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How do Students Remain Aware and Alert?

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1.छात्र-छात्राएं जागरूक और सचेत कैसे रहें? (How do Students Remain Aware and Alert?),गणित के छात्र-छात्राएं जागरूक और सचेत कैसे रहें? (How do Mathematics Students Remain Aware and Alert?):

  • छात्र-छात्राएं जागरूक और सचेत कैसे रहें? (How do Students Remain Aware and Alert?) क्योंकि जागरूक व सचेत न रहने पर उनका समय अध्ययन तथा गणित की समस्याओं को हल करने के बजाय आलस्य,प्रमाद तथा अस्त-व्यस्तता इत्यादि में व्यतीत होता है।जागरूक और सचेत एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।जो जागरूक रहता है वह सचेत भी हो ही जाता है तथा जो सचेत है वह जागरूक भी हो जाता है।आलस्य,प्रमाद में समय व्यतीत करने पर छात्र-छात्राएं मूर्च्छित-मृतक के समान हो जाते हैं और अध्ययन-अध्यापन को विस्मृत कर देते हैं।वैसे भी छात्र-छात्राएं अध्ययन और गणित का अध्ययन करते हैं तो मानसिक थकान हो जाती है।मानसिक थकान के फलस्वरूप जिन्दगी का एक तिहाई हिस्सा विश्राम में गुजार देते हैं।
    जागरूक छात्र-छात्राएं हर क्षण का सदुपयोग करते हैं साथ ही वे हमेशा अपने मन का निरीक्षण करते रहते हैं कि कहीं मन भटक न जाएं।क्योंकि आलस्य,प्रमाद,लापरवाही,तृष्णा,लोभ इत्यादि विकार ऐसे हैं जो यदि जरा सी चूक भी कर दी जाए तो मन पर कब्जा कर लेते हैं।इसके पश्चात मन को मनमानी कराने की ओर अग्रसर करते हैं।
  • जागरूक व सचेत रहने पर यदि हम विश्राम कर रहे होते हैं तो हमारी चेतना लगातार चौकीदारी करती रहती है ताकि सोए रहने पर भी मन के दुश्मनों आलस्य इत्यादि को सेंध लगाने,चोरी से घुस जाने का अवसर न मिले।
  • जागरूकता को हर घड़ी रखे जाने पर ही छात्र-छात्राएं अध्ययन जैसे कार्य को करते रह सकते हैं।क्योंकि इसमें असावधानी या उपेक्षा करते ही हमारा ध्यान अध्ययन कार्य से हट जाता है।यों भी गणित जैसे जटिल विषय में असावधानी तथा अव्यवस्था से हम विपत्ति या दुर्गति ही कराते हैं।कहा भी गया है कि सावधानी हटी और दुर्घटना घटी।एक बार मन अध्ययन करने की पटरी से उतर जाता है तो अध्ययन करने के लिए वापस मन को साधना कठिन हो जाता है।जो छात्र-छात्राएं जागरूकता और सचेतनता के महत्त्व को नहीं जानते हैं वे अपना काम आप बिगाड़ने,अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने का काम करते हैं।
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2.छात्र छात्राएं जागरूक रहें (Students Should be Aware):

  • जागरूकता के अभाव में छात्र-छात्राओं को तत्काल राहत मालूम होती है परंतु दुर्व्यसनों,मनोविकारों को अपनाने वाला पुरुषार्थहीन होकर अध्ययन के उस उत्कृष्ट लाभ से वंचित रहता चला जाता है जो सक्रिय,जागरूक रहने पर उसे उपलब्ध होती रह सकती थी।ऐसे छात्र-छात्राएं जॉब के अवसर,प्रवेश परीक्षा में सफलता,शैक्षिक परीक्षा में सफलता जैसे अवसरों को चूकता-गँवाता चला जाता है।फलतः उन्हें असफलता,पिछड़ेपन की स्थिति ही हाथ लगती है।छात्र-छात्राओं की क्षमताएं दम तोड़ने लगती है।सक्रिय,सावधान,जागरूक न रहने पर जिनसे सहयोग मिल सकता था और अध्ययन में प्रगति की संभावनाओं में सहायक हो सकता था,उससे भी वंचित होना पड़ता है।
  • छात्र-छात्राओं के लिए जिन आवश्यक गुणों को बिना चूक अपनाने का निर्धारण किया गया है उनमें जागरूकता का सबसे प्रमुख स्थान है।जागरूकता के आधार पर ही अध्ययन को,जॉब को,गणित की समस्याओं को तथा जीवन की समस्याओं और गुत्थियों को ठीक प्रकार से किया और सुलझाया जा सकता है।इस दशा में चेतना के जागृत रहने अर्थात् चेतना से जुड़े रहने पर ही अध्ययन और गणित की समस्याओं को हल करने में बरती जाने वाली ढिलाई,लापरवाही,सुस्ती को हटाने और दूर करने के उपाय सूझते हैं और उसको दूर करने के उपाय करते हैं।यदि जागरूकता न हो तो आलस्य,लापरवाही,सुस्ती,ढिलाई सूझती नहीं बल्कि सुहानी लगती है।धीरे-धीरे ये इतनी विकराल रूप धारण कर लेते हैं कि पढ़ना-लिखना और गणित के सवालों को हल करने से कन्नी काटते हैं।
  • अध्ययन तथा गणित के सवालों को अपना जीवन क्षेत्र अपना लिया जाए उसमें अनेक छिद्र दिखाई देते हैं अथवा हो सकते हैं।यदि उन छिद्रों (आलस्य,लापरवाही,सुस्ती,प्रमाद इत्यादि) को बंद नहीं किया जाए तो अध्ययन और गणित में आपकी जो प्रतिभा है वह भी उन छिद्रों के द्वारा धीरे-धीरे बिखर जाती है,समाप्त हो जाती है।अन्ततः हमारे अन्दर दुष्प्रवृत्तियों का कूड़ा-कचरा जमा हो जाता है और व्यक्तित्व प्रतिभा से खाली हो जाता है।

3.जागरूकता का प्रभाव (Impact of Awareness):

  • समय सबसे अमूल्य धरोहर है।प्रकृति द्वारा प्रदत्त यह ऐसा अनुदान है कि इसके बदले गणित में अपनी प्रतिभा को निखार सकते हैं,सँवार सकते हैं तथा सफलताएँ प्राप्त कर सकते हैं।संसार में जितने भी प्रगतिशील,विख्यात,विद्वान,मनीषी,गणितज्ञ और वैज्ञानिक हुए हैं उन्होंने अपने जीवन को इस प्रकार ढाला है कि एक क्षण भी बेकार न हो जाए,एक भी निरर्थक कार्य उनकी गतिविधियों में शामिल न हो जाए,एक भी आवश्यक कार्य छूटने न पाए।सभी को 24 घंटे का समय हर दिन मिलता है,पर यह अपने हाथ की बात है कि उसे किस प्रयोजनों में प्रयुक्त किया जाए।यह कार्य समग्र जागरूकता रखते हुए हो सकता है।
  • मनन-चिंतन भी गलत दिशा में किया जाए तो वह प्रगति और विकास में रोड़ा बन जाती है।गणित के किस क्षेत्र को अपनाना है,किस मार्ग पर चलकर आगे बढ़ा जा सकता है,उसको हल करने के लिए किन-किन योग्यताओं की आवश्यकता है इत्यादि कार्य पद्धति में चिन्तन-मनन का ताना-बाना बुना जाए।अनावश्यक बातों और चीजों की ओर मन को न दौड़ने की संकल्प शक्ति को ही जागरूकता कहते हैं।
  • वातावरण का भी छात्र-छात्राओं पर असाधारण प्रभाव पड़ता है।जैसे यदि कहीं पर स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाता है तो वहाँ के लोगों तथा शहर व नगर में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता देखी जा सकती है,जिस स्थान पर चोर,जुआरी,ठग,पाखण्डियों,व्यभिचारियों,लुटेरों इत्यादि का जमावड़ा है तो अन्य व्यक्ति व छात्र-छात्राओं पर उनका प्रभाव पड़ता है तथा वे भी वैसे ही बनने लगते हैं।इसी प्रकार जहां अध्ययन तथा गणित के अध्ययन में शिक्षा का वातावरण है तो वहां पर गणित के क्षेत्र में,अध्ययन के क्षेत्र में आगे से आगे बढ़ने की जागरूकता देखी जा सकती है।बुरे वातावरण में रहने पर बुरे तथा अच्छे वातावरण में अच्छा बनने के सांचे में ढलने की होड़ सी लग जाती है।ऐसे छात्र-छात्राएं तथा लोग विरले ही होते हैं जिन पर वातावरण का प्रभाव नहीं पड़ता है तथा वे अपने व्यक्तित्व के मालिक स्वयं होते हैं।जैसा व्यक्तित्व गढ़ना और बनाना होता है वैसा ही बना लेते हैं।ऐसे लोग किसी झील में टापू की तरह उभरे रहते हैं।संकल्प शक्ति के बल पर दुष्प्रवृत्तियों के प्रभाव को रोका जा सकता है अथवा अप्रभावित रहा जा सकता है।

4.जागरूक और सचेत होने का दृष्टांत (The example of Being Aware and Conscious):

  • मनस्वी और तेजस्वी छात्र-छात्राएं अपने मनोबल के द्वारा अपने अनुकूल वातावरण उत्पन्न कर लेते हैं।ऐसे छात्र-छात्राओं से दुष्प्रवृत्तियाँ टकराकर वापस लौट जाती है क्योंकि वे अपने व्यक्तित्व को ऐसा विकसित कर लेते हैं तथा हमेशा जागरूक व सचेत रहते हैं।यह अवश्य है कि अध्ययन करना और गणित का अध्ययन करना कठोर साधना है इसलिए इसके अनुकूल प्रभाव बनने में समय लगता है।जबकि दुष्प्रभाव तेजी से फैलता है व फलता है।पहाड़ पर चढ़ने पर पसीने से तरबतर हो जाते हैं और परिश्रम भी अधिक करना पड़ता है परंतु पहाड़ से नीचे उतरने में,नीचे गिरने में विशेष प्रयास और परिश्रम की आवश्यकता नहीं होती है।
  • अध्ययन का ऊंचा स्तर प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या इसीलिए कम होती है।परंतु जिन्हें अध्ययन करना होता है तो वे जिनके पास अध्ययन की सुविधा नहीं होती है तो दूर भी अध्ययन-अध्यापन की सुविधा प्राप्त कर लेते हैं।ओर नहीं तो सद्ग्रंथों से ही अध्ययन कर लेते हैं।वातावरण,संपर्क,संबंधों तथा अध्ययन-मनन-चिंतन करने में हर कहीं जागरूक और सचेत रहने की आवश्यकता है।
  • बालक ध्रुव बचपन से ही पढ़ने में होशियार थे।अध्ययन के प्रति इतने जागरूक थे कि ओर कुछ सुहाता ही नहीं था।परंतु गांव के अन्य बालक खेलने-कूदने और मौजमस्ती करने में लगे रहते थे।गांव में उच्च शिक्षा का कोई इंतजाम नहीं था।घर वाले भी उसको आगे पढ़ाना नहीं चाहते थे।परंतु ध्रुव को अध्ययन करने की इतनी लगन थी कि वह अध्ययन ही करना चाहता था।
  • गांव में उच्च शिक्षा उपलब्ध न होने के कारण पास के नगर में बीएससी (गणित) के प्रथम वर्ष में प्रवेश ले लिया।कॉलेज की फीस,मकान किराया,भोजन का खर्चा तथा पुस्तकों का खर्चा इतना था कि उसकी व्यवस्था कैसे हो?विचार मंथन करने के बाद ध्रुव ने निश्चय किया कि बच्चों को ट्यूशन कराकर स्वयं के खर्चे का इंतजाम करेगा।
  • गणित विषय से बीएससी करने के साथ-साथ नीति,सदाचार,धार्मिक पुस्तकें पढ़ने तथा प्रेरणादायक महापुरुषों की पुस्तकें पढ़ने का भी ध्रुव को शगल था।
  • उसे हर व्यक्ति हतोत्साहित करता कि पढ़ने-लिखने में क्या धरा है? कोई छोटा-मोटा धंधा,हुनर सीख लो तो तुम्हारी जिन्दगी आसानी से पार हो जाएगी।बालक ध्रुव लोगों की बात एक कान से सुनता और दूसरे कान से निकाल देता था।अंत में उसने बीएससी करने के साथ-साथ ही सदाचार,धार्मिक व नैतिक बातों को अपने आचरण में उतार लिया।
  • पढ़-लिखकर वह इतना प्रकांड विद्वान बन गया कि लोग उससे गणित तथा सदाचार,नीति व धार्मिक बातें सुनने के लिए आने लगे।जब वह उन्हें कोई भी प्रसंग सुनाता तो लोग मन्त्रमुग्ध होकर सुनते थे।
  • गणित के छात्र-छात्राएं उससे पढ़कर अपने आप को धन्य समझते थे।विपरीत परिस्थित के बावजूद ध्रुव की जागरूकता के कारण उसने शिक्षा अर्जित की और प्रकाण्ड विद्वान बन गया।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में छात्र-छात्राएं जागरूक और सचेत कैसे रहें? (How do Students Remain Aware and Alert?),गणित के छात्र-छात्राएं जागरूक और सचेत कैसे रहें? (How do Mathematics Students Remain Aware and Alert?) के बारे में बताया गया है।

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5.गणित सीखने का नुस्खा गालियाँ खाओं (हास्य-व्यंग्य) (The Recipe for Learning Math is to Abuse) (Humour-Satire):

  • एक बच्चा गणित के सवाल हल कर रहा था कि उसे एक शरारती लड़के दिव्य ने गालियाँ देना शुरू कर दिया।बच्चा दौड़कर घर आया ओर पिता से बोला कि मैं गणित के सवाल हल कर रहा था तो दिव्य मुझे गालियाँ देने लगा।
  • पिता (सोचते हुए):बेटा कुछ देता ही है न,लेता तो नहीं।गणित में तो जितना लिया जाए उतना ही सीखने को मिलेगा।

6.छात्र-छात्राएं जागरूक और सचेत कैसे रहें? (Frequently Asked Questions Related to How do Students Remain Aware and Alert?),गणित के छात्र-छात्राएं जागरूक और सचेत कैसे रहें? (How do Mathematics Students Remain Aware and Alert?) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नः

प्रश्नः1.दुर्वचन बोलने वाला किसके समान है? (Who is the One Who Speaks Ill-spoken?):

उत्तरःजो व्यक्ति दुर्वचन बोले उससे लड़ने-झगड़ने का कोई अर्थ नहीं है।क्योंकि दुर्वचन बोलने वाला व्यक्ति एक मृतक के समान होता है।दुर्वचन और क्रोधावेश तथा मृतक में कोई अंतर नहीं है।दुर्वचन बोलने वाला व्यक्ति मृतक के समान उस समय ज्ञान-शून्य हो जाता है।

प्रश्नः2.ज्ञान प्राप्ति की आवश्यक शर्त क्या है? (What is the Essential Condition of Acquiring Knowledge?):

उत्तर:गुरु और शिष्य दोनों में योग्यता होनी चाहिए।यदि गुरु समर्थ व योग्य हो परंतु शिष्य अयोग्य हो तो शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकता है।जैसे बंजर भूमि पर कितनी ही वर्षा होने पर पेड़-पौधे नहीं उगते हैं।गुरु बीज बोता है,खाद-पानी की व्यवस्था जुटाता है और शिष्य रूपी भूमि उपजाऊ हो तो फसल अच्छी पैदा होती है।

प्रश्नः3.विवेक से क्या तात्पर्य है? (What do You Mean by Conscience?):

उत्तरःविवेक वह गुण है जिसके आधार पर प्रचलित मान्यताओं की उपेक्षा करके सत्य को ढूंढ निकाला जाता है।ज्ञान जब अनुभव से होकर गुजरता है तो वही विवेक है।अनुभव सिद्ध ज्ञान ही विवेक है जिसके आधार पर सही-गलत की पहचान की जा सकती है।परंतु व्यक्ति में ज्ञान के अंकुर तब तक नहीं फूटते हैं जब तक उसकी मानसिक और नैतिक मनोभूमि तैयार नहीं हो जाती है।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा छात्र-छात्राएं जागरूक और सचेत कैसे रहें? (How do Students Remain Aware and Alert?),गणित के छात्र-छात्राएं जागरूक और सचेत कैसे रहें? (How do Mathematics Students Remain Aware and Alert?) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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छात्र-छात्राएं जागरूक और सचेत कैसे रहें? (How do Students Remain Aware and Alert?)
क्योंकि जागरूक व सचेत न रहने पर उनका समय अध्ययन तथा
गणित की समस्याओं को हल करने के बजाय आलस्य,प्रमाद तथा अस्त-व्यस्तता इत्यादि में व्यतीत होता है।

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