Menu

Inductive Method in Mathematics

गणित में आगमन विधि (Inductive Method in Mathematics)

1.भूमिका (Introduction)

आगमन हमारे मस्तिष्क की एक विशेष प्रक्रिया है जो विशिष्ट वस्तुओं के निरीक्षण द्वारा हमें सामान्य सत्य अथवा सिद्धान्त की ओर ले जाती है। इस प्रक्रिया में संवेदना, प्रत्यक्षीकरण, तर्क, निर्णय तथा सामान्यीकरण आवश्यक है। विशिष्ट वस्तुओं का निरीक्षण संवेदना तथा प्रत्यक्षीकरण द्वारा सम्भव है। निरीक्षण पर तर्क कर निर्णय पर आया जाता है। आगमन विधि में विशिष्ट से सामान्य की ओर अग्रसर होते हैं। यह एक परिचित चिन्तन शैली है जिसको हम जीवन में साधारणतया काम में लाते हैं। विद्यार्थी इस विधि के प्रयोग से वस्तुस्थिति का अनुभव कर सकते हैं तथा सामान्य अनुमानों में तर्कसंगतता स्थापित कर सकते हैं। विद्यार्थी तथ्यों का निरूपण करता हुआ अनेक प्रकार के प्रयोग करता है तथा सामान्य सिद्धान्त का प्रतिपादन करता है। यह सामान्यीकरण है।
इस विधि का प्रयोग करते समय अध्यापक विद्यार्थियों के सम्मुख कुछ विशेष उदाहरण प्रस्तुत करता है तथा इन उदाहरणों के स्थूल तथ्यों के आधार पर विद्यार्थी तर्क-वितर्क करते हुए किसी विशेष नियम या सिद्धान्त पर पहुँचते हैं। इसमें प्रत्यक्ष से प्रमाण की ओर अग्रसर करते हैं। इसमें नियमों को निर्धारित करते समय विद्यार्थी अपने अनुभव एवं बुद्धि का प्रयोग करते हैं। इस विधि को सामान्यानुमान विधि कहा जाता है।

Inductive Method in Mathematics

Inductive Method in Mathematics

यह विधि नवीन पाठों की शिक्षा के लिए विशेष रूप से सहायक सिद्ध होती है। इसमें बालक के समक्ष भिन्न-भिन्न उदाहरण प्रस्तुत करने चाहिए जिससे वह सामान्यीकरण सरलता से कर सकें। जो नियम निर्धारित हों उनकी जाँच की जाए। इस प्रकार आगमन विधि में निम्नलिखित चार अवस्थाएं होती है –
(1.)विशिष्ट उदाहरण
(2.)निरीक्षण
(3.)सामान्यीकरण
(4.) परीक्षण
विज्ञान की प्रयोगशाला में प्रयोग करते समय आगमन विधि को काम में लाया जाता है। विद्यार्थी प्रयोग करते समय अनेक स्थूल तथ्यों का अध्ययन करते हैं तथा सामान्य नियम का निर्धारण करते हैं। आधुनिक गणित में आगमन एक महत्त्वपूर्ण सीखने की प्रक्रिया है। इस विधि के महत्त्व के बारे में प्रोफेसर जे. एन. कपूर ने लिखा है –
“गणित की रचना प्रक्रिया आगमन प्रक्रिया का विज्ञान है। आगमन का आरम्भ निरीक्षण से होता है। हम निरीक्षण द्वारा किसी सम्भावित निष्कर्ष पर पहुँचते हैं क्योंकि यह एक अनुमान ही होता है।”
आगमन तर्क के माध्यम से विशिष्ट उदाहरणों से विशेष नियम या सिद्धान्त का प्रतिपादन किया जाता है किन्तु आगमन तर्क एक प्रक्रिया है न कि स्वयं में एक सिद्धान्त। फ्रांस के गणितज्ञ ब्लेज पास्कल (1623-1662)में प्रथम बार गणितीय आगमन का विचार दिया था।

2.आगमन विधि की विशेषताएं(Qualities of Inductive Method)

(1.)आगमन विधि द्वारा ज्ञान बालक की शिक्षा एवं विकास के दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण होता है क्योंकि विशिष्ट उदाहरणों के निरीक्षण के आधार पर बालक को नियमीकरण, सामान्यीकरण, सूत्र निर्धारण आदि की प्रक्रियाओं का अभ्यास हो जाता है।
(2.)इस विधि द्वारा प्राप्त ज्ञान स्थायी एवं उपयोगी होता है क्योंकि यह विद्यार्थी के स्वयं के निरीक्षण, परीक्षण, सूझ और बुद्धि पर आधारित होता है।
(3.)इस विधि से अध्ययन करने पर विद्यार्थी थकावट महसूस नहीं करते तथा निश्चित परिणाम तक पहुँचने तक धैर्य और प्रसन्नता का अनुभव करते हैं।
(4.)यह विधि बालकों को स्वयं कार्य करने के लिए प्रेरित करती है तथा उनमें निर्णय लेने की क्षमता का विकास करती है जिससे उनमें आत्मविश्वास की भावना में वृद्धि होती है।

(5.)इस विधि से गणित के नवीन नियम, नवीन सम्बन्ध, नवीन निष्कर्ष, नवीन सिद्धान्त आदि ज्ञात किए जा सकते हैं।
(6.)छोटी कक्षाओं के लिए यह विधि विशेष उपयोगी है क्योंकि ‘स्थूल से सूक्ष्म की ओर सिद्धान्त’, एक मनोवैज्ञानिक एवं व्यावहारिक सिद्धान्त है। इससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, सक्षमता, स्वतंत्र चिंतन एवं दूरदृष्टि का विकास होता है।
(7.)इस विधि से बालकों में गणित के प्रति रुचि बनी रहती है तथा नवीन ज्ञान को सीखने के लिए उत्सुकता में वृद्धि होती है।
(8.)विद्यार्थी नियमों, सूत्रों और सम्बन्धों को ज्ञात करने के आधारभूत सिद्धान्तों से परिचित रहते हैं।

3.सीमाएँ(Limitations)

(1.)इसके द्वारा प्राप्त नियमों या परिणामों की विश्वसनीयता उदाहरणों की संख्या पर निर्भर करती है। जितने ही अधिक उदाहरणों पर कोई नियम या परिणाम आधारित होता है उतनी अधिक उसकी विश्वसनीयता बढ़ जाती है।
(2.)इस विधि से प्राप्त नियम कुछ सीमा तक ही शुद्ध होते हैं।
(3.)यह विधि ऊँची कक्षाओं में काम में नहीं लाई जा सकती है क्योंकि अनेक ऐसे उप-विषय हैं जिनका आरम्भ प्रत्यक्ष तथ्यों से सम्भव नहीं है।
(4.)इस विधि के प्रयोग करने के लिए अध्यापक को पर्याप्त परिश्रम और तैयारी करनी पड़ती है तथा अधिक समय भी लगाना पड़ता है। प्रत्यक्ष उदाहरणों के लिए उपयुक्त सामग्री का जुटाना कोई सरल कार्य नहीं है।
(5.)इस विधि का सफल प्रयोग केवल अनुभवी अध्यापकों के लिए ही सम्भव है।
(6.)इस विधि द्वारा केवल नियम का ही पता लगाया जा सकता है। समस्याओं को हल करने की क्षमता इस विधि द्वारा सम्भव नहीं है।

गणितीय आगमन का सिद्धान्त के सूत्रपात का श्रेय फ्रांसीसी गणितज्ञ ब्लेज पास्कल (1623-1662ई.)को ह।इटली के गणितज्ञ फ्रांन्सैन्को मोरोलिक्स (1494-1575.ई) ने इस सिद्धांत को प्रयुक्त किया। भारतीय गणितज्ञ भास्कराचार्य द्वितीय (1114-1185ई.)के लेखों में गणितीय आगमन की झलक मिलती है। प्रसिध्द गणितज्ञ लाप्लास का कथन ‘विश्लेषण एवं प्राकृतिक दर्शन’ के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण खोज के लिए फलदायी साधन जिसे आगमन कहते हैं, माना गया है। जी. पियानो (1858-1932ई.) ने गणितीय प्रमेयों के कथनों को तार्किक संकेतन द्वारा व्यक्त करने के दायित्व का निर्वाह किया। उसे परिमितातीत के सिद्धांत को उद्धृत करने का श्रेय है।उसकी पियानो अभिगृहीतियाँ इस सम्बन्ध में आगमन के उल्लेखनीय उदाहरण हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *