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Errors Due to Lack of Practice in Math

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2 (6.)गणित में अभ्यास की कमी के कारण त्रुटियाँ (Errors Due to Lack of Practice in Math),मैथेमेटिक्स में अभ्यास की कमी के कारण त्रुटियाँ (Errors Due to Lack of Practice in Mathematics) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

1.गणित में अभ्यास की कमी के कारण त्रुटियाँ (Errors Due to Lack of Practice in Math),मैथेमेटिक्स में अभ्यास की कमी के कारण त्रुटियाँ (Errors Due to Lack of Practice in Mathematics):

  • गणित में अभ्यास की कमी के कारण त्रुटियाँ (Errors Due to Lack of Practice in Math) अक्सर देखने में आती है।अन्य विषयों के बजाय गणित में अभ्यास कार्य बहुत ही आवश्यक है।चाहे गणित की कोई भी शाखा अंकगणित,बीजगणित तथा ज्यामिति इत्यादि हो इन सभी में परिपक्वता अभ्यास कार्य से ही आती है।प्रारंभिक कक्षाओं से लेकर उच्च कक्षाओं के छात्र-छात्राओं के लिए अभ्यास कार्य अत्यंत आवश्यक है।छात्र-छात्राओं में प्रारंभिक संक्रियाओं जोड़,गुणा,भाग,बाकी भिन्नों के जोड़,गुणा,भाग,बाकी इत्यादि का शुरू से ही अभ्यास कराना चाहिए।यदि गणित में निपुणता,कुशलता तथा दक्षता हासिल करनी है तो गणित में अभ्यास कार्य करना महत्वपूर्ण एवं आवश्यक है।अभ्यास कार्य के बिना गणित में पारंगत नहीं हुआ जा सकता है।कहावत भी है कि करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान अर्थात् बार-बार अभ्यास करने से मूर्ख भी विद्वान बन जाता है।अभ्यास कार्य के कारण महामूर्ख कालीदास महाकवि कालिदास तथा मूर्ख बोपदेव संस्कृत के महान् विद्वान बन गए।
  • अक्सर यह देखने में आता है कि छात्र-छात्राएं सामान्य जोड़,बाकी,गुणा,भाग जैसी गलतियां करते हुए पाए जाते हैं।गणित में अभ्यास का अर्थ है कि बार-बार गणित के सवालों को तब तक हल करना जब तक गणित की संबंधित प्रश्नावली में निपुणता व पूर्णता हासिल ना हो जाए।
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(1.)अंकगणित में अभ्यास की कमी के कारण त्रुटियां (Errors Due to Lack of Practice in Arithmetic):

  • (i)अनेक छात्र-छात्रा भिन्नों को दशमलव भिन्न में तथा दशमलव भिन्नों को भिन्न में परिवर्तित नहीं कर सकते हैं।
  • (ii)सेमी को मीटर या किलोमीटर में तथा किलोमीटर को मीटर या सेमी में परिवर्तित नहीं कर सकते हैं।यदि उनको पर्याप्त अभ्यास कार्य दिया जाए अथवा कराया जाए तो परिवर्तित करना सीखाया जा सकता हैं।
  • (iii)अनेक छात्र-छात्राएं लीटर को घन सेमी व घन मीटर में तथा घनमीटर व घन सेमी को लीटर में परिवर्तित नहीं कर सकते हैं।यदि उनको पर्याप्त अभ्यास कार्य कराया जाए तो इस प्रकार एक इकाई से दूसरी इकाई में वे सरलता से परिवर्तित कर सकते हैं।
  • (iv)इसी प्रकार छात्र-छात्राएं प्रतिशत से भिन्न में,भिन्न को प्रतिशत में परिवर्तित नहीं कर पाते हैं।
  • (v)अभ्यास की कमी के कारण सवालों को हल करने के गणना कार्य में त्रुटि कर जाते हैं।ऋणात्मक की जगह धनात्मक का चिन्ह तथा धनात्मक की जगह ऋणात्मक का चिन्ह लगा देते हैं जिससे सवाल को हल करने में उनके द्वारा किया गया परिश्रम व्यर्थ चला जाता है।
  • (vi)वर्गमूल,लघुत्तम तथा सरलीकरण हालांकि छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए गणित के पाठ्यक्रम में शामिल नहीं है परंतु गणित के अन्य टाॅपिक्स को पढ़ाते समय कदम-कदम पर इनकी आवश्यकता पड़ती है इसलिए इनका पर्याप्त् अभ्यास करना चाहिए।
  • (vii)इसी प्रकार सरल ब्याज,लाभ-हानि,ऐकिक नियम,समय और काम,समानुपात-अनुपात इत्यादि आधुनिक गणित के पाठ्यक्रम में शामिल नहीं है परंतु गणित के अन्य टॉपिक्स हल करते समय इनका कहीं ना कहीं उपयोग होता है।इनको हल करने में छात्र-छात्राएं त्रुटि कर जाते हैं।

(2.)बीजगणित में अभ्यास की कमी के कारण त्रुटियां (Errors Due to Lack of Practice in Algebra):

  • (i)छात्र-छात्राएं किसी व्यंजक,गुणनखंड,द्विघात समीकरण में उभयनिष्ठ अक्षर,संख्या या पद को बाहर नहीं निकाल पाते हैं।
  • (ii)समीकरण को हल करते समय पक्षान्तरण में धनात्मक व ऋणात्मक चिन्हों का ध्यान नहीं रखते हैं।समीकरण में वज्रगुणन किस प्रकार किया जाता है इसकी पहचान नहीं कर पाते हैं।भागफल या गुणनफल की राशियों को ही वज्रगुणन द्वारा एक पक्ष से दूसरे पक्ष में परिवर्तित कर सकते हैं।परंतु देखा जाता है कि धनात्मक,ऋणात्मक बीजीय पदों को भी वज्रगुणन द्वारा पक्षान्तरण करने लगते हैं।
  • (iii)अनेक छात्र-छात्राएँ बीजगणितीय सर्वसमिकाओं यथा \left(a+b\right)^2,\left(a-b\right)^2,a^2-b^2 का सवाल करते समय इनका प्रयोग नहीं कर पाते हैं।उन्हें a^3+b^3 तथा \left(a+b\right)^3a^3-b^3 तथा \left(a-b\right)^3 के बीच का अन्तर ही पता नहीं होता है,फलस्वरूप वे इनका प्रयोग करते समय गलतियां कर बैठते हैं।इसलिए इस प्रकार की बीजीय सर्वसमिकाओं के अंतर को अभ्यास कार्य द्वारा स्पष्ट कराया जाना चाहिए।
  • (iv)बीजगणितीय समीकरण यदि भिन्नों के रूप में हों तो छात्र-छात्राओं को लघुत्तम समापवर्त्य लेने में तथा उसके सरलीकरण में कठिनाई महसूस होती है।वे अक्सर त्रुटि कर बैठतें हैं।इस प्रकार की त्रुटि में सुधार बीजीय भिन्नों के लघुत्तम का अभ्यास करवा कर दूर कराई जा सकती है।
  • (v)लेखाचित्र खींचने में निर्देशांक बिंदु ज्ञात करने,पैमाना लेने,निर्देशांकों को अंकित करने के लिए पर्याप्त् अभ्यास कराया जाना चाहिए। समीकरणों से निर्देशांक ज्ञात करने हेतु नोटबुक में पर्याप्त अभ्यास कराया जाना चाहिए जिससे वे निर्देशांक बिंदु लेने में पारंगत हो सके।
  • (vi)समुच्चय सिद्धांत के प्रश्नों में सही चित्र बनाने,सर्वनिष्ठ (intersection),संघ (union) तथा दो समुच्चयों के अंतर को भलीभांति समझाया जाना चाहिए अर्थात् A\cup B,A\cap B,A-B आदि को ठीक प्रकार से समझाया जाना चाहिए।
  • (vii)द्विघात समीकरणों में गुणनखंड करना,बहुपद के गुणनखण्ड करने का अभ्यास कराया जाना चाहिए।अक्सर छात्र-छात्राएं गुणनखण्ड करने में कठिनाई महसूस करते हैं।

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(3.)ज्यामिति में अभ्यास की कमी के कारण त्रुटियाँ (Errors Due to Lack of Practice in Geometry):

  • (i)छात्र-छात्राएं आयत,वर्ग,समलंब चतुर्भुज,सम चतुर्भुज,समांतर चतुर्भुज,विषम चतुर्भुज आदि को नहीं पहचान पाते हैं और न ही इनके अंतर की जानकारी होती है।इसलिए उपर्युक्त आकृतियों के गुणधर्मों को चित्र बनाकर अभ्यास कराया जाना चाहिए।इन आकृतियों को सही खींचना और पहचानना भी अभ्यास पर निर्भर करता है।
  • (ii)छात्र-छात्राओं को प्रमुख रूप से प्रमेयों की समस्याओं को हल करने में कठिनाई महसूस होती है।अव्वल तो अनेक छात्र-छात्राओं को ज्यामिति की प्रमेय समझ में नहीं आती है और जैसे-तैसे यदि वे प्रमेयों को समझ भी लेते हैं तो प्रमेयों पर आधारित समस्याओं को हल नहीं कर पाते।इसलिए प्रमेयों और प्रमेयों पर आधारित समस्याओं का अभ्यास कराया जाना चाहिए।
  • प्रमेयों में अक्सर त्रिभुजों की सर्वांगसमता व समरूपता में संगत भुजाएँ तथा संगत कोणों की समानता को पहचान नहीं पाते हैं।इसलिए अभ्यास देने से पूर्व उन्हें थ्योरी समझाते समय यह बताना चाहिए कि दो त्रिभुजों में संगत भुजाओं तथा संगत कोणों की पहचान किस प्रकार की जाए तथा वे आपस में बराबर क्यों है इसका कारण स्पष्ट करना चाहिए।
  • (iii)क्षेत्रफल,आयतन तथा लम्बाई की इकाइयों को सही नहीं लिख पाते हैं।यदि लंबाई,चौड़ाई और ऊंचाईयां अलग-अलग इकाई में हो तो उन्हें बताया जाए कि पहले सभी भुजाओं को किसी एक इकाई में परिवर्तित करना चाहिए।इसके पश्चात ही क्षेत्रफल और आयतन ज्ञात करना चाहिए।
  • (iv)वृत्त से संबंधित गणनाओं में भी गलतियां करते देखा जाता है।यदि व्यास दिया हुआ हो तो वृत्त की त्रिज्या में बिना परिवर्तित किए हुए ही वृत्त का क्षेत्रफल,परिधि ज्ञात करने लग जाते हैं।वृत्त की परिधि दी हुई है तो उसे ही त्रिज्या मानने की भूल कर जाते हैं।इसलिए वृत्त से संबंधित क्षेत्रफल \pi r^2,परिधि 2\pi r,व्यास तथा संकेन्द्रीय वृत्तों की संकल्पना को अभ्यास कार्य के द्वारा ठीक से समझाया जाना आवश्यक है।
  • (v)ठोस के आधार का क्षेत्रफल व ऊंचाई दे दी जाए तो आयतन नहीं ज्ञात कर पाते हैं।पृष्ठीय क्षेत्रफल व त्रिज्या दे दी जाए तो आयतन ज्ञात नहीं कर पाते हैं। इसलिए अभ्यास के द्वारा उन्हें बताया जाए कि क्षेत्रफल व आयतन के लिए त्रिज्या व ऊँचाई तथा घनाभ में लंबाई,चौड़ाई और ऊंचाई ज्ञात करना आवश्यक है।
  • यदि आधार का क्षेत्रफल,ऊँचाई दी जाए तो आधार के क्षेत्रफल को ऊंचाई से गुणा करने पर आयतन ज्ञात किया जा सकता है।जैसे घनाभ का आयतन=लंबाई × चौड़ाई × ऊंचाई होता है और आधार का क्षेत्रफल लंबाई × चौड़ाई होता है।इसी प्रकार बेलन के आयतन का सूत्र \pi r^2h होता है तथा आधार का क्षेत्रफल \pi r^2 होता है।इस प्रकार बेलन,घनाभ व घन में आधार का क्षेत्रफल दिया हुआ है तथा ऊंचाई ज्ञात है तो इनके गुणनफल से आयतन ज्ञात किया जा सकता है।परंतु शंकु में आधार के क्षेत्रफल को ऊँचाई से गुणा करके तीन से भाग भी देना पड़ेगा।
  • (vi)त्रिज्यखण्ड (sector) तथा वृत्तखण्ड (segment of a circle) दोनों को समझने में भ्रम हो जाता है।वृत्तखंड को त्रिज्यखंड ही समझ लेते हैं।आपको यह ज्ञात होना चाहिए कि एक वृतीय क्षेत्र का वह भाग जो दो त्रिज्याओं और संगत चाप से घिरा (परिबद्ध) हो उस वृत का एक त्रिज्यखंड कहलाता है।जबकि वृतीय क्षेत्र का वह भाग जो एक जीवा और संगत चाप के बीच में परिबद्ध हो एक वृत्तखंड कहलाता है।इसी प्रकार लघु त्रिज्यखंड व दीर्घ त्रिज्यखण्ड का अंतर समझ लेना चाहिए।

(4.)अभ्यास कार्य देने में सावधानियां (Precautions in Giving Practice Work):

  • (i)गणित शिक्षण में यथोचित अभ्यास कार्य देना चाहिए।अभ्यास कार्य यह समझ कर दिया जाना चाहिए कि उससे छात्र-छात्राओं में गणित शिक्षा को समझने की शक्ति बढ़ सके।ज्ञान प्राप्त करने की अपेक्षा समझना अधिक आवश्यक है।इसलिए अभ्यास कार्य में न तो अधिक सहायता देनी चाहिए और न इतनी कम कि छात्र-छात्राएं अभ्यास कार्य हल ही न कर सकें।
  • अंकगणित में कुछ अभ्यास कार्य मौखिक रूप से हल करने वाला भी दिया जाना चाहिए जिससे छात्र-छात्राएं मानसिक गणना कार्य करना भी सीखें।
  • (iii)अभ्यास कार्य में यदि कोई सवाल बहुत अधिक कठिन हो तो उसके लिए मौखिक रूप से हिंट (Hint) भी दिया जाना चाहिए।
  • (iv)अभ्यास कार्य देने में इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि छात्र-छात्राएं उसको रुचिपूर्वक तथा नियत समय में समाप्त कर लेता है।
  • (v)छात्र-छात्राओं द्वारा अभ्यास कार्य समाप्त कर लेने पर उसके कुछ सवालों की जांच भी कर लेनी चाहिए।जहां कहीं त्रुटि व अशुद्धि है उसको समझाना चाहिए तथा उसे वापस छात्र-छात्राओं से पुनरावृत्ति करवा लेनी चाहिए।
  • (vi)अभ्यास कार्य देते समय छात्र-छात्राओं को प्रेरित करते रहना चाहिए जिससे छात्र-छात्राओं को गणित का अभ्यास कार्य बोझिल और नीरस न लगे।
  • (vii)अभ्यास कार्य जांच करते समय छात्र-छात्राएं सामान्यतः एक ही प्रकार की त्रुटि करते हैं तो उन त्रुटियों को सामूहिक रूप से बताकर छात्र-छात्राओं से शुद्धि करवा लेना चाहिए।परंतु जो त्रुटि विशिष्ट छात्र-छात्रा करते हैं तो नोटबुक में उस त्रुटि को अंकित करके सुधार करवा लेना चाहिए।यदि त्रुटियों का शुद्धिकरण नहीं किया जाएगा तो छात्र-छात्राओं को अभ्यास कार्य देने का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा।
  • (viii)कुछ छात्र-छात्राएं टॉपिक समझ में न आने के कारण गलतियां करते हैं।अध्यापक को ऐसे टाॅपिक को पुनः ठीक से समझा देना चाहिए।उस टॉपिक से संबंधित बारीक से बारीक बात को समझा कर नोट करवा देना चाहिए तथा पुनः उससे संबंधित अभ्यास कार्य करवाना चाहिए।
  • (ix)कुछ त्रुटियां गणना करने,सरलीकरण करने तथा जोड़ने-घटाने से संबंधित होती हैं।उन गलतियों की तरफ छात्र-छात्राओं का ध्यान आकृष्ट करना चाहिए।
  • उपर्युक्त विवरण में गणित में अभ्यास की कमी के कारण त्रुटियाँ (Errors Due to Lack of Practice in Math),मैथेमेटिक्स में अभ्यास की कमी के कारण त्रुटियाँ (Errors Due to Lack of Practice in Mathematics) के बारे में बताया गया है।

(5.)गणित में अभ्यास की कमी के कारण त्रुटियों का सारांश (गणित में अभ्यास की कमी के कारण त्रुटियाँ (Conclusion of Errors Due to Lack of Practice in Math):

  • क्या गणित में अभ्यास की कमी के कारण त्रुटियाँ होती है?वस्तुतः छात्र-छात्राएँ गणित के उदाहरण तथा प्रश्नावली के सवाल करते समय अर्थात् अभ्यास करते समय अपने साथियों से वार्ता करते जाते हैं और सवाल भी करते हैं।परन्तु ऐसा करने से उनका मन एकाग्र नहीं हो पाता है,मन का उच्चाटन हो जाता है,ध्यान भंग हो जाता है।यही कारण है कि छात्र-छात्राएं सवालों की स्टेप्स में,सवाल हल करने की विधि में और गणना कार्य करने में त्रुटियाँ करते हैं।इसलिए केवल गणित में अभ्यास कार्य से निपुणता,कुशलता और दक्षता प्राप्त नहीं की जा सकती है।इसके लिए आपको अपने मन को एकाग्र करके सवालों को हल करना होगा।अपने मन को सवालों को हल करने पर ही फोकस करना होगा।गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं कि:
  • असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम्।
    अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते।।”
  • अर्थात् हे अर्जुन!इसमें कुछ भी संदेह नहीं कि यह मन दु:ख से वश में करने के योग्य तथा अत्यंत चंचल है किंतु अभ्यास और वैराग्य के द्वारा इस मन को वश में किया जा सकता है।
  • अभ्यास योग से मन को वश में करने के कुछ उपाय हैं।लगातार गणित के सवाल हल करने में अपने ध्यान को लगाएं।यदि मित्रों से वार्ता भी करें तो सवालों में आने वाली समस्याओं को हल करने के बारे में वार्ता करें।इसके अलावा दूसरा उपाय है कि रोजाना सुबह स्नान-शौच से निवृत्त होकर रोजाना कुछ समय मन को एकाग्र करने के लिए ध्यान करें। ध्यान के लिए प्रकाश स्वरूप ज्योति का आज्ञाचक्र अर्थात् भौंहों के मध्य में मन को लगाएं।शुरू-शुरू में मन इधर-उधर भटकता है परंतु धीरे-धीरे अभ्यास करने से एकाग्रता सधने लगती है।
  • तीसरा उपाय है कि खाली समय हो तो भगवान् के नाम का जप करें अथवा गणित सूत्रों को मानसिक रूप से स्मरण करें।ध्यान या अभ्यास योग जागरूक (Alert),सचेत (Conscious),सक्रिय (Active) होकर करें अर्थात् गणित की समस्याओं, कठिनाइयों,सवालों को जागरूक (Alert),सचेत (Conscious),सक्रिय (Active) होकर हल करें।
  • वैराग्य का अर्थ है कि छात्र-छात्राओं को काम,क्रोध,लोभ,स्वाद,श्रृंगार,खेल-तमाशे,बहुत ज्यादा सोना और अधिक सेवा (परोपकार) कार्य इन कामों को न करें।गीता में कहा गया है कि काम,क्रोध और लोभ ये नरक के द्वार हैं अर्थात् विद्यार्थियों को अध्ययन कार्य से भटकाने वाले हैं। स्वाद को महत्त्व देने से चाट-पकौड़े खाने से स्वास्थ्य नष्ट होता है।स्वस्थ मस्तिष्क के बिना अध्ययन नहीं किया जा सकता है।श्रृंगार अर्थात् फैशनपरस्ती तथा विलासी प्रकृति का होने से विद्यार्थी का मन चंचल होगा और चंचल मन से विद्याध्ययन नहीं किया जा सकता।खेल-तमाशे अर्थात् फिल्में,सिनेमा,टीवी पर नाच गाने देखने से समय नष्ट होगा जिससे विद्याअध्ययन करने के लिए समय नहीं मिलेगा।अत्यधिक सेवा (परोपकार) करना भी समय नष्ट करने वाला ही है।
  • सारांश में यह कहा जा सकता है कि अभ्यास योग और वैराग्य के बिना गणित में निपुणता,कुशलता और दक्षता प्राप्त नहीं की जा सकती है।इनका पालन न करने पर मन अस्त-व्यस्त,अव्यवस्थित तथा अपूर्णता की ओर बढ़ेगा।इसलिए धैर्यपूर्वक अभ्यास व वैराग्य का पालन करें और परिणाम स्वयं देख लें।

(6.)गणित में अभ्यास की कमी के कारण त्रुटियाँ (Errors Due to Lack of Practice in Math),मैथेमेटिक्स में अभ्यास की कमी के कारण त्रुटियाँ (Errors Due to Lack of Practice in Mathematics) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.गणित में सामान्य त्रुटियां क्या हैं? (What are the common errors in mathematics?):

उत्तर:त्रुटियाँ
गणित की सामान्य:त्रुटियां कक्षा समानता के संकेत की समझ की कमी है।
वैचारिक समझ:प्रतिलोम आपरेशनों का गलत उपयोग,संकेत के साथ गलतियों सहित।पक्षांतरण के सिद्धांतों का अपर्याप्त ज्ञान।

प्रश्न:2.गणित में 3 त्रुटियां क्या हैं? (What are the 3 errors in mathematics?):

उत्तर:निष्कर्ष के रूप में,यह पाया गया कि छात्र तीन प्रकार की त्रुटियां करते हैं;वे वैचारिक त्रुटि (Conceptual Error),संक्रियात्मक त्रुटि (Operational Error) और प्रमुख त्रुटि (Principal Error) थे।कुछ वैचारिक त्रुटियां शब्द समस्या का गणित की समस्या में अनुवाद कर रही थीं;गुणात्मक भिन्न का उपयोग करना और संख्या लाइन में भिन्न के क्रम का निर्धारण करना।

प्रश्न:3.गणित में त्रुटि के कारण क्या हैं? (What are the causes of error in mathematics?):

त्रुटियों के स्रोतों को लापरवाही से स्टेम करने के लिए पाया गया,कमजोर बुनियादी ज्ञान जैसे गुणा करने में असमर्थता और यहां तक कि पूरी संख्या को विभाजित करने में असमर्थता,पूर्णांक की अवधारणाओं को आत्मसात करने में असमर्थता के बाद से वे पूर्ण संख्यांओं की स्कीमा के लिए उपयोग किया जाता (used to the schema of whole numbers) है और नियम मिश्रण-अप (rule mix-up) जो सतह की समझ का परिणाम भी है ।

प्रश्न:4.गणित में त्रुटियां और भ्रांतियां क्या हैं? (What are errors and misconceptions in mathematics?):

उत्तर:गलतियां आमतौर पर एक बंद कर रहे हैं जबकि भ्रांतियों,देवताओं न करे,के लिए रहता है के लिए हो सकता है (Mistakes are usually one-off, while misconceptions,the god forbid, could be keeps)।गलतियां कुछ लोगों द्वारा की जाती हैं, कई लोगों द्वारा भ्रांतियां की जाती हैं और बार-बार। छात्र अपनी गलतियों को खुद से समझ सकते हैं क्योंकि गलतियां आमतौर पर लापरवाही के कारण होती हैं।वे भ्रांतियों के लिए ऐसा नहीं कर सकते ।

प्रश्न:5.आप गणित में त्रुटियों से कैसे बचते हैं? (How do you avoid errors in math?):

उत्तर:बहुत सीधे शब्दों में कहें गणना में मूर्खतापूर्ण गलतियों से बचना,गणितीय अवधारणाओं का एक गहन अभ्यास भूलों को काफी कम करने के लिए महत्वपूर्ण है,नहीं तो पूरी तरह से।
आपके द्वारा गणना की गई हर चीज को डबल-चेक करने की आदत डालें ताकि आप त्रुटियों की संख्या को कम कर सकें।
सबसे पहले,उच्च गुणवत्ता वाले पेन या पेंसिल का उपयोग करें।

प्रश्न:6.मैथ्स में छात्र मूर्खतापूर्ण गलतियां क्यों करते हैं? (Why do students make silly mistakes in maths?):

उत्तर:छात्रों को एक कारण के लिए मूर्खतापूर्ण गलतियां करते है
अक्सर, गणित में,इसके परिणामस्वरूप किसी समस्या को ठीक से खत्म करने में विफलता हो सकती है;वे x के लिए हल हो सकता है लेकिन फिर y के लिए हल करने के लिए भूल जाते हैं।भौतिकी में,एक छात्र इकाई दिए बिना एक जवाब लिख सकता है ।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित में अभ्यास की कमी के कारण त्रुटियाँ (Errors Due to Lack of Practice in Math),मैथेमेटिक्स में अभ्यास की कमी के कारण त्रुटियाँ (Errors Due to Lack of Practice in Mathematics) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

Errors Due to Lack of Practice in Math

गणित में अभ्यास की कमी के कारण त्रुटियाँ
(Errors Due to Lack of Practice in Math)

Errors Due to Lack of Practice in Math

गणित में अभ्यास की कमी के कारण त्रुटियाँ (Errors Due to Lack of Practice in Math) अक्सर देखने में आती है।
अन्य विषयों के बजाय गणित में अभ्यास कार्य बहुत ही आवश्यक है।

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