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Mathematical Notations

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1.गणितीय संकेतन (Mathematical Notations),गणितीय प्रतीक (Mathematical Symbols):

  • गणितीय संकेतन (Mathematical Notations) और प्रतीकों के द्वारा गणित की भाषा व शब्दों को व्यक्त किया जाता था।प्राचीनकाल में गणितीय संकेतन (Mathematical Notations) व प्रतीकों के लिए किसी शब्द या अक्षर का प्रयोग होता था।परंतु आधुनिक गणितज्ञों ने महसूस किया कि भाषा के प्रयोग में कई बार सिद्धांतों के स्पष्टीकरण में वास्तविक अर्थ के स्थान पर अलग ही अर्थ निकाल लिया जाता है।
  • गणित के विकास में इन संकेतन और प्रतीकों का बहुत बड़ा योगदान है।जैसे-जैसे गणित में नए सिद्धांतों का आविष्कार होता गया वैसे-वैसे नए संकेतन व प्रतीकों को बनाना पड़ा।गणित को शब्दों की भाषा में लिखने के बजाय संकेतन,प्रतीक व चिन्हों की भाषा में लिखने से गणित अधिक स्पष्ट हो जाता है।भाषा के शब्दों के अर्थ एक-सा नहीं होता परंतु संकेतन,प्रतीकों व चिन्हों का अर्थ निश्चित होता है।इसलिए आधुनिक गणितज्ञ तो इस बात पर आगे बढ़ रहे हैं कि गणित में केवल संकेतन,प्रतीकों व चिन्हों का ही प्रयोग हो।आज उच्च गणित में आपको ऐसे-ऐसे संकेतन व प्रतीक दिखाई देंगे जिनका अर्थ समझे बिना गणित का टॉपिक ठीक से समझ में नहीं आएगा।
  • गणित में ही नहीं बल्कि मानव जीवन में संकेतों का महत्त्व देखा जा सकता है।भाषा ने जब शब्दों की पकड़ नहीं की थी तब भी अभिव्यक्ति (Expression) होती रहती थी।यह अभिव्यक्ति केवल संकेतों की वजह से ही संभव होता था।यदि यह कहा जाए की भाषा का जन्म ही संकेतों से हुआ है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।जीवन में गणित का अपना विशिष्ट स्थान है।क्योंकि मानव अपनी आंखें खोलते ही गण (गिनना) के चक्कर में फँस जाता है।यह चक्कर इतना सरल तो नहीं कि आसानी से समझ सके।परंतु कुछ ऐसे साधन है जो इस कार्य को सरल बना देते हैं; वे हैं:गणितीय संकेतन (Mathematical Notations)।
  • ये वे संकेत होते हैं जो क्रिया को व्यक्त करने में,किसी गणितीय राशि को दर्शाने में अथवा गणित में प्राय: प्रयुक्त होने वाली गणितीय राशि को निर्दिष्ट करने के लिए प्रयुक्त किए जाते हैं।यथा a÷b में भाग का चिन्ह (÷) निर्दिष्ट करता है कि a में b का भाग देना है।a<b में असमता का चिन्ह (<) a का b से छोटे होने का संबंध दर्शाता है।इन संकेतों की सहायता से गणित के तर्क संक्षिप्त रूप से लिखे जा सकते हैं और छात्र-छात्राएं सूक्ष्म तर्क संगत भाषा की सहायता से जटिल संबंधों को सरलता से समझ लेता है।प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों में विभिन्न संकेत मिलते हैं किंतु समय के साथ उन सब में परिवर्तन हुए और वे अनेक रूपांतर के बाद वर्तमान रूप में आए।
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(1.)आधुनिक गणित में संकेतों का प्रयोग करने का इतिहास (History of using Notations in Modern Mathematics):

  • धन और ऋण के चिन्ह:
    सन् 1960 ईस्वी के लगभग बोहीमिया के एक नगर में जॉनविडमैन नामक एक गणितज्ञ हुआ है।इसने अंकगणित और बीजगणित पर पुस्तकें लिखी हैं। सबसे पहले इसी से मुद्रित पुस्तक में + और – चिन्हों का प्रयोग किया है।पुस्तक में इसने इन चिन्हों को जोड़ने और घटाने के अर्थ में प्रयोग नहीं किया था वरन् वह ये चिन्ह व्यावहारिक बण्डलों पर डाला करता था।यह दिखाने के लिए अमुक बंडल किसी निश्चित मात्रा से अधिक है या कम।
  • समता का चिन्ह:
    समता का चिन्ह (=) राॅबर्ट रिकॉर्डे (Robert Ricarde) ने सन् 1557 ईस्वी में प्रचलित किया था।रिकॉर्डे ने यह चिन्ह ‘व्हेटस्टोन ऑफ विद’ नामक बीजगणित की पुस्तक में सबसे पहले प्रयोग किया था।उसने उक्त पुस्तक में एक स्थान पर लिखा भी है,”मैं समीकरण में यह चिन्ह इसलिए लगाता हूं कि संसार में कोई भी दो वस्तुएँ इससे अधिक समान नहीं हो सकती,जितनी कि ये दोनों रेखाएं = हैं।
  • गुणा के लिए संकेत:
    गुणा के लिए संकेत (×) सबसे पहले सन् 1631 ईस्वी में अंग्रेज गणितज्ञ विलियम आउट्रैड (William Oughtered) ने प्रयोग किया था।गुणा के लिए यह संकेत (×) इंग्लैंड में प्रचलित हो गया परंतु यूरोप के लिए अन्य देशों में गुणा के लिए डॉट (.) प्रयोग होता था।
  • भाग का चिन्ह:
    भाग का चिन्ह (÷) स्विट्जरलैंड में छपी 1659 ईस्वी में जॉन एच. राइन (John H. Rine) द्वारा लिखित बीजगणित में सर्वप्रथम प्रयोग किया गया था।यह चिन्ह ग्रेट ब्रिटेन तथा यूनाइटेड स्टेट्स में प्रचलित हो गया परंतु अन्य देशों में भाग के लिए (:) चिन्ह प्रयोग होता था।
  • दशमलव भिन्न का प्रयोग:
    दशमलव भिन्न का सर्वप्रथम व्यावहारिक प्रयोग हालैंड के गणितज्ञ साइमन स्टेविनस (Simon Stevinus) ने अपनी अंकगणित की पुस्तक में किया है जो 1585 ईस्वी में लीडन में छपी थी।यह \frac{1}{10} अर्थात् .1 के घातों के लिए छोटे-छोटे वृत्तों का प्रयोग किया करता था;जैसे 73\frac{429}{1000} को वह इस प्रकार लिखता था:जैसे 133 \odot 4(1) 2(2) 9 (3)
    इस संकेत लिपि का अर्थ यह हुआ:
    173×\left(\frac{1}{10}\right)^0+4×\left(\frac{1}{10}\right)^1+2×\left(\frac{1}{10}\right)^2+9×\left(\frac{1}{10}\right)^3
  • भिन्नात्मक घातांकों का प्रयोग:
    भिन्नात्मक घातांकों का प्रयोग सबसे पहले फ्रांसीसी गणितज्ञ निकोल ऑरेज्म (Nicole Oreseme) ने जिसका समय 1323 ईस्वी से 1382 ईस्वी तक माना जाता है,अपनी पुस्तक एल्गोरिज्मस प्रपोर्शनम (Algorismus Proportionum) में किया है 7^\frac{1}{2} और 5^\frac{1}{4} को वह क्रमशः इस प्रकार लिखा करता था:
    \frac{1}{2}7^\text{घ} और \frac{1}{4}5^\text{घ}
    6^{2\frac{1}{3}} को लिखने के उसके दो ढंग थे:
    \begin{array}{|c|} \hline \\ \text{ घ } \\ 2 \frac{1}{3} \\ \hline \end{array}  6 और \begin{array}{|c|} \hline \\ \frac{\text{ घ } \cdot 2}{1 \cdot 3} \\  \\ \hline \end{array} \cdot 6
  • मूल चिन्ह का प्रयोग:
    मूल चिन्ह \sqrt{} का प्रयोग सबसे पहले जर्मन गणितज्ञ क्रिस्टल रूडोल्फ ने किया था।उसने 1525 ईस्वी में बीजगणित पर एक पुस्तक लिखी जिसका नाम काॅस (coss) था।इसी पुस्तक में उसने यह चिन्ह प्रयोग किया था।यह चिन्ह अंग्रेजी r का ही विकृत रूप है और रूडोल्फ ने शायद इसलिए इसका प्रयोग किया हो कि यह शब्द root का पहला अक्षर है।संभव है कि यह अनुमान सत्य हो क्योंकि 14वीं व 15वीं सदी में मूल चिन्ह इन रूपों में प्रयुक्त होता रहा है।
  • बड़े और छोटे के चिन्ह:
    इंग्लैंड निवासी टामस हैरियट जिनका जीवनकाल 1560 ईस्वी से 1623 ईस्वी तक रहा है उन्होंने बड़े और छोटे को प्रदर्शित करने के लिए ; और चिन्ह सर्वप्रथम प्रयुक्त किए थे।
  • समानुपात और अंतर चिन्ह का का प्रयोग:
    समानुपात चिन्ह का (::) और अंतर चिन्ह \sim का कदाचित पहली बार प्रयोग अंग्रेज गणितज्ञ विलियम आउट्रैड (William Oughtered) ने किया था।इसने अंकगणित और बीजगणित पर एक छोटी-सी पुस्तक भी लिखी है।इसी पुस्तक में इसने इन चिन्हों का प्रयोग किया है।
  • घातांकों को ऊपर चढ़ाना:
    फ्रांसीसी गणितज्ञ रेने देकार्त (Rene Descartes) ने ही जिसका जीवन काल 1596 ईस्वी से 1650 ईसवी तक माना जाता है,सबसे पहले घातांकों को ऊपर x^2,x^3 आदि लिखने की प्रणाली चलाई।

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(2.)प्राचीन भारत में संकेंतो का प्रयोग (Use of Notation in Ancient India):

  • प्राचीन भारतीय ग्रंथों को देखने से मालूम होता है कि भारतवर्ष में भी संकलन आदि परिक्रमों को सूचित करने के लिए संकेतों का प्रयोग होता था।वे संकेत या तो प्रतीकात्मक है या चिन्हात्मक।
    जोड़ने के लिए संकेत:
  • भारतीय गणितज्ञों की यह परिपाटी रही है कि चिन्ह के स्थान पर तत्संबंधी शब्द का प्रथम अक्षर प्रयोग किया करते थे।इन ग्रंथों में जोड़ने के लिए ‘युत’ शब्द का प्रथम अक्षर ‘यु’ मिलता है।यह अक्सर ‘यु’ जोड़ी जानेवाली संख्या के अंत में लिखा जाता था; यथा 4 और 9 जोड़ने होते थे।इस प्रकार लिखा जाता था:
    \begin{matrix}4 & 9 & {}\\1 & 1 &\text{यु}\end{matrix}
  • भारतीय प्राचीन ग्रंथों में पूर्णांक लिखने की यह पद्धति थी कि अंक के नीचे 1 लिख दिया जाता था किंतु दोनों के बीच भाग रेखा नहीं लगाई जाती थी।
  • जैनग्रंथ ‘त्रिलोयपण्णत्ति’ (ईसा की दूसरी शताब्दी का ग्रंथ) में जोड़ने के लिए ‘धण’ शब्द लिखा है क्योंकि प्राचीन साहित्य में धन के लिए ‘धण’ शब्द प्रयोग होता था।
  • जोड़ने के लिए पंडित टोडरमल ने अपने ‘अर्थ संदृष्टि’ नामक स्थान में (-) 1- चिन्ह का प्रयोग किया है।यथा \log_{2}\log_{\textअ}+1 के लिए \text{ब}_{2} लिखा है।
    घटाने के लिए संकेत:
  • ‘वक्षालीहस्तलिपि’ में जो कि ईसा की प्रारंभिक शताब्दियों का ग्रंथ है,घटाने के लिए (+) चिन्ह का प्रयोग किया है।यह + चिन्ह के लिए \begin{matrix}20 & 3+\\1 & 1\end{matrix} लिखते थे।
  • ईसा की नवी शताब्दी के लिए आचार्य वीरसेन ने ‘धवला’ नामक ग्रंथ में घटाने के लिए इसी प्रकार के संकेत + का प्रयोग किया है।’तिलोयपण्णत्ति’,’त्रिलोकसार’ (ईसा की 10 वीं शताब्दी का ग्रन्थ) और ‘अर्थ संदृष्टि’ में घटाने के लिए ० चिन्ह भी मिलता है।जैसे 200 में से 2 घटाने के लिए 0 उस अंक के बाद लिखा जाता था जिसे घटाना होता था।जैसे 200 में से 2 घटाने के लिए इस प्रकार लिखते थे:\begin{matrix}2°\\200\end{matrix}
  • ‘त्रिलोकसार’ और ‘अर्थ संदृष्टि’ में घटाने के लिए 0 संकेत भी मिलता है,यथा यदि 200 में से 2 घटाने हों तो इस प्रकार लिखते थे:\begin{matrix}200\\0\\2\end{matrix}
  • गुणा के लिए संकेत:
    गुणा के लिए ‘वक्षाली हस्तलिपि’ में ‘गु’ संकेत का प्रयोग मिलता था;यथा:
      \begin{array}{|ccccccccc|} 3 & 3 & 3 & 3 & 3 & 3 & 3 & 10 & \\1 & 1 & 1 & 1 & 1 & 1 & 1 & 1 & \text{गु} \\ \hline \end{array}
    इसका आशय 3×3×3×3×3×3×3×10 है।
    ‘त्रिलोयपण्णत्ति’,त्रिलोकसार’ और ‘अर्थ संदृष्टि’ में गुणा करने के लिए खड़ी लकीर का प्रयोग किया गया है।यथा 16 को 2 से गुणा करने के लिए 16/2 लिखा है।
  • भाग के लिए संकेत:भाग के लिए ‘वक्षाली हस्तलिपि’ में भी संकेत मिलता है यथा \begin{array}{cc||c|c|} 40 & \text{या } & 160 & 13 \\1 & & 1 & 1 \\ & & & 2\end{array}
    या इसका आशय \frac{160}{40}×13\frac{1}{2} है।
    भिन्नों को प्रदर्शित करने के लिए ‘त्रिलोयपण्णत्ति’ और ‘त्रिलोकसार’ आदि जैन ग्रंथों में अंश और हर के बीच में रेखा का प्रयोग नहीं मिलता है।\frac{19}{24} को \begin{matrix}19\\24\end{matrix} लिखा है।’त्रिलोकसार’ में 128 को 128/2 लिखा है। ‘वक्षालीहस्तलिपि’ में 2\frac{1}{2} को \begin{matrix}2\\1\\2\end{matrix} और 1\frac{1}{2} को \begin{matrix}1\\1\\2\end{matrix} लिखा गया है।
  • वर्गित-संवर्गित के लिए चिन्ह:
    वर्गित-संवर्गित शब्द का तात्पर्य किसी संख्या का उसी संख्या के तुल्य घात करने से है।जैसे a वर्गित-संवर्गित a^a हुआ।जैन ग्रंथ जैसे ‘तिलोयपण्णत्ति’ और ‘धवला’ आदि में इसके लिए विशेष चिन्ह का प्रयोग किया गया है। किसी संख्या को प्रथम बार वर्गित-संवर्गित करने को  \begin{array}{|c} \hline  a^{1}\end{array} लिखा जाता है जिसका आशय a^a से है।द्वितीय वर्गित-संवर्गित के लिए  \begin{array}{|c} \hline  a^{2}\end{array} लिखा जाता है।इसका आशय a को वर्गित-संवर्गित करके प्राप्त संख्या को पुनः वर्गित-संवर्गित करना है अर्थात् \left(a^a\right)^a है।इस क्रिया को फिर एक बार करने से a का वृत्तीय वर्गित-संवर्गित प्राप्त होता है।इसको इस प्रकार \begin{array}{c|}a \end{array}^{3}  लिखते हैं।
  • वर्गमूल के लिए संकेत:
    ‘वक्षालीहस्तलिपि’,’तिलोयपण्णत्ति’ और ‘अर्थ संदृष्टि’ आदि प्राचीन ग्रंथों में वर्गमूल के संकेत के लिए ‘मू.’ का प्रयोग किया गया है।इस संख्या को उस संख्या के अंत में लिखा जाता था जिसका वर्गमूल निकालना होता था;जैसे:  \begin{array}{|cccc} 11 & -7 & \text{मू.} & 2 \\1 & 1 &  & 1 \\ \hline \end{array} का आशय \sqrt{11-17}=2 है।
    भास्कराचार्य द्वितीय (1150 ईस्वी) ने अपनी बीजगणित में वर्गमूल के लिए ‘क’ अक्षर का प्रयोग किया है।जैसे:क 9 क 450 क 75 क 54 का आशय \sqrt9+\sqrt{450}+\sqrt{75}+\sqrt{54} है।
  • समग्रत कहा जा सकता है कि गणित-जीवन में भी संकेतों ने अपना आदि से अंत तक समान अधिकार बनाए रखा है क्योंकि गणित-जीवन की आधारशिला संकेत मात्र ही है।इन्ही संकेतों के कारण ही विषय में सरलता,सुगमता तथा सुबोधता के गुण स्वभावत: आ जाते हैं।
  • इन संकेतों,प्रतीको तथा चिन्हों का प्राचीन काल से धीरे-धीरे विकास हुआ है।परंतु आधुनिक युग में इन प्रतीकों,संकेतों और चिन्हों का गणित में इतना अधिक महत्त्व हो गया है कि गणित की अधिकांश भाषा और शब्दों को प्रतीकों के द्वारा व्यक्त किया जाने लगा है।निस्संदेह संकेतों,प्रतीकों और चिन्हों का अर्थ निश्चित होता है।इसलिए इनके द्वारा व्यक्त भाषा में अर्थ का अनर्थ होने की संभावना नगण्य है।जबकि भाषा में एक शब्द के कई अर्थ होते हैं इसलिए गणित में अर्थ का अनर्थ हो जाता है। संकेतों,प्रतीको तथा चिन्हों का अत्यधिक प्रयोग आधुनिक युग में किया जा रहा है।इसको प्रयोग किए जाने का मूल कारण उपर्युक्त ही माना जा सकता है।
    उपर्युक्त आर्टिकल में गणितीय संकेतन (Mathematical Notations),गणितीय प्रतीक (Mathematical Symbols)
    के बारे में बताया गया है।

गणितीय प्रतीक और उनके नाम (Mathematical Symbols and Their Names):

आधुनिक गणित में प्रयोग किए जाने वाले प्रतीक,गणितीय प्रतीक (Mathematical Symbols)
और उनके नाम निम्न प्रकार हैं:

Greek Letters

SymbolSymbol Name
{\displaystyle \mathrm {E} }{\displaystyle \epsilon } and {\displaystyle \varepsilon }Epsilon,epsilonand varepsilon
{\displaystyle \alpha }Alpha
{\displaystyle \beta }Beta
{\displaystyle \Gamma } and {\displaystyle \gamma }Gamma and gamma
{\displaystyle \Delta } and {\displaystyle \delta }Delta and delta
{\displaystyle \mathrm {M} } and {\displaystyle \mu }Mu and mu
{\displaystyle \Lambda } and {\displaystyle \lambda }Lambda and lambda
{\displaystyle \mathrm {K} }{\displaystyle \kappa } and {\displaystyle \varkappa }Kappa,kappaand varkappa
{\displaystyle \iota }Iota 
{\displaystyle \Theta }{\displaystyle \theta } and {\displaystyle \vartheta }Theta,thetaand vartheta
{\displaystyle \eta }Eta
 {\displaystyle \zeta }Zeta

Greek letters

SymbolSymbol NameSymbolSymbol Name
{\displaystyle \mathrm {A} } and {\displaystyle \alpha }Alpha and alpha{\displaystyle \mathrm {N} } and {\displaystyle \nu }Nu and nu
{\displaystyle \mathrm {B} } and {\displaystyle \beta }Beta and beta{\displaystyle \Xi } and {\displaystyle \xi }Xi and xi
{\displaystyle \Gamma } and {\displaystyle \gamma }Gamma and \gamma{\displaystyle \mathrm {O} } and {\displaystyle \mathrm {o} }Omicron and omicron
{\displaystyle \Delta } and {\displaystyle \delta }Delta and delta{\displaystyle \Pi }{\displaystyle \pi } and {\displaystyle \varpi }Pi, pi and varpi
{\displaystyle \mathrm {E} }{\displaystyle \epsilon } and {\displaystyle \varepsilon }Epsilon, epsilon and varepsilon{\displaystyle \mathrm {P} }{\displaystyle \rho } and {\displaystyle \varrho }Rho, rho and varrho
{\displaystyle \mathrm {Z} } and {\displaystyle \zeta }Zeta and zeta{\displaystyle \Sigma }{\displaystyle \sigma } and {\displaystyle \varsigma \,}Sigma, sigma and varsigma
{\displaystyle \mathrm {H} } and {\displaystyle \eta }Eta and eta{\displaystyle \mathrm {T} } and {\displaystyle \tau }Tau and tau
{\displaystyle \Theta }{\displaystyle \theta } and {\displaystyle \vartheta }Theta, theta and vartheta{\displaystyle \Upsilon } and {\displaystyle \upsilon }Upsilon and upsilon
{\displaystyle \mathrm {I} } and {\displaystyle \iota }Iota and iota{\displaystyle \Phi }{\displaystyle \phi }, and {\displaystyle \varphi }Phi, phi and varphi
{\displaystyle \mathrm {K} }{\displaystyle \kappa } and {\displaystyle \varkappa }Kappa, kappa and varkappa{\displaystyle \mathrm {X} } and {\displaystyle \chi }Chi and chi
{\displaystyle \Lambda } and {\displaystyle \lambda }Lambda and lambda{\displaystyle \Psi } and {\displaystyle \psi }Psi and psi
{\displaystyle \mathrm {M} } and {\displaystyle \mu }Mu and mu{\displaystyle \Omega } and {\displaystyle \omega }Omega and omega

Relation operators

SymbolSymbol NameSymbolSymbol Name
{\displaystyle <\,}is less than{\displaystyle >\,}is greater than
{\displaystyle \nless }is not less than{\displaystyle \ngtr }is not greater than
{\displaystyle \leq }is less than or equal to{\displaystyle \geq }is greater than or equal to
{\displaystyle \leqslant }is less than or equal to{\displaystyle \geqslant }is greater than or equal to
{\displaystyle \nleq }is neither less than nor equal to{\displaystyle \ngeq }is neither greater than nor equal to
{\displaystyle \nleqslant }is neither less than nor equal to{\displaystyle \ngeqslant }is neither greater than nor equal to
{\displaystyle \prec }precedes{\displaystyle \succ }succeeds
{\displaystyle \nprec }doesn’t precede{\displaystyle \nsucc }doesn’t succeed
{{\displaystyle \preceq }precedes or equals{\displaystyle \succeq }succeeds or equals
{\displaystyle \npreceq }neither precedes nor equals{\displaystyle \nsucceq }neither succeeds nor equals
{\displaystyle \ll } {\displaystyle \gg } 
{\displaystyle \lll } {\displaystyle \ggg } 
{\displaystyle \subset }is a proper subset of{\displaystyle \supset }is a proper superset of
{\displaystyle \not \subset }is not a proper subset of{\displaystyle \not \supset }is not a proper superset of
{\displaystyle \subseteq }is a subset of{\displaystyle \supseteq }is a superset of
{\displaystyle \nsubseteq }is not a subset of{\displaystyle \nsupseteq }is not a superset of
{\displaystyle \sqsubset } {\displaystyle \sqsupset } 
{\displaystyle \sqsubseteq } {\displaystyle \sqsupseteq } 
SymbolSymbol Name
{\displaystyle =\,}is equal to
{\displaystyle \doteq } 
{\displaystyle \equiv }is equivalent to
{\displaystyle \approx }is approximately
{\displaystyle \cong }is congruent to
{\displaystyle \simeq }is similar or equal to
{\displaystyle \sim }is similar to
{\displaystyle \propto }is proportional to
{\displaystyle \neq } or {\displaystyle \neq }is not equal to
SymbolSymbol NameSymbolSymbol Name
{\displaystyle \parallel }is parallel with{\displaystyle \nparallel }is not parallel with
{\displaystyle \asymp }is asymptotic to{\displaystyle \bowtie } 
{\displaystyle \vdash } {\displaystyle \dashv } 
{\displaystyle \in }is member of{\displaystyle \ni }owns, has member
{\displaystyle \smile } {\displaystyle \frown } 
{\displaystyle \models }models{\displaystyle \notin }is not member of
{\displaystyle \perp }is perpendicular with{\displaystyle \mid }divides

Negated binary relations

SymbolSymbol NameSymbolSymbol Name
{\displaystyle \neq } or {\displaystyle \neq \,}is not equal to{\displaystyle \notin }is not member of
{\displaystyle \nless }is not less than{\displaystyle \ngtr }is not greater than
{\displaystyle \nleq }is not less than or equal to{\displaystyle \ngeq }is not greater than or equal to
{\displaystyle \nleqslant } {\displaystyle \ngeqslant } 
{\displaystyle \nleqq } {\displaystyle \ngeqq } 
{\displaystyle \lneq } {\displaystyle \gneq } 
{\displaystyle \lneqq } {\displaystyle \gneqq } 
{\displaystyle \lvertneqq } {\displaystyle \gvertneqq } 
{\displaystyle \lnsim } {\displaystyle \gnsim } 
{\displaystyle \lnapprox } {\displaystyle \gnapprox } 
{\displaystyle \nprec }does not precede{\displaystyle \nsucc }does not succeed
{\displaystyle \npreceq }neither precedes nor equals{\displaystyle \nsucceq }neither succedes nor equals
{\displaystyle \precneqq } {\displaystyle \succneqq } 
{\displaystyle \precnsim } {\displaystyle \succnsim } 
{\displaystyle \precnapprox } {\displaystyle \succnapprox } 
{\displaystyle \nsim }is not similar to{\displaystyle \ncong }is not congruent to
{\displaystyle \nshortmid } {\displaystyle \nshortparallel } 
{\displaystyle \nmid } {\displaystyle \nparallel }is not parallel with
{\displaystyle \nvdash } {\displaystyle \nvDash } 
{\displaystyle \nVdash } {\displaystyle \nVDash } 
{\displaystyle \ntriangleleft } {\displaystyle \ntriangleright } 
{\displaystyle \ntrianglelefteq } {\displaystyle \ntrianglerighteq } 
{\displaystyle \nsubseteq } {\displaystyle \nsupseteq } 
{\displaystyle \nsubseteqq } {\displaystyle \nsupseteqq } 
{\displaystyle \subsetneq } {\displaystyle \supsetneq } 
{\displaystyle \varsubsetneq } {\displaystyle \varsupsetneq } 
{\displaystyle \subsetneqq } {\displaystyle \supsetneqq } 
{\displaystyle \varsubsetneqq } {\displaystyle \varsupsetneqq } 

Set and/or logic notation

SymbolSymbol Name
{\displaystyle \emptyset } or {\displaystyle \emptyset \,}, and {\displaystyle \varnothing \,}The empty set
{\displaystyle \mathbb {N} }Set of natural numbers
{\displaystyle \mathbb {Z} }Set of integers
{\displaystyle \mathbb {Q} }Set of rational numbers
{\displaystyle \mathbb {A} }Set of algebraic numbers
{\displaystyle \mathbb {R} }Set of real numbers
{\displaystyle \mathbb {C} }Set of complex numbers
{\displaystyle \mathbb {H} }Set of quaternions
{\displaystyle \mathbb {O} }Set of octonions
{\displaystyle \mathbb {S} }Set of sedenions
{\displaystyle \in }is member of
{\displaystyle \notin }is not member of
{\displaystyle \ni }owns (has member)
{\displaystyle \subset }is proper subset of
{\displaystyle \subseteq }is subset of
{\displaystyle \supset }is proper superset of
{\displaystyle \supseteq }is superset of
{\displaystyle \cup }Set union
{\displaystyle \cap }Set intersection
{\displaystyle \setminus }Set difference
SymbolSymbol Name
{\displaystyle \exists }there exists at least one
{\displaystyle \exists !}there exists one and only one
{\displaystyle \nexists }there is no
{\displaystyle \forall }for all
{\displaystyle \neg }not (logical not)
{\displaystyle \lor }or (logical or)
{\displaystyle \land }and (logical and)
{\displaystyle \Longrightarrow } or {\displaystyle \implies }implies
{\displaystyle \Rightarrow }(preferred for right implication)
{\displaystyle \Longleftarrow }is implied by (only if)
{\displaystyle \Leftarrow }(preferred for left implication)
{\displaystyle \iff }is equivalent to (if and only if, iff)
{\displaystyle \Leftrightarrow }(preferred for equivalence)
{\displaystyle \top } 
{\displaystyle \bot } 

Geometry Symbol

SymbolSymbol NameSymbolSymbol Name
{\displaystyle {\overline {\rm {AB}}}}segment{\displaystyle {\overrightarrow {\rm {AB}}}}ray (half-line)
{\displaystyle \angle }angle{\displaystyle \measuredangle }measured angle
{\displaystyle \triangle }triangle{\displaystyle \square }square
{\displaystyle \cong }congruent (same shape and size){\displaystyle \ncong }not congruent
{\displaystyle \sim }similar (same shape){\displaystyle \nsim }not similar
{\displaystyle \|}is parallel with{\displaystyle \nparallel }is not parallel with
{\displaystyle \perp }is perpendicular to{\displaystyle \not \perp }is not perpendicular to

2.गणितीय संकेतन (Mathematical Notations),गणितीय प्रतीक (Mathematical Symbols) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.गणितीय नोटेशन उदाहरण क्या है? (What is mathematical notation example?):

उत्तर:गणितीय नोटेशन में अपेक्षाकृत सरल प्रतीकात्मक अभ्यावेदन (simple symbolic) शामिल हैं,जैसे संख्या 0, 1 और 2; x,y और z जैसे चर; “(” and “|”फलन प्रतीक जैसे sin; संकारक (operator) प्रतीक जैसे”+” सम्बन्धपरक प्रतीक (relational symbols) जैसे “<” संक्रियात्मक प्रतीक (conceptual symbols) जैसे;lim  और dy/dx ।

प्रश्न:2.ज्यामितीय नोटेशन क्या है? (What is geometric notation?):

उत्तर:असल में,ऐसे नोटेशन हैं जो वास्तविक ज्यामितीय आंकड़ों को संदर्भित करते हैं और ऐसे नोटेशन हैं जो आंकड़ों के मापों (measures) (आकार (sizes,लंबाई (lengths)) को संदर्भित करते हैं। कोण नोटेशन के सामने n कोण लेबल A, Bऔर C (B में वर्टेक्स के साथ) के उपाय को संदर्भित करता है।

प्रश्न:3.गणित नोटेशन उपयोगी क्यों है? (Why is math notation useful?):

उत्तर:जवाब काफी सरल है।नोटेशन गणित की “भाषा” हैं।हम मूल रूप से एक भाषा है जो हर देश से सभी गणितज्ञों समझ सकते है की जरूरत है, तो गणितज्ञों के लिए अंग्रेजी की तरह एक भाषा चुनने के बजाय notations और संख्या का उपयोग करने के लिए अपनी बात व्यक्त करने के लिए चुनते हैं।

प्रश्न:4.आप गणित के प्रतीकों को कैसे टाइप करते हैं? (How do you type math symbols?):

उत्तर:माइक्रोसॉफ्ट के वर्ड में,आप समीकरण उपकरणों का उपयोग करके गणितीय प्रतीकों को समीकरणों या पाठ में सम्मिलित कर सकते हैं।
डालने टैब पर,प्रतीक समूह में, समीकरण के तहत तीर पर क्लिक करें, और फिर नए समीकरण डालें क्लिक करें (Under Equation Tools, on the Design tab, in the Symbols group, click the More arrow)।
समीकरण उपकरण के तहत, डिजाइन टैब पर, प्रतीक समूह में, अधिक तीर पर क्लिक करें।

प्रश्न:5.मैथ्स में एक प्रतीक क्या है? (What is a symbol in maths?):

उत्तर:एक गणितीय प्रतीक एक आंकड़ा या आंकड़ों का संयोजन है जिसका उपयोग गणितीय वस्तुओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया जाता है, गणितीय वस्तुओं पर एक कार्रवाई,गणितीय वस्तुओं के बीच एक संबंध या एक सूत्र में होने वाले अन्य प्रतीकों की संरचना के लिए।

प्रश्न:6.नोटेशन के प्रकार क्या हैं? (What are the types of notation?):

उत्तर:नोटेशन दो प्रकार के होते हैं:
शुद्ध नोटेशन (Pure Notation)।
मिश्रित नोटेशन (Mixed Notation)।

प्रश्न:7.संख्या नोटेशन का अर्थ क्या है? (What is the meaning of number notation?):

उत्तर:संख्याओं का अंकन एक ऐसा तरीका है जिसमें विभिन्न अंकों के सीमित सेट का उपयोग करके सभी नंबरों का प्रतिनिधित्व किया जाता है। वर्तमान में संख्याओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए उपयोग किया जाने वाला नोटेशन को कुछ प्राचीन अंकनों जैसे रोमन अंकों के विपरीत स्थितीय अंकन (या स्थान-मूल्य अंकन) कहा जाता है (Notation that is used currently for representing numbers is called positional notation (or place-value notation), in contrast to some ancient notations, such as Roman numerals.)

प्रश्न:8.संकेतन और अंकन क्या है? (What is notation and numeration?):

उत्तर:अंक या आंकड़ों में एक नंबर का प्रतिनिधित्व करने की विधि को संकेतन कहा जाता है।अंकन को शब्दों में एक नंबर व्यक्त करने की विधि के रूप में जाना जाता है।(The method of representing a number in digits or figures is called notation. Numeration is known as the method of expressing a number in words.)

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणितीय संकेतन (Mathematical Notations),गणितीय प्रतीक (Mathematical Symbols)
के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Mathematical Notations

गणितीय संकेतन (Mathematical Notations)

Mathematical Notations

गणितीय संकेतन (Mathematical Notations) और प्रतीकों के द्वारा गणित की भाषा व शब्दों को व्यक्त किया जाता था।
प्राचीनकाल में गणितीय संकेतन (Mathematical Notations) व प्रतीकों के लिए किसी शब्द या अक्षर का प्रयोग होता था।

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