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Job Interview

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2 (1.)व्यक्तिगत परिचय (Individual Introduction):

1.जाॅब साक्षात्कार (Job Interview):

  • जाॅब साक्षात्कार (Job Interview) का महत्त्व दिनोदिन बढ़ता जा रहा है।निजी व सरकारी सेवाओं में जाॅब साक्षात्कार का विशिष्ट महत्त्व है।आधुनिक युग प्रतिस्पर्धा का युग है।इसलिए हर कम्पनी कर्मचारियों की नियुक्ति में सक्षम,योग्य और कुशल कर्मचारियों को वरीयता देती है।इसलिए ऐसे कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए प्रतियोगिता परीक्षाएं आयोजित की जाती है।प्रतियोगिता परीक्षा के पश्चात् साक्षात्कार लिए जाते हैं।प्रतियोगिता परीक्षा और साक्षात्कार के द्वारा श्रेष्ठ अभ्यर्थियों का चयन किया जाता है।लोकतन्त्र में सभी को रोजगार के समान अवसर प्रदान किए जाते हैं।
    आधुनिक युग में निजी कम्पनियों,सरकारी कम्पनियों तथा विभिन्न सेवाओं में प्रतियोगिता परीक्षा पास करना और साक्षात्कार देना आवश्यक हो गया है।
  • शहरी युवाओं,साधन सम्पन्न तथा दो-चार बार साक्षात्कार दिए गए अभ्यर्थी को तो साक्षात्कार का अनुभव हो जाता है परन्तु ग्रामीण क्षेत्र के युवा,निर्धन तथा जिन्होंने साक्षात्कार का सामना नहीं किया है ऐसे अभ्यर्थियों को साक्षात्कार देने में संकोच,शर्म,झिझक तथा परेशानी का सामना करना पड़ता है।साक्षात्कार के लिए जाने में संकोच व परेशान होने के बजाय अभ्यर्थी को साक्षात्कार की तैयारी करनी चाहिए।इसके लिए अपने विषय का अध्ययन कर लिया जाए तथा अपने मित्रों के साथ छद्म साक्षात्कार का अभ्यास कर लेना चाहिए।
  • साक्षात्कार को कभी बहुत बड़ी समस्या या संकट नहीं समझना चाहिए।साक्षात्कार लेने वाले अधिकारी अनुभवी तथा परिपक्व जरूर होते हैं परन्तु सर्वज्ञ नहीं होते हैं।इसलिए साक्षात्कार कर्त्ता द्वारा प्रश्न पूछे जाने पर चित्त को स्थिर रखकर और अच्छी तरह सोच समझकर उत्तर देना चाहिए।यदि पूछे गए प्रश्न का उत्तर आप नहीं जानते हैं तो उसका गलत,अधकचरा तथा घुमा फिराकर उत्तर देने के बजाय स्पष्ट रूप से मना कर देना चाहिए।साक्षात्कार बोर्ड पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • यह ठीक है कि साक्षात्कार बोर्ड के अधिकारियों की इच्छा पर निर्भर करता है कि साक्षात्कार का प्रारम्भ किस प्रकार करे तथा कैसे प्रश्न पूछे जाएं।साक्षात्कार बोर्ड में कभी-कभी एक से अधिक अधिकारी भी होते हैं।वे अपने-अपने क्षेत्र के जानकार होते हैं।ऐसा भी होता है कि कोई अभ्यर्थी यदि कहीं पहले से ही सेवारत है तो उससे सम्बन्धित यह प्रश्न पूछा जा सकता है कि वह उस सेवा को क्यों छोड़ना चाहता है।
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(1.)व्यक्तिगत परिचय (Individual Introduction):

  • इण्टरव्यू बोर्ड के प्रत्येक अधिकारी के समक्ष सभी कैंडिडेट्स की शिक्षा,आयु,अनुभव इत्यादि का विवरण होता है।इसलिए आपसे यदि व्यक्तिगत जानकारी सम्बन्धी कोई जानकारी पूछी जाती है तो उसका सही और संक्षिप्त उत्तर देना चाहिए क्योंकि कैंडिडेट को यह याद रखना चाहिए कि अन्य कैंडिडेट्स को भी साक्षात्कार देना है।इसके अलावा संक्षिप्त तथा संगत (Brief and to the point) उत्तर देना भी एक कला है।जैसे यदि आपसे पूछा जाए कि बीएससी/बीए करने में तीन की जगह चार वर्ष क्यों लग गए हैं।इसका सही कारण बता देना चाहिए।क्योंकि एक झूठ बोलने को छिपाने के लिए कई झूठ बोलने पड़ते हैं और अन्त में वह पकड़ा जाता है जिसका साक्षात्कार बोर्ड के अधिकारियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • कभी-कभी ग्रेजुएशन की डिग्री के विषय के बारे में भी प्रश्न पूछा जा सकता है।जैसे आपने आर्ट्स के बजाय साइंस का चयन क्यों किया?इसका सीधा सा उत्तर है कि मेरी रूचि साइन्स विषय में है।यह भी हो सकता है कि आर्ट्स से सम्बन्धित विषय में कम अंक प्राप्त हुए हों।अतः मुख्य कारण के साथ गौण कारण को भी साफ-साफ बता दें।
    खेलों से सम्बन्धित जानकारी का उल्लेख सही-सही करना चाहिए।कई बार अभ्यर्थी आवेदन पत्र में खेलों के बारे में बढ़ा-चढ़ाकर उल्लेख कर देते हैं।परन्तु इण्टरव्यू में जब उससे सम्बन्धित प्रश्न पूछा जाता है तो असलियत मालूम पड़ जाती है।गलत उत्तर द्वारा इण्टरव्यू बोर्ड के अधिकारियों का मूड खराब नहीं करना चाहिए।

(2.)प्रोफेशन सम्बन्धी प्रश्न (Question About Profession):

  • प्रत्येक व्यक्ति की इच्छा होती है कि वह उन्नति की ओर अग्रसर हो।संस्कृत में एक सूक्ति है कि “पुरुषसिंह मुपैति उद्योगिनं” अर्थात् उद्योगशील वीर पुरुष ही लक्ष्मी का वरण करते हैं।अतः अच्छी नौकरी या प्रोफेशन के लिए सतत् प्रयत्नशील रहना कोई बुराई नहीं बल्कि एक अच्छी बात है।साक्षात्कार देते समय प्रायः यह पूछा जाता है कि आप अपना पहला पद क्यों छोड़ना चाहते हैं जबकि उस पर अच्छा वेतन मिल रहा है।मान लीजिए आप प्रोफेसर हैं तथा उस पर अच्छा वेतन मिल रहा है।आप इंजीनियर के पद के लिए इण्टरव्यू दे रहे हैं।स्पष्ट है कि इंजीनियर से अधिक प्रोफेसर का वेतन होता है।अतः स्वत: ही यह बात सामने आती है कि ऐसा कौनसा आकर्षण है जिसके कारण अधिक लाभकारी सेवा छोड़कर अल्प लाभकारी सेवा में जाना चाहते हैं।यदि इसका उत्तर यह दिया जाता है कि देश सेवा और जनसेवा के कारण उसकी पद-परिवर्तन की इच्छा हुई है तो यह उत्तर ठीक नहीं होगा तथा इण्टरव्यू अधिकारी पर इसका प्रभाव अच्छा न पड़े।
  • पूर्व प्रोफेशन अथवा सेवा के बारे में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर सावधानी तथा ईमानदारी से देना चाहिए ताकि जो कुछ व्यक्तिगत परिचय में लिखा है उसमें तथा आप इण्टरव्यू में जो कुछ कह रहे हैं उसमें समानता बनी रहे।कहीं ऐसा प्रतीत न हो कि इण्टरव्यू अधिकारी से बात छुपाई जा रही है अथवा उन्हें भ्रम में रखने की कोशिश की जा रही है।

(3.)तथ्यपूर्ण सूचना (Factual Information):

  • कैंडिडेट से जब तथ्यपूर्ण उत्तर देने के लिए प्रश्न किए जाएं तो हमेशा सही तथा संक्षिप्त उत्तर देने की चेष्टा करनी चाहिए।यदि तथ्यपूर्ण जानकारी नहीं है तो यह दम्भ करने की भावना निरर्थक सिद्ध होगी कि उसे सम्बन्धित विषय की जानकारी अच्छी तरह से है।इण्टरव्यू अधिकारी जब कोई ऐसा प्रश्न करता है जिसमें तथ्यपूर्ण जानकारी देने की आवश्यकता होती है तो कभी यह न समझना चाहिए कि इण्टरव्यू अधिकारी को उसकी अधकचरी जानकारी होगी या वह कैंडिडेट की चालाकी को पकड़ नहीं पाएगा।यदि किसी प्रश्न का उत्तर नहीं आता उस समय विनम्रतापूर्वक यही कहना उचित होता है कि “श्रीमान् मुझे इसकी जानकारी नहीं है।”
  • ऐसा हो सकता है कि जिन विषयों का अध्ययन विश्वविद्यालय स्तर पर किया हो उन सभी के बारे में कैंडिडेट पारंगत न हो।कैंडिडेट विश्वकोष तो होता नहीं जो सबकुछ सही-सही बता दे।फिर भी यह अपेक्षा तो की ही जाती है कि उसे उन विषयों का ज्ञान अवश्य होना चाहिए जिनका अध्ययन विशेषज्ञतापूर्ण किया गया है।यदि कैंडिडेट फिर भी अनभिज्ञता प्रकट करता है तो फिर यही निष्कर्ष निकालना स्वाभाविक हो जाता है कि साक्षात्कार देने वाले कैंडिडेट ने अच्छी तरह अपने विषयों को पढ़ा नहीं है या उसका जीवन इतना चिन्ताग्रस्त रहा है जिसके कारण गम्भीरतापूर्वक अध्ययन करने की उसे सुविधा ही नहीं मिल सकी।यदि उससे यह पूछा जाता है कि विषय विशेष का तो उसे अच्छी तरह अध्ययन करना चाहिए था फिर उसने ऐसा क्यों नहीं किया।उस समय अपनी स्थिति स्पष्ट करने में कोई बुराई नहीं है।
  • लिखित परीक्षाएं उत्तीर्ण करने के बाद साक्षात्कार में भी यह जानने का प्रयास किया जाता है कि सम्बन्धित व्यक्ति को पुस्तकीय ज्ञान के अतिरिक्त और क्या-क्या विशेष जानकारी है।उसका स्वास्थ्य कैसा है तथा उसके सामान्य बोलचाल तथा बर्ताव में कौन-कौनसी विशेषताएं हैं।

(4.)नीतियों के सम्बन्ध में ज्ञान (Knowledge About Policy):

  • कई प्रश्न ऐसे पूछे जाते हैं जो वर्तमान गतिविधियों से सम्बद्ध होते हैं तथा क्या कैंडिडेट स्वतन्त्र रूप से बौद्धिक चिन्तन करने की क्षमता रखता है एवं क्या वह स्वयं भी सही निर्णय लेने में समर्थ है।ऐसे प्रश्नों से भयभीत होने के बजाय जमकर तथा सोच विचारकर उत्तर देना चाहिए।पूर्वाग्रही होना अच्छा नहीं है,ऐसे समय उसे अपनी स्थिति न्यायाधीश के समान समझनी चाहिए।सही बात को सही और गलत को गलत कहने में कोई हर्ज नहीं होता।यह सोचना उचित नहीं होता कि बोर्ड के सभी व्यक्ति एक ही जैसी विचारधारा रखते होंगे और यदि उम्मीदवार ने कोई ऐसी बात कही जो इस विचारधारा का समर्थन नहीं करती तो उसे व्यर्थ ही बोर्ड का कोपभाजन बनना पड़ेगा।इण्टरव्यू अधिकारी तो उम्मीदवार द्वारा व्यक्त विचारों का मूल्यांकन और उसकी उपयोगिता की मात्र जांच करते हैं।इसलिए इण्टरव्यू बोर्ड के सामने अपनी राय निर्भय होकर व्यक्त करनी चाहिए।तथा अपने पक्ष के समर्थन में तर्क भी देने चाहिए।

(5.)अपने विचारों की अभिव्यक्ति (Express Your Thoughts):

  • भगवान ने प्रत्येक व्यक्ति को मन,वाणी और प्रज्ञा प्रदान की है।संविधान के अनुसार भी प्रत्येक नागरिक को अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता है।ऐसे व्यक्ति जिन्हें अच्छी शिक्षा मिली है,स्वयं अनुभव प्राप्त किया है,वे अपने ज्ञान के आधार पर विचारों की अभिव्यक्ति करते ही हैं।इन लोगों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे जब भी कोई बात कहें उसके समर्थन में समुचित तर्क,उदाहरण तथा तथ्य प्रस्तुत करें।ऐसा करने से बात स्वयं ही वजनदार हो जाती है।इंटरव्यू अधिकारी पर ऐसी बात का प्रभाव भी पड़ता है।स्वतंत्र चिंतक होना अच्छी बात है।जो बातें हम पढ़-पढ़कर अथवा दूसरों के विचारों की नकल करके व्यक्त करते हैं,उन पर यदि विस्तार से चर्चा होने लगती है तो पोल खुल जाती है।साक्षात्कार के अवसर पर तो विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है कि जो भी विचार व्यक्त किए जाएं वे सुसंगत,प्रभावशाली और तर्कपूर्ण हों।
  • यदि इंटरव्यू बोर्ड के किसी सदस्य ने किसी मुद्दे को लेकर अपने विचार व्यक्त किए हैं तो जरूरी नहीं होता कि आप भी उन्हीं का समर्थन करें।आप प्रज्ञा संपन्न है अपनी बुद्धि का प्रयोग कीजिए तथा यह सिद्ध कीजिए कि आप जो कुछ कह रहे हैं वह असंगत नहीं है बल्कि उसके पीछे भी तर्क (Logic) हैं।कभी-कभी यह देखने में आता है कि इंटरव्यू अधिकारी कोई ऐसी बात कह देता है जिसका वह स्वयं पक्षधर नहीं होता।ऐसी बात या तो उम्मीदवार को उत्तेजित करने के लिए कही जाती है या उम्मीदवार के ज्ञान की थाह लेने के उद्देश्य से कही जाती है।चयन समिति या साक्षात्कार बोर्ड के सदस्य अलग-अलग विषयों में पारंगत होते हैं।वे उम्मीदवार द्वारा दिए गए उत्तर को ध्यानपूर्वक सुनते हैं।इसमें विशेषज्ञ सदस्य तो अपनी दृष्टि से मूल्यांकन करता है किंतु अन्य लोग जो उत्तर सुन रहे हैं वे यदि प्रभावित हो गए तो उसका लाभ आपको पूरी तरह प्राप्त हो सकता है।
  • विचारों की अभिव्यक्ति स्वयं में एक कला है।यह कला सतत् अभ्यास से आती है।कुछ लोग इंटरव्यू बोर्ड का सामना करते ही शिथिल हो जाते हैं और ठीक प्रकार से बोल नहीं पाते।यह स्थिति आपकी न हो इसलिए अपने विचारों को व्यक्त करने का अभ्यास आरंभ में कर लेना ठीक होता है।ऐसे अवसरों पर हमेशा यह समझना चाहिए कि जिन लोगों द्वारा इंटरव्यू लिया जा रहा है वे अपनी योग्यता की जांच करने के लिए हैं और परीक्षक हैं,दंडाधिकारी नहीं है।यदि आपका उत्तर उन्हें नहीं भाता तो इसमें शर्म और लज्जा की कोई बात नहीं होती।अपना-अपना मत है और आपको भी अपना मत प्रकट करने का अधिकार प्राप्त है।

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2.निष्कर्ष (Conclusion):

  • तथ्यपूर्ण और सही-सही उत्तर देना ही सर्वोत्कृष्ट तरीका है जिसके द्वारा इंटरव्यू बोर्ड के अधिकारी को प्रभावित किया जा सकता है।वे इस बात से प्रसन्न होते हैं कि उम्मीदवार योग्य,सत्यनिष्ठ तथा मितभाषी है और उसे जो कुछ मालूम नहीं है उसे वह शालीनता से स्वीकार भी करता है।एक झूठ को छुपाने के लिए कई बहाने बनाने पड़ते हैं जिसके कारण उम्मीदवार से जिरह की जाती है और जिरह के भंवरजाल में फंसकर अंततः उम्मीदवार की कलई खुल जाती है।सच्ची बात सच्ची होती है जिससे मनोबल सुदृढ़ होता है।उम्मीदवार से यदि कोई सहायक प्रश्न पूछे जाते हैं तो वह अपने तर्कों और तथ्यों के आधार पर दिए गए उत्तर की पुष्टि करने में समर्थ रहता है।बोर्ड के सदस्यों को प्रायः इस बात से कोई मतलब नहीं होता कि उम्मीदवार की विचारधारा किस प्रकार की है बल्कि वे देखते हैं कि विचारों का प्रस्तुतीकरण किस प्रकार किया गया है और उसके व्यक्त विचार तथ्यपूर्ण,तर्कसंगत तथा प्रभावपूर्ण हैं अथवा नहीं है।यह भ्रम है कि बोर्ड सदस्य चाहते हैं कि जो कुछ उनका मकसद है उम्मीदवार भी उसी का समर्थन करें।बोर्ड तो उम्मीदवार के विचारों का मूल्यांकन करता है।वह यह नहीं देखता कि बोर्ड के विचारों से उम्मीदवार के विचार तालमेल रखते हैं अथवा नहीं।
  • इसलिए प्रत्येक उम्मीदवार को इस बात से निश्चिंत रहना चाहिए कि यदि वह बोर्ड की हां में हां नहीं मिलाएगा तो उसका अहित हो जाएगा।बोर्ड के सदस्य पूर्णतया तटस्थ तथा न्यायशील होते हैं और उनकी आकांक्षा यही रहती है कि जो सुपात्र है,सक्षम और सुयोग्य है उनका किसी प्रकार से अहित न होने पाए।इस प्रकार आप अपने विचारों को स्पष्ट तरीके से तर्कयुक्त शैली में रखेंगे तो उसको इंटरव्यू बोर्ड के अधिकारी न केवल पसंद करेंगे बल्कि आप से प्रभावित हुए बिना नहीं रहेंगे।इसके लिए आपको पूर्वाभ्यास करना होगा तभी आप इंटरव्यू अधिकारी को प्रभावित कर सकते हैं।बिना तैयारी के आप इंटरव्यू देने जाएंगे तो हो सकता है आप घबराहट में उल्टे और विपरीत उत्तर दे दें जिससे आपके प्रति इंटरव्यू अधिकारी संतुष्ट न हो।
  • उपर्युक्त विवरण में जाॅब साक्षात्कार (Job Interview) के बारे में बताया गया है।

3.जाॅब साक्षात्कार (Job Interview) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.7 सबसे आम साक्षात्कार प्रश्न और उत्तर क्या हैं? (What are the 7 most common interview questions and answers?):

उत्तर:7 सबसे आम नौकरी साक्षात्कार प्रश्नों के उत्तर
आपकी कमजोरियां क्या हैं?
हम आपको नौकरी क्यों दें?
आप यहां क्यों काम करना चाहते हैं?
तुम्हारा लक्ष्य क्या है?
आपने अपनी नौकरी क्यों छोड़ी (या आप क्यों छोड़ रहे हैं)?
आप अपनी नौकरी में कब सबसे ज्यादा संतुष्ट थे?

प्रश्न:2.आप हमारे लिए क्या कर सकते हैं जो अन्य उम्मीदवार नहीं कर सकते? (What Can You Do for Us That Other Candidates Can’t?),एक सफल जॉब इंटरव्यू के लिए 5 टिप्स क्या हैं? (What are 5 tips for a successful job interview?):

उत्तर:एक सफल जॉब इंटरव्यू के लिए 5 टिप्स
(1.)अपने साक्षात्कार में समय के पाबंद रहें।  नौकरी के लिए इंटरव्यू में समय पर होना अनिवार्य है।
(2.)कंपनी पर अपना शोध करें।
(3.)अशाब्दिक संचार के बारे में मत भूलना (Don’t forget about nonverbal communication)।
(4.)सबके साथ विनम्र रहें।
(5.)अपने साक्षात्कार के लिए तैयार रहें।

प्रश्न:3.नौकरी साक्षात्कार प्रक्रिया क्या है? (What is job interview process?):

उत्तर:नए कर्मचारियों को काम पर रखने के लिए साक्षात्कार प्रक्रिया एक बहु-चरणीय प्रक्रिया है।  साक्षात्कार प्रक्रिया में आम तौर पर निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं: नौकरी विवरण लिखना,नौकरी पोस्ट करना,साक्षात्कार शेड्यूल करना,प्रारंभिक साक्षात्कार आयोजित करना, व्यक्तिगत साक्षात्कार आयोजित करना,उम्मीदवारों के साथ अनुवर्ती और किराया बनाना (following up with candidates and making a hire)।

प्रश्न:4.आप नौकरी के लिए इंटरव्यू की तैयारी कैसे करते हैं? (How do you prepare for a job interview?):

उत्तर:इंटरव्यू की तैयारी के लिए 6 स्टेप गाइड
संगठन पर शोध करें।
संभावित प्रश्नों की तैयारी करें – और उनके उत्तर।
अनुसंधान कैरियर प्रगति और प्रशिक्षण के अवसर।
आपको जिस अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता हो,उसे छाँट लें।
मार्ग की योजना बनाएं।
समझें कि क्या पहनना है।

प्रश्न:5.इंटरव्यू के लिए क्या टिप्स हैं? (What are the tips for interview?):

उत्तर:साक्षात्कार के दिन,याद रखें:
अपने शेड्यूल की योजना बनाएं ताकि आप 10 से 15 मिनट पहले पहुंचें।
अपने आप जाओ।
पेशेवर दिखाई दो।नौकरी के लिए उपयुक्त तरीके से पोशाक।
अपने एमपी3 प्लेयर,कॉफी,सोडा या बैकपैक को घर पर या अपनी कार में छोड़ दें।
अपने सेल फोन बंद करो।
हास्य और मुस्कान की अपनी भावना लाओ!

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा जाॅब साक्षात्कार (Job Interview) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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जाॅब साक्षात्कार (Job Interview) का महत्त्व दिनोदिन बढ़ता जा रहा है।निजी व सरकारी सेवाओं में जाॅब साक्षात्कार का विशिष्ट महत्त्व है।
आधुनिक युग प्रतिस्पर्धा का युग है।इसलिए हर कम्पनी कर्मचारियों की नियुक्ति में सक्षम,योग्य और कुशल कर्मचारियों को वरीयता देती है।

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