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REFERENCE BOOKS OF MATHEMATICS

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2 (1.)संदर्भ पुस्तकों की आवश्यकता (NECESSITY OF REFERENCE BOOKS):

1.गणित की सन्दर्भ पुस्तकें (REFERENCE BOOKS OF MATHEMATICS),गणित की सहायक पुस्तकें (SUPPLEMENTARY BOOKS OF MATHEMATICS):

  • गणित की सन्दर्भ पुस्तकें (REFERENCE BOOKS OF MATHEMATICS) का तात्पर्य है कि हम शिक्षा संस्थानों में स्वीकृत सिलेबस की पाठ्यपुस्तकें के अतिरिक्त पुस्तकें पढ़ने से है।सन्दर्भ पुस्तकों का बहुत महत्त्व है।यदि हम ज्ञान प्राप्ति और व्यावहारिक ज्ञान के लिए पढ़ते हैं तो हमें विस्तृत और गहराई से अध्ययन करने की आवश्यकता होती है।सन्दर्भ पुस्तकों में विस्तृत और गहराई से किसी टाॅपिक पर सामग्री उपलब्ध हो जाती है।
  • हमारा लक्ष्य केवल परीक्षा पास करना नहीं है।बल्कि किसी भी विषय का अधिक से अधिक ज्ञान प्राप्त करना ही मुख्य लक्ष्य है।परीक्षा केन्द्रित लक्ष्य रखकर यदि हम अध्ययन करते हैं तो धीरे-धीरे हमारा दायरा संकुचित होता जाता है।हम पाठ्यपुस्तकें भी पढ़ना छोड़ते जाते हैं और सीरीज और गाइड़ों को पढ़कर पास (उत्तीर्ण) होने का प्रयास करते हैं।इस प्रकार की प्रवृत्ति हमारे जीवन के लिए घातक होती है।ऐसा करके हम डिग्री व डिप्लोमा तो प्राप्त कर सकते हैं।परन्तु जाॅब हासिल करने तथा अपने जीवन की व्यावहारिक समस्याओं को हल करने में असफल रहते हैं।
  • असफल रहने पर हम दोष अपने में ढूंढने के बजाय शिक्षकों,सरकार व शिक्षा संस्थानों तथा शिक्षा पद्धति में देखते हैं।संदर्भ पुस्तके हमें न केवल पाठ्यक्रम का विस्तृत और गहराई से ज्ञान प्रदान करने में सहायक है अपितु हमें कठिनाइयों और समस्याओं को हल करने में सक्षम करती है।इस आर्टिकल में गणित की संदर्भ पुस्तकों का महत्त्व,उनके गुण तथा उनकी उपयोगिता के बारे में बताया गया है।अन्य विषयों के बजाय गणित एक कठिन विषय समझा जाता है।इसलिए इसमें अधिक अभ्यास करने की आवश्यकता है।एक ही टॉपिक पर कठिन से कठिनतर सवालों व समस्याओं को हल करने से हमारा दिमाग खुलता है तथा विकसित होता है।आज तकनीकी युग में हम पाठ्य-पुस्तकों तथा संदर्भ पुस्तकों से दूर होते जा रहे हैं जो कि हमारे लिए नुकसानदायक है।
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(1.)संदर्भ पुस्तकों की आवश्यकता (NECESSITY OF REFERENCE BOOKS):

  • पाठ्य पुस्तकों से विभिन्न प्रकार का व्यावहारिक ज्ञान नहीं मिल पाता है।विश्व में कौन-कौनसे आविष्कार व खोजें प्रतिदिन हो रही हैं।उनमें गणित का कितना योगदान है।इसको जानने के लिए सहायक पुस्तकों की आवश्यकता होती है।इन पुस्तकों को सन्दर्भ पुस्तकें कहते हैं।विभिन्न विषयों के लिए विभिन्न पुस्तकों की आवश्यकता होती है।उच्चकोटि की गणित को जानने के लिए उच्चकोटि की सहायक पुस्तकों की आवश्यकता होती है।प्रत्येक व्यक्ति को हमेशा नई खोजों के संबंध में जानने की उत्सुकता रहती है।वे प्रत्येक प्रकार के हल जानने के लिए उचित संदर्भ पुस्तकों का सहारा लेते हैं।उनको जानने के लिए तकनीकी पुस्तकों की आवश्यकता है जिनसे छात्र-छात्राएं अध्ययन करके गणित के तथ्यों एवं उनके सिद्धांतों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं।कुछ पुस्तकें मासिक निकलती हैं तथा कुछ वार्षिक उनमें नई-नई खोजों का समावेश होता है।सभी खोजों में गणित अपना एक विशिष्ट स्थान रखती है।इसलिए गणित विषय में नई खोजों के बारे में इन सन्दर्भ पुस्तकों का होना अति आवश्यक है।इनको पढ़कर रहस्य जानकर छात्र-छात्राएं अपना विशिष्ट स्थान बना सकता है।

(2.) संदर्भ पुस्तकों की विशेषताएं तथा उनके प्रयोग (CHARACTERISTICS AND USE OF SUPPLEMENTARY BOOKS):

  • प्राचीन काल में गणित को सभी विषयों में सबसे सर्वश्रेष्ठ माना गया था।प्लेटो ने अपने विद्यालय के बाहर बोर्ड पर लिख दिया था कि बिना रेखागणित (Geometry) के ज्ञान के इस विद्यालय में प्रवेश का विचार न करें।इससे पता चलता है कि रेखागणित का कितना महत्व था।इसलिए गणित को सर्वश्रेष्ठ मानकर सबसे ऊंचा स्थान दिया गया। नेपोलियन ने जो एक शक्तिशाली शासक और सर्वश्रेष्ठ योद्धा था,गणित के संबंध में कहा था कि गणित से ही देश का विकास हो सकता है।

(3.)संदर्भ पुस्तकों की विशेषताएं (CHARACTERISTICS OF REFERENCE BOOKS):

  • संदर्भ पुस्तके निम्न प्रकार से सहायक है:
  • (i)प्रतिदिन होने वाली नई खोजों के बारे में ज्ञान मिलता है।
  • (ii)पाठ्यक्रम के अतिरिक्त ज्ञान मिलता है।
  • (iii)सहायक पुस्तकों से गणित के आमोद-प्रमोद के बारे में छात्रों को जानकारी मिलती है।
  • (iv)गणित संबंधी प्रैक्टिकल पाठों का ज्ञान संदर्भ पुस्तकों में होता है।
  • (v)संदर्भ पुस्तकों से व्यावहारिक गणित का ज्ञान होता है।

(4.)संदर्भ पुस्तकों का प्रयोग (USE OF REFERENCE BOOKS):

  • संदर्भ पुस्तकों का प्रयोग निम्न प्रकार से होता है:
  • (i) पाठ्य पुस्तक में दिए पाठ का ज्ञान सन्दर्भ पुस्तकों से आसानी से हो जाता है जिसको समझाने के लिए शिक्षक को आसानी होती है।
  • (ii)प्रत्येक विषय की संदर्भ पुस्तकों से पाठ्यक्रम के संबंध में छात्र-छात्राओं को प्रेक्टिकल जानकारी होती है।
  • (iii)सन्दर्भ पुस्तकों में पाठ को रोचक एवं सरल ढंग से समझाया जाता है जिससे छात्र बिना शिक्षक के आसानी से समझ लेते हैं।
  • (iv)संदर्भ पुस्तकों से विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि का विकास होता है।कक्षा में गणित के प्रश्न हल करते समय ही नहीं बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में नियमितता,ईमानदारी तथा सत्यता आदि के प्रयोग में श्रद्धा रखता है।
  • (v)नवीन पत्रिकाओं तथा नये आधार पर लिखी गई पाठ्य-पुस्तकों के अध्ययन से गणित अध्यापक को नया ज्ञान मिलता है उससे वे छात्र-छात्राओं को लाभान्वित कर सकते हैं।

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(5.)सन्दर्भ पुस्तकें तथा उनकी उपयोगिता (REFERENCE BOOKS AND USES):

  • सभी विषय एक दूसरे को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से प्रभावपूर्ण बनाते हैं।परंतु गणित का सभी विषयों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध है।अन्य विषयों के साथ गणित का अपना अलग स्थान है।
  • पाठ्यक्रम के अनुसार पाठ्य-पुस्तकों को लिखा जाता है।उसके अतिरिक्त कुछ भी नहीं लिखा जा सकता है।अतिरिक्त ज्ञान के लिए सहायक पुस्तकों की आवश्यकता होती है।
  • शिक्षक को चाहिए कि वह छात्र-छात्राओं को प्रेरित करें की पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तके उनके ज्ञान को बढ़ाने के लिए होती है उनका पुस्तकालय में जाकर अध्ययन करें।
  • छोटी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए शिक्षक को चाहिए कि वह समाचार पत्रों व चित्रों द्वारा या दूरदर्शन द्वारा उनका मार्गदर्शन करें।
  • सहायक पुस्तके उनके भावी जीवन को अच्छा बनाने में सहायक होती है।
  • (i)शिक्षार्थियों को समझने रुचि एवं प्रवीणता प्राप्त होती है।
  • (ii)विषय विज्ञान में रुचि और सीखे गए ज्ञान को धारण करने में प्रवीणता होती है।
  • (iii)भारतीय गणित का आधुनिक प्रौद्योगिकी से संबंध स्थापित करने की जिज्ञासा जागृत होती है।
  • (iv) शिक्षण सामग्रीयों,विधियों,तकनीकों,कौशलों के उपयोग में कुशलता होती है।
  • (v)गणित को आकर्षक बनाने में सिद्धहस्त होती है।
  • (vi)गणित आधुनिक विचारधाराओं के संदर्भ में गणित के प्रत्ययों का पूर्ण बोध होता है।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में गणित की सन्दर्भ पुस्तकें (REFERENCE BOOKS OF MATHEMATICS),गणित की सहायक पुस्तकें (SUPPLEMENTARY BOOKS OF MATHEMATICS) के बारे में बताया गया है।

2.गणित की सन्दर्भ पुस्तकें (REFERENCE BOOKS OF MATHEMATICS),गणित की सहायक पुस्तकें (SUPPLEMENTARY BOOKS OF MATHEMATICS) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्नः1.गणित विषय में सन्दर्भ पुस्तकों का क्या महत्त्व है? (What is importance of reference books in mathematics?):

उत्तर:आधुनिक युग तकनीकी युग है।अतः रोजाना नई-नई खोजें और अनुसंधान होते रहते हैं।गणित में नई-नई खोजें होती रहती हैं।यदि इनकी जानकारी न रखी जाए तो व्यक्ति का विकास अवरुद्ध हो जाता है।वह विश्व के अन्य लोगों से कदम मिलाकर नहीं चल सकता है।अत: नई-नई खोजों के बारे में जानकारी सहायक पुस्तकों से ही मिलती है।

प्रश्न:2.बिना सहायक पुस्तकों के क्या छात्र गणित में निपुण हो सकता है? (Is students expert in mathematics without supplementary books?):

उत्तर:नहीं।पाठ्यपुस्तकों को केवल सिलेबस के आधार पर लिखा जाता है।अतः निपुणता केवल पाठ्यपुस्तकों से प्राप्त नहीं की जा सकती है क्योंकि निपुणता में व्यावहारिक ज्ञान,विषय का विस्तृत और गहराई से ज्ञान इत्यादि शामिल होता है।ये सब बातें छात्र-छात्राएं सहायक पुस्तकों से ही सीख सकते हैं।

प्रश्न:3.सहायक पुस्तकों से क्या तात्पर्य है? (What is the mean from supplementary books?):

उत्तर:शिक्षण का तब तक कोई अर्थ नहीं होता जबकि उसको सीख न सके।शिक्षक चाहे जिस विधि से शिक्षण करे,जिस युक्ति का प्रयोग करें पर समझा यह जाता है कि प्रायः सीखनेवालों को पाठ्य-सामग्री स्पष्ट नहीं हुई।अतः बच्चों को पाठ्य-सामग्री का स्पष्ट ज्ञान कराने के लिए अतिरिक्त पुस्तकों की आवश्यकता होती है।इन्हें सहायक पुस्तकें कहते हैं।

प्रश्न:4.नवीन गणित विषय के सम्बन्ध में छात्र किस प्रकार जानकारी हासिल करते हैं? (How to get knowledge about new mathematics content?):

उत्तर:नवीन विषय का ज्ञान छात्र सहायक पुस्तकों से प्राप्त कर सकता है।इसके अतिरिक्त टेपरिकार्डर, रेड़ियो,टेलीविजन, कम्प्यूटर तथा सोशल मीडिया आदि से भी गणित की नवीनतम जानकारी प्राप्त कर सकता है।इस प्रकार आधुनिक युग में तकनीकी विकास के कारण अनेक साधन हो गए हैं जिनकी सहायता से कोई भी छात्र-छात्रा ज्ञान प्राप्त कर सकता है।आज छात्र गणित का ज्ञान प्राप्त करने के लिए केवल पाठ्य-पुस्तकों और शिक्षक पर निर्भर नहीं है।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित की सन्दर्भ पुस्तकें (REFERENCE BOOKS OF MATHEMATICS),गणित की सहायक पुस्तकें (SUPPLEMENTARY BOOKS OF MATHEMATICS) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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अतिरिक्त पुस्तकें पढ़ने से है।सन्दर्भ पुस्तकों का बहुत महत्त्व है।

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