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Mathematical Equations

1.गणितीय समीकरण (Mathematical Equations),समीकरण (Equations):

  • गणितीय समीकरण (Mathematical Equations) का जीवन में कई जगह उपयोग करते हैं।हमें जीवन में तुलना करने की आवश्यकता पड़ती है।तुलना करते समय हम राशियों या संख्याओं के लिए कहते हैं:बड़ी है,समान है या छोटी है।जब दो या दो से अधिक राशियां ज्ञात हों तो हम उन्हें किसी क्रम में रखते हैं।इस क्रम में रखने की प्रक्रिया के कारण समीकरणों तथा असमिकाओं की आवश्यकता पड़ी।
  • समीकरणों की सहायता से हम लंबे शाब्दिक कथनों एवं संबंधों को प्रतीकों के रूप में लिखकर गणितीय संक्रियाएं कर समस्याएं हल करते हैं।
  • समीकरण बीजगणित की एक महत्त्वपूर्ण संकल्पना है।समीकरण की सहायता से अंकगणित की अनेक समस्याओं को आसानी से हल किया जा सकता है। समीकरण के सिद्धांतों एवं प्रक्रियाओं ने बीजगणित के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।समीकरण के कारण अंकगणित की कठिनाई कम हुई है।समीकरण एवं लेखाचित्र बीजगणित के महत्त्वपूर्ण एवं उपयोगी उप-विषय हैं।यदि इन्हें मील का पत्थर कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। समीकरण में बीजगणितीय कथनों तथा समता का प्रयोग होता है।समीकरण में बीजगणितीय पदों के साथ संक्रियाएं की जाती हैं।समीकरण की सहायता से अज्ञात राशियों का मान सरलता से ज्ञात किया जा सकता है।
  • समीकरण का निर्माण समस्या में दी गई शर्तों एवं तथ्यों के परस्पर संबंधों को ध्यान में रखकर किया जाता है तथा अज्ञात राशियों का मान ज्ञात कर समस्या हल की जाती है।
  • आधुनिक विज्ञान की प्रत्येक समस्या को समीकरण में व्यक्त कर हल ज्ञात करने का प्रयास किया जाता है।समीकरण के निर्माण में ज्ञात एवं अज्ञात राशियों में परस्पर संतुलन स्थापित किया जाना आवश्यक है।अज्ञात राशियों को प्रतीकों या अक्षरों से प्रदर्शित किया जाता है।
  • समीकरण का सबसे बड़ा लाभ यह है कि उससे विस्तृत संबंधों को संक्षिप्त भाषा में बड़ी आसानी से लिखा जा सकता है।समीकरण को बीजगणित की आशुलिपि कहा जा सकता है।किसी समीकरण को पढ़कर हम उसमें अभिव्यक्त संबंधों को समझकर विवेचना कर सकते हैं।
  • आधुनिक गणित के तीव्र विकास में समीकरणों ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।समीकरण का स्वयं का कोई महत्त्व नहीं है जब तक कि इसका उपयोग समस्याओं के हल हेतु न किया जाए।हमारे विद्यालयों में समस्याओं को हल करने की दृष्टि से ही समीकरण पढ़ाया जाना चाहिए।हम प्रत्येक समस्या के हल हेतु समीकरण या असमीकरण का अनुप्रयोग करते हैं।
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(1.)गणितीय समीकरणों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background of Mathematical Equations):

  • प्राचीन समय में भी समीकरणों का उपयोग किया जाता था।प्राचीन समय में गणितज्ञ समस्याओं को समीकरण के रूप में अभिव्यक्त कर बीजगणित का प्रयोग करते थे।
  • हिंदू गणितज्ञों ने लगभग चौथी शताब्दी में विभिन्न प्रकार की समीकरणों में अज्ञातों का प्रयोग किया और उनके हल किए।12 वीं शताब्दी में हुए सुप्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ भास्कराचार्य की प्रसिद्ध कृति ‘लीलावती’ में निम्नलिखित समस्या मिलती है:
  • “भँवरों के एक झुंड का पांचवा भाग खिले हुए कदम्ब पर जा बैठा,एक तिहाई सिलिन्ध्रि के फूल पर और इन संख्याओं के अन्तर का तिगुना कुटज् के बौर की ओर उड़ गया।शेष बचा हुआ एक भँवरा चमेली और केतकी की मनमोहक सुगंध से प्रलोभित होकर हवा में इधर-उधर मंडराता रहा।हे सुमुखी!मुझे बताओ,भँवरों की कुल संख्या कितनी थी?”
    \left[x=\frac{x}{5}+\frac{x}{5}+3\left(\frac{x}{3}-\frac{x}{5}\right)+1\right]
    \Rightarrow x=\frac{3x+5x+15x-9x}{15}+1
    \Rightarrow x=\frac{14x}{15}+1
    \Rightarrow x-\frac{14x}{15}=1
    \Rightarrow \frac{15x-14x}{15}=1
    \Rightarrow x=15
  • प्राचीन भारत के हिंदू गणितज्ञों को अज्ञात राशियों का प्रयोग कर मनोविनोद हेतु समस्याओं को समीकरण की सहायता से हल करने का श्रेय दिया जाता है।लगभग 300 ईसा पूर्व अक्षर तथा इनके मूल ज्ञात करने की विधियां भारत में प्रचलित थी।
  • सत्रहवीं शताब्दी में फ्रांसीसी गणितज्ञ देकार्त (Descartes) ने सबसे प्रथम अज्ञातों को व्यक्त करते हुए अक्षरों a,b,c,x,y,z इत्यादि का प्रयोग किया तथा अज्ञात राशियों की घातों के लिए भी संकेतों का प्रयोग किया।इस प्रकार द्विघात समीकरणों के विकास में हिंदू गणितज्ञों का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।ऐसा कहा जाता है कि हिंदुओं ने 500 ईसवी पूर्व में अपने पूजा स्थलों का निर्माण समीकरण ax^2+bc+c=0 के हलों के आधार पर किया था।आर्यभट (जन्म 476 ईस्वी) तथा ब्रह्मगुप्त (जन्म 598 ईस्वी) ने द्विघात समीकरणों से हल संबंधी नियमों को दिया।प्रसिद्ध गणितज्ञ श्रीधर ने सर्वप्रथम द्विघात समीकरणों के हल के लिए नियम दिया जो ‘हिंदू नियम’ कहलाता है।यही नियम आजकल वर्ग पूर्ण करने की विधि कहलाता है।आधुनिक समय में द्विघात समीकरणों में योगदान के लिए स्विट्जरलैंड के लियोनार्ड ऑयलर,फ्रांस के ई. बेजोट तथा ब्रिटेन के जे.जे. सिल्वैस्टर हैं।
  • सर्वप्रथम अक्षर-संकेत (Alphabet Numerals) की पद्धति का आविष्कार आर्यभट ने ही किया।इस पद्धति में अंकों की वर्णमाला के अक्षरों द्वारा प्रकट किया जाता था।ax-by=c जैसे समीकरणों को हल करने का प्रथम प्रयास आर्यभट जैसे मेघावी गणितज्ञ ही कर सकते हैं।

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(2.)गणितीय समीकरण की विशेषताएं (Characteristics of Mathematical Equations):

  • गणितीय समीकरण की परिभाषा (Definition of Mathematical Equations):समानता का वह कथन जिसमें अज्ञात राशि या राशियाँ निहित हों समीकरण (Equation) कहलाता है।
  • (i)समीकरण में अज्ञात राशि या राशियां होती हैं।
  • (ii)समीकरण में गणितीय वाक्यों को समानता के चिन्ह से जोड़ा जाता है।
  • (iii)समीकरण में बायाँ पक्ष तथा दायाँ पक्ष होते हैं।
  • (iv)वह संख्या या संख्याएँ जो समीकरण को संतुष्ट करती है,हल या मूल कहलाते हैं।
  • (v)समानता में योग का गुण:किसी समीकरण या गणितीय वाक्य के दोनों पक्षों में समान संख्या जोड़ने से चर राशि का मान अप्रभावित रहता है तथा दोनों पक्षों का मान समान रहता है।अतः समीकरण के दोनों पक्षों में समान राशि ही जोड़ सकते हैं जैसे:
    x-7=18
    \Rightarrow x-7+7=18+7
    \Rightarrow x=25
  • (vi)समानता में अंतर का गुण:किसी समीकरण के दोनों पक्षों में से समान संख्या के घटाने से चर राशि का मान अप्रभावित रहता है तथा दोनों पक्षों का मान समान रहता है।अतः समीकरण के दोनों पक्षों में से समान राशि घटा सकते हैं।जैसे:
    x+20=50
    \Rightarrow x+20-20=50-20
    \Rightarrow x=30
  • (vii)समानता में गुणा का गुण:किसी समीकरण के दोनों पक्षों को समान संख्या से गुणा करने पर चर राशि का मान अप्रभावित रहता है तथा दोनों पक्षों का मान समान रहता है।अतः समीकरण के दोनों पक्षों को एक समान संख्या से गुणा कर सकते हैं। जैसे:
    \frac{x}{3}=5
    \Rightarrow \frac{x}{3}×3=5×3
    \Rightarrow x=15
  • (viii)समानता में विभाजन का गुण:किसी समीकरण के दोनों पक्षों में समान संख्या से भाग देने पर चर राशि का मान अप्रभावित रहता है तथा दोनों पक्षों का मान समान रहता है।अतः समीकरण के दोनों पक्षों को समान संख्या से भाग दे सकते हैं।जैसे:
    5x=75
    \Rightarrow \frac{5x}{5}=\frac{75}{5}
    \Rightarrow x=15

(3.)गणितीय समीकरणों को हल करने की विधि (Method of Solving Mathematical Equations):

  • (i)समस्या का अध्ययन कर ज्ञात कीजिए कि क्या दिया है तथा क्या ज्ञात करना है?
  • (ii)गणितीय समस्या यदि शब्दों में दी गई है तो उसको सांकेतिक भाषा (गणितीय कथन) में परिवर्तित कर लेते हैं।
  • (iii)अज्ञात राशि को किसी अक्षर x,y या z इत्यादि से व्यक्त कीजिए।
  • (iv)अज्ञात के लिए समीकरण को हल कीजिए।
  • (v)अज्ञात के मान की जाँच ज्ञात कीजिए।
  • उपर्युक्त विवरण में गणितीय समीकरण (Mathematical Equations),समीकरण (Equations) के बारे में बताया गया है।

2.गणितीय समीकरण (Mathematical Equations),समीकरण (Equations) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.गणितीय समीकरण उदाहरण क्या है? (What is mathematical equation example?):

उत्तर:एक समीकरण एक गणितीय वाक्य है जिसमें दो समान पक्ष समानता के चिन्ह (=) से अलग होते हैं।4+6=10 समीकरण का उदाहरण है।हम बराबर चिन्ह के बाईं ओर देख सकते हैं,4 + 6 और बराबर चिन्ह के दाहिने हाथ की ओर,10।

प्रश्न:2.5 प्रकार के समीकरण क्या हैं? (What are the 5 types of equations?):

उत्तर:विभिन्न प्रकार के समीकरण
रैखिक समीकरण (Linear Equation)।
रेडिकल समीकरण (Radical Equation)।
चरघातांकीय समीकरण (Exponential Equation)।
परिमेय समीकरण (Rational Equation)।

प्रश्न:3.गणितीय समीकरण क्या हैं? (What are mathematical equations?):

उत्तर:एक समीकरण एक गणितीय अभिव्यक्ति (mathematical expression) है जिसमें एक बराबरी का प्रतीक होता है।समीकरणों में अक्सर बीजगणित होता है।कैलकुलेशन में सही नंबर न जानने पर मैथ्स में बीजगणित का इस्तेमाल किया जाता है।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणितीय समीकरण (Mathematical Equations),समीकरण (Equations) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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गणितीय समीकरण (Mathematical Equations)

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गणितीय समीकरण (Mathematical Equations) का जीवन में कई जगह उपयोग करते हैं।हमें जीवन में तुलना करने की आवश्यकता पड़ती है।
तुलना करते समय हम राशियों या संख्याओं के लिए कहते हैं:बड़ी है,समान है या छोटी है।

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