Menu

Variable in Mathematics

1.गणित में चर (Variable in Mathematics),गणित में चर राशियाँ (Variable Quantities in Mathematics):

  • गणित में चर (Variable in Mathematics) को समझने से पूर्व राशि को समझना आवश्यक है।
    राशि (Quantity):जिन पर भी गणित की संक्रियाएँ जोड़,गुणा,भाग,बाकी की जा सकती है राशियाँ कहलाती है।उदाहरणार्थ लंबाई,चौड़ाई,आयतन,क्षेत्रफल,समय,दूरी तापक्रम इत्यादि।राशियों को चर (स्वतन्त्र चर तथा आश्रित चर) एवं अचर (निरपेक्ष अचर तथा स्वेच्छ अचर) में वर्गीकृत किया जा सकता है।
  • चर (Variable):वह राशि जो किसी गणितीय संक्रिया में किसी निर्दिष्ट समुच्चय से कोई भी मान ग्रहण कर सकती है,चर कहलाती है।दूसरे शब्दों में चर राशि (Variable) किसी विशिष्ट समुच्चय के अवयवों को दर्शाती है।इस समुच्चय को प्रान्त (Domain) अथवा प्रतिस्थापित समुच्चय (Replacement Set) कहते हैं।साधारणतः इन्हें x,y,z इत्यादि से दर्शाते हैं।चर दो प्रकार के होते हैं:
  • (i)स्वतंत्र चर (Independent Variable):वह राशि जो बिना किसी प्रतिबंध के निर्दिष्ट समुच्चय से कोई भी मान ग्रहण कर सकती है,स्वतंत्र चर कहलाती है।
  • (ii)आश्रित चर (Dependent Variable):यदि चर राशि दूसरी चर राशि पर निर्भर करती है,तो एक को आश्रित तथा दूसरी को स्वतंत्र चर राशि कहते हैं।उदाहरणार्थ:y=x^{2}+2x+1 में y आश्रित चर तथा x स्वतंत्र चर राशि है।
  • आपको यह जानकारी रोचक व ज्ञानवर्धक लगे तो अपने मित्रों के साथ इस गणित के आर्टिकल को शेयर करें।यदि आप इस वेबसाइट पर पहली बार आए हैं तो वेबसाइट को फॉलो करें और ईमेल सब्सक्रिप्शन को भी फॉलो करें।जिससे नए आर्टिकल का नोटिफिकेशन आपको मिल सके । यदि आर्टिकल पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें जिससे वे भी लाभ उठाए । आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट करके बताएं।इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

Also Read This Article:Development of Number System

(1.)चर राशियों का इतिहास (History of Variables):

  • गणित दैनिक जीवन से जुड़ा हुआ है।दैनिक जीवन में बहुत जगह हम गणित का प्रयोग करते हैं।अज्ञात या चर राशियों को रोजाना कहीं न कहीं इसका प्रयोग करते रहते हैं।उदाहरणार्थ:दूध वाले का हिसाब करते समय,बस में यात्रा करते समय टिकट के पैसे देकर बाकी पैसे लेना,बस में यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या हर बस स्टॉप पर घटती बढ़ती रहती है।बस की गति बदलती रहती है। बिजली की दरें बदलती रहती हैं।मौसम का तापक्रम परिवर्तित होता रहता है।इस प्रकार चर राशियाँ हमारे दैनिक जीवन में चारों ओर बसी हुई है।किसी परिवार की मासिक आमदनी,किसी व्यक्ति की मासिक आमदनी,व्यापार में लाभ-हानि,वायु का तापमान,प्रतिवर्ष होने वाली वर्षा,पेड़-पौधे की लंबाई इत्यादि सभी चर राशियों की सीमा में ही आती है।
  • हिंदू गणितज्ञों ने सर्वप्रथम अज्ञात या चर राशियों की इसी महत्ता को समझकर उनके लिए संकेतों का प्रयोग किया था।300 ईसा पूर्व से भी बहुत पहले की एक हस्तलिपि में यावत-तावत् शब्द का प्रयोग अज्ञात राशि के लिए किया गया था।यावत का अर्थ जितना तथा तावत् का अर्थ उतना के अर्थ में किया जाता था।
  • आधुनिक खोजों से पता चला है कि बेबीलोन (वर्तमान ईराक) निवासियों ने चर राशि वाले गणितीय प्रश्नों के हल ढूंढ लिए थे यद्यपि ऐसी राशियों को व्यक्त करने के लिए वे शब्दों का ही सहारा लेते थे।यही कारण है कि उनके बीजगणित को ‘रेटोरिकल अलजेब्रा’ की संज्ञा दी गई।1600 ईस्वी पूर्व में मिस्र देश के पेपीरस नामक पत्र पर बीजगणित के बहुत से प्रश्न उल्लेखित हैं जिनमें अज्ञात राशि को ‘ढेरी’ के अर्थ में प्रयुक्त होने वाले हाऊ की संज्ञा दी गई है।
  • आर्यभट प्रथम,ब्रह्मगुप्त तथा भास्कराचार्य द्वितीय कुछ ऐसे प्रसिद्ध हिंदू गणितज्ञ थे जिन्हें बीजगणित अर्थात् चर राशियों की खोज और उसके विकास का श्रेय जाता है।बीजगणित का शाब्दिक अर्थ है ‘अक्षरों का गणित’।
    इस विषय क्षेत्र में फिर बहुत कम प्रगति हो पाई जब तक की तीसरी सदी के यूनानी गणितज्ञ डायोफेंटस का पदार्पण नहीं हुआ।उसने गणितीय सवालों को समीकरणों का रूप दिया।इनमें अज्ञात राशि को
  • \Sigma{} (सिग्मा) द्वारा  दर्शाया गया था।उसने संकेताक्षरों की एक रोचक पद्धति का विकास भी किया जिसमें शब्दों का बस पहला अक्षर ही लिया जाता और शेष निरर्थक अक्षरों को छोड़ दिया जाता था।सोलहवीं शताब्दी में फ्रेंकाॅइस वियता ने अंग्रेजी के व्यंजनों (a,e,i,o,u) का प्रयोग अज्ञात राशियों को दर्शाने तथा स्वरों (b,c,d,e,f,g) आदि का प्रयोग अचर या अपरिवर्तनीय संख्याओं के लिए किया।सोलहवीं शताब्दी के महान फ्रांसीसी दार्शनिक रेने देकार्त ने वर्णमाला के शुरु-शुरु के अक्षरों (a,b,c) आदि को अचर राशियों को व्यक्त करने के प्रयोग करने का सुझाव रखा।अज्ञात या चर राशियों को अक्षरों द्वारा व्यक्त करने की व्यवस्था ही बाद में अंकगणित की मूलधारणाओं के व्यापकीकरण तथा गणित के उन्नयन में महत्वपूर्ण साबित हुई।
  • ‘अलजेब्रा’ शब्द का उद्भव मोहम्मद इब्न मूसा अल-ख्वारिज्मी नाम के फारसी व्यक्ति जो नवीं शताब्दी में हुआ था,के बीजगणित के लिखे एक ग्रंथ से हुआ।उसने अरबी में अल-जब्र या अल् मुकाबला नामक कृति का सृजन किया जिसका अर्थ था ‘पुन: स्थापना तथा समानयन’।अल-जब्र या पुनः स्थापना ऋण संख्याओं को समीकरण के दूसरी तरफ ले जाकर उन्हें धन संख्याओं में बदलने की क्रिया का सूचक था।जब अरबवासी स्पेन गए तो वहां अपने साथ इस शब्द को भी लेते गए। कालांतर में अल-जब्र बदलकर अलजेब्रा हो गया और इस शब्द का प्रयोग किसी संक्रिया विशेष के लिए नहीं बल्कि बीजगणित में प्रयुक्त होने वाली विभिन्न संक्रियाओं के लिए किया जाने लगा।

Also Read This Article:Congruence and Similarity

(2.)चर राशियों का बीजगणित में प्रयोग (Use of variable quantities in algebra):

  • चर राशियों का गणितीय क्रमो,गुणधर्मों, समता,संबंधों,समीकरणों के निकाय,अनुक्रम इत्यादि में किया जाता है।(i)a+b=b+a (योग का क्रम-विनिमय नियम) (Commutative Law of Addition)
  • (ii)(a+b)+c=a+(b+c) (योग का साहचर्य नियम) (Associative Law of Addition)
  • (iii)a×b=b×a (गुणन का क्रम-विनिमेय नियम) (Commutative Law of Multiplication)
  • (iv)(a×b)×c=a×(b×c) (गुणन का साहचर्य नियम) (Associative Law of Multiplication)
  • (v)a×(b+c)=a×b+a×c (गुणन का वितरण नियम) (Distributive Law of Multiplication)
  • गणितीय क्रियाओं के नियम दैनिक जीवन में हमारे काम आते हैं जैसे 75,100,125,150 की राशियों को जोड़कर हिसाब निकालना है अर्थात् हमें 75+100+125+150 संख्याओं का जोड़ प्राप्त करना है।बारी-बारी से दो संख्याओं को जोड़कर योगफल की क्रिया इस तरह संपन्न होती है:
    75+100+125+150=(75+125)+(100+150)
    =200+250
    =450
  • इसी प्रकार (75+100)+(125+150)
    =175+275
    =450
  • इस प्रकार संख्याओं को उल्टे-सीधे किसी भी क्रम में जोड़ सकते हैं।योग के क्रम-विनिमय तथा साहचर्य नियमों का यहां खुलकर हालांकि अंत:प्रज्ञावश ही प्रयोग हुआ है।दैनिक जीवन में योग के साथ अक्सर ऐसा ही होता है।गुणन के साथ भी यही सत्य है।दो संख्याओं का गुणन 6×15 साधारणतया 15×6 लिखकर किया जाता है क्योंकि गुणनफल सारणी द्वारा इसका मान निकालना कहीं आसान है।
  • समता संबंध:किसी बीजीय व्यंजक में आने वाले अक्षरों को जब संख्याओं में बदला जाता है तो हमें उस व्यंजक का मान प्राप्त होता है।इस तरह से अगर दो व्यंजकों का मान निकाला जाए तो संयोग से वे दोनों बराबर भी हो सकते हैं।ऐसे व्यंजकों को तुल्य (समान मान वाले) व्यंजक कहा जाता है। गणित की भाषा में हम इस समता संबंध को एक समीकरण द्वारा व्यक्त किया जाता है।
  • उदाहरणार्थ:a×(b+c)=a×b+a×c
    यदि a=5,b=4,c=6 लें तो:
    a×(b+c)=5×(4+6)=5×10=50 तथा
    a×b+a×c=5×4+5×6=20+30=50
  • तुल्य व्यंजकों के अनेक प्रकार होते हैं।हमारे दैनिक जीवन तथा विज्ञान और गणित के क्षेत्र में इनका व्यापक रूप से प्रयोग होता है।
  • उदाहरणार्थ:
    एक भवन निर्माण में आधे कारीगर 3 माह बाद छोड़ गए।फिर 4 माह बाद 20 कारीगर जुड़ गए।6 माह बाद 5 कारीगर और जुड़ गए।अन्त में प्रारंभिक कारीगरों की संख्या प्रारम्भ में कारीगरों की संख्या जितनी रह गई।प्रारंभ में कारीगरों की संख्या कितनी थी?
    हल:माना प्रारंभ में कारीगर थे=x
    \frac{x}{2}+20+5=x
  • \Rightarrow x-\frac{x}{2}=25
    \Rightarrow \frac{x}{2}=25
    \Rightarrow x=50
  • समीकरण के निकाय:अपनी प्रसिद्ध पुस्तक लीलावती में एक सवाल दिया है:”हे छात्र अगर हल कर सको तो हल करके बताओ कि वे दो संख्याएँ कौन-सी है जिनका योग 101 तथा अंतर 25 है?”
    हल:माना वे दो संख्याएं x व y है।
    तब x+y=101  …..(1)
    x-y=25      ………(2)
    (1) व (2) को जोड़ने पर:
    2x=126
    \Rightarrow x=63
    x का मान समीकरण (1) में रखने पर:
    63+y=101
    \Rightarrow y=101-63
    \Rightarrow y=38
    अनुक्रम के पदों को जोड़ना:
  • उदाहरण:छोटे बच्चों की एक कक्षा में शिक्षक ने छात्रों को 1 से 100 तक की संख्याओं को जोड़ने का मुश्किल प्रश्न दे दिया।शिक्षक को उम्मीद थी कि जब बच्चे उस सवाल को हल करने में व्यस्त होंगे तो उसे कुछ समय का आराम मिल जाएगा।मगर उसे बहुत आश्चर्य हुआ जब अपना सवाल अभी उसने मुश्किल से लिखा ही था कि एक छात्र ने स्लेट पर झट उत्तर लिखकर दिखा दिया।सवाल का सही जवाब था 5050।यह छात्र और कोई नहीं बल्कि कार्ल फ्रेडरिक गौस (Carl Friedrich Gauss) था जो बाद में चलकर महान गणितज्ञ बना।
  • असल में संख्याओं को सीधे-सीधे जोड़ने के बजाए गौस ने (2+99)+(3+98)+….यानी उसने भांप लिया कि इस तरह संख्याओं के 50 जोड़े बन रहे थे जिनमें से हर एक का जोड़ 101 था;अतः सीधे-सीधे योगफल निकल आया 50×101=5050।दरअसल इसी विधि का प्रयोग किसी समांतर श्रेणी का जोड़ निकालने के लिए किया जाता है।किसी गणित श्रेणी का योग जिसका प्रथम पद a तथा कुल पदों की संख्या n तथा पदों के मध्य का सामान्य अंतर d है तो निम्न सूत्र का प्रयोग किया जाता है:
    S_{n}=\frac{n}{2}\left[2a+\left(n-1\right)d\right]
    अतः 1 से 100 तक का योग में a=1,n=100,d=1 रखें तो
    S_{100}=\frac{100}{2}\left[2+99\right]
    =50×101
    =5050

(3.)वास्तविक जीवन में गणित (Mathematics in real life):

  • गणित को एक ऐसा दर्पण मान सकते हैं जिसमें जीवन का प्रतिबिंब झलकता है।किसी भी वास्तविक समस्या का समाधान ढूंढने के लिए ‘आश्चर्य नगरी में एलिस’ की तरह गणितज्ञ भी गणित रूपी दर्पण में बनने वाले जीवन के ‘छाया संसार’ (प्रतिबिंब) में विचरण करते हुए अपनी कल्पना के बल पर उस समस्या का हल निकाल कर फिर उस हल के साथ वास्तविक संसार में लौट सकता है।
  • उदाहरणार्थ:किसी छात्रावास का मासिक किराया ₹7000 से बढ़कर ₹9000 हो जाता है जब उसमें रहने वाले छात्रों की संख्या 12 से बढ़कर 16 हो जाती है।छात्रावास को किराए के रूप में हर महीने एक निश्चित राशि चुकानी पड़ती है तथा रोजमर्रा के खर्च के रूप में भी प्रतिछात्र कुछ राशि खर्च करनी पड़ती है।बताइए किराया और प्रतिछात्र खर्च कितना है?
    हल:कुल खर्च x=a×b+c
    7000=12a+c   ….(1)
    9000=16a+c    ….(2)
    युगपत समीकरणों को हल करने पर:
    4a=2000
    \Rightarrow a=500
    a का मान समीकरण (1) में रखने पर:
    7000=12×500+c
    c=7000-6000=1000
    अतः प्रति छात्र पर खर्च=500,किराया=1000
  • विभिन्न चरणों का प्रयोग करके उपर्युक्त समीकरण x=ab+c बनाया।जो कि मूलतः सवाल का गणितीय प्रतिरूप ही हैं।इस विधि को गणितीय प्रतिरूप कहते हैं।यह वास्तविक जीवन से जुड़े सवालों को हल करने में एक सशक्त साधन प्रदान करता है।कंप्यूटरों द्वारा आजकल किसी गणितीय प्रतिरूप को उसमें आने वाली चर राशियों के मानों को बदल कर जांचा-परखा जा सकता है और इस तरह सबसे संगत मॉडल का चयन किया जा सकता है।इसका उपयोग मौसम विज्ञान,वैज्ञानिकी,द्रवगति विज्ञान,नाभिकीय भौतिकी,सामाजिक विज्ञान जैसे कि अर्थशास्त्र,समाजशास्त्र तथा संसार विज्ञान से संबंध जटिल समस्याओं के हल ढूंढने में किया जा सकता है।
  • उपर्युक्त विवरण में गणित में चर (Variable in Mathematics),गणित में चर राशियाँ (Variable Quantities in Mathematics) के बारे में बताया गया है।

2.गणित में चर (Variable in Mathematics),गणित में चर राशियाँ (Variable Quantities in Mathematics) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.गणित में चर क्या है? (What is Variable in Mathematics?):

उत्तर:गणित में,एक चर एक राशि है जो कि बदल सकती हैं या किसी भी गणितीय वस्तु के लिए एक प्रतीक और प्लेसहोल्डर है।विशेष रूप से,एक चर एक संख्या,एक वेक्टर,एक मैट्रिक्स,एक फलन, एक फलन का मान (the argument of a function),एक सेट या एक सेट के एक अवयव का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। 

प्रश्न:2.गणित में एक चर क्या है? (What is a variable in math?):

उत्तर:चर,बीजगणित में,एक प्रतीक (आमतौर पर एक अक्षर) एक समीकरण में एक अज्ञात संख्यात्मक मूल्य के लिए खड़ा है।आमतौर पर उपयोग किए जाने वाले चरों में x और y (वास्तविक संख्या वाले अज्ञात),z (सम्मिश्र-संख्या वाले अज्ञात),t (समय), r (त्रिज्या) और s (चाप लंबाई) शामिल हैं।

प्रश्न:3.गणित में चर और उदाहरण क्या है? (What is variable and example in mathematics?):

एक चर कोई भी विशेषता,संख्या या राशि (quantity) है जिसे मापा या गिना जा सकता है। एक चर को डेटा आइटम भी कहा जा सकता है।
गणित में,एक चर एक वर्णमाला या शब्द है जो अज्ञात संख्या या अज्ञात का प्रतिनिधित्व करता है।उदाहरणार्थ:y=mx+c में y तथा x चर है।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित में चर (Variable in Mathematics),गणित में चर राशियाँ (Variable Quantities in Mathematics) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Variable in Mathematics

गणित में चर (Variable in Mathematics)

Variable in Mathematics

गणित में चर (Variable in Mathematics) को समझने से पूर्व राशि को समझना आवश्यक है।
राशि (Quantity):जिन पर भी गणित की संक्रियाएँ जोड़,गुणा,भाग,बाकी की जा सकती है राशियाँ कहलाती है।

No.Social MediaUrl
1.Facebookclick here
2.you tubeclick here
3.Instagramclick here
4.Linkedinclick here
5.Facebook Pageclick here

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *