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7 Best Tips for Mental Mathematics

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1.मानसिक गणित के लिए 7 बेहतरीन टिप्स (7 Best Tips for Mental Mathematics),मानसिक गणित के लाभ (Benefits of Mental Mathematics):

  • मानसिक गणित के लिए 7 बेहतरीन टिप्स (7 Best Tips for Mental Mathematics)पर अमल करके गणित में महारत हासिल कर सकते हैं।गणित अमूर्त प्रत्ययों,तथ्यों,सिद्धान्तों,सूत्रों, साध्यों (Theorems),संक्रियाओं का विषय है, इसलिए गणित विषय को समझना और उसमें मास्टरी हासिल करना टेढ़ी खीर समझा जाता है।गणित में सूत्रों तथा विषय-वस्तु को केवल याद करके ही आगे नहीं बढ़ा जा सकता है बल्कि इसमें गम्भीर चिन्तन-मनन,तर्कशक्ति,बौद्धिक कौशल, निर्णय शक्ति,कठिन परिश्रम,अध्यवसाय,सतत अभ्यास की आवश्यकता होती है।लेकिन आप इस आर्टिकल में बताए गए टिप्स को फोलो करेंगे तो निश्चित रूप से आपके लिए गणित विषय सरल हो जाएगा।
  • सर्वप्रथम यह समझना आवश्यक है कि मानसिक गणित (Mental Mathematics),मौखिक गणित (Oral Mathematics) तथा लिखित गणित (Written Mathematics) में क्या अन्तर है?वैसे गणित विषय में महारत हासिल करने के लिए इन तीनों में ही महारत हासिल करना आवश्यक है क्योंकि ये तीनों आपस में एक-दूसरे के पूरक है।
  • लिखित गणित (Written Mathematics) से तात्पर्य है कि जब गणित की समस्याओं,सवालों, साध्यों तथा विभिन्न क्रियाओं को कागज,पेन की सहायता से लिखकर हल किया जाता है।
  • मौखिक गणित (Oral Mathematics) से तात्पर्य है कि छात्र-छात्राएँ गणित की साधारण क्रियाओं जैसे जोड़,गुणा,भाग,बाकी इत्यादि को बिना कागज-पेन की सहायता के करता है।
  • मानसिक गणित तथा मौखिक गणित में गुणात्मक अन्तर है।अर्थात् मानसिक गणित भी बिना कागज-पेन की सहायता से किया जाता है।परन्तु मानसिक गणित में गणना कार्य का स्तर उच्च होता है।अर्थात् गणित की जटिल क्रियाओं,सवालों तथा सवालों में कई स्टेप्स की गणना को मानसिक स्तर पर किया जाता है।
  • मानसिक गणित में उच्च स्तर की दक्षता,चिन्तन-मनन,एकाग्रता,तर्क-शक्ति इत्यादि की आवश्यकता होती है।परन्तु यह योग्यता एकाएक नहीं आती है बल्कि छात्र-छात्राएँ धीरे-धीरे प्राप्त करता है।प्रारम्भ में लिखित गणित करते-करते,मौखिक गणित का अभ्यास किया जाता है।जब लिखित व मौखिक गणित पर छात्र-छात्राओं की पकड़ मजबूत हो जाती है तो मानसिक गणित करने की योग्यता प्राप्त हो जाती है।मानसिक गणित में गणित के प्रत्ययों,संकल्पनाओं,सिद्धान्तों तथा सवालों की स्टेप्स को केवल गणित का अभ्यास करके हासिल नहीं किया जा सकता है।इसके लिए छात्र-छात्राओं में उच्च बौद्धिक कौशल,चिंतन,एकाग्रता को साधने की जरूरत होती है यानी मानसिक गणित यांत्रिक गणना नहीं है।प्रखर बुद्धि वाले छात्र-छात्राएं अनेक पदों एवं चरणों को बिना लिखे मानसिक स्तर पर हल कर लेते हैं।वे मानसिक गणित में जल्दी ही दक्षता हासिल कर लेते हैं।
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(1.)अंकगणित में मानसिक गणना (Mental Calculation in Arithmetic):

  • प्रारंभिक कक्षाओं में जोड़,बाकी,गुणा,भाग सिखाए जाते हैं।वे संख्याओं से ही संबंधित होते हैं।इसलिए गणित में बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा अंकगणित से ही प्रारंभ होती है।नोटबुक पर लिखकर सिखाया जाता है उससे यंत्रवत् गणित का हल करना ही सीखा जाता है।
  • परंतु संख्यात्मक गणनाओं जैसे प्रतिशत,अनुपात-समानुपात,लाभ-हानि,साधारण ब्याज,बट्टा आदि की गणना करने के लिए विचार करना होता है।हम बाजार से पुस्तक खरीद कर लाते हैं तो दुकानदार उस पर बट्टा देता है उसकी गणना हम मानसिक रूप से करते हैं।इस प्रकार की गणना करने से हमारे मस्तिष्क का विकास होता है।
  • दैनिक जीवन में हमारे समक्ष ऐसे कई अवसर आते हैं जबकि हमें मानसिक गणना करने की आवश्यकता होती है।जैसे हमारे घर पर कारीगर-मजदूर मकान का निर्माण कार्य करते हैं तो उनकी मजदूरी की गणना करते हैं।बाजार से सब्जी तथा अन्य वस्तुएं व घरेलू सामान खरीदते हैं तो मानसिक गणना करते हैं।यदि हमसे कोई इस प्रकार की गणना करवाई जाती है तो हमें रुचिपूर्वक उसकी मानसिक गणना करनी चाहिए।
  • बस का किराया देकर बाकी पैसे लेते समय,दूध का हिसाब करते समय,बिजली के बिल का भुगतान करते समय बाकी पैसे लेना,खेलते समय स्कोर की मानसिक गणना करनी होती है।
  • इस प्रकार छात्र-छात्राओं की अपनी पाठ्य-पुस्तक में गणित के सवालों को हल करने में ही मानसिक गणना का कार्य नहीं करना पड़ता बल्कि उनके दैनिक जीवन में भी ऐसे अनेक अवसर आते हैं जिसमें उन्हें मानसिक गणना करनी होती है। विद्यार्थियों को इस प्रकार की अंकगणितीय मानसिक गणनाओं को रुचिपूर्वक हल करना चाहिए।इससे उनमें गणित को शीघ्रता से हल करने की प्रवृत्ति के साथ-साथ आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

(2.)बीजगणित में मानसिक गणना (Mental Calculation in Algebra):

  • बीजगणित अंकगणित का ही प्रसार है।अंकगणित में जहां संख्याओं,अंकों का प्रयोग होता है वही बीजगणित में अक्षरों का प्रयोग होता है। छात्र-छात्राओं को ध्यान रखना चाहिए कि अंकगणित में संख्याओं,जोड़,बाकी,गुणा,भाग इत्यादि को मानसिक रूप से हल नहीं कर सकते तो बीजगणित में मानसिक रूप से हल करना ओर जटिल कार्य है।क्योंकि अंकगणित ही बीजगणित का आधार है।
  • बीजगणित के अध्ययन में सूत्रों को विभिन्न सवालों को हल करने हेतु काम में लेना पड़ता है।सूत्रों की सहायता से लंबे-लंबे तथा कठिन से कठिन सवालों को तत्काल तथा शीघ्रता से तो हल किया ही जा सकता है साथ ही उन्हें मानसिक रूप से भी हल किया जा सकता है।
  • बीजगणित में कई सवालों में अंकगणितीय स्टेप्स भी आती है जिनको हल करके आगे बढ़ जाता है।बीजगणित को मानसिक रूप से हल करने से छात्र-छात्राओं के चिंतन करने की क्षमता का विकास होता है।बीजगणित में मानसिक गणना से छात्र-छात्राओं में तर्क,समस्या को हल करने की क्षमता,गणितीय संरचनाओं का जीवन की स्थितियों में अनुप्रयोग आदि क्षमताओं का विकास होता है।
  • समुच्चय सिद्धांत तथा समुच्चय भाषा,गुणनखंड,समीकरणों,असमिकाओं इत्यादि में काफी गणनाएँ मानसिक स्तर पर हल की जा सकती हैं।छात्र-छात्राओं को लिखित गणित की प्रवृत्ति को छोड़कर मानसिक रूप से हल करने पर ध्यान देना चाहिए।छात्र-छात्राओं को यह बात समझ लेनी चाहिए कि बीजगणित द्वारा गणित की समस्याओं को शीघ्रतापूर्वक तभी हल किया जा सकता है जबकि वे मानसिक रूप से गणना करने में दक्ष हो सकेंगे।
  • बीजगणित में विभिन्न संक्रियाओं,प्रत्ययों,सिद्धांतों को मानसिक रूप से हल करने से गूढ़ एवं सूक्ष्म चिन्तन शक्ति एवं तर्क करने की योग्यता का विकास होता है।

(3.)ज्यामिति में मानसिक गणना (Mental Calculation in Geometry):

  • ज्यामिति के प्रमेयों (साध्यों) (Theorems) के अभ्यास कार्य तो बिना मस्तिष्क का उपयोग किए तथा मानसिक गणना के बिना किया ही नहीं जा सकता है।ज्यामिति में प्रमेयों को सिद्ध करते समय अर्थात् उपपत्ति लिखने में अनेक प्रत्ययों को लिखने के लिए मानसिक रूप से विचार,चिंतन करने की आवश्यकता होती है।ज्यामिति के प्रमेयों का विश्लेषण करते समय मानसिक गणित का प्रयोग होता है तथा अनेक चरणों को बिना लिखे मानसिक स्तर पर स्पष्ट करना होता है।
  • ज्यामिति के प्रमेयों,साध्यों को तथा समस्याओं को हल करते समय अध्यापक को कक्षा में छात्र-छात्राओं को पर्याप्त अवसर देना चाहिए जिससे छात्र-छात्राओं को सोचने,विचार करने की आदत पड़ सके।यदि छात्र-छात्राएं विचार करने में असमर्थ रहते हैं,त्रुटि करते हैं तो अध्यापक को ऐसी टेक्निक बतानी चाहिए तथा उन्हें प्रेरित करना चाहिए जिससे वे मस्तिष्क से विचार करने के लिए प्रोत्साहित हो सके।
  • उच्च गणित के अध्ययन करने तथा आगे की कक्षाओं में मानसिक गणित में दक्षता आवश्यक है। क्योंकि उच्च कक्षाओं में प्रत्येक स्टेप को लिखने जितना समय उपलब्ध नहीं होता है।प्राध्यापक के लिए भी उच्च कक्षाओं में प्रत्येक छोटी-छोटी बातों को लिखकर समझाना संभव नहीं होता है।इसलिए विभिन्न प्रमेयों को पढ़ने के बाद छात्र-छात्राओं को उस पर आधारित अभ्यास को स्वयं हल करना चाहिए तथा उसमें आने वाली स्टेप्स को मानसिक रूप से हल करना चाहिए।
  • वस्तुतः मानसिक गणित के लिए पृथक से कोई न तो पुस्तक है और न ही कक्षाओं की गणित पाठ्य-पुस्तकों में इसके लिए कोई दिशानिर्देश हैं। छात्र-छात्राओं को या तो स्वयं मानसिक गणित को हल करने का प्रयास करना चाहिए।अध्यापक भी इसमें उनकी सहायता कर सकते हैं।

(4.)ओलंपियाड तथा बिक्स की गणित प्रतियोगिता परीक्षाओं में मानसिक गणित (Mental Mathematics in Olympiad and BRICS Math Competition Exams):

  • इंटरनेशनल मैथमेटिक्स ओलंपियाड तथा ब्रिक्स में गणित में प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं का चयन करने तथा प्रोत्साहन देने हेतु कॉम्पिटिशन आयोजित किया जाता है।इस प्रकार नेशनल तथा इंटरनेशनल अन्य गणित प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती है।इन परीक्षाओं में उच्च स्तर की गणित समस्याएं एवं सवाल पूछे जाते हैं। इसलिए जो छात्र-छात्राएं इनमें भाग लेते हैं उनको मानसिक रूप से ही गणना करनी होती है।
  • इन परीक्षाओं में चयन होने पर दोहरा लाभ होता है। पहला फायदा तो यही है कि चयन होने पर अंतरराष्ट्रीय पहचान बनती है तथा उनसे बहुत से बेनिफिट प्राप्त होते हैं।यदि चयन नहीं भी होता है तो इन परीक्षाओं को देने का अनुभव होता है।दूसरा फायदा यह है कि इन परीक्षाओं की तैयारी करने के निमित्त ही आपको मानसिक रूप से गणित को हल करने का प्रयास करते हैं।
  • इस प्रकार ये कॉन्पिटिशन आपको मानसिक गणित की तैयारी करने का मौका प्रदान करते हैं।इन कॉन्पिटिशन में गणित की विशिष्ट समस्याएं होती है जिनका हल आपको उच्च तर्कशक्ति,चिंतन एवं मनन करने के लिए प्रेरित करता है।
    इन काॅम्पीटिशन में लक्ष्य की प्राप्ति हेतु मन को सही दिशा में साधने की आवश्यकता होती है।मन में लक्ष्य की प्राप्ति तथा सफलता के प्रति संशय की भावना छात्र-छात्राओं को भटका देती है।इसलिए छात्र-छात्राएं पूर्ण मनोयोग,एकाग्रता तथा समर्पण के साथ गणित की मानसिक गणनाएँ करते हैं।
  • इसलिए छात्र-छात्राओं को गणित की इन काॅम्पीटिशन में भाग लेना चाहिए जिससे उनको मानसिक रूप से गणित की गणनाओं को करने का मौका मिले।कक्षाओं में वार्षिक,अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं की तैयारी छात्र-छात्राएं परंपरागत तरीके से अर्थात् लिखित गणित के माध्यम से करते हैं।इसलिए उन्हें मानसिक रूप से गणित को हल करने का मौका नहीं मिलता है।
  • परंतु काॅम्पीटिशन में ऑब्जेक्टिव टाइप के प्रश्न पूछे जाते हैं।उनको हल करने के लिए मानसिक रूप से गणित को हल करने का अभ्यास करना होता है।इस प्रकार से काॅम्पीटिशन आपको गणित में महारत हासिल करने के लिए उपयोगी सिद्ध होते हैं।
    इस तरह के काॅम्पीटिशन में रटने की प्रवृत्ति काम नहीं आती है बल्कि वस्तुनिष्ठ तथा एमसीक्यू टाइप के सवालों को हल करने के लिए विद्यार्थी को अपनी संपूर्ण बौद्धिक व तार्किक क्षमता को लगाना पड़ता है।क्योंकि यह परीक्षण स्टूडेंट्स की उच्च बौद्धिक क्षमता के मापन के लिए किया जाता है।इसलिए इस प्रकार के काॅम्पीटिशन में याद करने जैसी कोई समस्या नहीं है बल्कि गणित की समस्याओं को मानसिक रूप से हल कर लेना पर्याप्त् होता है।ऐसा इसलिए है कि प्रारंभिक कक्षाओं में हम जोड़,गुणा,भाग,बाकी,पहाड़े इत्यादि की उच्च कक्षाओं में भी स्मृति बनी रहती है उनको याद रखने के लिए विशेष प्रयास नहीं किया था।बल्कि वे मानसिक रूप से इतना गहरा प्रभाव डाल चुकी होती है कि वे कभी विस्मृत नहीं हो पाती।इसलिए वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की तैयारी के लिए मानसिक गणना करना पर्याप्त् होता है।यह अवश्य है कि सूत्रों,सर्वसमिकाओं को अवश्य याद करना होता है क्योंकि उनके बिना किसी सवाल को हल करने के लिए मानसिक गणना में अधिक परिश्रम करना पड़ता है।

(5.)मानसिक गणना के लाभ (Benefits of Mental Calculation):

  • (i)अंकगणित,बीजगणित,ज्यामिति में नए सिद्धांतों,प्रत्ययों,संकल्पनाओं,संक्रियाओं,संबंधों तथा तथ्यों को सीखने में मानसिक गणित सहायक है।
  • (ii)विद्यार्थियों को गणित जैसे गूढ़ और अमूर्त विषय को शीघ्रता से समझने में सहायता मिलती है।
  • (iii)छात्र-छात्राओं में तर्कशक्ति,एकाग्रता,कल्पनाशक्ति,रचनात्मकता तथा आत्मविश्वास का विकास होता है।
  • (iv)स्टूडेंट्स को गणित की समस्याओं का विश्लेषण करने का अभ्यास होता है।
  • (v)छात्र-छात्राओं में चिंतन-मनन एवं विचार करने की प्रवृत्ति उत्पन्न होती है।
  • (vi)गणितीय सवालों तथा समस्याओं को शीघ्रता से हल करना संभव है।
  • (vii)गणित में मास्टरी हासिल करने में मानसिक गणित का योगदान है।
  • (viii)दैनिक जीवन में बहुत से कार्य मानसिक गणित का उपयोग करके हल कर लेते हैं।
  • (ix)गणित के क्षेत्र में विद्वानों,गणितज्ञों को तैयार करने के लिए मानसिक गणित प्रमुख भूमिका निभाती है।
  • (x)आधुनिक गणित,बीजगणित को सीखने के लिए मानसिक गणित करने की क्षमता उत्पन्न करने में सहायक है।

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(6.)मानसिक गणित में ध्यान देने योग्य बातें (Things to Note in Mental Mathematics):

  • (i)गणित अमूर्त तथा तर्क पर आधारित विषय है।
  • (ii)गणित में सोच-विचारकर समस्याओं को हल करने का भी ध्यान रखें।
  • (iii)गणित के अध्ययन का दायरा विशाल और गहरा होना चाहिए।
  • (iv)गणित विषय के प्रश्न कठिन और क्लिष्ट होते हैं इसलिए गणित विषय को हल्के-फुल्के ढंग से नहीं लेना चाहिए।इसे भी पूरी तन्मयता और परिश्रम के साथ तैयार करना चाहिए।
  • (v)गणित का अध्ययन करते रहना अथवा कहने का यह अर्थ नहीं है कि किताबी कीड़ा बन जाएं। इससे बचने का रास्ता है कि गणितीय ज्ञान इंटरनेट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से भी प्राप्त किया जाए।
  • (vi)गणित का अध्ययन रोचक व आनंदपूर्वक किया जाए।इससे आपका मनोरंजन तो होगा ही साथ ही दिमाग पर अनावश्यक जोर नहीं पड़ेगा।
  • (vii)मानसिक गणित का अभ्यास करने से पूर्व मौखिक व लिखित गणित का अभ्यास करना चाहिए।
  • (viii)मानसिक गणित की समस्याओं को छात्र-छात्राओं को अपनी योग्यता अनुसार हल करना चाहिए।
  • (ix)प्रश्न या सवाल पूछने के बाद मानसिक रूप से हल करने के लिए सोचने का अवसर दिया जाए।
  • (x)सवाल या समस्याएँ इस तरह की हों कि उनका अनुमान लगाकर उत्तर न दिया जा सके।
  • (xi)मानसिक गणना का कार्य यथासंभव छात्र-छात्राओं को ही करना चाहिए।
  • (xii)मानसिक गणित का प्रयोग विद्यार्थियों को सचेत रखने के लिए किया जाना चाहिए ताकि प्रत्येक छात्र गणित के टाॅपिक को समझने का प्रयास करे।

(7.)नौकरी हेतु परीक्षाओं में मानसिक गणित (Mental Mathematics in Job Exams):

  • निजी तथा सरकारी क्षेत्र में आमतौर पर अभ्यर्थियों का चयन करने हेतु प्रतियोगिता परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है।इन प्रतियोगिता परीक्षाओं में संख्यात्मक योग्यता का परीक्षण भी किया जाता है।युवाओं में निजी तथा सरकारी नौकरी के प्रति विशेष आकर्षण देखा जाता है।आईआईटी,सीपीटी,इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में रिक्तियों की संख्या कम होने के साथ-साथ परीक्षा कठिन पाठ्यक्रम पर आधारित होने के कारण हर किसी अभ्यर्थी का सफलता प्राप्त करना अत्यधिक कठिन है।
  • इन परीक्षाओं में वस्तुनिष्ठ तथा एमसीक्यू टाइप के प्रश्न व सवाल पूछे जाते हैं।गणित ऐसा विषय है जिसमें शत-प्रतिशत अंक प्राप्त किए जा सकते हैं। संख्यात्मक योग्यता तथा गणित के प्रश्नों के उत्तर संदिग्ध नहीं होते हैं तथा प्रश्न को किसी के भी द्वारा जांच की जाए तो परिणाम में कोई अंतर नहीं होता है।
  • इस खंड की तैयारी हेतु मानसिक गणित की तैयारी सबसे अधिक मायने रखती है।इसमें अंकगणित,बीजगणित,ज्यामिति,अवकलन समाकलन इत्यादि के विभिन्न अध्यायों से प्रश्न पूछे जाते हैं।अभ्यर्थियों को इन सभी अध्यायों से संबंधित सूत्रों एवं भिन्न-भिन्न प्रकृति के प्रश्नों व सवालों का लिखित एवं मानसिक रूप से हल करने का अभ्यास होना चाहिए।
  • गणित के प्रश्नों को हल करने हेतु सटीकता के साथ-साथ शीघ्रता से हल करना भी आवश्यक है जिससे निर्धारित समय में अधिक से अधिक प्रश्न हल करके अधिक अंक प्राप्त किए जा सके।ऐसा आप तभी कर पाएंगे जबकि आपका मानसिक गणित हल करने का अभ्यास होगा।इसके लिए अभ्यर्थियों को सवालों को हल करने के लिए शॉर्टकट मेथड तथा निरंतर अभ्यास करने की आवश्यकता होती है।
  • इन परीक्षाओं में कम समय में सवालों को हल करने होते हैं।अतः इनको हल करने हेतु विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।इसलिए अभ्यर्थियों को शॉर्टकट मेथड व सूत्रों की सहायता से सवालों को मानसिक रूप से हल करने की योग्यता प्राप्त करनी चाहिए। जिन सवालों व प्रश्नों को शॉर्टकट मेथड से हल करना संभव नहीं हो उन्हें कम स्टेप्स में मानसिक रूप से हल करना चाहिए।अभ्यर्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इन परीक्षाओं में आप अपना मजबूत पक्ष तभी रख सकते हैं जबकि आप सवालों व प्रश्नों को मानसिक रूप से शीघ्रता पूर्व हल कर सकेंगे।
  • उपर्युक्त विवरण द्वारा मानसिक गणित के लिए 7 बेहतरीन टिप्स (7 Best Tips for Mental Mathematics),मानसिक गणित के लाभ (Benefits of Mental Mathematics) के बारे में बताया गया है।

2.मानसिक गणित के लिए 7 बेहतरीन टिप्स (7 Best Tips for Mental Mathematics),मानसिक गणित के लाभ (Benefits of Mental Mathematics) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.मानसिक गणित क्या है? (What is Mental Mathematics?):

उत्तर:मानसिक गणना में केवल मानव मस्तिष्क का उपयोग करके अंकगणितीय गणनाएं होती हैं, जिसमें कैलकुलेटर जैसे किसी भी आपूर्ति या उपकरणों से कोई मदद नहीं होती है।जब कंप्यूटिंग उपकरण उपलब्ध नहीं होते हैं,तो लोग मानसिक गणना का उपयोग कर सकते हैं,जब यह गणना के अन्य साधनों की तुलना में तेज होता है या यहां तक कि प्रतिस्पर्धी संदर्भ (competitive context) में भी। 

प्रश्न:2.मेंटल मैथ्स का मतलब क्या है? (What is meaning of mental maths?):

उत्तर:मानसिक गणित कौशल का एक समूह है जो कि लोगों को गणित करने के लिए अनुमति देते है “उनके दिमाग से” पेंसिल और कागज या एक कैलकुलेटर का उपयोग किए बिना।
मानसिक गणित बच्चों (kids) को गणित अवधारणाओं को बेहतर समझने और तेजी से जवाब पाने में मदद कर सकते हैं ।

प्रश्न:3.मानसिक गणित का एक उदाहरण क्या है? (What is an example of mental math?):

उत्तर:यहां कुछ उदाहरण दिए गए हैं जिनमें मानसिक गणित वर्धन कौशल का उपयोग किया जाता है।8 से 4 जोड़ने के बजाय 4 को 8 में जोड़ा जाता है 4+8=8+4 के रूप में।
मानसिक रूप से गणना करते समय हम चार नंबर आगे गिनते हैं।17 से 5 जोड़ने के बजाय 5 को 17 में जोड़ा जाता है 5+17=17+5 के रूप में।

प्रश्न:4.आप मानसिक गणित का अभ्यास कैसे करते हैं? (How do you practice mental math?),मानसिक गणित कौशल में सुधार कैसे करें? (How to Improve Mental Math Skills?):

उत्तर:(1.)तोड़ इसके जोड़ और व्यकलकलन (बाकी) समस्याओं को भागों (Parts) में तोड़ो।
(2.)राउंड नंबर बनाने के लिए समस्या को बदलें।
(3.)एक बार में कई नंबर जोड़ना सीखें।
(4.)बाएं से दाएं गुणा करें।
(5.)19 के माध्यम से 11 नंबर के लिए सबसे अच्छा एक तेजी से गुणा ट्रिक (trick) की कोशिश करो ।
(6.)शून्य में समाप्त होने वाली संख्याओं के साथ समस्याओं को सरल बनाएं।

प्रश्न:5.मेंटल मैथ के नियम क्या हैं? (What are the rules of mental math?):

उत्तर:मानसिक गणित ट्रिक्स (tricks) आपको पता होना चाहिए
दो अंकों की संख्या को 11 से गुणा करें।
तीन अंकों की संख्या को 11 से गुणा करें।
स्क्वेरिंग।
5 से एक बड़ी संख्या गुणा करें।
9 से एक बड़ी संख्या गुणा करें।
भागों (parts) में गुणा।
जोड़कर घटाएं।
डबल्स में 1 जोड़ें ।

प्रश्न:6.आप एक बच्चे को मानसिक गणित की व्याख्या कैसे करते हैं? (How do you explain mental math to a child?):

उत्तर:गणित खतरे (Math Jeopardy)
अपने बच्चे को कागज का टुकड़ा दें और फिर एक नंबर कहें।उन्हें एक मिनट के रूप में कई तरीके के रूप में वे इसके योग,घटाव,गुणा और विभाजन का उपयोग कर संख्या बनाने के लिए कर सकते है खोजने के लिए दे।कुछ बुनियादी सीखना,लेकिन उपयोगी मानसिक गणित रणनीतियाँ,बहुत अपने बच्चे के आत्मविश्वास में सुधार करने के लिए काम कर सकते हैं।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा मानसिक गणित के लिए 7 बेहतरीन टिप्स (7 Best Tips for Mental Mathematics),मानसिक गणित के लाभ (Benefits of Mental Mathematics) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

7 Best Tips for Mental Mathematics

मानसिक गणित के लिए 7 बेहतरीन टिप्स
(7 Best Tips for Mental Mathematics)

7 Best Tips for Mental Mathematics

मानसिक गणित के लिए 7 बेहतरीन टिप्स (7 Best Tips for Mental Mathematics)
पर अमल करके गणित में महारत हासिल कर सकते हैं।गणित अमूर्त प्रत्ययों,तथ्यों,सिद्धान्तों,सूत्रों, साध्यों
(Theorems),संक्रियाओं का विषय है, इसलिए गणित

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