Mathematics:Boredom Kaise Hatayein?
- गणित:उकताहट कैसे हटाएं? (Mathematics:Boredom Kaise Hatayein?) अर्थात् क्या आपको गणित बोरिंग लगता है।पढ़िए सत्यम कोचिंग सेंटर (Satyam Coaching Centre) ऑनर के व्यावहारिक टिप्स और सफलता के मंत्र जो आपको गणित पढ़ने के तरीके को बदल देंगे।उकताहट (Boredom) को कहें अलविदा और गणित का स्वागत करें।
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2.उकताहट का परिचय (Introduction to Boredom):
- क्या आपने कभी विचार किया है कि जिस गणित (Maths) को आप पढ़ते हैं वह किसी के लिए मजेदार (Interesting) होती है और कुछ के लिए ये बोरिंग (Boring) या बहुत बड़ा सिर दर्द कैसे बन जाती है?
- ज्यादातर छात्र-छात्राएँ गणित से इसलिए बोर (Bore) हो जाते हैं क्योंकि वे इसे परीक्षा उत्तीर्ण करने के दृष्टिकोण से पढ़ते हैं।गणित की भाषा में कहें तो वे इसे इक्वेशन (Equation) की तरह देखते हैं,इसे सॉल्यूशन (Solutions) की तरह नहीं देखते हैं।वे इसके बारे में तनिक भी विचार नहीं करते कि गणित का हमारे जीवन की समस्याओं को हल करने में कोई योगदान भी हो सकता है क्या?
- गणित केवल संख्याओं,अंकों और सवालों का खेल नहीं है,बल्कि यह हमारे दिमाग को विकसित करने का जरिया है।अगर हम रटने (Root learning) की जगह सही तर्क (Right Logic) पर दिमाग को केंद्रित करें,तो हर सवाल एक पहेली (Puzzle) बन जाएगी जिसे हल करने में हमें सुकून मिलता है।गणित को हल करने का नजरिया बदल जाए तो हर सवाल और थ्योरम आपको एक पहेली नजर आएगी।
- हमारे अंदर सही तर्क क्यों नहीं जन्म लेता है क्योंकि हमें क्यों का जवाब नहीं मिलता या हम क्यों का जवाब ढूंढने की कोशिश नहीं करते।यदि आप ज्यामिति के सवाल हल कर रहे हैं तो सवालों को नोटबुक पर लिखने पर ही ध्यान नहीं दें बल्कि दिमाग में उसकी एक पिक्चर बनाने की कोशिश करें,उसे विजुअल गणित (visual mathematics) की तरह हल करें।
दरअसल जैसे हमें गणित में X का मान तो पता होता है लेकिन हम यह नहीं जानते कि हमारी वास्तविक जिंदगी में X कहां काम आता है। - गणित का कोई भी टॉपिक हल करें तो देखें कि उसका हमारे वास्तविक जीवन में कहां उपयोग होता है।जैसे आप त्रिकोणमिति के सवाल ही हल कर रहे हों,तो त्रिकोणमिति के व्यावहारिक जीवन के उपयोग पर नजर डालेंगे तो आपको पता चलेगा कि त्रिकोणमिति (Trigonometry) की सहायता से बड़े भवनों की ऊंचाईयाँ,पर्वतों,पहाड़ों की ऊंचाईयाँ,किसी मीनार आदि की ऊंचाईयाँ आदि ज्ञात करने में होता है।
- इस प्रकार से हमारे अंदर रुचि जाग्रत होती है,हमें उसके बारे में जानने की उत्सुकता (Curiosity) पैदा होती है।आप इस सूत्र से इसे समझ सकते हैं।
अर्थात् जितना डर कम होगा उतनी उत्सुकता बढ़ेगी और परिणामस्वरूप रुचि बढ़ेगी।उत्सुकता बढ़ने और डर कम होने पर हमारी रुचि बढ़ती रहेगी।जितना हम गणित से डरेंगे उतनी ही उत्सुकता कम होगी और रुचि घटेगी।क्यूरोसिटी (Curiosity) और डर (Fear) एक दूसरे से विलोम रूप से संबंधित है।यानी एक कम होगा तो दूसरा बढ़ेगा।दूसरा कम होगा तो पहला बढ़ेगा।
- एक और बात गणित जैसे मुश्किल विषय में उत्सुकता और रुचि बढ़ ही कैसे सकेगी? इसका एक हम उदाहरण देते हैं।हमने ब्लॉग पोस्ट तैयार करना सीखा,केवल मोबाइल से।हमारे सामने कोडिंग सीखने,वेबसाइट को कस्टमाइज करने,गणित के लेख लिखने और ढेरों ऐसी मुश्किलें आई,लेकिन हमने हौसला नहीं खोया।आप आज भी शुरू के लेख देख सकते हैं।आज के लेख और शुरू के लेख से आप तुलना करें।आपको रात और दिन का फर्क मालूम पड़ जाएगा।
- इसमें हमने कितनी मुसीबतें उठायी इसे हम और हमारा भगवान ही जानता है।इसी प्रकार आप भी डटे रहेंगे तो मुश्किल से मुश्किल सवाल नए-नए तरीके से हल करना सीख सकते हैं।मोबाइल फोन से एडिटिंग करना कितना मुश्किल और जोखिम भरा काम है,लेकिन आज भी हम मोबाइल फोन से ही एडिटिंग वगैराह करते हैं।हालांकि आज टेक्निकल सपोर्ट के लिए हमारा पुत्र बराबर साथ देता है,उसकी (सवालों की) फॉर्मेटिंग लैपटॉप से करता है।लेकिन क्या आप आज भी यह सोचते हैं कि हमारे सामने मुसीबतें खत्म हो गई होंगी,नहीं मुसीबतें आज भी हैं और हमेशा रहने वाली है।यह अलग बात है कि इन मुसीबतों का स्वरूप बदल गया है।इसलिए घबराइए मत और हमेशा आगे बढ़ते रहें।
3.गणितीय मनोवैज्ञानिक टिप्स (Mathematics Psychological Tips):
- गणित को पढ़ने की मनोवैज्ञानिक विधि है।पहले यह समझ लें कि क्या गणित (mathematics) का वास्तविक संसार में किसी वस्तु से नाता है तो इसका उत्तर है,नहीं।यानी गणित अनुभव सापेक्ष नहीं है।जैसे ‘दो और दो चार होते हैं’ यह वाक्य किसी तथ्य (factual) को वर्णित नहीं करता।इन वाक्यों की सत्यता इनमें प्रयुक्त शब्दों के अर्थों पर निर्भर करती है।लेकिन इन संख्याओं का हमारे व्यावहारिक जीवन में उपयोग है।छोटे बच्चों को एक,दो आदि गिनती सीखाएँ और जिज्ञासावश वह पूछ बैठे की ‘एक’ कहां है तो गाय,पेड़ आदि की तरह किसी वस्तु को ‘एक’ को नहीं बताया जा सकता है।अतः उन्हें एक गेंद,दो गेंद आदि के सहारे गिनती सिखाई जाती है।
- अतः गणित के सवालों और समस्याओं को हल करने के लिए भी मनोवैज्ञानिक ट्रिक काम में लेनी चाहिए ताकि गणित के प्रति भय समाप्त हो और हमारी जिज्ञासा व रुचि बनी रहें और बढ़ती रहे।
हमें देखकर सत्यम कोचिंग सेंटर (Satam Coaching Centre) में पढ़ने वाले आश्चर्य करते हैं कि आप पढ़ाते रहते हैं,पढ़ाते रहते हैं कभी यह कहते ही नहीं कि बस अब बहुत पढ़ा दिया घर जाइए।वे स्वयं ही अपनी इच्छा से जितना चाहे उतना पढ़कर चले जाते हैं।
- दूसरा इस बात पर भी आश्चर्य करते हैं कि हम (छात्र-छात्राएं) नहीं पढ़ते हैं तब भी आप पढ़ते रहते हैं,कुछ न कुछ करते रहते हैं,कभी यह नहीं देखा कि आप आराम कर रहे हों।तो यह कमाल है जिज्ञासा,रुचि और मुमुक्षा का जो हमें लगातार पढ़ते रहने के लिए प्रेरित करती रहती है।
- गणित को अपने जीवन से जोड़कर पढ़े,मनोवैज्ञानिक तरीके से पढ़ें।सोचे गणित में होशियार हो जाऊंगा,अच्छे मार्क्स प्राप्त होंगे तो मेरी शान कितनी बढ़ जाएगी? मैं एक आम छात्र से खास छात्र बन जाऊंगा।
यह भी सोचें कि आज के जीवन में गणित का दखल कितना बढ़ता जा रहा है।हमें जाॅब के लिए प्रारंभिक गणित (Elementary Mathematics) का ज्ञान तो होना ही चाहिए।यदि आप गणित में परफेक्ट हैं तो आपको जाॅब प्राप्त करने में मुसीबतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
4.गणित में सक्सेस सूत्र (Success Formula for Mathematics):
- गणित में सक्सेस का सूत्र है अभ्यास।जी हाँ,अभ्यास और पुनरावृत्ति से गणित में सफलता मिलती है।
लेकिन क्या आपने विचार किया कि यह बोरियत या उकताहट कब होती है? उकताहट होती है देर तक एक ही विषय को पढ़ते रहना,बार-बार उसी विषय को पढ़ते रहना। - हमें सवालों का हल नहीं आता है उसी से हमारी हालत पतली नहीं होती है,बल्कि सवालों के हल आते जाएं,आते जाएं और हल करते जाएं तब भी हमारी इंद्रियों को बोथरा कर देता है।हुई न फजीते की बात।
- व्यावहारिक जीवन का ही एक दृष्टांत लेते हैं।माँ बच्चे को लोरी सुनाती है और बच्चा सो जाता है,एक लय से पीठ थपथपाती है और बच्चा सो जाता है तो आप यह मत समझ लेना कि बच्चा संगीतज्ञ है इसलिए प्रसन्न और एकाग्र मन हो जाने से सो जाता है।दरअसल वह भी बोर हो जाता है और उसे नींद आ जाती है।
- जिस सुख को हम भोग लेते हैं उसके प्रति हमारी रुचि और संवेदनशीलता कम हो जाती है।यह तो कठिन सवाल बीच-बीच में आ जाते हैं और हमें उन सवालों को हल करने की चाहत बनी रहती है।सवाल हल होते रहना हमारी रुचि और संवेदना को घटाता है।मनोकामना बार-बार हमें सवालों को हल करने की प्रेरणा देती है,लेकिन इस कामना के पैदा होने के लिए भी कुछ सवाल हम हल कर लें और कुछ सवालों को हल न कर पाना या कठिन मालूम पड़ने से उनको हल करने के बीच गैप (Gap) यानी सवालों को हल नहीं कर पाना जरूरी है।आप किसी प्रश्नावली के सभी सवालों को हल कर लेते हैं,बार-बार हल कर लेते हैं तो लगातार हल करते रहने से उकताहट होने लगेगी।इसलिए बुद्धिमान छात्र-छात्रा सवाल हल होने या सवाल हल नहीं कर पाने के प्रति समभाव रखते हैं,अति नहीं करते हैं इसलिए वे उकताहट का अनुभव भी नहीं करते।गणित में सक्सेस होने का यह मूल मंत्र है।
5.तार्किक विचार बनाम रटना (Logical Thinking VS Rote Learning):
- किसी सवाल या प्रमेय के हल न कर पाने पर कुछ छात्र-छात्राओं की आदत होती है कि वे उसको रट लेते हैं।और रटना हमारी उकताहत (Boredom) को बढ़ा देता है।आप किस-किस चीज को रटोगे और कितना रटोगे तथा कब तक रटोगे।गणित को हल करने की यह तरकीब उचित नहीं है कि उसे रट लिया जाए।
- जब कोई भी सवाल या प्रमेय हल नहीं हो रही हो तो उसके पीछे तार्किक विचार करें।सोचें कि इस सवाल या प्रमेय को किस युक्ति से हल किया जा सकता है।क्या मैं सलेक्टेड तैयारी कर रहा हूं इसलिए यह महत्त्वपूर्ण बातें समझने से छूट गई हैं? क्या मुझे इस प्रमेय को पढ़ने के लिए पिछली थ्योरम्स (Theorems) को पढ़ना और समझना होगा?
- इस प्रकार आप सही ढंग से तार्किक चिंतन करेंगे तो किसी भी सवाल या प्रमेय का हल आपको सूझ जाएगा। यदि तार्किक चिंतन करने से भी कोई हल नहीं सूझ रहा हो,तो फिर किसी मित्र या शिक्षक की सहायता से हल करने का प्रयास करें।यदि किसी प्रमेय या समस्या को आपने ठीक से समझ लिया,लेकिन फिर भी याद नहीं हो रही है तो उसे नोटबुक पर लिखें।एक-दो बार लिखने से वह ठीक से याद हो जाएगी।तार्किक सोच हमारे व्यक्तित्व को गढ़ता है।
6.गणित की तैयारी कैसे करें? (Ganit ki Taiyari Kaise Karein?):
- गणित की तैयारी के लिए हमने सत्यम मैथमेटिक्स (Satyam Mathematics) ब्लाॅग पर लेख अपलोड किए हुए हैं।आप उन्हें पढ़कर जान सकते हैं कि गणित को किस विधि से और युक्ति से पढ़ना चाहिए?
फिर भी फुटकर रूप से प्रसंगवश कुछ ओर बातें बता रहे हैं। - पहली बात गणित की विषयवस्तु को पढ़ना अन्य विषयों से हटकर है।कारण यह है कि गणित विषय प्रैक्टिकल विषय (Practical Subject) है,इसे अन्य विषयों की तरह समझ कर,रट कर याद नहीं किया जा सकता है।यदि आप अन्य विषयों की तरह इसे रटने का काम करेंगे तो फिर उकताहट तो होगी।जैसा कि हमने बताया कि बार-बार अभ्यास और पुनरावृत्ति से भी उकताहट हो जाती है।आप नियमित रूप (Consisyency) से पढ़ेंगे तो यह याद भी होगा और इसको हल करने में आपको रस भी आएगा।मसलन यदि आपने इसे सत्रारम्भ से हल नहीं किया और परीक्षा के निकट बिल्कुल इससे चिपके रहेंगे,उसे छोड़ेंगे ही नहीं तो मुसीबत खड़ी हो जाएगी।नियमित रूप से कुछ समय के लिए अध्ययन करने की विधि (study tips) का इस्तेमाल करेंगे तो यह रुचिकर (interesting) भी लगेगा और आनंददायक भी।
- लेकिन यदि रात-दिन हम गणित के चिपके रहेंगे तो थोड़ी देर तो आपको सुकून महसूस होगा,लेकिन कुछ समय बाद हमारा खुद का ही दम घुटने लग जाएगा। हमारे मित्र सहपाठी भी कहेंगे कि इसे क्या हो गया है?
- अतः स्वाभाविक प्रेम ही उचित होता है और अति हर चीज की खराब होती है।आप साइट पर ही देख लीजिए,यदि आपको गणित के ही गणित के आर्टिकल पढ़ने को मिलेंगे तो आप बोर हो जाएंगे।लेकिन लेखो में विविधता रहेगी तो आपकी पढ़ने में रुचि बनी रहेगी।आप बोरिंग महसूस नहीं करेंगे।गणित पढ़ने के लिए अभ्यास,पुनरावृत्ति और नियमितता को अपनाएं।साथ ही ऊपर बताए अनुसार तार्किक चिंतन करने का तरीका भी कारगर है।
- गणित की थ्योरी को समझें,सूत्रों को समझें और लिखें,फिर उदाहरणों को हल करें।जब थ्योरी,सूत्र और उदाहरण ठीक से समझ आ जाएं तो फिर प्रश्नावली के सवालों को हल करना प्रारंभ करें।और हां,इसे सत्रारम्भ से ही पढ़ना चालू करें ताकि बाद में तनावग्रस्त (Tension) न हों।युक्ति और विधिपूर्वक पढ़ेंगे तो बोर होने का प्रश्न ही नहीं है।अगर उपर्युक्त रणनीति का पालन करेंगे तो गणित के डर (math anxiety se relief) से राहत मिलेगी।
- गणित का डर पैदा करना,तनाव पैदा करना या बोरियत पैदा करना आदि इन सब का कारण हम स्वयं है।यदि विचार करेंगे तो इनके हल भी मिल जाएंगे और इनसे मुक्त भी हो जाएंगे।यह कोई जरूरी नहीं है कि उपर्युक्त सूत्रों को ही अपनाएँ।हमने हमारे अनुभव के आधार पर ये सूत्र आपको बताए हैं।
7.गणित के छात्र-छात्राओं को प्रेरणा (Student Motivation for Mathematics) (Humour-Satire):
- दुनिया की कितनी भी जटिल समस्या हो उसका हल जरूर होता है।यह हो सकता है कि उस समस्या का हल हमें नहीं सूझ रहा हो।जिसको भी हल सूझता है वह भी हममें से कोई होता है।अंतरिक्ष में जाने वाली कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स भारतीय ही थी।शून्य की खोज करने वाला भारतीय गणितज्ञ ही था।आज जो अंक प्रचलन में हैं वे भारतीय गणितज्ञों की वजह से है।यदि आप गणित की ट्रिक के बजाय गणित टिप्स (Ganit Tips) का उपयोग करेंगे तो गणित का भय खत्म होगा।गणित की टिप्स के पीछे तार्किक चिंतन होता है।
- हर गणित के विद्यार्थी में असीम क्षमताएं होती हैं,भगवान सभी को मस्तिष्क देकर भेजता है,किसी के साथ भेदभाव नहीं करता है।अब यह हम पर है कि मस्तिष्क को जाग्रत करें या ना करें।यदि सोए पड़े रहेंगे तो कोई मदद करने के लिए नहीं आएगा।लेकिन अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए चल पड़ेंगे तो आपकी शक्तियों का जागरण भी होगा और साथ भी मिलेगा।आप कदम ही नहीं बढाएंगे और इस प्रतीक्षा में है कि कोई आकर आपकी मदद कर देगा तो आप प्रतीक्षा ही करते रहेंगे।इसलिए उठो,जागो और आगे बढ़ो।
आनन्द बनाम बोरियत की तुलनात्मक टेबल (Comparison Table of Merriment VS Boredom):
उपर्युक्त आर्टिकल में गणित:उकताहट कैसे हटाएं? तनाव से सतर्कता का सफर (Mathematics:Boredom Kaise Hatayein? Tension Se Attention Ka Safar) के बारे में बताया गया है।
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8.गणित छात्र की दुविधा (हास्य-व्यंग्य) (Mathematics Student’s Dilemma) (Humour-Satire):
- शिक्षक (छात्र से):गणित के सवाल हल क्यों नहीं कर रहे?
- छात्र:सर,गणित के सवाल हल करते-करते बोरियत हो रही है।
- शिक्षक:अच्छा मैं तुम्हें कुछ गणित के आकर्षक टिप्स बता रहा हूं,ये लो इन्हें पढ़ो।
- छात्रःसर,मुझे तो इन गणित की टिप्स पढ़ने में भी बोरियत हो रही है।
प्रश्न:1.गणित बोरिंग क्यों लगता है? (Ganit boring kyun lagta hai?):
उत्तर:जब हम कॉन्सेप्ट के सही लॉजिक (True logic) की जगह सूत्रों,प्रमेयों और सवालों के हल रटने लगते हैं।
प्रश्न:2.क्या वैदिक गणित से रुचि बढ़ती है? (Kya vedic Maths se interest badh sakta hai?):
उत्तर:हाँ,क्योंकि ये बड़ी गणनाओं को शीघ्रता और जादुई (magic) तरीके से हल करना सिखाती है।
प्रश्न:3.बोरियत को हटाने का आध्यात्मिक तरीका क्या है? (Boredom ko hatane ka hatane ka spiritual tarika kya hai?):
उत्तरःअपने काम को दिल से करें।पूजा और उपासना समझ कर करें।जैसे दैनिक नित्यकर्म रोजाना उसी ढंग से करते हैं लेकिन बोरियत नहीं होती है क्योंकि यह आध्यात्मिक घूँटी हमें अपने माता-पिता से मिली है।
- **Aapka Pasand**:
”In pure article mein aapko kaunsi tips pasand hai? Kya aapne iname se kisi tips ko use karke dekha hai? Apne anubhav niche comments mein zaroor share karein! Main aapke ka jawab intjar karunga.”
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