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Ancient Greek Mathematicians and the Modern world

Ancient Greek Mathematicians and the Modern world

1.परिचय -प्राचीन यूनानी गणितज्ञ (Introduction-Ancient Greek Mathematicians)-

प्राचीन गणितज्ञों  ने  गणित  की नींव डालने के लिए बहुत त्याग ,तपस्या और बालिदान दिया है। उनके कार्यो  के द्वारा वे  हमेशा  जीवित  रहेंगे। ऐसी  बात नहीं है  कि अन्य  कार्यो  को  स्थापित करने  के  लिए  बलिदान  नहीं दिया  गया  है ,हर  कार्य  को  खड़ा  करने   के  लिए  बलिदान  देना  ही  होता  है ,इसी  प्रकार  गणित  के  कार्य  को खड़ा  करने  के  लिए  भी  त्याग ,समर्पण  किया  है। वे  सभी   गणितज्ञ  हमेशा   याद  किए  जाएगें। हम  ऐसे  कुछ  गणितज्ञों  के  बारे में  बता  रहे है। 

2.प्राचीन यूनानी गणितज्ञ और आधुनिक दुनिया(Ancient Greek mathematicians and the modern world)-

Ancient Greek Mathematicians and the Modern world

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लगभग 2,500 साल पहले, क्रांतिकारी विचारकों के एक समूह ने गणित के बारे में हमारे सोचने के तरीके को बदल दिया। प्रमाण के विचार के माध्यम से, प्राचीन यूनानियों ने दिखाया कि गणित केवल गणना करने के बारे में नहीं है, बल्कि हमारे आसपास की दुनिया की वास्तविकता को समझने और परीक्षण करने का एक तरीका है।प्लेटो की अकादमी के ऊपर के संकेत को पढ़ने के लिए कहा गया था: “έτ έτμητρςος ο μον στέγην τήν।” दूसरे शब्दों में, “ज्यामिति से कोई भी अनजान व्यक्ति यहां प्रवेश न करें।” और महान आर्किमिडीज को एक सैनिक ने भी मार दिया था क्योंकि उसने छोड़ने से इनकार कर दिया था। एक सबूत अधूरा।
लेकिन, सबूत क्या है? सीधे शब्दों में कहें, एक प्रमाण यह प्रदर्शित करने के लिए एक ठोस तर्क है कि क्या कुछ सच है या गलत है। उदाहरण के लिए, यदि सभी कुत्तों के चार पैर हैं, तो: क्या यह कुत्ता है? यह साबित करना आसान है कि सिर्फ इसलिए कि सभी कुत्तों के चार पैर होते हैं, चार पैरों वाला सब कुछ एक कुत्ता नहीं है।
एक गणितीय प्रमाण के बारे में कैसे? आपने शायद पाइथागोरस के प्रमेय के बारे में सुना है, एक समकोण त्रिभुज के पक्षों के बारे में गणितीय तथ्य। यहाँ प्रमेय का एक प्रदर्शन है।

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क्या यह आपको मना लेता है? अच्छे प्रमाण निर्विवाद रूप से सत्य हैं।पाइथागोरस के आसपास होने के 200 साल बाद, एक और ग्रीक गणितज्ञ ने यूक्लिड को प्रमाण लिखने का तरीका बताया। स्वयंसिद्ध के रूप में ज्ञात कुछ बुनियादी मान्यताओं के साथ, यूक्लिड कई अन्य गणितीय परिणामों को साबित करने में सक्षम था। उन्होंने इन परिणामों को द एलीमेंट्स नामक एक उल्लेखनीय पुस्तक में संकलित किया, और उनके प्रमाण आज भी उतने ही सच हैं जितने पहले लिखे गए थे और आधुनिक गणित की नींव बना चुके हैं।
अनंत अभाज्य संख्याओं के बारे में सबूतों से लेकर इंजीनियरिंग में इस्तेमाल होने वाले गणितीय सूत्रों तक इंटरनेट एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल किया, प्राचीन यूनानियों ने वैज्ञानिकों, अर्थशास्त्रियों, वकीलों, वास्तुकारों और अच्छी तरह से, सभी के बारे में, हमारी दुनिया की नई गणितीय समझ प्रदान की है।

4.प्रमुख गणितज्ञ (Prominent Mathematicians) –

(1.)पाइथागोरस

गणित के क्षेत्र में अनेक विद्वान हुए हैं जिनमें से पाइथागोरस भी एक उच्चकोटि के गणितज्ञ थे। इनका जन्म ग्रीस के निकट एजियन सागर के मध्य, सामोस(samos) नामक द्वीप में ईसा से लगभग 580 वर्ष पूर्व हुआ था। इनके माता-पिता तैरियन वंश के थे। इनके गुरु, मिलेट्स निवासी थेल्स (Thales) इतिहास प्रसिद्ध ग्रीस के सात विद्वानों में से एक थे। उनके आदेश पर आदेश पर पाइथागोरस ने मिश्र-देश में जीवन का प्रारम्भिक काल व्यतीत किया। वहाँ लगभग 22 वर्ष रहकर उन्होंने विभिन्न गणित का गहन अध्ययन किया।
इसके बाद लगभग 12 वर्ष बाद इराक, ईरान और भारत की यात्रा में व्यतीत करके पाइथागोरस स्वदेश लौट गए। तब तक इनकी आयु लगभग 50 वर्ष हो चुकी थी। वे सामोस में नहीं रह पाए। समोस छोड़कर दक्षिण इटली के क्रोटोना (crotona) नगर में आ बसे। वहाँ मिलो नामक व्यक्ति के अतिथि बने रहे। वहीं लगभग 60 वर्ष की आयु में मिलो की तरुण एवं सुन्दर कन्या थियोना से विवाह किया। कहा जाता है कि थियोना ने अपने पति के जीवन-चरित्र पर एक पुस्तक भी लिखी है जो आज अप्राप्य है।
क्रोटोना में बस जाने के बाद पाइथागोरस ने गणित और दर्शनशास्त्र पर व्याख्यान देना प्रारंभ किया। सभी वर्गों के लोग इनके विद्वतापूर्ण भाषण सुनने आते थे। वहाँ वैधानिक रूप से सार्वजनिक भाषणों में स्त्रियों के आने पर रोक थी परन्तु फिर भी स्त्रियाँ, इस नियम का उल्लंघन कर काफी संख्या में इनका भाषण सुनने आया करती थीं।
इनके भाषण इतने प्रभावशाली होते थे कि नियमित रूप से भाषण सुनने वालों ने अपना एक स्वतंत्र संगठन तैयार कर लिया। वही संगठन पाइथागोरस स्कूल के नाम से प्रसिद्ध हुआ। उस संगठन के अपने कुछ विशेष नियम थे जैसे – संस्था की सभी वस्तुओं पर समान अधिकार तथा सभी सदस्यों की दार्शनिक विचारों एवं मान्यताओं में समानता।सभी सदस्यों को शपथ लेनी पड़ती थी कि वे अपनी गुप्त विद्या को किसी बाहरी व्यक्ति के सामने व्यक्त न करेंगे। उस संगठन का यह नियम भी था कि प्रत्येक खोज तथा आविष्कार को पाइथागोरस के नाम से जोड़ा जाए। इसलिए आज यह पता लगाना असम्भव प्रतीत होता है कि कौनसी खोज स्वयं पाइथागोरस ने की और कौनसी शिष्यों ने।
आजकल पढ़ाई जानेवाली ज्यामिति ग्रीक गणितज्ञ यूक्लिड के एलिमेण्ट्स (Elements) पर आधारित है। उसी ग्रन्थ का 47 वाँ प्रमेय पाइथागोरस प्रमेय के नाम से प्रसिद्ध है जिसमें बताया गया है कि समकोण त्रिभुज के कर्ण पर आधारित चौरस (Rectangular) इस त्रिभुज के लम्ब और पाए पर आधारित चौरसों के योग के तुल्य होता है।
प्राचीनकाल में भारतवर्ष में यज्ञ आदि के लिए जो वेदी बनायी जाती थी, इसके निर्माणार्थ ज्यामितीय आकारों का निश्चित विधान था। वह विधान हमें ‘शल्वसूत्र’ ग्रन्थों में मिलता है। साथ ही 3^2+4^2=5^2 का सम्बन्ध भी अनेक सम्बन्धों सहित मिलता है। इससे यह भी पुष्टि होती है कि पाइथागोरस सचमुच भारत आया था और उसने भारत की प्राचीन ज्यामिति को सीखा था।
इसके अतिरिक्त पाइथागोरस ने संख्या-शास्त्र पर कार्य किया है। उसने समस्त संख्याओं को सम और विषम भागों में बाँटा हैं। उसी से विषम संख्याओं को शुभ और सम संख्याओं को अशुभ मानने की एक प्रथा चल पड़ी। संख्याओं के सम्बन्ध में कुछ और भी विचित्र मान्यताएँ थी जैसे – एक का अंक विचार का, दो तर्क का, चार न्याय का, पाँच विवाह का द्योतक है। इसी प्रकार ज्यामिति में एक का अंक बिन्दु का, दो रेखा का, तीन समतल का और चार ठोस का प्रतीक माना जाता था। इन्हीं कुछ संख्याओं को त्रिभुज संख्या नाम दिया जैसे – 3,6और 10 आदि त्रिभुज संख्याएँ हैं। प्रथम तीन संख्याओं का योग 1+2=3 प्रथम त्रिभुज संख्या कहलाती है। प्रथम तीन संख्याओं का योग 1+2+3=6 द्वितीय त्रिभुज संख्या और प्रथम चार संख्याओं का योग 1+2+3+4=10 तीसरी त्रिभुज संख्या कहलाती थी।
पाइथागोरस स्कूल न गणित के अनेक शब्दों को जन्म दिया जैसे – मैथेमेटिक्स (Mathematics), पैराबोला (Parabola),ईलिप्स (Elipse), और हाईपरबोला (Hyperbola) ।मिस्रवासियों को केवल तीन ठोस ज्ञात थे – घन(Cube),समचतुष्फलक (Tetrahedron),और समअष्टफलक (Octahedron) ।पाइथागोरस ने दो समठोसों समद्वादशफलक (Dodecahedron) और विंशतिफलक (Icosahedron) की खोज की।
वास्तव में पाइथागोरस और उसके द्वारा संस्थापित स्कूल की गणितशास्त्र को जो देन है, उसका ग्रीक गणित में सर्वोच्च स्थान है। पाइथागोरस की कई धारणाएँ आधुनिक काल के गणित में पूर्णरूप से विकसित है।

(2.)यूक्लिड(Euclid)-

यूक्लिड के जन्म और मृत्यु का ठीक-ठीक पता नहीं है। इतना अवश्य मालूम है कि उसका समय 300 ई. पू. के लगभग था। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा एथेन्स में हुई। टोलेमी प्रथम (ptolemy I) के राज्यकाल (306 ई. पू. से 283 ई. पू. तक) में इन्होंने सिकन्दरिया (Alexanderia) में एक स्कूल खोला। ऐसा कहा जाता है कि एक बार इसके एक शिष्य ने ज्यामिति का प्रथम साध्य पढ़ने के बाद कहा कि इसके सीखने से क्या मिलेगा। यूक्लिड ने अपने नौकर से कहा कि इसे 6 पैनी दे दो क्योंकि यह प्रत्येक बात में लाभ ही चाहता है।
यूक्लिड का सबसे विख्यात ग्रन्थ ‘एलिमेण्ट्स’ जिसके 1882 ई. से अब तक एक हजार से अधिक संस्करण हो चुके हैं। इस ग्रन्थ की विषय-सूची निम्नलिखित है –
1.सर्वांगसमता (congruency)और समानता (parallelism)
2.बीजगणितीय सर्वसमिकाएँ और क्षेत्रफल (Algebraic Identity and Area)
3.वृत्त (Circle)
4.अन्तर्गत और परिगत बहुभुज (Inscribed and Circumscribed Polygons)
5.समानुपात (Proportion)
6.बहुभुजों की समरूपता ( Similarity of Polygons)
7.-9अंकगणित (Arithmetic)
10.असुमेय राशियाँ (Irrational Numbers)
11-13.ठोस ज्यामिति (Solid Geometry)
इस ग्रन्थ के अतिरिक्त यूक्लिड के अन्य ग्रन्थ निम्नलिखित हैं-
(1.)डेटा(Data) – इसमें 94 साध्य दिए गए हैं। इन साध्यों में किसी आकृति के कुछ अंग (Elements) ज्ञात होने पर शेष अंग ज्ञात करने की विधि का उल्लेख है।
(2.)आकृतियों के विभाजन पर एक पुस्तक – इस पुस्तक का विषय है कि यदि कोई आकृति त्रिभुज, चतुर्भुज, वृत्त आदि दी हुई हो तो ऐसे दो भागों में किस प्रकार विभाजित किया जाए कि उन दोनों भागों के क्षेत्रफल में एक निर्दिष्ट (Given) अनुपात हो।
(3.)स्यूडेरिया (Pseudaria) – इस पुस्तक में यह विषय वर्णित किया गया है कि ज्यामिति के अध्ययन में विद्यार्थी आमतौर पर कौन-कौनसी गलतियाँ करते हैं।
(4.)शांकव (Conic) -यह पुस्तक चार जिल्दों में है।
(5.)पोरिज्म्स(Porisms)-इस ग्रन्थ में उच्च ज्यामिति विषय वर्णित किया गया है।
(6.)तल-बिन्दुपथ (Surface Loci)-यह ग्रन्थ दो भागों में वर्णित है।
यूक्लिड की अन्य कृतियाँ ज्योतिष, संगीत, चाक्षुषी(Optics) आदि पर हैं।

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