Menu

Newton-Gregory forward difference interpolation formula

Contents hide
1 1.न्यूटन-ग्रैगोरी अग्रान्तर अंतर्वेशन सूत्र का परिचय (Introduction to Newton-Gregory forward difference interpolation formula)-

1.न्यूटन-ग्रैगोरी अग्रान्तर अंतर्वेशन सूत्र का परिचय (Introduction to Newton-Gregory forward difference interpolation formula)-

न्यूटन– ग्रैगोरी अग्रान्तर अंतर्वेशन सूत्र(Newton-Gregory forward difference interpolation formula) ऐसी विधि है जिसमें स्वतंत्र चर x के किसी मध्यवर्ती (intermediate) मान के संगत f(x) का मान ज्ञात करना होता है।जबकि स्वतंत्र चर x के विभिन्न मानों के संगत f(x) के मान ( जिनको प्रविष्टियां (entries) कहते हैं) दिए हों। स्वतंत्र चर के परिसर (range) के बाहर x के किसी मान के संगत f(x) का मान ज्ञात करने की विधि बहिर्वेशन (extrapolation) कहलाती है।
गणितीय विश्लेषण तथा निर्वचन करते समय कभी-कभी ऐसी अनेक परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती है जब प्रस्तुत समंक श्रेणी पूर्ण नहीं होती है। उससे कुछ मूल्य अनेक कारणों से अज्ञात रह जाते हैं।समंकों से सही निष्कर्ष निकालने के लिए यह आवश्यक है कि समंकमाला में अज्ञात मूल्यों के कारण बीच-बीच में रिक्त स्थान न हो।यही नहीं कभी-कभी उपलब्ध समंकों के आधार पर भावी समंकों के पूर्वानुमान लगाने भी आवश्यक हो जाते हैं ।इस प्रकार समंकों के आधार पर श्रेणी के बीच के अज्ञात मूल्यों या भावी मूल्यों के गणितीय अनुमान लगाने के लिए अंतर्वेशन तथा बहिर्वेशन (Interpolation and Extrapolation) का प्रयोग किया जाता है।
आपको यह जानकारी रोचक व ज्ञानवर्धक लगे तो अपने मित्रों के साथ इस गणित के आर्टिकल को शेयर करें ।यदि आप इस वेबसाइट पर पहली बार आए हैं तो वेबसाइट को फॉलो करें और ईमेल सब्सक्रिप्शन को भी फॉलो करें जिससे नए आर्टिकल का नोटिफिकेशन आपको मिल सके ।यदि आर्टिकल पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें जिससे वे भी लाभ उठाए ।आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट करके बताएं। इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

2.अंतर्वेशन और बहिर्वेशन का अर्थ और अंतर ( Meaning and difference of interpolation and exclusion)-

कुछ सुनिश्चित परिकल्पनाओं के अंतर्गत ज्ञात समंकों के आधार पर समंक श्रेणी के बीच किसी अज्ञात मूल्य का सर्वोत्तम संभाव्य अनुमान लगाने की क्रिया को अंतर्वेशन (Interpolation) कहते हैं।
इसके विपरीत उपलब्ध गणितीय तथ्यों के आधार पर विशेष परिकल्पनाओं के अधीन किसी भावी समंक के पूर्वानुमान प्राप्त करने की प्रक्रिया बहिर्वेशन ( Extrapolation) कहलाती है।
अंतर्वेशन श्रेणी के बीच की रिक्तियों को पूरा करने में उपयोगी है जबकि बहिर्वेशन भावी पूर्वानुमान में सहायक होता है।

3.अंतर्वेशन व बहिर्वेशन की आवश्यकता एवं महत्त्व (Need and Importance of Interpolation and Extrapolation)-

अंतर्वेशन तथा बहिर्वेशन की क्रियाओं का सभी क्षेत्रों में अत्यधिक महत्त्व है।आधुनिक व्यवसाय तो अधिकतर अनुमानों एवं संभावनाओं पर आधारित है।ज्ञात सामग्री के आधार पर मांग और उत्पादन में होने वाली सभी परिवर्तनों का सही अनुमान लगाना व्यापार व उद्योग में सफलता प्राप्त करने के लिए परमावश्यक है।इन क्रियाओं की सहायता से अर्थशास्त्री मूल्य स्तर ,उत्पादन ,राष्ट्रीय आय इत्यादि के भावी अनुमान लगाते हैं।योजना निर्माताओं के लिए यह रीतियां बहुत उपयोगी है क्योंकि वे इनके प्रयोग द्वारा ही अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के पंचवर्षीय तथा वार्षिक लक्ष्य निश्चित करते हैं तथा अपर्याप्त समंको की पूर्ति करते हैं।
सरकारों ,राजनीतिज्ञों और शासकों के लिए भी अंतर्वेशन एवं बहिर्वेशन का बहुत उपयोग है।भावी प्रवृत्तियों के सर्वोत्तम अनुमानों के आधार पर ही सरकार की कर नीति ,मूल्य नीति ,औद्योगिक नीति आदि का निर्धारण किया जाता है।वार्षिक बजट बनाने में इन क्रियाओं द्वारा आय तथा व्यय संबंधी विभिन्न अनुमान लगाने पड़ते हैं।इस प्रकार व्यापारी ,उद्योगपति ,अर्थशास्त्री ,नियोजन-विशेषज्ञ , राजनीतिज्ञ ,शासक, समाज-सुधारक इत्यादि सभी श्रेणियों के अनुसंधानकर्ताओं के लिए अंतर्वेशन व बहिर्वेशन की विधियां अत्यंत आवश्यक व उपयोगी होती हैं।

4.न्यूटन-ग्रैगोरी अग्रान्तर अंतर्वेशन सूत्र में मान्यताएं (Assumptions in Newton-Gregory forward difference interpolation formula)-

अंतर्वेशन एवं बहिर्वेशन की क्रियाएं कुछ मान्यताओं के अंतर्गत की जाती है।यह मान्यताएं हैं
(1.)आकस्मिक उतार-चढ़ाव न होना (No sudden or violent fluctuations)-
अंतर्वेशन बहिर्वेशन करते समय यह मान लिया जाता है कि दी हुई अवधि के समंकों में एकदम कोई प्रचण्ड वृद्धि या अत्यधिक कमी नहीं हुई है।उदाहरण के लिए यदि हमें 1941,1951,1961और 1971 किसी नगर के दिए हुए जनसंख्या समंकों के आधार पर उसकी 1954 की जनसंख्या का अंतर्वेशन करना हो या 1981 के लिए पूर्वानुमान लगाना हो तो यह मानना पड़ेगा कि उक्त वर्ष सामान्य थे और बाढ़ ,युद्ध ,अकाल आदि के कारण उन वर्षों की जनसंख्या में एकदम कोई बहुत अधिक कमी या वृद्धि नहीं हुई थी।
(2.)परिवर्तनों में नियमितता या एकरूपता (Regularity or uniformity in changes)-
यह भी माना जाता है कि दी हुई अवधि के समंकों में लगभग नियमित परिवर्तन हुए हैं अर्थात् वृद्धि या कमी की दर लगभग एक समान रही है।उपर्युक्त उदाहरण में हमारी यह भी मान्यता रहेगी कि 1954 के पहले के तथा बाद के वर्षों में जनसंख्या लगभग एक ही समान गति से लगातार बढ़ रही है।

Also Raed This Article:-Analytic function in complex analysis

5.अंतर्वेशन एवं बहिर्वेशन की परिशुद्धता (Accuracy of Interpolation and Extrapolation)-

अंतर्वेशन व बहिर्वेशन की क्रियाएं उपर्युक्त दो महत्वपूर्ण मान्यताओं के आधार पर की जाती है अतः उनके द्वारा ज्ञात अनुमान यथोचित रूप से ही परिशुद्ध होते हैं।परंतु यह ध्यान रखना चाहिए कि वे अनुमान मात्र हैं अतः वे वास्तविक समंकों की भांति परिशुद्ध नहीं हो सकते।यदि आधारभूत मान्यताएं पूरी नहीं होती तो अंतर्वेशन व बहिर्वेशन द्वारा प्राप्त संभाव्य अनुमान भी भ्रमात्मक और अशुद्ध होते हैं।अंतर्वेशन की परिशुद्धता निम्न बातों पर निर्भर है-
(1.) समंकों के संभाव्य उच्चावचनों का ज्ञान (Knowledge of possible reliefs of data)-
दिए हुए समंकों से होने वाले उतार-चढ़ाव के संबंध में जितनी अधिक जानकारी होगी अंतर्वेशन मूल्यों का उतना अधिक यथार्थता व विश्वसनीयता का अंश होगा ।यदि ज्ञात समंकों में लगभग नियमित रूप से उच्चावचन होते हैं तो अज्ञात मूल्य का अनुमान भी यथासंभव परिशुद्ध होता है।
(2.)समंकों से संबंधित घटनाओं का ज्ञान (Knowledge of events related to data)-
यदि गणितीय उपलब्ध समंकों पर प्रभाव डालने वाली महत्त्वपूर्ण घटनाओं का भी यथेष्ट ज्ञान है तो वह सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अंतर्वेशन मूल्यों में आवश्यक संशोधन करके उन्हें अधिक शुद्ध बना सकता है।उदाहरणार्थ 1947 में भारत की जनसंख्या का अंतर्वेशन करते समय देश के विभाजन के कारण उत्पन्न घटनाओं (जैसे शरणार्थियों का भारी संख्या में आना ,सांप्रदायिक दंगे आदि) के आधार पर अनुमानित संख्या में आवश्यक संशोधन कर देने से उसकी शुद्धता अधिक हो जाएगी।
उपर्युक्त दो बातों के अतिरिक्त अंतर्वेशन मूल्यों की यथार्थता बहुत कुछ उपयुक्त रीति के प्रयोग पर भी निर्भर करती है। अतः उपयुक्त रीति का चुनाव बहुत महत्त्वपूर्ण है।

6.अन्तर्वेशन के लिए परिमित अंतर कलन के सूत्रों का उपयोग (Use of the calculus of finite differences formulae for interpolation)-

अंतर्वेशन के लिए परिमित अंतर कलन के उपयोग के अध्ययन को निम्न तीन स्थितियों में विभाजित किया जा सकता है-
(1.)समान अंतराल के लिए अंतर्वेशन विधि (Method of interpolation with equal intervals)
(2.)असमान अंतराल के लिए अंतर्वेशन विधि (Method for interpolation with unequal intervals)
(3.)केंद्रीय अंतरविधि (central difference method)
इस आर्टिकल में समान अंतराल के लिए न्यूटन-ग्रैगोरी अग्रान्तर अंतर्वेशन सूत्र (Newton-Gregory forward difference interpolation formula) के बारे में अध्ययन करेंगे।

7.न्यूटन ग्रैगोरी अग्रान्तर अंतर्वेशन सूत्र (Newton-Gregory forward difference interpolation formula)-

{ p }_{ 0 }(x)=f(x)=f(a)+\frac { \triangle f(a) }{ h } (x-a)+\frac { { \triangle }^{ 2 }f(a) }{ { 2 }!{ h }^{ 2 } } (x-a)(x-a-h)+\frac { { \triangle }^{ 3 }f(a) }{ 3!{ h }^{ 3 } } (x-a)(x-a-h)(x-a-2h)+………..+\frac { { \triangle }^{ n }f(a) }{ n!{ h }^{ n } } (x-a)(x-a-h)………….(x-a-\overline { x-a } h)

Proof-मान लो y=f(x) एक ऐसे फलन को प्रदर्शित करता है जिसके स्वतन्त्र चर x के समान अन्तराल वाले (n+1) मानों a,a+h,a+2h,……..,a+nh के संगत मान f(a),f(a+h),f(a+2h),………..,f(a+nh) है।यह भी माना कि { p }_{ n }(x),n कोटि का x में बहुपद है जिसे निम्न रूप में लिखा जा सकता है:
{ p }_{ n }(x)={ A }_{ 0 }+{ A }_{ 1 }(x-a)+{ A }_{ 2 }(x-a)(x-a-h)+{ A }_{ 3 }(x-a)(x-a-h)(x-a-2h)+.............+{ A }_{ n }(x-a)(x-a-h)........(x-a-\overline { x-a } h)…………….(1)

जहां { A }_{ 0 },{ A }_{ 1 },{ A }_{ 2 },...................,{ A }_{ n }अचर राशियां है तथा इनको इस प्रकार चुना जा सकता है कि

{ p }_{ n }(a)=f(a),{ p }_{ n }(a+h)=f(a+h),...............,{ p }_{ n }(a+nh)=f(a+nh)………….(2)
अब (1) में क्रमानुसार x=a,a+h,a+2h,…….,a+nh प्रतिस्थापित करने पर तथा{ p }_{ n }(a),{ p }_{ n }(a+h),{ ........................,p }_{ n }(a+nh)के मान लिखने पर

f(a)={ A }_{ 0 }\quad \Longrightarrow { A }_{ 0 }=f(a).....(3)\\ f(a+h)={ A }_{ 0 }+h{ A }_{ 1 }\\ { A }_{ 1 }=\frac { f(a+h)-f(a) }{ h } \\ { A }_{ 1 }=\frac { \triangle f(a) }{ h } .......(4)\\ f(a+2h)={ A }_{ 0 }+2h.{ A }_{ 1 }+2h.h.{ A }_{ 2 }\\ 2{ h }^{ 2 }{ A }_{ 2 }=f(a+2h){ -A }_{ 0 }-2h.{ A }_{ 1 }\\ 2{ h }^{ 2 }{ A }_{ 2 }=f(a+2h)-\left[ f(a+h)-f(a) \right] -f(a)\\ 2{ h }^{ 2 }{ A }_{ 2 }=f(a+2h)-2f(a+h)+f(a)\\ 2{ h }^{ 2 }{ A }_{ 2 }={ \triangle }^{ 2 }f(a)

अतःA_{ 2 }=\frac { { \triangle }^{ 2 }f(a) }{ 2{ h }^{ 2 } } \\ A_{ 2 }=\frac { { \triangle }^{ 2 }f(a) }{ 2!{ h }^{ 2 } } .....(5)\\ f(a+3h)={ A }_{ 0 }+{ A }_{ 1 }(3h)+{ A }_{ 2 }(3h)(2h)+{ A }_{ 3 }(3h)(2h)(h)\\ f(a+3h)={ A }_{ 0 }+{ 3hA }_{ 1 }+{ 6{ h }^{ 2 }A }_{ 2 }+{ 6{ h }^{ 3 }A }_{ 3 }\\ { 6{ h }^{ 3 }A }_{ 3 }=f(a+3h)-{ 6{ h }^{ 2 }A }_{ 2 }-{ 3hA }_{ 1 }{ -A }_{ 0 }\\ { 6{ h }^{ 3 }A }_{ 3 }=f(a+3h)-{ 6{ h }^{ 2 }\frac { \left[ f(a+2h)-2f(a+h)+f(a) \right] }{ 2{ h }^{ 2 } } }-3h{ \frac { \left[ f(a+h)-f(a) \right] }{ { h } } }\\ { 6{ h }^{ 3 }A }_{ 3 }=f(a+3h)-{ 3f(a+2h) }+3f(a+h)-f(a)\\ { A }_{ 3 }=\frac { { \triangle }^{ 3 }f(a) }{ 6{ h }^{ 2 } } \\ { A }_{ 3 }=\frac { { \triangle }^{ 3 }f(a) }{ 3!{ h }^{ 2 } } .....(6)\\ .\\ .\\ .\\ .\\ .\\ so\quad on

इसी प्रकार \\ { A }_{ n }=\frac { { \triangle }^{ n }f(a) }{ n!{ h }^{ n } } ..........(7)

अब { A }_{ 0 },{ A }_{ 1 },{ A }_{ 2 },...................,{ A }_{ n } के मान (1) मेंरखने पर 

{ p }_{ n }(x)=f(x)=f(a)+\frac { \triangle f(a) }{ h } (x-a)+\frac { { \triangle }^{ 2 }f(a) }{ { 2 }!{ h }^{ 2 } } (x-a)(x-a-h)+\frac { { \triangle }^{ 3 }f(a) }{ 3!{ h }^{ 3 } } (x-a)(x-a-h)(x-a-2h)+………..+\frac { { \triangle }^{ n }f(a) }{ n!{ h }^{ n } } (x-a)(x-a-h)………….(x-a-\overline { x-a } h)………..(8)

उपर्युक्त सूत्र न्यूटन-ग्रैगोरी अग्र अन्तर्वेशन सूत्र (Newton-Gregory forward difference interpolation formula) कहलाता है।

8.न्यूटन-ग्रैगोरी अग्र अन्तर्वेशन सूत्र का अन्य रूप (Another form of Newton-Gregory forward difference interpolation formula)-

यदि u=\frac { x-a }{ h } या \quad x=a+hu………(9)

प्रतिस्थापन करें तो सूत्र का सरल नया रूप होगा।

{ p }_{ n }(a+hu)=f(a)+u\triangle f(a)+\frac { u(u-1) }{ { 2 }! } { \triangle }^{ 2 }f(a)+\frac { u(u-1)(u-2) }{ 3! } { \triangle }^{ 3 }f(a)+………..+\frac { u(u-1)(u-2)..........(u-n+1) }{ n! } { \triangle }^{ n }f(a)............(10)\\ f(a+hu)={ p }_{ n }(a+hu)=f(a)+{ u }^{( 1) }\triangle f(a)+\frac { 1 }{ 2 } { u }^{( 2) }{ \triangle }^{ 2 }f(a)+\frac { 1 }{ 3! } { u }^{( 3) }{ \triangle }^{ 3 }f(a)+………..+\frac { 1 }{ n! } { u }^{( n) }{ \triangle }^{ n }f(a)............(11)\\ { u }^{ (n) }=u(u-1)(u-2)..........(u-n+1)................(12)
न्यूटन-ग्रैगोरी अग्र अन्तर्वेशन सूत्र (Another form of Newton-Gregory forward difference interpolation formula) सामान्यतः इसी रूप में लिखा जाता है।
Question-1 logx के मान x=310,320,330,340,350 तथा 360 क्रमशः 2.4913617,2.5051500,2.5185139,2.5314781,2.5440680 तथा 2.5563025 है। न्यूटन-ग्रैगोरी अग्रान्तर अंतर्वेशन सूत्र से log(337.5) का मान ज्ञात कीजिए।(Given values of logx for x=310,320,330,340,350 and 360 as 2.4913617,2.5051500,2.5185139,2.5314781,3.5440680 and 2.5563025 respectively,find the value of log(337.5) by Newton-Gregory forward difference interpolation formula .)
Solution-Here a=310 ,h=10
x=a+hu
337.5=310+10 u
10u=27.5
u=2.75
दिए आंकड़ों से निम्न अन्तर सारणी प्राप्त होती है-

  x    f(x)=logx \triangle f(x) { \triangle }^{ 2 }f(x) { \triangle }^{ 3 }f(x) { \triangle }^{ 4 }f(x) { \triangle }^{ 5 }f(x)
310 2.4913617          
    0.0137883        
320 2.5051500   -4.244\times { 10 }^{ -4 }      
    0.0133639   4.27\times { 10 }^{ -5 }    
330 2.5185139   -3.997\times { 10 }^{ -4 }   7\times { 10 }^{ -7 }  
    0.0129642   2.54\times { 10 }^{ -5 }   -7.2\times {10}^{ -6 }
340 2.5314781   -3.743\times { 10 }^{ -4 }   -6.5\times {10 }^{-6}  
    0.0125899   1.89\times { 10 }^{ -5 }    
350 2.5440680   -3.554\times { 10 }^{ -4 }      
    0.0122345        
360 2.5563025          

न्यूटन-ग्रैगोरी अग्रान्तर अंतर्वेशन सूत्र (Newton-Gregory forward difference interpolation formula)-

f(a+hu)=f(a)+{ u }^{ (1) }\triangle f(a)+\frac { 1 }{ 2 } { u }^{( 2) }{ \triangle }^{ 2 }f(a)+\frac { 1 }{ 3! } { u }^{ (3) }{ \triangle }^{ 3 }f(a)+………..
सारणी से मान प्रतिस्थापित करने पर-

log(337.5)=f(337.5)=f(310)+2.75\triangle f(310)+\frac { 2.75(2.75-1) }{ { 2 }! } { \triangle }^{ 2 }f(310)+\frac { 2.75(2.75-1)(2.75-2) }{ 3! } { \triangle }^{ 3 }f(310)+\frac { 2.75(2.75-1)(2.75-2)(2.75-3) }{ 4! } { \triangle }^{ 4 }f(310)+\frac { 2.75(2.75-1)(2.75-2)(2.75-3)(2.75-4) }{ 5! } { \triangle }^{ 5 }f(310)\\ log(337.5)=2.4913617+2.75\times 0.0137883+\frac { 2.75\times 1.75 }{ 2 } (-4.244\times { 10 }^{ -4 })+\frac { 2.75\times 1.75\times 0.75 }{ 6 } \times 2.47\times { 10 }^{ -5 }+\frac { 2.75\times 1.75\times 0.75\times -0.25 }{ 24 } \times 7\times { 10 }^{ -7 }+\frac { 2.75\times 1.75\times 0.75\times -0.25\times -1.25 }{ 24 } \times (7.2\times { 10 }^{ -6 })\\ log(337.5)=2.4913617+0.0379178-1.0212125\times { 10 }^{ -3 }+1.4858594\times { 10 }^{ -5 }-2.6318359\times { 10 }^{ -8 }-6.7675781\times { 10 }^{ -8 }\\ log(337.5)=2.5282731

Question-2. एक परीक्षा में निश्चित सीमाओं के मध्य अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या निम्न प्रकार है-
(In an examination the numbers of candidates who obtained marks between certain limits are as follows:)

अंक(Marks) 0-19 20-39 40-59 60-79 80-99
अभ्यर्थियों की संख्या(No.of candidates) 41 62 65 50 17

न्यूटन-ग्रैगोरी अग्रान्तर अंतर्वेशन सूत्र (Newton-Gregory forward difference interpolation formula) से 70 अंक से कम प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या का अनुमान लगाइए।
(From Newton-Gregory forward difference interpolation formula, Estimate the number of candidates who obtained less than 70 marks)
Solution-
दिए हुए आंकड़ों से न्यूटन-ग्रैगोरी अग्रान्तर अंतर्वेशन सूत्र (Newton-Gregory forward difference interpolation formula) से निम्न सारणी प्राप्त होती है।

                Marks                                                                               No. of Candidates
                   x f(x) { \triangle }^{ 1 }f(x) { \triangle }^{ 2 }f(x) { \triangle }^{ 3 }f(x)
19.5 से कम  41      
    62    
39.5 से कम  103   3  
    65   -18
59.5 से कम  168    -15  
    50   -18
79.5 से कम  218   -33  
    17    
99.5 से कम  235      

Here a=19.5, h=20
a+hu=70
20u=50.5
u=2.525
न्यूटन-ग्रैगोरी अग्रान्तर अंतर्वेशन सूत्र (Newton-Gregory forward difference interpolation formula)-

f(a+hu)=f(a)+{ u }^{( 1) }\triangle f(a)+\frac { 1 }{( 2) } { u }^{ 2 }{ \triangle }^{ 2 }f(a)+\frac { 1 }{ 3! } { u }^{ (3) }{ \triangle }^{ 3 }f(a)+………..
सारणी से मान प्रतिस्थापित करने पर-

70 से कम ==f(70)=f(19.5)+2.525\triangle f(19.5)+\frac { 2.525(2.525-1) }{ { 2 } } { \triangle }^{ 2 }f(19.5)+\frac { 2.525(2.525-1)(2.525-2) }{ 6 } { \triangle }^{ 3 }f(19.5)\\ =41+2.525\times 62+\frac { 2.525\times 1.525 }{ { 2 } } \times 3+\frac { 2.525\times 1.525\times 0.525 }{ { 6 } } \times -18\\ =41+156.55+5.7759375-6.064734375\\ =197.2612031\\ =197(लगभग )

Also Raed This Article:-Linear differential equations

No. Social Media Url
1. Facebook click here
2. you tube click here
3. Twitter click here
4. Instagram click here
5. Linkedin click here
6. Facebook Page click here

2 Comments
  1. beiamdress ig May 24, 2020 / Reply
  2. be i am May 24, 2020 / Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *