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Mathematician Sujatha Ramdorai

1.गणितज्ञ सुजाता रामदोरई,गणितज्ञ प्रोफेसर सुजाता रामदोरई का परिचय (Mathematician Sujatha Ramdorai,Mathematician Professor Sujatha Ramdorai)-

गणितज्ञ सुजाता रामदोरई,गणितज्ञ प्रोफेसर सुजाता रामदोरई (Mathematician Sujatha Ramdorai,Mathematician Professor Sujatha Ramdorai) के बारे में इस आर्टिकल में अध्ययन करेंगे।गणितज्ञ सुजाता रामदोरई (Mathematician Sujatha Ramdorai) का गणित में अद्भुत योगदान है।
आज की नारी सुषुप्तावस्था में नहीं है।यदि नारी को अवसर प्रदान किया जाए तो वह अपना तेजस्वी रूप दिखा देगी।
जीजाबाई ने छत्रपति शिवाजी गढ़ दिया।झांसी की रानी ने रणभूमि में जौहर दिखाकर इतिहास रच दिया।रत्नावली ने रामबोला को तुलसीदास बना दिया।
अब भी नारी हर क्षेत्र में प्रगति कर रही है।शिक्षा, राजनीति,प्रशासन, विज्ञान,अंतरिक्ष,साहसिक कार्य,खेल के मैदान यानि हर क्षेत्र में देवियां नित नए झंडे गाड़ रही है।
जहां-जहां अवसर मिला,उसने दिखा दिया कि वह पुरुषों से किसी क्षेत्र में कम नहीं है। आधुनिक युग में तो बहुत सी नई मिसालें मिल रही है।
चिंता का विषय यह है कि पुरुष प्रधान समाज में नारी की असाधारण क्षमता का शोषण और दुरुपयोग किया जा रहा है।
प्रगति के नाम पर शिक्षा के साथ संस्कार नहीं अश्लीलता,स्वच्छंदता,फजूलखर्ची, तड़क-भड़क और कामुकता जैसे अवगुण बढ़ते जा रहे हैं।
जिधर देखो उधर ही नारी का शोषण दिखाई दे रहा है। विज्ञापन, समाचार पत्र, टेलीविजन जैसे असाधारण लोकप्रिय प्रचार माध्यमों में दिखाए जाने वाले असंस्कृत रूप को ही नारी के उत्कर्ष के रूप में देखा जा रहा है।
कष्टप्रद यह है कि नारी ने भी इस षड़यंत्र में फंसकर घुटने टेक दिए हैं और इस दासता को स्वीकार कर लिया है।ऐसी प्रगति से उज्ज्वल भविष्य की आशा कैसे की जा सकती है?
सौभाग्य से समाज के बदलते चिंतन और प्रशासनिक पहल से देश-विदेशों में नारी को नित नए अवसर मिल रहे हैं।
शरीर से स्वस्थ,मन से स्वच्छ,आत्मबल सम्पन्न नारी ही इन अवसरों का सही-सही लाभ उठाकर प्रगति को सही दिशा दे पाएगी।
गणितज्ञ सुजाता रामदोरई (Mathematician Sujatha Ramdorai) ने भी इन्हीं अवसरों का लाभ उठाकर भारत के गौरव को बढ़ाया है। अन्य महिलाओं को भी इनसे सीख लेनी चाहिए।
यदि वह गणितज्ञ सुजाता रामदोरई (Mathematician Sujatha Ramdorai) जैसी महिलाओं से सीख नहीं लेगी अर्थात् वह अज्ञानता,मूढ़मान्यता,संस्कारहीनता की अवस्था में पड़ी रही तो लाख सहारा देने पर भी वह अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो सकेगी।ऐसी नारियों से सृजन की आशा कैसे की जा सकती है?
अपनी प्रतिभा को सही दिशा में निखारकर ही वह माता-पिता,समाज व देश का गौरव बढ़ा सकती है।
इसलिए नौकरी के लिए ही पढ़ाई की आवश्यकता है या शिक्षा नारी के लिए शादी का सर्टिफिकेट है,यह सोचकर नारी शिक्षा की उपेक्षा करना उसे मानसिक दृष्टि से अपंग बना देने जैसा अन्याय है।
अतः महिलाओं की शिक्षा पर पर्याप्त ध्यान देने की आवश्यकता है। गणितज्ञ सुजाता रामदोरई (Mathematician Sujatha Ramdorai) ने गणित के क्षेत्र में असाधारण कार्य किया है। इससे अन्य महिलाओं को गणितज्ञ सुजाता रामदोरई (Mathematician Sujatha Ramdorai) से प्रेरणा मिल सकेगी।
नारी के पिछड़ेपन और शोषण का कारण मात्र सामाजिक बंधन नहीं है बल्कि आत्मनिर्भर न होना भी एक कारण है। आत्मनिर्भर न होने के कारण उसे दबाया जाता है और दबना पड़ता है।
यदि नारी आत्मनिर्भर हो सके तो गणितज्ञ सुजाता रामदोरई (Mathematician Sujatha Ramdorai) की तरह नारी में आत्म-विश्वास और मनोबल बढ़ेगा।
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2.गणितज्ञ सुजाता रामदोरई,गणितज्ञ प्रोफेसर सुजाता रामदोरई (Mathematician Sujatha Ramdorai,Mathematician Professor Sujatha Ramdorai),सुजाता रामदोरई पर निबंध
(Essay on Sujatha Ramdorai)-

(1.)सुजाता रामदोरई की जीवनी (sujatha ramdorai biography)-

सुजाता रामदोरई
जन्म-1962
राष्ट्रीयता -भारतीय
नागरिकता -भारतीय
अल्मा मेटर -सेंट जोसेफ कॉलेज, बैंगलोर,अन्नामलाई विश्वविद्यालय
टीआईएफआर
पहचान- नॉन-कम्यूटेटिव इवासावा सिद्धांत,बीजगणितीय किस्मों का अंकगणित के लिए जानी जाती है।
पुरस्कार-आईसीटीपी रामानुजन पुरस्कार (2006)
शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार (2004)
अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट फेलो (1997-1998)
वैज्ञानिक कैरियर
फील्ड्स-गणित
संस्थान-टीआईएफआर
ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय
डॉक्टरल सलाहकार-रमन परिमाला

(2.)सुजाता रामदोरई का गणित में योगदान (sujatha ramdorai contribution to maths)-

सुजाता रामदोरई (जन्म 1962) एक बीजगणितीय संख्या सिद्धांतकार है जो इवासावा सिद्धांत पर अपने काम के लिए जानी जाती है।नॉन-कम्यूटेटिव इवासावा सिद्धांत,बीजगणितीय किस्मों का अंकगणित के लिए जानी जाती है।
वह ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय, कनाडा में गणित और कनाडा अनुसंधान अध्यक्ष की प्रोफेसर हैं।वह पहले टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में प्रोफेसर थीं।

3.सुजाता रामदोरई शिक्षा (Sujatha Ramdorai Education)-

उन्होंने 1982 में सेंट जोसेफ कॉलेज, बैंगलोर में अपना बीएससी पूरा किया और फिर 1985 में अन्नामलाई विश्वविद्यालय से पत्राचार के माध्यम से एमएससी की। उसके बाद वह टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में पीएचडी के लिए गईं और 1992 में रमन परिमाला की देखरेख में उन्हें पीएचडी से सम्मानित किया गया।उनका शोध प्रबंध “रियल सर्फेस आफ विट ग्रुप्स और रियल ज्योमेट्री ” था।

4.कैरियर (Career)-

डॉ.रामदोराई ने शुरू में द्विघात रूपों के बीजगणितीय सिद्धांत और दीर्घवृत्तीय वक्रों के अंकगणितीय ज्यामिति के क्षेत्रों में काम किया।Coates, Fukaya, Kato, और Venjakob के साथ मिलकर उन्होंने इवासावा सिद्धांत के मुख्य अनुमान का एक गैर-कम्यूटेटिव संस्करण तैयार किया, जिस पर इस महत्वपूर्ण विषय की बहुत नींव आधारित है।इवासावा सिद्धांत की उत्पत्ति एक महान जापानी गणितज्ञ, केनकिची इवासावा के काम में हुई है।
वह इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च, पुणे में एक सहायक प्रोफेसर पद पर हैं।
अपने पति श्रीनिवासन रामदोरई और भारतीय गणित लेखक वी.एस.शास्त्री, सुजाता रामदोरई ने आंध्र प्रदेश के चित्तूर में रामानुजन गणित पार्क की कल्पना की और आंशिक रूप से वित्त पोषित किया, जिसका उद्घाटन 2017 के अंत में किया गया था।यह पार्क गणित की शिक्षा के लिए समर्पित है और महान भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन (1887-1920) को सम्मानित करता है।
वह कई अंतरराष्ट्रीय शोध एजेंसियों की वैज्ञानिक समिति की सदस्य हैं, जैसे कि इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर प्रमोशन ऑफ एडवांस्ड रिसर्च, बैन्फ इंटरनेशनल रिसर्च स्टेशन, इंटरनेशनल सेंटर फॉर प्योर एंड एप्लाइड मैथमैटिक्स।वह 2007 से 2009 तक राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की सदस्य थीं। वह वर्तमान में 2009 से प्रधान मंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद की सदस्य हैं और राष्ट्रीय नवाचार परिषद की सदस्य भी हैं।वह गोनीत सोरा के सलाहकार बोर्ड में भी हैं।

5.पुरस्कार और सम्मान (Awards and Honour)-

रामदोरई 2006 में प्रतिष्ठित ICTP रामानुजन पुरस्कार जीतने वाले पहली भारतीय बनी। उन्हें शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया, जो 2004 में भारत सरकार द्वारा वैज्ञानिक क्षेत्रों में सर्वोच्च सम्मान था।गणित अनुसंधान में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें 2020 क्राइगर-नेल्सन पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।

6.रमन परिमाला (Raman Parimala)-

रमन परिमाला (जन्म 21 नवंबर 1948) एक भारतीय गणितज्ञ हैं जो बीजगणित में योगदान के लिए जानी जाती हैं।वह एमोरी विश्वविद्यालय में गणित के कला और विज्ञान के प्रतिष्ठित प्रोफेसर हैं।कई सालों तक, वह टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR), मुंबई में प्रोफेसर थीं।

7.नीना गुप्ता गणितज्ञ (Neena Gupta Mathematician)-

नीना गुप्ता भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI), कोलकाता की सांख्यिकी और गणित इकाई में एक एसोसिएट प्रोफेसर हैं।उसकी रुचि के प्राथमिक क्षेत्र क्रमविनिमेय बीजगणित और अल्पाइन (affine) बीजगणितीय ज्यामिति हैं।
उपर्युक्त आर्टिकल में हमने गणितज्ञ सुजाता रामदोरई,गणितज्ञ प्रोफेसर सुजाता रामदोरई (Mathematician Sujatha Ramdorai,Mathematician Professor Sujatha Ramdorai) के बारे में अध्ययन किया है।आशा है इस आर्टिकल से महिलाओं को प्रेरणा मिल सकेगी साथ आप भारत की महान गणितज्ञ सुजाता रामदोरई (Mathematician Sujatha Ramdorai) के बारे में भी जान सकेंगे।

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