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How to Teach Mathematics to Exceptional Children?

1.असाधारण बच्चों को गणित कैसे पढ़ाएं? (How to Teach Mathematics to Exceptional Children?):

  • असाधारण बच्चों को गणित कैसे पढ़ाएं? (How to Teach Mathematics to Exceptional Children?),यह चुनौती हर अध्यापक के सामने खड़ी हो जाती है।प्रत्येक असाधारण बच्चों को गणित कैसे पढ़ाएं? (How to Teach Mathematics to Exceptional Children?) विषय को पढ़ाने में शिक्षक को भिन्न-भिन्न प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, इसमें पाठ्य-वस्तु (Subject-Matter) तथा विद्यार्थी मुख्य रूप से आते हैं । इसमें भी बालकों का स्थान प्रमुख होता है। अन्य शिक्षकों के समान गणित शिक्षक को भी विद्यार्थियों को पढ़ाना पड़ता है ।शिक्षक कक्षा में पाठ्य-वस्तु प्रस्तुत करने में सामान्य विद्यार्थियों की योग्यता (Ability of Average Students) को ध्यान में रखता है। इस प्रकार कक्षा के वे विद्यार्थी जो सामान्य से भिन्न होते हैं, उन विद्यार्थियों को विशेष लाभ नहीं होता है । इस प्रकार के विद्यार्थी या तो प्रखर बुद्धि (Gifted ) या पिछड़े (Retarded) होते हैं। ऐसे विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रबन्ध होना चाहिए।
  • उपर्युक्त बालकों को पहचानने के निम्न तरीके हैं जिनके आधार पर इनको पहचाना जा सके –
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2.प्रखर बुद्धि वाले बालकों के गुण (Children of Gifted Children):

  • (1.)इन बालकों की बुद्धि-लब्धि (I. Q.) 130 से 180 या ऊपर होती है ।
  • (2.)ये बालक शारीरिक क्रियाओं में साधारण बालकों से तीव्र होते हैं।
  • (3.)ये शब्दों तथा वाक्यों का अल्प आयु में ही प्रयोग करने लगते हैं। ये शीघ्र ही लम्बी शब्दावली तथा वस्तुओं के नाम याद कर लेते हैं।
  • (4.)ये अधिक जिज्ञासु होते हैं तथा समय, दिन, घड़ी, वायु, वर्षा , मौसम तथा व्यक्तियों के बारे में कई प्रकार के प्रश्न करते हैं।
  • (5.)इन बालकों की रुचियाँ (Interests) बड़ी विस्तृत होती हैं तथा ये पत्रिकाओं, चित्रकारी, विज्ञान, गणित से सम्बन्धित वस्तुओं में रुचि रखते हैं।
  • (6.)इनकी संख्या कक्षा में लगभग 2 से 7 प्रतिशत तक होती है।
  • (7.)ये बालक हास्य तथा नवीन लेखों में सामान्य से तीव्र होते हैं।
  • (8.)इन बालकों के मित्र प्रायः उनकी आयु से ऊपर वाले बालक होते हैं।
  • (9.)ये बालक संवेगात्मक दृष्टि से स्थायी होते हैं तथा इनका व्यवहार अपने माता-पिता तथा कुटुम्बीजनों से अच्छा होता है।
  • (10.)इनमें अल्प आयु से तर्क-शक्ति का ज्ञान दृष्टिगोचर होता है।
  • (11.)ये बालक किसी वस्तु तथा विचार को अधिक समय तक ध्यान में रख सकते हैं।

3.प्रखर बुद्धि वाले बालक को पहचानने की विधियाँ (Means of Recognizing the Gifted Child):

  • (1.)बुद्धि परीक्षाएँ (Intelligence Tests)
  • (2.)साफल्य परीक्षाएँ (Achievement Tests)
  • (3.)निरीक्षण तथा शिक्षकों का निर्णय (Observation and Decision of Teachers)
  • (4.)व्यक्तित्व परीक्षाएँ (Personality Tests)
  • (5.)कक्षा के अन्य बालकों की राय (Opinion of Class-Mates)
  • (6.)विद्यालय लेखा (Cumulative Records)

4.प्रखर बुद्धि बालकों की शिक्षा (Education for the Gifted Children):

  • (1.)विद्यालय में इन बालकों के लिए ऐसे कार्य होने चाहिए जिनसे वे सन्तुष्ट हो सकें, प्रत्येक बालक को एक विशेष कार्यक्रम दिया जाए।
  • (2.)उनका पाठ्यक्रम सामान्य बालकों से भिन्न हो। इसमें गणित के अधिक जटिल प्रश्न तथा समस्याएँ होनी चाहिए।
  • (3.)इनको स्वयं गणित की पुस्तकों को पढ़ने तथा गणित की प्रयोगशालाओं में कार्य करने का अवकाश देना चाहिए जिससे वे स्वयं समस्याओं का हल तथा सत्यापन कर सकें।
  • (4.)इनको एक वर्ष में दो कक्षाएँ पढ़ायी जा सकती हैं जिससे वे सामान्य बालकों के दो वर्ष के कार्य को एक वर्ष में समाप्त कर लें।
  • (5.)इन बालकों को भिन्न-भिन्न प्रकार के गणित सम्बन्धी कार्यों ;जैसे-कार्डबोर्ड,लकड़ी, टिन आदि वस्तुओं से गणित के नियमों का सत्यापन करने का अवसर मिलना चाहिए। इनमें चतुर्भुज, वृत्त, त्रिभुज आदि के सूत्र ज्ञात करना आ सकता है।
  • (6.)इन बालकों के लिए गणित की प्रयोगशाला का होना अति आवश्यक है तथा इनको पर्यटन (Excursion) में भी जाना चाहिए ।
  • (7.)इन बालकों के लिए व्यवस्थित सामग्री (Programmed Material) विशेष रूप से लाभप्रद होती है ।
  • (8.)इन बालकों के मूल्यांकन हेतु विशेष परख (Tests) का प्रयोग किया जाता है।
  • (9.)गणित में ये बालक कठिन प्रायोजना (Projects) पर कार्य कर सकते हैं।

5.मानसिक दृष्टि से पिछड़े बालक (Mentally Retarded Children):

  • गुण (Characteristics)
  • (1.)यह वह बालक है जो कक्षा के कार्य में पिछड़ा रह जाता है।
  • (2.)इस बालक में जन्मजात मानसिक योग्यता सामान्य बालक (Average Child) से कम होती है।
  • (3.)इस बालक में मानसिक विकास की गति कुछ मन्द होती है।
  • (4.)यह बालक, समाज में भली प्रकार समायोजन ( Adjust ) नहीं कर सकता है।
  • (5.)संवेगात्मक दृष्टि से यह बालक के समान होता है।

6.पिछड़े बालकों की शिक्षा (Education for the Retarded Children):

  • (1.)इन बालकों को गणित पढ़ाने के लिए साधारण उपकरण तथा चार्ट की विशेष व्यवस्था होनी चाहिए।
  • (2.)इनके लिए गणित के छोटे तथा सरल प्रयोग करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
  • (3.)इनको सामान्य पाठ्यक्रम से सरल प्रश्न हल करने को देने चाहिए ।
  • (4.)प्रत्येक ऐसे बालक को भिन्न-भिन्न प्रकार की समस्या तथा प्रश्न देने चाहिए ।
  • (5.)इनके लिए अभ्यास (Drill) के लिए अधिक संख्या में प्रश्न हों।
  • (6.)इनके लिए विशेष कक्षाओं की व्यवस्था लाभप्रद होती है।
  • (7.)पुस्तकों में चित्र तथा रंगीन अंक के होने से लाभ होता है।
  • (8.)इनकी रुचि के अनुसार छोटी-छोटी गणित की प्रायोजनाओं (Projects ) देनी चाहिए।
  • (9.)बालकों को व्यवस्थित सामग्री (Programmed Material ) तैयार करके देना चाहिए। 
  • उपर्युक्त आर्टिकल में असाधारण बच्चों को गणित कैसे पढ़ाएं? (How to Teach Mathematics to Exceptional Children?) के बारे में बताया गया है।

How to Teach Mathematics to Exceptional Children?

असाधारण बच्चों को गणित कैसे पढ़ाएं? (How to Teach Mathematics to Exceptional Children?)

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असाधारण बच्चों को गणित कैसे पढ़ाएं? (How to Teach Mathematics to Exceptional Children?),यह चुनौती हर अध्यापक के सामने खड़ी हो जाती है।प्रत्येक असाधारण बच्चों को गणित कैसे पढ़ाएं? (How to Teach Mathematics to Exceptional Children?) विषय को पढ़ाने में शिक्षक को भिन्न-भिन्न प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है

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