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How to use equations to solve problems?

1.समस्याएं हल करने में समीकरणों का प्रयोग कैसे करें?(How to use equations to solve problems?)-

समस्या में दी गई गणितीय स्थिति को समीकरण के पदों में व्यक्त करने की कोई निश्चित विधि नहीं है।निम्नलिखित सुझावों को ध्यान में रखा जाए
(1.)समस्या का अध्ययन कर ज्ञात कीजिए कि क्या दिया गया है तथा क्या ज्ञात करना है?
(2.)अज्ञात राशि को अक्षर x,yया z इत्यादि से व्यक्त कीजिए।
(3.)समस्या में दिए गए तथ्यों को समीकरण की भाषा में लिखिए।
(4.)अज्ञात राशि के लिए,समीकरण को हल कीजिए।(5.)अज्ञात राशि के मान की जांच कीजिए।

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2.समीकरण की रचना(Design of equation)-

(1.)समीकरण में दो पक्ष होते हैं जो समान चिन्ह के दोनों ओर लिखे जाते हैं।इन्हें क्रमशः समीकरण का ‘बायां पक्ष’ और ‘दांया पक्ष’ कहते हैं।
(2.)एक समीकरण अज्ञात राशि के कुछ मान के लिए सत्य होता है या संतुष्ट होता है।अज्ञात राशि के मान को समीकरण का मूल(Root) कहते हैं।
(3.)जिस बीजीय अक्षर का मान समीकरण से ज्ञात किया जाता है,उसे अज्ञात राशि कहते हैं।
(4.)जिस समीकरण में अज्ञात राशि प्रथम घात में हो उसे सरल समीकरण कहते हैं‌।
(5.)समता में जोड़ का गुण,गुणा का गुण और भाग का गुण समीकरण के लिए स्वयं सिद्धियां कहलाती है।
(6.)यदि किसी पद को समीकरण के एक पक्ष की ओर ले जाएं तो उसका चिन्ह बदल देते हैं।इस प्रकार किसी समीकरण में एक पक्ष के पदों को दूसरे पक्ष की ओर चिन्ह बदल कर ले जाने की क्रिया को पक्षांतरण कहते हैं।
(7.)किसी समीकरण की समानता में कोई परिवर्तन नहीं होता यदि दोनों पक्ष परस्पर एक दूसरे से बदल दिए जाएं।
(8.)यदि किसी समीकरण के दोनों पक्षों में प्रत्येक पद के चिन्ह बदल दिए जाएं तो उसकी समानता में कोई परिवर्तन नहीं होता है।इसी बात को हम इस प्रकार भी कह सकते हैं कि किसी समीकरण के दोनों पक्षों को -1 से गुणा करें तो दोनों पक्षों की राशियों के चिन्ह बदल जाते हैं अर्थात् समीकरण के दोनों पक्षों के चिन्ह बदलने से भी समानता बनी रहती है।
(9.)किसी समीकरण में चिन्ह परिवर्तन के पश्चात पदों का पक्षांतर करने से समानता के गुण में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
(10.)किसी भी समीकरण का कम से कम एक निश्चित मान होना आवश्यक है।
(11.)समीकरण हल करने से जो मान अज्ञात राशि का आता है यदि उसे अज्ञात राशि के स्थान पर समीकरण से लिख दें तो दोनों पक्षों का मान समान आएगा।इस क्रिया को उत्तर की जांच करना या संतुष्ट करना कहते हैं।

3.समीकरण हल करने की विधि(Equation solving method)[use equations to solve problems]-

 

(1.)समीकरणों के प्रत्येक पद के हरों के लघुत्तम समापवर्त्तक से गुणा करके समीकरण में से भिन्न को सरल करो।

(2.) समीकरण में दी गई पद संहतियों को सरल करो जैसे कोष्ठक खोलना आदि।
(3.)अज्ञात राशियों का पक्षांतर कर बायें पक्ष में लाओ तथा अन्य राशियों का पक्षांतर कर दायें पक्ष में लाओ।
(4.)समीकरण के दोनों पक्षों के पदों को उनके सरलतम रूप में प्रकट करो। उदाहरणार्थ ax=b
(5.) अज्ञात राशि का मान ज्ञात करो।
(6.)समीकरण के हल की सत्यता की जांच करो।
समीकरण के अध्यापन में यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि समीकरण को एक स्वतंत्र उप-विषय के रूप में पढ़ाया जाए।यह देखा गया है कि विद्यार्थी समीकरण का हल तो ज्ञात कर लेते हैं किंतु समस्या में दिए गए समीकरण द्वारा व्यक्त नहीं कर पाते।समीकरण एक साधन है जिसकी सहायता से समस्याओं को हल किया जाता है।केवल समीकरण हल करने का ज्ञान यथेष्ट नहीं है जब तक कि ज्ञान का उपयोग समस्याओं के हल करने में न लाया जाए।
समीकरण को एक उप-विषय के रूप में नहीं पढ़ाना चाहिए। समस्याओं को हल करने की क्रियाओं को सीखते समय समीकरण का अनौपचारिक रूप से ज्ञान देना चाहिए। विद्यार्थी यह समझ सकें कि समीकरण,समस्याओं को हल करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण भाग है। समीकरण को औपचारिक रूप से कक्षा में नहीं पढ़ाया जाना चाहिए।समीकरण वस्तुत: समस्याओं के समाधान ज्ञात करने की प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग है समीकरण का यह स्वरूप ही विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

4.समस्याओं को हल करना(Solving problems)-

विद्यार्थियों को समीकरण की सहायता से समस्याओं को हल करने में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वे समस्या में दिए गए तथ्यों के आधार पर समीकरण का निर्माण नहीं कर पाते तथा समीकरण में व्यक्त संबंधों को साधारण भाषा में व्यक्त नहीं कर पाते। इस कठिनाई का मूल कारण यह है कि हम समीकरणों को एक स्वतंत्र उप-विषय के रूप में पढ़ाते हैं।वास्तव में समीकरणों को समस्याओं के हल करने की प्रक्रिया के भाग के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए।
समस्याओं में कुछ तथ्य प्रत्यक्ष ढंग से दिए जाते हैं और कुछ परोक्ष ढंग से। विद्यार्थी इन तथ्यों में परस्पर संबंध ठीक प्रकार से ढंग से स्थापित नहीं कर पाते। विद्यार्थी बहुधा अज्ञात राशि को मानने में त्रुटियां करते हैं जिनके फलस्वरूप उन्हें समीकरण के निर्माण में कठिनाइयां आती है।
बीजगणित में समस्याओं का अर्थ उस प्रश्न से होता है जिसमें यदि अज्ञात राशियों को उपर्युक्त संकेतों से व्यक्त करें तो प्रश्न शर्त के अनुसार समीकरण का रूप धारण कर ले और अज्ञात राशियों को धनात्मक मूल देते हुए फल प्राप्त हो जाए।
हमारे दैनिक जीवन में ऐसी अनेक समस्याएं आती हैं जिन्हें हम अंकगणित की विधि से हल नहीं कर सकते।ऐसी स्थिति में बीजगणित का प्रयोग आवश्यक और उपयोगी होता है।
उदाहरण-एक पिता की आयु अपने पुत्र की आयु से दुगुनी है‌।10 वर्ष पश्चात पिता की आयु तिगुनी हो जाएगी। प्रत्येक की आयु ज्ञात कीजिए।
माना कि पुत्र की वर्तमान आयु x वर्ष है।
इसलिए पिता की वर्तमान आयु 2x वर्ष है।
10 वर्ष पश्चात पुत्र की आयु =(x+10)वर्ष
10 वर्ष बाद पिता की आयु =(2x+10)वर्ष
प्रश्नानुसार-2x+10=3(x+10)
या 2x+10=3x+30
या 2x-3x=30-10
-x=20
x=-20
x मान धनात्मक नहीं हैं। यह अंकगणित की समस्या नहीं है। अंकगणित की समस्याओं में ऋणात्मक राशियों का अस्तित्व नहीं होता है। अतः ऋणात्मक मूल्य अर्थहीन है। इस समस्या में समीकरण तो बनाया जा सकता है किंतु इसमें अज्ञात राशि का मान धनात्मक नहीं आता है।उक्तर्युक्त समस्या अंकगणित की समस्या नहीं है।बीजगणित से हल हो सकने वाली समस्या के निम्नांकित गुण होते हैं-

(1.) इसमेंं आयी हुई अज्ञात राशियों की संख्या के समान समीकरण बनाने के लिए पर्याप्त तत्त्व होने चाहिए।
(2.)इससे बने समीकरणों से प्राप्त अज्ञात राशियों के मान धनात्मक होने चाहिए।
(3.)समस्या की परिभाषा सरल एवं स्पष्ट होनी चाहिए।

5.समस्याओं को हल करने की विधि के पद(Posts of method of solving problems)-

(1.)समस्या का विश्लेषण कर यह ज्ञात करना चाहिए कि इसमें क्या-क्या तथ्य दिए गए हैं।
(2.)समस्या में जो तथ्य ज्ञात करना है उसे लिख लेना चाहिए।
(3.)ज्ञात किए जाने वाले तथ्यों तथा दिए गए तथ्यों के बीच में परस्पर संबंध को स्पष्ट रूप से समझकर व्यक्त करना चाहिए।
(4.)अज्ञात राशियों को x,y तथा z से व्यक्त करना चाहिए।
(5.)समस्या में दिए गए संबंध को बीजीय भाषा में समीकरण के रूप में व्यक्त करना चाहिए। यदि अज्ञात राशियां एक से अधिक हैं तो उतने ही समीकरण प्राप्त होंगे जितनी की अज्ञात राशियां प्रयुक्त हुई है।
(6.)समीकरण को हल करने से प्रत्याशित हल प्राप्त हो गया।यदि समीकरण में प्रथम घात से अधिक वाली राशि या राशियां आए तो सरल समीकरण नहीं बनेगा।
(7.) कभी-कभी हमारे सामने ऐसी समस्याएं आती हैं जिनमें ज्ञात करने के लिए दो या अधिक अज्ञात राशियां होती है लेकिन ये अज्ञात राशियां स्वयं आपस में भी किन्हीं अन्य दिए गए संबंध से एक दूसरे से संबंधित होती है। इनका हल निम्न प्रकार करते हैं-
(1.)दो राशियां x या y मानकर दो समीकरण प्राप्त कर उनका हल ज्ञात करना चाहिए।
                                     अथवा
(2.) अज्ञात राशि y का मान,संबंध की सहायता से x में व्यक्त करो तथा एक अज्ञात राशि वाला समीकरण प्राप्त करो।

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