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Arithmetic and Algebra

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1.अंकगणित और बीजगणित (Arithmetic and Algebra):

अंकगणित और बीजगणित (Arithmetic and Algebra) विषय गणित की शाखाएं है।

(1.)अंकगणित (Arithmetic):

  • गणित की वह शाखा जिसमें वास्तविक संख्याओं के गुणधर्मों एवं संबंधों का अध्ययन किया जाता है तथा मुख्यतः जोड़ (Addition),व्यवकलन (Subtraction),गुणन (Multiplication),एवं भाग (Divination) की सहायता से इन संख्याओं की गणना के संबंध में बताया जाता है।जैसे: किश्तों में भुगतान (Payment in Installments),साझा (Partnership),चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest),सरल ब्याज (Simple Interest),प्रतिशतता (Percentage), लाभ-हानि (Profit and Loss),अनुपात-समानुपात (Ratio and Proportion),बट्टा (Discount),भिन्न एवं दशमलव भिन्न (Fractions and Decimal Fractions),लघुत्तम समापवर्त्य एवं महत्तम समापवर्तक (LCM and HCF),समानुपाती विभाजन (Proportional Division),मिश्रण (Mixture), समय और काम (Time and Work),औसत (Average),चाल,समय और दूरी (Speed,Time and Distance),क्षेत्रफल एवं परिमाप (Area and Perimeter) इत्यादि में जोड़,बाकी,गुणा एवं भाग की सहायता से गणना की जाती है।
  • अंकगणित में संख्याओं का हिसाब,संख्याओं को जोड़ने,घटाने,गुणा,भाग आदि करने की क्रिया अंकों के आधार पर की जाती है।अंको का मूल शून्य है।
  • प्राचीन समय में हमारे देश में अंकगणित को कुट्टक या पाटीगणित कहा जाता था।उस समय पुस्तकों की छपाई प्रारंभ नहीं हुई थी इसलिए अंकगणित तथा अन्य विषयों को कंठस्थ करना होता था।गणित के सूत्र पद्य में ही लिखे जाते थे क्योंकि उनको याद करना आसान होता है।पूर्व में गणना कार्य पाटी अर्थात् तख्ती पर धूल बिछाकर ऊँगली के आगे के भाग या लकड़ी की नुकीली कील से अंक लिखे जाते थे।इसलिए इसे पाटीगणित या धूलि-कर्म कहा जाता था।
    पूर्व में संख्याओं को गिनने के लिए निम्न शब्दों का प्रयोग किया जाता था:
    एक=1
    दश=10
    शत=100
    सहस्र=1000
    अयुत=10000
    लक्ष=100000
    प्रयुत=1000000
    कोटि=10000000
    अर्बुद=100000000
    अब्ज=1000000000
    खर्व=10000000000
    निखर्व=100000000000
    महापद्म=1000000000000
    शंकु=10000000000000
    जलधि=100000000000000
    अन्त्य=1000000000000000
    मध्य=10000000000000000
    परार्ध=100000000000000000
  • यहाँ परार्ध तक ही नाम बताए गए हैं परंतु ललितविस्तर नाम के संस्कृत ग्रंथ में एक के आगे 53 शून्य तक लिखे जाने तक की संख्याओं के नाम बताए गए हैं। भारतीय गणित में देवनागरी लिपि में संख्याओं के नाम निम्न हैं:
    इकाई (Unit)=1
    दस (दहाई) (Tens)=10
    एक सौ (सैकड़ा) (Hundreds)=100
    एक हजार (One Thousand)=1000
    दस हजार (Ten Thousand)=10000
    एक लाख (One Lakh)=100000
    दस लाख (Ten Lakh)=1000000
    एक करोड़ (One Crore)=10000000
    दस करोड़ (Ten Crores)=100000000
    एक अरब=1000000000
    दस अरब=10000000000
    एक खरब=100000000000
    दस खरब=1000000000000
    एक नील=10000000000000
    दस नील=100000000000000
    एक पदम=1000000000000000
    दस पदम=10000000000000000
    एक शंख=100000000000000000
    दस शंख=1000000000000000000
  • अंतरराष्ट्रीय पद्धति में संख्याओं के नाम निम्नलिखित हैं:
    Unit=1
    Tens=10
    Hundreds=100
    One Thousand=1000
    Ten of Thousands=10000
    Hundred of Thousands=100000
    One Million=1000000
    Ten of Millions=10000000
    Hundred of Millions=100000000
    Billions (One Thousand Millions)=1000000000
    Ten Billions=10000000000
    One Hundred Billions=100000000000
    One Trillion (One Thousand Billions)=1000000000000
    Ten Trillions=10000000000000
    One Hundred Trillions=100000000000000
    One Quadrillion (One Thousand Trillions)=1000000000000000
    Ten Quadrillions=10000000000000000
    One Hundred Quadrillions=100000000000000000
    One Quintillion (One Thousand Quadrillions)=1000000000000000000
  • भारतीय गणित में मूल संक्रिया आठ मानी गई है: (1.)संकलन (जोड़) (Addition) (2.)व्यवकलन (घटाना) (Subtract) (3.)गुणन (गुणा करना) (Multiply) (4.)भाग (भाग करना) (Divide) (5.)वर्ग (वर्ग करना) (Square) (6.)वर्गमूल (वर्गमूल निकालना) (Square root) (7.)घन (Cube) (8.)घनमूल (घनमूल निकालना) (Cube root)
  • गुणन विधि में जिस संख्या को गुणा किया जाता है उसे ‘गुण्य’ कहते हैं,जिस संख्या से गुणा करते हैं उसे ‘गुणक’ कहते हैं और गुणा करने से जो संख्या प्राप्त होती है उसे ‘गुणनफल’ कहते हैं।
  • प्राचीन भारत में गुणन की सात विधियों का प्रयोग किया जाता था:
    (1.)कपाट-संधि विधि (2.)क्रम (अनुलोम विधि) (3.) उत्क्रम (विलोम) विधि (4.)तिर्यक्-गुणन विधि (5.)स्थान-खंड गुणन (6.)गोमूत्रिका विधि (7.)बीजीय विधि
  • भाग की क्रिया को भागहार,भाजन,हरण,छेदन इत्यादि के नाम से भी जाना जाता है।भाग विधि में जिस संख्या को भाग देना हो उसे ‘भाज्य (Dividend)’ और जिससे भाग देना होता है,उसे ‘भाजक (Divisor)’ या ‘हर’ कहते हैं।भाग करने से प्राप्त संख्या को ‘लब्धि (Quotient)’ कहते हैं।
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(2.)बीजगणित (Algebra):

  • गणित की वह शाखा जिसमें अंकगणितीय संबंधों के व्यापकीकरण में संख्याओं,राशियों या (सदिश और आव्यूह जैसी) अन्य गणितीय संकल्पनाओं को निरूपित करने वाले प्रतीकों का प्रयोग किया जाता है और निर्दिष्ट नियमों के अनुसार अक्षर प्रतीकों की समीकरण के रूप में अभिव्यक्ति जैसी अनेक गणितीय विधियों की सहायता ली जाती है।
    बीजक्रिया:किसी निकाय की संक्रियाओं की पद्धति।उदाहरणार्थ:समुच्चयों का सम्मिलन (Union of Sets),सर्वनिष्ठ (Intersection of Sets) आदि।
  • बीजावली:अमूर्त बीजगणित।
  • बीजगणित में संख्याओं के स्थान पर अक्षरों का प्रयोग किया जाता है।बीजगणित का अर्थ है:अव्यक्त गणित।इस अव्यक्त (बीज) का आदि-कारण होता है:व्यक्त अर्थात् व्यक्त गणित (अंकगणित)।
  • बीजगणित की युक्तियों के बिना सवाल-जवाब के तरीकों को विद्वान लोग भी नहीं जान सकते,मंदबुद्धि तो बिल्कुल नहीं जान सकते हैं। प्राचीन भारतीय गणितज्ञ बीजगणित के समीकरणों को पद्य में लिखते थे।
  • बीजगणित के इन समीकरणों के आधार पर इसे ‘कुट्टक’नाम दिया और कुट्टकाध्याय लिखा।बीजगणित का यह नाम ब्रह्मगुप्त ने सर्वप्रथम शक संवत् 550 अर्थात् 628 ईस्वी सन् में ब्राह्मस्फुट सिद्धांत में दिया।बीजगणित का ज्योतिष की गणना में सर्वप्रथम ब्रह्मगुप्त ने प्रयोग किया।उन्होंने लिखा कि जिस प्रकार सूर्य का प्रकाश तारों की रोशनी को फीका कर देता है इसी प्रकार कुट्टक यानि बीजगणित जाननेवाला और उसका इस्तेमाल करने वाला गणितज्ञ दूसरे ज्योतिषियों को पछाड़ देता है।सन् 860 में पृथुदक स्वामी ने इसका ‘बीजगणित’ नाम रखा।
  • बीजगणित में प्रतीकों का प्रयोग कुछ शताब्दियों पूर्व ही प्रारंभ हुआ है।पुराने ग्रंथ काव्य में लिखे जाते थे।इसलिए प्राचीन भारतीय गणितज्ञ गणित के चिन्हों के लिए किसी शब्द या अक्षर का प्रयोग करते थे।आधुनिक युग में बीजगणित में प्रतीकों की भरमार है।प्रतीकों के रूप का प्रयोग यूरोप के देशों में प्रारंभ हुआ।हमारे देश में प्रतीकों की परंपरा विकसित नहीं हो पाई।
    गणित के विकास में इन प्रतीकों का बहुत बड़ा महत्त्व है,जैसे-जैसे नए सिद्धांतों का आविष्कार होता गया वैसे-वैसे नए प्रतीक (चिन्ह) बनाने पड़े। शब्दों की अपेक्षा चिन्हों की भाषा में लिखा हुआ गणित अधिक स्पष्ट हो जाता है।भाषा के शब्दों का अर्थ एक-सा नहीं होता परंतु चिन्ह (प्रतीक) का अर्थ स्थिर होता है।
  • आधुनिक गणितज्ञ तो इस बात पर तुले हुए हैं गणित में केवल चिन्हों का ही प्रयोग हो।उनका विचार है कि भाषा के प्रयोग से कई बार सिद्धांतों के स्पष्टीकरण में अर्थ का अनर्थ हो जाता है।उच्च गणित की यदि कोई पुस्तक देखेंगे तो उसमें ऐसे-ऐसे चिन्ह (प्रतीक) दिखाई देंगे जिनको अच्छी तरह समझे बिना गणित का विषय नहीं समझा जा सकता।
  • बीजगणित में सामान्यत: वर्ग समीकरण (Equation),बहुपद (Polynomial),द्विघात समीकरण (Quadratic Equations),गुणनखंड (Factorization),लघुत्तम व महत्तम समापवर्तक (LCM and HCF),समूह (Group),समुच्चय (Sets),वलय (Ring),वेक्टर स्पेस (Vector Space),क्षेत्र (Field),मैट्रिक्स (Matrix),सारणिक (Determinants),क्रमचय ग्रुप (Permutation Group),पूर्णांकीय प्रान्त (Integral Domains),गुणजावलियाँ (Ideals),खण्ड (विभाग) (Quotient),बहुपद वलय (Polynomial Rings),संबंध (Relation) इत्यादि का अध्ययन किया जाता है।

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(3.)अंकगणित और बीजगणित का सारांश (Conclusion of Arithmetic and Algebra):

  • बीजगणित तथा ज्यामिति को गणित की सभी शाखाओं में कठिन विषय समझा जाता है।बीजगणित अंकगणित का व्यापक रूप है।अंकगणित में अंकों का प्रयोग किया जाता है जबकि बीजगणित में अक्षरों, प्रतीकों (चिन्हों) का प्रयोग किया जाता है।बीजगणित को अव्यक्त गणित के नाम से भी जाना जाता है।अमूर्त बीजगणित (Abstract Algebra) बीजगणित का ही भाग है।
  • प्रारंभ में छात्र-छात्राओं को व्यक्त गणित अर्थात् अंकगणित पढ़ाई जाती है जिससे गणित की बेसिक बातें जोड़,गुणा,भाग,बाकी (व्यवकलन) को छात्र-छात्राएं अंकों के आधार पर आसानी से समझ लेते हैं।बीजगणित में अक्षरों,चिन्हों (प्रतीकों) तथा युक्तियों का प्रयोग किया जाता है कठिनाई से समझ में आती है।अतः छात्र छात्राओं को प्रारंभ में अंकगणित की बेसिक बातें समझाने के बाद बीजगणित को पढ़ाना प्रारंभ करना चाहिए जिससे गणित को आसानी से समझ सकेंगे और गणित विषय से दूर नहीं भागेंगे।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में अंकगणित और बीजगणित (Arithmetic and Algebra) के बारे में बताया गया है।

2.अंकगणित और बीजगणित (Arithmetic and Algebra) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नः

प्रश्न:1.अंकगणित और बीजगणित में क्या अंतर है? (What is difference between arithmetic and algebra?):

उत्तर:(क) अंकगणित विशिष्ट संख्याओं की गणना के बारे में है।बीजगणित के बारे में क्या सभी संख्याओं,पूर्ण संख्याओं (all whole numbers),सभी पूर्णांकों (all integers) के लिए व्यापक रूप से सत्य है आदि ।

प्रश्न:2.अंकगणित का कौन सा रूप बीजगणित है? (Which form of arithmetic is algebra?):

उत्तर:प्राथमिक बीजगणित (Elementary Algebra) बीजगणित का सबसे बुनियादी रूप है।यह उन छात्रों को पढ़ाया जाता है जिन्हें गणित का कोई ज्ञान अंकगणित के बुनियादी सिद्धांतों से परे नहीं माना जाता है।अंकगणित में,केवल संख्याएं और उनके अंकगणितीय संक्रियाएँ  (arithmetical operations) (जैसे +, −, ×, ÷) होते हैं।

प्रश्न:3.क्या बीजगणित बुनियादी गणित है? (Is algebra basic math?),बेसिक बीजगणित क्या है? (What Is Basic Algebra?):

उत्तर:बुनियादी बीजगणित गणित का क्षेत्र है कि यह अंकगणित से एक कदम अधिक अमूर्त (Abstract) है।याद रखें कि अंकगणित बुनियादी गणित फलनों के माध्यम से संख्याओं में हेरफेर है।बीजगणित एक चर का परिचय देता है,जो अज्ञात संख्या के लिए खड़ा है या संख्याओं के पूरे समूह के लिए प्रतिस्थापित किया जा सकता है।

प्रश्न:4.बीजगणित के तहत अंकगणित है? (Is arithmetic under algebra?):

उत्तर:उच्च अंकगणित को संख्या सिद्धांत (number theory) के रूप में भी जाना जाता है।यह पूर्णांक (integers),परिमेय संख्या (rational numbers),अपरिमेय संख्या (irrational numbers) और वास्तविक संख्याओं (real numbers) के गुणधर्मों (characteristics) से संबंधित है।दूसरी ओर,बीजगणित गणित की एक ओर शाखा है।
अंकगणितीय              बीजगणित
रिलेशन:नंबर संबंधित   वेरिएबल संबंधित

प्रश्न:5.अंकगणित की 4 शाखाएं क्या हैं? (What are the 4 branches of arithmetic?):

उत्तर:अंकगणित:
योग (Addition):यह अंकगणित के चार आपरेशनों में मूल संकेत है।
घटाव (Subtraction): घटाव भी जोड़ की अगली एक अंकगणितीय आपरेशन है।
गुणा (Multiplication):गुणा अंकगणित के चार प्राथमिक संक्रियाओं (elementary operations) में से एक है।
भाग (Division):

प्रश्न:6.बीजगणित के बुनियादी सिद्धांत क्या हैं? (What are the basic principles of algebra?):

उत्तर:बीजगणित के बुनियादी नियम साहचर्य (Associative),क्रमविनिमेय (Commutative) और बंटन (Distributive) नियम हैं।वे संख्या संक्रिया के बीच संबंधों को समझाने और समीकरणों को सरल बनाने या उन्हें हल करने की दिशा में उधार देने में मदद करते हैं।परिशिष्ट (arrangement of addends) की व्यवस्था योग को प्रभावित नहीं करती है।कारकों (Factors) की व्यवस्था गुणन को प्रभावित नहीं करती है।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा अंकगणित और बीजगणित (Arithmetic and Algebra) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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अंकगणित और बीजगणित (Arithmetic and Algebra)

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अंकगणित और बीजगणित (Arithmetic and Algebra) विषय गणित की शाखाएं है।गणित की वह शाखा जिसमें वास्तविक संख्याओं के गुणधर्मों एवं संबंधों का अध्ययन किया जाताहै तथा

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