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Mathematician Alok Bhargava

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1.गणितज्ञ आलोक भार्गव (Mathematician Alok Bhargava),आलोक भार्गव (Alok Bhargava):

  • गणितज्ञ आलोक भार्गव (Mathematician Alok Bhargava) का जन्म राजस्थान के अलवर शहर में 13 जुलाई 1954 को हुआ था।वे एक भारतीय अर्थशास्त्री हैं।उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में गणित और लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में अर्थशास्त्र और अर्थमिति का अध्ययन किया।1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय में गणित से बीए ऑनर्स किया।1977 में लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में बीएससी किया।1978 में उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स (London School of Economics) से अर्थमिति में एमएससी की उपाधि प्राप्त की।
  • आलोक भार्गव ने पीएचडी 1982 में जाॅन डेनिस सरगन (John Denis Sargan) की देखरेख में लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से अर्थमिति (Econometrics) विषय पर पूरी की।उनकी थीसिस [द स्टोरी ऑफ द डर्बिन-वाॅटसन स्टैटिस्टिक्स ऑफ द स्पेसिफिकेशन ऑफ मॉडल्स इन लेवल्स इन डिफरेंससेस (The Theory of the Durbin-Watson Statistic with special reference to the specification of Models in Levels as against in Differences)] इकाई मूलों (unit roots) पर कई परीक्षण किए जिनका उपयोग सह-समाकलन विश्लेषण (co-integration analysis) में किया गया था।भार्गव अनुदैर्ध्य (“पैनल”) डेटा के अर्थमितीय तरीकों में अग्रणी में से एक थे।

2.गणितज्ञ आलोक भार्गव का केरियर (Career of Mathematician Alok Bhargava):

  • 1983 से 1989 तक उन्होंने पेंसिलवेनिया विश्वविद्यालय (University of Pennsylvania) में अर्थशास्त्र के सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्य किया।1989 से 1993 तक वे ह्यूस्टन विश्वविद्यालय (University of Houston) में अर्थशास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर थे और 1994 से 2012 तक पूर्ण प्रोफेसर थे।1995 की शरद ऋतु के दौरान उन्हें हार्वर्ड विश्वविद्यालय (Harvard University) में अतिथि प्रोफेसर के रूप में पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया गया था।1999 में वे विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) में वरिष्ठ वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व फेलो थे।2005 में उन्होंने पेरिस विश्वविद्यालय (University of Paris) में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में कार्य किया।
  • 1991 से भार्गव विकासशील और विकसित देशों में पोषण (nutrition),खाद्यनीति (Food Policy),जनसंख्या स्वास्थ्य (Population on Health),बाल विकास (Child Development),जनसांख्यिकी (Demography),महामारी विज्ञान (Epidemiology),एड्स (AIDS) और वित्त (Finance) के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाशित कर रहे हैं।उनके अकादमिक प्रकाशन विकासशील देशों में कुपोषण और खराब बाल स्वास्थ्य के मुद्दों के साथ-साथ विदेशों में मोटापे के मुद्दों को संबोधित करने में कठोर अर्थमितीय (rigorous econometric) और सांख्यिकीय विधियों को प्रदर्शित करते हैं।
  • भार्गव जनरल ऑफ इकोनॉमेट्रिक्स (1997 और 2014) के संपादक थे और बहु-विषयक जर्नल इकोनॉमिक्स एंड ह्यूमन बायोलॉजी (multi-disciplinary journal economics and human Biology) के सहायक संपादक (associate editor) हैं।उन्होंने पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय,हार्वर्ड विश्वविद्यालय और ह्यूस्टन विश्वविद्यालय में शिक्षण पदों पर कार्य किया है और शैक्षणिक पत्रिकाओं में 70 से अधिक लेख प्रकाशित किए हैं।
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3.आलोक भार्गव के कार्यों पर पुस्तकें और समीक्षाएँ (Books and reviews on the works of Alok Bhargava):

  • उनके कार्यों का एक संग्रह 2006 में “अर्थमिति (Econometrics),सांख्यिकी (Statistics) और खाद्य और स्वास्थ्य विज्ञान में कंप्यूटेशनल दृष्टिकोण (computational approaches in food and health sciences)” नामक एक अलग खण्ड में पुनर्मुद्रित किया गया है।”खाद्य,अर्थशास्त्र और स्वास्थ्य” शीर्षक वाला एक मोनोग्राफ 2008 से प्रकाशित हुआ था और अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल में इस प्रशंसा के साथ समीक्षा की गई थी कि “आलोक भार्गव बायोमेडिकल (Biomedical) और सामाजिक विज्ञान (Social Sciences) और स्वास्थ्य पेशे (health profession) और खाद्य प्रणालियों (food systems) के बीच मौजूदा फाॅयरवाल को तोड़ने के प्रयासों में अग्रणी (pioneer) हैं।

4.आलोक भार्गव द्वारा चयनित प्रकाशन (Publications selected by Alok Bhargava):

  • (1.)सीरियल सहसंबंध और निश्चित प्रभाव मॉडल (serial correlation and the Fixed Effects Model)।आर्थिक अध्ययन की समीक्षा (The Review of Economic Studies):आलोक भार्गव,एल फ्रांजिनी (L. Franzini),डब्ल्यू नरेन्द्रनाथन (W Narendranathan)।
  • (2.)टेस्टिंग रेसिडयूल्स फ्राॅम लीस्ट स्क्वायर रिग्रेशन फाॅर बिइंग जनरेटेड बाई द गासियन रेन्डम वाॅक (Testing Residuals from Least Squares Regression for Being Generated by the Gaussian Random Walk):जे. डी. सरगन (J.D.Sargan),आलोक भार्गव (Alok Bhargava) (January 1983)।
  • (3.)ऑन द थ्योरी ऑफ टेस्टिंग फाॅर यूनिट इन ऑब्ज्वर्ड टाइम सीरीज (on the Theory of Testing for unit Roots in Observed Time Series) आर्थिक अध्ययन की समीक्षा (The Review of Economic Studies):आलोक भार्गव (Alok Bhargava) (July 1986)।
  • (4.)”ग्रामीण दक्षिण भारत के लिए खाद्य पदार्थों और पोषक तत्वों की लघु और लंबी अवधि की आय लोच का अनुमान (Estimating Short and Long Run Income Elasticities of Foods and Nutrients for Rural South India)”।रॉयल स्टेटिस्टिकल सोसायटी का जर्नल (Journal of the Royal Statistical Society)।समाज में सांख्यिकी (Statistics in Society):आलोक भार्गव,डीन टी जैमिसन (Dean T Jamison),लाॅरेंस जे लाउ (Lawrence J Lau),क्रिस्टोफर जेएल मरे (Christopher JL Murray) (May 2001)।
  • (6.)एड्स महामारी और इथियोपियाई अनाथों की मनोवैज्ञानिक भलाई और स्कूल की भागीदारी (AIDS epidemic and the school participation of Ethiopian Orphans)।मनोविज्ञान,स्वास्थ्य और चिकित्सा (Psychology, Health and Medicine) (August 2005):आलोक भार्गव।
  • (7.)मानव विकास पर चिकित्सक प्रवासन के प्रभावों की मॉडलिंग (Modeling the effects of physician emigration on human development)”।अर्थशास्त्र और मानव जीवविज्ञान (Economics and human Biology):आलोक भार्गव,फ्रेडरिक डाॅक्वियर (Frederic Docquier),यासर मौलन (Yasser Moullan) (2011)।
  • (8.)कार्यकारी मुआवजा (Executive Compensation),शेयर पुनर्खरीद और निवेश व्यय:अमेरिकी फर्मों से अर्थमितीय साक्ष्य (Share repurchases and investment expenditures: econometric evidence from us firms)”।मात्रात्मक वित्त और लेखा की समीक्षा (Review of Quantitative Finance and Accounting)।आलोक भार्गव (अप्रैल 2013)।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में गणितज्ञ आलोक भार्गव (Mathematician Alok Bhargava),आलोक भार्गव (Alok Bhargava) के बारे में बताया गया है।

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5.गणित शिक्षक का गणित शिक्षा से मोह भंग (Mathematics Teachers Disillusioned with Mathematics Education):

  • मास्टर दीनानाथ अध्ययनशील थे।हमेशा गणित की पुस्तक खोले बैठे रहते थे।नोटबुक पर कोई न कोई सवाल करते रहते।सोहन उनका शिष्य था लेकिन पढ़ने में बिल्कुल फिसड्डी।कभी सोहन को सवाल नहीं आता तो मास्टर दीनानाथ जी अपना रौद्र रूप दिखाते।उनका प्रश्न होता कि दिनभर क्या करते रहते हो?सोहन के पास चुप रहने के अलावा कोई चारा न था।दीनानाथ जी कहते,इस तरह से गणित निकलोगे तो एक छोटा सा सवाल नहीं आएगा। गणित पढ़ना कोई हंसी-खेल नहीं है जो चाहे सो पढ़ ले।नहीं तो ऐरा गैरा नत्थू खैरा सभी गणित के विद्वान बन जाते हैं।मैंने रात-दिन आंखें फोड़ी है और खून जलाया है तब कहीं यह गणित आती है। बड़े-बड़े विद्वान भी गणित के छोटे-छोटे सवालों में अटक जाते हैं।इतने खेल-तमाशे होते हैं पर मैं कहीं नहीं जाता हूं।कभी क्रिकेट मैच,कभी हाॅकी मैच होते रहते हैं पर मैं पास भी नहीं फटकता हूं।उस पर भी 10वीं-12वीं के सवालों में अटक जाता हूँ।
  • यदि तुम्हारी यही स्थिति रही तो जिन्दगी भर सड़ते रहोगे।मास्टर दीनानाथ जितने गणित में सिद्धहस्त थे उतने ही उपदेश की कला में निपुण थे।सोहन को ऐसी-ऐसी लगती बातें कहते,ऐसे-ऐसे सूक्ति बाण चलाते कि सोहन के जिगर के टुकड़े-टुकड़े हो जाते और रही-सही हिम्मत भी टूट जाती।सोहन को मूर्ख रहना मंजूर था परंतु मास्टर दीनानाथ जो मेहनत करने का पैरामीटर बताते उसे सुनकर तो सोहन को चक्कर आ जाते।लेकिन सोहन फिर इरादा करता कि अबकी बार गणित ठीक से पढ़ लूंगा और सवाल सही करके बताऊंगा।फिर टाइम टेबल बनाता,उसमें खेल और मनोरंजन के लिए कोई वक्त नहीं देता।लेकिन दूसरे दिन फिर वही खेल-तमाशे का आकर्षण खींच लेता और टाइम टेबल कागज पर बना हुआ ही रह जाता। टाइम टेबल बना लेना एक बात है,उस पर अमल करना दूसरी बात है।उस पर सोहन एक दिन भी अमल नहीं करता।
  • खेल के मैदान की हरियाली,हवा के हलके-हल्के झोंके,फुटबॉल की उछलकूद,उसमें तेजी व फुर्ती सोहन को अनायास ही खींच लेते और वहां जाते ही सब कुछ भूल जाता।सोहन मास्टर दीनानाथ के साए से दूर भागता।लेकिन गणित में फिर वही हालत और मास्टर दीनानाथ को नसीहत और फजीहत करने का मौका मिल जाता।फिर भी सोहन फटकार और घुड़कियाँ खाकर भी खेल-तमाशे को नहीं छोड़ता।ऐसी बात नहीं थी सोहन गणित नहीं पढ़ता था।पढ़ता था लेकिन इतना कि रोज का टास्क पूरा हो जाए।
  • परीक्षा हुई और सोहन गणित में पास हो गया।मास्टर दीनानाथ की आंखें फटी की फटी रह गई।उनके गणित के नजरिए पर मोह का वैसे ही पर्दा पड़ा हुआ था जैसे मौत और विपत्ति के बीच में आदमी मोह और माया के बंधन में जकड़ा रहता है।मास्टर दीनानाथ का गणित से मोह भंग हुआ और उन्हें यथार्थ का दर्शन हुआ।दरअसल कोई भी विद्यार्थी थोड़ा-थोड़ा अध्ययन भी तन-मन से करता है तथा समझकर सवाल निकालता है तो वही काम दे जाता है।पढ़ाकू या किताबी कीड़ा बनने से बुद्धि का विकास नहीं होता है।भले थोड़ा पढ़ो लेकिन उसको समझकर पढ़ो और अभ्यास करो।

6.गणितज्ञ आलोक भार्गव (Mathematician Alok Bhargava),आलोक भार्गव (Alok Bhargava) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.भारत के गणित के जनक कौन हैं? (Who is the Father of mathematics of India?):

उत्तर:आर्यभट्ट (Aryabhatta)
आर्यभट्ट भारतीय गणित के जनक हैं।वे प्राचीन भारत के महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री (astronomer) थे।उनकी प्रमुख कृति आर्यभटीय के नाम से जानी जाती है।

प्रश्न:2.गणित का असली पिता कौन है? (Who is the real father of mathematics?):

उत्तर:आर्किमिडीज (Archimedes)
आर्किमिडीज को गणित का जनक कहा जाता है। वह 287 ईसा पूर्व – 212 ईसा पूर्व के बीच रहे। सिसिली का ग्रीक द्वीप (Greek island of Sicily) सिरैक्यूज़ (Syracuse) उनका जन्मस्थान था।आर्किमिडीज गणितीय समस्याओं को हल करके और राजा और उसकी सेना के लिए दिलचस्प नवाचार विकसित करके सिरैक्यूज़ के राजा हिरो II (King Hiero II) की सेवा कर रहे थे।

प्रश्न:3.प्रथम गणितज्ञ कौन है? (Who is the first mathematician?):

उत्तर:सबसे पहले ज्ञात गणितज्ञों में से एक थे थेल्स ऑफ़ मिलेटस (Thales of Miletus) (सी. 624-सी. 546 ईसा पूर्व); उन्हें पहले सच्चे गणितज्ञ और पहले ज्ञात व्यक्ति के रूप में सम्मानित किया गया है, जिनके लिए गणितीय खोज का श्रेय दिया गया है।

प्रश्न:4.गणित की रानी कौन है? (Who is the Queen of math?):

उत्तर:कार्ल फ्रेडरिक गॉस (Carl Friedrich Gauss) महान गणितज्ञों में से एक के बारे में कहा जाता है कि उसने दावा किया था: “गणित विज्ञान की रानी है और संख्या सिद्धांत गणित की रानी है।” अभाज्य संख्याओं के गुण संख्या सिद्धांत में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक पेचीदा सवाल यह है कि उन्हें अन्य पूर्णांकों में कैसे वितरित किया जाता है।

प्रश्न:5.संख्याओं की खोज किसने की? (Who Discovered numbers?):

उत्तर:मिस्रवासियों (The Egyptians) ने पहली गूढ़ अंक प्रणाली (first ciphered numeral system) का आविष्कार किया और यूनानियों (Greeks) ने अपनी गिनती की संख्याओं को आयोनियन (Ionian) और डोरिक अक्षरों (Doric alphabets) पर मैप किया.

प्रश्न:6.गणित में अक्षरों का आविष्कार किसने किया? (Who invented letters in math?):

उत्तर:एक महान फ्रांसीसी गणितज्ञ फ्रांगोइस विएटे (Francois Viete) (लैटिन: विएटा (Vieta)) को इस प्रणाली के आविष्कार का श्रेय दिया जाता है, और इसलिए इसे “आधुनिक बीजगणितीय संकेतन के पिता” के रूप में जाना जाता है।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणितज्ञ आलोक भार्गव (Mathematician Alok Bhargava),आलोक भार्गव (Alok Bhargava) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Mathematician Alok Bhargava

गणितज्ञ आलोक भार्गव
(Mathematician Alok Bhargava)

Mathematician Alok Bhargava

गणितज्ञ आलोक भार्गव (Mathematician Alok Bhargava) का जन्म
राजस्थान के अलवर शहर में 13 जुलाई 1954 को हुआ था।
वे एक भारतीय अर्थशास्त्री हैं।उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में गणित और लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में अर्थशास्त्र

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