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Marketist Cultural Invasion of West

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1.पश्चिम का बाजारवादी सांस्कृतिक आक्रमण (Marketist Cultural Invasion of West),भारत पर पश्चिम का बाजारवादी सांस्कृतिक आक्रमण (Western’s Marketist Cultural Invasion of India):

  • पश्चिम का बाजारवादी सांस्कृतिक आक्रमण (Marketist Cultural Invasion of West) कला,फिल्म,उत्सव तथा उपभोक्ता वस्तुओं के जरिए किया जा रहा है।
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2.संस्कृति का अर्थ (The Meaning of Culture):

  • सामान्यत: किसी विचारधारा,ज्ञान,आस्था,कला,नैतिकता,कानून,परंपराओं,सभ्यता का आध्यात्मिक व मानसिक विशिष्टता के आचरण पक्ष को संस्कृति कहा जाता है।इनमें से बहुत से मूल्यों को व्यक्ति समाज,परिवार का सदस्य रहते हुए हासिल करता है।परंतु संस्कृति स्थिर नहीं रहती है बल्कि एक प्रगतिशील प्रक्रिया है जो समय के साथ बदलती रहती है।व्यापक रूप में संस्कृति में जीवन पद्धति,चिंतन-मनन पद्धति और धार्मिक पद्धति को सम्मिलित किया जाता है।श्री प्रकाश के अनुसार संस्कृति:
  • “सभ्यता शरीर है,संस्कृति आत्मा सभ्यता जानकारी और भिन्न क्षेत्रों में महान एवं दु:खदायी खोज का परिणाम है,संस्कृति ज्ञान का परिणाम है।
  • संस्कृति में प्रगतिशीलता तभी तक रहती है जबकि बुद्धि और विवेक (प्रज्ञा) का उपयोग करते हुए अपनी परंपराओं और विरासत का पूर्वाग्रह रहित होकर समालोचना करें तथा उसमें पाई जाने वाली दुर्बलताओं को दूर करते रहे।वस्तुतः संस्कृति उन आचार-विचार,व्यवहार,परंपराओं,गुणों तथा मूल्यों को समाहित करती है जिसे मनुष्य अनेक प्रकार की शिक्षा द्वारा अपने प्रयत्न से प्राप्त करता है।संस्कार,विश्वास,ज्ञान,कौशल इत्यादि संस्कृति के ही अंग होते हैं।
  • कोई भी संस्कृति को माता-पिता,परिवार,समाज,विद्यालय से विरासत में पाता है तो पुस्तकों,फिल्मों,समाचार पत्रों,सोशल मीडिया से भी उसकी संस्कृति प्रभावित होती है। इसलिए कहा गया है कि संस्कृति स्थिर नहीं रहती है बल्कि वह प्रगतिशील है।भिन्न-भिन्न समाज व देश की संस्कृति में अंतर होता है।किसी संस्कृति में किसी बात को ठीक समझा जाता है तो दूसरी संस्कृति में उसे ठीक नहीं समझा जाता है।जैसे मुस्लिम धर्म में बहुपत्नी रखना गलत नहीं माना जाता है परंतु हिंदूधर्म में एक पत्नी सही माना जाता है।
  • पाश्चात्य देशों में विवाह पूर्व यौन संबंधों को गलत नहीं माना जाता है जबकि भारत में विवाह पूर्व यौन सम्बन्ध वर्जित है।पाश्चात्य देशों में यौन को भोग की दृष्टि से देखा जाता है इसलिए खुलापन है जबकि भारत में यौन कार्य सन्तानोत्पत्ति,सृजन के रूप में माना जाता है इसलिए गुह्य रखा जाता है।

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3.भारतीय संस्कृति (Indian Culture):

  • भारतीय संस्कृति में ऐसी विशेषताएँ हैं जो अन्य संस्कृति में नहीं पाई जाती है।मूलत: भारतीय संस्कृति आध्यात्मिकता पर आधारित है।जिनमें मुख्य हैं:कर्म एवं पुनर्जन्म का सिद्धांत,मनुष्य जीवन का उद्देश्य चार पुरुषार्थों (धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष) की प्राप्ति,धार्मिक सहिष्णुता वर्णाश्रम (ब्रह्मचर्य,गृहस्थ,वानप्रस्थ और सन्यास आश्रम) व्यवस्था,अहिंसा का पालन करना इत्यादि।
  • आध्यात्मिक एवं धार्मिक रूप से प्रत्येक व्यक्ति पर तीन ऋण देव ऋण,ऋषि ऋण,पित्र ऋण।भारतीय संस्कृति,अध्यात्म तथा विद्या का अध्ययन करने से ऋषि ऋण,वैदिक यज्ञ संपादन करने से देव ऋण एवं संतानोत्पत्ति से पितृ-ऋण से मुक्त होता है।
  • जीवन में चारों पुरुषार्थ धर्म अर्थात् सदाचार,कर्तव्यों का पालन करना,अर्थ का धर्म पूर्वक उपार्जन करके अपने सांसारिक कर्तव्यों का पालन करना,काम संतानोत्पत्ति तथा मोक्ष सांसारिक कामनाओं-वासनाओं,राग-द्वेष इत्यादि कुविचारों से मुक्त होना इत्यादि को अपने आचरण में उतारना।
  • दम (आत्मसंयम),इंद्रिय निग्रह,दान तथा दया जैसे गुणों को धारण करना।संस्कृति से तात्पर्य यह नहीं लगाना चाहिए कि वह सदैव स्थिर रहती है।प्राचीनकाल से लेकर यदि भारतीय संस्कृति का अवलोकन किया जाए तो धारणाओं,विश्वासों एवं लोकाचारों में परिवर्तन देखने को मिलेगा।
  • वैदिक काल में यज्ञ करना,कराना धार्मिक कर्तव्य माना जाता था।बाद में उसमें पशुबलि,नरबलि को सम्मिलित कर लिया गया।यज्ञों में कर्मकांड,दान,दक्षिणा की प्रधानता भी हो गई थी। उस समय इन कृत्यों को सही माना जाता था परंतु अब इन कृत्यों को सही नहीं माना जाता है।अतः पशु बलि,नरबलि अब संस्कृति का अंग नहीं है।
  • संन्यासी के लिए तीन दण्ड धारण करना,कमंडल रखना और भिक्षा पर ही निर्वाह करना निर्धारित किया गया।परंतु बहुत से लोग संन्यासी के अयोग्य थे वे बाह्य आवरण गेरुआ वस्त्र धारण करना,सिर मुँडा लेना तथा तीन दण्ड धारण कर लेते थे। इसलिए ऐसे लोगों की भर्त्सना की गई तथा संन्यासी के लिए कहा गया कि वह सभी प्राणियों के लिए कल्याण करने वाला हो,शांतचित्त,वाणी, मन एवं शरीर का संयम रखने वाला हो।
  • भारतीय संस्कृति में ज्यों-ज्यों पतन के कारण बने उन आचार-व्यवहारों को परिवर्तित किया गया है। भारतीय संस्कृति प्रगतिशील रही है।
  • भारतीय संस्कृति में कई विरोधाभास भी देखने को मिलते हैं जैसे एक ओर वसुधैव कुटुंबकम की भावना कितनी दिव्य,उदात्त है वही व्यावहारिक रूप से कई जातियों को अस्पृश्य मान लिया गया।
  • मध्यकालीन समय में एक ओर संसार के यूरोप के देश,अमेरिका,रूस ज्ञान-विज्ञान तथा आधुनिक तकनीकी का विकास,शक्ति के नए-नए साधनों की खोज करके बंदूक,तोफखानों का निर्माण कर रहे थे।जबकि 11 वीं शताब्दी से लेकर 19 वीं शताब्दी तक भारत में उच्चकोटि का न तो कोई विद्वान पैदा हुआ और जो विद्वान थे उन्होंने न ही कोई ऐसी खोजें और आविष्कार किया।परिणामस्वरूप भारत को शताब्दियों तक गुलामी सहनी पड़ी।यह कैसी विडंबना थी कि पाश्चात्य देशों ने भौतिक उन्नति करके शक्ति संचय कियाअध्यात्म की तरफ ध्यान नहीं दिया।इसलिए संसार को दो विश्व युद्धों तथा अन्य कई युद्धों में झोंक दिया।मनुष्य जाति का विनाश हुआ।भारत ने अध्यात्म को पकड़ लिया और भौतिक क्षेत्र की उन्नति की तरफ ध्यान नहीं दिया।अध्यात्म में पाखंड घुस गया।भारत को अपार क्षति उठानी पड़ी।

3.पाश्चात्य संस्कृति (Western Culture):

  • पाश्चात्य देशों में सहिष्णुता का तत्त्व नहीं पाया जाता है।इसके कारण पुर्तगाल,फ्रांस,ब्रिटेन जैसे देशों ने भारत जैसे देशों का शोषण तो किया ही साथ ही अत्याचार भी किए हैं।दो विश्व युद्ध पाश्चात्य् देशों की ही देन हैं।जिसमें इतना नरसंहार हुआ है कि असहिष्णुता के लिए ओर कोई प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं है।
  • पूंजीवादी व्यवस्था भी पाश्चात्य् संस्कृति की देन है। जिसका मूल आधार है कि कम से कम देकर साथ ही घटिया माल देकर अधिक से अधिक पैसा प्राप्त करना।पूंजीवादी व्यवस्था में मूलरूप से लाभ का दृष्टिकोण है उसमें अनैतिक तरीका अपनाया जाता है।शिक्षण संस्थान जैसे पवित्र कार्य में भी पूंजीवाद अर्थात् आर्थिक लाभ तथा धन कमाने की प्रवृत्ति रहती है।दूसरों को नुकसान पहुंचाकर अपना स्वार्थ सिद्ध करना पूंजीवाद है।
  • पाश्चात्य उपभोक्तावादी संस्कृति में हर वस्तु चाहे स्त्री,पुरुष (उपभोक्तावाद मानव को वस्तु की तरह ही माना जाता है) या भौतिक पदार्थ हो उसे भोग के दृष्टिकोण से देखा जाता है तो प्रोडक्ट कैसा भी हो उसे बेचने से मतलब है।जैसे कोकोकोला विदेशी आयातित प्रोडक्ट है।इससे स्वास्थ्य को कौनसा लाभ होने वाला है?लाभ की कल्पना तो बिल्कुल की ही नहीं जा सकती है बल्कि इससे व्यक्ति कई प्रकार के रोगों का शिकार हो जाता है।

4.पश्चिम की बाजारवादी संस्कृति (Western Marketist Culture),भारत पर पश्चिमी बाजारवादी संस्कृति का प्रभाव (The influence of Western marketist culture on India):

  • पाश्चात्य देश अपनी बाजारवादी संस्कृति को कई माध्यमों से फैला रहे हैं।मसलन फिल्म,वेलेंटाइन डे,लिव इन रिलेशनशिप,अप्रैल फूल,स्प्रिंग ब्रेक इत्यादि के द्वारा भारत में बाजारवादी संस्कृति बल्कि इसे बाजारवादी अपसंस्कृति कहे तो ज्यादा मुनासिब होगा,से फैला रहे हैं।
  • फिल्मों के जरिए पैसा और प्रसिद्धि के लिए भारतीयों को विकृत और घटिया मानसिकता के साथ प्रस्तुत करते हैं।यह कार्य अप्रवासी भारतीय द्वारा फिल्मों के निर्माण के जरिए होता है।इन फिल्मों में भारतीय कथावस्तु एवं परिवेश का सतही और बाजारू इस्तेमाल किया जाता है।इनमें भारतीय धर्म,संस्कृति और दर्शन को समझने का बिल्कुल प्रयास नहीं किया जाता है।उदाहरणार्थ अप्रवासी भारतीय निर्देशक मीरा नायर की फिल्म कामसूत्र में ऐसा ही दिखाया गया है।
  • 14 जनवरी को वैलेंटाइन डे पर भी ऐसा ही नजारा देखा जा सकता है।विशेषकर मुंबई और महानगरों में युवक-युवतियों को प्रेम प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है।इसमें प्रेम शब्द का लेबल लगा दिया गया है परन्तु इसमें युवक-युवतियां विदेशी शराब पीने और मस्तमस्त होकर फूहड प्रदर्शन करते हैं। विद्यार्थी काल में संयम तथा सेक्स से दूर रहने की अपेक्षा की जाती है (भारतीय संस्कृति के अनुसार) तभी विद्यार्जन किया जा सकता है।
  • मुबंई नगरी में तो ऐसा लगता है जैसे पाश्चात्य् देश का कोई नगर है जहाँ खुले रूप में रोमांस के नजारे देखे जा सकते हैं।समुद्र तटों पर,बगीचों,जलपान घरों,होटलों,सिनेमाघरों,क्लबों, शिक्षण संस्थानों के परिसरों तथा विभिन्न स्थानों पर एक-दूसरे की आंखों में आंखें,बाहों में बाहें डाले आलिंगन करते हुए,नाचते-गाते एक-दूसरे को प्यार जताते हुए युवक-युवतियां संपूर्ण मुंबई नगर में देखे जा सकते हैं।
  • रोम के तत्कालीन सम्राट क्लाजियस की मान्यता थी कि प्रेम करने वाले अथवा शादीशुदा पुरुष अच्छे सैनिक या प्रशासक नहीं होते।इसलिए सम्राट ने राजकीय आदेश जारी कर दिया कि सेना या शासन से जुड़े लोग शादी नहीं कर सकते।इसकी अवहेलना करने वालों को मौत की सजा का प्रावधान कर दिया।प्यार के मसीहा संत वैलेंटाइन ने राजाज्ञा भंग की और अनेकों प्रेमी-प्रेमिकाओं की शादी करा डाली।परिणामस्वरूप संत वैलेंटाइन को 14 फरवरी 291 को फांसी दे दी गई।किंतु उनकी शहादत पूरे रोम में प्रेम-विवाह का कारण बन गई। कालांतर में यह लहर दूसरे पश्चिमी देशों में फैली और हर साल 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे का जश्न मनाया जाने लगा।
  • यह जश्न बिना विवाह के बंधन में बंधे ही रोमांस और यौनाचार को बढ़ावा देता है जो कि भारतीय संस्कृति के खिलाफ है।यह स्त्री-पुरुष के बीच स्वाभाविक प्रेम संबंध नहीं है बल्कि पाश्चात्य संस्कृति का भोंडा प्रदर्शन है।इसमें युवक-युवतियों को विदेशी शराब तथा मांस का सेवन कर मदमस्त होकर निर्लज्ज प्रदर्शन किया जाता है।
  • इस प्रकार स्प्रिंग ब्रेक (वसंतोत्सव),लिव इन रिलेशनशिप,अप्रैल फूल इत्यादि पाश्चात्य् संस्कृति भारत के लिए अपसंस्कृति के प्रतीक हैं।इन कार्यक्रमों के जरिए पाश्चात्य देशों को अपनी माल की मार्केटिंग करने का अवसर मिल जाता है।
    उपर्युक्त आर्टिकल में पश्चिम का बाजारवादी सांस्कृतिक आक्रमण (Marketist Cultural Invasion of West),भारत पर पश्चिम का बाजारवादी सांस्कृतिक आक्रमण (Western’s Marketist Cultural Invasion of India) के बारे में बताया गया है।

5.आलसी शिक्षक (हास्य-व्यंग्य) (Lazy Teacher) (Humor-Sattire):

  • एक आलस्याचार्य थे जो बहुत बड़े आलसी थे।छात्र-छात्राओं को गणित के सवाल बताते-बताते ही जम्भाई लेने लग जाते।छात्र-छात्राओं ने तंग आकर खुद भी खर्राटे लेने चालू कर दिया।अब जब भी गणिताचार्य जी (आलस्याचार्य) का कालांश आता तो छात्र-छात्राओं को शकुन मिलने लगा।वे उनके कालांश में जी भरकर खर्राटे भरते और शांतिमयी निद्रा का आनंद लेते।एक दिन प्रधानाध्यापक ने तंग आकर एक सभा का आयोजन किया।सभा का आयोजन शुरू होते ही आलस्यचार्य ने सभा के सभी सदस्यों से कहा कि मेरे सिद्धांतों से सहमत हैं तो निम्नलिखित प्रस्ताव को पारित करें।तब सभापति ने कहा कि कहिए आपके प्रस्ताव क्या हैं।
  • यह सभा प्रस्ताव पारित करती है कि:
  • (1.)सरकार के शिक्षा विभाग से यह प्रार्थना की जाए कि एक नियम यह बनाया जावे कि कक्षा में नींद न लेना अपराध माना जावे।
  • (2.)जो छात्र-छात्राएं गणित जानते हैं अथवा गणित जानने का प्रयास करते हैं उन पर उनकी हैसियत के अनुसार दंड लगाया जाए।
  • (3.)जो छात्र-छात्रएं गणित की उपयोगिता या गणित का व्यावहारिक जीवन में महत्त्व की बात करें,उनको शिक्षण संस्थान से बर्खास्त कर दिया जाए।
  • (4.)फर्नीचर बनाने वाले से निवेदन किया जाए कि भविष्य में इस तरह का फर्नीचर तैयार किया जाए जिससे आराम से निर्विघ्न रुप से लेटा जा सके और शांतिमयी निद्रारानी की गोद में जाने में किसी प्रकार की दुविधा न हो।
  • (5.)स्कूल में वार्षिकोत्सव में शांत छात्र को जो प्राइज दिया जाता है वह सबसे आलसी स्टूडेंट को दिया जाए क्योंकि आलसी स्टूडेंट के बराबर शांत और एकाग्रचित्त स्टूडेंट कोई हो ही नहीं सकता।
  • इन प्रस्तावों को मूर्खतापूर्ण मत समझिए।क्योंकि आप सुखी तो सभी सुखी।लोग कहते हैं इस तरह के वाहियात सिद्धांतों की वजह से ही भारत के छात्र-छात्राओं का बंटाधार हो गया है और देश की लुटिया डूब गई है।परंतु वे लोग नहीं जानते हैं कि इन सिद्धान्तों का प्रचार-प्रसार विदेशों में नहीं हुआ वरना विदेशी आक्रमणकारी नैसर्गिक निद्रा-जन्य सुख को छोड़कर यहां आते ही नहीं।
  • इस पर सभापति ने कहा कि इन प्रस्तावों को प्रशासन के पास भेजेगा कौन?इस पर आलस्याचार्य ने कहा कि मैं जानता था कि आप मेरे प्रस्ताव से सहमत नहीं होंगे।आपने मेरा बेकार में समय नष्ट कर दिया नहीं तो अब तक निद्रा देवी की गोद में जा चुका होता।इतना कहते ही आलस्याचार्य वहीं लुड़क गए।
  • शिक्षा:असफलता,निराशा,दु:ख,जीवन में लक्ष्य का होना तथा गणित के सवाल प्रयास करने पर भी हल न कर पाना व उत्साह के न होने से आलस्य आता है।धीरे-धीरे आलस्य करने से हमें राहत महसूस होती है जिससे यह हमारी आदत बन जाता है।भतृहरि नीतिशतक में कहा है कि
  • “आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपु:।
    नासत्युधमसमो बन्धु: कृत्वा यं नावसीदति”।।
  • अर्थात् आलस्य ही मनुष्य के शरीर में रहने वाला सबसे बड़ा शत्रु है,उद्यम के समान मनुष्य का कोई बन्धु नहीं है जिससे मनुष्य दु:खी नहीं होता।

6.पश्चिम का बाजारवादी सांस्कृतिक आक्रमण (Marketist Cultural Invasion of West),भारत पर पश्चिम का बाजारवादी सांस्कृतिक आक्रमण (Western’s Marketist Cultural Invasion of India) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.सांस्कृतिक हमले का दुष्परिणाम क्या है? (What is the consequence of the cultural attack?):

उत्तर:हमारे आदर्श पुरुषों भगवान् राम,माता सीता,श्रीकृष्ण इत्यादि को गलत रूप में मंचित किया जाता है।पश्चिम के बाजारवादी संस्कृति के ठेकेदारों ने टीवी के माध्यम से अपने देश की गंदगी को भारत में उंडेल रहे हैं।आलिंगन और चुम्बन दृश्य तो ऐसे दिखाए जाते हैं जैसे ये सीरियल या फिल्म की आत्मा हो।

प्रश्न:2.पाश्चात्य् संस्कृति किस माध्यम से फैल रही है? (Through what means is western culture spreading?):

उत्तर:पाश्चात्य् संस्कृति फिल्मों,टीवी सीरियल तथा अनेक पाश्चात्य् उत्सवों के माध्यम से फैल रही है।इसमें मुबंई का सबसे ज्यादा योगदान है।मुबंई को पाश्चात्य् संस्कृति विरासत में मिली है।मुबंई के फिल्मकार,टीवी सीरियल निर्माता कथानक का चुनाव करते समय भारतीय धर्म,संस्कृति और दर्शन की अनदेखी करते हैं।इसके पश्चात् फिल्म व टीवी के प्रसारण के माध्यम से यह पूरे भारत में फैल जाती है।यह सब अन्धानुकरण करने का परिणाम है।

प्रश्न:3.पाश्चात्य् देश अपसंस्कृति को क्यों फैलाते हैं? (Why do western countries spread the culture?):

उत्तर:पश्चिमी देशों को अपने प्रौडक्ट की मार्केटिंग करनी होती है।पाश्चात्य् देशों में आबादी कम है और लागत अधिक है।इसलिए वे भारत जैसे देश को जिसमें आबादी अधिक है,प्रोडक्ट को बेचने में एक अच्छी मण्डी के रूप में देखते हैं।पहले वेलेंटाइन डे, अप्रैल फूल, स्प्रिंग ब्रेक (बसन्तोत्सव) ,फिल्मों, टीवी सीरियलों के माध्यम से हमारी उत्तेजना को भड़काया जाता है और दिलफेंक संस्कृति के नजारे पेश किए जाते हैं।अपने प्रोडक्ट की पेकेजिंग और नुमाइश इस तरह की जाती है ताकि उपभोक्ता तत्काल जाल में फँस जाए।लिपस्टिक, टुथपेस्ट, टीवी,कार,रेडीमेड पेन्ट-शर्ट,शैम्पू,साबुन, सुगन्धित तेल,क्रीम, पाउडर इत्यादि को तड़क-भड़क व आकर्षक पैकेजिंग के साथ पेश किया जाता है।इससे देश के उद्योग समाप्त हो रहे हैं साथ ही भारतीय संस्कृति,परम्पराओं, रीति रिवाज खत्म होते जा रहे हैं।इनके स्थान पर युवा पाश्चात्य् देशों के उत्सवों को मनाने में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं क्योंकि उनमें रोमांस है, ग्लैमर है।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा पश्चिम का बाजारवादी सांस्कृतिक आक्रमण (Marketist Cultural Invasion of West),भारत पर पश्चिम का बाजारवादी सांस्कृतिक आक्रमण (Western’s Marketist Cultural Invasion of India) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Marketist Cultural Invasion of West

पश्चिम का बाजारवादी सांस्कृतिक आक्रमण
(Marketist Cultural Invasion of West)

Marketist Cultural Invasion of West

पश्चिम का बाजारवादी सांस्कृतिक आक्रमण (Marketist Cultural Invasion of West)
कला,फिल्म,उत्सव तथा उपभोक्ता वस्तुओं के जरिए किया जा रहा है।

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