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How did Math Teacher Become a Pioneer?

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1.गणित शिक्षक अग्रगामी कैसे बने? (How did Math Teacher Become a Pioneer?),गणित अध्यापक के अग्रगामी होने के 3 टिप्स (3 Tips for Being a Math Teacher’s Pioneer):

  • गणित शिक्षक अग्रगामी कैसे बने? (How did Math Teacher Become a Pioneer?):गणित शिक्षक एक अग्रगामी है कारण यह है कि प्राचीन काल से ही हमारे देश,समाज,सभ्यता,संस्कृति का भार बहुत कुछ शिक्षकों के कंधों पर ही है।
  • गणित शिक्षक ऐसे सूत्रों,पहेलियों,कविताओं,हास्य-व्यंग्य के प्रसंगों का छात्र-छात्राओं को पढ़ाते व समझाते समय प्रयोग कर सकता है जो अच्छे संस्कारों के निर्माण में सहायक हो।
  • ऐसा कोई भी विषय नहीं है जिसे किसी भी दिशा में मोड़कर नहीं समझाया नहीं जा सकता है।लेकिन ऐसा कार्य वही शिक्षक कर सकता है जो विचारशील है और आगे की सोच रखता है।यों भी छात्र-छात्राओं से आयु में ही नहीं बल्कि व्यक्तित्व और कृतित्त्व में भी शिक्षक बड़ा ही होता है।परंतु कुछ शिक्षक,बीड़ी,पान,शराब का सेवन ही नहीं करते हैं बल्कि छात्र-छात्राओं से मंगवाते भी हैं।ऐसे शिक्षक शिक्षक के नाम पर कलंक है जिससे शिक्षक समुदाय कलंकित होता है।
  • एक समय था जब गुरु के आगे शिष्य का सिर श्रद्धा से झुक जाता था।शिष्य ही क्या राजा-महाराजा, धनिक वर्ग व सभ्रान्त तथा साधारण व्यक्ति सभी गुरु के आगे श्रद्धा से झुक जाते थे।गुरु के चरणों में सिर झुकाकर अपने आपको धन्य समझते थे। धीरे-धीरे गुरु के आचार-विचार में पतन हुआ।गुरु के स्थान पर उसे शिक्षक,अध्यापक कहा जाने लगा।श्रीमद्भगवद्गीता में कहा गया है कि:
  • “यद्यदाचरति श्रेष्ठ:तत्तदेवेतरो जन:।
    स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्त्तते”।।अध्याय-3
  • अर्थात विद्वान् या प्रधान पुरुष जिन लौकिक अथवा वैदिक कर्म को करता है,साधारण पुरुष भी उसी काम को करता है।श्रेष्ठ पुरुष (नेता) जिस विषय को प्रमाण मानता है साधारण व्यक्ति भी उसी काम को करता है।श्रेष्ठ पुरुष (नेता) जिस विषय को प्रमाण मानता है,साधारण व्यक्ति भी उसी का अनुगामी होता है।
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2.शिक्षक की वर्तमान स्थिति (The Teacher’s Current Situation):

  • वर्तमान समय में शिक्षा को नौकरी से जोड़ दिया गया है,रोजगार से नहीं।छात्र-छात्राएं इसीलिए डिग्री प्राप्त करते हैं कि उसे नौकरी मिलेगी।यदि नौकरी तथा सरकारी नौकरी से शिक्षा को नहीं जोड़ा जाए तो शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या रसातल में पहुँच जाए।नौकरी प्राप्त करने की मान्यता इतनी प्रबल हो गई है कि नौकरी नहीं तो शिक्षा क्यों प्राप्त करनी है? शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य चरित्र का विकास,व्यक्तित्व का विकास,शारीरिक विकास और आध्यात्मिक विकास शिक्षण से इस तरह गायब हो गए हैं जैसे गधे के सिर से सींग गायब है।
  • गणित शिक्षक की यह स्थिति है कि वह शिक्षण का कार्य इसलिए अपनाता है कि उसे अच्छा वेतन मिलेगा।आराम से जीवनव्यापन हो जाएगा।स्वयं का जीवन तो निष्कंटक गुजरेगा बल्कि पत्नी और बच्चों का भी अच्छी तरह भरण पोषण हो जाएगा।
  • इस प्रकार क्या उस शिक्षा को ठीक माना जा सकता है जिसमें छात्र-छात्राएं 100 सवालों में 67 सवालों को गलत कर दें और बाकी 33 सवालों को सही कर दें।गणित शिक्षक शिक्षा संस्थान में तो पढ़ाता ही है और धन कमाने की लालसा में ट्यूशन कराता है अथवा पार्टटाइम कोचिंग में पढ़ाता है। जिस शिक्षक को शिक्षा संस्थान में बहुत कम वेतन मिलता है उसके द्वारा तो ट्यूशन पढ़ाना व पार्टटाइम कोचिंग कराना समझ में आता है।परंतु जिस शिक्षक को इतना वेतन मिलता है कि वह अपना जीवनव्यापन सूख-सुविधापूर्ण व्यतीत कर सके।ऐसे शिक्षक भी धन कमाने के चक्कर में यह भूल जाते हैं कि छात्र-छात्राएं उनके चरित्र से क्या शिक्षा ग्रहण करेगा?इस प्रकार के शिक्षकों का चिन्तन व चरित्र अग्रगामी नहीं हो सकता है।ऐसे शिक्षकों से घटियापन,ओछी आदतें तथा उथलापन सीखते हैं।
  • शिक्षक को अपने अधिकार के प्रति सावचेत रहना चाहिए।परंतु यदि अधिकार और कर्तव्य में से किसी एक का चुनाव करना पड़े तो कर्त्तव्य को प्राथमिकता देना चाहिए।
  • दूसरे शिक्षक भौतिकता की अन्धी दौड़ में शामिल है तो गणित शिक्षक को भी अन्धी दौड़ में शामिल होना चाहिए।ऐसी विचारधारा से वह छात्र-छात्राओं का मार्गदर्शक,अग्रगामी,हितैषी और श्रद्धा का पात्र नहीं बन सकता है।

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3.गणित शिक्षक अग्रगामी कैसे बने? (How did Math Teacher Become a Pioneer?):

  • आधुनिक वातावरण,शिक्षा के पाठ्यक्रम,छात्र-छात्राओं की मन:स्थिति,समाज और माता-पिता की आकांक्षाओं की समीक्षा करने पर यह निष्कर्ष निकलता है कि छात्र-छात्राओं को केवल नौकरी के लिए तैयार कर लिया जाए।
  • इस स्थिति को उलटना नदी की धारा के विपरीत चलना है।बेशक यह कार्य कठिन ही नहीं बहुत कठिन है।लेकिन नदी की धारा के साथ तो मुर्दा भी तैर लेता है।सच्चा गणित शिक्षक वही है जो असंभव को संभव करने का पूरा प्रयत्न करता है। हालांकि इस स्थिति को एकाएक तो परिवर्तित नहीं किया जा सकता है परंतु धीरे-धीरे इस स्थिति को बदला जा सकता है।
  • रोजगार के लिए छात्र-छात्राओं को तैयार करना ही चाहिए परंतु केवल नौकरी के लिए छात्र-छात्राओं को तैयार करने का अर्थ है उसके संपूर्ण दूसरे पक्ष की अवहेलना करना।नौकरी की मानसिकता वाले छात्र-छात्राओं,माता-पिता,अभिभावकों को नैतिकता,सदाचरण तथा सांसारिक व्यवहार कुशलता सीखाना वैसा ही है जैसे सिंह के मुँह को खोलकर दांत गिनना।
  • शिक्षा का बाजारीकरण तथा व्यवसायीकरण इस कदर हो गया है कि शिक्षा संस्थानों को फीस चुकाने,ट्यूटर को ट्यूशन फीस देने या कोचिंग संस्थान में फीस अदा करने के बाद शिक्षक व छात्र का संबंध खत्म हो जाता है।आज कोई भी छात्र-छात्राएं इसी कारण डिग्री प्राप्त करने के बाद यह समझता ही नहीं है कि माता-पिता,शिक्षक व समाज के प्रति उसका कोई दायित्व भी है।
  • शिक्षक भी छात्र-छात्राओं,शिक्षा संस्थान से वेतन लेने के बाद यह समझता ही नहीं है कि राष्ट्र,समाज व छात्र-छात्राओं के प्रति उसका असली दायित्व क्या है?
  • पाश्चात्य संस्कृति,पाश्चात्य शिक्षा पद्धति,फिल्मों तथा टीवी पर दिखाए जाने वाले अविवेकपूर्ण, गलत दृश्यों के कारण हमारी मानसिकता इस कदर दूषित हो गई है कि हम यह सोच ही नहीं पाते हैं कि सही क्या है और गलत क्या है?
  • गुरुकुल कांगड़ी,विश्वभारती, दर्शन योग महाविद्यालय तथा महर्षि पतंजलि योग विद्यापीठ,हरिद्वार इत्यादि शिक्षा संस्थाएँ आज भी हैं जहाँ भारत ही नहीं विदेशों के विद्यार्थी भी पढ़ने आते हैं।इस प्रकार की संस्थाओं ने भारतीय संस्कृति की शिक्षा प्रदान कर यह उदाहरण प्रस्तुत किया है कि आधुनिक युग में भारतीयों मूल्यों की शिक्षा देना संभव है।सरकारी तथा गैर-सरकारी संस्थाओं के शिक्षकों को इन संस्थाओं और भारतीय जीवन मूल्यों से शिक्षा लेनी चाहिए।गणित का अध्यापक अपने विवेक,आचरण,दूरदर्शिता से गणित शिक्षा में भी भारतीय मूल्यों का संपुट दे सकता है।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में गणित शिक्षक अग्रगामी कैसे बने? (How did Math Teacher Become a Pioneer?),गणित अध्यापक के अग्रगामी होने के 3 टिप्स (3 Tips for Being a Math Teacher’s Pioneer) के बारे में बताया गया है।

4.छात्र संघ के चुनाव में अनोखा प्रचार (Unique Campaigning in the Election of the Student’s Union):

  • भारत में जब से कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ के चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ प्रारंभ हुई है तब से राजनीतिक पार्टियां प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से चुनावों में भाग लेती है।छात्र-छात्राएं राजनीतिक पार्टियों तथा राजनेताओं के मोहरा बन जाते हैं।ये कॉलेज और विश्वविद्यालय राजनीति के अड्डा बन गए हैं।कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में लड़ाई-झगड़ा,दंगा-फसाद होने का एक कारण यह भी है।ऐसे ही एक बार छात्रसंघ का चुनाव प्रचार हो रहा था उसका वाकया है:
  • छात्रसंघ अध्यक्ष कैंडिडेट एक कॉलेज छात्रा के पास पहुंचा और बोला दीदी मेरा ध्यान रखना।
  • दीदी:क्यों क्या एक्सीडेंट हो गया या बीमार हो गए।
  • छात्रसंघ अध्यक्ष कैंडिडेट:जी नहीं!मैं छात्रसंघ अध्यक्ष के चुनाव में खड़ा हुआ हूँ।मेरे चुनाव चिन्ह किताब का ध्यान रखना।
  • दीदी:अरे किताबों में क्या रखा है?किताबें पढ़कर तो तुम कहीं के नहीं रहोगे।इसके बजाय तो तुम कहीं गली के नुक्कड़ पर साइकिल के पंक्चर ठीक करने की दुकान खोल लो।
  • छात्रसंघ अध्यक्ष कैंडिडेट:दीदी,किताब तो छात्र-छात्राओं को आकर्षित करने के लिए चुनाव चिन्ह बनाया है।
  • दीदी:अच्छा!तो छात्रसंघ का अध्यक्ष (चुनाव जीतकर) बनकर क्या करने का इरादा है?
  • छात्रसंघ अध्यक्ष कैंडिडेट:चुनाव जीतने पर छात्रसंघ के अध्यक्ष का रोब और रुतबा किसी आईएएस अफसर से कम नहीं होता है।जब चाहे हड़ताल करवा दो।प्राचार्य का घेराव करवा दो।नहीं भी जीते तो भी उसका प्रचार-प्रसार इतना हो जाता है कि हारे हुए कैंडिडेट को भी किसी नेताजी से कम नहीं समझा जाता है।
  • दीदी:तुम कॉलेज में पढ़ाई करने आए हो या यह हुड़दंग लीला करने के लिए।ये रंग तो नेताओं के होते हैं।जो पलभर में चुनाव जीतते ही अपना रंग बदल देते हैं।उनकी हँसी के पीछे भी कुटिलता छुपी होती है।नेताओं का मन अंदर से काला होता है और बाहर से बिल्कुल सफेद पोशाक पहनी हुई होती है। नेता अपने मां-बाप का भी नहीं होता है।जब अपने मां-बाप का ही भरोसा नहीं करता तो फिर किसका करेगा।देश की लुटिया डुबोने वाले पहले ही बहुत नेता है।इसके बजाय मेहनत-मजदूरी करने के करतब सीखो तो घर-परिवार,समाज और देश भी खुशहाल होगा।

5.गणित शिक्षक अग्रगामी कैसे बने? (How did Math Teacher Become a Pioneer?),गणित अध्यापक के अग्रगामी होने के 3 टिप्स (3 Tips for Being a Math Teacher’s Pioneer) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.गणित अध्यापक शिक्षण का उन्नयन कैसे कर सकता है? (How Can a Mathematics Teacher Upgrade Teaching?):

उत्तर:यदि गणित अध्यापक पाठ्यक्रम के टाॅपिक्स को विस्तार (Extension) प्रदान करने का प्रयत्न करें तो गणित शिक्षण के स्तर में उन्नयन सम्भव है।अध्यापकों को यह जानना चाहिए कि वे जो भी पढ़ाते हैं उससे अतिरिक्त या आगे (Beyond) भी अवश्य पढ़ाएं जिससे गणित के अनुप्रयोगों को कक्षाध्यापन में स्थान दिया जा सके।

प्रश्न:2.गणितीय संस्कृति पढ़ाने का क्या लाभ है? (What is The Benefit of Teaching Mathematical Culture?):

उत्तर:यदि कक्षा के संदर्भ में अध्ययन के प्रयास किए जाएं तो विद्यार्थियों में गणितीय संस्कृति का विकास होगा।जो उन्हें ‘अधिक गणित’ सीखने के लिए प्रेरणा प्रदान करेगी।विज्ञान के लाभ तो समाज को दिखाई देते हैं किंतु हमें इसे गणित के लाभों को भी देखने योग्य बनाना है।

प्रश्न:3.गणित कक्षाध्यापन का क्या उद्देश्य होना चाहिए? (What Should be the Purpose of a Mathematics teacher?):

उत्तर:(1.)अधिक और अधिक गणित
(2.)उच्च स्तर की गणित
(3.)गणित का विस्तार:जैसे सरल ब्याज पढ़ाएं तो चक्रवर्ती ब्याज के बारे में भी बताएँ।
उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित शिक्षक अग्रगामी कैसे बने? (How did Math Teacher Become a Pioneer?),गणित अध्यापक के अग्रगामी होने के 3 टिप्स (3 Tips for Being a Math Teacher’s Pioneer) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित शिक्षक अग्रगामी कैसे बने? (How did Math Teacher Become a Pioneer?),गणित अध्यापक के अग्रगामी होने के 3 टिप्स (3 Tips for Being a Math Teacher’s Pioneer) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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गणित शिक्षक अग्रगामी कैसे बने?
(How did Math Teacher Become a Pioneer?)

How did Math Teacher Become a Pioneer?

गणित शिक्षक अग्रगामी कैसे बने? (How did Math Teacher Become a Pioneer?):गणित शिक्षक एक अग्रगामी है
कारण यह है कि प्राचीन काल से ही हमारे देश,समाज,सभ्यता,संस्कृति का भार बहुत कुछ शिक्षकों के कंधों पर ही है।
गणित शिक्षक ऐसे सूत्रों,पहेलियों,कविताओं,हास्य-व्यंग्य के प्रसंगों का छात्र-छात्राओं को
पढ़ाते व समझाते समय प्रयोग कर सकता है जो अच्छे संस्कारों के निर्माण में सहायक हो।

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