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MP girl went to school 24Km by bicycle

1.एमपी लड़की साइकिल से स्कूल 24किमी जाती थी का परिचय (Introduction to MP girl went to school 24Km by bicycle)-

एमपी  लड़की साइकिल से स्कूल 24किमी जाती थी (MP girl went to school 24Km by bicycle) के बारे में इस आर्टिकल में बताया गया है।कड़ी मेहनत करने वाली मध्यप्रदेश की लड़की जो साइकिल से 24किमी जाती थी (MP girl went to school 24Km by bicycle)और आती थी,ने 10वीं कक्षा की मेरिट में 8वां स्थान प्राप्त किया है।इस लड़की का परिचय है रोशनी भदौरिया जो भिंड जिले के अजनोल गांव की रहनेवाली है।
इस लड़की ने गणित और विज्ञान में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए हैं।इस लड़की ने कुल 98.5 प्रतिशत अंकों के साथ मेरिट में आठवां स्थान प्राप्त किया है।
एमपी लड़की साइकिल से स्कूल 24किमी जाती थी (MP girl went to school 24Km by bicycle) और फिर अध्ययन करती थी।इस उदाहरण से यह समझा जा सकता है कि कड़ी मेहनत और समर्पण का कोई विकल्प नहीं है।यदि आप कड़ी मेहनत करते हैं और शिक्षा के प्रति पूर्ण समर्पण है तो आपको सफलता प्राप्त करने से कोई नहीं रोक सकता है।
अक्सर यह कहते हुए सुना जाता है कि साधन-सुविधाओं के अभाव में प्रतिभाएं अपना दम तोड़ देती है।यह बात कुछ हद तक ही ठीक है।
अतिप्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं के मार्ग में बाधाएं रुकावट नहीं डाल सकती हैं, उन्हें अपना लक्ष्य प्राप्त करने से कोई रोक नही सकता है।
परन्तु कुछ प्रतिभाएं ऐसी होती है जो कठिनाइयों तथा समस्याओं के सामने घुटने टेक देती हैं।यदि इस प्रकार की प्रतिभाओं को साधन-सुविधाएं मिल जाए तो वे आगे बढ़ सकती है।
कठिनाइयों तथा संघर्षों में दो ही कार्य होते हैं या तो प्रतिभाएं कठिनाइयों तथा संघर्षों से टकराकर बिखर जाती है अर्थात् उनकी प्रतिभा दम तोड़ देती है।या फिर कठिनाइयों व संघर्षों से टक्कर लेकर वे चट्टान की तरह मजबूत हो जाती है।
इसलिए सक्षम समाज सेवी संगठनों तथा सरकारों का यह कर्त्तव्य है कि प्रारम्भिक स्तर पर ही प्रतिभाओं की पहचान करके उनकी प्रतिभा को निखारने व उभारने का कार्य करें। जिससे उनकी प्रतिभा से भारत और भारत के लोगों को फायदा पहुंचाया जा सके। ऐसा कार्य सक्षम समाज सेवी संस्थाएं,संगठन और सरकारें ही कर सकती हैं।
एमपी लड़की साइकिल से स्कूल 24किमी जाती थी (MP girl went to school 24Km by bicycle),इस तथ्य से ही अंदाज लगाया जा सकता है कि उसने दसवीं कक्षा की पढ़ाई करने में कितना कठोर परिश्रम किया होगा।
अब इस प्रकार की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।रोशनी भदौरिया एक किसान की बेटी है। इसलिए उनके माता-पिता ज्यादा कुछ साधन-सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा सकते हैं। अतः इस प्रकार की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए सक्षम व्यक्तियों,समाज व सरकारों को आगे बढ़कर उनका सहयोग करना चाहिए।
ग्रामीण तथा पिछड़े हुए ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है।कमी है तो उनकी पहचान करके आगे बढ़ाने की।अन्यथा ऐसे कैसे हो सकता है कि मेरिट लिस्ट में सभ्रान्त परिवारों के लड़के-लड़कियां ही अधिकांश स्थानों पर कब्जा कर लेते हैं।केवल एक-दो या कुछ स्थानों पर मेरिट लिस्ट में रोशनी भदौरिया जैसी छात्राओं का स्थान दिखाई देता है।
कारण स्पष्ट है कि जिस प्रकार एमपी लड़की साइकिल से स्कूल 24किमी जाती थी (MP girl went to school 24Km by bicycle),ऐसी कठिनाइयों का सामना करने में ही प्रतिभाएं दम तोड़ देती है। दूसरी तरफ सभ्रान्त परिवारों के लड़के-लड़कियों को कोचिंग तथा अध्ययन की सारी सुख-सुविधाएं व बेहतरीन स्कूलों में शिक्षा अर्जित करते हैं। इसलिए मेरिट के अधिकतर स्थानों पर ऐसे ही परिवारों के लड़के-लड़कियों के नाम दिखाई देते हैं। इसलिए हमें एमपी लड़की साइकिल से स्कूल 24किमी जाती थी (MP girl went to school 24Km by bicycle), से सीख लेनी चाहिए।
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2.एमपी लड़की साइकिल से स्कूल 24किमी जाती थी (MP girl went to school 24Km by bicycle)-

हार्ड वर्किंग MP गर्ल जो साइकिल से 24Km स्कूल और वापस जाती है, स्कोर 98.5%
7 जुलाई, 2020
सुदूर भारत के कई हिस्सों में छात्र कड़ी मेहनत के लिए नए नहीं हैं, लेकिन जब यह भुगतान करता है, तो यह सकारात्मक प्रतिक्रियाओं की एक पूरी श्रृंखला निर्धारित करता है।और यह मध्य प्रदेश के भिंड जिले के अजनोल गाँव की कक्षा 10 की छात्रा रोशनी भदौरिया के साथ है, जिसकी कुल आबादी 1,200 है।
15 साल के बच्ची को स्कूल जाने के लिए 12 किलोमीटर दूर मेहगांव गाँव जाना पड़ा।उसने हर दिन ऐसा किया, कठोर मौसम की स्थिति के बावजूद, तेज धूप या लगातार बारिश।लेकिन जब राज्य बोर्ड की कक्षा 10 के परिणाम हाल ही में घोषित किए गए, और उसने 98.5 प्रतिशत अंक अर्जित किए, तो वह पूरी तरह से भुगतान कर गई और मेरिट सूची में आठ स्थान पर रही।
मेहनती रोशनी ने गणित और विज्ञान में पूरे 100 प्रतिशत अंक हासिल किए।उसने बताया कि वह कक्षा में उपस्थित होगी और उत्तर लिखने पर ध्यान देगी, जैसा उसने सीखा था।”मैं इस तरह के उच्च अंक प्राप्त करने के लिए रोमांचित हूं,” उसने कहा।
रोशनी ने अपने माता-पिता और भाई-बहनों को गौरवान्वित किया है।उनके किसान पिता, पुरुषोत्तम भदौरिया, 36, ने उल्लेख किया कि यद्यपि उनके सभी बच्चे “अच्छे छात्र” हैं, रोशनी इस तरह के उच्च अंक हासिल करने वाले क्षेत्र के पहली व्यक्ति हैं।वह अपने भविष्य के लिए उत्साहित है और चाहता है कि वह पढ़ाई जारी रखे।उन्होंने कहा, “मैं उसे बड़ी डिग्रियां दिलाना चाहता हूं और बड़े शहरों में बड़ी कंपनियों में काम करना चाहता हूं।”
खुद लड़की के लिए, वह भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में शामिल होने और “अच्छा काम” करने के लिए कलेक्टर बनने की महत्वाकांक्षा को दूर करती है और एक बदलाव लाती है, यही कारण है कि उसने कक्षा 11 में गणित का विकल्प चुनने का फैसला किया है।स्कूल जाने के लिए उसके साइकिल पर वापस जाने का इंतजार नहीं कर सकती, क्योंकि यह एक बार फिर से खुल जाती है, क्योंकि वह एक दिन भी लापता होने का सपना नहीं देखती।
यह ऐसे छात्र हैं जो दूसरों के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन जाते हैं!
तो अब आपको एमपी लड़की साइकिल से स्कूल 24किमी जाती थी (MP girl went to school 24Km by bicycle) ,की सफलता का रहस्य समझ में आ गया होगा।

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