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Discuss Modernity and Tradition

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1.आधुनिकता और परंपरा का विवेचन करें (Discuss Modernity and Tradition),आधुनिकता और में कैसे चयन करें? (How to Choose Between Modernity and Tradition?):

  • आधुनिकता और परंपरा का विवेचन करें (Discuss Modernity and Tradition)।आमतौर पर आधुनिकता और परंपरा को एक-दूसरे का विरोधी समझा जाता है परंतु व्यापक अर्थ में गहराई से देखें तो ये एक-दूसरे के सहयोगी हैं,विरोधी नहीं।
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2.आधुनिकता क्या है? (What is Modernity?):

  • आधुनिकता को अंग्रेजी में मॉडर्निटी (Modernity) कहते हैं।Modern शब्द की उत्पत्ति लेटिन भाषा के Modo शब्द से हुई है।मोडो (Modo) का शाब्दिक अर्थ है:प्रचलन।अतः वर्तमान में जो कुछ प्रचलन में है वही आधुनिकता है।वर्तमान के प्रचलन को आधुनिकता कहने का यह भी तात्पर्य है कि समाज के सदस्यों ने सांस्कृतिक तथा सामाजिक परिवर्तन को जो वर्तमान में घटित हुआ,स्वीकार कर लिया है,क्योंकि यह परिवर्तन लाभदायक है और वांछनीय भी।इस प्रकार आधुनिकता अच्छाई के अर्थ में स्वीकार किया गया परिवर्तन है।
  • आधुनिकता समाज के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाला परिवर्तन है।आधुनिकता एक सतत प्रयास है,क्योंकि इतिहास एक निश्चित दिशा की ओर बढ़ रहा है।अतः उस दिशा की खोज का सतत् प्रयास करना आधुनिकता है।आधुनिक होने का यह अर्थ नहीं है कि अन्य की अपेक्षा एक विशेष वातावरण में रहा जाए।इसका अभिप्राय एक ऐसे वातावरण मे रहना है जिसका जान-बूझकर उसके (व्यक्ति) समाज ने निर्माण करने अथवा स्वीकार करने का निश्चय किया हो।इसके अतिरिक्त नवीन सम्भावनाओं के बारे में ज्ञान का निरन्तर विस्तार और उसको लागू करने की विधि की जानकारी आधुनिकता का द्योतक है।
  • मानव जीवन को क्या हो रहा है से क्या बनना चाहते हैं कि ओर क्रमिक रूपान्तर सम्भव करने की प्रक्रिया का नाम आधुनिकता है।अर्थात् बहुत सारी सम्भावनाओं में से किसी एक को चुनने की क्षमता,ज्ञान तथा निर्णय सभी आधुनिकता के द्योतक है।आधुनिकता ध्येय नहीं वरन् क्रिया है,अपनाने की नहीं वरन् भाग लेने की वस्तु है।(Modernity is no longer a goal but a process, no longer something to adopt but something to participate in.)
  • आधुनिकता की प्रक्रिया तब उत्पन्न होती है जब कोई संस्कृति,नैतिक,सामाजिक और व्यक्तिगत चुनाव के बारे में जांच और प्रश्न करती है।अर्थात् आधुनिकता मनुष्य के लिए चुनाव की समस्या मुख्य है।आधुनिक होने का अर्थ जीवन के विकल्पों को वरीयतताओं और चुनावों के रूप में देखना है। आधुनिकता और आधुनिकीकरण (Modernity and Modernization):कुछ लोगों ने आधुनिकता और आधुनिकीकरण में भेद किया है।उनकी दृष्टि में आधुनिकता का संप्रत्यय आधुनिकीकरण के प्रत्यय से अधिक व्यापक है।आधुनिकीकरण जहां सभ्यता की ओर संकेत है वहां आधुनिकता संस्कृति को व्यक्त करती है।आधुनिकीकरण में साक्षरता,उच्च स्तर का नगरीकरण,आर्थिक विकास,अधिक आय,जीवन स्तर में उच्चता आदि निहित है।आधुनिकता से एक संस्कृति की ओर संकेत मिलता है जिसमें तार्किकता,बौद्धिकता,स्वतंत्र दृष्टिकोण,धर्मनिरपेक्षता,उदार व मानववादी दृष्टिकोण आदि निहित हैं।
  • इन भेदों से स्पष्ट है कि आधुनिकता जहां आंतरिकता को प्रकट करती है,वहाँ आधुनिकीकरण बाह्यगत मत है।आधुनिकता का (प्रकट) रूप आधुनिकीकरण है।
  • क्या आधुनिकीकरण पश्चिमीकरण है? (Is modernization westernization?):आधुनिकीकरण के पश्चिमीकरण करने के कारणों पर यदि विचार किया जाए तो उनमें से एक यह स्पष्ट कारण ज्ञात होता है कि पश्चिम देशों के उपनिवेश,एशिया,अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के देश रहे हैं तथा इन देशों ने पश्चिमी देशों से उसके प्रशासन में रहने के कारण बहुत कुछ ग्रहण किया।उनके सांस्कृतिक तत्वों को अपनाया उदाहरण के लिए-गैर पश्चिमी देशों ने,पश्चिमी देशों के खान-पान,रहन-सहन,विश्वास,धर्म,तकनीकी शिक्षा,औद्योगीकरण,आर्थिक संगठन,विज्ञान आदि के प्रभावों को ग्रहण किया।
  • दूसरा कारण यह भी है कि पिछड़े हुए देशों ने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति के लिए पश्चिम की व्यवस्था को ही अपनाया।पाश्चात्य देशों के विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञों को अपने देश में आमंत्रित करना तथा अपने यहां के छात्रों को विद्यार्जन के लिए वहां भेजना आदि प्रमाणित करता है कि आधुनिकीकरण पश्चिमीकरण ही है और भी भारत,बर्मा,श्रीलंका,थाईलैंड,नेपाल,क्यूबा,कोरिया,टर्की आदि देशों ने जो प्रगति की उसे आधुनिकीकरण कहते हैं।अतः आधुनिकीकरण पश्चिमीकरण ही है।
  • उपर्युक्त मत की आलोचना (Criticism of the above view):कुछ दार्शनिकों ने आधुनिकरण को मात्र पश्चिमीकरण नहीं स्वीकार किया है।इनके अनुसार आधुनिकीकरण को पश्चिमीकरण कहना गलत और भ्रामक है,क्योंकि दोनों में बहुत अंतर है।पश्चिमीकरण में पश्चिमी देशों की सभ्यता और संस्कृति को अपनाया जाता है तथा पश्चिमीकरण करने वाले देश अपनी परंपरा को छोड़कर पश्चिम की सभ्यता को ग्रहण कर लेते हैं,पर आधुनिकीकरण की प्रक्रिया दूसरी होती है।इसमें देश या समाज में अपने मूल्यों,आदर्शों,प्रथाओं,मान्यताओं एवं भौतिक साधनों में परिवर्तन,परिमार्जन तथा पुनर्व्यस्थापन होता है।अतः आधुनिकीकरण को पश्चिमीकरण करना भ्रामक तथा गलत है।

3.परंपरा क्या है? (What is Tradition?):

  • परंपरा को अंग्रेजी में ‘ट्रेडिशन’ (Tradition) कहते हैं।Tradition की उत्पत्ति Tradere शब्द से हुई है जिसका अर्थ होता है-एक दूसरे को देना।अर्थात् एक-दूसरे को सौंपना या हस्तान्तरित करना।
  • परंपरा से तात्पर्य उन सभी विचारों,आदतों तथा रिवाजों के योग से है जो एक समाज में पाई जाती है जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तान्तरित होती रहती है।
  • परंपरा का एक अन्य अर्थ चिंतनों तथा विश्वासों का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तान्तरण करना है। (By Tradition is meant the transmission of thinking and believing.)
  • कुछ लोगों ने परंपरा को रुढ़ियों के संरक्षण की क्रिया के रूप में माना है।व्यापक अर्थ में इस परिभाषा को बहुत महत्त्व नहीं दिया जा सकता,क्योंकि परंपराएं केवल रूढ़ियाँ नहीं होती।परंपरा को रूढ़ियों का संरक्षण कहना उसे सीमित अर्थ में लेना है।इससे अधिक उपयुक्त तो यह कहना होगा की “परंपरा एक भूला हुआ तथ्य है जिसे लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी ग्रहण करते रहते हैं।” (Tradition is a forgotten fact is handed down to the people from one generation to other generation)।
  • उपर्युक्त परिभाषाओं से यह स्पष्ट होता है कि परंपरा एक अभौतिक सामाजिक विरासत है।जैसे रीति-रिवाज,प्रथा,मूल्य,धर्म,विचार करने का तरीका,स्वीकृतियां,निषेध,नैतिक मान्यताएं,रूढ़ियाँ आदि जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तान्तरित होती रहती है।
    परंपरा की कुछ विशेषताएं इस प्रकार हैं (Some features of the tradition):
  • (1.)परंपरागत वैयक्तिक तथा सामाजिक संरचना का कार्य करती है।
    (2.)परंपराएं सामाजिक मूल्यों का निर्धारण करती हैं।देश की सांस्कृतिक संरचना का ज्ञान परंपरा के आधार पर होता है।
    (3.)समाज का वर्तमान ढांचा तथा सामाजिक व्यवस्था अतीत की परंपराओं पर निर्भर होती है।

4.परंपरा तथा आधुनिकता एक-दूसरे की विरोधी या सहयोगी (Tradition and Modernity are Antagonistic or Collaborative of Each Other):

  • परंपरा या आधुनिकता क्या है? इसका अलग-अलग विवेचन करने के पश्चात दोनों में क्या भेद है? यह प्रकट होकर सामने आ जाता है,जो इस प्रकार है:
  • (1.)परंपराएं सामाजिक विरासत हैं,इसलिए इसका संबंध भूतकाल से है परंतु आधुनिकता का संबंध मात्र वर्तमान से है।
  • (2.)परंपराएं व्यवहार को सरल बनाती हैं।इसके विपरीत आधुनिकता व्यवहार को जटिल बनाती है।
  • (3.)परंपराएं स्वतः प्राप्त होती हैं पर आधुनिकता या तो लादी जाती है या प्रयत्नों के परिणामस्वरूप प्राप्त होती है।
  • (4.)परंपरा रूढ़िवाद को प्रोत्साहित करती है पर आधुनिकता आलोचनात्मक प्रवृत्ति को।
    परंपरा तथा आधुनिकता के संदर्भ में विरोधी मत (Opposing views in the context of tradition and modernity):परंपरा तथा आधुनिकता के संदर्भ में यह एक सामान्य धारणा पाई जाती है कि दोनों में विरोध है।कहा जाता है की परंपरा तथा आधुनिकता का विरोध 18वीं शताब्दी के जागरण काल से ही देखा जाता है।
  • परंपरा को अर्थात् बीते हुए को कोई महत्त्व नहीं दिया है तथा भविष्य को महत्त्व इसलिए दिया कि विकास की आशा और मानव जाति की प्रगति इससे संभव है।
  • आधुनिक दार्शनिकों ने भी परंपरा को अनुपयोगी तथा मूल्यहीन बताया है और कहा है कि यह तो एक प्रकार का कूड़ा-करकट है जिसे इतिहास ने सुरक्षित रखा है।इसकी सामाजिक,आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्र में कोई उपयोगिता नहीं है।इसको नष्ट कर देना ही उपयुक्त है तथा इसके स्थान पर आधुनिकता का स्वागत करना चाहिए।परंपरा को नष्ट किए बिना आधुनिकता नहीं पनप सकती।
  • वास्तव में परंपरा तथा आधुनिकता के विरोध का मुख्य कारण यह है कि दोनों की एकांगी व्याख्या की गई।आधुनिकता को मानने वाले परंपरा को कार्य मानते हैं तथा उसे निरर्थक समझते हैं।इसी प्रकार परंपरा को मानने वाले आधुनिकता को।
  • विरोधी मत का खंडन (Refuting the opposing opinion):यदि ध्यानपूर्वक देखा जाए तो दोनों एक-दूसरे की विरोधी नहीं है क्योंकि:
  • (1.)आधुनिक कहे जाने वाले समाजों में भी परंपरा के तत्व मौजूद हैं।जैसे अमेरिका जैसे आधुनिक समाज में भी परंपरावादी तत्व दिखाई पड़ते हैं।जैसे:जाति,धार्मिक-समुदाय,प्रजाति आदि।
  • (2.)यह कहना कि आधुनिक समाज में परंपरागत तत्व नहीं होते या परंपरागत समाज में आधुनिकता के तत्व नहीं होते दोनों ही गलत है,क्योंकि यह अकाट्य सत्य है कि परिवर्तन अवश्यम्भावी है।प्रत्येक वस्तु,विचार व समाज परिवर्तनों से होकर गुजरता है।और यह भी आवश्यक है कि परिवर्तन में कुछ ही तत्व परिवर्तित होते हैं।इसका निजत्व (निजी तत्व) तो शेष ही रहता है।यदि वह भी न रहे तो वह परिवर्तन नहीं,विनाश की स्थिति होगी।जबकि ऐसा नहीं होता है,अतः परंपरा आधुनिकता की विरोधी नहीं।
  • परंपरा तथा आधुनिकता एक दूसरे की सहयोगी हैं (Tradition and modernity are allies of each other):यह कहना तो सही है कि परंपरागत समाज आधुनिक समाजों का,आर्थिक,सामाजिक,बौद्धिक तथा शैक्षणिक क्षेत्रों में अनुसरण कर रहे हैं,परंतु इसका अर्थ यह नहीं लगाना चाहिए कि परंपरागत समाज,आधुनिक समाज से बिल्कुल भिन्न है और परंपरागत ही बने हुए हैं और आधुनिक समाजों में परंपरा का कोई स्थान नहीं है।दोनों ही एक-दूसरे के सहयोगी हैं।”परंपरागत समाज किसी भी तरह पूरी तरह से परंपरागत नहीं हैं और आधुनिक समाज किसी तरह से परंपरामुक्त नहीं है।
  • अतः परंपरा अतीत और वर्तमान की कड़ी है।परंपरा अनुभवों की धरोहर है।इसके आधार पर ही आधुनिकता की स्थापना संभव है।आधुनिकता निरंतरता के रूप में है।यह प्रक्रिया है,यह सतत चलने वाली क्रिया में है।आधुनिकता कभी न पूरी होने वाली क्रिया है।कोई भी समाज परंपरा को लेते हुए अपने में धीरे-धीरे परिवर्तन अर्जित करता है।
  • निष्कर्ष के रूप में यही कहा जा सकता है कि प्रत्येक आधुनिक समाज में परंपरागत तत्व मौजूद रहते हैं और परंपरागत समाज में भी आधुनिकता के तत्व रहते हैं।अतः आधुनिकता और परंपरा एक-दूसरे के विरोधी नहीं सहयोगी हैं।

5.परंपरावाद के उन्माद का दृष्टांत (An Example of the Frenzy of Tradition):

  • प्राचीन और मध्यकाल में परंपराओं के पालन पर बहुत जोर दिया जाता था,भले ही वह परंपरा गलत हो।एक शिक्षक ने अपने तर्कों,प्रमाणों से यह सिद्ध किया कि पृथ्वी गोल है,चपटी नहीं।चटाई की तरह पृथ्वी चौरस नहीं है।इसी प्रकार उन्होंने कई अन्य परंपराओं का खंडन किया।फलस्वरुप उस समय के धर्मान्ध व्यक्तियों ने अपने धर्मग्रंथ में छपी बातों का खंडन करने के कारण विरोधी हो गए।
  • वे उस शिक्षक को जादूगर कहने लगे।पुरातन पंथियों ने धर्मग्रन्थ के मत को झुठलाने के अपराध में उन्हें जिंदा जला देने का मृत्यु दंड दे दिया।उन्मादी उस शिक्षक की सफाई भी सुनने के लिए तैयार नहीं थे।शिक्षक ने प्राण दे दिए परंतु अपनी विचारधारा नहीं बदली।अंततः आगे चलकर जनसाधारण तथा विद्वानों को उनकी बात स्वीकार करनी ही पड़ी।
  • अपनी अंध परंपराओं के प्रति दुराग्रह की ऐसी दुःखद परिणतियां होती हैं।
  • आर्यभट से पूर्व सभी लोगों की यह मान्यता थी कि चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण के समय राहु-केतु नाम के कोई राक्षस सूर्य और चंद्र को खा जाते हैं।पर आर्यभट ने साफ शब्दों में लिखा कि यह सब झूठी बातें हैं।उन्होंने अपने ग्रंथ में लिखा है कि पृथ्वी की छाया जब चंद्रमा पर पड़ती है तो चंद्रग्रहण होता है और चंद्रमा की छाया जब पृथ्वी पर पड़ती है तो सूर्यग्रहण होता है।
  • महात्मा सुकरात ने पुरातन व सड़ी-गली परंपराओं में परिवर्तन की आवश्यकता प्रतिपादित की,फलतः उनका विरोध बढ़ता गया।उन पर धर्म विरोधी होने का अभियोग चलाया गया और मृत्युदंड मिला।उन्होंने मृत्युदंड सहर्ष स्वीकार कर लिया परंतु अंतिम समय तक सही बातें शिष्यों को बताते रहे।
  • इसी प्रकार महान गणितज्ञा हाईपेटिया अलेक्जेन्ड्रिया में दर्शन और गणित की शिक्षिका थी।उसके विरुद्ध यह अफवाह फैलाई गई कि वह ईसाई धर्म के विश्वासों और परंपराओं के खिलाफ युवाओं को शिक्षा देती हैं।फलतः धर्मान्ध ईसाइयों ने हाइपेटिया को अपनी गाड़ी से खींच लिया गया,उसे पीटा गया और जिंदा ही जला दिया।उपर्युक्त दृष्टान्तों का यह अर्थ नहीं है कि सभी परंपराएँ गलत हैं।
  • परंपराओं को विवेक के आधार परखना चाहिए और जो सही हैं उनका पालन करना चाहिए और जो गलत है उनको छोड़ देना चाहिए,हटा देना चाहिए।प्रगति तभी संभव है।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में आधुनिकता और परंपरा का विवेचन करें (Discuss Modernity and Tradition),आधुनिकता और में कैसे चयन करें? (How to Choose Between Modernity and Tradition?) के बारे में बताया गया है।

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6.गणित का रिपोर्ट कार्ड (हास्य-व्यंग्य) (Mathematics Report Card) (Humour-Satire):

  • पिता (रजनीश से):अरे,आज तो तुम्हारा रिजल्ट आने वाला था,कहां है रिपोर्ट कार्ड? गणित में कितने अंक आए?
  • रजनीश:गणित का रिपोर्ट कार्ड तो मेरा मित्र अपने घर ले गया।वह कह रहा था कि वह गणित के अंकों को दिखाकर अपने माता-पिता को डराना चाहता है।

7.आधुनिकता और परंपरा का विवेचन करें (Frequently Asked Questions Related to Discuss Modernity and Tradition),आधुनिकता और में कैसे चयन करें? (How to Choose Between Modernity and Tradition?) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.उद्योग धन्धों में आधुनिकीकरण को लागू करने में क्या दिक्कत है? (What is the Problem in Implementing Modernization in Industries?):

उत्तर:आधुनिकरण ऐसी प्रक्रिया है जिसमें शामिल होने के लिए अवसर सबको मिलने चाहिए।आमतौर पर विशेषज्ञों की राय होती है कि कुछ कर्मचारी (कामगार) इसके लिए फिट नहीं है क्योंकि वे आधुनिक तकनीक के साथ काम करने में दक्ष नहीं है।उन्हें यह सोचना चाहिए कि उन्हें दक्ष होने का पहले कोई मौका तो दे।बिना किसी मौके के यह नहीं कहा जा सकता कि फलां असमर्थ है।

प्रश्न:2.आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराने में क्या कठिनाई है? (What is the Difficulty in Providing Modern Education?):

उत्तर:आधुनिक शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है तकनीकी शिक्षा तो ओर भी ज्यादा।सवाल है कि क्या सिर्फ एक उच्चवर्ग को ही शिक्षा की सुविधा और माहौल उपलब्ध कराकर सरकार या आधुनिकीकरण के प्रवक्ता कोई जन लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।अगर आधुनिकीकरण की प्रक्रिया और आर्थिक सुधारों को कारगर बनाना है तो सबको शिक्षा मुहैया करानी पड़ेगी।

प्रश्न:3.आधुनिकता से क्या तात्पर्य लिया जाता है? (What Do You Mean by Modernity?):

उत्तर:संपन्न वर्ग के व्यक्तियों से लेकर कॉलेज और स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों तक एक शब्द और उसके तथाकथित दर्शन की आजकल बड़ी चर्चा है।वह शब्द है ‘आधुनिकता’।आधुनिकता के विशेषण से संबोधित व्यक्ति या युवक जो चित्र आंखों के सामने घूमता है वह कुछ इस प्रकार है:’फैशनेबुल लिबास,पुरानी परंपराओं की अवमानना करने वाला स्वतंत्र व्यक्तित्व’।
इसी संदर्भ में यह भी विचारणीय हो जाता है कि आधुनिकता का क्या अर्थ है? आधुनिक कहा जाने वाला व्यक्ति सर्वसामान्य से किन अर्थों में भिन्न है?जीवन के प्रति उसका दृष्टिकोण क्या है? प्राय: ही आधुनिक जीवन-दर्शन के संबंध में जो चर्चा चलती है,उनके निष्कर्षों का सार देखा जाए तो आधुनिकता की कुछ परिभाषा इस प्रकार बनती है:”परंपराओं के नाम पर पुरातन रुढ़ियों में सदियों से चली आ रही जड़ मान्यताओं से और कल्पित आदर्शों से मुक्त दृष्टि तथा जीवन को उन्मुक्तता से जीने की वृत्ति।”
आधुनिकता का अर्थ यदि समय के साथ चलना और परंपराओं का औचित्य और विवेक के आधार पर ही प्रश्रय देना माना जाए तो आधुनिकता से कोई परहेज नहीं किया जाना चाहिए।लेकिन जब तथाकथित आधुनिकता पर दृष्टि से विचार किया जाए तो चिंताजनक प्रश्न उभरता है कि इस दुहाई पर हम विचार किधर जा रहे हैं।नवयुवकों और विद्यार्थियों से लेकर बड़े वयस्क तथा प्रौढ़ व्यक्तियों तक में आधुनिकता के नाम पर जी रीति-नीति को प्रश्रय मिलता है,वह न तो प्रगतिशीलता लगती है और न ही उपयोगी व महत्त्वपूर्ण।आधुनिकता की जो परिभाषा की जाती है वह अलग बात है और उसके नाम नाम पर जो अपनाया जाता है,वह सर्वथा अलग ही प्रतीत होता है।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा आधुनिकता और परंपरा का विवेचन करें (Discuss Modernity and Tradition),आधुनिकता और में कैसे चयन करें? (How to Choose Between Modernity and Tradition?) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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