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6 Tips for Loyalty to Mathematics

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1.गणित के प्रति निष्ठा के 6 टिप्स (6 Tips for Loyalty to Mathematics),गणित के प्रति समर्पण के टिप्स (6 Tips for Dedication to Mathematics):

  • गणित के प्रति निष्ठा के 6 टिप्स (6 Tips for Loyalty to Mathematics) में निष्ठा के मायने क्या हैं? फिर गणित के प्रति निष्ठा रखने से क्या तात्पर्य है और गणित के प्रति निष्ठा से क्या फायदा है इत्यादि प्रश्नों के उत्तर जानने की कोशिश करेंगे।
    सामान्यत निष्ठा शब्द को श्रद्धा,एकाग्रता,विश्वास,अनुराग,कौशल,दृढ़ता तथा समर्पण के पर्याय के रूप में प्रयोग किया जाता है। अंग्रेजी में निष्ठा को Loyalty,Faith, Allegiance,Devotion,Firmness के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।
    संक्षिप्त रूप में निष्ठा तथा श्रद्धा का अर्थ है हमारा पूरी तरह से रूपान्तरण हो जाना,अपने आप का बोध होना।जीवन का रूपांतरण हो जाता है तो समझ लें की श्रद्धा के मार्ग की ओर चल रहे हैं।
  • श्रीमदभगवद गीता में भी विद्या के दो भाग बताएं हैं:अपरा विद्या तथा परा विद्या।अपरा विद्या में भौतिक जगत का ज्ञान प्राप्त किया जाता है जिसमें गणित,भूगोल, विज्ञान इत्यादि विषयों का अध्ययन किया जाता है।इनको शरीर,इन्द्रियों और मन (बुद्धि) की सहायता से अर्जित किया जाता है।परा-विद्या के अंतर्गत आत्मा,परमात्मा,अध्यात्म आदि का ज्ञान प्राप्त किया जाता है।अपरा विद्या का ज्ञान केवल सांसारिक जीवन का निर्वाह करने में सहायक है जबकि परा विद्या का ज्ञान आध्यात्मिक जगत तथा सांसारिक जगत दोनों में सहायक है। उदाहरणार्थ यदि हम लाइब्रेरी में अध्ययन करने जाते हैं और पुस्तकालयाध्यक्ष से पढ़ने के लिए कोई पुस्तक लेते हैं तो वह हमें दे देता है।इस विश्वास या श्रद्धा के साथ की विद्यार्थी पुस्तक पढ़कर वापस लौटा देगा।इसी प्रकार हम बाजार में पुस्तक खरीदते हैं तो पुस्तक लेने के बाद हम उसको रुपए दे देते हैं।इस विश्वास व श्रद्धा के साथ की वह बाकी पैसे वापस लौटा देगा।दुकानदार भी पुस्तक हमें इसलिए दे देता है कि पुस्तक पसन्द आने पर पुस्तक का मूल्य चुका देगा।
  • यदि हम श्रद्धा और विश्वास न रखें तो सांसारिक जीवन में एक कदम भी चलना मुश्किल हो जाए।आध्यात्मिक जगत में तो निष्ठा,श्रद्धा व विश्वास (आत्म-विश्वास) का महत्त्व इस रूप में है कि हमें सुख,शांति,आत्म-संतुष्टि,आनंद प्राप्त करने में सहायक है।यदि हम सांसारिक कार्य को करें और उसमें सफल होने पर भी अशांति का अनुभव करें तो इसका अर्थ है कि हमें हम पर आत्म-विश्वास नहीं है।जैसे किसी विद्यार्थी को 90% अंक प्राप्त हुए हैं फिर भी वह 95% अंक न मिलने के कारण दु:खी और असंतोष का अनुभव करता है तो वह अश्रद्धा के कारण ऐसा करता है।
  • कई बार ऐसा उदाहरण देखने को मिलता है कि दुराचारी, दुर्जन व्यक्ति ऐशोआराम,सुख-सुविधाओं का भोग भोगता है।कई ऐसे व्यक्ति उच्च पद पर पदासीन मिल जाते हैं जो कि भ्रष्टाचार तथा अनैतिक कर्म करते हैं।दरअसल यह सब निष्ठा के कारण ही होता है।जैसे भ्रष्टाचारी अफसर/कर्मचारी की निष्ठा अनैतिक तरीकों से धन प्राप्त करना होता है।ऐसा व्यक्ति अपने चारों ओर अपने स्वभाव के लोगों से ही मेलजोल बढ़ाता है।ऐसे व्यक्ति का एकमात्र मकसद कैसे भी धन प्राप्त करना होता है। अपने चारों ओर ऐसा जाल बिछाता जाता है जिससे उसको घूस लेने में मदद मिले।इस प्रकार वह भ्रष्टाचार के कारण आगे बढ़ता है।उसके मार्ग में कोई रुकावट डालता है तो साम,दाम,दंड व भेद नीति से उसको या तो मिला लेता है या उसको दूर हटा देता है।ऐसे व्यक्ति को तपोनिष्ठ तथा निष्ठावान जिसकी निष्ठा नेक कार्यों में हो तथा अधिक शक्तिशाली मिलता है तो उसके सारे पापों का दंड भुगता देता है।उदाहरणार्थ दुर्योधन को पाण्डवों ने अपने तपोबल,नीति और धर्म के बल पर ही परास्त किया था।
  • एक अन्य उदाहरण से ओर समझें:संन्यासी महान् महाराज एक उच्च कोटि के गणितज्ञ हैं।इनको इंफोसिस पुरस्कार मिल चुका है (गणित में विशिष्ट योगदान के लिए)।संन्यासी के बारे में यह समझा जाता है कि साधुओं की तरह गेरुआ वस्त्र धारण करके सांसारिकता,सांसारिक दुनिया से अपने संबंधों को काटता चला जाता है।वस्तुतः धन कमाना कोई बुरी बात नहीं है लेकिन उसके धन कमाने के तरीके नैतिक व उचित होने चाहिए। भारतीय अध्यात्म का सार यही है कि यदि हम आवश्यकता व सुख सुविधापूर्ण जीवन जीने के बजाय विलासिता के जीवन की कामना करते हैं तो यह सही नहीं है।इसी प्रकार भगवा या गेरुए वस्त्र धारण करके आध्यात्मिकता की ओर जाने का यह मतलब नहीं है कि हम निष्क्रिय हो जाएं।जीवन में भौतिकता और आध्यात्मिकता में एक निश्चित संतुलन होना चाहिए।
    भारत में आध्यात्मिकता को बहुत अधिक महत्त्व देने के कारण भौतिक उन्नति (ज्ञान-विज्ञान) की तरफ ध्यान नहीं दिया
  • जिसके परिणामस्वरूप भारत को कई सदियों तक गुलामी झेलनी पड़ी।इसी प्रकार पाश्चात्य देशों में आध्यात्मिकता के सही मर्म को नहीं समझा और भौतिक उन्नति की तरफ बहुत अधिक प्रगति करने के लिए दो विश्व युद्धों के कारण महाविनाश का दंश झेलना पड़ा।दूसरे देशों पर आधिपत्य जमा कर उनका शोषण किया।अब गणित के प्रति निष्ठा रखने से क्या तात्पर्य है इस पर विवरण प्रस्तुत है।
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2.गणित का उपयोग करना (Using Mathematics):

  • जैसा कि ऊपर वर्णित किया गया है निष्ठा से यह भी तात्पर्य है कि गणित के विद्यार्थी गणित की शक्ति को समझें।गणित के अध्ययन अर्थात् गणित के प्रति निष्ठा से विद्यार्थी अपनी मानसिक शक्तियों का विकास कर सकता है।गणित के निरंतर अध्ययन करने से एकाग्रता का अभ्यास होता है।गणित के सवाल तथा समस्याओं को ज्यों-ज्यों छात्र-छात्राएं हल करते जाते हैं त्यों-त्यों उनमें एकाग्रता बढ़ती जाती है।
  • गणित के सवालों को हल करने के लिए उचित सूत्र,सिद्धांत तथा विधि का चयन करने की आवश्यकता होती है जिसमें विद्यार्थी को विवेक का उपयोग करता करना होता है।गणित की नई-नई व जटिल समस्याओं को हल करने के लिए तर्क व चिन्तन शक्ति की आवश्यकता होती है।इस तरह जटिल समस्याओं को हल करने पर उसमें चिन्तन,मनन व तर्कशक्ति  का विकास होता है।
  • गणित के साध्यों,सवालों को हल करने के लिए किसी विशिष्ट उत्तर तक पहुंचना होता है।इस प्रकार गणित के सवालों,समस्याओं तथा साध्यों को हल करने पर उसमें लक्ष्य केंद्रित अध्ययन करने की शक्ति का विकास होता है।

3.तकनीकी व विज्ञान का महत्त्व समझना (Understanding the Importance of Technology and Science):

  • कुछ लोग गणित को केवल अंकों की गणना को ही गणित समझ लेते हैं।परंतु गणित के प्रति जो सच्ची निष्ठा व लगन रखता है उसको यह भली-भांति समझ में आ जाता है की गणित न केवल बौद्धिक व्यायाम है बल्कि विज्ञान की बहुत सी जटिल गणनाओं में गणित का प्रयोग किया जाता है।गणित समस्याओं के समाधान का विज्ञान है।साथ ही आधुनिक युग में तकनीकी का विकास उत्तरोत्तर बढ़ता जा रहा है।परंतु तकनीकी की कोडिंग को वही विद्यार्थी ठीक तरह से समझ सकता है और उपयोग कर सकता है जिसको गणित का ज्ञान हो।
  • सूर्य से पृथ्वी की दूरी,न्यूटन का नियम अथवा अन्य कोई भी विज्ञान के नियम के Derivation को गणित के ज्ञान के आधार पर ही ठीक से समझा और लिखा जा सकता है।

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4.दैनिक जीवन में उपयोगिता को समझना (Understanding the Utility in Daily Life):

  • ऊपर हम वर्णित कर चुके हैं कि बिना निष्ठा और श्रद्धा के व्यावहारिक जीवन में एक कदम भी नहीं चल सकते हैं।वस्तुओं को खरीदते समय,घड़ी में समय बताते समय,मजदूर को मजदूरी देते समय,रेलगाड़ी का किराया देते समय,बस का किराया देकर बाकी पैसे लेते समय हर कहीं गणित के प्रति निष्ठा का उपयोग होता है।गणित के बिना व्यक्ति का जीवन पंगु है।कोई भी वस्तु खरीदते तथा लेते समय गणित के प्रति निष्ठा आवश्यक है।
  • निष्ठा कई प्रकार की होती है जैसे:आत्म-निष्ठा, भगवद् निष्ठा, गुरु निष्ठा,कर्तव्यनिष्ठा इत्यादि।

5.ज्यामितीय आकृतियों को समझना (Understanding Geometric Shapes):

  • ज्यामितीय आकृतियों को समझने से मतलब है कि उनका व्यावहारिक जीवन में उपयोग करना।जैसे आयतन और क्षेत्रफल की गणना समझकर हम ठोस आकृतियों बेलन,शंकु,घन,घनाभ का दैनिक जीवन में विभिन्न कार्यों में उपयोग करते हैं।जैसे किसी खाली सिलेंडर में कितनी गैस आएगी,कितना पानी आएगा यह हम पूर्व में गणना करके ज्ञात कर सकते हैं।
  • बहुत ऊंची पर्वत चोटी की ऊंचाई ज्ञात करके उस पर चढ़ने हेतु आवश्यक सामग्री का प्रबंध करके चढ़ सकते हैं।नदी की चौड़ाई ज्ञात करके उस पर पुल का निर्माण किया जा सकता है।

6.समस्याओं को हल करने में बीजगणित का योगदान (Contribution of Algebra Solving of Problems):

  • बीजगणित की भाषा संकेतों,प्रतीकों,चिन्हों एवं अक्षरों की भाषा है तथा इसके द्वारा दैनिक जीवन की बहुत सी समस्याओं को हल करना संभव हुआ है।
  • आधुनिक बीजगणित के विकास से सभी विज्ञानों का विकास सम्भव हुआ है।समुच्चय सिद्धान्त से हम दैनिक जीवन की बहुत सी समस्याओं को हल करते हैं।इसी प्रकार प्रायिकता में समुच्चय सिद्धान्त का प्रयोग करके कई पूर्वानुमान लगा सकते हैं।जैसे महाविद्यालय के सभी छात्रों में छात्रावास में रहने वाले तथा छात्रावास में नहीं रहनेवालों में उनकी किसी एक की ग्रेड पता होने पर दूसरे की ग्रेड का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है कि चुना गया छात्र छात्रावास में रहने वाला है।

7.कंप्यूटर की उपयोगिता (Utility of the Computer):

  • आज कोई भी देश धन-संपत्ति के आधार पर विकसित नहीं हो सकता है और न आगे बढ़ सकता है।आधुनिक युग में तकनीकी,विज्ञान,गणित तथा इंजीनियरिंग में विकास से आगे बढ़ सकता है और विकसित देशों की पंक्ति में खड़ा हो सकता है।
  • उदाहरणार्थ कुवैत,सऊदी अरब इत्यादि देशों के पास अकूत धन संपत्ति है परंतु वे विकसित देश नहीं है।उनके पास तेल के भंडार के कारण वे समृद्ध हैं।परंतु अमेरिका,रूस,जापान,जर्मनी,फ्रांस इत्यादि देश विकसित हैं क्योंकि तकनीकी,विज्ञान,इंजीनियरिंग व गणित में बड़े चढ़े हैं।वैसे भी विज्ञान,इंजीनियरिंग तथा तकनीकी में वही सिरमौर हो सकता है जिसके यहाँ गणित का विकास हुआ हो।क्योंकि इन विषयों में कदम-कदम पर गणित के ज्ञान की आवश्यकता है।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में गणित के प्रति निष्ठा के 6 टिप्स (6 Tips for Loyalty to Mathematics),गणित के प्रति समर्पण के टिप्स (6 Tips for Dedication to Mathematics) के बारे में बताया गया है।

8.काउंसलिंग सेन्टर (हास्य-व्यंग्य) (Counseling Centre) (Humour-Satire):

  • शिक्षक (छात्र से):आजकल क्या कर रहे हो?
  • छात्र:श्रीमन्!काउंसलर सेंटर खोलने का निश्चय किया है।
  • शिक्षक:परंतु तुमने तो मेकेनिकल में इंजीनियरिंग की हुई है।साथ में मैनेजमेंट का कोर्स भी किया हुआ है।
  • छात्र:आजकल हर कोई इंजीनियरिंग करने की धुन में सवार है।किसी भी कंपनी में 2-5 पद की वैकेंसी में हजारों इंजीनियरिंग किए हुए पहुंच जाते हैं।
  • शिक्षक:काउंसलर का काम भी कठिन है और इसमें भी प्रतिस्पर्धा के कारण समय लग सकता है।
  • छात्र:मुझे लगता है कि मैं इसमें सफल हो सकता हूं और कॉलेज का अनुभव तो है ही।आजकल कोरोनावायरस के कारण फैली महामारी से युवकों में पहले की बजाय भटकाव बढ़ गया है।
  • शिक्षक:लेकिन तुम तो काउंसलर सेंटर में ही बैठे रहते हो।तुम्हारे पास कोई कैसे आएगा?मुझे देखो मैंने 20 वर्ष से कोचिंग सेंटर खोला हुआ है और 20 वर्ष का यह अनुभव है कि मेरे पास गधे भी कोचिंग करने नहीं आते हैं।
  • छात्र:क्या कोई शाॅर्टकट नहीं हो सकता है।
  • शिक्षक:आनेवाले युवकों को शाॅर्टकट के मैथड से सलाह दोगे और उसमें कैंडिडेट सफल नहीं हुआ तो तुम्हारे काउंसलर सेन्टर के तम्बू को उखाड़ फेकेंगे।और तुम्हारा कालर पकड़कर दी हुई फीस वापस ले लेंगे सो अलग।आजकल हाॅटेस्ट एडवाइस देने का जमाना है।इसलिए इस सेंटर का नाम बदल कर हाॅटेस्ट काउंसलर सेन्टर रख दो।और काउंसलर सेन्टर के आगे किसी हाॅटेस्ट फिल्म एक्ट्रैस का बोर्ड लगा दो।
  • छात्र:आप तो बहुत आदर्शवादी शिक्षक थे फिर यह बदलाव कैसे हो गया?
  • शिक्षक:समय के साथ बदलाव जरूरी है वरना इस दुनिया में कौन किसको पूछता है? सब यही कहते हैं कि यह आउटडेटेड टीचर है।
  • छात्र:तब तो आपने आम स्टूडेंट की नब्ज पहचान ली है।
  • शिक्षक:बिल्कुल ऐसा करोगे तो सक्सेस दुम हिलाती हुई तुम्हारे पीछे-पीछे आएगी।
    तुमने सुना है कि मिथिला के एक नैयायिक थे उदयनाचार्य।उन्होंने किसी की खुशामद नहीं की और किसी से याचना नहीं की।उन्होंने संयम,तप और घोर दरिद्रता में जीवन काट दिया।पत्नी और बच्चों को घोर दरिद्रता में जीवन व्यतीत करना पड़ा।ऐसे आदर्शवादी सिद्धान्तों में क्या धरा है?
  • छात्र:आपने तो मेरी आंखें खोल दी है।
  • शिक्षक:देख लो जीवन में ऐशोआराम करना है या धूल फाँकना है।
    यह हाल है आज के शिक्षक और छात्रों का।

9.गणित के प्रति निष्ठा के 6 टिप्स (6 Tips for Loyalty to Mathematics),गणित के प्रति समर्पण के टिप्स (6 Tips for Dedication to Mathematics) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.सत्य और श्रद्धा के बारे में संक्षिप्त में बताओ। (Tell me Briefly about Truth and Faith):

उत्तर:श्रद्धा प्रेम की पराकाष्ठा है और सत्य ध्यान की पराकाष्ठा है।एक बहिर्मुखी मार्ग है और दूसरा अंतर्मुखी।बहिर्मुखी भी भगवान तक (गणित का उच्च कोटि का ज्ञान प्राप्त करके) पहुंचा देता है और अंतर्मुखी भी।

प्रश्न:2.गणित में निष्ठा बनाए रखने का सूत्र बताओ।(Tell the Formula for Maintaining Loyalty in Mathematics):

उत्तर:मुश्किले दिल के इरादे आजमाती है,स्वप्न के परदे निगाहों से हटाती है।
हौसला मत हार गिरकर ओ मुसाफिर ठोकरे इंसान को चलना सीखाती है।

प्रश्न:3.गणित के प्रति समर्पण से क्या तात्पर्य है? (What does Dedication to Mathematics Mean?):

उत्तर:अपनी इच्छा हो उन सवालों,समस्याओं और प्रश्नावली को हल करना समर्पण नहीं है।मर्जी में आए उन प्रश्नावलियों,सवालों व समस्याओं को हल कर लेना तथा जिन प्रश्नावलियों,सवालों व समस्याओं को हल करने में हमारी इच्छा नहीं है उसको हल न करना समर्पण नहीं है।
गणित में जो पाठ्यक्रम है उसको पूरी एकाग्रता तथा लगन के साथ हल करना समर्पण है।
यह स्थिति तब आती है जब हम अपने आपको बिल्कुल खाली कर देते हैं अर्थात् काम,क्रोध,अहंकार,मोह इत्यादि विकारों से मुक्त हो जाते हैं।जितना विकारों से मुक्त होते जाते हैं उतना ही समर्पण बढ़ता जाता है।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित के प्रति निष्ठा के 6 टिप्स (6 Tips for Loyalty to Mathematics),गणित के प्रति समर्पण के टिप्स (6 Tips for Dedication to Mathematics) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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गणित के प्रति निष्ठा के 6 टिप्स
(6 Tips for Loyalty to Mathematics)

6 Tips for Loyalty to Mathematics

गणित के प्रति निष्ठा के 6 टिप्स (6 Tips for Loyalty to Mathematics) में निष्ठा के मायने क्या हैं?
फिर गणित के प्रति निष्ठा रखने से क्या तात्पर्य है और गणित के प्रति निष्ठा से क्या फायदा है
इत्यादि प्रश्नों के उत्तर जानने की कोशिश करेंगे।

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