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How to be a good mathematics teacher?

1.एक अच्छा गणित शिक्षक कैसे बने?(How to be a good mathematics teacher?)-

गणित में एक अच्छा शिक्षक(good mathematics teacher) बनने के लिए कुछ बातों का पालन करना आवश्यक है।वैसे तो शिक्षक के बारे में कई आर्टिकल हम उल्लेख कर चुके हैं कि एक अच्छा गणित शिक्षक(good mathematics teacher) कैसे बना जा सकता है?लेकिन उनमें जो बातें बताई गई है वे फुटकर रूप में ही बताई गई हैं। गणित शिक्षक को एक अच्छा शिक्षक(good mathematics teacher) साबित होने के लिए यदि इस आर्टिकल में बताई गई बातों पर अमल किया जाए तो वह एक अच्छा गणित शिक्षक (good mathematics teacher) साबित हो सकता है।आधुनिक युग में तकनीकी का जिस तेज गति से विकास हो रहा है उसको ध्यान में रखते हुए शिक्षक को अपने आप में बदलाव करना होगा।यह बदलाव चारित्रिक व व्यावहारिक स्तर के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी के साथ-साथ अपने आपको अपटूडेट करना होगा।गणित शिक्षक को इन बातों को अमल में लाने से विद्यार्थियों में गणित के भय को दूर किया जा सकता है। गणित शिक्षक को अपने आपको नए सन्दर्भो के अनुसार ढालना होगा।
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2.गणित शिक्षक पहले स्वयं पढ़ें(Mathematics teacher first read himself)[good mathematics teacher]-

विद्यार्थियों को पढ़ाने से पूर्व गणित शिक्षक स्वयं पढ़ें। परम्परागत रूप से डिग्री हासिल करने के बाद विद्यार्थियों को पढ़ाने हेतु शिक्षक कक्षा में चले जाते हैं, अधिकांश शिक्षकों का ऐसा ही ढर्रा है। विद्यार्थियों को गणित अरुचिकर क्यों लगता है,इस ‌विषय पर विचार करना चाहिए। सामान्यतः विद्यार्थियों को गणित अरुचिकर इसलिए लगता है क्योंकि विद्यार्थियों के गणित में समझ में नहीं आती है।गणित शिक्षक पूर्ण तैयारी करके जब कक्षा में पढ़ाते हैं तो विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान अच्छे ढंग से कर पाते हैं।शिक्षक पहले स्वयं पढ़ते हैं तो उन्हें पढ़ते-पढ़ते इन बातों का ज्ञान होता जाता है कि किसी टॉपिक से संबंधित किन किन बातों को समझने विद्यार्थियों को कठिनाईयां आती है ?इसके आधार पर वह पूर्व में ही यह विचार-चिंतन कर सकता है कि उसका समाधान किस-किस तरीके से किया जा सकता है?एक से अधिक तरीकों से इसलिए बताना आवश्यक है कि अलग-अलग विद्यार्थियों के अलग-अलग तरीकों से टाॅपिक समझ में आता है।हर विद्यार्थी का मानसिक स्तर,रुचि व स्वभाव अलग-अलग होता है।इसलिए इन बातों को ध्यान में रखकर शिक्षक को टाॅपिक की तैयारी करके कक्षा में जाना चाहिए। विद्यार्थियों को साधारण तरीके से समझाया जाना चाहिए। साधारण उदाहरणों का पता तभी लग सकता जबकि टाॅपिक की पूर्व तैयारी की जाएगी।

3.रिफ्रेशर कोर्स में प्रशिक्षण लें(Take training in refresher course)-

शिक्षक एक बार अध्यापक शिक्षा अर्जित करने के बाद कोई प्रशिक्षण नहीं लेते हैं।गणित शिक्षक को रिफ्रेशर कोर्स करवाया जाना चाहिए तथा कोई रिफ्रेशर कोर्स करवाया जा रहा है तो गणित शिक्षक को आवश्यक रूप से रिफ्रेशर कोर्स में भाग लेना चाहिए। रिफ्रेशर कोर्स में विद्वान गणित शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को पढ़ाने के व्यावहारिक टिप्स व स्किल्स बताई जाती है। शिक्षा परिवर्तनशील है यह बात आधुनिक शिक्षा में अधिक चरितार्थ हो रही है। शिक्षा यदि परिवर्तनशील तथा प्रगतिशील नहीं हो तो ऐसी शिक्षा मृतक के समान है। विद्वान् व्याख्याताओं द्वारा नवीन अनुसंधानों और टेक्निक बताई जाती है जिनका शिक्षक को प्रशिक्षण लेना चाहिए।
भारत का भविष्य कक्षाओं में निर्माण होता है इसलिए शिक्षक की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है।जिस प्रकार विद्यार्थी को आगे बढ़ने के लिए आगे-आगे कक्षाओं में प्रोन्नत किया जाता है तभी वह आगे बढ़ सकता है।इसी प्रकार शिक्षकों को भी अपनी पढ़ाने की कार्यशैली में बदलाव करना आवश्यक है। रिफ्रेशर कोर्स में ऐसी ही बातों का प्रशिक्षण दिया जाता है।ये रिफ्रेशर कोर्स समय-समय पर आयोजित किए जाने चाहिए तथा शिक्षकों को इनमें भाग लेने हेतु प्रोत्साहित करना चाहिए और इसमें भाग लेना आवश्यक किया जाना चाहिए।रिफ्रेशर कोर्स सात अथवा पन्द्रह दिवसीय हो सकता है। रिफ्रेशर कोर्स में शिक्षकों का बच्चों के प्रति क्या दायित्व है इसका बोध कराया जाए।

4.विद्यार्थियों के स्तर के अनुसार पढ़ाएं(Teach by students level)-

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कक्षा के स्तर के अनुसार विद्यार्थियों को गणित पढ़ाया जाना चाहिए।जैसे प्राथमिक स्तर पर अर्थात् पांचवी कक्षा तक बालकों को गणित सरल विधि से पढ़ाएं ताकि विद्यार्थियों को हर सवाल का जवाब आसानी से मिल जाए। गणित शिक्षक को अध्यापन कार्य के प्रति गंभीर व सावचेत रहना चाहिए। उसे अपने अध्यापन कार्य के प्रति ईमानदार रहना चाहिए।विद्यार्थियों को प्राथमिक स्तर पर तथा उच्च प्राथमिक स्तर पर सरल विधि अपनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। क्योंकि बालक की जिस प्रकार की नींव लगती है वैसे ही बालक आगे जाकर तैयार होते हैं।यदि नींव कमजोर होती है तो बालक गणित शिक्षा में आगे नहीं बढ़ सकते हैं और नींव मजबूत हो तो विद्यार्थी गणित में होनहार होते हैं।

5.विद्यार्थियों के साथ मधुर संबंध बनाएं(Build rapport with students)-

शिक्षक विद्यार्थी के साथ मधुर संबंध बनाकर रखें। मधुर संबंध बनाने के लिए विद्यार्थियों हेतु होने वाले कार्यक्रमों में हमेशा उनके साथ रहना चाहिए।विद्यार्थियों के साथ मिलने-जुलने तथा उनके साथ रहने से विद्यार्थियों में झिझक नहीं रहती है,जिससे कक्षा में सवाल न पूछने वाले विद्यार्थियों का दिल खुल जाता है और वे सवाल न आने पर शिक्षक से दुबारा सवाल पूछ सकते हैं।बच्चों के साथ मधुर संबंध कायम करके ही उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा सकती है।प्रधानाध्यापकों का भी दायित्व बनता है कि शिक्षकों को विद्यार्थी-शिक्षक संबंधों को मजबूत बनाने में अपना सहयोग प्रदान करें।विद्यार्थियों की पढ़ाई के प्रति कितना गंभीर है इसका पता विद्यार्थी तथा शिक्षक के आपसी संबंधों से लगाया जा सकता है।शिक्षकों द्वारा पढ़ाने में की गई मेहनत तथा आपसी संबंधों से ही गणित की शिक्षा बेहतर ढंग से दी जा सकती है। प्रधानाध्यापकों द्वारा शिक्षकों को यह निर्देश दिया जाना चाहिए कि शिक्षक पठन-पाठन के प्रति गंभीर रहे,किसी प्रकार की कोई लापरवाही न बरते।

6.विद्यार्थियों की कठिनाइयों की खोज करना(Finding students difficulties)-

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गणित शिक्षण के दौरान तथा विभिन्न जांच परीक्षाओं के द्वारा शिक्षक को कहां-कहां तथा कैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन कठिनाईयों का समाधान ढूंढकर अपनी शिक्षण पद्धति में बदलाव करते रहना चाहिए अर्थात् उसको गणित के टॉपिक में उन समस्याओं का समाधान बताते रहना चाहिए। बालकों की इस बात की जांच करते रहना चाहिए कि कोई बालक एक विशेष प्रकार की गलती बार-बार क्यों करता है?बालकों की गणित विषय से संबंधित कठिनाइयों का पता लगाकर उन कारणों को दूर करते रहना चाहिए। बालक ये गलतियां अरुचि, बुरी आदतों,उचित शिक्षण का अभाव ,अध्यापक एवं सहपाठियों का दुर्व्यवहार, परीक्षा में बार-बार विफलता, अध्यापक द्वारा विद्यार्थी में व्यक्तिगत रुचि न लेना,पक्षपातपूर्ण रवैया,कठोर अनुशासन, घरेलू कारणों में मां-बाप एवं सम्बन्धियों का दुर्व्यवहार, पढ़ाई के लिए उचित साधनों एवं वातावरण का अभाव, निर्धनता, घरेलू कार्यों में व्यस्तता आदि के कारण कर सकता है।बालकों में जो जो कमजोरी हो उसको दूर करने का प्रयास करना चाहिए।यदि कई बालको ने एक ही प्रकार की त्रुटि की है तो उसका समाधान समूह में किया जा सकता है और यदि गलती किसी विशिष्ट विद्यार्थी की है तो उसका समाधान व्यक्तिगत स्तर पर ही हो सकता है।

7.गणित शिक्षक को व्यवहार कुशल होना चाहिए(Math teacher should be efficient)-

गणित शिक्षक को व्यावहारिक होना चाहिए ।यहां गणित शिक्षक को व्यावहारिक होने से तात्पर्य है कि गणित को हमारे जीवन से संबंधित जोड़कर पढ़ाया जाना चाहिए। गणित विषय को लोकप्रिय तथा विद्यार्थियों में रुचिकर बनाने के लिए आवश्यक है कि गणित को जीवन से संबंध बनाकर बताया जाए।गणित का हमारे जीवन के हर क्षेत्र में प्रवेश हो गया है।आवश्यकता इस बात की है कि उसे शिक्षक पहचाने और विद्यार्थियों को उदाहरणों के द्वारा समझाएंगे उतना ही विद्यार्थी इसे अपनाएंगे और उनकी गणित विषय में रुचि बढ़ेगी।

8.समीक्षा (Review)-

गणित की आज हर क्षेत्र में उपयोगिता है।गणित को जन-जन तक तथा विद्यार्थियों में रुचि बढ़ाने के लिए गणित शिक्षक की सबसे बड़ी भूमिका है।यदि गणित शिक्षक ऊपर बताई टिप्स तथा हमारे अन्य आर्टिकल्स को पढ़कर उन बातों पर अमल करें तो गणित शिक्षक एक अच्छा गणित शिक्षक हो सकता है। गणित शिक्षक को हमेशा अपने आपका निरीक्षण करते रहना चाहिए और विद्यार्थियों के हित के लिए शिक्षण पद्धति में बदलाव करते रहना चाहिए। हमेशा विद्यार्थियों के साथ औपचारिक संबंध न बनाकर जीवंत संबंध बनाए जिससे विद्यार्थी अपनी समस्या गणित शिक्षक के साथ शेयर करें।हमारे द्वारा बताई गई बातों के अलावा और भी कई बातें हो सकती है जिनका अमल किया जाए तो गणित शिक्षक एक अच्छा गणित शिक्षक बन सकता है।

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