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Examinations in Mathematics

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1.गणित में परीक्षाएँ (Examinations in Mathematics):

  • गणित में परीक्षाएँ (Examinations in Mathematics):गणित के सफल शिक्षण के लिए परीक्षाएं परम आवश्यक हैं।शिक्षा के परिणामों की नाप-तोल करने के साथ ही साथ यह विद्यार्थियों को आगे बढ़ने,कठिनाइयों से टक्कर लेने और उन पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देती है।इससे विद्यार्थी यह जान लेते हैं कि उन्होंने किस विषय में कितनी योग्यता प्राप्त कर ली है।किस विशेष स्थान पर उनको कठिनाई है।इस तरह परीक्षा छात्र-छात्राओं के लिए उस मील के पत्थर (Mile Stone) के समान है जो यात्री को उसकी यात्रा में इस बात की सूचना देता रहता है कि उसने अपनी यात्रा का कितना मार्ग तय कर लिया है और कितना मार्ग अभी शेष रहा है।अध्यापक को इससे मालूम पड़ जाता है कि उसकी शिक्षा प्रक्रिया किस सीमा तक सार्थक हुई है।इसके अतिरिक्त अध्यापक परीक्षा द्वारा प्रत्येक बालक की बुद्धि,मनोशक्ति,रुचि,रुझान ,स्तर (Standard) और कार्य का पता लगा लेता है।बालकों के संरक्षक परीक्षाओं द्वारा सहज में ही जान लेते हैं कि उनके बालक कितनी उन्नति कर रहे हैं।शिक्षाशास्त्री भी परीक्षाओं के आधार पर नवीन शिक्षा प्रणालियों की जांच एवं प्रयोग करते हैं।इस प्रकार शिक्षा से संबंधित सभी व्यक्ति परीक्षा द्वारा मार्गदर्शन पाते हैं।

(1.)वर्तमान परीक्षाओं के दोष (Demerits of Current Examinations):

  • वर्तमान परीक्षाएं केवल सर्टिफिकेट या डिप्लोमा के लिए है।उनका उपयोग नौकरी पाने के लिए पासपोर्ट (Passport) के तौर पर है।यह शिक्षा प्रणाली दोषमय है।इसके प्रति शिक्षाशास्त्रियों का विरोध दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।इसमें उपस्थित दोषों को तीन भागों में बांटा जा सकता है।

(i)विद्यार्थियों की दृष्टि से दोष (Demerit View of Students):

  • वर्तमान परीक्षा प्रणाली के दोषों का विद्यार्थियों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है।परीक्षा का बुखार उन पर सदा चढ़ा रहता है।विद्यार्थी अपने जीवन में परीक्षा के अतिरिक्त किसी ओर ध्यान नहीं दे पाते हैं।परीक्षा में सफल होना मात्र ही उनका ध्येय है।प्रश्न पत्र (Examination Papers) भी पाठ्यपुस्तक के सीमित ज्ञान पर ही आधारित होते हैं।इसलिए विद्यार्थी पिछले प्रश्न पत्रों को देखकर और अध्यापकों के सुझाव के अनुसार संभावित प्रश्नों (Important Questions) की सूची तैयार कर लेते हैं।परंतु इस प्रकार की तैयारी में धोखा हो जाता है और एक अच्छा विद्यार्थी फेल हो जाता है । वर्तमान शिक्षा प्रणाली विद्यार्थी के शारीरिक विकास में भी बाधक होती है।
  • परीक्षा के दिनों में विद्यार्थी रात-रातभर जागकर,भूखे रहकर और सारे खेलकूद छोड़कर परीक्षा की तैयारी में लग जाते हैं।इसका परिणाम यह होता है कि बहुत से विद्यार्थी परीक्षा के दिनों में ही बीमार पड़ जाते हैं।इस प्रकार की परीक्षाओं से विद्यार्थी को नकल करने में भी सहायता मिलती है। परीक्षा के निकट आते ही विद्यार्थी प्रश्न-पत्र बनाने वाले और परीक्षकों के पते प्राप्त करने में व्यस्त हो जाते हैं।एक स्थान से दूसरे स्थान पर संभावित प्रश्न (Hints) भेजे जाने लगते हैं।उत्तर पुस्तिकाएं किस परीक्षक के पास जा रही है।इसका पता डिस्पैच क्लर्क से लेकर डाकखाने तक से लगा लेते हैं।फिर परीक्षकों के पास दोस्ती व रिश्ते के द्वारा रोल नंबर पहुंचाए जाते हैं।परीक्षकों से मिन्नतें करतें हैं कि अन्य सभी पर्चे ठीक हो गए हैं, केवल इसी पेपर में खतरा है।यदि इस बार भी फेल हो गया तो जीवन बर्बाद हो जाएगा।इस प्रकार परीक्षा-भवन में नकल,अध्यापकों पर आक्रमण, निरीक्षकों (Invigilators) की हत्या करने का षडयंत्र और परीक्षा केन्द्र से उत्तर-पुस्तिकाओं को लेकर भाग जाने आदि का कलुषित व्यवहार छात्रों में इन परीक्षाओं के द्वारा ही आता है।

(ii)अध्यापकों की दृष्टि से दोष (Demerit View of Teachers):

  • प्रचलित शिक्षा प्रणाली का प्रभाव अध्यापक और शिक्षण विधि पर भी पड़ता है।अध्यापक परीक्षा फल (Result) अच्छा रखने के प्रयत्न में पाठ्य-विषय को भलीभांति समझाने के बजाय उनको संभावित (Expected) प्रश्नों के उत्तर लिखा देते हैं।विद्यार्थी बिना समझे उनको रट लेते हैं।इस प्रकार बालकों के ज्ञान की जाँच नहीं हो पाती है। इसके अतिरिक्त परीक्षाफल को अच्छा करने के लिए कुछ अध्यापक तो नकल कराने पाए गए हैं।

(iii) परीक्षा फल की दृष्टि से दोष (Demerit View of Result):

  • प्रचलित परीक्षा प्रणाली परीक्षाफल पर भी प्रभाव डालती है।इसका कारण यह है कि परीक्षित विषय के अतिरिक्त अन्य बातों का भी प्रभाव पड़ता है।उदाहरणार्थ गणित की उत्तर-पुस्तिकाएं जाँचते समय परीक्षक (Examiner) को केवल गणित के ज्ञान की जांच करनी चाहिए परंतु परीक्षार्थी के भाषा प्रवाह,लिखावट,आकृति की स्वच्छता आदि का भी परीक्षक पर प्रभाव पड़ता है।इसके अतिरिक्त परीक्षक के विचारों और मनोदशा (Mood) का भी प्रभाव पड़ता है।संतोष एवं प्रसन्नता की दशा में जांच की गई उत्तर-पुस्तिका में अंक अधिक मिल जाते हैं परंतु दुख क्लेश अथवा क्रोध की अवस्था में जाँचने पर उसी उत्तर-पुस्तिका में अंक (Marks) कम मिलते हैं।
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(2.)नवीन शिक्षा प्रणाली (New Education System):

  • शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि गणित विषय में परीक्षा तो अवश्य होनी चाहिए परंतु परीक्षा प्रणाली दोष रहित होनी चाहिए।परीक्षा के प्रश्न पत्रों में प्रश्न अधिक संख्या में होने चाहिए।ऐसा करने से बालक के संपूर्ण पाठ्यक्रम के ज्ञान की जांच हो सकेगी। इसके अतिरिक्त रटने के लिए प्रोत्साहन भी न मिलेगा और नकल (Unfair-means) करने की गुंजाइश भी न रहेगी।इन सभी विशेषताओं से संपन्न एक नवीन परीक्षा प्रणाली का प्रयोग कुछ देशों में किया जा रहा है।अपने देश में भी इस प्रकार का प्रश्न पत्र आने लगा है।इस प्रणाली के अनुसार परीक्षा प्रश्न पत्र में प्रश्न तो काफी संख्या में होते हैं परंतु उनका उत्तर रेखांकित चिन्हों या एक या दो शब्दों में दिया जाता है।इस प्रकार के प्रश्नों को वस्तुनिष्ठ (Objective) रूप कहते हैं परंतु गणित की परीक्षा में वस्तुनिष्ठ रूप के अतिरिक्त निबन्धात्मक (Essay Type) तथा लघु उत्तर वाले (Short Answer Type) प्रश्न भी रखे जाते हैं।प्रत्येक प्रश्न का अपना महत्त्व होता है।

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(3.)प्रश्नों के प्रकार (Types Of Question):

  • (i)पूर्ति परीक्षण (Completion Test):
    इस प्रकार की परीक्षा में कोई वाक्य दिया जाता है। इसमें कुछ शब्द छूटे होते हैं।इन शब्दों का स्थान खाली रहता है और विद्यार्थी इन खाली स्थानों को भरता है ;
    जैसे-निम्नलिखित वाक्यों की पूर्ति करो:
  • (1.)त्रिभुज के तीनों कोणों का योग …..होता है।
    (2.)5:10:: …..:30
    (3.)15,30,45,…..
  • (4.) (9a^2-4b^2)=(3a-2b)(……)
  • (ii)बहुनिर्वचन प्रश्नों के रूप (Multiple Choice Test):
    इस प्रकार की परीक्षा में एक प्रश्न पूछा जाता है और उसके साथ कई उत्तर दे दिए जाते हैं।इन उत्तरों में से एक सही उत्तर होता है और सब गलत।सही उत्तर छाँटना पड़ता है;
    जैसे-निम्नलिखित में से सही उत्तर को रेखांकित कर दो:
    (1.)त्रिभुज की तीनों माध्यिकाएँ (Medians) जिस बिन्दु पर मिलती हैं, उसे परिकेन्द्र,गुरुत्वकेन्द्र (Centroid),अन्त:केन्द्र (Incentre) कहते हैं।
    (2.)एक आयताकार मैदान की लंबाई 500मीटर और चौड़ाई 200 मीटर है तो इसका क्षेत्रफल 800,1000,4000,100,000 वर्गमीटर होगा।
    (3.)30,25,29,30 और 16 का औसत 30,25,24,48 है।
    (4.)जिस त्रिभुज की तीनों भुजाएं बराबर होती है उसे समकोण,समबाहु,विषमकोण,समद्विबाहु त्रिभुज कहते हैं।
  • (iii)सत्यासत्य (True and False Test):
    इस प्रकार की परीक्षा में कुछ कथन दे दिए जाते हैं और परीक्षार्थी उन्हें देखकर बताता है कि वह ठीक है अथवा गलत;जैसे:
    (1.)त्रिभुज की दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा के बराबर होता है।
    (2.) 36 a^2-25 b^2=(6a-5b)(6a+5b)
    (3.) (a^2)^3=a^2
    (4.)4 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से 3 वर्ष का 300 रु. का साधारण ब्याज 36 रु. होता है।
  • (iv)मेल परीक्षा (Matching Test):
    इस प्रकार की परीक्षाओं में दो कतारों में अलग-अलग कुछ शब्द दे दिए जाते हैं और ये शब्द इस प्रकार होते हैं कि कतार का प्रत्येक शब्द दूसरी कतार के एक ही शब्द से मेल खाता है।परीक्षार्थी को मेल खाते हुए शब्दों को मिलाना होता है;जैसे:
    निम्नलिखित दी हुई कतारों में से पहली कतार के प्रत्येक शब्द से मेल खाते हुए एक दूसरी कतार के शब्द को छाँटो और पहली कतार के साथ लिखिए:
    (1.)एक चतुर्भुज जिसकी आमने-सामने की भुजाएँ समान्तर होती हैं। (क)63
    (2.)त्रिभुज की तीनों मध्यगत रेखाओं का कटान बिन्दु (ख)15
    (4.)20-5 (ग)गुरुत्वकेन्द्र
    (5.)9×7 (घ)108°
  • (v)पहचान परीक्षा (Recognition Test):
    इस प्रकार की परीक्षा में कोई चित्र बना दिया जाता है और उसके विभिन्न भागों के नाम पूछे जाते हैं;
    जैसे:निम्न चित्र में क,क ब,ब स भागों के नाम लिखो तथा यह भी बताओं कि कोण बकस और कोण बअस में क्या संबंध है?
  • (vi)तर्कयुक्त चयन (Ligical Selection):
    इस प्रकार की परीक्षा में कई वस्तुओं के नाम दिए जाते हैं।उनमें एक के अतिरिक्त शेष सब ऐसी होती हैं जो आपस में मिलती हुई होती हैं।उस अतिरिक्त वस्तु को छाँटकर अलग करना होता है; जैसे:
    निम्नलिखित समूह में से उस शब्द को काट दो जो दो समूह में अतिरिक्त मालूम पड़े।
    (1.)बिन्दु, सरल रेखा,अधिक कोण,चाप (arc),वृत,ब्याज,सम्मुख कोण।
    (2.)आसन्न कोण,सम्मुख कोण,समकोण,वृत्त, पुनर्युक्त कोण,न्यून कोण।
    (3.)2,5,8,11,v,16,17
    (4.)ब्याज,दर,मूलधन, औसत,मिश्रधन,समय आदि।
  • (vii.)निबन्धात्मक प्रश्न (Essay Type Questions):
    इस प्रकार के प्रश्न प्रश्नों का प्रचलन बहुत समय से है।परंतु इनके तैयार करने में प्राप्य,उद्देश्यों को ध्यान में रखना चाहिए।साथ ही भाषा भी स्पष्ट होनी चाहिए।

Examinations in Mathematics

गणित में परीक्षाएँ
(Examinations in Mathematics)

Examinations in Mathematics

गणित में परीक्षाएँ (Examinations in Mathematics):
गणित के सफल शिक्षण के लिए परीक्षाएं परम आवश्यक हैं।
शिक्षा के परिणामों की नाप-तोल करने के साथ ही साथ यह विद्यार्थियों को आगे बढ़ने

2.गणित में परीक्षाएँ (Examinations in Mathematics) के सम्बंध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.प्रश्नों के कितने प्रकार हैं? (How many types questions are?):

उत्तर:सामान्यतः दस प्रकार के प्रश्न होते हैं।पूर्ति परीक्षण (Completion Test),बहु निर्वचन प्रश्नों के रूप (Multiple Choice Question),सत्यासत्य निर्देशन (True and False Test),मेल परीक्षा (Matching Test),पहचान परीक्षा (Recognition Test),तर्क युक्त चयन (Logical Selection),वस्तुनिष्ठ (Objective type),निबंधात्मक प्रश्न (Essay Type Question),छोटे उत्तर वाले प्रश्न (Short Answer Type Question),बुद्धि परीक्षा (Intelligence Test

प्रश्न:2.बहुनिर्वचन प्रश्नों को तैयार करते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए? (What should to keep precautions for multiple choice question?):

उत्तर:(1.)प्रश्नों के उत्तर दिए जाते हैं वे एक दूसरे से बहुत मिलते-जुलते हैं जिससे बालक उनके चुनने में अनुमान का प्रयोग नहीं कर सके।
(2.)व्याकरण की दृष्टि से सब उत्तर एक तरह के हों।
(3.)सही उत्तर लंबाई या छोटा न हो।
(4.)उत्तर ऐसे न हों जिनमें स्मृति परीक्षा हो।

प्रश्न:3.सुधारा हुए सत्यासत्य निर्देशन क्या है? (What is modified true and false?):

उत्तर:सत्यासत्य निर्देशन के उत्तर में अनुमान लगाना सरल है इसलिए अब इस रूप में कुछ परिवर्तन किया गया है।इनके स्थान पर Modified True and False रूप प्रयोग में आता है।इसके अनुसार उत्तर गलत है तो बालक को स्वयं सोचकर सही उत्तर देना होता है।केवल सही या गलत कह देना पर्याप्त नहीं है।

प्रश्न:4.वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को तैयार करने में क्या बातें ध्यान में रखनी चाहिए? (What are things to prepare objective type question?):

उत्तर:प्रश्न तैयार करते समय उनका रूप इतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि बालक के व्यवहार का ज्ञान प्राप्त करना।इसलिए गणित के अध्यापक को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि वह किस बात या गुण की परख करना चाहता है और फिर प्रश्न के रूप को तैयार करें।वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के अपने गुण और दोष होते हैं।

प्रश्न:5.परीक्षाओं का संचालन कैसे करें? (How to operate examinations?):

उत्तर:(1.)प्रश्न पत्र बनाने वालों की नियुक्ति कम से कम एक सार्वजनिक परीक्षा के चालू होने से पर्याप्त समय पूर्व होनी चाहिए और उन्हें प्रश्नों का मसौदा तैयार करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
(2.)प्रश्न-पत्र बनाने वालों को प्रश्नों के साथ हमेशा नमूने के उत्तर भी तैयार करके भेजने चाहिए।
(3.)तैयार किए गए प्रश्न पत्रों की प्रतियां स्कूल और कालेजों के अध्यापकों को परीक्षा वाले दिन,परन्तु परीक्षा की समाप्ति पर उपलब्ध कराई जाए ताकि अध्यापक अधिकारियों को अपनी टिप्पणियां दे सके।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित में परीक्षाएँ (Examinations in Mathematics) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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