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Mathematician Professor C R Rao

1.गणितज्ञ प्रोफेसर सी आर राव (Mathematician Professor C R Rao)-

गणितज्ञ प्रोफेसर सी आर राव  (Mathematician Professor C R Rao) केवल गणितज्ञ ही नहीं थे बल्कि वे सांख्यिकीविद भी थे। विभिन्न संस्थानों के उच्च पदों पर रहकर उन्होंने राष्ट्र की बहुत सेवा की है।
यदि उनके सम्पूर्ण कार्य और जीवन चरित्र का वर्णन किया जाए तो यह आर्टिकल ही क्या बल्कि एक पुस्तक भी छोटी पड़ जाएगी।
हमने गणितज्ञ प्रोफेसर सी आर राव (Mathematician Professor C R Rao) के जीवन, गणित और सांख्यिकी में उनके योगदान,उनके द्वारा लिखित पुस्तकें तथा उनके द्वारा प्राप्त पदक व सम्मान का संक्षिप्त विवरण इस आर्टिकल में प्रस्तुत किया है।
इतने महान् गणितज्ञ प्रोफेसर सी आर राव (Mathematician Professor C R Rao) के बारे में कुछ भी लिखना सूर्य को दीपक दिखाने के समान है। लेकिन हम उनके बारे में यह आर्टिकल तथा कलम इस कारण चला रहे हैं क्योंकि हमारी युवा पीढ़ी तथा छात्रों को ऐसे महान् गणितज्ञ प्रोफेसर सी आर राव (Mathematician Professor C R Rao) के बारे में परिचय नहीं है।
गणितज्ञ प्रोफेसर सी आर राव (Mathematician Professor C R Rao) बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे।उनके बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है और बहुत कुछ लिखना बाकी है। आइए जानते हैं कि गणितज्ञ प्रोफेसर सी आर राव (Mathematician Professor C R Rao) जैसे महामानव कैसे तैयार होते हैं।
अंग्रेजी के विख्यात लेखक अलैक्जेण्डर हैमिल्टन छोटी आयु में लेख, कहानियां और कविताएं लिखने लगे थे।उनके सम्बन्ध में यह माना जाता था कि परमात्मा की उन पर विशेष कृपा थी। इसीलिए तो वे बचपन से ही मेधावी और अद्वितीय प्रतिभाशाली थे। परन्तु अलैक्जेण्डर हैमिल्टन की स्वयं की अपने बारे में धारणा लोगों की धारणा से अलग थी।उनका विश्वास था कि प्रतिभा का विकसित होने का मूल कारण परिश्रम और मनोयोग है।जबकि लोग समझते थे कि उनकी सफलता का रहस्य कोई चमत्कार है।
लेखन हो या कोई अन्य क्षेत्र प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए अभ्यास और अभ्यास की आवश्यकता है।प्रतिभा तो सबके अन्तराल में होती है परन्तु उसे पल्लवित,पुष्पित, निखारने व उभारने का कार्य न किया जाए तो वह सुप्त ही रह जाती है।
प्लेटो ने अपनी ख्याति प्राप्त पुस्तक रिपब्लिक के पहले वाक्य को नौ तरीके से लिखा था,तब कहीं जाकर वे उस वाक्य को अंतिम रूप दे सके। अंग्रेजी कवि पोप एक छंद को अलग-अलग ढंग से कई बार लिखते थे।चार्लोट ब्रोटे एक वाक्य को अलग-अलग ढंग से लिखते थे और तब उसे अंतिम रूप देते थे।
डिक्लाइन एण्ड फाल नामक पुस्तक के प्रसिद्ध लेखक और विचारक गिवन ने इस पुस्तक का पहला अध्याय तीन बार लिखा था और पूरी पुस्तक 25 वर्ष परिश्रम करने के बाद पूरी कर सके थे।कार्लमार्क्स ने अपनी पुस्तक दास कैपिटल को लिखने में पूरा जीवन लगा दिया था। उसमें उल्लेखित समाज व्यवस्था को कई राष्ट्रों ने अपना रखा है।
इसलिए महान् कार्य में परिश्रम, धैर्य, मनोयोग,साहस जैसे गुणों की आवश्यकता होती है।
आजकल के छात्र परिश्रम के बल पर सफलता अर्जित करना चाहते हैं।जो केवल श्रम तो करते हैं परन्तु उनमें वास्तव में श्रम के प्रति निष्ठा का अभाव पाया जाता है।धैर्य,मनोयोग,विवेक इत्यादि के अभाव में परिश्रम लादे गए भार की तरह होता है जिसे वे उतार फेंकना चाहते हैं।
इस तरह की मनोवृत्ति आजकल के छात्रों में पाई जाती है।वे पढ़ाई का सीधा सम्बन्ध नौकरी प्राप्त करना समझते हैं। इसलिए मन का अधिकांश भाग उसी में लगा रहता है।वे तरह-तरह की कल्पनाएं करते रहते हैं।यही कारण है कि एक बार भी असफल होने पर उनका मनोबल टूट जाता है।
माइकल फैराडे प्रसिद्ध वैज्ञानिक हैम्फ्री डेवी के यहां मजदूर के रूप में भर्ती हुए थे।उसका काम था, प्रयोगशाला की सफाई करना। सफाई तो ओर भी करते थे। परन्तु माइकल फैराडे ने परिश्रम के साथ सूझ-बूझ, धैर्य को भी अपनाया।एक दिन वे डायनेमो और इलेक्ट्रोलिसिस के सिद्धान्त के आविष्कारक बन गए।
समग्रता परिश्रम,धैर्य,मनोयोग,साहस,समर्पण इत्यादि के अभाव में परिश्रम के अन्य पक्ष अधूरे रह जाते हैं।धैर्य तो आलसियों में भी होता है।वे अपनी दीर्घसूत्रता को धैर्य का नाम देते हैं। इससे किसी प्रकार का विकास नहीं हो सकता है बल्कि उसमें जड़ता ही आती है।
महान् गणितज्ञ प्रोफेसर सी आर राव (Mathematician Professor C R Rao) की सफलता में ऐसे ही रहस्य छुपे हुए हैं।यदि युवा पीढ़ी गणितज्ञ प्रोफेसर सी आर राव (Mathematician Professor C R Rao) के जीवन से प्रेरणा लेना चाहे तो बहुत कुछ कर सकती है।
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2.गणितज्ञ प्रोफेसर सी आर राव (Mathematician Professor C R Rao)-

(1.) जीवनवृत्तांत (Biodata)-
जन्म -10 सितंबर 1920 (आयु 99)
हुविनाहदगल्ली, मद्रास प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत (अब कर्नाटक, भारत में)
नागरिकता-संयुक्त राज्य अमेरिका
शिक्षा-आंध्र विश्वविद्यालय (M.A.)
कलकत्ता विश्वविद्यालय (M.A.)
किंग्स कॉलेज, कैम्ब्रिज (Ph.D., Sc.D.)
पहचान -Cramér-Rao बान्ड
राव-ब्लैकवेलिसेशन प्रमेय, रूढ़िवादी सरणियाँ, स्कोर परीक्षण
पुरस्कार-पद्म विभूषण
नेशनल मेडल ऑफ साइंस (2001)
एस.एस.भटनागर पुरस्कार
गाइ मेडल (सिल्वर 1965, गोल्ड 2011)
वैज्ञानिक करियर-फील्ड्स गणित और सांख्यिकी
संस्थान-भारतीय सांख्यिकी संस्थान
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय
पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी
बफेलो विश्वविद्यालय
जैविक वर्गीकरण की थीसिस-सांख्यिकीय समस्याएं (1948)
डॉक्टरल सलाहकार-रोनाल्ड फिशर
(2.) संक्षिप्त परिचय (Brief Introduction)-
कलियमपूंदी राधाकृष्‍ण राव, एफआरएस जिसे सी आर राव (जन्म 10 सितंबर 1920) के रूप में जाना जाता है,एक भारतीय-अमेरिकी गणितज्ञ और सांख्यिकीविद हैं।वह वर्तमान में पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर एमेरिटस हैं और बफ़ेलो विश्वविद्यालय में रिसर्च प्रोफेसर हैं।
राव को कई बोलचाल की भाषा, मानद उपाधियों, और फेशचर्स द्वारा सम्मानित किया गया और उन्हें 2002 में यूएस नेशनल मेडल ऑफ साइंस से सम्मानित किया गया।
अमेरिकन स्टैटिस्टिकल एसोसिएशन ने उन्हें “एक जीवित किंवदंती के रूप में वर्णित किया है, जिसका काम न केवल आंकड़ों को प्रभावित करता है, बल्कि अर्थशास्त्र, आनुवांशिकी, नृविज्ञान, भूविज्ञान, राष्ट्रीय योजना, जनसांख्यिकी, जीवनी और चिकित्सा के रूप में विभिन्न क्षेत्रों के लिए निहितार्थ तक पहुंच गया है।”
टाइम्स ऑफ इंडिया ने राव को सर्वकालिक शीर्ष 10 भारतीय वैज्ञानिकों में से एक के रूप में सूचीबद्ध किया। राव भारतीय हार्ट एसोसिएशन के लिए एक वरिष्ठ नीति और सांख्यिकी सलाहकार भी हैं, जो दक्षिण एशियाई हृदय रोग जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

3.प्रारंभिक जीवन,सी.आर. राव निबंध (Early Life,C.R. Rao essay)-

(1.)सी.आर. राव की जीवनी (C.R. Rao biography)-
सी. आर. राव उन दस बच्चों में से आठवें थे जिनका जन्म एक तेलुगु परिवार हुविनाहदगली, बेल्लारी, मद्रास प्रेसीडेंसी (अब कर्नाटक में), भारत में हुआ था।उनकी स्कूली शिक्षा गुदुर, नुज्विद, नंदीगामा और विशाखापत्तनम में पूरी हुई, जो वर्तमान आंध्र प्रदेश राज्य में है।उन्होंने आंध्र विश्वविद्यालय से गणित में एमएससी और 1943 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से सांख्यिकी में एमए किया।
उन्होंने 1948 में आर. ए. फिशर के तहत कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में किंग्स कॉलेज में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की, जिसमें उन्होंने एक स्कॉड (Sc.D degree) को जोड़ा,1965 में कैम्ब्रिज से भी डिग्री प्राप्त की।
राव ने पहले भारतीय सांख्यिकी संस्थान और कैंब्रिज में मानव विज्ञान संग्रहालय में काम किया।बाद में उन्होंने भारतीय सांख्यिकी संस्थान में निदेशक, जवाहरलाल नेहरू प्रोफेसर और भारत में राष्ट्रीय प्रोफेसर, पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और सांख्यिकी के अध्यक्ष और पेनसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में सांख्यिकी राज्य के बहुउद्देशीय विश्लेषण केंद्र के निदेशक के रूप में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
40 से अधिक वर्षों की अवधि के लिए भारतीय सांख्यिकी संस्थान में अनुसंधान और प्रशिक्षण स्कूल के प्रमुख और बाद में निदेशक के रूप में, राव ने अनुसंधान और प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित किए और गणित के क्षेत्र में कई नेताओं को तैयार किया।राव की सिफारिश के आधार पर, एएसआई (द एशियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट) जो अब एशिया और पैसेफिक के लिए सांख्यिकी संस्थान के रूप में जाना जाता है ,टोक्यो में स्थापित किया गया सरकारी और औद्योगिक संगठनों में काम करने वाले सांख्यिकीविदों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए।
(2.)सीआर राव ने क्या खोजा?,सी आर राव की उपलब्धियां (What did CR Rao discovered?,C R Rao achievements)-
उनकी सबसे प्रसिद्ध खोजों में Cramér-Rao बान्ड और राव-ब्लैकवेलिसेशन प्रमेय दोनों अनुमानकर्ताओं की गुणवत्ता से संबंधित हैं।अन्य क्षेत्रों में उन्होंने बहुभिन्नरूपी विश्लेषण (multivariate analysis), आकलन सिद्धांत और अवकल ज्यामिति को शामिल किया।उनके अन्य योगदानों में फिशर-राव प्रमेय, राव दूरी, और ऑर्थोगोनल सरणियां शामिल हैं।
वह 14 पुस्तकों के लेखक हैं और 400 से अधिक जर्नल प्रकाशन प्रकाशित कर चुके हैं।
राव ने दुनिया भर के 19 देशों के विश्वविद्यालयों से 38 मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की और सांख्यिकी और विज्ञान में उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार और पदक प्राप्त किए।वह भारत, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और इटली में आठ राष्ट्रीय अकादमियों के सदस्य हैं।राव को जून 2002 में वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में आजीवन उपलब्धि के लिए संयुक्त राष्ट्र के राष्ट्रीय पदक से सम्मानित किया गया। उन्हें 2010 में भारत विज्ञान पुरस्कार दिया गया, जो भारत सरकार द्वारा सांइटिफिक डोमेन में एक वैज्ञानिक को दिया गया सर्वोच्च सम्मान है।2013 में, उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए Miodrag Lovric (संपादक) और Shlomo Sawilowsky के साथ, सांख्यिकीय विज्ञान के अंतर्राष्ट्रीय विश्वकोश में उनके योगदान के लिए नामांकित किया गया था।उन्हें हाल ही में 26 जुलाई 2014 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर द्वारा 38 वें मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया था, “Cramér-राव असमानता (क्रैमर राव इनइक्वेलिटी), राव-ब्लैकवेलिज़ेशन, राव मापन,राव दूरी ,राव मैट्रिक जैसी अवधारणाओं की शुरूआत के माध्यम से आधुनिक आँकड़ों की नींव में उनके योगदान के लिए और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों को डिजाइन करने के लिए उद्योग के लिए रूढ़िवादी सरणियों के विचार को पेश करने के लिए। “
वह अंतर्राष्ट्रीय सांख्यिकीय संस्थान, गणितीय सांख्यिकी संस्थान (यूएसए), और अंतर्राष्ट्रीय बॉयोमीट्रिक सोसायटी के अध्यक्ष थे।उन्हें औद्योगिक आंकड़ों में उनके योगदान और उद्योगों में गुणवत्ता नियंत्रण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए भारत के राष्ट्रीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता (चेन्नई शाखा) के लिए हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया था।
जर्नल ऑफ़ क्वांटिटेटिव इकोनॉमिक्स ने 1991 में राव के सम्मान में एक विशेष अंक प्रकाशित किया था। “डॉ.राव एक बहुत ही प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और हमारे समय के एक अत्यंत प्रख्यात सांख्यिकीविद् हैं।सांख्यिकीय सिद्धांत और अनुप्रयोगों में उनका योगदान प्रसिद्ध है,और उनके कई परिणाम हैं।जो उनके नाम को सहन करते हैं, दुनिया भर में स्नातक और मास्टर स्तर पर आंकड़ों के पाठ्यक्रम में शामिल हैं। वह एक प्रेरणादायक शिक्षक हैं और उन्होंने सांख्यिकी के सभी क्षेत्रों में कई छात्रों के शोध कार्य का मार्गदर्शन किया है।उनके शुरुआती काम ने बहुत प्रभावित किया था।पिछले चार दशकों के दौरान सांख्यिकीय अनुसंधान का पाठ्यक्रम। इस विशेष मुद्दे के उद्देश्यों में से एक डॉ.राव के अर्थशास्त्र में उनके योगदान को मान्यता देना और भारत में अर्थशास्त्रीय अनुसंधान के विकास में उनकी प्रमुख भूमिका को स्वीकार करना है। “

4.अनुसंधान योगदान के क्षेत्र,गणित में सीआर राव का क्या योगदान है?,गणितज्ञ प्रोफेसर C R Rao का गणित में योगदान,C.R राव द्वारा खोज (Areas of research contributions,What is the contribution of mathematician professor C R Rao in mathematics?,Mathematician C R Rao contributions to mathematics,C.R. Rao discovery)-

अनुमान सिद्धांत
सांख्यिकीय अनुमान और रैखिक मॉडल
बहुभिन्नरूपी विश्लेषण
संयुक्त डिजाइन
रूढ़िवादी सरणियाँ
जीवमिति
सांख्यिकीय आनुवांशिकी
सामान्यीकृत मैट्रिक्स उलटा होता है
क्रियात्मक समीकरण

क्रैमर राव इनइक्वेलिटी

राव ब्लैकवेलिसेशन

राव मैट्रिक

5.पुरस्कार और पदक (Awards and medals)-

रॉयल स्टेटिक सोसाइटी में गाई मेडल इन गोल्ड (2011)
भारत विज्ञान पुरस्कार 2010 (भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत एक वैज्ञानिक क्षेत्र में सर्वोच्च पुरस्कार)
अंतर्राष्ट्रीय सांख्यिकीय संस्थान का अंतर्राष्ट्रीय महालनोबिस पुरस्कार (2003) [15]
भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के श्रीनिवास रामानुजन पदक (2003)
सरदार पटेल इंटरनेशनल फाउंडेशन, भारत द्वारा सरदार पटेल लाइफटाइम अचीवमेंट इंटरनेशनल अवार्ड (सरदार रत्न) (2014)
12 जून 2002 को राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने उन्हें विज्ञान के क्षेत्र में राष्ट्रीय पुरस्कार, वैज्ञानिक क्षेत्र में सर्वोच्च पुरस्कार, “नए युग के भविष्यवक्ता” के रूप में सम्मानित किया, उनकी नींव में अग्रणी योगदान के लिए। सांख्यिकीय सिद्धांत और बहुविध सांख्यिकीय पद्धति और उनके अनुप्रयोग, भौतिक, जैविक, गणितीय, आर्थिक और इंजीनियरिंग दर्शकों को समृद्ध करते हैं। “
भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण (2001)
भारतीय विज्ञान कांग्रेस के महालनोबिस शताब्दी स्वर्ण पदक (1993?)
विल्क्स मेमोरियल अवार्ड (1989) अमेरिकन स्टैटिस्टिकल एसोसिएशन का
पद्म भूषण (1968)
भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी का मेघनाद साहा पदक (1969)
रॉयल स्टैटिस्टिकल सोसाइटी के सिल्वर (1965) में गाइ मेडल
एस.एस.भटनागर पुरस्कार (1963) वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद
बोस इंस्टीट्यूट के जेसी बोस गोल्ड मेडल
कलकत्ता विश्वविद्यालय का स्वर्ण पदक
उन्हें 2003 में कलकत्ता विश्वविद्यालय द्वारा एक मानद डॉक्टर ऑफ साइंस से भी सम्मानित किया गया था।इसके अलावा दुनिया भर के कई विश्वविद्यालयों और संस्थानों से डॉक्टरेट की मानद उपाधि।

6.उनके सम्मान में (In his honour)-

पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी ने सांख्यिकी में सी. आर. और भार्गवी राव पुरस्कार की स्थापना की है
सीआर राव एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमैटिक्स, स्टेटिस्टिक्स एंड कम्प्यूटर साइंस
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI), भारत सरकार द्वारा स्थापित सांख्यिकी में राष्ट्रीय पुरस्कार।
आईआईटी हैदराबाद से सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ हैदराबाद क्रॉसड्रैड से अलिंद फैक्ट्री तक जाने वाली सड़क, लिंगमपल्ली को “प्रो. सी.आर. राव रोड” के नाम से जाना जाता है।

7.चयनित प्रकाशन (Selected publications)-

सामग्री
2020. परेरा, बी. डीई बी .; राव, कैलामपुदी राधाकृष्ण ;; ओलिविया, एफ.बी., सांख्यिकीय लर्निंग न्यूरल नेटवर्क्स का उपयोग करते हुए: ए गाइड फॉर स्टेटिस्टिशियन एंड डेटा साइंटिस्ट्स विथ पायथन, सीआरसी प्रेस, लंदन।
2017. बुक रिव्यू: मल्टीवीरेट स्टैटिस्टिक मेथड्स, ए प्राइमर
2016. (लव्रीक के साथ, एम.) परीक्षण बिंदु एक सामान्य मतलब और सच्चाई की अशक्त परिकल्पना: 21 वीं सदी का परिप्रेक्ष्य
2009. (PEREIRA, B. de B. के साथ) डेटा माइनिंग विद न्यूरल नेटवर्क्स का उपयोग: स्टेटिस्टिक्स के लिए एक गाइड। स्टेट कॉलेज, पेंसिल्वेनिया, 2009.
1999. (हेल्स टॉटेनबर्ग के साथ, एंड्रियास फीगर एट अल.)। रैखिक मॉडल: सांख्यिकी में कम से कम वर्ग और विकल्प, स्प्रिंगर श्रृंखला।कोंपल
1998. (एम. भास्कर राव के साथ)। मैट्रिक्स बीजगणित और सांख्यिकी और अर्थशास्त्र के लिए इसके अनुप्रयोग। विश्व वैज्ञानिक
1997. स्टेटिस्टिक्स एंड ट्रुथ: पुटिंग चांस टू वर्क,Wspc
1996. प्रमुख घटक और कारक विश्लेषण। पीएन
1996. सेंसर युक्त ऑर्डर किए गए नमूने के आधार पर एक घातांकी वितरण की विशेषता का विस्तार।
1996. बूटस्ट्रैप द्वारा अनुक्रमिक पुनर्निर्माण।पीएन
1993. बहुभिन्नरूपी विश्लेषण के अनुप्रयोग। पीएन
1992. सिग्नल एस्टीमेशन, मल्टीगेट ट्रैकिंग और संबंधित क्षेत्र।
1989. बहुभिन्नरूपी विश्लेषण और इसके अनुप्रयोग। पीएन
1988. रैखिक रूपांतरण, प्रोजेक्शन ऑपरेटरों और सामान्यीकृत व्युत्क्रम; एक ज्यामितीय दृष्टिकोण। पीएन
1984. संभाव्यता वितरण की विशेषता पर हाल के परिणाम: डेनी के प्रमेय के विस्तार के माध्यम से एक एकीकृत दृष्टिकोण।पीएन
1973. रेखीय सांख्यिकीय इंफरेन्स और इसके अनुप्रयोग।विले-Interscience
1973. रैखिक मॉडल में अनुमान के एक एकीकृत सिद्धांत पर।पीएन
1973. (ए.एम. कगन एट अल. के साथ।)। गणितीय सांख्यिकी में समस्याएं, संभाव्यता और गणितीय सांख्यिकी में विले श्रृंखला।
1972. (सुजीत कुमार मित्रा के साथ)। मैट्रिसेस और उसके अनुप्रयोगों, संभाव्यता और गणितीय सांख्यिकी के सामान्यीकृत व्युत्क्रम। जॉन विले एंड संस
1963.अर्थशास्त्र और योजना पर निबंध। सांख्यिकीय समाज प्रकाशन

8.संपादित किए गए वॉल्यूम (Volumes edited)-

2015 (मारेपल्ली, बी. राव के साथ संस्करण)।सांख्यिकी 32 की पुस्तिका: संगणकीय सांख्यिकी‌ Elsevier के साथ।
2013. (वेणु गोविंदराजू के साथ संस्करण)।सांख्यिकी 31 की हैंडबुक: मशीन लर्निंग: सिद्धांत और अनुप्रयोग।नार्थ हॉलैंड
2012. (टाटा सुब्बा राव और सुहासिनी सुब्बा राव के साथ संस्करण)।सांख्यिकी 30 की हैंडबुक: समय श्रृंखला विश्लेषण: विधियाँ और अनुप्रयोग।नार्थ हॉलैंड
2012. (रणजीत चक्रवर्ती और प्रणब के. सेन के साथ संस्करण)। सांख्यिकी 28 की पुस्तिका: मानव स्वास्थ्य और आनुवंशिकता में जैव सूचना विज्ञान।नार्थ हॉलैंड
2011. (दीपक के. दे के साथ संस्करण)।आवश्यक Bayesian मॉडल।नार्थ हॉलैंड
2011. (डैनी फेफ़रमैनन के साथ संस्करण)। डिजाइन आधारित नमूना सर्वेक्षण के लिए आवश्यक तरीके।नार्थ हॉलैंड
2009. (डैनी फ़ेफ़र्मन के साथ संस्करण)।सांख्यिकी 29A की पुस्तिका: नमूना सर्वेक्षण: डिजाइन, तरीके और अनुप्रयोग।नार्थ हॉलैंड
2009. (डैनी फ़ेफ़र्मन के साथ संस्करण)।आंकड़ों की हैंडबुक 29B नमूना सर्वेक्षण: आविष्कार और विश्लेषण।नार्थ हॉलैंड
2007. (जे. फिलिप मिलर और डी. सी. राव के साथ संस्करण)। सांख्यिकी 27 की पुस्तिका: महामारी विज्ञान और चिकित्सा सांख्यिकी।नार्थ हॉलैंड
2006. (संदीप सिंहराय के साथ संस्करण)।हैंडबुक ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स, वॉल्यूम 26: साइकोमेट्रिक्स।नार्थ हॉलैंड
2005. (दीपक के. दे के साथ संस्करण)।सांख्यिकी 25 की हैंडबुक: बायेसियन थिंकिंग, मॉडलिंग और कम्प्यूटेशन।नार्थ हॉलैंड
2005. (संस्करण)। सांख्यिकी 24 की हैंडबुक: डेटा माइनिंग और डेटा विज़ुअलाइज़ेशन।नार्थ हॉलैंड
2004. (एन. बालकृष्णन के साथ संस्करण)। सांख्यिकी 23 की पुस्तिका: उत्तरजीविता विश्लेषण में प्रगति।नार्थ हॉलैंड
2003. (रवींद्र खत्री के साथ संस्करण)। सांख्यिकी की पुस्तिका 22: उद्योग में सांख्यिकी।नार्थ हॉलैंड
2001. (एन. बालकृष्णन के साथ संस्करण)।सांख्यिकी 20 की पुस्तिका: विश्वसनीयता में प्रगति, नार्थ-हॉलैंड गणित अध्ययन।एल्सेवियर
2001. (डी. एन. शानभाग के साथ संस्करण)।सांख्यिकी 19 की हैंडबुक: स्टोचस्टिक प्रक्रियाएं: सिद्धांत और तरीके। नार्थ-हॉलैंड
2000. (प्रणव कुमार सेन के साथ संस्करण)।सांख्यिकी की पुस्तिका 18: बायोइन्वायरमेंटल एंड पब्लिक हेल्थ स्टेटिस्टिक्स।नार्थ-हॉलैंड
1998. (एन. बालकृष्णन के साथ संस्करण)। सांख्यिकी 17 की पुस्तिका: आदेश सांख्यिकी: सिद्धान्त और अनुप्रयोग।नार्थ-हॉलैंड
1998. (एन. बालकृष्णन के साथ संस्करण)।सांख्यिकी की पुस्तिका 16: आदेश सांख्यिकी: सिद्धांत और तरीके। नार्थ-हॉलैंड
1997. (जी.एस. मद्दला के साथ संस्करण)।सांख्यिकी 15 की पुस्तिका: मजबूत आविष्कार। Elsevier
1996. (जी.एस. मददाला के साथ संस्करण)।सांख्यिकी 14 की पुस्तिका: वित्त में सांख्यिकीय तरीके। Elsevier
1996. (एस. घोष के साथ संस्करण)।सांख्यिकी की पुस्तिका 13: प्रयोगों का डिजाइन और विश्लेषण।नार्थ हॉलैंड
1994. (जी.पी. पाटिल के साथ संस्करण)।सांख्यिकी 12 की पुस्तिका: पर्यावरण सांख्यिकी।एल्सेवियर
1994. (जी.पी. पाटिल के साथ संस्करण)।बहुभिन्नरूपी पर्यावरण सांख्यिकी।सांख्यिकी और संभाव्यता में श्रृंखला नार्थ-हॉलैंड खंड 6।नार्थ हॉलैंड
1993. (जी.एस. मडाला और एच. डी. विनोद के साथ संस्करण)।सांख्यिकी 11 की पुस्तिका: विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान में अर्थशास्त्र, तकनीक और उपकरण। एल्सेवियर
1993. (एन. के. बोस के साथ संस्करण)। सांख्यिकी 10 की पुस्तिका: सिग्नल प्रोसेसिंग और इसके अनुप्रयोग, एल्सेवियर
1993. (संस्करण)।सांख्यिकी 9 की पुस्तिका: कम्प्यूटेशनल सांख्यिकी।नार्थ-हॉलैंड
1991. (आर. चक्रवर्ती के साथ संस्करण)।सांख्यिकी 8 की पुस्तिका: जैविक और चिकित्सा विज्ञान में सांख्यिकीय तरीके।नार्थ-हॉलैंड।
1988. (पी.आर. कृष्णैया के साथ संस्करण)।सांख्यिकी 7 की हैंडबुक: गुणवत्ता नियंत्रण और विश्वसनीयता।
1988. (पी. आर. कृष्णैया के साथ संस्करण)।सांख्यिकी 6 की पुस्तिका: नमूनाकरण।नार्थ-हॉलैंड।
1969. (आर. सी. बोस, आई. एम. चक्रवर्ती के साथ एट अल. संस्करण)।संभावना और सांख्यिकी में निबंध, संभाव्यता और सांख्यिकी में मोनोग्राफ श्रृंखला।नॉर्थ कैरोलाइना यूनिवर्सिटी प्रेस

9.पाठ्यपुस्तकें (Textbooks)-

1970. बॉयोमीट्रिक अनुसंधान में उन्नत सांख्यिकीय तरीके।मैकमिलन

10.एकत्रित कार्य (Collected Works)-

1996. सी. आर. राव 3. (संस्करण) के चयनित पेपर। एस दास गुप्ता एट अल. विले-Interscience
1995. अर्थशास्त्र और मात्रात्मक अर्थशास्त्र में प्रगति, प्रोफेसर सी. आर. राव के सम्मान में निबंध।(संस्करणों।) जी.एस. मडाला, टी. एन. श्रीनिवासन और पीटर सी. बी. फिलिप्स विले-ब्लैकवेल
1994. सी. आर. राव 2. (संस्करण) के चयनित पेपर। एस दास गुप्ता एट अल. विले-Interscience
1994. सी.आर. राव 1. (संस्करण) के चयनित पेपर। एस दास गुप्ता एट अल. विले-Interscience
1982. सांख्यिकी और संभावना: सी. आर. राव के सम्मान में निबंध। (संस्करण)। Kallinapur।एल्सेवियर
उपर्युक्त विवरण के आधार पर आप गणितज्ञ प्रोफेसर सी आर राव (Mathematician Professor C R Rao) के बारे में जान सकते हैं।

11.सीआर राव कब पैदा हुए और मर गए? (When was mathematician professor C R Rao born and died?)-

कलियमपूंदी राधाकृष्‍ण राव का जन्म 10 सितंबर 1920 को दक्षिण भारत के एक छोटे से शहर हुविनाहदगली में हुआ था, जो तब ब्रिटिश भारत के एकीकृत मद्रास प्रांत में था, लेकिन अब यह राज्य कर्नाटक के बेल्लारी जिले में है।

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