Laziness Hinders Study of Mathematics
1.गणित के अध्ययन में आलस्य बाधक (Laziness Hinders Study of Mathematics),गणित के छात्र-छात्राओं के लिए आलस्य को दूर करने की 3 टिप्स (3 Tips to Overcome Laziness for Mathematics Students):
- गणित के अध्ययन में आलस्य बाधक (Laziness Hinders Study of Mathematics) है क्योंकि इसके कारण छात्र-छात्राएं कठिन परिश्रम करने से जी चुराते हैं।जबकि गणित के अध्ययन के लिए कठिन परिश्रम करना आवश्यक है। छात्र-छात्राओं में प्रतिभा,सामर्थ्य,साधन और अवसर रहते हुए भी छात्र-छात्राएं आलस्य के कारण सफल होने से वंचित रह जाते हैं।बहुत से छात्र-छात्राओं के पिछड़ने का कारण आलस्य ही है।
- छात्र-छात्राओं को आलस्य के कारण सफलता से तो वंचित होना पड़ता ही है साथ ही वे उतना समय और जीवन भी नष्ट कर देते हैं।समय का उपयोग करने और कठिन परिश्रम करने पर कई उपलब्धियां हासिल हो सकती है।गणित का अध्ययन करने में अहंकार,क्रोध,प्रमाद,लोभ,मोह,बीमारी,आलस्य इत्यादि कई विकार बाधक है।इन विकारों से ग्रस्त विद्यार्थी विद्या प्राप्त कर ही नहीं सकता है।
- ऐसे कई महान गणितज्ञ,वैज्ञानिक और महापुरुष हुए हैं जो कम समय जीवित रहे हैं परंतु अल्प समय में महान उपलब्धियां अर्जित की है।इसका कारण यही है कि उन्होंने समय के एक-एक क्षण का सदुपयोग किया है,जो समय उपलब्ध हुआ है उसको उन्होंने आलस्य में व्यतीत नहीं किया है।मन की एकाग्रता के साथ कठिन परिश्रम करने पर गणित का अध्ययन करने से कई उपलब्धियां हासिल हो जाती है।गणित के क्षेत्र में प्रगति और विकास करने के लिए विद्यार्थी को कर्मठ होना आवश्यक है।जब छात्र-छात्राएं आलस्य जैसे विकार से ग्रस्त हो तो उनकी स्थिति लकवाग्रस्त शरीर की तरह हो जाती है।
- जैसे लकवा होने से शरीर काम नहीं करता है उसी तरह आलस्य से ग्रस्त विद्यार्थी की इंद्रियां शिथिल और मन निष्क्रिय हो जाते हैं।वस्तुतः आलस्य ऐसा धीमा जहर है जिसकी तरफ छात्र-छात्राएं आंख बंद किए रहते हैं और उससे मुक्त होने का कोई उपाय नहीं करते हैं।
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2.आलस्य से क्या तात्पर्य है? (What is Meant by Laziness?):
- गणित तथा अन्य विषयों का अध्ययन करने में उत्साह न होने के कारण अध्ययन कार्य से विमुख होना आलस्य है।छात्र-छात्राएं अपने जीवन का कोई लक्ष्य ही निर्धारित न करें तो मन में कुछ करने का विचार ही नहीं आता है।यदि लक्ष्य सामने हो जैसे आईआईटी करना,इंजीनियरिंग का कोर्स करना,पीएचडी करना इत्यादि के कारण तो मन में लक्ष्य को प्राप्त करने का उत्साह रहता है।मन में उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रुचि व तीव्र उत्कंठा रहती है।निराशा,हताशा,शोक या उत्साहहीनता के कारण अध्ययन कार्य तथा जीवन में कोई भी कार्य करने का विचार ही नहीं आता है।
- कभी-कभी भरपूर प्रयास करने पर भी गणित के सवाल हल नहीं हो रहे हों,गणित के सिद्धांत,प्रमेय,समस्याएं समझ में नहीं आ रही हो तो कुछ भी करने की मनःस्थिति नहीं होती है तथा छात्र-छात्राएं निष्क्रिय हो जाते हैं,यह स्थिति आलस्य है।गणित के सवालों,समस्याओं को हल करने पर उसमें कोई सार्थकता नजर नहीं आती है तथा न कोई उपलब्धि होती है तो उसका अध्ययन न करने पर छात्र-छात्राओं को राहत महसूस होती है।ऐसी स्थिति में छात्र-छात्राएं सोचते हैं कि जब बहुत अधिक कठिन परिश्रम करने पर भी कुछ हासिल नहीं हो रहा है तो कठिन परिश्रम करने का क्या तुक है?फलतः वे निराश,हताश हो जाते हैं।
- धीरे-धीरे आलस्य का प्रभाव हमारी दिनचर्या पर भी पड़ने लगता है क्योंकि जब अध्ययन कार्य करना ही नहीं है तो जल्दी उठने से फायदा क्या है? इस प्रकार छात्र-छात्राएं अपना समय सोने,खाने-पीने तथा आलस्य में व्यतीत करने लग जाते हैं। छात्र-छात्राओं की दिनचर्या अनियमित,अस्त-व्यस्त हो जाती है,बिगड़ जाती है।इस प्रकार विद्यार्थियों का अध्ययन कार्य तथा जीवन,दिनचर्या पर आलस्य का कब्जा हो जाता है।
3.आलस्य से छुटकारा पाने के उपाय (Remedies to Get Rid of Laziness):
- आलस्य को दूर करने के बारे में भर्तृहरि नीतिशतक में कहा गया है किः
“आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः।
नास्त्युद्यसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदती”।। - अर्थात् आलस्य ही मनुष्य के शरीर में रहने वाला सबसे बड़ा शत्रु है,उद्यम के समान मनुष्य का कोई बंधु नहीं है जिसके करने से मनुष्य दुखी नहीं होता है।महाभारत में तो आलसी और कंजूस व्यक्ति के लिए कहा गया है कि दोनों को पत्थर से बांधकर जल में डुबो देना चाहिए।वस्तुतः आलस्य छात्र-छात्राओं को निकम्मा कर देता है।
- आलस्य को दूर करने का सबसे प्रमुख उपाय तो ऊपर बताया गया है कि कठिन परिश्रम करने की आदत डालें।छात्र-छात्राओं को अपने अध्ययन तथा जीवन का एक लक्ष्य निर्धारित कर लेना चाहिए क्योंकि लक्ष्य निर्धारित कर लेने से छात्र-छात्राओं के मन में उसको प्राप्त करने का उत्साह रहता है और वे उसे प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम करते हैं।
- तीसरा उपाय यह है कि छात्र-छात्राएं समय का महत्त्व समझे।गुजरा हुआ समय किसी भी कीमत पर पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता है चाहे आप कितना ही यत्न कर लें? चौथा उपाय है कि आप अपनी दिनचर्या को नियमित व निश्चित समय पर करें।ठीक समय पर सोएं तथा सुबह जल्दी उठें।पर्याप्त विश्राम लें।पांचवा उपाय है कि अपने आचरण में उत्तम गुणों को धारण करें यथा ईमानदारी,सत्य बोलना,सरलता,निष्कपट व्यवहार,विनम्रता,साहसी,संयमशील,मधुरभाषी,सहयोग,सहिष्णुता इत्यादि को अपने आचरण में उतारें।
- पांचवा उपाय है कि भूख से थोड़ा कम भोजन करें। छठा उपाय है कि सुबह नित्य कर्मों से निवृत्त होकर योगासन-प्राणायाम तथा ध्यान व मन को एकाग्र करने का अभ्यास करें।सातवां उपाय है कि जब भी दिन में आलस्य आए तो अध्ययन छोड़कर थोड़ा इधर-उधर टहल लें।
- आठवाँ उपाय है कि जब भी आलस्य आए तो मुँह में पानी भरकर एक लोटा पानी के छपके मुँह पर मारें और तौलिये से मुँह को पोंछ लें तथा मुँह में भरे हुए पानी को,छपके देने के बाद थूक दें।
- नवाँ उपाय है लगातार पढ़ने के बजाय बीच-बीच में 5-10 मिनट का ब्रेक देकर पढ़ें।जैसे दो घंटे के बाद 10 मिनट का ब्रेक दे सकते हैं।
- दसवाँ उपाय है कि यदि थ्योरीटिकल विषय पढ़ रहे हैं तो प्रैक्टिकल विषय जैसे गणित के सवाल हल करने लग जाएं।विषय को परिवर्तित कर दें।ग्यारहवाँ उपाय यह है कि अध्ययन एकाग्रचित्त होकर, तन्मय होकर तथा डूबकर करें।यदि मन इधर-उधर भटके तो जिन कामों की तरफ मन बार-बार जाता है उनको कंपनी देना बंद कर दें। धीरे-धीरे अभ्यास से मन भटकना बंद हो जाएगा और मन अध्ययन कार्य में लगने लगेगा।बाहरवां उपाय है कि घर में ऐसे कमरे में अध्ययन करें जिसमें वातावरण शांत हो तथा जिस कमरे में घर व बाहर का शोर-शराबा न आता हो।यदि कमरे को बन्द करके पढ़ सके तो ज्यादा बढ़िया है।
- तेरहवां उपाय है कि मन में निराशा,हताशा,परीक्षा में सफलता,फल में आसक्ति रखने,चिन्ताग्रस्त होने इत्यादि को मन में प्रश्रय न दें,कंपनी न दें बल्कि ऐसे अवसर आ भी जाएं तो सकारात्मक चिंतन करें।इतने उपाय करने से आप आलस्य से मुक्ति पा सकते हैं।
4.आलसी छात्र का दृष्टांत (Lazy Student’s Parable):
- जीवन में सबसे मूल्यवान चीज है समय।गुजरे हुए समय को करोड़ों उपाय करने पर भी हासिल नहीं किया जा सकता है।इतनी मूल्यवान चीज को सबसे अधिक नुकसान आलस्य पहुंचाता है।सबसे अधिक इसीलिए कि आलस्य हमारे भीतर ही होता है और जो सबसे अधिक निकट होता है वही नुकसान पहुंचाता है।आलस्य मन-मस्तिष्क को निष्क्रिय कर देता है।एक बार मन-मस्तिष्क पर आलस्य का कब्जा होने के बाद मुक्त होना बहुत मुश्किल होता है।आलस्य के कारण हम हमारा फालतू समय बैठे-बैठे,सोने में या बिस्तर पर पड़े-पड़े गुजार देते हैं।आलस्य ऐसी मीठी नींद की गोली है जिसके गिरफ्त में आने पर हमें राहत महसूस होती है परंतु वास्तविक रूप में यह धीमा जहर है।जो समय छात्र-छात्राओं को गणित व अन्य विषयों के अध्ययन में बिताना चाहिए,जीवन निर्माण में लगाना चाहिए उसे आलस्य के कारण व्यर्थ में ही व्यतीत कर देते हैं।
- सुकेश गणित का विद्यार्थी था।वह महाविद्यालय में पढ़ता था।गणित का कोई सवाल शिक्षक से पूछता तो शिक्षक उसे उस सवाल को हल करने का तरीका बता देते थे।परंतु सुकेश कहता था कि आप ही नोटबुक में सवाल हल कर दो।शिक्षक उसकी नोटबुक में सवाल हल कर देते थे और बाद में कहते थे कि अब नोटबुक में तुम इस सवाल को हल कर लो।सुकेश कहता की नोटबुक में सवाल हल करने की क्या जरूरत है मुझे यह सवाल समझ में आ गया।
- सुकेश की रोज की यह दिनचर्या बन गई।शिक्षक महोदय एक दिन सुबह सुकेश के कमरे पर चले गए।सुकेश हॉस्टल में रहता था।इसलिए भोजन वगैरह की कोई समस्या नहीं थी।शिक्षक ने दरवाजा के धक्का दिया तो आसानी से खुल गया।दरअसल सुकेश ने अंदर से कमरे को बंद नहीं कर रखा था। सुकेश उस समय भी सो रहा था।सुबह के 8:00 बज गए थे।
- शिक्षक ने कमरे का मुआयना किया तो देखा कि उसके कपड़े,कॉपी-किताब तथा कमरे का सारा सामान बिखरा पड़ा हुआ है।कमरे में झाड़ू नहीं लगा रखी थी।शिक्षक ने कमरे के सारे सामान को व्यवस्थित किया,सफाई की,झाड़ू लगाई और दरवाजा बंद करके आ गए।जब सुकेश उठा तो कमरे को व्यवस्थित देखकर चकरा गया।वह सोच में पड़ गया कि ऐसा किसने किया।
- दो-तीन दिन तक लगातार ऐसा होता रहा।चौथे दिन उसने निश्चय किया कि मैं आज जागकर देखूंगा।चौथे दिन ज्योंही शिक्षक कमरे में गए तो सुकेश उठ खड़ा हुआ और शिक्षक के पैरों में पड़ गया।उसने माफी मांगी।उसे बहुत आत्मग्लानि हुई।उसने शिक्षक महोदय को वचन दिया कि वह अब कभी आलस्य नहीं करेगा।धीरे-धीरे सुकेश ने अपनी दिनचर्या सुधारी,शिक्षक महोदय की प्रेरणा से उसने अपना जीवन बदल डाला।एक दिन वही सुकेश कक्षा में सबसे अव्वल आया।उसने इसका श्रेय गणित अध्यापक को दिया।गणित अध्यापक ने कहा कि अध्यापक का कार्य केवल गणित पढ़ाना ही नहीं है बल्कि विद्यार्थियों को प्रेरित करना,उत्साहित करना और उनके लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान देना भी है।
- उपर्युक्त आर्टिकल में गणित के अध्ययन में आलस्य बाधक (Laziness Hinders Study of Mathematics),गणित के छात्र-छात्राओं के लिए आलस्य को दूर करने की 3 टिप्स (3 Tips to Overcome Laziness for Mathematics Students) के बारे में बताया गया है।
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5.गणित की कमजोरी के एवज में चांटा (हास्य-व्यंग्य) ( Slap Lieu of Weakness of Mathematics) (Humour-Satire):
- पिताः (रिंकू की गणित में कमजोरी से तंग आकर) रिंकु,चांटा खाना है क्या?
- रिंकु:नहीं पिताजी।गणित शिक्षक ने ‘नसीहत’ के अलावा कुछ भी खाने से मना किया है (रिंकू ने भोलेपन से कहा)।
6.गणित के अध्ययन में आलस्य बाधक (Frequently Asked Questions Related to Laziness Hinders Study of Mathematics),गणित के छात्र-छात्राओं के लिए आलस्य को दूर करने की 3 टिप्स (3 Tips to Overcome Laziness for Mathematics Students) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नः
प्रश्न:1.आलस्य का क्या प्रभाव है? (What is the Effect of Laziness?):
उत्तरःआलस्य के कारण छात्र-छात्राएं इतने निकम्मे और नाकारा हो जाते हैं कि वे हर कार्य के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं।
प्रश्न:2.आलस्य की सूक्ति लिखें। (Write a Aphorism Related to Laziness):
उत्तर:आलस्य सब कामों को कठिन और परिश्रम सबको सरल कर देता है।
प्रश्न:3.क्या आलस्य से विद्या नष्ट होती है? (Does Laziness Destroy Learning?):
उत्तर:चाणक्य नीति में कहा गया है किः
“आलस्योपहता विद्या परहस्तगताः स्त्रियः।
अल्पबीजं हतं क्षेत्रं हतं सैन्यमनायकम्”।।
अर्थात् आलस्य से विद्या नष्ट हो जाती क्योंकि अभ्यास से ही विद्या सुरक्षित रहती है,दूसरे के पास गई हुई स्त्री नष्ट हो जाती अर्थात् वापस नहीं आती है,बीज की कमी से खेत नष्ट हो जाता है और सेनापति से रहित सेना मारी जाती है।Laziness Hinders Study of Mathematics
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित के अध्ययन में आलस्य बाधक (Laziness Hinders Study of Mathematics),गणित के छात्र-छात्राओं के लिए आलस्य को दूर करने की 3 टिप्स (3 Tips to Overcome Laziness for Mathematics Students) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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गणित के अध्ययन में आलस्य बाधक
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गणित के अध्ययन में आलस्य बाधक (Laziness Hinders Study of Mathematics)
है क्योंकि इसके कारण छात्र-छात्राएं कठिन परिश्रम करने से जी चुराते हैं।
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