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Maths Teachers Turning Away From Maths

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2 7.गणित शिक्षक गणित शिक्षा से दूर हो रहे हैं (Maths Teachers Turning Away From Maths),गणित शिक्षक गणित शिक्षा से दूर क्यों हो रहे हैं? (Why Are Math Teachers Turning Away From Mathematics Education?) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

1.गणित शिक्षक गणित शिक्षा से दूर हो रहे हैं (Maths Teachers Turning Away From Maths),गणित शिक्षक गणित शिक्षा से दूर क्यों हो रहे हैं? (Why Are Math Teachers Turning Away From Mathematics Education?):

  • गणित शिक्षक गणित शिक्षा से दूर हो रहे हैं (Maths Teachers Turning Away From Maths) तथा इसका खामियाजा छात्र-छात्राओं को उठाना पड़ता है।गणित शिक्षक शिक्षक पद को छोड़ देते हैं अर्थात् किसी अन्य जाॅब में चले जाते हैं या विदेशों में जाकर बस जाते हैं।विदेशों में जाकर अपनी सेवाएं देने वाले शिक्षकों की संख्या कम है पर है जरूर।अन्य जॉब में जाने तथा विदेशों में नौकरी करने का मूल कारण है कि उनको वहां अच्छा वेतनमान,उच्च पद तथा प्रतिष्ठा मिलती है। जो लोग अन्य जाॅब में अथवा विदेश में जाते हैं उनमें से अधिकांश बौद्धिक रूप से उच्च कोटि के होते हैं और ऐसी स्थिति में राष्ट्र व समाज को इनके नेतृत्व से वंचित रहना पड़ता है।यदि देश में शिक्षकों को काम करने के उचित अवसर प्राप्त नहीं है अथवा आगे उन्नति करने के अवसर सीमित है तो मात्र आर्थिक लाभ के लिए शिक्षा व गणित शिक्षा के क्षेत्र को छोड़ने से देश का भला नहीं हो सकता है।आर्थिक लाभ को राष्ट्रीयता के समक्ष रखने से ऐसी प्रवृत्ति तीव्र रूप धारण कर लेगी जिससे राष्ट्रीयता की प्रवृत्ति में कमी आएगी।उच्च योग्यता एवं क्षमता वाले शिक्षक विदेशों में रहने को उचित मानेंगे।ऐसी स्थिति से देश को अपार क्षति होती है। जैसे डॉ. हरगोविंद खुराना ने भारत को छोड़ा जिससे भारत को अपार नुकसान उठाना पड़ा हैं। इस प्रकार का एक व्यक्ति भी देश छोड़ देता है तो कितना नुकसान होता है इसका आकलन करना मुश्किल है।
  • इसी समस्या का दूसरा पक्ष यह भी है कि यदि वे लोग जो कि विदेश में जाते हैं और वहां उनकी स्किल में वृद्धि होती है।भारत में आने पर उनके अनुभव का लाभ मिलता है।वस्तुतः उच्चकोटि के गणितज्ञ व शिक्षक यदि देश छोड़कर जा रहे हैं तो ऐसी बहुत कम संभावना रहती है कि वे देश में लौट आएंगे यदि आर्थिक कारणों से देश छोड़ रहे हैं।
  • शिक्षक को अन्य देश में मिलने वाले आर्थिक लाभ तथा सुख-सुविधाओं को छोड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए।जैसे जापान का नागरिक विदेशों में शिक्षा भले ही प्राप्त कर ले परन्तु कार्य जापान में ही करता है।हालांकि प्रतिभा पलायन में इसका उल्लेख किया जा चुका है कि प्रतिभा पलायन क्यों होता है और उसे कैसे रोका जा सकता है?
  • इस आर्टिकल का विषय है कि गणित शिक्षक गणित शिक्षा से दूर हो रहे हैं (Maths Teachers Turning Away From Maths) हो रहे हैं अर्थात् गणित शिक्षकों की गणित शिक्षा के प्रति रूचि क्यों नहीं है?गणित शिक्षा के प्रति अरुचि होने के कुछ कारण निम्न हैं:
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2.उच्च वेतनमान की आकांक्षा (Aspiration for Higher Pay Scale):

  • जितने भी शिक्षक संघ हैं उनकी मासिक अथवा समय-समय पर जो भी बैठक होती है उनमें शिक्षा व छात्र-छात्राओं के बारे में विचार-विमर्श को छोड़कर अन्य सब मुद्दों पर विचार-विमर्श होता है।
  • इन बैठकों में वेतन सम्बन्धी मुद्दों पर ही अधिकतर विचार-विमर्श होता है।पदोन्नति को अनिवार्य मनवाना तथा अन्य भत्तों की मांग रखना इत्यादि प्रमुख-प्रमुख मुद्दे छाए रहते हैं।
  • यदि अधिकांश शिक्षकों के जीवन का मूल्यांकन करें अथवा निरीक्षण करें तो उनके जीवन में अर्थ (धन) तथा भौतिक सुख-सुविधाओं का भोग करने की प्रधानता देखने को मिलती है।यह अर्थ प्रधानता पाश्चात्य देशों से भारत में आई है।हालांकि अर्थ को हमारे प्राचीनकाल के पुरुषार्थ में गणना की है।परन्तु अर्थ (धन) साधन है, साध्य नहीं।आज प्राचीनकाल की तुलना में शिक्षा संस्थानों,पुस्तकालयों, पठन सामग्री, शिक्षकों, शिक्षण-भवनों में साधन सामग्री में अपार वृद्धि हुई है परन्तु गुणात्मक शिक्षा में वृद्धि क्यों नहीं हुई इस पर शिक्षक संघों तथा शिक्षक विचार-विमर्श करने को तैयार नहीं है।
    भौतिकवाद तथा अर्थ को अधिक प्रधानता देने के कारण छात्र-छात्राएं न तो शिक्षकों का सम्मान करते हैं और न ही शिक्षक इस बारे में विचार करने को तैयार हैं।जब धन ही सर्वोपरि हो जाता है तो शिक्षण के प्रति निष्ठा कैसे हो सकती है क्योंकि निष्ठा तो धन के प्रति है।गणित शिक्षक अधिक से अधिक धन कमाने के बारे में विचार-चिंतन करते हैं।जैसे ट्यूशन करना,पार्ट टाइम कोचिंग में पढ़ाना इत्यादि। इसलिए आज के शिक्षक सही मायने में शिक्षक हैं ही नहीं।

3.गणित शिक्षण व्यवसाय को मजबूरीवश अपनाना (Compulsory Adoption of the Profession of Mathematics Teaching):

  • आज गणित शिक्षण अथवा शिक्षण को अधिकांशतया वे अपनाते हैं जिनका चयन इंजीनियरिंग,डॉक्टरी,आईएएस,आईपीएस,आरएएस,आरपीएस इत्यादि सेवाओं में चयन नहीं होता है।जो अभ्यर्थी शिक्षण को मन और दिल से चयन नहीं करता है अर्थात् मजबूरीवश शिक्षण व्यवसाय का चयन करता है उससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षण गणित शिक्षण की आशा नहीं की जा सकती है।आज के शिक्षा संस्थानों,विश्वविद्यालयों में दिखावा करने के लिए सरस्वती की पूजा की जाती है वास्तव में वे मन ही मन इस प्रकार का चिंतन करते हैं कि उन्हें अधिक से अधिक धन की प्राप्ति कैसे हो सकती है?
  • यदि शिक्षक से थोड़ा वेतन भी अधिक मिल जाता है तो वे शिक्षण व्यवसाय को छोड़ देते हैं।जो केवल अर्थोपार्जन,धनार्जन तथा मजबूरीवश शिक्षक बना है उससे शिक्षण के प्रति निष्ठा की आशा नहीं की जा सकती है।ऐसा शिक्षक छात्र-छात्राओं की प्रतिभा को उभारने,तराशने,पल्लवित करने का कार्य नहीं कर सकता है।छात्र-छात्राओं का सर्वांगीण विकास करने का माद्दा उसमें आ ही नहीं सकता।बालक की सुप्त प्रतिभा,गुप्त प्रतिभा तथा चरित्र के निर्माण की आशा ऐसे शिक्षक से की ही नहीं जा सकती है। परिणामस्वरूप छात्र-छात्राएं,माता-पिता तथा अभिभावक ऐसे शिक्षकों का आदर और सम्मान नहीं करते हैं।
  • वस्तुतः केवल इस स्थिति के लिए केवल शिक्षक ही जिम्मेदार नहीं है बल्कि माता-पिता,अभिभावक,सरकार,समाज भी इसके लिए जिम्मेदार है।माता-पिता व अभिभावक मात्र छात्र-छात्राओं को शिक्षण संस्था में इसलिए भेजते हैं कि जिससे वह केवल धन कमाने की स्किल सीख सके।छात्र-छात्राएं भी शिक्षा संस्थानों में इसलिए जाते हैं कि जिससे धन कमाने की स्किल सीख सके।फलतः छात्र-छात्राओं में शिक्षा प्राप्त करने के बाद तेजस्विता,आत्मविश्वास दिखाई नहीं देता है बल्कि शिक्षण प्राप्त करने के बाद निस्तेज,आत्महीन दिखाई देते हैं।

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4.शिक्षकों की राजनीतिक निष्ठा (The Political Integrity of Teachers):

  • गणित शिक्षक तथा अन्य शिक्षक शिक्षक संघों में राजनीतिक दल घुसपैठ कर चुके हैं।ये शिक्षक संघ राजनीतिक दलों के हाथ में कठपुतली बन गए हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद,नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (एनडीटीएफ) भाजपा समर्थित, इंटक कांग्रेस समर्थित, वामपंथी डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट, प्रोग्रेसिव टीचर्स ऑर्गेनाइजेशन (पीटीओ) तथा एकेडेमिक्स फार एक्शन एंड डेवलपमेंट आदि किसी न किसी राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं।
  • इन शिक्षक संघ तथा छात्र संघ के चुनावों में अंधाधुंध पैसा बहाया जाता है और परोक्ष रूप से राजनीतिक दलों के नेता इन चुनाव अभियानों का संचालन करते हैं।ये शिक्षक संघ वेतनमान बढ़वाने,निष्कासित शिक्षकों को बहाल करवाने, चयनित वेतनमान को बरकरार रखने,पदोन्नति को अनिवार्य करने के लिए तो हड़ताल कर सकते हैं और करते हैं परंतु शिक्षा से संबंधित मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं होती है।
  • इन शिक्षक संघों में आन्तरिक राजनीति भी इस कदर हावी है कि इनकी कार्यकारिणी की बैठक में ही सिरफुटौव्वल की स्थिति पैदा हो जाती है।विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े शिक्षक एक-दूसरे को न केवल जिम्मेदार ठहराते हैं बल्कि शिक्षक संघ की बैठक में आपस में लात-घुंसे और गालियों की बौछार तक हो जाती है।शिक्षक संघों की यह स्थिति देखकर ऐसा लगता है कि शिक्षा तथा शिक्षार्थी को ताक पर रखकर ये शिक्षक संघ पदाधिकारी राजनीतिक रोटियां सेकने का कोई मौका नहीं चूकना चाहते हैं।
  • ऐसा कई बार हो चुका है कि यह शिक्षक संघ अपनी मांगे मनवाने के लिए परीक्षा काल में हड़ताल कर देते हैं।इसमें सबसे अधिक खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ता है।हड़ताल के कारण परीक्षा व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो जाती है।शिक्षकों,शिक्षक संघों को इसकी कोई चिंता नहीं रहती कि उनके बिना परीक्षा व्यवस्था किस कदर चरमरा जाती है।

5.निष्कर्ष (Conclusion of Maths Teachers Turning Away From Maths):

  • प्राचीनकाल में शिक्षा और गुरु को राजसत्ता नियन्त्रित नहीं करती थी बल्कि गुरु और धर्म ही राजसत्ता को निर्देशित करता था।इसका मुख्य कारण था कि प्राचीनकाल में गुरु का चरित्र उज्जवल था और वे ज्ञानवान थे, ज्ञान के स्रोत थे।दूसरा कारण यह था कि अध्यापक वर्ग (गुरु) राजसत्ता अथवा समाज के किसी वर्ग पर आश्रित नहीं था।अतः समाज व सत्ता के निजी स्वार्थों, उथल-पुथल तथा परिवर्तन उसके कार्य को प्रभावित नहीं करते थे।
  • वर्तमान समय में अध्यापक वर्ग का घोर चारित्रिक पतन हुआ है तथा शिक्षा को जीविकोपार्जन तथा पद,पदोन्नति से जोड़ दिया गया है।शिक्षण संस्थानों को सरकार से वेतन मिलता है तथा कई शिक्षण संस्थान सरकार के अनुदान से संचालित हैं।अतः अध्यापक वर्ग पराश्रित अर्थात् सरकार पर आश्रित हो गया है।सरकार कहने को प्रजातान्त्रिक रीति से चुनी हुई सरकार होती है।परन्तु सरकार अन्ततः किसी बहुमत प्राप्त दल की ही होती है।किसी दल में अधिकांश नेताओं में दलगत स्वार्थ, संकुचित दृष्टि  पाई जाती है।उनमें राष्ट्रीयता तथा दलगत राजनीति से ऊपर उठकर कार्य करने की सोच नहीं है।शिक्षा संस्थानों को ये अपने तरीके तथा अपने स्वार्थ की पूर्ति में इस्तेमाल करते हैं।
  • अध्यापक वर्ग के पास न सत्ता है, न अधिकार तथा न चरित्र बल।इसलिए शिक्षा का विकास, योजनाएँ तथा गतिविधियां ऐसे हाथों में चली गई है जिनका शिक्षा से कोई सरोकार नहीं है बल्कि दल विशेष के स्वार्थ साधने का उद्देश्य है।
    सरकार या दल (सत्ता लिप्सु) सत्ता में अपना प्रभाव बनाए रखने के लिए अध्यापकों की नियुक्ति, उन्नति, अवनति, परीक्षाफल, प्रवेश नीति, अध्यापकों के स्थानांतरण की नीति में अपनी मनमानी करते हैं।
  • अध्यापकों में अधिकांश राजनीतिक कार्यकर्ता हैं जो राजनीतिक दल के प्रति भक्ति रखते हैं।दूसरा वर्ग निष्ठावान अध्यापक हैं जो शिक्षा (छात्र-छात्राओं) के प्रति निष्ठा रखते हैं।ऐसे अध्यापकों को किनारे किया जाता है, उनको जलील किया जाता जाता है, उपेक्षित, तिरस्कृत किया जाता है।इस प्रकार निष्ठावान अध्यापक का किसी न किसी प्रकार ह्रास होता है।यदि निष्ठावान अध्यापक पवित्र प्रयासों द्वारा सत्ता वर्ग से कमजोर पड़ जाता है तो या तो वह निष्क्रिय हो जाता है तथा अपनी स्वाभाविक निष्ठा का त्याग कर देता है।यदि दम है,आत्मबल है तो अन्तिम समय तक वह सत्ता वर्ग को चुनौती देता है,अपने वर्ग को संगठित करता है तथा अपनी स्वाभाविक निष्ठा बनाए रखता है।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में गणित शिक्षक गणित शिक्षा से दूर हो रहे हैं (Maths Teachers Turning Away From Maths),गणित शिक्षक गणित शिक्षा से दूर क्यों हो रहे हैं? (Why Are Math Teachers Turning Away From Mathematics Education?) के बारे में बताया गया है।

6.भलाई के बदले में गाली खाओ,सुनों (Listen to Abuse in Exchange for Goodness):

  • भलाई के बदले में गाली खाओ,सुनो।दुनिया में तरह-तरह के आदमी है।कोई लूटने में खुश है तो कोई लूटवाने में खुश है।लूटनेवाले अंतरराष्ट्रीय कुख्यात ठग नटवरलाल की तरह रोज नए-नए हथकंडे अपनाते रहते हैं।ऐसे एक व्यक्ति थे जिनका गुजारा दूसरे को झांसा देकर ठगने में महारत हासिल थी।वे आज किसी को ठगते थे तो कल किसी दूसरे को मोहरा बनाते थे।इस प्रकार दूसरों की दौलत पर ऐशोआराम करते थे।
  • एक दिन उनके ही समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति ने उनको समझाया कि इस तरह लोगों से पैसे ऐंठकर,झांसा देकर ठगने से तुम्हारी तो बदनामी होती है साथ ही समाज की बदनामी होती है। इसलिए ऐसे काम न करके खुद मेहनत-मजदूरी करके जीवनव्यापन करो।उस व्यक्ति ने कोई जवाब नहीं दिया तो समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति बोले की चलो इस बात को तो छोड़ दो।लेकिन कोई व्यक्ति तेरे से भी होशियार व सशक्त मिल जाए।ऐसे व्यक्ति के पैसे लेकर वापस नहीं लोटाओगे तो तुम्हारे जूत भी दे सकता है।तब उस व्यक्ति ने कहा कि जूत भी आदमी ही खाते हैं।यानि झांसा देकर पैसे ऐंठना और उसी पर गुजर बसर करना परन्तु कोई जूते दे तो भी इस काम को छोड़ना नहीं।दरअसल ऐसे व्यक्ति को मुफ्तखोरी में ऐशोआराम करने का चस्का लग जाता है जिससे वह किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहता है।ऐसे लोगों के साथ हाथापाई भी हो जाती है।पैसे देने वाले को गाली गलौज करके और डरा धमकाकर भगा देता है।उससे होशियार मिल जाए तो उससे पिट लेते हैं।
  • परंतु ये ठग लोग बहुत होशियार होते हैं।अपने से ताकतवर का चुनाव नहीं करते हैं।इस प्रकार इनका ठगने का काम चलता रहता है।इस वाकए में इतना ही कह सकते हैं कि दूसरों को स्वयं से गलत फायदा उठाने देना भलाई नहीं बल्कि मूर्खता है।

7.गणित शिक्षक गणित शिक्षा से दूर हो रहे हैं (Maths Teachers Turning Away From Maths),गणित शिक्षक गणित शिक्षा से दूर क्यों हो रहे हैं? (Why Are Math Teachers Turning Away From Mathematics Education?) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.गणित के शिक्षक क्यों छोड़ते हैं? (Why do math teachers quit?):

उत्तर:इसके अलावा, इंगरसोल (Ingersoll) और मई (2010) द्वारा किए गए शोध ने गणित और विज्ञान के शिक्षकों को वेतन,छात्र अनुशासन की समस्याओं की आवृत्ति,स्कूल के नेतृत्व की प्रभावशीलता,प्रशासनिक समर्थन की कमी, कक्षा संसाधनों की उपलब्धता, कक्षा स्वायत्तता की डिग्री (degree of classroom autonomy),पेशेवर की उपयोगिता के कारण छोड़ दिया।

प्रश्न:2.माता-पिता और स्कूल गणित सीखने को ट्रैक पर रखने के लिए एक साथ कैसे काम कर सकते हैं? (How parents and schools can work together to keep math learning on track?):

उत्तर:कुछ उपयोगी कदम परिवार ले सकते हैं: शिक्षक के संपर्क में रहना (और पुराने छात्रों को मदद लेने के लिए झुकाना जब यह पेश किया जाता है)।बच्चों को समझने पर एक जांच के रूप में अपने गणित के असाइनमेंट के माध्यम से बात करने के लिए प्रोत्साहित करना।अनौपचारिक गणित सोच को गले लगाना,जैसे कि उन खेलों के माध्यम से जो गिनती या पैटर्न पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

प्रश्न:3.पहले 5 वर्षों में कितने प्रतिशत शिक्षकों ने नौकरी छोड़ दी? (What percentage of teachers quit in the first 5 years?):

उत्तर:लगभग 50 प्रतिशत नए शिक्षक अपने पहले पांच वर्षों के भीतर इस पेशे को छोड़ देते हैं।

प्रश्न:4.कितने प्रतिशत शिक्षक इस पेशे को छोड़ देते हैं? (What percentage of teachers leave the profession?):

उत्तर:शिक्षा सुधार संकाय और स्नातक छात्र प्रकाशन। इसके अलावा, शिक्षकों के एक उच्च अनुपात ने 2020-2021 शैक्षणिक वर्ष के दौरान छोड़ने या सेवानिवृत्त होने पर विचार करने की सूचना दी। मार्च 2021 में, 42% शिक्षकों ने घोषणा की कि उन्होंने पिछले वर्ष के दौरान अपने वर्तमान पद से छोड़ने या सेवानिवृत्त होने पर विचार किया है।

प्रश्न:5.एक शिक्षक का औसत जीवनकाल क्या है? (What is the average lifespan of a teacher?):

उत्तर:राष्ट्रव्यापी,शिक्षकों के पास किसी भी सार्वजनिक कर्मचारी का सबसे लंबा औसत जीवनकाल होता है,सोसाइटी ऑफ एक्चुअरीज के अनुसार।जो पुरुष पढ़ाते हैं वे औसतन लगभग 88 वर्ष की आयु तक जीवित रहते हैं,जबकि जो महिलाएं सिखाती हैं,वे औसतन 90 वर्ष की होती हैं,सोसाइटी ऑफ एक्चुअरीज के अध्ययन के अनुसार।

प्रश्न:6.शिक्षकों का टर्नओवर इतना अधिक क्यों है? (Why is teacher turnover so high?):

उत्तर:राज्यव्यापी शिक्षक आपूर्ति और मांग कारकों के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि कैलिफ़ोर्निया में तीन मुख्य कारक हैं: शिक्षक तैयारी नामांकन में गिरावट,शिक्षकों की बढ़ती मांग और शिक्षक एट्रिशन और टर्नओवर।

प्रश्न:7.क्या होगा अगर सभी शिक्षक छोड़ देते हैं? (What happens if all teachers quit?):

उत्तर:यदि शिक्षक वास्तव में छोड़ देते हैं, तो उन्हें उन लोगों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा जो स्कूल जिले (ओं) के लिए काम करने के इच्छुक थे जो भुगतान करने में सक्षम थे।वे लोग शायद उतने योग्य नहीं होंगे (यह देखते हुए कि वे उच्च वेतन का आदेश देने में सक्षम नहीं थे), और यहां तक कि क्रेडेंशियल भी नहीं हो सकते हैं।

प्रश्न:8.इतने सारे शिक्षक ब्रिटेन क्यों छोड़ रहे हैं? (Why are so many teachers quitting UK?):

उत्तर:वेतन पर चिंताओं,बढ़े हुए कार्यभार और वंचित क्षेत्रों में काम करने की चुनौतीपूर्ण प्रकृति के कारण शिक्षक इस पेशे को छोड़ रहे हैं।”एक क्षेत्र के रूप में हमें प्रशिक्षण पर एक लंबी कड़ी नज़र डालने की आवश्यकता है जो इन शिक्षकों को यह देखने के लिए मिल रहा है कि क्या यह इतनी अधिक संख्या में योगदान दे रहा है।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित शिक्षक गणित शिक्षा से दूर हो रहे हैं (Maths Teachers Turning Away From Maths),गणित शिक्षक गणित शिक्षा से दूर क्यों हो रहे हैं? (Why Are Math Teachers Turning Away From Mathematics Education?) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Maths Teachers Turning Away From Maths

गणित शिक्षक गणित शिक्षा से दूर हो रहे हैं
(Maths Teachers Turning Away From Maths)

Maths Teachers Turning Away From Maths

गणित शिक्षक गणित शिक्षा से दूर हो रहे हैं (Maths Teachers Turning Away From Maths)
तथा इसका खामियाजा छात्र-छात्राओं को उठाना पड़ता है।
गणित शिक्षक शिक्षक पद को छोड़ देते हैं अर्थात् किसी अन्य जाॅब में चले जाते हैं

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