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Influence of Habits in Study of Maths

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1.गणित के अध्ययन में आदतों का प्रभाव (Influence of Habits in Study of Maths),गणित के अध्ययन हेतु आदतों को कैसे सुधारें? (How to Improve Habits for Studying Mathematics?):

  • गणित के अध्ययन में आदतों का प्रभाव (Influence of Habits in Study of Maths) सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही हो सकता है।अच्छी आदतों जैसे समय पर गणित का कोर्स करना,विवेक का प्रयोग,सतर्क,सजग रहना,गणित के सवालों का बार-बार अभ्यास करना इत्यादि आदतों से गणित में सफलता प्राप्त होती है।जबकि बुरी आदतों जैसे समय को व्यर्थ नष्ट करना,समय पर गणित कोर्स को समाप्त न करना,आलस्य करना,निराश होना,अकर्मण्य बने रहना इत्यादि बुरी आदतों से गणित में असफलता हाथ लगती है।
  • गणित के छात्र-छात्राओं को अच्छी आदतों का निर्माण करना चाहिए और बुरी आदतों का निर्माण नहीं करना चाहिए।अब हमें पहले यह समझ लेना चाहिए कि आदतों का निर्माण कैसे होता है और वे हमें किस प्रकार प्रभावित करती हैं?वातावरण तथा संगति से आदतों का निर्माण होता है।जब हम किसी कार्य को बार-बार करते हैं तो आदतों का निर्माण होता है और आदतों से संस्कार निर्मित होते हैं।हमारे संस्कार अन्तर्मन (सूक्ष्म शरीर) पर अंकित होते रहते हैं।हमारे कार्य इन संस्कारों से प्रभावित होते हैं।संस्कारों से हमारा मन प्रभावित और नियंत्रित होने के साथ-साथ निर्देशित भी होता है।जब तक हमें बुरी आदतों का बोध नहीं होता है तब तक उससे प्रभावित और निर्देशित होकर कार्य करते रहते हैं।बुरी आदतों का बोध अनुभव सिद्ध ज्ञान से होता है।
  • बुरी आदतों तथा बुरे संस्कारों को बदलना आसान नहीं होता है।जैसे धीरे-धीरे बुरी आदतों और बुरे संस्कारों का निर्माण होता है वैसे सुदृढ़ संकल्पशक्ति और धैर्य के साथ बुरी आदतों व बुरे संस्कारों को छोड़ना होगा।बुरी आदतों को छोड़ने के लिए विवेक पूर्वक विचार करके अच्छी आदतों को ग्रहण करना होगा और बुरी आदतों को छोड़ना होगा।
  • दूसरा उपाय यह करना होगा कि अच्छे मित्रों व लोगों की संगति करनी होगी तथा बुरे मित्रों व लोगों की संगति छोड़ना होगा।
    तीसरा उपाय यह है कि हमेशा अपने आपको गणित का अध्ययन तथा अन्य विषयों के अध्ययन,दैनिक नित्यकर्मों,पारिवारिक कार्यों को करने में व्यस्त रखना होगा अर्थात् फालतू कार्यों में समय देना बंद करना होगा,फालतू बैठे रहना बंद करना होगा।क्योंकि फालतू बैठे रहते हैं तो बुरे संस्कारों से प्रभावित और निर्देशित मन बुरे कार्यों में लिप्त हो जाता है।
  • हालांकि आदतें चाहे बुरी हो अथवा अच्छी हो उसे हम बंधन में पड़ जाते हैं।इसलिए आदतों के गुलाम नहीं बल्कि मालिक बनकर रहना होगा।
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2.अध्ययन कार्य में आदतों का प्रभाव (Influence of Habits in the Study Task):

  • गणित में सफलता प्राप्त करने के लिए अथवा गणित का अध्ययन करने के लिए छात्र-छात्राओं को बहुत सतर्क व सजग रहना चाहिए।विद्यार्थी काल पूरे जीवन की नींव का कार्य करता है इसलिए विद्यार्थी जीवन अमूल्य है।उसे बुरी आदतों का दास बनाने से पूरा जीवन बर्बाद हो जाता है।बुरी आदतों के चंगुल में फंसकर विद्यार्थी बहुत बड़ा संकट मोल ले लेता हैं।बुरी आदतों वाले विद्यार्थी के जीवन का अंत कैसे होता है इसे आप लोग भली-भांति जानते हैं।
  • बुरे व्यसनों में फंसकर विद्यार्थी स्वयं का तो अहित करता ही है साथ ही दूसरों का भी अहित करता है।लोग ऐसे व्यक्तियों से नफरत और घृणा करते हैं। लेकिन अच्छी आदतों वाले विद्यार्थी को सब पसंद करते हैं।उसे आदर और सम्मान मिलता है।सभी ऐसे विद्यार्थी को प्यार करते हैं।वस्तुतः सद्गुणों का विकास अच्छी आदतों के निर्माण से ही होता है।यदि विद्यार्थी शिक्षकों व माता-पिता तथा बड़ों का सम्मान नहीं करते हैं तो उनमें विनम्रता नहीं आएगी,अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करेंगे तो गणित का अध्ययन तथा अन्य विद्याओं को नहीं सीख सकेंगे।अध्ययन करने के प्रति रुचि व लगन नहीं होगी तो अध्ययन कार्य को पूर्ण नहीं कर सकेंगे और न ही अध्ययन में पूर्ण दक्षता हासिल कर सकेंगे।

3.समय पर अध्ययन कार्य करने की आदत (The Habit of Studying on Time):

  • समय पर अध्ययन कार्य करने का तात्पर्य है कि समय का सदुपयोग,समय के एक-एक क्षण का उपयोग करना,समय पर अध्ययन कार्य को निपटाना,अन्य विद्यार्थियों तथा व्यक्तियों के समय को नष्ट न करना,समय के मूल्य को पहचानना,से है।विद्यार्थी के लिए सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण समय ही है।विद्यार्थी जीवन में अध्ययन कार्य करने,विभिन्न कला-कौशल सीखने,अध्ययन तथा कला-कौशल की तकनीक सीखने,सामाजिक,पारिवारिक शिष्टाचार की बातें सीखने तथा व्यावहारिक बातों को सीखने के लिए समय की कमी हमेशा खलती है।जो विद्यार्थी उपर्युक्त बातों को समझता है और सीखता है वह समय के एक-एक क्षण का सदुपयोग करता है।

4.विद्यार्थी दूरदर्शी बने (Students Become Visionary):

  • गणित के विद्यार्थी अथवा अन्य विद्यार्थी  यदि दूरदर्शी हों तो वे अवसर को पहचान लेते हैं।अध्ययन कार्य के दूरगामी परिणामों को पहचान लेना,अध्ययन कार्य के उद्देश्य को ही नहीं बल्कि अध्ययन कार्य के परिणाम पर भी विचार करना,कब अध्ययन करना चाहिए,कब अध्ययन कार्य नहीं करना चाहिए,मौज-मस्ती पर ही नहीं बल्कि उसके अन्य पहलुओं पर,आज को नहीं कल को पहचानने की क्षमता रखता है,पास ही नहीं दूर को भी देख सकता है,आंखों से नहीं अपने ज्ञान चक्षुओं से भी देख सकता है,प्रत्यक्ष को ही नहीं अप्रत्यक्ष को भी देख सकता है ऐसा विद्यार्थी दूरदर्शी होता है।
  • यदि विद्यार्थी में दूरदर्शिता नहीं है तो विद्यार्थी जीवन में ही दूरदर्शी होने की दक्षता हासिल करने का समय होता है।जो विद्यार्थी,विद्यार्थी जीवन को काम,क्रोध,लोभ (स्वार्थ),मोह,प्रमाद,ईर्ष्या इत्यादि से ग्रस्त होता है तथा इन विकारों को दूर करने का प्रयास नहीं करता है वह दूरदर्शी नहीं हो सकता है। ऐसा विद्यार्थी,विद्यार्थी जीवन में ही नहीं बल्कि आगामी जीवन में भी संकट में फंसता चला जाता है।

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5.विद्यार्थी सक्रिय बनें (Be Students Active):

  • यदि विद्यार्थी अपने अध्ययन कार्य में सक्रिय नहीं रहेंगे तो अध्ययन कार्य को पूरा नहीं कर पाएंगे।जो विद्यार्थी सक्रिय नहीं होता है वह आलसी,निराश और अकर्मण्य बन जाता है।आज की दुनिया में जो विद्यार्थी सक्रिय नहीं होते हैं वे पिछड़ जाते हैं क्योंकि चाहे गणित का कोर्स हो अथवा अन्य विषयों का कोर्स हो उसे सक्रिय न रहने पर समय पर पूरा नहीं जा सकता है।सक्रिय कैंडिडेट की हर जगह डिमांड होती है।बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी सक्रिय तथा गतिशील युवाओं को ही भर्ती करती है। सक्रिय और गतिशील (Dynamic) युवाओं की मांग रहती है।जो सुस्त व आलसी रहते हैं वे पिछड़ जाते हैं,जाॅब में आगे नहीं बढ़ सकते हैं।

6.विद्यार्थी अध्ययन के साथ स्किल भी सीखे (Students Should also Learn Skills with Study):

  • केवल अध्ययन करने से किसी भी विषय का सैद्धांतिक ज्ञान प्राप्त होता है।जब तक आप संबंधित विषय में स्किल का निर्माण नहीं करते हैं तब तक आप आगे विकास नहीं कर सकते हैं।अन्य सभी गुण हों परंतु आपमें स्किल नहीं है,आपने स्किल का निर्माण नहीं किया है तो बाकी सारे गुणों पर पानी फिर जाता है।इसलिए अध्ययन करने के साथ-साथ अपने अंदर स्किल का निर्माण भी करें। जो कैंडिडेट किसी कार्य को पूर्ण कुशलता से करता है उसका महत्त्व बढ़ जाता है।अपने अंदर पूर्ण कुशलता से कार्य करने की आदत का निर्माण करें।

7.बुरी आदत का दृष्टान्त (Parable of Bad Habit):

  • गणित के विद्यार्थी रमेश में एक बुरी आदत थी।वह रोजाना दिन में सोता था।दिन में सोने से आलस्य आता है,शरीर में सुस्ती रहती है,शरीर में चुस्ती और फुर्ती नहीं रहती है।सोने के बाद उठने पर किसी कार्य को पूर्ण ऊर्जा के साथ नहीं कर पाता है,दिमाग में भारीपन महसूस करता है।जबकि गणित विषय में कठिन परिश्रम तथा संपूर्ण रूप से सक्रिय रहना पड़ता है।
  • दिन-प्रतिदिन उसके सोने का समय बढ़ता गया।अब वह रोजाना दो-तीन घंटे सोता था।लेकिन सोने के बाद भी वह ठीक से अध्ययन नहीं कर पाता था। अब उसे अनुत्तीर्ण होने का डर सताने लगा।उसने इससे मुक्ति पाने के लिए अपने मित्र सुरेश के साथ पढ़ने की योजना बनाई।उसने सुरेश से कहा कि वह उसके साथ पढ़ना चाहता है।सुरेश ने रमेश से कहा कि तुम्हारी दिन में सोने की आदत है।यह आदत मुझे भी पड़ जाएगी।तब रमेश ने कहा कि मैं सोऊँगा तो गणित और अन्य विषयों को पढ़ नहीं पाऊँगा,तब मैं फेल (Fail) नहीं जाऊंगा क्या? केवल तुम्ही फेल होते तब तो कोई बात नहीं है।
  • सुरेश ने रमेश के तर्क को सुनकर हाँ कर दी।दोनों साथ-साथ पढ़ने लग गए।धीरे-धीरे सुरेश को भी सोने की आदत पड़ गई क्योंकि संगत का असर तो पड़ता ही है।वार्षिक परीक्षा का परिणाम आया तो दोनों अनुत्तीर्ण (Fail) हो गए।
  • सीख सुहानी:हमेशा अच्छी संगत में तथा अच्छी आदत वाले विद्यार्थियों के साथ ही रहें।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में गणित के अध्ययन में आदतों का प्रभाव (Influence of Habits in Study of Maths),गणित के अध्ययन हेतु आदतों को कैसे सुधारें? (How to Improve Habits for Studying Mathematics?) के बारे में बताया गया है।

8.छात्र द्वारा गणित के अध्ययन से बीमार (हास्य-व्यंग्य) (Ill From Studying Mathematics by Student) (Humour-Satire):

  • रमन की गर्लफ्रेंड (डाॅक्टर से):मेरे मित्र को गणित पढ़ने की इतनी धुन सवार है कि वह रात-दिन गणित पढ़ता रहता है।अब यह बीमार है।
  • डाॅक्टर (रमन की गर्लफ्रेंड से):वाकई में रमन सख्त बीमार है।इन्हें आराम और चुप रहने की जरूरत है।ये नींद की गोलियां रखिए।
  • रमन की गर्लफ्रेंड:ये गोलियां मैं इन्हें कब-कब दूं।
  • डॉक्टर (रमन की गर्लफ्रेंड से):ये रमन को खिलाने के लिए नहीं है बल्कि आपको खानी है।

9.गणित के अध्ययन में आदतों का प्रभाव (Influence of Habits in Study of Maths),गणित के अध्ययन हेतु आदतों को कैसे सुधारें? (How to Improve Habits for Studying Mathematics?) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.सफलता किस पर निर्भर करती है? (Success Depends on):

उत्तर:जीवन में सफलता के लिए अच्छी आदतों का निर्माण करना और बुरी आदतों से बचना आवश्यक है।अच्छी आदतों से विद्यार्थी उपयोगी अध्ययन कार्य करते हैं।अच्छी आदतों से अध्ययन कार्य पूर्ण दक्षता के साथ किया जाता है।यदि अध्ययन कार्य को पूर्ण मनोयोग के साथ करने की आदत नहीं है तो सफल सफलता संदिग्ध हो जाती है।

प्रश्न :2.अच्छी अच्छी और बुरी आदतें कैसे पैदा होती हैं? (How Good and Bad Habits are Born?):

उत्तर:विद्यार्थी संगति से ही अच्छी और बुरी आदतें सीखते हैं।अच्छे लोगों के साथ बैठेंगे तो अच्छे आदतें सीखेंगे और इससे अच्छे संस्कारों का निर्माण होगा।बुरी संगति से बुरी आदतें सीखेंगे।इसलिए अच्छे लोगों के साथ ही संगति करें और सफलता प्राप्त करने की कोशिश करें।

प्रश्न:3.संस्कारों का निर्माण कैसे होता है? (How Rites are Created):

उत्तर:जैसे हमारे विचार होते हैं वैसे ही हमारे कृत्य और आचरण होगा और आचरण से आदतें,स्वभाव और संस्कारों का निर्माण होता है।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित के अध्ययन में आदतों का प्रभाव (Influence of Habits in Study of Maths),गणित के अध्ययन हेतु आदतों को कैसे सुधारें? (How to Improve Habits for Studying Mathematics?) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Influence of Habits in Study of Maths

गणित के अध्ययन में आदतों का प्रभाव
(Influence of Habits in Study of Maths)

Influence of Habits in Study of Maths

गणित के अध्ययन में आदतों का प्रभाव (Influence of Habits in Study of Maths)
सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही हो सकता है।
अच्छी आदतों जैसे समय पर गणित का कोर्स करना,विवेक का प्रयोग,सतर्क,सजग

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