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New National Education Policy 2020

1.नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (New National Education Policy 2020)-

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (New National Education Policy 2020) में 34साल बाद बदलाव किया गया है।इस शिक्षा नीति में देश के कोने-कोने से राय ली गई है और उसमें सभी वर्गों के लोगों को शामिल किया गया है।देश में पहली बार व्यापक स्तर पर राय ली गई है।1986 में नेशनल पाॅलिसी आन एजुकेशन (NPE) को लाया गया था, इसके पश्चात 1992 में इसमें थोड़ा संशोधन किया गया है।
इसके पश्चात् सरकार ने दो कमेटी बनाई जिसमें साल 2016 में टीएसआर सुब्रह्मण्यम कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।इसके बाद इसरो के वैज्ञानिक रह चुके डाॅक्टर के कस्तूरीरंगन कमेटी की रिपोर्ट 31मई 2019 में मिली।तब जाकर आखिरकार शिक्षा नीति में बदलाव किया जा रहा है।
हालांकि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (New National Education Policy 2020) के लागू होने से पहले ही इस पर सवाल उठने खड़े हो गए हैं। परन्तु किसी भी शिक्षा नीति में नवीनता और प्रगतिशीलता जैसे गुण शामिल हों तो वही शिक्षा नीति जीवन्त समझी जाती है तथा जिस शिक्षा नीति में इस तरह के गुण नहीं होते हैं तो वह शिक्षा नीति अपना महत्त्व खो देती है।
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2.नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (New National Education Policy 2020) में मुख्य बदलाव-

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (New National Education Policy 2020) में 10+2 के फाॅर्मेट को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (New National Education Policy 2020) में 10+2 की जगह 5+3+3+4 फाॅर्मेट में ढ़ाला गया है।
5 वर्ष=प्री प्राइमरी+कक्षा 1 एवं 2
3 वर्ष=कक्षा 3,4,5
3 वर्ष=कक्षा 6,7,8
4 वर्ष=माध्यमिक स्तर कक्षा 9 से 12
इसके अलावा स्कूलों में कला, वाणिज्य, विज्ञान विषयों का कठोर पालन नहीं होगा। छात्र अब चाहे जो पाठ्यक्रम को ले सकते हैं।
बोर्ड परीक्षा का सैद्धान्तिक महत्त्व कम किया जाएगा।अब 10वीं बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। बोर्ड परीक्षाओं के स्थान पर वास्तविक ज्ञान की परख की जाएगी।
कक्षा 5 तक मातृभाषा,स्थानीय भाषा और राष्ट्रभाषा में ही पढ़ाया जाएगा।बाकी विषय चाहे वो अंग्रेजी में ही क्यों न हो एक सब्जेक्ट के रूप में पढ़ाया जाएगा।
अब सिर्फ 12वीं बोर्ड की परीक्षा देनी होगी। पहले 10वीं बोर्ड की परीक्षा देनी होती थी परन्तु अब नहीं देनी होगी।कक्षा 9वीं से 12वीं क्लास तक सेमेस्टर में परीक्षा होगी।
मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम में पहले साल के बाद सर्टिफिकेट, दूसरे साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल बाद डिग्री दी जाएगी।
अब बीच में पढ़ाई छोड़ने वालो को कोई नुकसान नहीं उठाना होगा।आज अगर 4 सेमेस्टर या 6 सेमेस्टर पढ़ने के बाद कोई भी किसी कारणवश आगे नहीं बढ़ पाता है अर्थात् पुरानी शिक्षा नीति के तहत सिस्टम से बाहर हो जाता है। जैसे यदि किसी ने 2nd ईयर करने के बाद किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ दी तो 2 या तीन साल बाद उसे पुनः प्रथम वर्ष में प्रवेश लेना पड़ता है। लेकिन नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (New National Education Policy 2020) में मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम के कारण सिस्टम से बाहर नहीं होगा बल्कि उसे 3rd ईयर में प्रवेश मिल जाएगा।

3.ग्रेजुएट लेवल पर आधी पढ़ाई बेकार नहीं जाएगी

मल्टीपल एंट्री में जैसे बैंक का सेविंग अकाउंट होता है वैसे ही डिजी लाॅकर की मदद से फर्स्ट ईयर और सेकंड ईयर के क्रेडिट जमा होंगे।यानी अगर तीसरे साल में आप किसी कारण से ब्रेक लेना चाहते हैं तो आपको फर्स्ट ईयर की जगह सीधे थर्ड ईयर में एडमिशन मिल जाएगा।क्योंकि एकेडमिक क्रेडिट बैंक में पहले से ही आपके क्रेडिट मौजूद होंगे।
जो लोग 4 साल डिग्री प्रोग्राम करेंगे उनके लिए सीधे पीएचडी में जाने की सुविधा दी गई है।जो रिसर्च में जाना चाहते हैं उनके लिए यह व्यवस्था है।यानी तीन साल डिग्री के साथ एक साल पोस्ट ग्रेजुएट करके एमफिल की जरूरत नहीं होगी।

4.ग्रेडेड आटोनेमी

देश में एफिलिएटेड काॅलेजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। किसी-किसी यूनिवर्सिटी में तो ये संख्या 800 तक पहुंच चुकी है जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आती है।अब ग्रेडेड आटोनेमी की व्यवस्था से ग्रेडिंग सिस्टम के हिसाब से होगी।यानी जिसकी ग्रेड A+ होगी उन्हें ज्यादा काॅलेज मिलेंगे। वहीं इसी तरह बाकी ग्रेड्स को भी आटोनेमी मिलेगी
5.इंजीनियरिंग के साथ सीख सकते हैं म्यूजिक
मल्टीप्लनरी एजुकेशन में अब आप किसी एक स्ट्रीम के अलावा दूसरा सब्जेक्ट भी ले सकते हैं।यानी अगर आप फिजिक्स आनर्स करते हैं तो आप केमिस्ट्री, मैथमेटिक्स,जूलाॅजी या बाॅटनी ले सकते हैं, उसके साथ फैशनडिजाइनिंग नहीं ली जा सकती थी। लेकिन अब मेजर प्रोग्राम के अलावा माइनर प्रोग्राम भी लिए जा सकते हैं। इससे उन्हें फायदा होगा जो ड्राॅपआउट हो जाते हैं। वहीं कई दूसरे विषयों में रुचि रखने वालों के लिए भी यह फायदेमंद होगा।

5.नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (New National Education Policy 2020) की अन्य महत्त्वपूर्ण बातें-

हर बच्चे के लर्निंग आउटक्रम को ट्रैक करना होगा। इसके अलावा नेशनल एसेसमेंट सेंटर जिसका नाम परख रखा गया है। उसमें बताया जाएगा कि बच्चों को परखने के लिए क्या करना चाहिए?
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी हर काॅलेज और यूनिवर्सिटी को एक एंट्रेस एग्जामिनेशन आफर करेगी ताकि बच्चे एक काॅमन एग्जामिनेशन से यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले सके।
टीचर्स के लिए एक नेशनल प्रोफेशनल स्टैंडर्ड तैयार किया जाएगा। जिससे टीचर्स का रोल क्या है और उन्हें किस बेंचमार्क तक पहुंचना है इसे तय किया जाएगा।ये पूरे देश में लागू किया जाएगा।
स्कूल पाॅलिसी में लिखा गया है कि जब भी बच्चा 12वीं पास करके निकलेगा तो वो अपनी एक स्किल में माहिर होकर जाएगा।यानि जिसमें वो सबसे सफल है,वो स्किल उसे पता होगी।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (New National Education Policy 2020) विदेशी यूनिवर्सिटीज को भी भारत में आने का न्यौता देती है।यह तभी फायदेमंद होगा जब क्वाॅलिटी एजुकेशन वाली यूनिवर्सिटी पहुंचेगी और उनकी फीस आम बच्चे की लिमिट में होगी।यह ध्यान देना जरूरी होगा कि विदेश की कई यूनिवर्सिटी बढ़िया एजुकेशन नहीं दे रही है।
अभी हमारे यहां डीम्ड यूनिवर्सिटी, सेंट्रल यूनिवर्सिटी और स्टैंडअलोन इंस्टिट्यूशन के लिए अलग-अलग नियम है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (New National Education Policy 2020) के तहत सभी के लिए नियम समान होगा।हायर एजूकेशन में एनरालमेंट रेशियों 50 फीसदी हो जाएगा।50 फीसदी शिक्षार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा में शामिल होना होगा।

6.नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (New National Education Policy 2020) में इतने बढ़े पैमाने पर ली गई राय-

इस शिक्षा नीति में बड़े स्तर पर रायशुमारी की गई थी,इसका अंदाजा इन आंकड़ों से सहज ही लगाया जा सकता है।इसके लिए 2.5 लाख ग्राम पंचायतों,6600 ब्लाॅक्स,676 जिलों से सलाह ली गई थी।

7.निष्कर्ष (Conclusion)-

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (New National Education Policy 2020) तो सही मायनों में एक कागज का पुलिंदा है जब तक कि उसे व्यावहारिक रूप से लागू न किया जाए। कोई भी शिक्षा नीति मृतक के समान है।इसको सजीव,सक्रिय तो सरकार, शिक्षा संस्थान के संचालक, शिक्षकों, छात्रों, माता-पिता व अभिभावकों के हाथ में है।यदि शिक्षा नीति बुरी भी होती है तो सरकार, शिक्षा संस्थान के संचालक,शिक्षक,छात्र एवं माता-पिता व अभिभावक उसका अच्छा उपयोग करके अच्छा बना सकते हैं। जैसे सांप के विष से हम इंजेक्शन भी बना लेते हैं।नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (New National Education Policy 2020) की सफलता और असफलता हमारे हाथों में ही है।यदि इसमें कोई विसंगतियां भी है तो समय-समय पर सामने आने पर निराकरण करते रहेंगे तो इस शिक्षा नीति से हम फायदा उठा सकते हैं।यदि किसी एक के सहारे अर्थात् शिक्षा संस्थानों के संचालकों, शिक्षकों के सहारे इस शिक्षा नीति को छोड़ देंगे तो वही परिणाम होगा जो वर्तमान शिक्षा प्रणाली का हमारे सामने आ रहा है।
उक्त लेख में हमने संक्षिप्त रूप से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (New National Education Policy 2020) का उल्लेख कर दिया है।

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