-सीखते आप आगे बढ़ते जाएंगे।जितनी जिज्ञासा बढ़ती जाती है उतनी ही जल्दी गणित को समझते जाते हैं। साथ ही उसको ठीक तरह से समझते जाते हैं।

(3.)विद्या प्राप्ति में तीव्र रुचि (Intense interest in learning (Knowledge)):

  • शिक्षकों के प्रति श्रद्धा,जिज्ञासु प्रवृत्ति के साथ-साथ विद्या प्राप्ति में रुचि होना आवश्यक है।रुचि से तात्पर्य है कि गणित का अध्ययन करते समय उसमें डूब जाएं,तल्लीन हो जाएं।रुचि के बिना गणित विषय का ज्ञान प्राप्त नहीं किया जा सकता है।जैसे कोई निशानेबाज सटीक निशाना लगाता है वैसे ही जब हम हमारे विषय गणित में लगाव उत्पन्न करते हैं तो निश्चित रूप से उसमें सफलता मिलती है। विद्यार्थियों की रुचि से पता चल जाता है कि वाकई में उसकी गणित पढ़ने में रुचि है अथवा नहीं।विद्यार्थियों की साथ संगत व वातावरण के प्रभाव से फिल्मी चरित्रों, फिल्मों इत्यादि में रुचि होती है तो उन्हें फिल्म का पूर्ण कथानक याद रहता है।यदि उनकी रुचि गणित विषय में होगी तो गणित विषय के सवाल हल भी इसी निपुणता के साथ कर सकते हैं।

(4.)एकाग्रचित्त होना (Concentrate):

  • बहुत से विद्यार्थी गणित की पुस्तक लेकर बैठ भी जाते हैं और उसका अध्ययन करने की कोशिश भी करते हैं परन्तु मन के उच्चाटन की वजह से उसे हल नहीं कर पाते हैं।जब तक मन चंचल रहता है तब तक गणित का अध्ययन करना भी मुश्किल है।
  • बार-बार गणित का अभ्यास करने से एकाग्रता सधने लगती है।साथ ही गणित में अच्छे अंक प्राप्त करने और गणित के आधार पर कैरियर बनने की कल्पना करके तथा गणित के सवालों को हल करके आनंद की अनुभूति करके एकाग्रता का अभ्यास किया जा सकता है।धीरे-धीरे अभ्यास करने और अन्य विषयों से ध्यान हटाने पर मन वश में हो जाता है।गणित विषय का बार-बार अध्ययन करने से एकाग्रता बनी रह सकती है।इसके अलावा ध्यान तथा योग से भी मन को एकाग्र किया जा सकता है।ध्यान करते समय भ्रूमध्य (आज्ञाचक्र) में प्रकाशस्वरूप ज्योति,ऊँ अथवा अपने इष्टदेव का ध्यान किया जा सकता है।यदि मन में बुरे विचार आए तो उनको कंपनी (Company) न दें।जब लम्बे समय तक ध्यान बढ़ाने पर एकाग्रता में सफलता मिलने लगती है।इन उपायों को नियमित रूप से तथा लगातार करते रहने से मन को वश में किया जा सकता है।प्रत्येक विद्यार्थी की स्थिति,संकल्पशक्ति के आधार पर इसमें कम या अधिक समय लग सकता है परंतु धैर्यपूर्वक करते रहने से इसमें सफलता मिल जाती है।

(5.)इंद्रिय निग्रह (sense control):

  • इन्द्रियों को बलपूर्वक नियंत्रित करने से वे हमसे ही ताकत पाकर ओर ताकतवर बन जाती है।इसके बजाय इंद्रियों का सदुपयोग करना इंद्रियों का निग्रह करना है।जैसे गणित के सवालों को हल करना,गणित का अध्ययन करना तथा गणित के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखना इन्द्रियों का सदुपयोग करना है।गणित विषय को नकारात्मक दृष्टि से देखना,गणित विषय के सवालों को हल करने में रुचि न लेना,गणित विषय में बोरियत महसूस करना,गणित विषय में दोष दर्शन करना इंद्रियों का दुरुपयोग करना है।इसके फलस्वरूप बलपूर्वक,जबरदस्ती गणित का अध्ययन करने की कोशिश करते हैं तो गणित से अरुचि ओर अधिक होती जाती है फलतः हम गणित विषय को बिल्कुल पसंद नहीं करते हैं।इंद्रियों पर विवेकपूर्वक नियंत्रण करना इन्द्रिय निग्रह है।गणित विषय अच्छे अंक प्राप्त करने वाला विषय है,यह उन्नति का साधन है तथा केरियर के निर्माण में योगदान दे सकता है इस प्रकार विवेकपूर्वक विचार करने से गणित के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का निर्माण किया जा सकता है।
  • इन्द्रियों को दूसरे तरीके से इस तरह व्यवहार किया जा सकता है।जब आत्मा द्वारा बुद्धि निर्देशित (प्रत्येक कार्य में) होती है,बुद्धि द्वारा मन निर्देशित होता है,मन द्वारा इंद्रिया निर्देशित होती है और इंद्रिय विषयों में नहीं फँसती है (पदार्थों का भोग करने में) तो यह इंद्रियों का निग्रह करना हुआ।यदि विषयों में इन्द्रियाँ लिप्त हो जाती हैं,इन्द्रियाँ मन को तथा मन सद्बुद्धि को अपने अनुसार चलाता है और बुद्धि अपने निर्णय आत्मा पर थोपने का प्रयास करती है तो यह इंद्रियों का दुरुपयोग करना, इन्द्रियों का दमन करना हुआ।

(6.)सदाचरण (good moral conduct):

  • गणित केवल सवाल निकालने,गणित की समस्याओं का हल करने का ही विषय नहीं है बल्कि इस विषय को हल करने से विशेष प्रकार की मानसिक शक्तियों का विकास होता है।विद्या द्वारा अथवा गणित शिक्षा से जो भी ज्ञान अर्जित किया जाता है जब तक उसका व्यावहारिक जीवन में पालन नहीं किया जाता है तब तक वह हमारे जीवन का अंग नहीं बनता है और न ही हम उसका सदुपयोग कर सकते हैं।
  • जैसे बट्टा (Discount) का पाठ पढ़ा है तो व्यावहारिक रूप में हम बाजार से कोई पुस्तक खरीदते समय जब हम उस पर दुकानदार द्वारा दिए गए बट्टे की गणना करते हैं तो हमारे जीवन का अंग बन जाता है।
    यह आवश्यक नहीं है कि उच्च गणित की बहुत सी बातों का व्यावहारिक जीवन में पालन संभव हो परन्तु उच्च गणित को हल करने पर विद्यार्थियों की चिन्तन-मनन, तर्कशक्ति, बौद्धिक क्षमता का विकास होता है।चिन्तन-मनन, तर्कशक्ति, बौद्धिक क्षमता का हमारे जीवन में तथा जाॅब करते समय आवश्यकता होती है तथा वहाँ इसका उपयोग करना चाहिए।

7.दृढ़ संकल्पशक्ति (Determination):

  • संकल्प शक्ति का अर्थ होता है जहां कोई विकल्प नहीं हो।मन का एकाग्र होना।कई बार हम विकल्प को ही संकल्प समझ लेते हैं।जैसे विद्यार्थी यह सोचे कि आज इस प्रश्नावली को पूरी करके रहूंगा तब मन में यह विचार भी आता है कि इस प्रश्नावली को बाद में किसी दिन हल कर लेंगे।परिणामस्वरुप संकल्पशक्ति कमजोर होने लगती है।मन में कोई अन्य विचार ही न हो केवल यह विचार ही हो कि इस प्रश्नावली को हल करते रहूंगा।ऐसी स्थिति काम,क्रोध,लोभ आदि विकारों से मुक्त होने पर प्राप्त होती है।संकल्प शक्ति के बल पर गणित शिक्षा की हर कमजोरी को दूर किया जा सकता है। सभी महान कार्य संकल्पशक्ति के बल पर ही सफल हुए हैं।किसी भी कार्य को पूर्ण करने के लिए धन की आवश्यकता कम पड़ती है पर संकल्पशक्ति ही उसे पूर्ण करती है।

(8.)कठोर परिश्रम (Hard work):

  • युवा काल कठिन परिश्रम,तप और संयम का होता है।विद्या प्राप्त करना एक कठोर तपस्या है और कठोर तपस्या के लिए कठिन परिश्रम करना पहली शर्त है।जो विद्यार्थी सुख-सुविधाओं का भोग करते हैं वे विद्या प्राप्त नहीं कर सकते।क्योंकि विद्या प्राप्त करना और सुख सुविधाओं का भोग करना दोनों में से एक ही चुना जा सकता है,दोनों को एक साथ नहीं किया जा सकता है।

(9.)समय का सदुपयोग (The best use of time):

  • संसार की सबसे अमूल्य चीज है समय जो किसी की प्रतीक्षा नहीं करता है।जिस विद्यार्थी ने समय का सदुपयोग किया है उसका जीवन सफल हो जाता है।संसार की हर वस्तु प्राप्त की जा सकती है परंतु समय को गंवाने पर पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता है।विद्यार्थी काल को फैशनपरस्ती, मटरगश्ती, मौजमस्ती,घूमने फिरने में व्यतीत करने पर विद्या प्राप्त नहीं की जा सकती है।एकबार विद्यार्थी जीवन हाथ से निकल गया तो पुनः यह समय प्राप्त नहीं किया जा सकता है।कहावत है कि “मानुस नहीं बलवान है समय बड़ा बलवान,कागा लूटी गोपिका वही अर्जुन वही बाण।
  • समय का सदुपयोग करना जितना जरूरी है उतना ही जरूरी है कि प्रत्येक कार्य ठीक समय पर करना।जैसे सुबह-शाम घर पर अध्ययन करने का समय है तथा दिन में स्कूल-कॉलेज में अधययन करने का समय है।अब यदि विद्यार्थी रात्रि को 12 बजे अध्ययन करेगा तो उसकी दिनचर्या अस्तव्यस्त हो जाएगी और जीवन में अनुशासन कायम नहीं होगा।

(10.)विनम्रता (politeness):

  • विद्यार्थी का अगला गुण है कि विद्या प्राप्त करने पर उसमें विनम्रता आनी चाहिए।जैसे पेड़ पर फल लगने पर वृक्ष झुक जाता है इसी प्रकार विद्या प्राप्त करने पर विद्यार्थी में विनम्रता आनी ही चाहिए।
  • विद्या से मनुष्य में विनम्रता आती है,विनम्रता से योग्यता व दक्षता प्राप्त होती है,योग्यता व दक्षता से धन प्राप्त होता है,धन से धर्म होता है और धर्म से सुख मिलता है।इस प्रकार विद्या तथा धर्म भौतिक व आध्यात्मिक जीवन में उपयोगी है जबकि धन भौतिक जीवन (सांसारिक जीवन) के लिए उपयोगी है।आध्यात्मिक जीवन का बल धर्म है और सांसारिक जीवन का बल धन है।

(11.)करियर बनाने की तीव्र उत्कण्ठा (A strong desire to build a career):

  • विद्यार्थी को अपना करियर का निर्माण करने के लिए नकारात्मक दृष्टिकोण त्यागकर आशावादी दृष्टिकोण रखना चाहिए।यदि नौकरी न मिले तो अपना खुद का व्यवसाय करना चाहिए।उचित कैरियर का चुनाव ठीक से सोच समझ कर लेना चाहिए।
  • हर विद्यार्थी अपना करियर बनाना चाहता है परन्तु केवल चाहने से करियर अच्छा नहीं बनता है।अपने अन्दर छुपी हुई प्रतिभा को पहचानकर उसे उभारना, निखारना और पल्लवित करना जरूरी है।प्रतिभा के अनुसार अपने करियर का चुनाव करके उसको पूर्ण करने के लिए पूरी ताकत लगा दें।लक्ष्य प्राप्ति के अलावा फालतू कार्यों में रुचि न ले और न ही आलोचनाओं से डरें।अपने लक्ष्य की प्राप्ति में जुटे रहें और प्रयत्न करते रहें।
  • कोई भी व्यक्ति केवल जन्म से योग्य और महान् नहीं बन जाता है बल्कि सुदृढ़ संकल्पशक्ति के साथ पुरुषार्थ करके आगे बढ़ता है।असफलता मिले तो असफलता के कारणों को ढूँढ़े और उन्हें दूर करें।आज के विद्यार्थी स्थिरचित्त नहीं रहते हैं इसलिए चंचल मन के कारण आज कुछ सोचते हैं और कल विपरीत सोचने लगते है और करते हैं।मनुष्य की एकाग्रता के बिना करियर बनाना तो क्या आप छोटा से छोटा कार्य नहीं कर सकते हैं।
  • आज की पाश्चात्य संस्कृति और उपभोक्तावादी संस्कृति के प्रभाव से विद्यार्थी जल्दी से जल्दी धन कमाना चाहते हैं।इसके लिए अपने अच्छे चाल-चरित्र और सिद्धान्तों को छोड़कर कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाते हैं।याद रखें गलत काम का नतीजा ही होता है चाहे देर से ही क्यों न मिले।

(12.)आत्मविश्वास (Self-confidence):

  • आत्मविश्वास अर्थात् अपने आप पर पूर्ण विश्वास रखनेवाला समझता है कि वह अकेला नहीं है बल्कि उसके साथ भगवान है,भगवान की शक्ति है।भगवान भी उसी की मदद करता है जो अपनी मदद आप करते हैं।लेकिन ऐसा तभी ही हो सकता है जबकि वह अपने आप पर, भगवान की शक्ति आत्मा पर अटूट विश्वास रखता है।सभी गुणों के होते हुए भी यदि भगवान् में श्रद्धा के बिना कोई कार्य सिद्ध नहीं हो सकता है।संसार के सारे कार्य भगवान् की शक्ति,भगवान् के विधि-विधान के बिना सम्भव नहीं है।श्रद्धा तीन प्रकार की होती है:भगवान् में श्रद्धा, गुरु में श्रद्धा और आत्म श्रद्धा।इन तीनों में श्रद्धा से ही काम सिद्ध होता है।

(13.)विद्यार्थी आठ अवगुणों से दूर रहे (Students stay away from eight vices),अध्ययन में बाधक (An Obstacle to learning):

  • चाणक्य नीति में कहा है कि:
  • “कामं क्रोधं तथा लोभं स्वादं श्रृंगिरे कोतुके।
    अतिनिद्राअतिसेवे च विद्यार्थी ह्यष्ट वर्जयेत।।”
  • अर्थात् विद्यार्थी को चाहिए कि वह काम,क्रोध,लोभ, स्वाद, श्रृंगार,खेल-तमाशे, बहुत अधिक सोना और अत्यधिक सेवा कार्य करना:इन आठों कार्यों को न करे।
  • श्रीमद्भगवद्गीता में भी कहा है कि:
    त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मन:।
    काम:क्रोधस्तथा लोभ:तस्मादेतत्त्रयं त्येज।।(अध्याय 16)
  • अर्थात् काम,क्रोध एवं लोभ ये तीनों तीन प्रकार के नरकद्वार एवं आत्मज्ञान के नाशक तथा मनुष्य का पतन करनेवाले है इसलिए इन तीनों का त्याग कर देना चाहिए।
  • इनकी गिरफ्त में आनेवाले विद्यार्थी को इन्द्रिय सुख और भौतिक सुख ही अच्छे लगते हैं।खाना,पीना और मौज करना।इनका सेवन तो पशु-पक्षी भी करते हैं।फिर हमारे और पशु-पक्षियों में अन्तर क्या हुआ।इसलिए ये तीनों अधोगति में गिरानेवाले हैं।
  • लाभ के बारे में योगवाशिष्ठ में कहा है कि यशस्वियों के निर्मल यश को और गुणवानों के प्रशंसनीय गुणों को तनिक सा लोभ वैसे ही नष्ट कर देता है जैसे श्वित्र (सफेद दाग) छोटा सा धब्बा रूपवानों के प्रिय रूप को नष्ट कर देता है।
    स्वाद का चस्का लगने पर स्वास्थ्य से ज्यादा स्वाद को महत्त्व देता है जो स्वास्थ्य को नष्ट करता है।
  • श्रृंगार:फैशनपरस्ती, मटरगश्ती और विलासी प्रकृति का होने के इच्छुक विद्यार्थी रोमांस और सम्भोग में रुचि लेगा तो विद्याध्ययन का कार्य चौपट हो जाएगा।
  • कौतुक:खेल-तमाशे, टीवी, फिल्मों में रुचि लेने से विद्यार्थी का मूल्यवान समय नष्ट हो जाएगा और विद्याध्ययन नहीं कर सकेगा।
  • अत्यधिक सोना और अतिसेवा का कार्य करना भी विद्यार्थी के लिए समय नष्ट करनेवाले काम है।अतः विद्यार्थी को अपना जीवन श्रेष्ठ,समुन्नत,सफल करने के लिए इन आठ दुर्गुणों से बचकर रहना चाहिए।
  • लेकिन देखा जाता है कि विद्यार्थी इन आठ गुणों का ही नहीं बल्कि आधुनिक युग में जितने भी पतन के मार्ग हैं उनमें लगे रहते हैं।विद्या प्राप्ति का कार्य चौपट हो जाता है।परीक्षा के समय तथा जीवन में आनेवाली समस्याओं का सामना करने में असमर्थ रहते हैं और फिर गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में आदर्श गणित विद्यार्थी के गुण (Qualities of Ideal Mathematics Student),आदर्श गणित के छात्र के गुण (Ideal Mathematics Student’s Qualities) के बारे में बताया गया है।

(14.)गणित देवता (हास्य-व्यंग्य) [The God of Mathematics (Humor-Satire)]:

  • पता नहीं क्यों छात्र-छात्राओं को गणित की परीक्षा से डर लगता है।मुझे तो गणित देवता बहुत प्यारा लगता है।उसका चित्र और चरित्र भी।शायद सोच भी नहीं सकते कि गणित देवता की कितनी उपयोगिता है।उसके बिना किसी को नौकरी नहीं मिल सकती है।उसी तरह जैसे गणित के बिना कोई छात्र आगे नहीं पढ़ सकता।यदि आपके जीवन में गणित नहीं होगा तो आपको लंगड़ाकर चलना पड़ेगा जैसे तैसे बैसाखी के सहारे से चलेंगे और फिर थककर बैठ जाएंगे।
  • गणित देवता के बिना देश की अर्थव्यवस्था,देश की अर्थव्यवस्था के आंकड़े चौपट होने से देश आगे नहीं बढ़ सकता है।यह कोई ट्रिक या जादूमंतर नहीं है बल्कि सोलह आने सच है कि देश ज्यादा दूर तक नहीं चल सकता है।गणित देवता देश को चलाने का पर्याय बन गया है।देश की अर्थव्यवस्था खराब न हो जाए इसलिए लोगों को इनकम टैक्स की गणित देवता रूपी स्लेब (Slabe) से लोगों को जागरूक करते हैं।
  • यहां तक की रसोईघर में नमक-मिर्च के अनुपात का ध्यान रखना पड़ता है जिससे मुंह का जायका बिगड़े नहीं।
    मतलब यह कि गणित देवता के बगैर गुजारा नहीं।इसमे भी कोई शक सुबह नहीं की जा सकती कि वह आदमी बहुत समझदार और दूरदर्शी था जिसने शून्य की खोज की।किसी ओर संख्या में यह बात पैदा नहीं हो सकती है।इस शून्य का तो क्या कहना। स्वयं की कोई इज्जत नहीं है और दूसरों की इज्जत बढ़ा देता है।इसमें कोई ऐब नहीं है।भगवान को भी शून्य पसंद है।किसी भी दार्शनिक,गणितज्ञ से भगवान का पता पूछो तो सीधा शून्य की तरफ इशारा कर देता है।जो शून्य के चक्कर में फँस गया वह घनचक्कर हो जाता है।लोगों की तमाम उम्मीदें इस शून्य में आकर दम तोड़ देती है।यही असली जादू है गणित देवता का।लेकिन फिर भी यह उन्हें मरने नहीं देता।संसार के सबसे पावरफुल नेताओं को भी इस गणित देवता पर एटम बम से ज्यादा भरोसा है।इस प्रकार गणित देवता समाज और देश को एक सूत्र में बांधे हुए हैं।गणित देवता न हो तो संसार में प्रलय आ जाए, हर तरफ उथल-पुथल मच जाए और हर आदमी का जीना हराम हो जाए।
    कोई छात्र कमजोर है तो उसमें खुश और कोई होशियार है तो उसमें ख़ुश।कम से कम देश टूटने की नौबत तो नहीं है।सब इसी गणित देवता की मेहरबानी है।
  • अगर एक बार देश में अशांति फैल जाए तो यह गणित देवता उस अशांति को भी कंट्रोल कर लेगा।
  • बड़े से बड़े लोग गणित देवता की शक्ति के आगे सिर झुकाते हैं।गणित देवता के बिना पत्ता भी नहीं हिल सकता है।कोई आईएएस,बाबू,इनकम टैक्स ऑफिसर,इंजीनियर इत्यादि में गणित देवता को राजी किए बगैर नहीं बन सकता है।कई बार छात्र-छात्राओं को भ्रम हो जाता है कि तुम्हें किनारे करके मिनिस्टर,चीफ मिनिस्टर,प्राइम मिनिस्टर के जरिए भी उनका काम हो सकता है।मगर दस-पांच चक्कर में उनका भ्रम दूर हो जाता है और उनके दिमाग में यह बात बैठ जाती है कि इस दुनिया के तुम्ही राजा हो।ठीक बात है अगर तुम्हारी लगाम न हो तो सब तरफ अफरा-तफरी मच जाए।गणित देवता के आगे सब अपनी चौकड़ी भूल जाते हैं।
  • क्या रखा है बेकार की उछलकूद में।दुनिया कोई आज की नहीं है।वह अनादि अनंत है।सदा से ऐसी है और सदा ऐसे ही रहेगी।कुछ छात्र हमेशा असंतुष्ट रहते हैं।यही उनका काम है।इससे घबराने की कोई जरूरत नहीं है।ऐसे बहुत से सुधारक आए जो तुम्हें निकालना चाहते थे परंतु अपनी खिचड़ी पकाकर चले गए।मैं तो कहता हूं छात्रों का ही नहीं भगवान का भी काम गणित देवता के बगैर नहीं चल सकता है।इतनी बड़ी सृष्टि की गणित लगाना और चलाना कोई खेल नहीं है।चलाना मतलब ढंग से चलाना।इस तरह की हर चीज अपने ठीक ठिकाने पर रहे,कहीं कोई गड़बड़ न हो।
    छात्र-छात्राओं को अगर कंट्रोल कर रखा है तो इसी गणित देवता ने।वरना दुनिया में अफरा-तफरी मच जाए।मेरा विश्वास है कि यह सब कमाल इसी गणित देवता का है।
  • सारे ग्रह नक्षत्र गोल है और सभी ग्रह नक्षत्र गोल चक्कर में घूम रहे हैं।वह सब गणित देवता की शक्ति शून्य का ही कमाल है।कुल मिलाकर यदि छात्र छात्राओं को अपना यह लोक (वर्तमान जीवन) और परलोक (आगामी जीवन) सुधारना है तो उसी का नाम है गणित देवता।गणितं शरणं गच्छामि,शून्यं शरणं गच्छामि,गणित पुस्तकं शरणं गच्छामि.

2.आदर्श गणित विद्यार्थी के गुण (Qualities of Ideal Mathematics Student),आदर्श गणित के छात्र के गुण (Ideal Mathematics Student’s Qualities) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.गणितीय रूप से होनहार छात्र के पहचान कैसे करें? (How to identify mathematically promising students?):

उत्तर:गणितीय रूप से होनहार छात्रों की पहचान करने के तरीकों में शामिल हैं:
पैटर्न नोट और सामान्यीकृत (patterns noted and generalized).
भविष्यवाणियां की गई और सत्यापित की गईं (predictions made and verified)।
दिलचस्प संबंधित समस्याओं को प्रस्तुत किया और जांच की (interesting related problems posed and investigated)।
रचनात्मकता के उपाय- प्रवाह (विभिन्न समाधानों की संख्या) लचीलापन (समाधानों की विविधता) मौलिकता (समाधानों की विशिष्टता) (measures of creativity— fluency (number of different solutions) flexibility (variety of solutions) originality (uniqueness of solutions))

प्रश्न:2.एक सफल गणित छात्र क्या करता है? (What are 3 things a successful math student does?):

उत्तर:एक सफल गणित छात्र होने के लिए शीर्ष 10 युक्तियाँ
सकारात्मक दृष्टिकोण रखें।
कक्षा में सक्रिय रूप से लगे रहें,नोट्स लें और प्रश्न पूछें।
समय पर असाइन किए गए होमवर्क को पूरा करें, न केवल जब इसे एकत्र किया जाता है।
सीखने के समर्थन के लिए प्रशिक्षक कार्यालय के घंटे,गणित केंद्र और सहकर्मी ट्यूशन का उपयोग करें (Use instructor office hours,the Math Center and peer tutoring for learning support)।

प्रश्न:3.एक अच्छे गणितज्ञ के तीन गुण क्या हैं? (What are 3 qualities of a good mathematician?):

उत्तर:गणितीय शब्दावली की समझ,महत्वपूर्ण अवधारणाओं और गणित के भीतर कनेक्शन बनाने की क्षमता।धाराप्रवाह ज्ञान और संख्या तथ्यों और संख्या प्रणाली की याद।स्वतंत्र रूप से सोचने और चुनौतियों का सामना करने और गलतियों से सीखने पर दृढ़ रहने की क्षमता।

प्रश्न:4.गणित के छात्र के रूप में आपकी ताकत क्या है? (What are your strengths as a math student?):

उत्तर:गणित और तर्क शक्ति
मजबूत संख्या भावना है,जैसे कि यह जानना कि कौन सा बड़ा है और कौन सा छोटा है।
प्रकृति और संख्याओं में पैटर्न को देखता और समझता है।
गणित के तथ्यों को याद करता है (जैसे 5 + 4=9)
मानसिक गणित कर सकते हैं (“अपने सिर में”)
वास्तविक दुनिया में गणित अवधारणाओं का उपयोग करता है (जैसे एक नुस्खा दोगुना करना (like doubling a recipe))

प्रश्न:5.गणित का अध्ययन करने से क्या कौशल विकसित होता है? (What skills does studying mathematics develop?):

उत्तर:आलोचनात्मक सोच (critical thinking)।
समस्या को हल करना (problem solving)।
विश्लेषणात्मक सोच (analytical thinking)।
मात्रात्मक तर्क (quantitative reasoning)।
सटीक और जटिल विचारों में हेरफेर करने की क्षमता (ability to manipulate precise and intricate ideas)।
तार्किक तर्कों का निर्माण और अतार्किक तर्कों को उजागर करें (construct logical arguments and expose illogical arguments)।
संचार।
समय प्रबंधन।

प्रश्न:6.एक अच्छे गणित स्पष्टीकरण की कुछ विशेषताएं क्या हैं? (What are some characteristics of a good math explanation?):

उत्तर:मात्राओं का नामकरण और उन मात्राओं को इस तरह से क्यों नामित किया जाता है, इसे सही ठहराना; वर्ग स्वीकृत विधियों का उपयोग और उन विधियों के लिए एक स्पष्टीकरण क्यों उपयुक्त हैं; छवियों के लिए एक अपील जो संबंधित है कि तरीके वास्तव में मात्राओं को कैसे संशोधित कर रहे हैं; •लक्ष्य कथन जो विधियों के उद्देश्यों की व्याख्या करते हैं।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा आदर्श गणित विद्यार्थी के गुण (Qualities of Ideal Mathematics Student),आदर्श गणित के छात्र के गुण (Ideal Mathematics Student’s Qualities) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Qualities of Ideal Mathematics Student

आदर्श गणित विद्यार्थी के गुण
(Qualities of Ideal Mathematics Student)

Qualities of Ideal Mathematics Student

आदर्श गणित विद्यार्थी के गुण (Qualities of Ideal Mathematics Student)
मुख्य रूप से शिक्षकों के प्रति श्रद्धा,एकाग्रता,इंद्रिय निग्रह,विद्या
प्राप्ति में रुचि,केरियर बनाने की तीव्र उत्कंठा,दृढ़ संकल्प शक्ति,आत्मविश्वास
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