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Mathematician Harish Chandra

1.गणितज्ञ हरीश चन्द्र का परिचय (Introduction to Mathematician Harish Chandra)-

(1.)गणितज्ञ हरीश चन्द्र (Mathematician Harish Chandra) द्वारा गणित में किए गए कार्यों तथा उनकी संक्षिप्त जीवनी,इस आर्टिकल में बताई गई है।
(2.)गणितज्ञ हरीश चन्द्र (Mathematician Harish Chandra) की प्रारंभिक शिक्षा कानपुर में हुई थी।बाद में उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से सैद्धांतिक भौतिकी में उच्च शिक्षा प्राप्त की।
(3.)इसके पश्चात क्वांटम यांत्रिकी पर पाॅल डिराक के निबंध का अध्ययन किया।
(4.)गणितज्ञ हरीश चन्द्र (Mathematician Harish Chandra) ने 1943 में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की तथा सैद्धांतिक भौतिकी में कार्य करने के लिए वे बंगलोर चले गए।
(5.)बंगलुरु से वे होमी जहांगीर भाभा के साथ कैम्ब्रिज चले गए और वहां पर डिराक के मार्गदर्शन में पीएचडी की।
(6.)विशेषज्ञों की हर जगह मांग रहती है।विशिष्ट क्षमता संपन्नों की ही हर कोई खोज करता है।बेकार, बेरोजगार उपेक्षित फिरने वालों में से अधिकांश अयोग्य ही होते हैं।
(7.)महत्वपूर्ण प्रयोजन पूरे कर सकने में दक्ष और विशिष्ट लोग ही सफल होते हैं।अयोग्यों से तो जीवन-निर्वाह करते भी सही रीति से नहीं बन पड़ता है।
(8.) इसलिए प्रत्यक्ष महत्वाकांक्षी को सर्वप्रथम अपनी योग्यताओं, विशेषताओं में वृद्धि करने में प्रवृत्त होना पड़ता है,अन्यथा न कोई बड़ा स्वार्थ साधन करते बन पड़ेगा और न कहने योग्य परमार्थ में सफलता प्राप्त कर सकना संभव होगा।
(9.)समुद्र पर सेतु बनाने के लिए नल-नील जैसे कुशल इंजीनियरों को बुलाया गया और जुटाया गया था।स्वेज और पनामा नहर बनाने का नियोजन उच्च कोटि के प्रतिभावानों के हाथों में सौंपा गया था।
(10.) फिल्मों में निर्देशक अयोग्य होता है तो फिल्म भी ज्यादा नहीं चल पाती है बल्कि औंधे मुंह पड़ती है।
(11.)अयोग्यों को सौंपे गए अन्य कार्य भी घाटा देते और असफल सिद्ध होते हैं।
(12.)संसार में विशिष्टता और योग्यता का महत्त्व है। परिवर्तनों के लिए नियोजित हुई महाक्रांतियां भी उच्च स्तरीय नेतृत्व में ही संभव हुई है।
(13.)गणितज्ञ हरीश चन्द्र (Mathematician Harish Chandra) की प्रतिभा भी जगह-जगह घूमने तथा विभिन्न योग्य गणितज्ञों के संपर्क में खिलती चली गई।उन्होंने पहले भौतिकी क्षेत्र चुना तथा बाद में उनकी गणित में रूचि होती गई।
(14.) प्रतिभावान बनने के लिए ‌शुरू से ही अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए प्रयत्न करना पड़ता है।
(15.)गणितज्ञ हरीश चन्द्र (Mathematician Harish Chandra) ने अपनी प्रतिभा को उभारने के लिए पहले इलाहाबाद, बैंगलोर गए।पश्चात वे कैम्ब्रिज तथा प्रिंसटन भी गए।
(16.)गणितज्ञ हरीश चन्द्र (Mathematician Harish Chandra) गणितज्ञ हर्मन वेल तथा क्लाउड चेवेली से काफी प्रभावित थे।1955-1965 की अवधि उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय में बिताई।इस अवधि में उन्होंने सेमी-सिंपल ली ग्रुप के निरूपण पर कार्य किया।इसी अवधि में वे आंड्रे विल के संपर्क में भी रहे।
(17.)गणितज्ञ हरीश चन्द्र (Mathematician Harish Chandra) ने बताया कि खोज की प्रक्रिया में ज्ञान व अनुभव की भूमिका और दूसरी ओर कल्पना या अंत: प्रज्ञा की भूमिका पर चिंतन किया।
(18.)उनका विश्वास था इन दोनों के बीच मौलिक अंतर्विरोध है।ज्ञान सावधानीपूर्वक विचार करने पर कल्पना की उड़ान में बाधा उत्पन्न करता है।
(19.) इस प्रकार गणितज्ञ हरीश चन्द्र (Mathematician Harish Chandra) ने भौतिक क्षेत्र के साथ-साथ आध्यात्मिक क्षेत्र में रिसर्च किए। उन्होंने अपने अनुभव में जो भी आया उसे हमारे लाभ के लिए बताया और उद्घाटन किया।
(20.)गणितज्ञ हरीश चन्द्र (Mathematician Harish Chandra) अपने कार्यों के द्वारा हमेशा के लिए अमर रहेंगे तथा उनके द्वारा किए गए कार्यों के द्वारा स्मरण किए जाते रहेंगे।
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2.गणितज्ञ हरीश चन्द्र (Mathematician Harish Chandra)-

हरीश-चन्द्र FRS (11 अक्टूबर 1923-16अक्टूबर 19 83) एक भारतीय अमेरिकी गणितज्ञ और भौतिक विज्ञानी थे, जिन्होंने प्रतिनिधित्व सिद्धांत में मौलिक काम किया, विशेष रूप से सेमीसिम्पल लाइ समूहों पर हार्मोनिक विश्लेषण।

3.हरीश चन्द्र की जीवनी (Harish-chandra biography)-

जन्म -11 अक्टूबर 1923
कानपुर, भारत
मृत्यु -16 अक्टूबर 1983 (आयु 60 वर्ष)
प्रिंसटन, न्यू जर्सी, संयुक्त राज्य अमेरिका
नागरिकता-प्राप्त राज्य
मातृ संस्था-इलाहाबाद विश्वविद्यालय
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय
हरीश-चंद्रा को सी-फंक्शन के लिए जाना जाता है
हरीश-चंद्र का चरित्र सूत्र
हरीश-चन्द्र होमोमोर्फिज्म
हरीश-चंद्र आइसोमोर्फिज्म
हरीश-चंद्र मॉड्यूल
हरीश-चन्द्र की नियमितता प्रमेय
हरीश-चंद्र का श्वार्ट्ज स्पेस
हरीश-चंद्र रूपांतरण
हरीश-चंद्र का फलन
पुरस्कार- रॉयल सोसाइटी के साथी
बीजगणित में कोल पुरस्कार (1954)
श्रीनिवास रामानुजन मेडल
वैज्ञानिक कैरियर
फ़ील्ड्स -मैटमैटिक्स, भौतिकी
संस्थान-भारतीय विज्ञान संस्थान
हार्वर्ड विश्वविद्यालय
कोलम्बिया विश्वविद्यालय
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च
उन्नत अध्ययन के लिए संस्थान
डॉक्टरल सलाहकार-पॉल डिराक

4.हरीश-चंद्र इतिहास (Harish-chandra history)-

हरीश-चंद्र का जन्म कानपुर में हुआ था।उन्होंने बी.एन.एस.डी.  कॉलेज, कानपुर और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की।1943 में भौतिक विज्ञान में अपनी मास्टर डिग्री प्राप्त करने के बाद, उन्होंने सैद्धांतिक भौतिकी में आगे की पढ़ाई के लिए भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर में स्थानांतरित किया और होमी जे. भाभा के साथ काम किया।
1945 में, वे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय चले गए, और पॉल डीराक के अधीन एक शोध छात्र के रूप में काम किया। कैम्ब्रिज में रहते हुए, उन्होंने वुल्फगैंग पाउली के व्याख्यान में भाग लिया और उनमें से एक के दौरान पाउली के काम में एक गलती बताई।दोनों को आजीवन दोस्त बनना था।इस दौरान उनकी गणित में रुचि बढ़ती गई।कैम्ब्रिज में उन्होंने 1947 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

5. हरीश-चंद्र का करियर (Harish-chandra career)-

वह नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज के सदस्य और रॉयल सोसाइटी के फेलो थे।वह 1954 में अमेरिकन मैथमैटिकल सोसाइटी के कोल पुरस्कार के प्राप्तकर्ता थे।भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी ने उन्हें 1974 में श्रीनिवास रामानुजन पदक से सम्मानित किया।1981 में, उन्होंने येल विश्वविद्यालय से मानद उपाधि प्राप्त की।
V.S.S.D का गणित विभाग।कॉलेज, कानपुर हर साल अपना जन्मदिन अलग-अलग रूपों में मनाता है, जिसमें विभिन्न कॉलेजों, संस्थानों और छात्रों के प्रोफेसरों के व्याख्यान, हरीश-चंद्र अनुसंधान संस्थान के छात्रों के दौरे शामिल हैं।
भारत सरकार ने उनके बाद सैद्धांतिक भौतिकी और गणित को समर्पित एक संस्थान, हरीश-चंद्र अनुसंधान संस्थान का नाम दिया।
रॉबर्ट लैंगलैंड्स ने हरीश-चंद्र के जीवनी लेख में लिखा है:
उन्हें 1958 में फील्ड्स मेडल के लिए माना गया था, लेकिन चयन समिति के एक जबरदस्त सदस्य, जिनकी नजर में थॉम एक बॉर्बकिस्ट था, ने दो नहीं होने की ठान रखी थी।इसलिए हरीश-चंद्रा,जिन्हें उन्होंने बोर्बकी शिविर में रखा था, को अलग रखा गया था।
वह 1977 में पद्म भूषण के प्राप्तकर्ता भी थे।

6.गणित के क्षेत्र में हरीश-चन्द्र का योगदान (Harish-chandra contribution towards mathematics,Harish-chandra contribution towards mathematics)-

हरीश चंद्र अपनी पीढ़ी के सबसे उत्कृष्ट गणितज्ञों, एक बीजगणितवादी और एक विश्लेषक थे, और उनमें से एक जो गणित और भौतिकी की परिधि पर एक बहुत ही मामूली विषय से अनंत आयामी समूह पुनः प्रस्तुति सिद्धांत को बदलने के लिए जिम्मेदार है।एक बहुत बड़ा क्षेत्र।

7.हरीश-चंद्रा सिद्धांत (Harish-chandra theory), हरीश चंद्र आविष्कार (Harish chandra inventions)-

हरीश-चंद्र एफआरएस (11 अक्टूबर 1923 – 16 अक्टूबर 1983) एक भारतीय अमेरिकी गणितज्ञ और भौतिक विज्ञानी थे जिन्होंने प्रतिनिधित्व सिद्धांत में मौलिक काम किया, विशेष रूप से सेमीसिम्पल लाइ समूहों पर हार्मोनिक विश्लेषण।

8.भारतीय गणितज्ञ (Indian mathematician)-

आर्यभट्ट (476–550 CE) वराहमिहिर (505–587 CE ई.पू.) यतिवभ – 6ठी सदी के गणितज्ञ और पुस्तक तिल्योपनपट्टी के लेखक जो दूरियों और समय को मापने के लिए विभिन्न इकाइयाँ देते हैं और अनंत के बारे में विभिन्न अवधारणाओं को पोस्ट करते हैं।  ब्रह्मगुप्त (598–670 CE) – शून्य की अवधारणा को लाने में मदद की।
इस प्रकार उपर्युक्त विवरण के आधार पर गणितज्ञ हरीश चन्द्र (Mathematician Harish Chandra) के बारे में जाना जा सकता है।

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