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Oral Mathematics

1.मौखिक गणित (Oral Mathematics)-

मौखिक गणित (Oral Mathematics) क्या है? मौखिक गणित (Oral Mathematics) के लाभ तथा मौखिक गणित (Oral Mathematics) का अभ्यास कराते समय ध्यान रखने योग्य बातों का अध्ययन करेंगे।
गणित में मौखिक कार्य अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।खेद का विषय है कि वर्तमान शिक्षा पद्धति में मौखिक गणित तथा मौखिक कार्य को महत्त्वपूर्ण स्थान नहीं दिया गया है। अधिकांश छात्रों के गणित में कमजोर होने का कारण मौखिक गणित  का प्रयोग नहीं किया जाना ही है। शिक्षा संस्थानों में लिखित गणित पर अधिकाधिक बल दिया जाता है तथा मौखिक गणित  को गणित के अध्यापन में गौण स्थान दिया जाता है।इसका फल यह हुआ है कि साधारण गणनाओं को भी छात्र कागज पेन्सिल की सहायता बिना नहीं कर पाते हैं तथा गणित के लिखित कार्य में अनेक साधारण त्रुटियां करते हैं क्योंकि मौखिक गणित (Oral Mathematics) के करने का अभ्यास उन्हें नहीं मिला है।
मौखिक गणित (Oral Mathematics) से हमारा तात्पर्य यह है कि छात्र गणित की साधारण क्रियाओं को मौखिक स्तर पर बिना कागज़,पेन्सिल की सहायता से कर सकें। यहां पर इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि मौखिक गणित (Oral Mathematics) में साधारण प्रक्रियाओं और गणना करने की दक्षता को ही पर्याप्त माना जाता है। जोड़,बाकी, गुणा और भाग की सरल क्रियाओं को सही करना मौखिक गणित (Oral Mathematics) में महत्त्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है।
मौखिक गणित (Oral Mathematics)तथा मानसिक गणित में यह भेद है कि मानसिक गणित में समस्याओं के हलों के चरणों को छात्र मौखिक रूप से करते हैं परन्तु मौखिक गणित (Oral Mathematics) में गणना की साधारण क्रियाओं छात्र मौखिक रूप से करते हैं। मौखिक गणित (Oral Mathematics) मानसिक गणित का महत्त्वपूर्ण भाग है।इन दोनों में अंशों का अन्तर है।
गणित के अध्यापन में मौखिक गणित  का विशेष महत्त्व है।छोटी तथा बड़ी कक्षाओं में छात्रों के लिए यह अत्यन्त आवश्यक है।छोटी श्रेणी के बालकों को मौखिक गणित  करने में आनन्द आता है। गणित में यांत्रिक कुशलता के लिए मौखिक गणित  का अभ्यास अत्यन्त आवश्यक है। मौखिक गणित के अभ्यास के द्वारा छात्र बौद्धिक गणित की ओर अग्रसर किए जा सकते हैं। जीवन के प्रत्येक कदम पर मौखिक गणित  का उपयोग होता है। मौखिक गणित  के बिना दैनिक जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
मौखिक गणित (Oral Mathematics) से गणितीय समस्याओं को शीघ्रता और शुद्धता से हल करने की क्षमता, स्पष्ट चिन्तन,नई परिभाषाओं एवं प्रत्ययों को समझने की योग्यता का विकास होता है।छोटी कक्षाओं में पहाड़ों को याद करना लाभदायक होता है क्योंकि इनसे छात्रों को संख्याओं के सम्बन्धों को समझने के अवसर मिलते हैं।पहाड़ों का पढ़ना संख्याओं के सम्बन्धों को समझने के लिए आवश्यक है पहाड़ों से जोड़ तथा गुणा करने में सहायता मिलती है।
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2.मौखिक गणित का अर्थ (Meaning of oral Mathematics)-

जब अध्यापक छात्रों से मौखिक रूप से किसी प्रश्न का उत्तर निकालने को कहता है तो छात्र मन ही मन गणना कर उत्तर बोलकर बताता है-इस प्रकार से संचालित क्रिया को मौखिक गणित (Oral Mathematics) कहते हैं।कक्षा में अध्यापन करते समय छात्रों को मौखिक गणित (Oral Mathematics) करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए जिससे कि समस्त छात्रों की प्रगति का बोध हो सके । मौखिक गणित  में छात्रों को प्रश्नों के उत्तर बोलना आवश्यक है। मौखिक गणित  में प्रश्न पूछने पर गणना बोलकर की जाती है अथवा गणना का उत्तर बोलकर दिया जाता है।कक्षा में समस्याओं को हल करते समय अध्यापक छात्रों से अनेक प्रश्न पूछकर पदों को श्यामपट्ट पर लिखता है तथा छात्र मौखिक रूप से अध्यापक के प्रश्नों के उत्तर बोलकर देते हैं। गणित में मौखिक समस्याओं को हल करते समय निरन्तर करना आवश्यक है। गणित में गणना-क्रियाओं को परिशुद्धता के साथ करने में मौखिक कार्य अत्यन्त आवश्यक है। छात्रों की कठिनाइयों के निदान में मौखिक कार्य सहायक सिद्ध होता है।

3.मौखिक गणित के लाभ (Benefits of oral Mathematics)-

(1.)मौखिक गणित  से छात्रों में समस्याओं को हल करने के लिए आवश्यक यांत्रिक कुशलता आती है।
(2.)मौखिक गणित  से गणना करने में समय की बचत होती है तथा छात्र अपनी त्रुटियों की जांच कर स्वयं ठीक कर सकते हैं।
(3.)मौखिक गणित  के माध्यम से अध्यापक को छात्रों की प्रगति के बारे में आवश्यक जानकारी निरन्तर मिलती रहती है।
(4.)मौखिक गणित  से छात्रों की वैचारिक शक्ति को गति मिलती है तथा छात्रों का ध्यान आधारभूत सिद्धान्तों की ओर आकर्षित किया जा सकता है।कक्षा में समस्याओं के प्रस्तावित हलों की समीक्षा की जा सकती है।
(5.) गणित के सिद्धान्तों एवं संकल्पनाओं को मौखिक गणित (Oral Mathematics) द्वारा समझकर धारणाओं को स्पष्ट किया जा सकता है।
(6.)छोटी कक्षाओं में विशेषकर मौखिक गणित अत्यन्त गुणकारी है क्योंकि इन कक्षाओं के छात्रों को मौखिक गणित  करने में बड़ा आनन्द आता है।
(7.)मौखिक गणित द्वारा छात्रों की योग्यता की जांच शीघ्रता से की जा सकती है।
(8.)मौखिक गणित  द्वारा छात्रों में विचारशक्ति, तर्कशक्ति तथा विवेक का विकास होता है।
(9.) गणित में मौखिक प्रश्नों द्वारा छात्रों का ध्यान पाठ की विशेषताओं की ओर खींचा जा सकता है।
(10.)मौखिक गणित द्वारा छात्रों के सोचने के तरीकों में हिचकिचाहट, घबराहट या संकोच को दूर किया जा सकता है।
(11.)मौखिक गणित छात्रों को दैनिक जीवन की समस्याओं को हल करने की दक्षता पैदा करती है।
(12.)मौखिक गणित  से छात्रों में गणना-प्रक्रियाओं की परिशुद्धता आती है।
(13.)मौखिक गणित की सहायता से पाठ की पुनरावृत्ति शीघ्रता से की जा सकती है।
(14.) छात्रों के मूल्यांकन के लिए मौखिक गणित का प्रयोग परीक्षा का एक महत्त्वपूर्ण भाग बनाया जा सकता है।
(15.)मौखिक गणित (Oral Mathematics) का प्रयोग गणित के आधारभूत सिद्धान्तों, नियमों आदि के अभ्यास (drill) में अत्यन्त सहायक होता है।
(16.) लिखित गणित करते समय मौखिक गणित (Oral Mathematics) द्वारा अनेक चरणों को शीघ्रता से किया जा सकता है।
(17.) गणित में सामूहिक शिक्षण को प्रभावी बनाने में मौखिक गणित (Oral Mathematics) का उपयोग लाभकारी है।

4.मौखिक गणित का अभ्यास कराते समय ध्यान देने योग्य बातें (Things to keep in mind while practicing oral mathematics)-

(1.)मौखिक गणित (Oral Mathematics) के प्रश्नों में केवल छोटी संख्याओं का ही प्रयोग करना चाहिए।
(2.)प्रश्न छोटे-छोटे होने चाहिए जिससे छात्र उन्हें सरलता से समझ सकें।
(3.)मौखिक प्रश्नों में जटिल गणनाओं को कराने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।
(4.)नवीन सिद्धान्तों तथा प्रत्ययों को पढ़ाते समय मौखिक गणित (Oral Mathematics) का अधिक प्रयोग करना चाहिए।कक्षा के सभी छात्र मौखिक चिन्तन में भागीदार हों।
(5.)मौखिक प्रश्न छात्रों को योग्यतानुसार पूछे जाने चाहिए।
(6.)मौखिक गणित (Oral Mathematics) में अधिक बल अभ्यास तथा गणना पर दिया जाना चाहिए।
(7.)मौखिक प्रश्नों के द्वारा चिन्तन तथा तर्क को प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
(8.)मौखिक गणित (Oral Mathematics) के द्वारा छात्रों में गणितीय सिद्धान्तों के बारे में स्पष्टता प्राप्त हो और उनको रटने की आदत न पड़ें।
(9.) गणित की पुस्तकों में मौखिक प्रश्नों को भी दिया जाना चाहिए।
(10.)मौखिक प्रश्न पूछने के बाद छात्रों को सोचने का अवसर देना चाहिए।
(11.)मौखिक प्रश्नों को पूछने का निश्चित क्रम होना चाहिए।
(12.)मौखिक प्रश्नों का प्रयोग कक्षा को सचेत रखने के लिए किया जाना चाहिए ताकि प्रत्येक छात्र पाठ को समझने के लिए प्रयास करे।
(13.)मौखिक प्रश्नों का सर्वप्रथम सारी कक्षा के समक्ष प्रस्तुत करने के बाद ही किसी एक छात्र को उत्तर देने के लिए कहना चाहिए।
(14.)मौखिक प्रश्न ऐसे होने चाहिए कि छात्र अनुमान लगाकर उत्तर न दे।
(15.)मौखिक प्रश्नों के उत्तर यथासंभव छात्र ही दे,इसका प्रयास करना चाहिए।कमजोर छात्रों के अशुद्ध उत्तरों को तीव्र छात्रों से ठीक कराना भी उपयुक्त होता है।
(16.)मौखिक गणित (Oral Mathematics) के माध्यम से छात्र व्यक्तिगत रूप से दक्षता प्राप्त करने का प्रयत्न करें,यह वांछनीय है।
(17.)चित्र,आकृति,ग्राफ,प्रतिरूप आदि को संदर्भ बनाकर भी मौखिक गणित (Oral Mathematics) के प्रश्नों को आधार बनाया जा सकता है।
(18.)मौखिक गणित (Oral Mathematics) को लिखित गणित का पूरक समझा जाना चाहिए।
(19.)मौखिक गणित (Oral Mathematics) करते समय यदि कोई अस्पष्टता हो तो छात्रों को लिखकर समाधान करने का अभ्यास कराना चाहिए।

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